Gpc/akt/1100/1a
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें सत्र
का दूसरा
दिवस संख्या 2
बुधवार,
01
मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान सभा
भवन, जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री अध्यक्ष:
बारहवीं
विधान सभा के
इस पांचवें
सत्र में मैं
आप सबका स्वागत
करती हूं और
उम्मीद करती
हूं कि आप
सार्थक बहस करेंगे
और हो-हल्ला
नहीं करेंगे। श्री
बहादुर सिंह
गोदारा।
तारांकित
प्रश्नोत्तर
वाहन
संचालन
क्षमता में
सुधार हेतु
कार्य-योजना
1. श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
क्या
यातायात
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
सरकार वाहन
चालकों/परिचालकों
की कार्यकुशलता
में वृद्धि
हेतु
प्रशिक्षण
एवं योग्यता
निर्धारित
करने का विचार
रखती है? यदि
हां, तो क्या,
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
(2) क्या
सरकार उन
यात्री वाहन
जो 50 प्रतिशत
से अधिक नाकारा
हो चुके हैं
एवं
निर्धारित
मानदण्डानुसार
नहीं हैं तथा
प्रदूषण
फैलाते हैं,
को सुधारने/बदलने
का विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
यातायात
मंत्री (श्री
यूनुस खान): (1) चालकों/परिचालकों
को लाइसेंस
दिये जाने के
संबंध में
केन्द्र
सरकार ने नियम
बनाये हुए हैं
जिनके तहत वाहन
चालक/परिचालकों
को लाइसेंस
हेतु पाठ्यक्रम
और योग्यता
निर्धारित की
हुई है। निजी
वाहन चलाने हेतु
आवेदक की आयु 18
वर्ष, 50 सीसी. से
कम क्षमता
वाली वाहन
चलाने हेतु 16
वर्ष एवं
परिवहन यान
चलाने हेतु 20
वर्ष की आयु
होनी आवश्यक
है। उक्त
योग्यता
वाला व्यक्ति
लर्नर्स
लाइसेंस
प्राप्त
करने का पात्र
है। चालक
लाइसेंस के
लिए आवेदक को
परीक्षण टेस्ट
देना होता है
एवं परिवहन
यान के मामलों
में लर्निंग
लाइसेंस से पूर्व
राज्य सरकार
द्वारा
अधिकृत
ड्राइविंग स्कूल
से ड्राइविंग
प्रमाण पत्र
प्राप्त
करना होता है।
केन्द्रीय
मोटर वाहन
नियम, 1989 के नियम
31 के अंतर्गत ड्राइविंग
स्कूलों या
संस्थानों
के मोटर यानों
के चालकों को
अनुदेश देने
के लिए पाठ्यक्रम
निर्धारित
किया हुआ है।
परिचालक
लाइसेंस
प्राप्त
करने के लिए
आवेदक को
आवेदन
प्रारूप
आर.एस. 31 में
प्रस्तुत
करना होता है
जिसके साथ
चिकित्सकीय
प्रमाण-पत्र,
प्ररूप आर.एस. 3.9
में सेंट जान एम्बुलेंस
एसोसिएशन आफ
इंडिया
द्वारा जारी
विधिमान्य
प्राथमिक
सहायता
प्रमाण-पत्र
होना आवश्यक
है। प्रार्थी
की आयु 18 वर्ष
से कम नहीं
होनी चाहिए
तथा उसकी
शैक्षणिक
योग्यता
दसवीं कक्षा
या उसके
समकक्ष या उच्चतर
परीक्षा उत्तीर्ण
होना आवश्यक
है और उसे
परिचालक के
रूप में कार्य
करने के लिए
उस क्षेत्र की
भाषा या
भाषाओं का
सामान्य
ज्ञान होना
चाहिए। चालक/परिचालक
के लिए पृथक
से कोई योग्यता
और प्रशिक्षण
कार्यक्रम
निर्धारित
करने का राज्य
सरकार का
क्षेत्राधिकार
नहीं है। वह
केवल केन्द्र
सरकार द्वारा
विनिर्मित
नियमों के अन्तर्गत
वाहन चालक व
परिचालक को
ड्राइविंग
लाइसेंस जारी
करने का कार्य
करती है। राज्य पथ
परिवहन निगम
के
चालकों/परिचालकों
को पेट्रोलियम
कन्जर्वेशन
रिसर्च
एसोसिएशन के
समन्वयन में
अजमेर, जयपुर,
जोधपुर एवं
बीकानेर केन्द्रों
पर प्रशिक्षण
दिया जा रहा
है। इसके अतिरिक्त
केन्द्रीय
कार्यशाला
अजमेर केन्द्र
पर भी चालकों
को प्रशिक्षण
दिया जा रहा
है।
(2) 50
प्रतिशत से
अधिक नाकारा
हो चुकी,
प्रदूषण फैलाने
वाली
निर्धारित
मानदण्ड
रहित वाहनों
के
सुधारने/बदलने
जैसे विषय पर
अलग से कोई
कार्ययोजना
विभाग के
विचाराधीन
नहीं है,
तथापि मोटर
वाहन अधिनियम,
1988 की धारा 56 के
अंतर्गत
वाहनों को
फिटनेस प्रमाण-पत्र
जारी किये
जाने का
प्रावधान है।
जो परिवहन
वाहन इन
प्रावधानों
के अंतर्गत
निर्धारित मानदण्डों
की अनुपालना
नहीं करते हैं
उन्हें
विभाग द्वारा फिटनेस
प्रमाण-पत्र
जारी नहीं
किया जाता है।
वाहनजनित
प्रदूषण को
नियंत्रित
करने एवं
प्रदूषण जांच
केन्द्रों
को प्राधिकृत
करने एवं उनके
कार्यसंचालन
की प्रक्रिया
निर्धारित
करने हेतु
राज्य सरकार
ने मोटरयान
प्रदूषण जांच
स्कीम, 2005 बनाई
हुई है। इस
परिप्रेक्ष्य
में विभाग
द्वारा 410
प्रदूषण जांच
केन्द्रों
को प्राधिकृत
किया हुआ है।
ये प्रदूषण
जांच केन्द्र
वाहनों के
प्रदूषण स्तर
की जांच करके
उन्हें
प्रदूषण
नियंत्रण
प्रमाण-पत्र
जारी करते
हैं। विभाग
में 20 पाल्यूशन
फ्लाइंग स्क्वैड
कार्यरत है।
विभाग के सभी
उड़नदस्ते
वाहनों के
प्रदूषण
नियंत्रण
प्रमाण-पत्रों
की नियमित जांच
करते हैं। अपने
वाहनों को
नाकारा घोषित
करने हेतु
राजस्थान
राज्य पथ
परिवहन निगम
के अपने
मानदण्ड
निर्धारित
हैं जिनके
अनुसार 6.00 लाख
किलोमीटर
अथवा 7 वर्ष
में जो भी
पहले जो उसके
आधार पर निगम
की पुरानी
वाहनों को
नाकारा घोषित
कर दिया जाता
है तथा वाहनों
की नियमित
मेंटीनेंस/पीरियोडिकल
निर्धारित प्रक्रियानुसार
आगार
कार्यशाला
एवं केन्द्रीय
कार्यशालाओं
में की जाती
है जिसमें वाहनों
के प्रदूषण
नियंत्रण/डीजल
औसत का विशेष
ध्यान रखा
जाता है।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा: क्या
माननीय
मंत्रीजी यह
बतलाने की
कृपा करेंगे
कि आपने जो
लाइसेंस जारी
करने के
मापदण्ड तय
कर रखे हैं
उसके अनुसार
आपके विभाग
में लाइसेंस
एजेंटों के
मार्फत् जारी
किये जाते हैं
और गलत और गैर
जिम्मेदार
लोगों को
लाइसेंस दे
दिये जाते हैं।
उसके लिए फीस
थोड़ी ज्यादा
वसूल कर ली
जाती है। यह
सरेआम हो रहा
है। इसको
रोकने के लिए
आप क्या उपाय
कर रहे हैं?
समाज के
निर्दोष
लोगों की, हजारों
लोगों की
जानें सालाना
आपके इस डिपार्टमेंट
की लापरवाही
की वजह से
जाती है उसे
रोकने के लिए
आप क्या उपाय
कर रहे हैं?
श्री
यूनुस खान:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, परिवहन
विभाग में
कानून में ऐसा
कोई प्रावधान
नहीं है
जिसमें एजेंट
रखे जाएं।
जहां तक
एजेंटों के
माध्यम से
लाइसेंस
बनाने की
प्रक्रिया है,
कुछ अनपढ़ लोग
किसी व्यक्ति
विशेष से अपना
लाइसेंस
बनाने के लिए
उनसे फार्म
वगैरह फिलअप
करवाते हैं,
बाकी यहां इस
तरीके का
प्रावधान
नहीं है। जहां तक लाइसेंस
जिन
ड्राइवर्स को
हम देते हैं
उनके द्वारा
दुर्घटना पर
पिछले एक साल
से हमने रोक
लगाने के लिए
विशेष रूप से
अभियान चलाया
हुआ है और
हमारे
ड्राइवरों को
प्रशिक्षित
करने के लिए
अलग-अलग
एन.जी.ओज. के
माध्यम से हम
प्रशिक्षण
शिविर दे रहे
हैं और पिछले
साल की तुलना
में इस साल
दुर्घटनाओं
में कमी आई
है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से एक
प्रश्न
पूछना
चाहूंगा, क्या
माननीय
मंत्रीजी यह
बताने की कृपा
करेंगे, क्या
यह सही है कि
आपके सारे
जिला परिवहन
कार्यालयों
में एजेंट
बैठते हैं? आप
आज ही जाकर
चैकिंग कर
लें। इसलिए सरकार
‘इस
बात की
जानकारी नहीं
है,’
यह कहकर
निपटाना
चाहती है या
इस बारे में
दुरुस्ती
करना चाहती
है? माननीय
मंत्रीजी, जब
आप निकलते हैं...
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: माइक
ठीक नहीं है ।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माइक
गूंज रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
आपके कान गूंज
रहे हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: माइक
गूंज रहे हैं,
अध्यक्षजी।
श्री
रामनारायण
मीणा: माननीय
मंत्रीजी, ऐसे
वाहन, आपकी
रोडवेज की बात
नहीं करता,
सरकारी संस्था
है, लेकिन जीप
हो, दूसरे
वाहन हों, आप
चलते हों तो
आपको यह लगता
है या तो मैं
पीछे रह जाऊं
या इसके आगे
निकल जाऊं। प्रदूषण
की वजह से आप
चल नहीं सकते।
इसलिए विशेषकर
ग्रामीण
क्षेत्र में
बसें जिस तरह
से चलती हैं
आम नागरिक को,
यात्रियों को
असुविधा होती
है। ये दोनों
बातें आप जांच
कर लें और
जांच करने की
आवश्यकता
नहीं है,
मंत्रीजी को
मालूम है
कौनसा परिवहन
कार्यालय है
जो एजेंटों से
मुक्त है ।
श्री
यूनुस खान:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, नैनवां
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो बात
उठायी है, मैं
यह कह सकता
हूं परिवहन
कार्यालय में
किसी प्रकार
के एजेंट नहीं
बैठते हैं।
चूंकि परिवहन
कार्यालयों के
बाहर इस तरीके
का काम लोग
अनधिकृत
तरीके से कर
रहे हैं उसके
लिए मैंने एक
तीन सदस्यीय
कमेटी बनायी
हुई है उसके
तहत अगर कानून
के दायरे में
रहकर किसी
डिप्लोमाधारी
या लॉ किया
हुआ लॉ
ग्रेजुएट का
हम इस तरीके
का कोई
लाइसेंस दे
सकते हैं जिस
तरीके से
कोर्ट में लोग
प्रेक्टिस कर
रहे हैं उसके
लिए तीन सदस्यीय
जांच कमेटी
बिठायी हुई
है, कानून के
दायरे में अगर
इस तरीके का
कोई प्रावधान
आया तो निश्चित
रूप से सरकार
कार्यवाही
करेगी। जहां
तक प्रदूषण
फैलाने वाले
वाहनों की बात
है हमारे पास
डीजल के लगभग 187
प्रदूषण जांच
केन्द्र हैं
और पेट्रोल के
223, लगभग 410 इस
तरीके के
प्रदूषण केन्द्र
काम कर रहे
हैं । वैसे ही
जिला मुख्यालय
पर काम करने
वाले प्रदूषण
जांच दल ग्रामीण
क्षेत्र में
जो व्हीकल
चलते हैं उनकी
जांच करते हैं
और उनकी जांच
कराना छह
महीने में
अनिवार्य है।
छह महीने के
अंदर अगर वह
जांच नहीं
करवाते हैं तो
उसके खिलाफ
कार्यवाही की
जाती है।
श्री अध्यक्ष:
श्री हरिमोहन
शर्मा। (व्यवधान)
नेता
प्रतिपक्ष
कोई सवाल
थोड़े ही पूछते
हैं। (व्यवधान)
नेता
प्रतिपक्ष
सवाल नहीं
पूछा करते।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मंत्रीजी यह
कह रहे हैं
परिवहन
कार्यालय के
बाहर अवैध रूप
से लोग बैठते
हैं। तो क्या
उनको सरकार
नहीं रोक
सकती?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि माह
जनवरी, 2006 व
फरवरी, 2006 में
डीलक्स बसें
और सेमी डीलक्स
बसों का चुपचाप
किराया
बढ़ाने का
निर्णय आपने
लिया है छह
पैसे प्रति
किलोमीटर ?
श्री अध्यक्ष:
अलग से प्रश्न।
अलग से प्रश्न
है। नो, नो । (व्यवधान)
आप लोग बीच
में क्यों
खड़े हो गये ?
क्या आवश्यकता
है आपके खड़े
होने की ?
माननीय सदस्य,
आपका प्रश्न
अलग से है ।
किराये का
प्रश्न अलग
से है। आप बाद
में दूसरे
प्रश्न के
रूप में पूछ
लें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, चुपचाप
छह पैसे प्रति
किलोमीटर किराया
बढ़ा दिया और
उससे हुआ क्या ?
श्री अध्यक्ष:
यह अलग से
प्रश्न है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: उससे
क्या हुआ कि
प्राइवेट ओनर्स
की जो डीलक्स
बसें कोटा,
बूंदी, जयपुर
तक चलती हैं
वह 100 रुपये में
कोटा ले जाती
है। पहले 120 में
ये भी ले जाती थीं
और अब वे 140 लेते
हैं तो उसमें
कोई नहीं बैठता।
आपने बिना
डीजल, पेट्रोल
की वृद्धि हुए
सन् 2006 में किस
आधार पर
किराया
बढ़ाया? आपके
डिपो लगातार
प्रोफिट में
हैं। (व्यवधान)
mlb/akt/1110/1b/1.3.2006
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा(हिण्डौली):
इसके बाद भी
आपने क्यों
किराया
बढ़ाया ?
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
सवाल तो था
प्रदूषण का,
सवाल था योग्यता
का, आप ले गये
किराये पर उसे
।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट साहब,
माननीय
मंत्री महोदय
ने बताया कि 50
प्रतिशत
खटारा वाहन
हैं जिनकी हम
फिटनैस कराते
हैं और फिटनैस
से जो सही
वाहन होते हैं
उनको हम सड़क
पर चलने देते
हैं । माननीय
मंत्री महोदय यह बताएं कि
राजस्थान
परिवहन में
जितनी बसें
हैं जिनको
कंडम करके और
कबाडि़यों को
आप बेचते हैं,
विद रजिस्ट्रेशन
आप बेचते हैं
उनमें ऐसे
कितने रजिस्ट्रेशन
हैं जो राजस्थान
में सन् 1960 की
मॉडल की
गाडि़यों पर
ठप्पे लगकर
और वह वाहन
रोडवेज के नाम
पर चल रहे हैं और
सारी प्रदूषण
की व्यवस्था
खराब करा रखी
है पूरे राजस्थान
की, ऐसे कितने वाहन
हैं आपके जो
फिटनैस पर ठप्पे
लगते हैं उनके
चेचिस कौन से
हैं, इंजन कौन
से हैं, मॉडल
कौन से हैं,
बॉडी कौन सी
है और वे वाहन
आपकी सड़कों
पर दौड़ रहे
हैं और वह
प्रदूषण फैला
रहे हैं और आप
फिटनैस किस बेस
पर कर रहे हैं,
फिटनैस खाली
आप चेचिस से
कर रहे हैं, क्या
कर रहे हैं ?
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं,
जवाब अब हो
रहा है, आने
दीजिए जवाब ।
डॉ. चन्द्रशेखर
बैद(तारानगर):
जवाब दो,
मंत्री जी।
श्री अध्यक्ष:
Do you want to give any
reply?
श्री
युनूस खान: यह
अलग से आपने
प्रश्न पूछा
है तो आपको
अलग से
इंफार्मेशन
भेज दी जाएगी।(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आप यह
तो बताइये कि
किराया बढ़ाया
कि नहीं
बढ़ाया आपने।
श्री
अध्यक्ष :
श्री नन्दलाल
पूनिया जी।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा(जयपुर
ग्रामीण):
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न
पूरा नहीं
हुआ, मैं उसके
पहले एक प्रश्न
पूछना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: यह
देखना मेरा
काम है कि
पूरा हुआ कि
नहीं हुआ।
राजगढ़
(चूरू) में स्थानीय
विधायक कोष से
स्वीकृत
कार्य
2. श्री
नन्दलाल
पूनिया(सादुलपुर):
क्या
ग्रामीण
विकास मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1)
गत 8 वर्षों
में पंचायत
समिति राजगढ़
(चूरू) में स्थानीय
विधायक विकास
कोष से कितने
कार्य स्वीकृत
किये गये ? सूची
सदन की मेज पर
रखें।
(2)
उक्त
कार्यों में
से कितने
कार्य पूर्ण
हो गये तथा
कितने अपूर्ण
हैं तथा कितने
प्रारंभ नहीं
हुए ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
(3)
उक्त
कार्यों के
अपूर्ण एवं
प्रारम्भ
नहीं होने के
क्या कारण
रहे ?
(4)
क्या सरकार
अपूर्ण एवं
प्रारम्भ
नहीं हुए
कार्यों को
पूर्ण कराने
का विचार रखती
है ?
(5)
क्या सरकार
जिन
अधिकारियों
की लापरवाही
के कारण कार्य
सम्पन्न
नहीं हुए उनके
विरुद्ध
कार्यवाही
करने का विचार
रखती है ? यदि
हां, तो क्या
व नहीं तो क्यों
?
ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री (श्री
कालूलाल
गुर्जर): (1) जिला
परिषद् चूरू
से प्राप्त
सूचनाओं के
अनुसार गत 8
वर्षों में
पंचायत समिति
राजगढ़ (चूरू)
में विधायक
कोष से कुल 682
कार्य स्वीकृत
किये गये हैं
जिसमें 596
कार्य विधान
सभा क्षेत्र
राजगढ़ के तथा
86 कार्य विधान
सभा तारानगर
के हैं। सूची
संलग्न
क्रमश:
परिशिष्ठ- ‘अ’ एवं ‘ब’ पर उपलब्ध
हैं।
(2)
उक्त स्वीकृत
कार्यों में
से 664 कार्य
पूर्ण हो गये
हैं तथा 17
कार्य अपूर्ण
एवं 1 कार्य
निरस्त किया
गया है। विवरण
परिशिष्ठ-‘स’ पर उपलब्ध
हैं।
(3)
उक्त 17 कार्य
के अपूर्ण
रहने के कारण।
परिशिष्ठ ‘स’ पर
अंकितानुसार
है !
(4)
जी हां।
(5)
जी हां। कार्य
समय पर सम्पन्न
नहीं होने के
लिए जिम्मेदार
अधिकारियों
के विरूद्ध
जांच करने के
निर्देश जारी
किये हैं।
श्री
नन्दलाल
पूनिया: अध्यक्ष
महोदय, आज जो
झूठ का
पुलिंदा मुझे
दिया गया है,
मुझे यह दिख
रहा है।
एक
माननीय सदस्य:
झूठ असंसदीय
है।
श्री
नन्दलाल
पूनिया: झूठ
और असत्य एक
ही बात है।
एक
माननीय सदस्य:
असत्य कह दो आप।
श्री नन्दलाल पूनिया: असत्य का जो पुलिंदा पेश किया गया है, यह बहुत ही इनका जो जवाब है उससे बहुत दूर है, परसों ही मेरे को एक दिया गया था, पंचायत समिति की तरफ से कहा कि आपके ये काम अधूरे हैं जिनमें 8 काम अधूरे बताये हैं और उन अधूरे कार्यों को पंचायत समिति के ग्राम सेवक ने जो लिखकर दिया है आपके विकास अधिकारी को उसकी फोटो कॉपी मेरे पास है लेकिन आज उन कामों का इस पुलिंदे में कोई विवरण नहीं है, कोई विवरण नहीं है और जो अधूरे काम बिजली के है, जो इन्होंने पीछे 2004 में
लिस्ट पेश की
थी और वह जो काम
है 7 काम उनका
भी इसमें कोई
विवरण नहीं
है। मैं अध्यक्ष
महोदय, आपको
याद दिलाऊं
फर्स्ट कि
मैंने इस 12वीं
विधान सभा के
प्रथम बजट सत्र
में एक मुद्दा
उठाया था और
आपने माननीय
तिवाड़ी जी को
यह कहा था कि
ऐसा मामला है
तो आप इन कामों
को दिखाएं ।
मैंने पिछली
बार भी इस काम
को लेकर विधान
सभा में धरना
दिया था और
माननीय
सार्वजनिक निर्माण
मंत्री जी ने
मुझे धरने पर
से उठाया था
और यह आश्वासन
दिया था कि
आपके काम अतिशीघ्र
हो जाएंगे। आज
बहुत ताज्जुब
की बात है कि 2003
के काम आज तक
पूरे नहीं हुए
और इनके ही
हिसाब में
कहीं है ही
नहीं रिकार्ड
में तो मैं
समझता हूं कि
यह क्या है ? पंचायती
राज एक ढकोसला
है, इससे तो
कंजूस का गल्ला
ही अच्छा है
जिसमें पैसे
का हिसाब तो
मिल जाता है।
कोई हिसाब
नहीं है,
पंचायत समिति
कुछ कह रही है, आपका
विभाग, हमारे
मंत्री जी कुछ
कह रहे हैं, बड़े
ताज्जुब की
बात है, बड़े
शर्म की बात
है, मैं तो यह
कहता हूं आज
बहुत असत्य
है, मैं तो
कहता हूं
मंत्री जी के
खिलाफ या तो यह
जवाब दे रहे
हैं अधूरे काम
पूरे कर दिये
उन्होंने या
तो मैं इस्तीफा
देता हूं या
मंत्री जी इस्तीफा
दें। बिजली के
काम दिख रहे
हैं रिकार्ड पर
नहीं हैं,
पिछली बार
जवाब दिया था
कि हम यह पूरे
कर देंगे, आज
उनका कोई
रिकार्ड नहीं
है, कहीं कहीं
खम्भे पड़े
हैं उनमें,
रोजाना बिजली
बोर्ड जाता हूं,
रोकर वापस आ
जाता हूं, आज
तीन साल हो
गये मुझे।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिए, भाषण
क्यों दे रहे
हैं ?
श्री
कैलाश
त्रिवेदी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय यह
बताएं कि
माननीय सदस्य
को कार्य....
श्री
कालूलाल
गुर्जर: मूल
प्रश्नकर्ता
का तो जवाब दे
दूं।
श्री
कैलाश त्रिवेदी:
इसके साथ ही
आप दे दें,
दोनों दे दें।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: आप विराजिए,
आपसे पहले मूल
प्रश्नकर्ता
के जवाब देने
हैं।
श्री
अध्यक्ष: यदि
प्रश्न के
उत्तर से आप
संतुष्ट
नहीं हैं तो
नियमों में
आइए, उसके और
भी प्रावधान
हैं।
श्री
नन्दलाल
पूनिया: मैं
मंत्री जी से
पूछना चाहता
हूं क्या
विभाग ने...
श्री
अध्यक्ष:
भाषण तो दे
दिया, अब क्या
पूछना चाहते
हैं आप ?
श्री
नन्दलाल
पूनिया: क्या
विभाग ने
एम.एल.ए. लैड से
स्वीकृत
कार्य करने
एवं पूर्ण
करने की कोई
सीमा तय कर
रखी है ? यदि
हां, तो क्या
और नहीं तो क्यों
? क्या 2003 में
अपूर्ण
कार्यों को
पूर्ण कराने
की किसकी जिम्मेदारी
है बताएं ? क्या
पूर्ण कराने
का विचार रखती
है सरकार ? क्या
आपने अब तक
जिन
अधिकारियों
की जिम्मेदार थी उनके
खिलाफ कोई
कार्यवाही की
है और नहीं की
है तो क्यों
नहीं की, जवाब
दें ?
श्री
कालूलाल
गुर्जर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने
जैसा कहा
उसमें काफी
सत्यता है और
मैंने स्वयं
ने जवाब में
भी लिखा है ।
अध्यक्ष
महोदय, आपने
अभी जो एक ऊल-जुलूल
आरोप लगाया कि
पंचायत समिति
में इतने काम
पैंडिंग हैं
और झूठी जो
सूचना दी है।
श्री
नन्दलाल
पूनिया: ऊल-जुलूल
क्या होता है
?
श्री
कालूलाल
गुर्जर: जिसका
कोई बेस नहीं
हो।
श्री
नन्दलाल पूनिया:
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
पूरा बेस
रिकार्ड पर
आधारित है।
श्री
अध्यक्ष: ऊल-जुलूल
का मतलब होता
है
बेबुनियाद।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: ऊल-जुलूल
का मतलब
बेबुनियाद,
बेबुनियाद
संसदीय शब्द
है।
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय ने यह
मान लिया कि सदस्य
का आरोप सही
है । मंत्री
महोदय ने यह
कहा है कि
सदस्य का जो
आरोप है उनसे
मैं सहमत हूं
तो फिर ऊल-जुलूल
कहां रह गया ?
श्री
संयम लोढ़ा:
फिर क्या
मतलब है ?
श्री
अमराराम(धोद):
आरोपों से तो
सहमत हैं और ऊल-जुलूल
की बात करते
हैं।
श्री
कालूलाल गुर्जर:
आप सुनिए अमराराम
जी, आप विराजिए,
आप सुन लेंगे
तो आपकी समझ
में आ
जाएगा।
अध्यक्ष
महोदय, कुल
मिलाकर जितने
कार्य स्वीकृत
हुए उनमें
पंचायत समिति
में 368 कार्य स्वीकृत
हुए थे और 368
पूर्ण हो गये
हैं । माननीय
सदस्य को मैं
कहता हूं कि
अगर बाकी हैं
और मेरे को सूचना
देते हैं तो
आपके पास जो
भी रिकार्ड आप
दे दें तो मैं
सारी जांच
कराऊंगा और
गलत सूचना
देने वाले
अधिकारी को
कतई नहीं बख्शा
जाएगा, उसके
खिलाफ कठोर
कार्यवाही
करूंगा। एक
मिनट, अध्यक्ष
महोदय, मैं
पहले पूरा
जवाब दे दूं।
अध्यक्ष
महोदय, उसके
बाद नम्बर
दो...
श्री
अध्यक्ष:
उनका पूरा
जवाब सुन लें।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय, जो
आपने अनुशंसा
की उसके
अनुसार जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
विभाग में 158
कार्य आपने स्वीकृत
करवाए, उसमें
से 155 पूरे हो
गये और 3 कार्य
अपूर्ण हैं।
इसी तरह से,
सार्वजनिक
निर्माण विभाग
में 11 आपने
अनुशंसा की, 10
पूरे हो गये
एक बाकी है, नगरपालिका
में 92 आपने
दिये उसमें से
90 पूरे हो गये
और 2 बाकी हैं
और विद्युत
विभाग में 52
में 40 दिए, 11 बाकी
हैं। इस तरह
से कुल 17 कार्य
अपूर्ण हैं और
एक कार्य आपका
निरस्त हो
चुका है। अध्यक्ष
महोदय, मैं निवेदन
करना चाहता
हूं आपने पूछा
कि किस कारण से
यह जो बाकी
रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, निरस्त
इन्होंने
खुद ने किया
या वहां उन्होंने
कर दिया है,
इसका भी जवाब
दीजिएगा।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: मैं
बता रहा हूं,
अध्यक्ष
महोदय, उसके
मेरे पास
ऑर्डर भी हैं।
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
जो पूछा है
अभी कि कब इन्होंने
अनुशंसा की और
कब उसकी स्वीकृति
जारी हुई और
कब उसको पूरा
होना था। उसके
लिए मैं बता
रहा हूं, अध्यक्ष
महोदय, कि
जितने इनके
कार्य थे
उसमें से काफी
कार्य सन् 2003 के
हैं जो बिजली
विभाग के कार्य
हैं और एक कार्य
2005 का है जो जून,2005
में पूरा होना
था, एक 19.3 को इन्होंने
दिया और जून,2005
को पूरा होना
था, एक मई, 2005 में
पूरा होना था
और एक 30.6.2003 में
पूरा होना था ।
इसी तरह से 2004 के
भी तीन चार
कार्य हैं जो 2004
में पूरे होने
थे।
skp/akt/1120/1c
लेकिन
वास्तव में
विद्युत
विभाग के
जितने कार्य
हैं उनको 12
महीने से ज्यादा
का समय हो गया
और पूरे नहीं
किये गये....
श्री नन्दलाल
पूनियां: तीन
साल हो गये।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य
द्वारा प्रश्न
पूछने पर हमको
जानकारी हुई।
चूंकि इम्प्लीमेंट
करने वाली
एजेंसी अन्य
विभाग है,
हमारा विभाग
स्वीकृति
करके स्वीकृति
भेजता है और
लैटर भी लिखता
है कि आप इस कार्य
को समय पर सम्पादित
करें लेकिन
जिस विभाग ने
नहीं किया उसके
लिए मैंने
जवाब में लिखा
है कि कलेक्टर
को हमने लैटर
लिखा है कि किन-किन
विभाग के
अधिकारियों
की गलती से ये
काम समय पर
नहीं हुए और
उनके खिलाफ
में हम एक्शन
ले रहे हैं।
हमने स्वयं
ने लिखा है।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
समझता हूं कि
इसके बाद तो
आपको इतना
कहने की आवश्यकता
नहीं है, हमने
खुद ने लिखा
है कि जो-जो
दोषी हैं हम
उनको निश्चित
रूप से बख्शेंगे
नहीं, उनको
सजा देंगे।
उसकी जांच के
लिए मैंने
कलेक्टर को
पत्र लिख दिया
है और जिन-जिन
का जितना दोष
बनता है उसकी
रिपोर्ट आने
पर कार्यवाही
कर दूंगा।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, मेरी
पंचायत समिति मारवाड़
जंक्शन की....
श्री अध्यक्ष:
श्री
प्रद्युम्न
सिंह।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
यह पैदा होता
है, ऐसा ही एक
सवाल इसमें
आगे और लगा
हुआ है महुवा
का और मेरा
आपसे निवेदन
है कि आम तौर स
यह देखा जाता
है कि जब
विधायक
अनुशंषा कर देते
हैं उसके उपरांत
एडमिनिस्ट्रेटिव
सैंक्शन और
फिर
फाइनेंशियल
सैंक्शन, इन
दोनों के अन्दर
बड़ा वक्त
लगता है।
श्री अध्यक्ष:
लगता है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
पार्लियामेंट
के अन्दर एक
पार्लियामेंट
की कमेटी बनी
हुई है, एम.पी.
लैड के कामों
के अन्दर जो
स्वीकृति
में देरी होती
है या गड़बड़ी
होती है उसकी
अगर वहां शिकायत
की जाए तो
उसकी जांच की
जाती है। अब
कब तक तो विधान
सभा का इंतजार
करें कि विधान
सभा हो तो प्रश्न
उठाएं या
मंत्री जी को
लिखें। होता
क्या है कि
यहां आप
डिपार्टमेंट्स
को वर्क्स
देते हैं, हम
एम.पी. की तरह
एन. जी. ओज. को दे
नहीं सकते, एम.
पीज. तो एन. जी.
ओज. को भी दे देते
हैं। सरकारी
एजेंसी के
माध्यम से ही
एम. एल. एज. को
कार्य कराने
पड़ते हैं। अब
प्रश्न यह
होता है कि
समय पर होते
नहीं है। आप
पी एच ई डी को
दे दीजिये,
इर्रिगेशन को
दे दीजिये, पी
डब्ल्यू डी
को दे दीजिये,
किसी को भी दे
दीजिये, जो
काम समय पर
पूरे हो जाने
चाहिए वो नहीं
होते हैं और
फिर पैसा लैप्स
होने की दिक्कत
आती है कि
पैसा लैप्स
होगा।
श्री अध्यक्ष:
लैप्स नहीं
होता है, कैरी
फारवर्ड होता
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: मेरा आप
निवेदन तो सुन
लें पूरा। यह
सरकार की स्वीट
विल के ऊपर
है। हमारे वक्त
में हमने
निकाला था कि
यह पैसा लैप्स
नहीं होगा,
अगले साल में
कैरी फारवर्ड
हो जाएगा जो
पैसा बच
जाएगा। (व्यवधान)
अब आप सुन लें
मेरी बात। मैं
सब के हित की
बात कर रहा
हूं। यह मेरा
आपसे अनुरोध
है कि आप कृपा
इसके ऊपर गंभीरतापूर्वक
विचार करें।
माननीय मुख्य
मंत्री
महोदया यहां
बैठी हुई हैं,
मैं उनसे भी
निवेदन करना
चाहूंगा कि
इसका कोई
मैकेनिज्म
तो हो, उसकी
कोई कमेटी आप
बना दें।
असेम्बली की
कमेटी बन
जाएगी और किसी
को शिकायत
करनी है तो
असेम्बली की
कमेटी के
समक्ष जब यह
शिकायत आएगी पार्लियामेंट
की तरह तो
उसके ऊपर
कार्य के अन्दर
निश्चित रूप
से गति आयेगी
और यह जनता का
पैसा है,
सरकारी पैसा
है, जनता का
पैसा है, जनता
के हित में
खर्च होता है
तो इसके अन्दर
देरी है तो
आपको कोई न
कोई
प्रक्रिया
अपनानी
पड़ेगी जिससे
कि समय पर
कार्य सम्पादित
हो सके और
निष्पक्षता
के आधार पर
आपसे अनुरोध
करूंगा कि मुख्य
मंत्री जी,
इसको स्वीकार
करें, आप
असेम्बली की
किसी भी कमेटी
को, नई कमेटी न
बनाकर के जो
एग्जिस्टिंग
कमेटी है,
किसी को भी आप
कार्य सौंप दें
जो इस कार्य
की देखरेख
करेगी तो इससे
सारे ही विधायकों
को बहुत
सुविधा रहेगी,
मेरा यही आपसे
अनुरोध है।
श्री अध्यक्ष:
लीडर ऑफ द
हाउस।
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्यों की
पीड़ा को हम
समझ सकते हैं
क्योंकि यह
जायज प्राब्लम
है और सब की है
इसलिए स्पीकर
साहब से बाद
में बात करके,
आप लोगों से
बात करके
इसमें जो भी
अपने को करने
की बात होगी,
अपन कर लेंगे।
श्री अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल।
जिला
बीकानेर के
कृषि कनेक्शन
3. श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): क्या
ऊर्जा मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1)
क्या यह सही
है कि प्रदेश
में कृषि
कनेक्शन
देने हेतु
नीति बनायी
गयी है, यदि
हां, तो क्या ?
निर्धारित
नीति की प्रति
सदन की मेज पर
रखें।
(2)
जिला बीकानेर
में दिनांक 01
जनवरी, 2000 से अब
तक किसानों
द्वारा कृषि
कनेक्शन
हेतु किस-किस
वर्ष में
कितने-कितने
आवेदन किये
तथा कितने
कनेक्शन
जारी किये गये
व आगामी
वर्षों में
कितने-कितने
कनेक्शन
जारी करने की
योजना है ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(3)
क्या सरकार
सेम प्रभावित
क्षेत्रों
में बिना वरीयता
के कृषि कनेक्शन
जारी करने का
विचार रखती है
? यदि हां, तो कब
से व नहीं, तो
क्यों ?
राज्य
मंत्री, ऊर्जा
(श्री गजेन्द्र
सिंह): (1) जी हां।
कृषि कनेक्शन
देने हेतु
कृषि कनेक्शन
नीति 2004
(संशोधित - 31.12.2005)
जारी की गई है
जिसकी निर्धारित
नीति की प्रति
परिशिष्ट 'अ'
पर उपलब्ध
है।
(2)
जिला बीकानेर
में दिनांक 1
जनवरी, 2000 से अब
तक किसानों
द्वारा कृषि
कनेक्शन
हेतु किये गये
आवेदनों तथा
जारी किये गये
कनेक्शनों
का विवरण
परिशिष्ट 'ब'
पर उपलब्ध
है। वर्ष 2006-07
में कृषि
कनेक्शन
देने का लक्ष्य
अभी
निर्धारित
करना शेष है।
(3)
सेम प्रभावित
क्षेत्रों
में बिना वरीयता
के कृषि कनेक्शन
जारी करने का
वर्तमान में
कोई प्रस्ताव
विचाराधीन
नहीं है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्री महोदय
से जानना
चाहता हूं कि
एक ओर सेम
प्रभावित
क्षेत्र में
काश्तकारों
को समाधान
देने के लिए
सरकार करोड़ों
रुपये प्रति वर्ष
खर्च करती है।
काश्तकार
सेम प्रभावित
क्षेत्र के
अन्दर जो
वाटर लॉगिंग
के कारण पानी
ऊपर आ जाता है उसको
डीजल इंजन के
मार्फत् पम्प
आउट करने में
लाखों रुपया
खर्च करता है,
इन
परिस्थितियों
को ध्यान में
रखते हुए क्या
सरकार सेम
प्रभावित
क्षेत्रों
में
प्राथमिकता
के आधार पर
कृषि कनेक्शन
जारी करने का
विचार रखती है
? यदि हां, तो कब
तक और यदि
नहीं, तो क्यों
?
श्री
गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, कृषि
कनेक्शन की
खाली तीन
श्रेणियां
हैं, एक तो
जनरल, एक स्पेशल
और एक फार्म
हाउस। अभी
सरकार के पास
कोई ऐसा
विचाराधीन
नहीं है कि
कनेक्शन की
कोई एक्स्ट्रा
कैटेगरी बनाई
जाए जिससे सेम
प्रभावित क्षेत्र
के अन्दर
पानी पम्प
आउट किया जाए।
श्री
देवीसिंह
भाटी (कोलायत):
अध्यक्ष
महोदय, सवाल
इतना ही है कि
जो वाटर लॉग्ड
एरिया है, यह
सारा पानी
सीपेज होकर
फ्लो बैकवर्ड
टुवर्ड
पाकिस्तान
है, यह पानी व्यर्थ
जा रहा है और
पाकिस्तान
में इस पानी
का उपयोग हो
रहा है। इसलिए
हम कह रहे हैं
कि यह नहीं है
कि ग्राउंड वाटर
लेवल नीचे जा
रहा है, यह
दिक्कत नहीं
आयेगी, सवाल
यह है कि जो
पानी सीपेज से
ऊपर हो रहा है,
वाटर लॉग्ड हो
रहा है तो उस
समस्या का
निदान हो
जाएगा और एक
आप स्पेशल
कैटेगिरी कर
दें तो यह
पानी जो हमारा
बह कर पाकिस्तान
की ओर जा रहा
है वह सारा
रूक जाएगा।
इसलिए मैंने
पहले मुख्य
मंत्री
महोदया को भी
पत्र लिखा था
पर यही एक जनरल
जवाब आ गया कि
यह कोई नीति
में नहीं आता
है, अभी हमारा
ऐसा कोई विचार
नहीं है। इसके
ऊपर कृपया ध्यान
दें तो
निश्चित तौर
पर समस्या का
समाधान होगा
और लोगों को
लाभ भी
मिलेगा।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
इसी सन्दर्भ
में पुन:
मंत्री महोदय
से प्रश्न है
कि नीति बनाना
राज्य सरकार
की जिम्मेदारी
है। कृषि
क्षेत्र के
अन्दर फार्म
हाउस नीति,
विशेष कनेक्शन
की नीति और
साधारण कनेक्शन
की नीति, यह
राज्य सरकार
की देन है। आज
इतनी बड़ी
समस्या है
जिस समस्या
के समाधान के
लिए राज्य
सरकार चिंतित
है और करोड़ों
रुपये प्रति वर्ष
खर्च किये जा
रहे हैं उसी
कड़ी में अगर
हम
प्राथमिकता
के आधार पर
कनेक्शन दें
तो काश्तकारों
को राहत होगी।
क्या विभाग इस
बारे में अपना
मानस रखता है ? यदि
हां, तो कब तक
और यदि नहीं,
तो क्यों ?
श्री अध्यक्ष:
जवाब आने
दीजिये। Let the reply come. जवाब
आने दीजिये।
श्री
गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, हमारी
सरकार ने जो
कनेक्शन
रिलीज किये
हैं, यह पूरा
हाउस स्वीकार
करेगा कि हमने
एक ऐतिहासिक
नम्बर ऑफ
कनेक्शंस
रिलीज किये
हैं। पहले
वर्ष के अन्दर
जो हमारा
लक्ष्य था 40
हजार कनेक्शन
का वह हम रिलीज
कर चुके हैं
और दूसरे वर्ष
के अन्दर भी 40
हजार कनेक्शन
हम ऑलरेडी
जनवरी महीने
तक रिलीज कर
चुके हैं।
कांग्रेस
सरकार पांच
साल के टर्म
के अन्दर 111000
कनेक्शन....
श्री अध्यक्ष:
अब आप सेम की
बात बतायें।
श्री
गजेन्द्र
सिंह: वही बता
रहा हूं। अभी
जो हम कनेक्शन
रिलीज कर रहे
हैं, अभी
विद्युत की भी
थोड़ी कमी है
तो इसलिए
प्रायोरिटी
जनरल कैटेगरी
को दी है,
हमारा जो
लक्ष्य है
उसको अभी तोड़
नहीं सकते
हैं।
श्री
अमरा राम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री महोदय
से जानना
चाहूंगा कि जो
कृषि कनेक्शन
नीति 2004 आपने
घोषित की है
उसमें डी. एन.
जमा होने के
बाद 120 दिन में
कनेक्शन
किसान को जारी
होने के लिए
घोषित किया
था, क्या
बीकानेर में
आपने कृषि
नीति घोषित
होने के बाद
जितने भी डी.
एन. जमा हुए
हैं उनमें से
कितने कनेक्शन
ऐसे हैं जो 120
दिन के बाद
किये हैं। 120
दिन ही नहीं, 8
महीने और एक
साल के बाद
कनेक्शन
जारी हुए हैं
तो उन नीति को
तोड़ने वाले
अधिकारियों
के खिलाफ आप
कोई
कार्यवाही
करने का इरादा
रखते हैं? और
आइंदा से
जिनके डिमांड
नोटिस जमा
हैं, क्या
उनको 120 दिन के
अन्दर कनेक्शन
जारी हो
जाएंगे ? मंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करें।
श्री अध्यक्ष:
जवाब आने
दीजिये। पहले
जवाब आने
दीजिये। बीच
में नहीं बोलें
आप। आप विराजें,
पूछ लिया
आपने।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कोलायत
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो चिंता
प्रकट की है,
निश्चित रूप
से उसके सम्बन्ध
में हम सब को
मिल बैठकर
विचार करने की
आवश्यकता
है। यह सेम की
समस्या नहरी
क्षेत्र में
है। कुछ जमीन
की प्रकृति है
और कुछ फ्लड
इर्रिगेशन की
वजह से यह
सीपेज, ड्रेनेज
की वजह से
होती है तो
मैं माननीय
सदस्य को आश्वस्त
करना चाहता
हूं कि हम सब
मिल बैठकर जो
भी विचार आप
और हम
निकालेंगे,
निश्चित रूप
से सरकार
कार्यवाही
करेगी।
Vkj/akt/1130/1d
श्री
देवीसिंह
भाटी: वाह
साहब, वाह
साहब।
श्री
मंगलाराम
गोदारा: अध्यक्ष
महोदय,
सामान्य
श्रेणी के जो
कनेक्शन हैं,
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में रोक लगा रखी
है। मंत्रीजी
से मैं यह
पूछना चाहता
हूं कि खाली
एक डूंगरगढ़
में ही रोक
लगा रखी है या
राजस्थान
में और कहीं
पर भी रोक लगा
रखी है। जो कट
आफ डेट में
कनेक्शन
रूके हैं,
सारे कनेक्शनों
पर रोक लगा
रखी है, इसका
क्या कारण
है? (व्यवधान)
श्री
गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, हमारा
जो लक्ष्य था
60,000 डिमाण्ड
नोट और 40,000 कनेक्शन,
वह पहले वर्ष
में मैटीरियलाइज
हो चुका है और
दूसरे वर्ष के
अन्दर भी हम
आगे ही चल रहे
हैं।
इस वर्ष के अन्दर
40,000 कनेक्शन
रिलीज करने के
लिए हमारे
खाली 1400-1500 कनेक्शन
रह गये हैं।
अभी जो कनेक्शनों
का मैटीरियलाइजेशन
है क्योंकि
हमारी जो कृषि
नीति है, उसका
इतना सरलीकरण
हो गया है, इतना
अफोर्डेबल हो
गया है कनेक्शन
देने में, मैटीरियलाइजेशन
डिमाण्ड नोट
देने में नार्मली
जो होता है,
उससे बहुत
अधिक ज्यादा
है। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
अध्यक्ष
महोदय, क्या 120
दिन से ज्यादा
समय लेते हैं
तो क्या उन
लोगों को ब्याज
देंगे? क्या
फीस जमा कराने
में लेट हो
जाते हैं तो
आप पैनल्टी
लेते हैं, ब्याज
वसूल करते
हैं, जब किसान
से आप लाखों
रुपया डिमांड
नोट के नाम पर
जमा कर लेते
हैं और समय सीमा
में कनेक्शन
नहीं दें तो
क्या आपको
किसान को ब्याज
नहीं देना चाहिए?
क्या सरकार
विचार करती
है, किसान को
समय सीमा से
अधिक समय में
यदि कनेक्शन
दिया जाता है
तो उस समय के
लिए ब्याज
देय होना
चाहिए ? सरकार
को यह घोषणा
करनी चाहिए।
(व्यवधान)
श्री
मंगलाराम
गोदारा: अध्यक्ष
महोदय, डिमाण्ड
नोट जमा होने
के बाद भी रोक
लगा रखी है और
नये डिमाण्ड
नोट निकालने
पर भी रोक लगा
रखी है।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
मंगलाराम
गोदारा: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्रीजी
से पूछना
चाहता हूं कि
खाली एक
डूंगरगढ़ में
ही रोक लगा
रखी है या और
कहीं भी रोक
लगा रखी है?
श्री अध्यक्ष:
आप बैठ जाइये।
मैंने नाम
पुकारा है
रामप्रताप
कासनिया। आप विराज
जाएं ।
श्री
रामप्रताप
कासनिया(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, मांगा
उसी से जाता
है जो देता
है। सरकार ने
कृषि कनेक्शन
बहुत ज्यादा
संख्या में
किये हैं,
इसमें कोई
संदेह नहीं
है। अध्यक्ष
महोदय, मेरा
यह सरकार से
निवेदन है कि
सेमग्रस्त
क्षेत्र के
अन्दर काश्तकारों
को कनेक्शन
देने में छूट...
श्री अध्यक्ष:
उसका जवाब तो
दे दिया
सिंचाई
मंत्रीजी ने,
अब उस बात को
क्यों दोहरा
रहे हैं आप ? आप
बिजली की बात
आने दीजिये।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: बात
कनेक्शन की
है, उसमें और
इसमें फर्क
है।
श्री
गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, 1,70,000
कनेक्शन जो 15
सालों में
पेंडिंग हैं,
हमारा लक्ष्य
इनको इस साल
में पूरा करने
का है, यह
हमारा ऐतिहासिक
रिकार्ड
रहेगा।
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो पूछा है स्पेसिफिक
बीकानेर का,
जो डिमाण्ड
नोट जमा हुए
हैं इनकी कृषि
नीति घोषित
होने के बाद 120
दिन से ज्यादा
समय कितने
कनेक्शनों
में लगा है,
उसके खिलाफ क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं और
आइन्दा जो
डिमाण्ड नोट
जमा है, क्या
वह 120 दिन में हो
जायेंगे
कनेक्शन? (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, मैंने पूछा
है, बीकानेर
में जो डिमाण्ड
नोट जमा हुए
हैं और 120 दिन
में नहीं हुए,
कितने कनेक्शन
हैं स्पेसिफिक,
वह बता दें? कितने
कनेक्शन हैं
जिनको इनकी
नीति के
अनुसार नहीं
करवाये गये?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, 12 साल
में जो काम
इन्होंने
नहीं किये, वह
दो साल में
कराये, यह तो
इनको धन्यवाद
देना चाहिए।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
ऊर्जा
मंत्रीजी से
एक प्रश्न
है।
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, इस बार
स्पेसिफिक
दे दें और
पहली बार
राजस्थान
में शिड्यूल्ड
कास्ट के
पिछले छह
महीनों में
कनेक्शन
जारी नहीं हो
रहे हैं जबकि
राजस्थान
में बिजली के
कनेक्शन शिड्यूल्ड
कास्ट के
अपडेट कभी भी,
जब भी वह फाइल
जमा करता है,
उसी समय हो
जाता था। पहली
बार राजस्थान
में पिछले छह
महीनों से शिड्यूल्ड
कास्ट के
डिमाण्ड नोट
पर भी रोक लगा
रखी है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मंत्रीजी का
जवाब सुनिये।
(व्यवधान)
बूंदी से आने
वाले माननीय
सदस्य, जवाब
सुनिये आप
मंत्रीजी का।
श्री
गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय,
कांग्रेस ने
पाँच वर्ष के
कार्यकाल में
12,000 शिड्यूल्ड
कास्ट के
कनेक्शन
दिये हैं जबकि
हमने दो साल
के अन्दर 10,000 को
पार कर लिया
है। (व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो सवाल पूछा
है, उसका उत्तर
नहीं आया है।
मैं जो सवाल
पूछ रहा हूं
उसका उत्तर
दिलाइये, जो
मैंने सवाल
पूछा है, उसका
उत्तर नहीं
आया है।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: अध्यक्ष
महोदय, ये
आंकड़ों की
बात कर रहे
हैं, क्रियान्वित
कितने हुए? (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, ये
आंकड़ों की
बात कर रहे
हैं, क्रियान्वित
कितने हुए?
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। मिस्टर
जारोड़ा, स्थान
ग्रहण करें।
स्थान ग्रहण
करें। माननीय
मंत्रीजी,
प्रश्न बहुत
सीधा-सा है। 120
दिन में आपने
जो वादा किया
डिमाण्ड नोट
में, उसको या
तो आप तरमीम
कर लीजिये 120
दिन की बजाय
इसको 150 करते
हैं, 160 करते हैं
और यदि सचमुच में
आपके डिमाण्ड
नोट में यह
शर्त है तो उस
शर्त की
अनुपालना में क्या
कमी है और
किसकी वजह से
कमी है, क्यों
नहीं करते
हैं, वह आप बता
दीजिये। और क्या
है इसमें। (व्यवधान)
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
आप स्थान
ग्रहण करें,
आप स्थान
ग्रहण करें।
मंत्रीजी
जवाब दे रहे
हैं।
श्री गजेन्द्र
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, 31 जनवरी,
2006 को केवल 16,840
डिमाण्ड नोट
रह गये हैं,
हमारा जो
टार्गेट इस
साल का 40,000 कनेक्शन
का है, हमें
केवल 2,500 कनेक्शन
देने हैं,
लेकिन यह 16,840
कनेक्शन हम 30
जून तक पूरा
कर देंगे और
उसके बाद जब
डिमाण्ड नोट
इश्यु होगा,
हम 90 दिन के अन्दर
किसान को
कनेक्शन
देंगे।
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, हमने
यह नहीं पूछा।
(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, आपके
निर्देश को यह
नहीं मान रहे हैं।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ये
आंकड़ों की
बात कर रहे
हैं।
श्री
श्रवण कुमार:
अध्यक्ष
महोदय, पहले
वाले का क्या
हुआ, उसका
जवाब नहीं
आया।
श्री अध्यक्ष:
आपको आवश्यकता
नहीं बीच में
खड़े होने की।
माननीय श्री रिछपाल
मिर्धा।
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया,
श्री रिछपाल
मिर्धा। (व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
जो उत्तर देने
के लिए कहा, वह
उत्तर तो
नहीं आया अभी
तक।
श्री अध्यक्ष:
सारी, एक बीच
में रह गया
है। श्री अशोक
कुमार नवलखा। मैंने
नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
श्रवण कुमार:
अध्यक्ष
महोदय, आसन ने
जो पुकारा, वह
नहीं हुआ है। आपने
जो कहा था कि...
श्री अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
श्रवण कुमार: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपने
ही तो कहा था,
आपने एक
विसंगति के
बारे में पूछा
था। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपने
प्रश्न पूछा
था न, आपकी बात
भी तो खराब हो
रही है।
श्री
अशोक कुमार
नवलखा: प्रश्न
संख्या 4.
श्री अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
धोद से आने
वाले माननीय
सदस्य, कृपया
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपके
निर्देश पर भी
उत्तर नहीं
दें, आपके
निर्देशों का
भी उल्लंघन
हो रहा है।
श्री अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया, मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया
है।
श्री
श्रवण कुमार:
आपके
निर्देशों की
अवहेलना हो रही
है।
श्री
अमराराम(धोद):
क्या आसन के
निर्देशों का
भी मंत्रीजी
पालन नहीं
करेंगे, क्या
मतलब है यह? (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, आपने
निर्देश दिये,
या तो मंत्रीजी
यह कह दें कि
मैं तैयार
नहीं हूं,
तैयार होकर नहीं
आया। स्पेसिफिक
आपकी तरफ से
निर्देश दिये
गये...
श्री
श्रवण कुमार:
अध्यक्ष
महोदय, आपने
निर्देश दे
दिये कि 120 दिन
में करने के।
(व्यवधान)
श्री
जीतमल खांट(बागीडोरा):
...मैं आपसे
चाहूंगा, मैं
मंत्रीजी से जानना
चाहता हूं कि
विद्यार्थियों
के लिए आप क्या
पुख्ता व्यवस्था
कर रहे हैं ?
श्री
अमराराम(धोद): 120
दिन के अन्दर
नहीं दिये
गये, अब क्या
समय
बढ़ायेंगे 120
दिन की?
पंचायत
समिति छोटी
सादड़ी के
अनुसूचित
जनजाति
बाहुल्य
ग्रामों का
माडा योजना
में चयन
4. श्री
अशोक कुमार
नवलखा(निम्बाहेड़ा):
क्या जनजाति
क्षेत्रीय
विकास मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(।)
विधान सभा
क्षेत्र
निम्बाहेड़ा
की पंचायत समिति
छोटी सादड़ी
में ‘’माडा
योजना’’ के अन्तर्गत
कितने गांव
हैं? सामान्य
आबादी मय
अनुसूचित जन
जाति की आबादी
के गांवों की
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
क्या सरकार
माडा योजना
में मानदण्ड
के अनुसार अन्य
गांवों को भी
सम्मिलित
करने का विचार
रखती है? यदि
हां, तो कब तक व
नहीं तो क्यों?
(3)
क्या सरकार
पंचायत समिति
छोटी सादड़ी
को जनजाति
क्षेत्र की
श्रेणी में
सम्मिलित
करने का विचार
रखती है? यदि
हां, तो कब तक व
नहीं तो क्यों?
जनजाति
क्षेत्रीय
विकास मंत्री (श्री
कनकमल कटारा):
(।) विधान सभा
क्षेत्र निम्बाहेड़ा
की पंचायत
समिति छोटी
सादड़ी में माडा
योजना के अन्तर्गत
79 ग्राम चयनित
है। ग्रामों
की सूची संलग्न
है।
(2) जी
हां। माडा
योजना में
मानदण्ड के
अनुसार अन्य
गांवों को
सम्मिलित
करने का कार्य
जनगणना निदेशालय
द्वारा
जनगणना वर्ष 2001
के अनुसार जिला
जनगणना
पुस्तिकाएं
प्रकाशित
होने के पश्चात्
सम्पादित
किया जायेगा।
(3)
जी हां।
वर्तमान
अनुसूचित
क्षेत्र में
विस्तार कर
पंचायत समिति
छोटी सादड़ी
की 10 ग्राम पंचायतों
को अनुसूचित
क्षेत्र में
सम्मिलित करने
हेतु प्रस्ताव
भारत सरकार को
प्रेषित किये
जा चुके हैं।
भारत
सरकार से स्वीकृति
प्राप्त
होने पर इन
गांवों को
अनुसूचित
क्षेत्र में
सम्मिलित कर
लिया जायेगा।
श्री
अशोक कुमार
नवलखा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से इतना
ही जानना
चाहता हूं कि
जो प्रस्ताव
अनुसूचित
क्षेत्र
घोषित करने के
लिए पंचायत
समिति छोटी
सादड़ी के
हैं, उन ग्राम
पंचायतों के
भेजे गये हैं,
एक तो ये
प्रस्ताव
भारत सरकार को
कब भेजे गये? दूसरी
बात, भारत
सरकार ने अब
तक इन प्रस्तावों
की स्वीकृति
क्यों नहीं
दी? और तीसरी
बात, सरकार
द्वारा अब तक
इन प्रस्तावों
की मंजूरी के
लिए कब-कब क्या-क्या
प्रयास किये
गये?
श्री कनकमल
कटारा: अध्यक्ष
महोदय, माडा
लघु खण्डों,
माडा क्लस्टर
यह जो विस्तार
के लिए प्रस्ताव
भेजे गये,
उसकी भारत
सरकार में
दिनांक 30 दिसम्बर,
1989 को अनुमति
माडा लघु खण्ड
36 और ग्रामों
की संख्या 3189,
कुल जनसंख्या
11.67 लाख और इसमें
से जनजातीय
संख्या 6.70 ।
इसके बाद में 22
सितम्बर, 1983 दो
लघु खण्ड
जिसके अन्तर्गत
ग्रामों की
संख्या 157, कुल
जनसंख्या 0.47
लाख और
जनजातीय संख्या
0.27... (व्यवधान)यानी
कि मैं आपको
पूरा ही बता
दूं। उसके बाद
1987 में ‘ख’
लघु खण्ड,
ग्रामों की
संख्या 236,
जनसंख्या 1.07
लाख और
जनजातीय संख्या
0.55, कुल माडा लघु
खण्ड 44
और ग्रामों
की संख्या 3592 कुल
जनसंख्या 22
लाख 58 हजार 134 और
जनजाति संख्या
इसमें 12 लाख 49
हजार 231 ।
Jkj/akt/1140/1e
माडा
क्लस्टर के
अंदर भी हमने 16
अप्रैल 1986 को
कुल लघु खंड
आठ, ग्रामों
की संख्या 134,
कुल जनसंख्या
उसमें 49 हजार 565,
जनजाति की
संख्या 26
हजार 623 ।
ऐसे ही चार
जनवरी, 1988 को दो
लघु खंड,
ग्रामों की
संख्या 15, कुल
जनसंख्या 13
हजार 975 और एस.टी.
जनसंख्या 7
हजार 520 ।
25 मार्च, 1988- लघु
खंड एक, ग्राम
संख्या 9, कुल
जनसंख्या 5
हजार 080 और
जनजाति की
संख्या 2
हजार 967 ।
आपने कहा कि
प्रस्ताव
कब-कब भिजवाये
गये, जो
भिजवाये गये
प्रस्ताव,
उसमें हम
सूचना देंगे
कि इसमें 29.4.2004 को
हमने प्रस्ताव
भेजा ।
एक 2002-03 में
शासन सचिव
द्वारा भेजा
गया ।
इसमें 18.6.2004 को,
इस तारीख को
भिजवाया गया
।
इसमें 2002-03 में
फिर 13.7.2004
को भिजवाया
गया।
ऐसे ही 2002-03 में
18.12.2004 को, फिर 2002-03 में
13.7.2005 को , 2002-03 में
मेरे स्वयं
के द्वारा 10.8.2005
को हमने प्रस्ताव
भिजवाये। इसके
बाद में 2002-03 में
3.1.2006 को हमने
प्रस्ताव
भिजवाये। ऐसे ही 2002-03
में यानि 25.2.2006 तक
यह प्रस्ताव
हमने भिजवाये
हैं।
अब यह भारत
सरकार की स्वीकृति
आने के बाद
में हम
निश्चित रूप
से इसको
सम्मिलित कर
लेंगे, उसके
भी मापदण्ड
तय हैं, उस
मापदण्ड के
अनुसार
निश्चित रूप
से इसको
सम्मिलित कर लिया
जायेगा।
श्री जोगेश्वर गर्ग: 2004
में प्रस्ताव गये, भारत सरकार को फुर्सत नहीं मिली वापिस स्वीकृत करे। 2004 में प्रस्ताव गये, दो-दो साल हो गये, इतने संवदेनशील हैं आप एस.टी. के मामले में। शेम। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: जोगेश्वर
गर्गजी, वह
प्रस्ताव पर
साइन नहीं थे।
श्री
अध्यक्ष: श्री
रिछपाल
मिर्धा।
मोहम्मद
माहिर आजाद: वह
प्रस्ताव पर
साइन ही नहीं
थे इसलिए क्या
विचार करेंगे
उस पर ?
श्री
अध्यक्ष: आपस में
बात नहीं
करें।
केन्द्रीय
सहकारी बैंक
नागौर के अवधि
पार ऋणों की
वसूली
5.श्री
रिछपाल
मिर्धा(डेगाना): क्या
सहकारिता मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1) केन्द्रीय
सहकारी बैंक
नागौर और अन्य
शाखाओं
द्वारा पिछले
पाँच वर्षों
के दौरान किन-किन
व्यक्तियों
को मध्यकालीन
और
दीर्घकालीन
ऋण स्वीकृत
किया गया? सूची
पूर्ण विवरण
सहित
तहसीलवार सदन
की मेज पर रखें।
(2)
क्या यह सही है
कि तहसील
डेगाना के कई
सहकारी
ऋणियों का ऋण
अवधि पार हो
गया है? यदि
हां, तो
किन-किन का? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(3)
उक्त डिफाल्टर
ऋणियों से ऋण
वसूल करने
हेतु सरकार
द्वारा अब तक
क्या
कार्यवाही की
गई? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
सहकारिता
मंत्री (श्री मदन
दिलावर):
(1) केन्द्रीय
सहकारी बैंक
नागौर की समस्त
शाखाओं
द्वारा पिछले
5 वर्षों (2000-01 से 2004-05)
के दौरान स्वीकृत
मध्यकालीन
और
दीर्घकालीन
ऋणों का व्यक्तिवार
व तहसीलवार
विवरण
परिशिष्ठ-एक
सदन की मेज पर
रख दिया गया
है।
(2)
जी हां।
तहसील
डेगाना के
अवधिपार ऋण
बकायादारों
का विवरण
परिशिष्ट-दो
सदन की मेज पर
रख दिया गया
है।
(3)
डिफाल्टर
ऋणियों से ऋण
वसूली हेतु की
गई कार्यवाही
का विवरण
परिशिष्ठ-दो
सदन की मेज पर
रख दिया गया
है।
श्री
रिछपाल
मिर्धा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय मंत्रीजी
से जानना
चाहता हूं,
पहले तो जो
इन्होंने
लिस्ट दी है,
वह अधूरी लिस्ट
दी है,
अवधिपार ऋण
जिनके हैं उन
आधे लोगों के इस
लिस्ट में
नाम नहीं
हैं।
नम्बर दो,
जिनका लोन
अवधिपार हो
गया, उनके
खिलाफ इन्होंने
धारा 99 में
नोटिस जारी
किये, उसके
बावजूद कितने
लोगों के
खिलाफ इन्होंने
कुर्की की और
इन्होंने जो
प्रयास किये ,
इनके
प्रयासों का
क्या नतीजा
आया और कितना
ऋण वसूल हुआ,
ऐसे कितने केस
हैं।
नम्बर-तीन,
मेरा माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से यह
कहना है
मंत्रीजी को
कि यह जो
अवधिपार ऋण की
वसूली के लिए
जो इन्होंने
मापदण्ड
अपनाये, इसमें
भेदभाव बरता
गया और दोहरे
मापदण्ड
अपनाये जबकि
सब के लिए एक
मापदण्ड
होना चाहिए। मैं यह
जानना चाहता
हूं कि कितने
लोगों के
खिलाफ कुर्की
हुई और कितनी वसूली
हुई ?
श्री अध्यक्ष: बताइये
मंत्रीजी।
श्री मदन
दिलावर:
धारा 99 का
नोटिस देने के
बाद दस जो
अवधिपार थे,
दस लोगों का
पैसा जमा हो
गया है और
हमने जो
अवधिपार हमारे
पास हैं, सबके
खिलाफ हम
कार्यवाही कर
रहे हैं।
श्री अध्यक्ष: अमाउंट
बताइये, कितना
अमाउंट रियलाइज
हुआ।
श्री मदन
दिलावर:
अमाउंट बता
रहा हूं।
श्री अध्यक्ष: रिकवरी
बताइये।
श्री मदन
दिलावर:
अमाउंट बता
रहा हूं,
अवधिपार
अमाउंट बता
रहा हूं।
श्री
रिछपाल
मिर्धा:
यह तो बताओ
कितनों
के खिलाफ कर
रहे हैं आप
कार्यवाही।
श्री
रामनारायण
चौधरी: दोहरे
मापदण्ड का
आरोप है आप
पर।
श्री मदन
दिलावर:
अवधिपार
ऋणों की जो
सूची है उसमें
तीस लोग हैं
अभी, जिनका
पैसा आना शेष
है।
मांगीलाल,
भागीरथराम
प्रजापत
चोलवास के ऊपर
है 25 हजार 790
रूपया, इसको
धारा 99 का हमने
नोटिस दे दिया
है।
ओमप्रकाश,
फूलचन्द....
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
यह पूछा ही
नहीं है। यह तो है,
लिस्ट में है
यह तो।
श्री मदन
दिलावर:
आप पूरा
पूछना चाहते
हो कि एक-एक का
पूछना चाहते
हैं, बतायें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: यह तो
लिस्ट में
दिया हुआ है।
श्री मदन
दिलावर:
यह पूरा 9 लाख 34
हजार 391 रूपया अवधि
पार है।
श्री अध्यक्ष:
कितनी रिकवरी
हुई, वह पूछ
रहे हैं वह।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: यह तो
लिस्ट के
अंदर है
आलरेडी।
श्री अध्यक्ष:
कुल कितनी
रिकवरी हुई,
वह पूछ रहे
हैं।
श्री मदन
दिलावर: यदि
आप डिटेल
चाहते हैं तो
मैं डिटेल बता
देता हूं,
एकमुश्त
चाहते हैं तो
एकमुश्त बता
देता हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद: रिकवरी
की डिटेल
बताइये, रिकवरी
कितनी हुई,
कैसे हुई, यह
तो लिस्ट में
दे रखा है
आपने।
श्री अध्यक्ष: आप कुल
रिकवरी कितनी
हुई, यह बता दीजिये।
श्री मदन
दिलावर:
मैं कह रहा
हूं न।
मोहम्मद
माहिर आजाद: उसकी
आपके पास
जानकारी नहीं
है।
आपको तो फुर्सत
ही नहीं है। आपको तो
थॉमस से और इमानुअल
से ही फुर्सत
नहीं है।
श्री मदन
दिलावर:
मैं कह रहा
हूं, मेरे पास
जानकारी है। मेरे
पास जानकारी
है, आप सुनो तो
सही.....
मोहम्मद
माहिर आजाद: वहां
लगा रखी है
सारी ताकत तो
आपने।
श्री मदन
दिलावर:
मेरी बात
सुनो तो सही। मेरे
पास सब की
जानकारी है।
श्री अध्यक्ष: यह क्या
तरीका है
आपका? यह क्या
तरीका हुआ?
मोहम्मद
माहिर आजाद: आपको तो
थॉमस और
इमानुअल के
अलावा फुर्सत
ही नहीं है
कुछ भी।
श्री मदन
दिलावर:
ओमप्रकाश,
फूलचन्द
नायक, खूड़ी
कलां को
कुर्की वारंट
जारी कर दिया
गया है।(व्यवधान)
ओमप्रकाश,
गुलाबचन्द
ओझा, हरसोर...
श्री अध्यक्ष: सुनिये,
सुनिये।
श्री मदन
दिलावर: .... को जो
25 हजार 991 रूपया
है वह कुर्की
वारंट जारी कर
दिया गया है।
मूलाराम,
मेवसाराम,
बनाराम जाट,
लवादर के ऊपर 4500
रूपये बकाया
हैं उसको धारा
99 का नोटिस दे
दिया है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
यह लिस्ट में
दिया हुआ है। यह तो
लिस्ट के
अंदर है। यह काहे
को समय बरबाद
कर रहे हैं
सदन का, यह
लिस्ट में
आलरेडी है।
(व्यवधान)
श्री मदन
दिलावर:
शूरी, गनी
खां, हरसोर को 6
हजार रूपये
बकाया हैं,
उसका नोटिस दे
दिया गया है।
(व्यवधान)
श्री
श्रवण कुमार: यह तो
लिस्ट में
नाम है उनके
पास, यह तो
लिस्ट आ चुकी
इनके पास।
श्री मदन
दिलावर:
कुल 9 लाख 24
हजार रूपये
बकाया की
वसूली हम
ताकीद से कर
रहे हैं।
श्री
श्रवण कुमार: अब
नाम लेने से
फायदा क्या
है।(व्यवधान)
श्री
रिछपाल
मिर्धा: जो
प्रश्न पूछा
गया उसका जवाब
नहीं दे रहे
हैं यह।
श्री मदन
दिलावर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको यह
निवेदन करना
चाहता हूं...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद:
आपको तो टिकट
के योग्य ही
नहीं समझा इन्होंने,
आप क्या पक्ष
ले रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, नगर
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप प्रश्न
पूछते नहीं
हैं, एलीगेशन
लगा रहे हैं
उनके ऊपर, यह
कौन सा तरीका
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद: साहब,
प्रश्न ही
पूछ रहे हैं।
श्री
श्रवण कुमार:
एलीगेशन
कहां हैं,
जवाब तो पूरा
दें।
मोहम्मद
माहिर आजाद: प्रश्न
का जवाब ही
नहीं दे रहे
वह, प्रश्न
का जवाब
देवें।
आपने कह दिया
उसका भी नहीं
दे रहे हैं यह
तो।
हमको तो
कितनी रिकवरी
हुई है उसकी
लिस्ट
बताइये।
श्री अध्यक्ष:
गलत बात, जरा
स्थान ग्रहण
कर लें।
स्थान
ग्रहण करें। स्थान
ग्रहण कर
लें।
आप,
मंत्रीजी,
केवल इतना बता
दीजिये कि जो
लम्बी-चौड़ी
लिस्ट आपने
दी है, रिकवरी
कुल आपकी
कितनी हुई है,
बस इतना बता
दें आप तो।
श्री मदन
दिलावर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दस
लोगों ने हण्ड्रेड
परसेंट पैसा
जमा करा दिया
है, चालीस लोग
थे।
श्री अध्यक्ष: वही बात
है।
आपके पास क्या
सूची नहीं है,
कुल कितनी
रिकवरी हुई?
श्री मदन
दिलावर: नहीं,
मेरे पास
अमाउंट नहीं
है, लोगों की
सूची है।
श्री
सुभाष चन्द्र(कोटपूतली):
आप कुल अमाउंट
दीजिये, फिर
किसलिए बैठे
हैं यहां। आप
अमाउंट नहीं
दे सकते तो
फिर किसलिए
बैठे हैं। आप सूचना
दे रहे हैं, क्या
सूचना दे रहे
हैं, अधूरी
सूचना दे रहे हैं।(व्यवधान)
श्री मदन
दिलावर:
अभी दे देता
हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद: कोई
सूचना नहीं है
इनके पास।(व्यवधान)
श्री
श्रवण कुमार: आपके
पास राशि
कितनी आ गई, यह
बताओ न।
श्री
सुभाष चन्द्र(कोटपूतली): आपको,
माननीय
मंत्रीजी, पूरी
सूचना सदन को
देनी चाहिए,
आप सदन में
प्रश्न का
जवाब दे रहे
हैं तो आपके
पास पूरे
आंकड़े होने
चाहिए।
श्री अध्यक्ष: आप जवाब
सुनिये।
मंत्रीजी का
जवाब सुनिये।
श्री
सुभाष चन्द्र(कोटपूतली): और आपके
पास अमाउंट
होना चाहिए,
आप अधूरी
सूचना दे रहे
हैं सदन में।
श्री अध्यक्ष:
जारोड़ा
साहब, आप अपना
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
श्रवण कुमार: आपके
पास अमाउंट ही
नहीं है, बात
तो दुनिया भर
की करते हैं,
आप यह बताओ कितनी
राशि....(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा:
माननीय
मंत्रीजी तैयार
होकर नहीं
आते, इनको
तैयार होकर
आना चाहिए,
सदन का समय
बरबाद कर रहे
हैं।(व्यवधान)
श्री मदन
दिलावर:
पूरे जिले की
भी बता रहा
हूं।
जिले की भी
सूची को, उसको
दे सकता हूं,
डेगाना की....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, आप
अपना स्थान
ग्रहण करें,
प्लीज। स्थान
ग्रहण करें।
श्री
श्रवण कुमार: राजकोष
में कितना
रूपया आया?
श्री अध्यक्ष: आसन कह
रहा है, स्थान
ग्रहण कर
लें।
जब मैंने
प्रश्न पूछ
लिया तो आप सब
को क्या आवश्यकता
हुई उसको
दोबारा रिपीट
करने की, वह
जवाब दे रहे
हैं, दे
देंगे। (व्यवधान) अब आप स्थान
ग्रहण करें,
प्लीज। (व्यवधान)
श्री
अमरा राम
(धोद):
आपका उत्तर
देते ही नहीं
है।
आपने स्पष्ट
पूछा कि कितनी
राशि रिकवर
की, राशि बता
दें, अभी तक
नहीं बताई,
मंत्री का हाल
यह है कि पूरी
तैयारी करके
नहीं आते। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: इनके
पास जवाब ही
नहीं है। (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा:
इनके पास
जवाब ही नहीं है...(व्यवधान)
श्री मदन
दिलावर:
मेरे पास
पूरा जवाब है।
(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: आसन ने
पूछ लिया,
उसके बाद भी
जवाब नहीं है
इनके पास।
श्री अध्यक्ष: शांत
रहें पहले,
हां।
श्री मदन
दिलावर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
पूरी तरह से
अवगत कराना
चाहता हूं,
मेरा निवेदन
यह है कि मैं
हर तीन महीने
इस बात की पूरी
समीक्षा करता
हूं....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
शोर नहीं, शोर
नहीं।
श्री मदन
दिलावर:
और यह पहली
बार हुआ है कि मैंने
हर बैंक की
दस-दस लोगों
की, जो टॉप
अवधिपार हैं...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: हां, सब
बताओ डिटेल।
श्री मदन
दिलावर:
जो टॉप
अवधिपार हैं,
उनकी सूची
मांगी है,
उनके नाम
अख़बार में
साया किये हैं
और उसके आधार
पर उनकी
सामाजिक प्रतिष्ठा
न गिरे, इसलिए
लोग आकर भाग-भाग
कर जमा करा
रहे हैं और
आकर मेरे पास
आग्रह कर रहे
हैं कि हमारी
सूची जारी मत
करना, हम आपके
पैसे दे
देंगे।
लगातार इस
प्रकार से और
रिकार्डतोड़
वसूली हुई है,
यह आदेश मैंने
लगातार दिये
हुए हैं और जो
अवधिपार
बकाया है, उसमें
कोई भी एक लाख
रूपये से ज्यादा
का बकायादार
नहीं है।
श्री अध्यक्ष: नहीं,
बीच में नहीं। बीच में
नहीं, बैठें। कम्प्लीट
होने दें।
श्री मदन
दिलावर:
मैं यह
निवेदन कर रहा
हूं।
मैंने भूमि
विकास बैंक
में यह आदेश
दिये हुए हैं,
सेंट्रल कोआपरेटिव
बैंक में आदेश
दिये हुए
हैं।
अब इनको तो
पीड़ा है उसका
मैं क्या
करूं।
यह कहते हैं
कि किसानों के
आपने दस हजार
रूपये से ज्यादा
का कर्जा माफ
क्यों किया ।
Bhs\akt\1150\1f
एकमुश्त
समाधान योजना
हम लाये और
एकमुश्त
समाधान योजना
में हमने यह
कहा कि जो 1997 के
पहले के
बकायादार हैं
और वो किसी
कारणवश अकाल
के कारण, घर की
परेशानियों
के कारण से
अपना पैसा जमा
नहीं करा पाये
और यदि वो
एकमुश्त
पैसा जमा
कराना चाहते
हैं तो पिछले
साले हमारी स्कीम
थी कि वो
एकमुश्त जमा
कराने की
हमारे यहां
दरख्वास्त
दे दे हम गणना
कर देते हैं...।
श्री अध्यक्ष:
बस हम संतुष्ट
हैं, अब आप
विराजें।
श्री मदन
दिलावर: 2001 के
बाद का सारा
ब्याज हम
छोड़ देंगे और
ऐसे लगभग 50 लाख...।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्री
महोदय राशि तो
बतायें।
श्री अध्यक्ष: श्री
संयम लोढ़ा।
श्री
अमराराम (धोद):
कितनी अवधि
पार ऋण की
राशि वसूल की?
आपके निर्देश
ही नहीं
मानते।
श्री मदन
दिलावर,
कांग्रेस के
लोग यह कहना
चाहते हैं कि 10
हजार रुपये से
ज्यादा का
कर्जा माफ क्यों
किया, हम 10 हजार
नहीं यदि
किसान ....।
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण करिये।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपके
निर्देश ही
नहीं मानते। आपके
निर्देशों की
पालना मंत्री
महोदय ही नहीं
करेंगे तो हम
क्या कहें।
श्री मदन
दिलावर:
... आता है
एकमुश्त
योजना में तो 10
हजार नहीं, 50
हजार करेंगे, 1
लाख करेंगे, 2
लाख करेंगे।
श्री अध्यक्ष:
श्री संयम
लोढ़ा।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा:
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके आदेश की
पालना करूंगा
पर एक बात
कहना चाहता
हूं..।
श्री अध्यक्ष:
नहीं मैं कह
दूं न, आपकी
बात को मैं कह
रही हूं।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा:
माननीय मंत्री
जी ने कहा कि
इनको पीड़ा हो
रही है मेरे
को पीड़ा नहीं
हो रही है
पीड़ा मंत्री
जी को हो रही है,
मेरे को चिन्ता
हो रही है
काश्तकारों
का बैंक है और
काश्तकारों
का बैंक डूबने
के कगार पर है
इसलिए मैं यह
प्रश्न पूछ
रहा हूं। मेरे को
पीड़ा नहीं है
मेरे को काश्तकारों
की पीड़ा है । यह
पक्षपात कर रहे
हैं आप नहीं
चाहते तो मैं
नहीं पूछता।
श्री अध्यक्ष
: डेगाना से
आने माननीय
सदस्य।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा:
मैं आसन का
सम्मान करता
हूं और आसन की
इजाजत के बगैर
नहीं
पूछूंगा।
श्री अध्यक्ष: यदि आप
संतुष्ट
नहीं हैं यदि
आप प्रश्न के
उत्तर से
संतुष्ट
नहीं हैं तो
नियम 49 है , आधा
घंटे की चर्चा
आप लायें उसके
ऊपर करें क्या
दिक्कत है
इसमें।
(व्यवधान)
प्लीज।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
जो क्लेरिफिकेशन
पूछा कि
अवधिपार ऋण की
कितनी राशि
वसूल की है वो
तो उत्तर
दें।
श्री अध्यक्ष:
मंत्री को मैं
मजबूर नहीं कर
सकती। यह आसन मंत्री
को मजबूर नहीं
कर सकता।
श्री
अमराराम (धोद): आपके
सवाल का उत्तर
तो दे दें।
श्री अध्यक्ष:
यह आसन मंत्री
को मजबूर नहीं
कर सकता कि वो
क्या जवाब
दें क्या
नहीं दें उन्होंने
जो जवाब दिया
वो सुन लिया
मैंने और आपके
पास विकल्प
है नियम 49 में
आइये आप।
श्री मदन
दिलावर:
मैं दूंगा
जवाब साहब।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
इनकी पीड़ा को
कम करना चाहता
हूं।
(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय ने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
मंत्री जी।
श्री मदन
दिलावर:
मैं इनकी
पीड़ा को कम
करना चाहता
हूं।
अध्यक्ष
महोदय हमने 30
बकायादार जो
डेगाना बैंक के
अन्दर थे उन
सबको हमने
नोटिस दिया
है।
श्री
संयम लोढ़ा:
अध्यक्ष
महोदय, ये
मुख्यमंत्री
जी विराजमान
हैं
आपने अगला प्रश्न
पुकार लिया है
और मंत्री इस
तरह से
अनुशासनहीनता
कर रहे हैं।
श्री मदन
दिलावर:
और मैं एक-एक
बताना चाहूंगा
और ये
जस्टिफाई
करें कैसे
डूबेगा बैंक। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
के द्वारा आसन
की अवहेलना की
जा रही है ।
श्री
संयम लोढ़ा:
(व्यवधान)
मुख्यमंत्री
के इशारे पर
मुझे सवाल
पूछने से रोका
जा रहा है।
श्री मदन
दिलावर: (व्यवधान)
वारंट जारी कर
दिया गया है । मूलाराम
मेवाराम के 5500
रुपये बकाया
हैं उनको 12/99 का नोटिस
जारी कर दिया
है।...
श्री
बृजकिशोर
शर्मा(जयपुर
ग्रामीण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी को
कहिये अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
जुबेर खान:
आसन ने अगला
प्रश्न
पुकार लिया है
मंत्रीजी आसन
की अवहेलना कर
रहे हैं
प्रताड़ना
दीजिये अध्यक्ष
महोदय इनको।
प्रताडि़त
कीजिये इनको।
श्री
रामचंद्र
सराधना(जमुवारामगढ़):
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी को
बैठाइये।
श्री मदन
दिलावर: इनको
हमने नोटिस
जारी कर दिया
है।
रघुनाथ
पुत्र श्री
हेमाराम
मेघवाल, जालसूखुर्द
के 45,574 रुपये हैं
इनको नोटिस
जारी कर दिया
गया है।(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी क्या
आपसे ऊपर हैं
क्या?
श्री
संयम लोढ़ा:
राजस्थान की
विधान सभा है
इसको
मदारियों का
अखाड़ा मत
बनाइये।
श्री मदन
दिलावर: (व्यवधान)
वारंट जारी कर
दिये गये हैं।
गंगाराम पांचूराम
जाट...।
श्री अध्यक्ष: माननीय
मंत्रीजी, इस
शोर-शराबे में
आपकी आवाज तो
सुनाई दे नहीं
रही है आप क्या
बोल रहे हैं । मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया है
अब आप शांति
से बैठें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(सरकारी मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ये तो
माननीय सदस्य
की पीड़ा को
दूर करने का
प्रयास कर रहे
हैं।
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
अगला प्रश्न
पुकार लिया है
।
प्रश्न
संख्या-6 (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह सदन
इस तरीके से
नहीं चलेगा,
मैं पहले कह
देता हूं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
(व्यवधान) +++
श्री
नरपतसिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, (व्यवधान)
बैंक के डूबने
की बात कही है
(व्यवधान)
जस्टिफाई तो
करना
पड़ेगा। यह हाउस
में रिकार्ड
पर आया है।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: प्रश्न
संख्या 6
पुकारा जा
चुका है यह
सरकार इस
प्रश्न से
बचना चाहती
है।
श्री
जुबेर खान: प्रश्न
संख्या 6 का
जवाब
दिलवाइये।
श्री मदन
दिलावर: इन्होंने
बैंक के डूबने
की बात कही है
माननीय मिर्धाजी
ने बैंक के
डूबने की बात
कही है मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
बैंक नहीं
डूबेगा।
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
हाउस टैक्स
पर सवाल है
आपने पुकार लिया
है और सरकार
उसका जवाब...।
(व्यवधान) मुख्यमंत्री
के इशारे पर
खड़े हो रहे
हैं ये।
श्री अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। अब आप
पूछिये।