bhs/usc/11.00/1a/2.4.2007(1)

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 7      बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का तैंतीसवां दिवस   संख्‍या 20

 

 

सोमवार, 2 अप्रैल, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल मीणा।

जनजाति उपयोजना क्षेत्र के आवासीय विद्यालयों/छात्रावासों में रिक्‍त पद

252. श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(।) जनजाति उप योजना क्षेत्र के अन्‍तर्गत कितने आश्रम छात्रावास तथा कितने आवासीय विद्यालय संचालित है? उक्‍त छात्रावासों में वार्डनों एवं सह वार्डनों तथा अध्‍यापकों के कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा कितने पद रिक्‍त हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या सरकार आश्रम छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में स्‍वयं का कैडर बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा): (1) जनजाति उप योजना क्षेत्र में 230 आश्रम छात्रावास एवं 9 आवासीय विद्यालय संचालित हैं।

उक्‍त छात्रावासों में वार्डनों, सह वार्डनों तथा अध्‍यापकों के स्‍वीकृत एवं रिक्‍त पदों का विवरण परिशिष्‍ट – ‘पर संलग्‍न है।

(2) इस संबंध में राजस्‍थान अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री समिति द्वारा की गई सिफारिश का परीक्षण किया जा रहा है।

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि 230 आश्रम छात्रावास और 9 आवासीय विद्यालय जो टीएसपी क्षेत्र में संचालित हैं वहां पर छात्रावासों में और आवासीय विद्यालयों में एडमिशन के लिए 70 प्रतिशत और 90 प्रतिशत से जो बच्‍चे पास होते हैं उन बच्‍चों का वहां एडमिशन होता है।  मैं माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि कुल 296 पद हैं अधीक्षक ग्रेड –II और कोच के III ग्रेड के इनमें से 62 पद रिक्‍त हैं । मैं जानना चाहता हूं कि इन 62 पदों को कब तक भरा जाएगा और दूसरा मैं यह जानना चाहता हूं कि वार्डन और अध्‍यापक के स्‍वीकृत 144 पदों में से कुल 90 पद खाली हैं तो मैं यह पूछना चाहता हूं कि इन रिक्‍त पदों को कब तक भरा जाएगा और मैं यह भी जानना चाहता हूं कि इन अध्‍यापकों के और कोच के नहीं होने की वजह से इन आवासीय विद्यालयों में जीरो प्रतिशत से दस प्रतिशत रिजल्‍ट रहा है तो ये कब तक भरने का प्रयास करेंगे? दूसरा प्रश्‍न यह है है कि इन्‍होंने जो जवाब दिया है अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री कमेटी ने जो सिफारिश की है उसका मैं परीक्षण करवा रहा हूं । ये पिछले तीन सालों से सिफारिश करते आ रहे हैं ये कब तक परीक्षण पूरा करेंगे और कब तक परीक्षण करके और इस सिफारिश को लागू करेंगे जिसमें अभी तक जो शिक्षा विभाग से अध्‍यापक और काच को ये प्रतिनियुक्ति पर लेते हैं जहां से साल भर तक अध्‍यापक आवासीय विद्यालय और छात्रावासों में नहीं आते हैं तो क्‍या मंत्री जी अपने विभाग का खुद का स्‍वयं का कैडर निर्माण करने की मंशा रखते हैं और रखते हैं तो ये कब तक पूरा करेंगे?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आवासीय विद्यालय और आश्रम छात्रावासों में पदों की रिक्तियां हैं और उसके लिए हमने पूरा प्रयास किया है।  गत दो वर्षों में भी हमने प्रयास करके इस बात की पूरी कोशिश की है। परंतु अभी आपने बताया कि ये कब तक भरे जाएंगे, ये पद नहीं होने की वजह से जो आवासीय विद्यालय में छात्रों के साथ और उनके परीक्षा परिणाम को देखते हुए हमें बड़ा दुःख भी है और आपको भी सबको महसूस हो रहा होगा। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए परामर्शदात्री समिति की बैठक में भी यह बारबार प्रश्‍न आया कि स्‍वयं का कैडर बनाया जाए और हमने जो प्रयास किये हैं दो वर्ष में इनका भी उल्‍लेख करना चाहूंगा कि कुल हमारे पद 207 हैं और इन 207 पदों में से हमने 78 पद अभी भरे और रिक्‍त हैं 129 और उसके अन्‍तर्गत हमने कोशिश की थी 2004-05 में कि अध्‍यापक हमको उपलब्‍ध हो जाए और दुर्गम स्‍थानों पर आवासीय विद्यालय बने हुए हैं और इसलिए दो सौ रुपये अधिक राशि इनको दी जाए। यह भी हमने प्रयोग किया लेकिन इसमें भी अध्‍यापक आये नहीं और रुचि दिखायी नहीं । दूसरा मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हमने यह भी कोशिश की कि सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों की आयुसीमा और बढ़ाकरके इनके भी आवेदन लिये जाएं और इस दृष्टि से 63 वर्ष तक की आयु के भी हमने आवेदन मांगे थे और उसमें चार अध्‍यापक आये और उसमें भी हमने पूरी कोशिश की ।  दूसरा वॉक इन इंटरव्‍यु के द्वारा यानी इच्छित जो अध्‍यापक व्‍यक्ति आये उसके लिए भी हमने कोशिश की और उसके अन्‍तर्गत हमने बयालीस पद भरे हैं और इन बयालीस पदों के भरने के बाद में हमने और भी सोचा है कि एनजीओ यानी गैर सरकारी संस्‍था के द्वारा भी इन पदों को भरा जाए ताकि इन बच्‍चों की सुविधा ठीक ढंग से हो सके। इसमें भी हमने पूरे प्रयास किये लेकिन इसमें भी हमें परिणाम ठीक नहीं लगे। इसके बाद हमने कोशिश की है कि आने वाले समय अपना अलग से कैडर की बात आपने की है और मैं भी चाहता हूं शुरू से उसमें भी प्रयत्‍नरत हैं लेकिन स्‍वयं के कैडर में यह छोटा सा विभाग है और छोटे से विभाग में पदोन्‍नति के इनके चांसेज कहां बनेंगे जो कर्मचा‍री नियुक्‍त किये जाएंगे उनकी क्‍या परिस्थिति होगी इसके बारे में हमने मुख्‍य सचिव जी और हमारे प्रिंसीपल सेकेट्री, टीएडी और वित्‍त विभाग के सेकेट्री और डीओपी सेकेट्री इनके साथ 29 मार्च को मी‍टिंग करके इसके बारे में चर्चा भी की है और उसमें बहुत चिंतित हैं और आज फिलहाल मुख्‍यमंत्री महोदया से भी चर्चा हुई कैबिनेट मीटिंग में इस विषय को रखा और मैं आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि जब तक हमारा यह कैडर नहीं होता है तब तक की अभी जुलाई से व्‍यवस्‍था ठीक ढंग से हो इसके लिए हम विद्यार्थी शिक्षा मित्र योजना के तहत इन अध्‍यापकों को जुलाई तक हम पूरा भर करके पूरी व्‍यवस्‍था कर देंगे और साथ ही साथ जो कैडर अलग से जिसके लिए हमने चर्चा की है वह भी निश्चित रूप से आने वाले समय में मुख्‍यमंत्री महोदया से चर्चा हुई है अभी चीफ सैक्रेटरी से भी हमारी चर्चा हुई है इसके बारे में स्‍थायी निदान हो इसके लिए हमारा पूरा प्रयास है और हम कर देंगे । ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो आ गया फिर भी मैं मौका दे रही हूं मूल प्रश्‍नकर्ता को एक और सप्‍लीमेंट्री पूछने के लिए। 

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने बताया कि स्‍वयं का कैडर बनाने के लिए आगे प्रमोशन के कोई चांस नहीं है मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि जैसा कि आपके विभाग में टीएडी में उप शिक्षा निदेशक का पद आपके वहां कार्यरत है तो क्‍यों नहीं आप अपने स्‍वयं का कैडर बना करके और खुद के टीचर भर्ती करके उनको लिया जाए तो निश्चित रूप से आपके विभाग में काफी पद शिक्षा विभाग के भी चल रहे हैं तो आप उसका स्‍वयं का कैडर बनाने का प्रयास करें और उसका स्‍वयं का कैडर बन जाएगा तो जो नब्‍बे पद खाली हैं और भी दूसरे पद खाली हैं वो पद खाली नहीं रहेंगे। दूसरा टीएसी की बैठक में जो भी प्रस्‍ताव पारित करके सिफारिश की गई है वो आप कब तक लागू करेंगे? यह मैं जानना चाहता हूं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): उसके बारे में निवेदन किया ही है स्‍थायी रूप से हम समाधान कर रहे हैं और आज आश्‍वस्‍त किया गया हमें भी कि निश्चित रूप से इस बारे में स्‍थायी समाधान स्‍वयं का कैडर किस तरह से क्‍या होगा क्‍योंकि इसका बहुत परीक्षण करके ही करना पड़ेगा स्‍थायी समाधान। मैं भी बार-बार चिन्‍तन यही कर रहा हूं। आवासीय विद्यालय का स्‍थायी रूप से समाधान नहीं होता तब तक माननीय सदस्‍य आवासीय विद्यालय और आश्रम छात्रावासों की जो मांग कर रहे हैं इन बच्‍चों के साथ में जो आज परिस्थिति हो रही है उसको ध्‍यान में रखते हुए उसी बात को ध्‍यान में रखते हुए हम आगे मांग करें ताकि जब तक ये स्‍थायी समाधान हो जाए उसके बाद में जितनी परिस्थिति होगी उसके अनुसार करेंगे और जैसा कि परामर्शदात्री के बिन्‍दुओं के बारे में चर्चा की है एजेंडा और जिसकी क्रियान्विति के रूप में समय-समय पर हर तीन महीने में मीटिंग लेते रहते हैं उसके बारे में निर्णय लेकर के आपको निश्चित रूप से अवगत करा रहे हैं और करा दिया जाएगा और आने वाले समय में जो भी बिन्‍दु लेते हैं उसके क्रियान्विति निश्चित रूप से हो यह भी मैं आश्‍वस्‍त करता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: दे दिया जवाब सब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह चौथा बजट सरकार ने पेश कर दिया है।  अध्‍यक्ष महोदय, आबू रोड के आवासीय विद्यालय में ...।

श्री अध्‍यक्ष: आबू रोड कहां आ गया यहां?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इसी में है 9 में आबू रोड भी है। ये 9 के अन्‍दर सब प्‍लान में आबू रोड भी है पूछो मंत्री जी को।  क्‍या बात कर रहे हैं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मना नहीं कर रहे हैं,   है न । ये सबके लिए व्‍यवस्‍था है आप जो चिंता कर रहे हैं उससे भी आगे बढ़ करके ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमारे जिले का नहीं पूछेंगे क्‍या?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और निश्चित रूप से उसका स्‍थायी समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आप तो प्रयोग कर रहे हैं लगातार और चिन्‍ता प्रकट कर रहे हैं और दुःख प्रकट कर रहे हैं ये चौथा बजट आ गया आपका। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ...।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आप तो चिन्‍ता कर रहे हैं, मैं इसका स्‍थायी करने का निवेदन कर रहा हूं और यह मैं करके रहूंगा। यह मैं विश्‍वास दिला रहा हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से ...।

श्री अध्‍यक्ष: जो सूचना थी सब दे दी आपने अब और क्‍या चाहते हैं आप?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाह रहा हूं कि आबू रोड का आवासीय विद्यालय जिसमें तीन सौ बच्‍चे हैं ..

 

कैलाश/    2.4.07  11.10  (1) 1b

 

न तो वहां पर वार्डन है, न वहां हैड मास्‍टर हैं और भीषण रूप से बच्‍चों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍होंने यह बात तो मान ली ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हैड मास्‍टर भी नहीं है, वार्डन भी नहीं है ।

श्री अध्‍यक्ष: मान ली ना उन्‍होंने यह बात ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): ... (व्‍यवधान) जो प्रयास किये हैं वह भी है और आने वाले समय में जुलाई में इसकी स्‍थाई रूप से व्‍यवस्‍था करेंगे । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): वहां हैड मास्‍टर और वार्डन दोनों ही नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, आप अंदाजा लगाइए कि उन छोटे छोटे बच्‍चों के साथ, यह सरकार उनके भविष्‍य के साथ किस रूप में खिलवाड कर रही है ।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें । माननीय मंत्री जी चाहे आप वार्डन भेजे चाहे हैड मास्‍टर भेजे, एक तो भेजे आप ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक तो भेजिए आप । यह कोई बात हुई क्‍या ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैंने कहा है कि निश्चित रूप से जुलाई से यह पूरी व्‍यवस्‍था हो जायेगी ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप कब तक व्‍यवस्‍था कर दोगे एक की यह बताओ आप (व्‍यवधान) ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी यह बताएं कि यह पद कब से रिक्‍त हैं । (व्‍यवधान)

प्रश्‍न संख्‍या 253

श्री अध्‍यक्ष: (व्‍यवधान) श्री जोगाराम पटेल । (अनुपस्थित)

(अनुपस्थित : कृपया आगे देखें)

श्री कान्‍ती प्रसाद मीणा (अनुपस्थित) श्री देवीशकर भूतडा (अनुपस्थित)  (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बताएं कि यह पद कब से रिक्‍त चल रहे हैं । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: .... श्री कान्‍ती प्रसाद, श्री नंदलाल मीणा । (व्‍यवधान) माननीय मंत्री जी मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है । माननीय सदस्‍यगण स्‍थान ग्रहण करें । मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, यह संपूर्ण उदयपुर डिवीजन के टीएसपी एरिया के लिये बहुत महत्‍वपूर्ण सवाल है और यह पद लंबे समय से रिक्‍त चले आ रहे हैं । माननीय मंत्री जी आप इसको जितना जल्‍दी हो त्‍वरित गति से इन पदों को भरे वरना पूरे ट्राइबल सब प्‍लान के छोटे छोटे, हमारे होनहार बच्‍चे, इस देश के भविष्‍य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड हो रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: मान तो लिया उन्‍होंने भर रहे हैं, कह तो दिया आपको । अंकित नहीं हो । श्री नंदलाल मीणा ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): वह तो भर दिया है, अध्‍यापक ही बाकी हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: वार्डन का तो भर दिया है ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मेरे पास जानकारी है वह भरा है । जो बाकी है उसका जुलाई से स्‍थाई समाधान करेंगे, पूरी व्‍यवस्‍था कर देंगे ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है और उन्‍होंने कह दिया है । श्री नंदलाल मीणा । कांती प्रसाद बोले क्‍यों नहीं । कान्‍ती प्रसाद का नाम पुकारा वह बोले क्‍यों नहीं । कहां है कान्‍ती प्रसाद ? कौन, कान्‍ती प्रसाद मीणा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): जी हां ।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोले क्‍यों नहीं उस समय ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): बोल दिया था  254

श्री अध्‍यक्ष: सोरी, सोरी, ठीक है । कान्‍ती प्रसाद मीणा । चिकित्‍सा मंत्री जी, अब आप बीच में नहीं बोले । आप स्‍थान ग्रहण करें कान्‍ती प्रसाद मीणा ।

प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र नारायणपुर(थानागाजी) का क्रमोन्‍नयन

254. श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या सरकार ने प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत करने हेतु कोई मानदंड निर्धारित किये हुए हैं ? यदि हां, तो मानदंडों की प्रति सदन की मेज पर रखें ।

(2) क्‍या सरकार प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर मानदंडानुसार पदस्‍थापित कार्मिकों को विभिन्‍न योजनाओं यथा मातृत्‍व जननी सुरक्षा, टीकाकरण, नसबंदी आदि के सफल संचालन हेतु पर्याप्‍त मानती है ? यदि हां, तो किस प्रकार एवं कितनी जनसंख्‍या पर ? मानदंडों की प्रति सदन की मेज पर रखें ।

(3) क्‍या सरकार ग्राम नारायणपुर (थानागाजी) जिसकी 40000 जनसंख्‍या है के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): (1) जी हां, मापदंडों की प्रति परिशिष्‍ठ अ' पर उपलब्‍ध है ।

(2) जी हां, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर पदस्‍थापित चिकित्‍सा अधिकारी, महिला स्‍वास्‍थ्‍य दर्शिका, नर्स श्रेणी द्वितीय एवं महिला स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता इन योजनाओं के क्रियान्‍वयन एवं सफल संचालन के लिए पर्याप्‍त है । सामान्‍य क्षेत्र में 30,000 एवं मरू/जनजाति क्षेत्र में 20,000 की ग्रामीण आबादी के लिए ये पद समुचित है । मानदंडों की प्रति परिशिष्‍ठ अ  पर उपलब्‍ध है ।

(3) निर्धारित ग्रामीण जनसंख्‍या आधारित मापदंड के अनुसार पंचायत समिति थानागाजी में एक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र की कमी है । आगामी वित्‍तीय वर्षों में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में क्रमोन्‍नत किये जाने हेतु समुचित वित्‍तीय प्रावधान उपलब्‍ध होने पर पंचायत समिति थानागाजी के एक प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत किये जाने पर विचार किया जाना संभव हो सकेगा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी निवेदन करना चाहता हूं कि आप उस पूरे क्षेत्र से वाकिफ हैं । आप वहां मौके पर भी गये थे पर आपने घोषणा नहीं की थी । इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि जब यह कस्‍बा सभी मानदंडों को पूरा कर रहा है तो इस पीएचसी को सीएचसी में अभी क्रमोन्‍नत कर इस सदन में विश्‍वास दिलाएं ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने अपने जवाब में कहा है ...

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मंत्री जी माननीय सदस्‍य का यह पहला ही सवाल लगा है चौथे बजट तक और यह सभी मापदंड भी पूरे कर रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको पैरवी करने की आवश्‍यकता नहीं है वह खुद ही कर लेंगे ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मेरे पडौसी भी हैं मैं पडौसी का धर्म भी   निभा रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, यह आपने कोई प्रश्‍न नहीं पूछा, यह कोई तरीका नहीं है आपका। यह कोई बात हुई, इस तरह पैरवी करने लग जायें ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): उसके लिये माफी लेकिन यह पहली बार ही लगा है ।

श्री अध्‍यक्ष: हां बोलिए मंत्री जी ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने जवाब में कहा पापुलेशन के हिसाब से एक सीएचसी की वहां आवश्‍यकता है और मैं खुद भी नारायणपुर जाकर आया था काफी बड़ा कस्‍बा है, आबादी भी काफी है और भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए मुझे लगता है कि वहां एक सीएचसी की आवश्‍यकता है इसलिए मैं सदन में माननीय सदस्‍य को यह आश्‍वासन देना चाहता हूं कि निश्चित रूप से आपकी भावनाओं को ध्‍यान में रखा जायेगा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): मंत्री जी मैं आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो आपका बहुत पौंचा है कि विचार किया जाना संभव   होगा । आपका जवाब तो बड़ा पौंचा था लेकिन खैर, अब आपने घोषणा कर दी ठीक है ।

प्रश्‍न संख्‍या 255

श्री देवी शंकर भूतडा (अनुपस्थित)

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें)

श्री नंदलाल मीणा ।

विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में पुन: विद्युत संबंध हेतु लंबित प्रकरण

256. श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): क्‍या ऊर्जा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जून, 2004 से अब तक विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में कितने विद्युत कनेक्‍शन काटे गये ? पंचायतवार विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(2) वर्तमान में कांटे हुए कनेक्‍शनों को पुन: जुडवाने के लिए कितने आवेदन प्राप्‍त हुए ? इनमें से कितने कनेक्‍शनों को पुन: जोड दिया गया तथा कितने कनेक्‍शन जोडे जाना शेष है ? पंचायतवार विवरण सदन की मेज पर रखें ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): (1) विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में माह जून, 2004 से फरवरी, 2007 तक कुल 3894 विद्युत कनेक्‍शन काटे गये । पंचायतवार विवरण परिशिष्‍ट अ पर उपलब्‍ध है ।

(2) विधान सभा क्षेत्र प्रातापगढ में उक्‍त कटे हुए विद्युत कनेक्‍शनों में से उन्‍हें पुन: जुडवाने हेतु 2312 आवेदन प्राप्‍त हुए हैं । इन सभी आवेदकों के कनेक्‍शन पुन: जोड दिये गये हैं । पंचायतवार विवरण उपरोक्‍त परिशिष्‍ट अ  में दर्शाया गया है ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि प्रतापगढ उप खंड में 53 ग्राम पंचायतों में 3894 वर्ष 2004 से 2007 तक विभाग द्वारा कुओं के कनेक्‍शन काटे गये हैं और 2312 कनेक्‍शन फरवरी, 2007 तक वापस इन्‍होंने जोडे हैं । अध्‍यक्ष महोदय, पिछले चार साल से लगातार अकाल पड रहा था और कुओं में पानी नहीं होने की वजह से काश्‍तकारों ने स्‍वेच्‍छा से अपने कनेक्‍शन कटवाये थे । राज्‍य सरकार ने बाद में निर्णय लिया था कि जो काश्‍तकार दुबारा कनेक्‍शन कराना चाहते हैं वह आवेदन कर सकते हैं । यह संपूर्ण आदिवासी क्षेत्र है और जो ग्राम की सूची मंत्री महोदय ने संलग्‍न की है उनमें से अधिकांश काश्‍तकार आदिवासी कृषक हैं । उनकी जानकारी में नहीं है कि पुन: कनेक्‍शन कराने की कितनी राशि ली जायेगी या निशुल्‍क कनेक्‍शन किये जायेंगे । मैं मंत्री महोदय जानना चाहता हूं कि क्‍या जो कटे हुए कनेक्‍शन बाकी हैं विभाग द्वारा इन काश्‍तकारों को पुन: कनेक्‍शन कराने के लिये आवेदन मांगेगे या उनके आवेदन पर ही आप कनेक्‍शन करेंगे । अगर मान लो आवेदन करते हैं तो इन कनेक्‍शनों को कब तक री कनेक्‍ट करने के आदेश जारी करेंगे ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जितने भी कनेक्‍शन कटे थे नोन पेमेंट आफ बिल्‍स की वजह से उनमें से जितने लोगों ने एप्‍लीकेशंस दे दी है उनके कनेक्‍शन कर दिये हैं । यदि कोई और भी एप्‍लीकेंट्स आयेंगे तो उनके कनेक्‍शन भी तुरंत कर दिये जायेंगे ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक और सवाल है यहां पर जितने भी कनेक्‍शन हुए हैं वह फ्लैट रेट पर हुए हैं और फ्लैट रेट की राशि इतनी है कि वह काश्‍तकार उसका भुगतान नहीं कर सकता क्‍योंकि हमारे वहां पत्‍थरीला एरिया होने की वजह से पानी बहुत कम है, घंटा आधे घंटा तीन हार्स पावर की मोटर चलती है इसलिए वह पैसा ज्‍यादा है । वर्तमान में इन सब के मोटर लग जाती है तो काश्‍तकारों को भी रिलीफ मिलेगी ।

श्री अध्‍यक्ष: तीन हार्स पावर की तो कम ही है ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): तीन की है, कुओं में पानी नहीं है और इन्‍होंने फ्लैट रेट पर कनेक्‍शन किये हैं तो जो फ्लैट रेट के कनेक्‍शन किये गये थे और पानी की कमी की वजह से वह भुगतान नहीं कर पाये, पैसा ज्‍यादा आया तो क्‍या राज्‍य सरकार इन गरीब आदिवासियों पर पुनर्विचार कर के जो फ्लैट रेट से पैसा चार्ज किया जिसकी वजह से उन्‍होंने पेमेट नहीं किया है उन पैसों को माफ करने की व्‍यवस्‍था करेंगे ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जो भी फ्लैट रेट के कंज्‍युमर हैं उनके पास आप्‍शन है वह मीटर कैटेगिरी में जा सकते हैं .........

 

ans/usc  11.20  1c  1.4.2007

 

उसके पास ऑप्शन है।  

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरी बात बताऊं।

श्री अध्‍यक्ष: यह आप गलत कह रहे हैं।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे घर पर 6 महीने  पहले दोनों कुओं के मीटर आकर रख दिये और परसों ही  उसका कनेक्‍शन हुआ है, अब तक 6 महीने का जो पेमेंट हे फ्लेट रेट से, मुझे करना पडा। सवाल यह है कि मीटर तो आ गए परनतु क्‍या काश्‍तकार के कुए पर मीटर लगे है कि नहीं लगे हैं ? आपने घरों पर ले जाकर रख दिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अमराराम जी भी साथ ही पूछ लेते हैं।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि कि जो कटे हुए कनेक्‍शन को दस साल में रिकनेक्‍शन करने का आदेश है लेकिन उसमें शर्त लगा रखी है कि उसी जगह होगा क्‍योंकि पानी खतम होने पर कनेक्‍शन कटा था, दूसरी जगह उसी खेत में या उसी खातेदारी में कहीं भी कनेक्‍शन लेता है तो वह पहले जहां  कटा था वहां कनेक्‍शन कराएंगा और फिर वहां ले जाएगा इससे जो दुविधा है, क्‍या मंत्री महोदय इस शर्त को  कि रिकनेक्‍शन  जो कटे हुए कनेक्‍शन को रिकनेक्‍शन कराने का दस साल की छूट दी हे उसमें उसी स्‍थान पर कनेक्‍शन लेने की जो पाबंदी है क्‍या इसको हटाकर किसान के हित में जहां भी वह खातेदारी में जहां भी वापिस रिकनेक्‍शन लेता है वहां देने की परमीशन देंगे, यह मंत्री जी बताए ? 

श्री अध्‍यक्ष: हां जी मंत्री जी, मंत्री महोदय जवाब दीजिए।  

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जो रिकनेक्‍शन का मामला है, शिफ्टिग के नाम पर बहुत मिसयूज हुआ, हमारे बहुत पेण्डिग कनेक्‍शन है, हमें लोगों को बहुत देने हैं, तो जितने भी पेण्डिग, जा हमने दस साल की अवधि बढ़ाई है उसे हमने रिकनेक्‍शन के लिए दस की बजाए पन्‍द्रह साल कर दिया है।

श्री अमराराम (धोद): आप उसी जगह पर क्‍यों पाबंदी, इसमें कम्‍पनी का भी नुकसान है।

श्री अध्‍यक्ष: सवाल यह है कि उसी जगह (व्‍यवधान) देकर फिर शिफ्ट करते हैं।

श्री अमराराम (धोद): किसान का भी नुकसान है1 वह अपना कनेक्‍शन कहीं भी ले अपने खातेदारी में, आपको क्‍या एतराज है ?(व्‍यवधान) डबल नुकसान होगा। पहले वहां कनेक्‍शन होगा , वहां पोल खड़े करेंगे जहां पानी नहीं है और वहां फिर शिफ्ट करेंगे इससे तो उलटा कम्‍पनी को नुकसान है, किसान को नुकसान है, उसमें उसको छूट दीजिए।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां बस ठीक है, देंगे जवाब, दे रहे हैं  जवाब ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जहां भी कनेक्‍शन कटा है वहीं पर रिकनेक्‍शन होगा, पंचायत समिति का एक हमने जो प्रावधान किया था उससे बाहर नहीं जा सकते।

श्री अध्‍यक्ष: वहां तो पानी खतम हो गया, उसके पास में अपना खोद लिया, उसमें आपको क्‍या आपत्ति है, उसी खसरा नम्‍बर में दूसरा है तो आपको क्‍या आपत्ति है ?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): उसी खेत में है तो कोई समस्‍या नहीं है, सेम खेत है, उसमें काई प्रोबलम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: उसी खसरा नम्‍बर में है। उसी खसरा नम्बर में दूसरा उसने खोद लिया, पहले में पानी खतम हो गया तो क्‍या आपत्ति है ?

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आदेश अभी...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले, बात का जवाब आने दीजिए।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, अगर सेम खसरा नम्‍बर में, उसमें कोई समस्‍या नहीं है।

श्री अमराराम (धोद): खेत में खसरा नम्‍बर....

श्री अध्‍यक्ष: फिर कैसे कह रहे है यह ?

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, खसरा नम्‍बर तो कुए का होता है, यह खसरा नम्‍बर में दूसरा कुआ हो ही नहीं सकता। 

श्री अध्‍यक्ष: पहला नम्‍बर तो खेत का....(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): खेत की खातेदारी में, उसी किसान की खातेदारी में कहीं भी कुआ है, खसरा नम्‍बर तो कुए का खसरा नम्‍बर है उसमें दूसरा कुआ बन ही नहीं सकता वह उतना ही नम्‍बर होता है। यह तो किसान अपने खेत में  अपने उसी खातेदारी में कही भी कुआ लेता है आपको क्‍या एतराज है उसमें ? उसका कनेक्‍शन, उसका खेत है उसमें वह कनेक्‍शन लेता है आपने केवल यह आदेश दे रखा है कि उसी जगह, उसी खेत में उसी कुए पर उसमें कनेक्‍शन होगा, शिफ्ट कराना होगा तो दुबारा कराना होगा यह क्‍या बात हुई ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): इस खेत के अंदर अगर कुआ है या टयूबवैल है, उसी खेत के अंदर दूसरा बोरवैल करके कनेक्‍शन ले सकते हैं, उसके तो प्रावधान है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें इतना सा निवेदन है कि सैटलमेंट में कुए का खसरा नम्‍बर छोटा कर दिया तो खसरा नम्‍बर जब किसान का अलग हो गया उस जगह तो दूसरा कुआ खुद नहीं सकता, तो पुराना खसरा नम्‍बर बड़ा खेत है उसमें कहीं भी आपको अलाऊ करना पड़ेगा, नम्‍बर एक।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो कह रहे हैं ना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं अध्‍यक्ष महोदय, सेटलमेंट में कुए का चाहे छोटा सा खसरा नम्‍बर अलग बना दे, छितम्‍भे काट दिए उसमें दूसरा कुआ कैसे खुदेगा मंत्री महोदय ? अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा किसानों का मुद्दा यह है कि पहले बिजली वाले कहीं भी कनेक्‍शन ले लो किसानों को कनेक्‍शन दे देते थे। पुराने जमाने में गैर खातेदारी में कनेक्‍शन हो गया आज उनको अगर वह शिफ्ट कराना चाहते हैं खातेदारी में तो यह कहकर मना करदेते है कि यह तो 20 साल पहले गैर खातेदारी में हुआ था अब इसको खातेदारी में नहीं देंगे, यह राइडर हटाना चाहिये।  जब तो आप किसी भी एपलीकेशन पर देते थे, आज यह, किसी आदमी ने 15 साल पहले कुए का कनेक्‍शन लिया और वह कुआ सूख गया, अब उसको शिफ्ट कराना चाहता है अपने खातेदारी के खेत में, आप यह कहकर मना कर रहे हैं क्‍योंकि 20 साल पहले  कनेक्‍शन गैर खातेदारी का था इसलिए इसको खातेदारी में शिफ्ट नहीं करेंगे, यह राइडर हटाइये, किसान के हित में है मंत्री महोदय।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा):अध्‍यक्ष महोदय, दो साल तो ओनरशिपरहित  तो होना ही चाहिये, उसके बाहर हम नहीं जा सकते। दो साल की आपकी ओनरशिप होनी चाहिये। आपके पंचायत समिति के अंदर कोई भी आपका खसरा है, दो साल की ओनरशिप होनी चाहिये।

श्री अमराराम (धोद): ओनरशिप क्‍या है ? (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री महोदय,  एक किसान ने 30 साल पहले एग्रीकल्‍चर कनेक्‍शन लिया   वह आपने गैरखातेदारी में दे दिया, वह कुआ सूख गया अब वह शिफ्टिंग चाहता है दूसरी जगह आप यह मना करके, शिफ्टिंग नहीं कर रहे, उसको कनेक्‍शन नहीं दे रहे क्‍योंकि आपका तो गैर खातेदारी में कनेक्‍शन है इसलिए आपको नहीं देंगे। आज तो वह खातेदारी में ले रहा है और आपने विधिवत तरीके से उसको कनेक्‍शन दिया है, यह तो अध्‍यक्ष महोदय, बहुत बड़ा अन्‍याय है किसानों के साथ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 20 वर्ष वाली खातेदारी करवा लो ना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आप सरकार को निर्देशित करिये कि इस संबंध में काई न कोई कदम उठाए।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, गैर खातेदारी खातेदारी करवाई जा सकती है कौनसा कानून आड़े आ रहा है उसमें।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय,जो खारा पानी है जहां मीठा पानी लाना चाहते हैं, दो साल तक वह इंतजार करें कि खारा पानी है जहां 3 किलोमीटर पर मीठा पानी है दो बिस्‍वा जमीन लेकर टयूबवैल बनाकर, यह जो दो साल की पाबंदी लगाते है कि दो साल तक वह इंतजार करें, जहां मीठा पानी से  दो-दो, तीन-तीन किलोमीटर से अपने खेत में लाकर कर रहे है इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन है कि यह पाबंदी हटाए कि दो साल की खातेदारी होगी, वरना किसान को नुकसान होता है क्‍योंकि पडौस में  खारा पानी हो जाता है तो नजदीक से मीठा पानी लान के लिए परेशानी है। काई भी अपना कनेक्‍शन कहीं भी ले, किसी भी जमीन में ले, इसमें सरकार को क्‍या एतराज है ? (व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): अध्‍यक्ष महोदय, एक मेरा क्‍वेश्‍चन है।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दे रहे हैं मंत्री जी।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): इससे संबंधित छोटा सा है। मंदिर माफी की जमीन में कई किसानों ने पहले कनेक्‍शन ले लिया और उसमें कुआ सूख गया दूसरा बोर उसने करवाया था उसको दुबारा परमीशन के लिए लिखा जाता है एक तो, एक उसी कुए में अगर कनेक्‍शन कट गया और दुबारा रिकनेक्‍शन लिया जाता है तो भी उसको कनेक्‍शन नहीं दिया जाता है, जब एक बार अनापत्ति ले ली तो बार बार लेने की जरूरत नहीं हे।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जितने इम्‍पोरटेंट हमारे कन्‍ज्‍यूमर है शिफ्टिंग के उतने ही इम्‍पोर्टेंट  है जो लोग पेण्डिग कनेक्‍शन, इतने वर्षों से  जो वेट कर रहे हैं। शिफ्टिंग के नाम पर जो मिसयूज हो रहा है..We don’t want to allow that misuse. आपके जो पेण्डिग कनेक्‍शन है उसको आप रोकना चाहते हैं क्‍या? कांग्रेस के, आपकी सरकार के समय में माननीय सदस्‍य, आपके तो शिफ्टिंग अलाऊ ही नहीं थी।

श्री अमराराम (धोद): आपने तो दिया ही नहीं। 31 मार्च तक सबको देने का किया था, आपने एक नहीं दिया। लोगों को, किसानों को, किसानों को बल्‍ब दिया है। (व्‍यवधन) 31 मार्च 2007 को पेण्डिग खतम करने की आपने घोषण की थी।

श्री अध्‍यक्ष: श्री टीकमचंद कांत।

श्री अमराराम (धोद): मंत्री महोदय बैठे हैं, आज तक उसका इम्‍पलीमेंट नहीं किया। यह केवल ट्विस्‍ट कर रहे हैं1 31 मार्च,2007 को जितनी पेण्डिग थी सबको कनेक्‍शन जारी, 31 मार्च,2007 का किया था,आज तक सरकार ने नहीं किया, केवल बहाना करते हैं और किसानो को धोखा दे रहे हैं।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): एक साल से कोई कनेक्‍शन नहीं दिया। (व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): मेरे प्रश्‍न का जवाब मंत्री जी, मैंने भी क्‍वेश्‍चन किया था उसका जवाब तो दिया नहीं।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): एक साल से कोई  कृषि कनेक्‍शन नहीं...( व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): मंदिर माफी की जमीन के लिए मैंने पूछा था मंत्री जी से, मंत्री जी ने ध्‍यान ही नहीं दिया।  

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): (व्‍यवधान) नोटस जमा किया था। उन कनेक्‍शनंस को बेन कर दिया गया, दो साल हो गए बेन करे हुए, किसानों ने 60-60 हजार, 70-70 हजार रूपये डिमांड नोटिस जमा करा रखे हैं, उन बेन को सरकार कब तक खोलेगी मंत्री महोदय बताए?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल से हमारी सरकार ने जितने कनेक्‍शन दिए, पाँच साल में कांग्रेस सरकार ने कनेक्‍शन नहीं दिए और हम एक लाख कनेक्‍शन से ज्‍यादा क्रोस कर चुके हैंऔर अभी भी एक अप्रैल के बाद...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने तो, आपकी सरकार ने इस सदन में कहा था पहले बजट सत्र के अंदर। घनश्‍याम तिवाडी जी जब जवाब दे रहे थे, जितने कनेक्‍शन है, जितनी एपलीकेशन है सारे दे देंगे और यह (व्‍यवधान) पहले आओ, पहले पाओ। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अब नये कनेक्‍शन कब खोलेंगे, अब तो आपने पूरा बैन लगा रखा है

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): नया वित्तिय वर्ष 1 अप्रैल को शुरू होता है, नया वित्तिय वर्ष शुरू हो गय, कनेक्‍शन खोल दिये जाएंगे। (व्‍यवधन)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत। 

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): कनेक्‍शन खुल गए है, आपको ज्ञान नहीं होगा, कनेक्‍शन खुल चुके हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत। 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट कवेश्‍चन, टीकमचंद कांत।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन 257

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257

सिणधरी-जालौर राज्‍य उच्‍च मार्ग का संधारण।

  257. श्री टीकमचंद कांत(सिवाना): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

  (1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य उच्‍च मार्ग 16 के सिणधरी से जालौर तक का हिस्‍सा सीमा सड़क संगठन (ग्रीप) को मरम्‍मत हेतु सुपुर्द किया गया है ?यदि हां तो अब उस सड़क की क्‍या स्थिति है ?

  (2) क्या यह सही है कि सीमा सड़क संगठन उक्‍त सड़क का रख रखाव सही तौर पर नहीं कर पा रहा है ?

  (3) क्‍या सरकार इस हिस्‍से को सार्वजनिक निर्माण विभाग को पुन: सुपुर्द करने का विचार रखती है यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) जी हां, उक्‍त सड़क की सामान्‍यत: स्थिति संतोषजनक नहीं है।

  (2) जी हां। वर्तमान में ग्रेफ के अधीन इस सड़क का रख रखाव सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। सड़क का रख रखाव सीमा सड़क संगठन के पास होने से रक्षा मंत्रालय के पास उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवम पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

  (3) सार्वजनिक निर्माण विभाग को इस हिस्‍से की पुन: सुपुर्दगी केन्‍द्रीय सरकार की नीति पर निर्भर करेगी।

 

दुर्गा/चौहान 020407 1130 1d

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, रक्षा मंत्रालय के पास वित्‍तीय संसाधनों और पारस्‍परिक प्राथमिकता की, आपको क्‍या तकलीफ हो रही है इन बातों की जो आप यह जवाब दें। आप उनको दिखाओ कि यह सड़कें खराब हैं, करो ठीक इन्‍हें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हमने एक-दो बार नहीं, 20 पत्र लिखे हैं। मुख्‍य मंत्रीजी से मिलकर मेरे स्‍तर पर और मुख्‍य अभियंता स्‍तर पर और उसके बाद जो उनका जवाब आता है, जवाब में वे यह कहते हैं कि हमारी...।

श्री अध्‍यक्ष: तो जिम्‍मेदारी उनकी है तो फिर उनके वित्‍तीय संसाधनों की यहां पर क्‍यों दुहाई दें।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़क स्‍थानान्‍तरित क्‍यों हुई और कब हुई और इसकी लम्‍बाई कितनी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब स्थिति संतोषजनक नहीं है तो सरकार या विभाग ने इस हेतु क्‍या कार्यवाही की। इसी प्रकार से आपने कहा कि यदि रक्षा मंत्रालय के पास संसाधन नहीं हैं तो हमारी सड़क को स्‍थानान्‍तरित करने के पीछे हेतु क्‍या था। पारस्‍परिक प्राथमिकता, इसका क्‍या तात्‍पर्य है, मैं नहीं समझ पाया, पारस्‍परिक प्राथमिकता। एक और प्रश्‍न पूछ लूं, उसके बाद दूसरे पर आता हूं। और आपने कहा कि यह केन्‍द्र सरकार की नीति पर आधारित है। और यदि केन्‍द्र सरकार की नीति हमारे अनुकूल नहीं है तो इस नीति को बदलने के लिये हमने केन्‍द्र सरकार पर क्‍या-क्‍या दबाव डाला, या उनसे बातचीत क्‍या की?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़क राजस्‍थान के अन्‍दर सामरिक महत्‍व की सड़क है। सेना विभाग और सेना का ग्रेफ (GREF) है, जो जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स, जिन पर सेना का आवागमन ज्‍यादा होता है।

श्री अध्‍यक्ष: इसलिये चिन्‍ता की बात है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जी, अध्‍यक्ष महोदय। उन सड़कों का अधिग्रहण वे करते हैं और इसके अधिग्रहण से पहले जब सेना के उच्‍चाधिकारी हमें लिखते हैं उसके बाद एक समिति बनी हुई है, सी.एम.एल.सी., सिविल मिलिट्री लाइजिनिंग कमेटी, इस कमेटी में बैठकर विचार होता है और उसके बाद जो सामरिक महत्‍व की सड़क है यह उनको स्‍थानान्‍तरित की जाती है।

जिस सड़क का जिक्र माननीय सदस्‍य कर रहे हैं यह स्‍टेट हाइ-वे 16 है। इसकी दूरी कुल मिलाकर 98 किलोमीटर है और इस में से बाड़मेर जिले में 16 किलोमीटर है जो ग्रेफ को 10.06.2002 को स्‍थानान्‍तरित की गई थी, और 83 किलोमीटर जालोर जिले में है। यह 29.01.2003 को स्‍थानान्‍तरित की गई। अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि इन 98 किलोमीटर सड़क में से 47 किलोमीटर सड़क ऐसी है जो क्षतिग्रस्‍त है। यह क्षतिग्रस्‍त, अगस्‍त 2006 के अन्‍दर जब अतिवृष्टि हुई, बाड़मेर और जालोर जिले में, उसके कारण से क्षतिग्रस्‍त हुई और इसमें 591 लाख की जरुरत है। और यह सारा चूंकि हमारे आधिकारिक क्षेत्र में नहीं है, यह पूरा का पूरा ग्रेफ, भारत सरकार का है और उसके लिये हमने बारबार पत्र लिखे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मुख्‍य मंत्रीजी ने स्‍वयं ने भी पत्र लिखे, रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी को 19.12.2004 को, 12.2.2005 को मैंने भी पत्र लिखा। 20 पत्र ऐसे हैं जो बारबार लिखने पर भी इस सड़क का संधारण नहीं हुआ और यही सड़क नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, हमारे बोर्डर से लगने वाले जिले हैं जिनमें 3850 किलोमीटर सड़क ग्रेफ के पास है, जिनके संधारण का काम और रखरखाव का काम वही करते हैं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछ रहा हूं कि क्‍या आपका और केन्‍द्र सरकार के बीच कोई करार होता है या सिर्फ अधिग्रहित की जाती है, एक आदेश से ही हो जाता है। और करार होता है तो कुछ उसके अन्‍दर शर्तें होती होंगी। उन सड़कों पर सामरिक महत्‍व की सड़क होते हुए मानो कि सेना के काम में आती हैं लेकिन सामान्‍य वहां के रहने वाले, वहां पर जो नागरिक हैं, वह भी आवागमन करते हैं। आज आपने स्‍वयं ने स्‍वीकार किया, 43 किलोमीटर सड़क खराब है, आज स्थिति यह है कि वहां टायर फटते हैं, एक्‍सीडेंट होते हैं, लोग चल नहीं पाते हैं इस स्थिति के कारण हमारा कर्तव्‍य क्‍या है। हमारे क्षेत्र के अन्‍दर है यह और  अगर कोई करार, और कोई शर्त है तो उसके तहत हम बात करें। और यह बात नहीं करें तो उनसे कहें कि हमारे लोग कष्‍ट देख रहे हैं, असुविधा भोग रहे हैं तो केन्‍द्र सरकार इसके अन्‍दर तुरन्‍त कार्यवाही करे कोई न कोई। या फिर उनकी कोई बैठक बुलायें, जो पहले इनकी कौनसी बैठक, आपने नाम लिया है, उस बैठक को बुलाएं। बैठक के अन्‍दर हमारे भी लोग भागीदारी करें तो कोई बात बने। मैं क्‍या कहूं, अध्‍यक्ष महोदय, वहां डामर बिकता है, डीजल बिकता है, केरोसिन बिकता है, कंकरीट बिकती है, सारा सब कुछ बिकता है, उस सड़क की तो हालत क्‍या है, हम जानते हैं। सामरिक महत्‍व की है, सामरिक महत्‍व की सड़क ऐसी होती है क्‍या। इसलिये हमको पुरजोर विरोध करना पड़ेगा इस प्रकार की सड़कों के लिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले निवेदन किया यह सारी सडकें, एक कमेटी बनी हुई है, सी.एम.एल.सी., सिविल मिलिट्री लाइजिंग कमेटी, पहले भारत सरकार के सेना के उच्‍चाधिकारी हमें लिखते हैं, इन सड़कों पर सेना का आवागमन बढ़ रहा है और इन सड़कों का संधारण विभिन्‍न कारणों से हम लेना चाहते हैं उसके बाद इस कमेटी में मामला आता है और उसके बाद हम उनको सौंपते हैं। उनको सौंपते हैं तब शर्त निश्चित तौर पर यह रहती है कि सड़क का रखरखाव और सड़क की चौड़ाई करना और सुदृढ़ीकरण यह सारा सेना अपने संसाधनों से करती है, करना चाहिए उनको। अध्‍यक्ष महोदय, यह भी सही है कि इन सड़कों की आयु भी निर्धारित है। यह स्‍टेट हाइ-वे है, 6 से 8 वर्ष के बीच में इसका पूरा रिन्‍यूवल हो जाना चाहिए और जितनी सड़कें मिलिट्री के पास हैं उसमें 500 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जिनका रिन्‍यूवल प्रतिवर्ष होना चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, पिछले वर्ष भी, बारबार हमने लिखा तो 2006-07 में सिर्फ 262 किलोमीटर सड़क का इन्‍होंने रिन्‍यूवल किया और 2005-06 में 246 किलोमीटर का किया। इसलिये अध्‍यक्ष महोदय, हम तो बारबार लिख ही सकते हैं। चूंकि सेना का मामला है और इन सड़कों का सामरिक महत्‍व है, इसलिये हम यह तो कह नहीं सकते हैं कि यह सड़क हम उनको नहीं दे रहे हैं। परन्‍तु यह आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, आप कहें तो मैं वह सारे लैटर टेबल करने को तैयार हूं, एक बार नहीं, दो बार नहीं, इसके लिये हमने बैठक भी की। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी स्‍तर पर भी बैठक हुई और लगातार हमारा दबाव है। मुख्‍य मंत्रीजी ने प्रणव मुखर्जी को पत्र भी लिखा है कि यह जितनी सड़कें आपने ले रखी हैं और इन सड़कों की लम्‍बाई भी 3850 किलोमीटर है, कई और माननीय सदस्‍यों के क्षेत्र में भी है। निश्चित तौर पर मैं पुन: सदन की भावना के अनुसार प्रणव मुखर्जी साहब को भी लिखूंगा और कोशिश करुंगा कि इन सड़कों का रखरखाव, केन्‍द्र सरकार हमें या तो पैसा दे और हम इसकी भी कोशिश करेंगे, उनको कहेंगे...।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, यह बनाते तो आप ही हो ना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जी, बनाते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पैसा वहां से आता है, बनाते आप हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, नहीं, नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: तो यह एजेंसी कौन है फिर बनाता कौन है, सड़कों को ठीक कौन करवाता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़कें, जिन सड़कों को ग्रेफ हमसे लेता है, वह सड़कें पहले से बनी हुई होती हैं। कहीं, बहुत कम ऐसे स्‍ट्रेचेज होते हैं जहां ग्रेफ खुद कहता है कि हम इन नई सड़कों का निर्माण कराना चाहते हैं, इसलिये हम बनाते हैं और उसके बाद उनको सौंप देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मेंटिनेंस करने की जिम्‍मेदारी उनकी है, रखरखाव की, यह आपने कहा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उनकी जिम्‍मेदारी है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, लेकिन वह रखरखाव वही करते हैं कि पैसा देकर के और आपसे करवाते हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, उनकी इंजीनियरिंग की अलग से विंग है। जो जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स, इनका टोटल अलग से सिस्‍टम है। यह अलग से अपने ठीक कराते हैं। अपने हिसाब से काम करवाते हैं तो हम उनको कहते जरुर रहते हैं क्‍योंकि वहां सिविलियन भी उन्‍हीं सड़कों पर चलते हैं। इसलिये निश्चित तौर पर यह सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं, अध्‍यक्ष महोदय, और कुल मिलाकर 925 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं राजस्‍थान के अन्‍दर 3850 किलोमीटर में, बारबार लिखने के बाद भी नहीं करते हैं। अब चूंकि इन सड़कों का महत्‍व सेना की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण है, इसलिये हम उनको यह भी नहीं कह सकते हैं कि हम सड़कें वापस लेंगे। परन्‍तु मैं, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को यह विश्‍वास जरुर दिलवाना चाहूंगा कि इस बार हम उनको लिखेंगे या तो निश्चित समयावधि के अन्‍दर इनका संधारण करने का काम आप करें, वरना यह सड़कें, जिस रूप में हैं पुन: सौंप दें ताकि हमारा विभाग इनका संधारण करे। (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यह सामरिक महत्‍व का जहां तक प्रश्‍न है साहब, सामरिक महत्‍व का मतलब इस देश को बचाने के लिये सड़कें बढि़या होनी चाहिए, इतनी अच्‍छी होनी चाहिए कि सेना के टेंक वगैरह उस पर चल सकें। सड़कें ऐसी हैं कि हमारे ट्रेक्‍टर भी खराब हो रहे हैं। इसलिये मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि सामरिक महत्‍व का कहकर हम छोड़ नहीं सकते हैं, सामरिक महत्‍व का, हमारी सुरक्षा इसके साथ जुड़ी हुई है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सेना का आवागमन जब वहां होता है तो सेना ने भी तो लिखा होगा उन्‍हें।

श्री अमराराम (धोद): यह रिपेयर करायें तो सेना मना नहीं करती है। अगर राजस्‍थान का सार्वजनिक निर्माण विभाग उन सड़कों को रिपेयर करता है तो मना नहीं करता है कोई।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, नहीं करवा सकते हैं।

श्री अमराराम (धोद): लेकिन यह तो बचने का एक बहाना है कि उनको दी हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, बचने का नहीं है। यह लिखना चाहिए था कि यदि आप ठीक नहीं करवायेंगे तो हम ठीक करवा रहे हैं और पैसा आपको देना पड़ेगा। (व्‍यवधान)

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में, जालोर जिला हेडक्‍वार्टर जाने की मुख्‍य सड़क जो सांचोर से.....(व्‍यवधान) होते हुए जालौर आती है।

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से, जो हमारे हनुमानगढ़ को...(व्‍यवधान) एक मिनट, एक मिनट, आप दूसरों को बोलने दें।

हनुमानगढ़ को, जो डिस्ट्रिक्‍ट से जोड़ती है, सांगरिया को, वह पहले पी.डबल्‍यू.डी. की सड़क बनी हुई थी, और कुछ 5-10 साल पहले, उन्‍होंने, ग्रेफ वालों ने ले ली। अब ग्रेफ वालों ने दूसरा रास्‍ता बना लिया, कहीं उन्‍होंने हनुमानगढ़ से या दूसरे रास्‍ते से सीधे रोड बना दी उनके बोर्डर को जाने के लिये। अब 4-5 साल से उसमें इतने खड्डे पड़े हैं, पिछले 2-3 महीनों में 32 एक्‍सीडेंट हुए वहां और 5 आदमी मर गये उन एक्‍सीडेंट्स में। मंत्री महोदय खुद संगरिया पधारे थे और वादा करके भी आये थे। मेरा आपसे निवेदन है कि जो रोड वहां बनी हुई है, वह पी.डबल्‍यू.डी. की बनी हुई है। अगर उन्‍होंने नहीं सम्‍भाली तो इसका मतलब यह नहीं कि हमारे तहसील हेडक्‍वार्टर को जो सड़क जोड़ती है, हमारी सड़क, हमारी खुद की बनाई हुई है, हमने उनको दी थी, अगर उन्‍होंने छोड़ दी तो हम लोगों को भूल थोड़ी जाएंगे जो वहां के लाखों लोग बसने वाले हैं। वह सड़क पंजाब को लिंक करती है, हरियाणा को लिंक करती है। मेरा आपसे एक ही निवेदन है कि उन सड़कों को, पी.डबल्‍यू.डी. की पुरानी सड़क बनी हुई है।                                

 

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तो आप उसको जैसे भी हो सके, उसकी मरम्‍मत, उसके खड्डे, वहां लोगों को ट्रेक्‍टर-ट्रोली और छोटे व्हिकल्‍स को तो इतना नुकसान है कि वहां चल ही नहीं सकते, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय को यह निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपका क्‍या है?

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में यह की यह समस्‍या है। रानीवाड़ा-सांचौर-से जालौर जिला हैडक्‍वार्टर जाने वाल सड़क 47 किलोमीटर इतनी टूटी हुई है कि वहां कोई गाड़ी चलने लायक रस्‍ता ही नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: वह सीमा सुरक्षा से थोड़े ही है? ... (व्‍यवधान)

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह भी ग्रेफ में है इ‍सलिए मेरा मंत्री महोदय से यह निवेदन है कि कम से कम वह पेचवर्क तो करवा कर खड्डे तो बुरवायें ताकि वहां एक सामान्‍यत: साधन तो चल सके। ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र  की एक प्रमुख सड़क सूरतगढ़ से अनूपगढ़ वह भी ग्रेफ के पास है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप विराजिये। बात यहां है सीमा सड़क संगठन की है। ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): उस 76 किलोमीटर सड़क के लिए, तीन घंटे का सफर, तीन घंटे में सफर पूरा होता है माननीय मंत्री महोदय ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात, वह बात ठीक है पर ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सड़क मेंटिनेंस के संबंध में एक जनरल क्‍वेश्‍चन है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनरल क्‍वेश्‍चन है मेरा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सड़क मेंटिनैंस के संबंध में मेरा जनरल क्‍वेश्‍चन यह है कि अपने सड़क मेंटिनेंस का पीरियड फिक्‍स है। यहां विलेज रोड्स के जो मेंटिनैंस का पीरियड है यह 10 साल, 12 साल है लेकिन राजस्‍थान की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है। अब पूरे राजस्‍थान में किसी सड़क पर कहीं ज्‍यादा बरसात होती है और उस पर ट्रेफिक भी ज्‍यादा चलता है तो वह जल्‍दी उखड़ जाती है और जहां पर बरसात कम होती है और ट्रेफिक नहीं चलता है वह उखड़ नहीं पाती और एक भी गड्डा नहीं होता। इन सबका नम्‍बर 10 साल और 12 साल में आता है।

श्री अध्‍यक्ष: यह मूल प्रश्‍न जो है ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): तो सड़क की स्थिति को देखते हुए रिन्‍युअल पीरियड अलग-अलग होना चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: यह प्रश्‍न सीमा सड़क संगठन की सड़कों का है। आप में नहीं आता है यह। ... (व्‍यवधान) 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनरल प्रश्‍न है यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके इलाके में नहीं है यह।  कृपया, स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): यह जनरल क्‍वेश्‍चन है। जनरल पॉलिसी है कि 10 साल से, 12 साल में मेंटिनैंस होती है सबकी चाहे कोई सड़क उखड़े या मत उखड़ो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्स्ट क्‍वेश्‍चन। श्री चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): और जहां पर बरसात ज्‍यादा होती है तो ज्‍यादा उखड़ जाती है और जहां पर बरसात कम होती है वहां पर कम उखड़ती है तो सड़कें ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह सीमा सड़क संगठन का प्रश्‍न है। आपके इलाके में नहीं है यह। नैक्स्ट क्‍वेश्‍चन।

स्‍थगित प्रश्‍न

(बुधवार, दिनांक 21 मार्च, 2007)

जननी सुरक्षा योजनान्‍तर्गत व्‍यय राशि

 

197. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जननी सुरक्षा योजनान्‍तर्गत वर्ष 2005 से अब तक आवंटित राशि के विरुद्ध कितनी राशि व्‍यय कर कितनी जननियों को लाभान्वित किया गया ? वर्षवार व जिलेवार संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत नियम विरुद्ध रजिस्‍ट्रेशन से अधिक महिलाओं को राशि का वितरण किया गया? यदि हां, तो जिलेवार रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या तथा लाभार्थियों की संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत अनटाइड फंड के रूप में प्रत्‍येक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर 10,000/- रुपये की राशि उपलब्‍ध कराई गई? यदि हां, तो कौन-कौन से स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर किस प्रकार राशि का उपयोग किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन की ओर से हैल्‍प लाइन योजना प्रारम्‍भ की गई है? यदि हां, तो उक्‍त में कितनी राशि व्‍यय कर क्‍या-क्‍या सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जा रही हैं? जिलेवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(5) उक्‍त योजनान्‍तर्गत कितनी महिलाओं को सरकारी अस्‍पताल में जाने के लिए यातायात सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु कितनी राशि व्‍यय की गई? जिलेवार संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें। 

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): (1) जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2005-06 से अब तक 51 करोड़ 25 लाख 53 हजार रुपये जिलों को आवंटित किये गये जिसके विरुद्ध अभी तक लगभग 28 करोड़ 65 लाख 70 हजार रुपये व्‍यय का विवरण प्राप्‍त हो चुका है तथा 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को लाभान्वित किया गया। जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट-   पर उपलब्‍ध है।

(2) जी, नहीं।

(3) जी, नहीं।

(4) जी, हां। हैल्‍प लाइन योजना में जनवरी, 2007 तक 19 लाख 49 हजार 84 रुपये की राशि व्‍यय की गई है। योजनान्‍तर्गत राज्‍य में निम्‍न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं:-

* गर्भवती माताओं हेतु टेलीफोन पर मार्ग-दर्शन।

* संस्‍थागत प्रसव हेतु टेलीफोन मांग पर वाहन की व्‍यवस्‍था।

* निजी वाहन मालिकों के साथ मिलकर सभी गांवों के निकट के अस्‍पताल तक परिवहन हेतु दरों का निर्धारण, जिसमें प्रसूता को निश्चित दर पर तुरन्‍त निकटतम अस्‍पताल तक पहुंचने हेतु वाहन उपलब्‍ध हो सके।

* अस्‍पताल को महिला के पहुंचने से पूर्व टेलीफोन द्वारा सूचित करना, जिससे प्रसव की तैयारी में होने वाले विलम्‍ब से बचा जा सके।

* गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण में आशा सहयोगिनियों के साथ सहयोग।

* मातृ मृत्‍यु की सूचना।

व्‍यय राशि का जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट पर उपलब्‍ध है।

(5) इस योजना में 22,806 महिलाओं को सरकारी चिकित्‍सा संस्‍थानों में जाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु राशि रुपये 87.03 लाख व्‍यय की गई है। जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट- पर उपलब्‍ध है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि खंड एक के अन्‍दर आपने यह कहा है कि 51 करोड़ 25 लाख 53 हजार रुपये जिलो को आवंटित किये गये। अब मेरा प्रश्‍न यह है कि आपको केन्‍द्र सरकार से 2005-06 के अन्‍दर और 2006-07 में अब तक जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत कितनी राशि प्राप्‍त हुई, पहला।

दूसरा, 2005-06 में और 2006-07 में आपने कितनी-कितनी राशि जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत व्‍यय की? क्‍योंकि मेरी जो सूचना है उसमें पहले साल आपने सिर्फ 10 प्रतिशत राशि व्‍यय की और दूसरे साल आपने इसमें टोटल जो आपने बताया है 51 करोड़ 25 लाख रुपये में से आपने 28 करोड़ 65 लाख रुपये ही व्‍यय किये हैं अभी तक, आवंटित किये हैं।

दूसरा प्रश्‍न यह है कि 2005-06 के अन्‍दर कितने बच्‍चे राजस्‍थान में पैदा हुए? अमूमन 15 लाख बच्‍चे राजस्‍थान में पैदा होते हैं जिसमें 11 लाख तो ग्रामीण एरिया में होते हैं चार 4 लाख शहर के अन्‍दर होते हैं तो जहां 15 लाख बच्‍चे पैदा हो रहे हैं और आपने 3 साल, 2 साल के अन्‍दर सिर्फ 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को ही लाभान्वित किया है तो ऐसा क्‍या कारण हो गया कि आपने इतनी कम महिलाओं को लाभान्वित किया?

एक जो हैल्‍प लाइन योजना है। उसमें सारे जिलों में, जो आपने सूची दी है उसमें 32 जिलों में से 28 जिलों के अन्‍दर आपने हैल्‍प लाइन शुरू कर दी। अब आपकी यह टोंक में, चूरू में, बूंदी में और धौलपुर, इसमें चूरू भी आ गया और धौलपुर भी आ गया और बूंदी भी आ गया और टोंक भी आ गया, इन्‍होंने ऐसा क्‍या गुनाह कर दिया कि यहां पर आपने हैल्‍प लाइन नहीं शुरू की? और आखिरी प्रश्‍न मेरा यह है कि आपने पांचवें खंड में बताया है कि जब जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत ग्रामीण महिलाओं को दूरदराज इलाके से अस्‍पताल में पहुंचाने के लिए जो वाहन की सुविधा है वह भी उपलब्‍ध करायी जाती है तो जब 15 लाख बच्‍चे एक साल के अन्‍दर हो रहे हैं और आपने यह सुविधा दी है सिर्फ 22806 महिलाओं को। ऐसा क्‍या कारण रहा जबकि महिलाएं बारबार फोन करती हैं कि हमारे प्रसव के लिए हमको दूसरे अस्‍पताल में, अमुक अस्‍पताल में भेज दो, राशि उपलब्‍ध करायी जाती है तो राशि उपलब्‍ध क्‍यों नहीं करायी गयी?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहला सवाल तो माननीय सदस्‍य का था कि सन 2005-06 में कितनी राशि और 2006-07 में कितनी राशि केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त हुई?

श्री अध्‍यक्ष: इनका कहना है कि 2005-06 में तो 10 परसेंट ही खर्च किया आपने। ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): कितनी राशि प्राप्‍त हुई केन्‍द्र सरकार से क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार तो, आप ज्‍यादा चिंतित हैं न उसके लिए इसलिए पूछ रहे थे तो मैं आपको निवेदन कर रहा हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2005-06 में 5.43 करोड़ और 2006-07 में 35.5 करोड़ की राशि प्राप्‍त हुई।

श्री अध्‍यक्ष: 10 परसेंट ही हुआ, ठीक कह रहे हैं वह। सही। ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अब मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि आपने जननी सुरक्षा के बारे में और हैल्‍प लाइन के बारे में जो बात कही कि इतने बच्‍चे गांव में पैदा होते हैं, इतने शहर में पैदा होता हैं ... (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): नहीं-नहीं, इसमें खर्च कितनी की, साहब, इसी में बताओ, साहब। 5 करोड़ और 35 करोड़ मिले न इसमें से पहले साल कितनी खर्च की? ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं वह ही निवेदन कर रहा हूं, सर। आप विराजिये तो सही। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जननी सुरक्षा योजना शुरू हुई 9 सितम्‍बर, 2005 को और जब इसको शुरू किया गया तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): तो इसके पीछे केवल आशय इसका केवल बी.पी.एल. महिलाओं को लाभ देने के लिए था इसलिए आप जो कह रहे हैं न कि खर्च की और उसकी बात वह इस बात से स्‍पष्‍ट हो जाएगी। उसके बाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें इसको चेंज किया गया, इस आदेश को और इसमें ए.पी.एल. और बी.पी.एल. दोनों को सम्मिलित किया गया और यह पहली अप्रैल, 2006 से शुरू किया गया जिसमें ए.पी.एल. महिलाओं को भी शामिल किया गया। उस समय भी उसमें कुछ राइडर्स थे कि महिला की उम्र 19 साल होनी चाहिए। दो बच्‍चे से ज्‍यादा पर यह राशि देय नहीं होगी और तीसरे बच्‍चे पर अगर राशि देय होगी तो यह उसी स्थिति में जबकि वह नसबंदी का आपरेशन कराने के लिए तैयार हो। इसके बाद इस राइडर को भी समाप्‍त किया गया और 700 रुपये शुरू-शुरू में पेमेंट, 700 रुपये था इसको 1400 रुपये किया गया और ए.पी.एल., बी.पी.एल. सब कैटेगरी की महिलाओं को इस योजना का लाभ देने का तय किया गया। चाहे उसके कितने भी बच्‍चे हो, उसको भी यह लाभ देने का तय किया गया। उसके नसबंदी आपरेशन से भी उसको नहीं जोड़ा गया। उसकी एज का जो राइडर था उसको भी इसमें से हटा लिया गया इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि शुरू में केवल बी.पी.एल. महिलाओं के लिए था इस वजह से खर्चे में जो आप कह रहे हैं और इसके बाद जो हमारी स्‍पीड आयी है इस जननी सुरक्षा योजना की जो हमारी सफलता इस राज्‍य में आयी है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है क्‍योंकि 40 परसेंट से ज्‍यादा का हमारा इन्‍क्रीज है। हमारी इंस्‍टीट्यूशनल डिलीवरीज का और हमारा जो मातृ मृत्‍यु दर है, हमारी शिशु मृत्‍यु दर है उसमें भी जो डिक्‍लाइन इतना शार्प हो रहा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह इसी के कारण से है और निश्चित रूप से गरीब लोगों को बहुत मदद इस योजना के माध्‍यम से हम दे रहे हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हैल्‍प लाइन के बारे में मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि हैल्‍प लाइन का निश्चित रूप से, यह शुरूआत हमने की है जिससे, और इसके कई फायदे भी लोगों को, हमारी गरीब जनता को कम से कम इसके फायदे जो मिलते हैं।

 

spp/usc/11.50/1f/2.4.2007(1)

 

क्‍योंकि अस्‍पतालों में भी व्‍यवस्‍थाएं हैल्‍प लाइन के थ्रू पहले हो जायें, जो मरीज का ट्रांसपोर्टेशन होना है, गर्भवती महिला का, जैसे पेन होने के बाद गांव में ट्रांसपोर्टेशन की उसको प्रॉब्‍लम होती है। उसकी व्‍यवस्‍था तुरन्‍त हैल्‍पलाइन करे तो निश्चित रूप से उससे काफी कुछ हम गर्भवती महिलाओं को लाभ देने में सफल हुए हैं। आपने कहा है कि कुछ जिलों में यह हैल्‍पलाइन की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है और खासकर के चूरू का आपने बताया। मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं कि चूरू में आपका एक जाक बोरूका ट्रस्‍ट वहां पर काम कर रहा है और यह नवयुवक मंडल, एक संस्‍था है चूरू में, इन्‍होंने राजगढ्, जो आपका ब्‍लॉक है, उसमें काम करना शुरू किया है और अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो एक बार कहीं से आ रहा था और मुझे बोरूका ट्रस्‍ट पर रूकने का मौका मिला And It was up to the my surprise  कि जब मुझे बोरूका ट्रस्‍ट वालों ने बताया कि हमारे राजगढ़ ब्‍लॉक की मैटरनल मोर्टेलिटी, इस लैस दैन द नेशनल एवरेज, फिर मैंने अपने अधिकारियों को कहा। मैंने कहा एक बार, क्‍योंकि उनके कहने पर विश्‍वास हमने नहीं किया। हमने अपने अधिकारियों को कहा कि एक बार उस राजगढ़ ब्‍लॉक की पूरी अपने स्‍तर पर हमने जाचं करायें कि वास्‍तव में वहां पर मैंटरनल मोर्टेलिटी की रेट अगर इतनी अच्‍छी है तो इस मॉडल को हम पूरे राजस्‍थान में भी लागू करें। जहां तक चूरू और बूंदी में, दोनों में जी.एस.वाई. की फण्डिंग है, परन्‍तु कलक्‍टर द्वारा इस व्‍यवस्‍था को वहां पर किया गया है। टोंक और धौलपुर में हमारी जी.एस.वाई.की फण्डिंग नहीं है। टोंक और धौलपुर में यूनिसेफ की फण्डिंग है और यूनिसेफ ही हैल्‍पलाइन का काम कर रहा है और काफी अच्‍छा काम टोंक और धौलपुर में यह लोग कर रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष जी, इसमें जो सबसे महत्‍वपूर्ण चीज है, आपने कहा कि पहले साल पाँच करोड़ 43 लाख रुपये आपको मिले और दूसरे साल 35 करोड़ 01 लाख रुपये मिले। पहले साल आपने कितने व्‍यय किये और दूसरे साल आपने कितने व्‍यय किय ? दूसरी चीज मेरी जहां तक जानकारी है पहले साल जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत जो महिलाएं आती थीं, उनको अगले साल आपने पेमेन्‍ट किया है। दूसरा यह कि आपने अभी तक कहा एक साल  में 15 लाख बच्‍चे पैदा होते हैं तो आपने दो साल में 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को ही लाभान्वित किया है और यह तो जो आपने फीगर दिये हैं उससे स्‍पष्‍ट है कि अभी भी आपने जो राशि आवंटित की है, वह टोटल आपने 51 करोड़ 25 लाख की है जिसमें से खर्चा हुआ है सिर्फ 28 करोड़ । मेरे कहने का मतलब यह है कि जब केन्‍द्र सरकार से ठीक समय पर समुचित राशि आपको उपलब्‍ध करा दी गयी तो आप उस राशि का उपयोग नहीं कर रहे हैं, इसका मतलब उसका दुरूपयोग हो रहा है। कम महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, कम राशि खर्च हो रही है। हर मद के अंदर कम खर्च हो रहा है तो ऐसे क्‍या कारण हैं कि कम खर्चा हो रहा है और आप यह देखिये लास्‍ट में आपने जो जवाब दिया है कि आपने सिर्फ 22 हजार 806 ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये न ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): महिलाओं को खाली आपने वाहन की सुविधा दी, जबकि जैसलमेर, बाड़मेर और चूरू में गांव इतनी दूर दूर हैं जहां कि वाहन की सुविधा उपलब्‍ध होनी चाहिये तो 30 लाख महिलाओं ने प्रसव किया, उसमें से लाभान्वित किया सिर्फ 22 हजार को।

श्री चांदनाथ  (बहरोड़): आप प्रश्‍न तो पूछ नहीं रहे, इन्‍फोर्मेशन दे रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इससे यह स्‍पष्‍ट हो गया कि कम महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं और राशि का दुरुपयोग हो रहा है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ट्रांसपोर्टेशन की व्‍यवस्‍था हमने जननी सुरक्षा योजना में रखी है । अगर पेशेंट खुद अपने ट्रांसपोर्ट की व्‍यवस्‍था करके आता है तो हम पेशेंट को 300 रुपये पेमेंट कर रहे हैं। यह जो फीगर दिया है, यह हमारी हैल्‍पलाइन के थ्रू जो व्‍यवस्‍था है, उसका फीगर आपको दिया है और मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि कोई चीज जब नई शुरू की जाये, क्‍योंकि मेरे ख्‍याल से एक लाभदायक योजना राजस्‍थान में तो पहली बार शुरू हुई है और निश्चित रूप से गरीब महिलाओं को इसका बहुत बड़ा लाभ भी मिल रहा है। आप जो कह रहे हैं पैसे का ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ मेरा प्रश्‍न है कि बिना सहयोगिनी और आशा के अस्‍पताल में जो डिलीवरी होती है, उनको कोई रुपये नहीं दिये जाते हैं ....(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हम तो बी.पी.एल. की जो महिलाएं हैं ...(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी को जवाब  तो देने दें। ...(व्‍यवधान)..

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): अध्‍यक्ष महोदय, गरीबों के लिये बहुत जरूरी बात है। जो डिलीवरी अस्‍पताल में होती है यदि उसके साथ आशा या सहयोगिनी नहीं है तो उसको 1400 रुपये नहीं दिये जाते और वह इधर-उधर धक्‍का खाता फिरता है। मेरा मंत्री महोदय से निवेदन है कि 700 से 1400 आपने किये, यह बहुत अच्‍छी बात है लेकिन यह भी उसमें से निकालें कि सहयोगिनी नहीं हों तब भी उसको 1400 रुपये दिये जायें। ...(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष:  सरकार की तरफ से सुविधा है, कोई न ले तो नहीं लेगा। ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप जो पर्चेज करना है, राजस्‍थान मेडिकल हैल्‍थ में दो प्रोग्राम आ रहे हैं एक वर्ल्‍ड बैंक का प्रोग्राम है और राजस्‍थान रूरल हैल्‍थ एम्‍बीशन का प्रोग्राम है, इन दोनों प्रोग्रामों में जो प्रिक्‍योरमेंट करने हैं इक्विपमेंट्स, उसमें तो अचीवमेंट 60 प्रतिशत से ऊपर है और जिसमें लोगों को मदद करनी है उसमें आपका प्रतिशत 10 प्रतिशत भी नहीं है। यह आपकी एफिशियेंसी शो नहीं करता? 

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जननी सुरक्षा योजना की बात चल रही थी, माननीय सदस्‍य ने एक बात बीच में, पता नहीं कहां से लेकर आ गये ।...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): I am sorry, अलग नहीं है। राजस्‍थान सरकार, भारत सरकार और वर्ल्‍ड बैंक के जो पैसे आ रहे हैं उसमें प्रिक्‍योरमेंट जो करोड़ों रुपये का प्रिक्‍योरमेंट करनी है मशीन, उसमें तो आपका अचीवमेंट है। जहां जनता को लाभ देना है उसमें आपका अचीवमेंट है ही नहीं। यह आपका माध्‍यम नहीं है क्‍या ? आप डिपार्टमेंट की एफिशियेंसी बता रहे हो । राजस्‍थान सरकार को जितना पैसा भारत सरकार से मिल रहा है,आज 24 प्रतिशत पैसा ज्‍यादा मिल रहा है, जननी सुरक्षा के अंदर मिल रहा है। आपको वर्ल्‍ड बैंक में 400 करोड़ रुपये मिल रहा है, उसमें जो पर्चेज करने हैं, चाहे फ्रिज पर्चेज करने हैं, चाहे दूसरी मशीन पर्चेज करनी हैं, चाहे दूसरी मशीन पर्चेज करनी है, उसमें अचीवमेंट 60 प्रतिशत से ज्‍यादा है। जहां लोगों को हैल्‍प करनी है उसमें 20 प्रतिशत अचीवमेंट नहीं है आपकी ...(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो आर.एच.डी.एस.पी.प्रोजेक्‍ट की बात की है, वर्ल्‍ड बैंक का एक प्रोजेक्‍ट है, निश्चित रूप से लोन का प्रोजेक्‍ट है, वर्ल्‍ड बैंक ने हमाने ऊपर अहसान तो किया है नहीं। इतना निवेदन करना चाहता हूं कि हमने पहले फैसेलिटीज, जहां पर इक्विपमेंट की जरूरत है, सिटी स्‍कैन हमने लगाई तो सिटी स्‍कैन लगाने के लिये पहले कमरा बनवाया। इंजीनियर से बकायदा नक्‍शा बनवाकर कमरा बनवाने के बाद सिटी स्‍कैन मशीन सप्‍लाई की। ऐसा नहीं है ... ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डॉ0 साहब, माफ करना। 90 प्रतिशत जगह इक्विपमेंट्स को प्रिक्‍योर किया है, वहां पैरा मेडिकल स्‍टाफ के रिक्रूटमेंट ने किया है, फिर वहां इक्विपमेंट क्‍या काम आ रहे हैं ? खाली आपने पर्चेज कर लिया, न पैरा मेडिकल स्‍टाफ है, न उनके काम करने की कोई व्‍यवस्‍था है और आप कह रहे हो हमने कमरा बनवा दिया, प्रिक्‍योर कर लिया। आप पैरा मेडिकल स्‍टाफ लगाये  बिना करोड़ों रुपये की मशीन किसके लिये खर्च करना चाहते हैं ?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकिê