skp/akt/ 1100/1a

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  5    बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का तृतीय दिवस   संख्‍या  3

 

 

गुरुवार,

02 मार्च, 2006

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन,जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी अनुकम्‍पा बनी रहनी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष:  आपकी पार्टी की अनुकम्‍पा बनी रहनी चाहिए ताकि काम ठीक हो सके। श्री जीतराम।

मोबाइल सर्जिकल यूनिट हेतु निर्धारित लक्ष्‍य

20. श्री जीतराम (मालपुरा): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

      क्‍या यह सही है कि राज्‍य में मोबाइल सर्जिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है ? यदि हां, तो इस यूनिट द्वारा गत दो वर्षों में कहां-कहां कैम्‍प लगाये गये एवं इसकी क्‍या उपलब्‍धियां रहीं तथा इनका वार्षिक लक्ष्‍य क्‍या है ?

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): 1. जी हां। राज्‍य में तीन इकाइयां क्रमश: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर में संचालित हैं।

   2. कैम्‍पों की सूची संलग्‍न है।3. वार्षिक लक्ष्‍य प्रत्‍येक इकाई को 22 से 24 शिविर आयोजित करने का है।4. उपलब्धियों की सूची संलग्‍न है।

श्री जीतराम: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि क्‍या दूर-दराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञों की सुविधा, आपरेशन की जटिलताओं को दूर करने के लिए कैम्‍प के रूप में प्रदान की जाती है ? दूसरा, टोंक जिले के मालपुरा निर्वाचन क्षेत्र में दो वर्षों में कोई कैम्‍प नहीं लगाये क्‍या ? क्‍या सरकार निकट भविष्‍य में कोई कैम्‍प लगाना चाहती है ?

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय सदस्‍य को मैं यह जानकारी देना चाहता हूं कि हमारी मोबाइल सर्जिकल यूनिट के कैम्‍प तो राजस्‍थान के दूर-दराज के इलाकों में लगते रहते हैं। टोंक में अगर दो वर्ष में कोई कैम्‍प नहीं लगा तो बहुत ही नजदीकी समय में आपके यहां एक कैम्‍प आयोजित करवा दिया जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मोबाइल सर्जिकल यूनिट जिन उद्देश्‍यों के लिए बनाई गई थी और जो इसके एम्‍स और आब्‍जेक्टिव रखे गये थे वो ये रखे गये थे कि दूर-दराज के इलाकों में, माननीय मुख्‍य मंत्री जी कहती हैं कि हमारा बहुत बड़ा प्रदेश है, सबसे बड़ा भू-भाग है ता दूर दराज के इलाके के अन्‍दर यह सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए मोबाइल सर्जिकल यूनिट का गठन किया गया था। पापुलेशन बढ़ गई दो साल के अन्‍दर, बीमारियां बढ़ गईं, लोगों की डिमांड बढ़ गईं पर आपके मोबाइल सर्जिकल का बजट जितना पहले था उतना ही अब है। न आपके व्‍हीकल्‍स चैंज हुए, एम्‍बुलेंस ऐसी है कि न तो उसके अन्‍दर उपकरण हैं और एक जगह से दूसरी जगह मरीज को ले जाने में तीन बार रुकती है तो क्‍या आप इसके बजट पर पुनर्विचार करके इस बजट को बढ़ायेंगे ? और दूर-दराज के इलाकों में इस तरह के ज्‍यादा कैम्‍प लगाने की आपकी कोई योजना है ? दूसरा, इसकी प्‍लानिंग इतनी डिफेक्टिव है कि आपने जो सूची दी है उस सूची के अन्‍दर जो मोतियाबिन्‍द के आपरेशन हैं, हजारों की संख्‍या में आपने मोतियाबिंद के आपरेशन किये और सरकार का पैसा खर्च किया। आपको मोतियाबिंद के आपरेशन मो‍बाइल सर्जिकल कैम्‍प से करने की जरूरत क्‍या है जब नेशनल ब्‍लाइंडनैस कंट्रोल प्रोग्राम है जिसमें केन्‍द्र सरकार शत-प्रतिशत पैसा आपको देती है तो आप इसमें से पैसा उठाकर के क्‍यों करना चाहते हैं और यदि मोबाइल सर्जिकल कैम्‍प से उसका आपरेशन करते हैं तो वह धन आप केन्‍द्र सरकार से क्‍यों नहीं मांगते ? दूसरा, बजट निरन्‍तर गिरता जा रहा है, कर्मचारियों की संख्‍या निरन्‍तर गिरती जा रही है, कैम्‍प की संख्‍या गिरती जा रही है और आपरेशन की लिस्‍ट देखें तो ऐसे छोटे-छोटे आपरेशन हैं जिनको वहां करने की जरूरत ही नहीं है। कोई बड़े आपरेशन गरीब के झौपड़े में जाकर करें तब तो फायदा हो और इतनी एड आ रही है, वर्ल्‍ड बैंक की एड आ रही है, एशियन डवलपमेंट बैंक की एड आ रही है....

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न पूछें, भाषण नहीं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: उस एड से पिछले दो साल में एक भी पैसा मोबाइल सर्जिकल कैम्‍प में नहीं बढ़ाया गया।

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का यह कहना कि मोबाइल सर्जिकल यूनिट जिस उद्देश्‍य क साथ शुरू की गई थी, यह बात सही है कि इसका उद्देश्‍य दूर-दराज के गांवों में जहां पर चिकित्‍सा सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं होती हैं वहां पर इंटिरियर में जाकर के कैम्‍प आर्गेनाइज करना और वहां उस क्षेत्र की जनता का लाभ देने का ही है और उसी उद्देश्‍य से राजस्‍थान के कोने-कोने में ये सर्जिकल यूनिट कैम्‍प्‍स आर्गेनाइज कर रही हैं। मैं माननीय सदस्‍य को जानकारी देना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने तो इनके अलावा संजीवनी कैम्‍प्‍स के माध्‍यम से ग्रामीण जनता को पूरी सर्जिकल प्राब्‍लम्‍स की राहत दी है। इनके अलावा 150 से ज्‍यादा हमने संजीवनी कैम्‍प्‍स भी लगाये हैं जिसमें हमने ग्रामीण जनता को सीधा-सीधा इसका लाभ दिया है। इसमें बजट प्रावधान को निश्चित रूप से इस बार जो हमारी सर्जिकल यूनिट्स हैं इनको इम्‍प्रूव करने का सरकार का मानस है और निश्चित रूप से मोबाइल सर्जिकल यूनिट के जहां-जहां भी कैम्‍प आर्गेनाइज होते हैं, आप कहते हो कि बहुत छोटे-छोटे आपरेशन किये गये, अगर आप लिस्‍ट देखेंगे तो मेरे खयाल से बहुत मैजर आपरेशन इस मोबाइल सर्जिकल यूनिट द्वारा किये जा रहे हैं, वो छोटे आपरेशन नहीं हैं जो गरीब जनता के लिए बहुत हितकारी रहते हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: एक पिछली बार यह घोषणा की गई थी बजट के अन्‍दर की टेली-मेडिसन योजना से भी इसको जोड़ा जाएगा। प्रतिवेदन में भी यह लिखा है कि टेली मेडिसन से जोड़ा जाएगा। इसरो ने पूरी सुविधा प्रदान करने की अनुमति प्रदान कर दी है। तो सबसे इम्‍पोर्टेंट काम जब रूरल हैल्‍थ प्रोजेक्‍ट अभी चल रहा है तो क्‍यों नहीं इस मोबाइल सर्जिकल कैम्‍प को टेलिमेडिसन  से जोड़ा जाता जिससे दूर-दराज के गरीब आदमी को टेलिमेडिसन से बड़े-बड़े विशेषज्ञ जो बड़े-बड़े इंस्‍टीट्यूशन में बैठे हैं उनका लाभ प्राप्‍त हो सके।

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, टेलिमेडिसन परियोजना में भी हमारी मोबाइल यूनिट्स हम तैयार कर रहे हैं मोबाइल वैन्‍स जो इससे सुसज्जित होंगी, वो भी उसमें हैं। टेलिमेडिसन परियोजना का भी शुभारम्‍भ किया गया है, पूरे जिले इक्‍यूप्‍ड होने हैं, इस महीने में सारे जिलों में इसकी कनेक्टिविटी हो जाएगी तो मोबाइल सर्जिकल यूनिट को भी हम उससे कनेक्‍टेड रखेंगे, इसको अलग नहीं छोड़ेंगे, मैं आपको यह आश्‍वासन देना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: एक्‍सपर्ट ने पूछ लिये सब प्रश्‍न, अब आप क्‍या पूछेंगे ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं साधारण पूछ लेता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि आपन अभी जिक्र किया कि संजीवनी और दूसरी अनेक योजनाओं से आप दूर-दराज में चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध कराने का काम करते हैं। आप 19 तारीख को सिरोही जिले के सरूपगंज के आदिवासी क्षेत्र मे गये थे और वहां लोग आपसे मिले। एक आदिवासी के बच्‍चे का दिल बाहर निकला हुआ था और वह सरूपगंज के अस्‍पताल में भर्ती था और लोगों ने कहा कि आप उसका इलाज करवाइये और आपने कहा कि हम कुछ नहीं कर सकते। आप 19 तारीख की रात को वहां से रवाना हो गये और 20 को वह बच्‍चा मर गया। क्‍या इलाज उपलब्‍ध कराते हो आप ?

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सरासर गलत इल्‍जाम है।

श्री संयम लोढ़ा: पाकिस्‍तान के बच्‍चे को बंगलौर में लाकर के उसके दिल का आपरेशन कराया था और आपके सामने लाकर लोगों ने खड़ा कर दिया और आप उसका इलाज नहीं करा पाये।

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मै मिनिस्‍टर होने के अलावा एक डाक्‍टर भी हूं और मैं किसी भी पेशेंट के लिए यह बात कह नहीं सकता कि मरीज को मैं देखने नहीं जा रहा... (व्‍यवधान) .... यह बिल्‍कुल बेकार बात है।

श्री संयम लोढ़ा: आप बताइये कि 19 तारीख को आप सरूपगंज के दासा इलाके में हास्पिटल का उद्घाटन करने गये थे या नहीं गये थे ?

डा. दिगम्‍बर सिंह: मैं गया था।

श्री संयम लोढ़ा: आपने दो समारोह में उद्घाटन किया पर उस गरीब के बच्‍चे के लिए आपके मन में कोई पीड़ा नहीं हुई और आपके जाने के बाद 20 तारीख को उसी हास्पिटल में उसने दम तोड़ दिया.... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह: .....यह बिल्‍कुल गलत आरोप है... (व्‍यवधान) इसमें कोई सच्‍चाई नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा: ....उस गरीब आदमी के बच्‍चे को दम तोड़ना पड़ा और आपकी सरकार ने कुछ नहीं किया उसके लिए .... (व्‍यवधान) आपकी सरकार ने कुछ नहीं किया उस बच्‍चे के लिए... (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया (पिण्‍डवाड़ा): वहां का स्‍थानीय विधायक मैं हूं, ऐसा कभी नहीं हुआ। (व्‍यवधान) आप क्‍या जानें... (व्‍यवधान) बिना तथ्‍यों के आधार पर ऐसे आरोप.... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक मिनट आप मंत्रीजी का जवाब तो सुनें। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप जवाब तो सुनिये उनका।(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे बड़ी संवेदनहीनता क्‍या... (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: मंत्री महोदय ने यह कभी नहीं कहा।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: गरीब के बच्‍चे की जान बचाने के लिए कहा जाए और वह कह दें कि मैं कुछ नहीं कर सकता। (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: आपने आज दिन तक गरीब को कभी पूछा भी है ? हमारी सरकार ने पूरे अस्‍पताल की व्‍यवस्‍था सही प्रकार से अच्‍छी चल रही है और डाक्‍टरों की जाकरूकता में कहीं कमी नहीं है।

डा. दिगम्‍बर सिंह: मैं 19 तारीख को सिरोही जिले के इलाके में गया था यह बात सही है। वहां पर एक सब सैण्‍टर की एक बहुत अच्‍छी बिल्डिंग बनी तो उसका उद्घाटन मैंने किया था। यह बात सही है। पिछली बार एक पी एच सी नई खोली थी उसका उद्घाटन मैंने किया था यह बात सही है और वहां की ग्रामीण जनता ने जिस कदर स्‍वागत सत्‍कार किया उससे जलकर, भुनकर यह बात यहां पर की जा रही है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो वह क्षेत्र भी नहीं पड़ता है और आपके स्‍वागत से हम ईर्ष्‍या करने वाले नहीं हैं, आपके फर्ज की याद दिला रहे हैं। एक तरु पाकिस्‍तान के बच्‍चे को लाकर के बंगलौर में ऑपरेशन करवाया था, आप बहुत अच्‍छे होते, आप कहते कि इस बच्‍चे को मेरे साथ गाड़ी में भेजिये, मैं मुख्‍य मंत्री जी से कहकर इसका जयपुर में इलाज कराऊंगा। इससे बड़ी लानत नहीं है और राजस्‍थान पत्रिका ने आपके उद्गारों को लिखा है, छापा है उसके अन्‍दर। इससे ज्‍यादा शर्म की बात नहीं हो सकती। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूनी): यह बिल्‍कुल बेबुनियाद आरोप हैं, राजनैतिक आरोप हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: 20 तारीख को नहीं मरा है मंत्रीजी, यह आप बता दें, सदन में कह दें आप, या तो मैं इस्‍तीफा दे दूंगा, नहीं तो आप दे देना। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल: इस्‍तीफा तो आपको झूठ बोलने के लिए देना ही पड़ेगा। झूठ बोलने के लिए इस्‍तीफा तो आपको देना ही पड़ेगा। (व्‍यवधान)

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डा. दिगम्‍बर सिंह: मेरे से कोई भी व्‍यक्ति नहीं मिला और वहां मैं...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। मंत्रीजी बोल रहे हैं।

श्री समाराम गरासिया: अस्‍पताल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई और प्रशासन की कोई भी लापरवाही से आज दिन तक कोई भी बच्‍चा नहीं मरा हमारे अस्‍पताल में। अंधविश्‍वासों को लेकर चलते हैं लोग, इस तरीके से यह मौतें हुई हैं। अखबारों में जो लीपापोती हुई है, वह बिलकुल सरासर गलत है। यह माननीय विधायकजी, जो पूर्व की सरकार में बैठे हुए थे तो इस तरह की जानकारी और दु:ख को व्‍यक् नहीं किया और ये भावी सोमशर्मा की तरह एम.पी. के चुनाव की बाजी लेते हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: यह किशनाराम भैराराम गरासिया का बच्‍चा, रूपना सरकारी खेड़ा का बच्‍चा स्‍वरूपगंज के अस्पताल में भर्ती था, उसका दिल बाहर निकला हुआ था। 19 तारीख को मंत्रीजी वहां थे और 20 तारीख को वह बच्‍चा मरा है, अस्‍पताल के अन्‍दर मरा है। (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बिलकुल सरासर गलत है और बिलकुल गलत है, ऐसी कहीं भी अस्‍पताल में मौत नहीं हुई और यह 19 तारीख की है या 20 तारीख की है, ऐसा नहीं है। जिस तरह से माननीय विधायक कह रहे हैं, यह सरासर गलत है और ये कह रहे हैं, मैं चैलेंज देता हूं तो आप इस्‍तीफा लिखकर दो या मैं लिखकर देता हूं कि इस तरह की मौत हुई है अस्‍पताल के अन्दर, क्‍या बात करते हो आप? हां, मैं बैठा हूं।

श्री ओम बिरला: वहां के हमारे माननीय विधायक कह रहे हैं, या तो आप इस्‍तीफा दो और नहीं तो ये दें...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण, लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा: अभी लिखकर देता हूं, चलो आप भी दो। (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: ...आपके क्षेत्र की जनता रो रही है, मर रही है। आपने कभी उनको देखा है, उनका दु:ख है क्‍या आपको? (व्‍यवधान) आप जब पूर्व की सरकार में बैठे हुए थे तो जनता रो रही थी, अखबारों के अन्‍दर लीपापोती कर रहे थे तब...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, अगर इस तरह से इस्‍तीफा देने लग गये तो सरकार पर अनावश्‍यक रूप से चुनाव का खर्चा बढ़ जायेगा।

श्री संयम लोढ़ा: लो, मैं लिखकर देता हूं इस्‍तीफा। (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: लोग रोज मर रहे हैं शिवगंज में, कभी उनके बारे में दु:ख दर्द को नहीं देखा और यहां कह रहे हैं कि हम पूरे क्षेत्र में घूम लिये और पूरे जिले को कवर कर लिया है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप सरकार को इस बात का निर्देश दें कि वह संवेदनशीलता दिखायें, मैं आपसे भी निवेदन करना चाहता हूं।

श्री जोगाराम पटेल: ...या तो आप इस्‍तीफा दो। आपने सदन में कहा है, वह आप पहले इस्‍तीफा दो, पहले इस्‍तीफा दो, बाद में बात करो। (व्‍यवधान)

श्री ओम बिरला: इस्‍तीफा दो, बोलो, अभी तैयार हो जायेगी। आप इस्‍तीफा दो, इस्‍तीफा लिखकर दो। (व्‍यवधान) खाली कागज नहीं, खाली कागज नहीं, इस्‍तीफा लिखकर दो।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍यगण। (व्‍यवधान)

श्री समाराम गरासिया: कागज पर इस्‍तीफा नहीं माना जाता है अध्‍यक्ष महोदय, अगर माननीय सदस्‍य इस्‍तीफा देना चाहते हैं...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, हमारा दल इससे सहमत नहीं है इस्‍तीफे से।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें, आप बिराजिये। मैं आपको मौका दूंगी, आप बैठो तो सही। (व्‍यवधान)

श्री ओम बिरला: फैसला करो। प्रश्‍नकाल में आरोप लगाना छोड़ो।

श्री अध्‍यक्ष: एक सैकण्‍ड, मुझे कहने दीजिये ना। सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍यों से मुझे यह कहना है कि आपके मंत्रीजी सक्षम हैं जवाब देने में और यह कोई कायदा नहीं है कि जब कोई एलीगेशन लगाये और उसके बाद आप बीच में खड़े होकर सवाल जवाब करने लग जायें, यह तरीका बिलकुल गलत है लेकिन सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य से मैं एक निवेदन करना चाहती हूं कि दिल जब बाहर था तो वह पैदा ही दिल बाहर लेकर हुआ होगा और ऐसे छोटे बच्‍चे को बचाना बहुत मुश्किल होता है, वह डाक्टर अपनी डाक्‍टरी कर भी लेता तो भी बहुत मुश्किल था इसलिए आप इस बात का आक्षेप नहीं लगायें कि वह खतम हो गया लेकिन मंत्रीजी ने नहीं देखा या नहीं बात सुनी तो वह अलग बात है। बाकी यह आक्षेप लगाना क्‍योंकि जो एबनोर्मल इस तरीके से पैदा हुआ उसको तो बचाना बहुत मुश्किल काम था। लेकिन आप लोग बीच में उत्‍तेजित होकर बीच में बोलें, टोकने लग जाते हैं तो यह उचित नहीं है।

डा. दिगम्‍बर सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि माननीय सदस्‍य की आदत में आ गया है गलत आरोप लगाना, मिथ्‍या बातें करना और मैं खुद कहता हूं कि मंत्री के अलावा एक डाक्टर का दिल भी मेरे अन्‍दर है। मेरे ऐसे कोई पेशेंट को छोड़कर जाने का कोई प्रश्‍न ही नहीं होता था। मैं वहां गया था सिरोही में, मेरे खुद बहुत जल्‍दी के अन्‍य कार्यक्रम थे परन्‍तु यह बात सही है कि वहां के आदिवासी इलाके के लोगों ने जितना स्‍वागत-सत्‍कार किया, ऐतिहासिक कार्यक्रम था क्‍योंकि हमने, इस सरकार ने वहां के इंटीरियर्स में जाकर नये अस्‍पताल खोले जिसकी बहुत ज्‍यादा खुशी उन लोगों के अन्‍दर थी और मेरे से कोई भी प्रतिनिधि मण्‍डल, कोई भी व्‍यक्ति इस बात को लेकर नहीं मिला कि इस तरह का कोई बच्‍चा एडमिट है। मैं जानता हूं कि यह कंजेनिटल एनोमली है, कोई इसका इलाज हो नहीं सकता था। अगर मुझे यह सूचना मिलती तो हो सकता है मैं वहां से उसको जयपुर शिफ्ट कराने की या कोई व्‍यवस्‍था करता परन्‍तु मेरे पास ऐसा कोई व्‍यक्ति नहीं आया। यह बिलकुल निराधार बात आप करते हैं।

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, आप एक जांच समिति गठित कर दीजिये। आप एक जांच समिति गठित कर दीजिये। वह जांच समिति बीजेपी या दूसरे लोगों की गठित कर दीजिये।

श्री महावीर प्रसाद जैन: इन्‍होंने जो आरोप लगाया है, सदन में जो घोषणा की है वह...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: वह अपने आप जांच करके बता देंगे कि मंत्रीजी ने कहा कि नहीं कहा और आप कहें तो मैं अभी फैक्‍स मंगवाता हूं राजस्‍थान पत्रिका में क्‍या छपा है, अभी मंगवाता हूं, एक घंटे के अन्‍दर मंगवाता हूं मैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह बिलकुल गलत बात है, यह तो गलत तरीका है आपका।

डा. दिगम्‍बर सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप वहां के विधायक हैं। अगर आप पहले से जानते थे तो आपको पहले बात करनी चाहिए थी।(व्‍यवधान) और मैं नहीं करता तो यह मेरी जिम्‍मेदारी थी। आप केवल अखबारों के आधार पर बात कर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा: मैं सिरोही का विधायक हूं, पिंडवाड़ा का नहीं हूं मैं और यह पिंडवाड़ा एरिये की बात है।

श्री समाराम गरासिया: हां हां, मैं वहां का विधायक हूं, मुझे जानकारी है, कमेटी गठित की है और मैं सहमत हूं। क्‍या बात करते हो? आप अपने क्षेत्र का ध्‍यान रखें।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले।

डा. दिगम्‍बर सिंह: आपने वहां का जन प्रतिनिधि होने के नाते कुछ भी काम नहीं किया है, आपने वहां किया क्‍या? उस गरीब मरीज के लिए बता दीजिये ना कि आपने क्‍या किया?

श्री संयम लोढ़ा:   

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श्री सी.पी.जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी वहां गये, स्‍वागत हुआ, मंत्रीजी अच्‍छा काम कर रहे हैं, उसका कोई प्रश्‍न नहीं है।  माननीय सदस्‍य के मन में जो पीड़ा है....

श्री महावीर प्रसाद जैन:  काहे की पीड़ा है, कोई पीड़ा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष:  बीच में मत बोलो।

श्री सी.पी.जोशी:  उस पी.एच.सी. का उदघाटन करने गये अध्‍यक्ष महोदय, तो उस पी.एच.सी. के डाक्‍टर का कर्तव्‍य होता कि अच्‍छा था कि मंत्री के नोटिस में यह लाते कि इस तरह का पेशेंट भरती है।

डा.किरोड़ी लाल मीणा:  यह वहां के विधायक के नोटिस में लाये क्‍या....

डा.सी.पी.जोशी:  विधायक वहां के नहीं हैं...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा:  मेरा एरिया नहीं पड़ता है, मेरा क्षेत्र नहीं पड़ता है।

श्री वासुदेव देवनानी:  मानवता के नाते नोटिस में लाते....

श्री संयम लोढ़ा:  मुझे तो जब बच्‍चा मरा तब मालूम पडा और मंत्रीजी....(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी: यह वहां के विधायक नहीं हैं, आप कहां बोल रहे हैं।  आप वहां के विधायक नहीं हैं।  क्‍या मतलब है...

श्री महावीर प्रसाद जैन:  नहीं है तो क्‍या हो गया।

श्री सी.पी.जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍या मतलब है।  यह कोई तरीका थोड़े ही है।  अध्‍यक्ष महोदय, आज मंत्रीजी वहां पर गये....

डा.दिगम्‍बर सिंह:  अध्‍यक्ष महोदय, यह वहां के विधायक नहीं हैं।  यह वहां के विधायक हैं जिनको पूरी स्थिति मालूम है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा:  यह तो खुद ही आपके साथ फीते काटते घूम रहे थे। (व्‍यवधान)

श्री समाराम:  मैं वहां का विधायक हूं, आपको वहां की चिंता करने की जरूरत नहीं है, शिवगंज में क्‍या हो रहा है, इनको ध्‍यान ही नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍यगण।  लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप हर बाद उत्‍तेजित हो जाते हैं और बेवजह खड़े हो जाते हैं और कुछ-कुछ कहने लग जाते हैं, उचित नहीं है।  उचित नहीं है यह।  मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगी कि एक साथ इतने लोग खड़े होकर के, माननीय सदस्‍य बोलने लग जाते हैं, न रिपोर्टर्स को सुनाई देता है, कौन क्‍या कह रहा है, न मुझे सुनाई देता है, इस तरह से सदन कैसे चलेगा।  एक जो माननीय सदस्‍य खड़े हों, उनकी बात को शांतिपूर्वक सुनकर पूरा मौका आपके पास, जवाब दें आप, क्‍या दिक्‍कत है इसमें, मेरी समझ में नहीं आता।  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।  आपको जो कुछ लिखकर देना है, दे दीजिये और उस पर माननीय मंत्रवीजी, आपको जवाब उस पर दे देंगे, दे चुके हैं, और दे देंगे।  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री हेमराज मीणा।

 

विधान सभा क्षेत्र किशनगंज(बारां) की प्रस्‍तावित पेयजल योजनाएं

 

21.श्री हेमराज(किशनगंज):  क्‍या जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) विधान सभा क्षेत्र किशनगंज में पेयजल हेतु विगत 2 वर्षों में पेयजल हेतु कहां-कहां पर नवीन योजनाएं स्‍वीकृत की गयी व इस हेतु कितनी धनराशि आवंटित की गई? सूची सदन की मेज पर रखें।

   (2) क्‍या यह सही है कि किशनगंज शाहबाद में पेयजल हेतु नवीन योजनाएं प्रस्‍तावित हैं?  यदि हां, तो कहां-कहां पर व नहीं, तो क्‍यों?

जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री(श्री सांवर लाल): (1) वांछित विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ठ-अ पर उपलब्‍ध है।

   (2) जी हां।  किशनगंज-शाहबाद क्षेत्र के पेयजल आवश्‍यकता वाले गांवों में वर्तमान आवश्‍यकता अनुरूप सैध्‍दांतिक रूप से स्‍वीकृत कार्यों का विवरण निम्‍न प्रकार है- नये हैण्‍डपम्‍प का निर्माण- किशनगंज-5, शाहबाद-5 ।  कुएं किराये पर लेना- किशनगंज-16 ।  उपरोक्‍त के अतिरिक्‍त किशनगंज तहसील के 5 व शाहबाद तहसील के 12 गांवों में आवश्‍यकता होने पर पेयजल परिवहन भी प्रस्‍तावित है। भविष्‍य में आवश्‍यकता पड़ने पर योजनाओं के प्रस्‍ताव बनाने पर विचार किया जायेगा।

श्री हेमराज:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि शायद मंत्रीजी को विभाग ने बहुत गुमराह किया है।  मेरे क्षेत्र की कम से कम तीन योजनाएं स्‍वीकृति के लिए प्रस्‍तावित है।  विभाग ने इनको शायद सही जानकारी नहीं दी।  मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि भंवरगढ़ की 98 लाख की पेयजल योजना आपके यहां पीएफसी की मीटिंग के अंदर प्रस्‍तावित है।  एक वर्ष उसको हो गया, वहां पर पानी का बहुत जबरदस्‍त क्राइसेस है और माननीय मुख्‍य मंत्रीजी जब केलवाणा पधारी थीं, उन्‍होंने भी उस योजना के लिए कहा था लेकिन अभी तक आपके यहां वह प्रस्‍ताव ही नहीं आये।  सबसे बड़ी खेदजनक बात यह है कि आपका कैसा गैरजिम्‍मेदाराना जवाब है कि प्रस्‍ताव भी आपके यहां विचाराधीन नहीं है।  दूसरा मैं निवेदन करूंगा आपको, इसी तरह किशनगंज के रानी बड़ौद की एक स्‍वीकृतशुदा स्‍कीम जिसके अभी भी एक वर्ष होने के बाद भी टेंडर नहीं हुए, बार-बार टेंडर उसके कैंसिल हो रहे हैं और उसके लिए भी आप कह रहे हैं कि उसके लिए भी स्‍वीकृति के लिए प्रस्‍तावित नहीं है आपके यहां योजना।  पराणा की योजना दो वर्ष पहले से मंजूर है लेकिन उसका कार्य अभी तक प्रारम्‍भ नहीं हुआ।  मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि तीनों योजनाएं जो आपके यहां प्रस्‍तावित हैं, क्‍या आप इनको स्‍वीकृत करने का विचार रखते हैं या नहीं, और हां, तो कब तक?

श्री सांवर लाल:  माननीय सदस्‍य, विभाग ने जो जवाब दिया, बिलकुल ठीक दिया।  आपने जो पूछा वह तो पढ़ लो आप खण्‍ड दो। 

श्री हेमराज: पढ़ लिया मैंने।

श्री सांवर लाल:  आपने कहा कि क्‍या यह सही है कि किशनगंज-शाहबाद में पेयजल हेतुं नई योजनाएं प्रस्‍तावित हैं।  किशनगंज विधान सभा क्षेत्र नहीं लिखा आपने।  दो कस्‍बों में नाम लिखे हैं तब मैं क्‍या जवाब देता, आप बताइये।  अब जहां तक आपके भंवरगढ़ की योजना है, भंवरगढ़ की योजना 87 लाख की हमारे पास विचाराधीन है और होली पर आप जाओगे तब आपको स्‍वीकृति का आदेश दे देंगे, जो दो योजनाएं आपने बताई है, उनमें जो भी विलम्‍ब होगा, मैं जानकारी करके तत्‍काल कार्यवाही करा दूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़:  हो गया, और क्‍या चाहिए, धन्‍यवाद दे दो। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, रामकिशोर मीणा।

डा.श्रीगोपाल बाहेती: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है...(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल: अजमेर का आप अलग से पूछो ना, थोड़ी-बहुत तकलीफ तो करो, अब आप दूसरे प्रश्‍न पूछते हैं और आप उसमें बीच में शरीक होना चाहते हैं।

            

विधान सभा क्षेत्र सिकराय में महिला महाविद्यालय की स्‍थापना

श्री रामकिशोर मीणा(सिकराय):  क्‍या उच्‍च शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य में कितने उपखण्‍ड ऐसे हैं जहां महाविद्यालय नहीं है? क्‍या सरकार जिन उपखंडों में महाविद्यालय नहीं है वहां महाविद्यालय खोलने का विचार रखती है?  यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

   (2) क्‍या सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विधान सभा क्षेत्र सिकराय में महिला महाविद्यालय खोलने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

राज्‍य मंत्री,उच्‍च शिक्षा(श्री वासुदेव देवनानी): राज्‍य में 15 उपखण्‍ड ऐसे हैं जहां महाविद्यालय नहीं है।  वर्तमान में जारी सत्र 2006-07 की महाविद्यालय खोलने की नीति के तहत इन उपखण्‍डों में निजी महाविद्यालय प्रारम्‍भ करने पर राज्‍य सरकार द्वारा छूट प्रदान की गई है।  आवेदन पत्र प्राप्‍त होने पार उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जायेगा।

   (2) जी नहीं।  राज्‍य सरकार के सीमित वित्‍तीय संसाधनों को देखते हुए राजकीय क्षेत्र में नवीन महाविद्यालय खोला जाना फिलहाल प्रस्‍तावित नहीं है।  यदि महाविद्यालय विकास समिति के माध्‍यम से स्‍ववित्‍तपोषित योजना में सिकराय में महाविद्यालय प्रारम्‍भ करने के प्रस्‍ताव प्राप्‍त होते हैं, तो राज्‍य सरकार उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

श्री रामकिशोर मीणा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत नम्‍बर एक प्रश्‍न पूछना चाहूंगा कि यह निजी महाविद्यालय खोलने के लिए सरकार की जो नीति है उसमें क्‍या छूट प्रदान की गई है।  दूसरा है, महाविद्यालय खोलने के तिलए क्‍या निर्धारित मापदण्‍ड हैं।  तीसरा, क्‍या सरकार ने यह सर्वे करवाया है कि सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल तक के अध्‍ययन के पश्‍चात् कितनी छात्राएं आगे कालेज की शिक्षा लेने से वंचित रह जाती हैं, इस प्रकार का क्‍या कोई सरकार ने सर्वे करवाया है।

श्री वासुदेव देवनानी:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य में पिछले वर्ष कुल 52 उपखण्‍ड ऐसे थे जहां महाविद्यालय नहीं थे।  राज्‍य सरकार की नीति के अनुसार प्रत्‍येक उपखण्‍ड पर उच्‍च शिक्षा की व्‍यवस्‍था हो, इसलिए हसमने इस क्षेत्र में महाविद्यालय खोलने के लिए सनिजी महाविद्यालय खोलने को छूट दी जिसमें पहली छूट थी कि एफडीआर में 75 प्रतिशत की हमने छूट दी है और आवेदन शुल्‍क में 50 प्रतिशत छूट दी।  साथ ही तीसरी छूट यह है कि इन क्षेत्रों में आवेदन करने वाली संस्‍थाओं को तीन वर्ष के किराये के भवन में महाविद्यालय संचालन करने की भी अनुमति दिये जाने का प्रावधान है।  इसके तहत गत वर्ष 38 उपखण्‍डों में महाविद्यालय खोले गये हैं।  इस बार 15 उपखण्‍ड शेष थे, अभी नये आवेदन हमको कुल 120 प्राप्‍त हुए हैं जिन 120 में से 13 आवेदन पिछड़े क्षेत्र के हैं जिनमें 6 उपखण्‍ड कवर हो रहे हैं, 9 उपखण्‍डों में से अभी कोई आवेदन प्राप्‍त नहीं हुए हैं, सरकार का प्रयास है कि ऐसे पिछड़े क्षेत्र के भी हमको आवेदन प्राप्‍त हो और प्रत्‍येक उपखण्‍ड पर उच्‍च शिक्षा उपलब्‍ध हो, यह हम प्रयास कर रहे हैं।

श्री रामकिशोर मीणा:  अध्‍यक्ष महोदय, इस क्षेत्र के ज्‍यादातर, जो माडा क्षेत्र है या आदिवासी इलाके हैं वहां पर प्राइवेट स्‍कूल या स्‍ववित्‍तपोषित विद्यालय चलने की स्थिति में नहीं है क्‍योंकि न तो कोई इतना पैसा लगाने की स्थिति में है और ज्‍यादातर उनकी शिक्षा छूट देने की वजह से, उनकी फीस नहीं ली जाती, इसके कारण से वह आगे महाविद्यालय लेवल पर वह फीस देने की स्थिति में नहीं होते और इसके कारण से इन क्षेत्रों में, पिछड़े क्षेत्र में स्‍ववित्‍तपोषित विद्यालय चलने की स्थिति में नहीं होते, क्‍या सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करके इस क्षेत्र में विशेष तौर‍ि से राजकीय महाविद्यालय खोलने का कोई इरादा रखती है और विशेष तौर से महिला महाविद्यालय  क्‍योंकि मैंने जो एक सर्वे करवाया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दौसा जिले में सीनियर सैकण्‍डरी करने के बादि में छात्राएं 90 प्रतिशत कालेज में जाना चाहती हैं, उनके अभिभावक पढ़ाना चाहते हैं लेकिन वह पड़ौस में महाविद्यालय नहीं होने से आगे की शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, वह आगे अध्‍ययन नहीं कर पातीं और वहां पर इस प्रकार की संस्‍थाएं भी नहीं हैं जो नोमिनल उसके चार्जेज लेकर के महाविद्यालय चला सकें, क्‍या सरकार  का इस प्रकार का विचार है।

श्री वासुदेव देवनानी:  सरकार ने महिला महाविद्यालयों के लिए जो प्रयत्‍न किये, गत दो वर्षों में 75 गर्ल्‍स कालेजेज खुले हैं, साथ ही इनका जो सिकराय है उसके निकट दो महिला महाविद्यालय है।  एक सिकराय से 42 किलोमीटर दूर राजकीय महिला महाविद्यालय, दौसा है जहां 784 छात्राएं अध्‍ययनरत हैं।  इसी तरह सिकराय से 23 किलोमीटर दूर स्‍ववित्‍तपोषित महिला महाविद्यालय, बांदीकुई में है जहां 189 छात्राएं इस समय अध्‍ययनरत हैं।  इसके अलावा दौसा जिले में इस समय कुल 24 महाविद्यालय है जिनमें लड़कियां भी पढ़ती हैं, लड़के भी पढ़ते हैं, जिनमें 4 गवर्नमेंट के हैं, 20 यह हैं।  जहां तक पिछड़े क्षेत्र की बात है, मुझे कहते हुए प्रसन्‍नता है कि सरकार की नीति के अनुकूल जिन 38 उपखण्‍डों में, उसमें सिकराय भी है, जहां पर महाविद्यालय खुल गये हैं और बाकी भी, मसूदा, परबतसर, ऐसे स्‍थानों पर खुल चुके हैं और इस वष्र भी बाड़मेर के गुढ़ामालानी जैसे स्‍थान के लिए भी छह आवेदन हमको प्राप्‍त हुए हैं, इसलिए निजी महाविद्यालय आ रहे हैं, मैं समझता हूं कि इस नीति के अन्‍तर्गत हम प्रत्‍येक उपखण्‍ड पर उपलब्‍ध करा देंगे।

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श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केवल 9 स्‍थान ऐसे बचे हैं जिन पर कोई आवेदन नहीं है तो मेहरबानी करके राज्‍य सरकार क्‍या इस बात पर विचार करेगी 9 ही स्‍थानों पर अगर विद्यालय सब डिवीजनल हैड क्‍वार्टर पर खोलना है तो अपने संसाधनों को उपलब्‍ध करा करके महाविद्यालय खोल दें।

चौ.विनोद कुमार (हनुमानगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि यह तो सब डिवीजन की बात है कुछ जिले ऐसे हैं जो बाद में बने हैं वहां जिला हैडक्‍वार्टर पर महाविद्यालय नहीं है इस तरह से एक हनुमानगढ़ है जहां यह कृषि प्रधान इलाका है और यहां एग्रीकल्‍चर कॉलेज खोलने का राज्‍य सरकार के विचाराधीन है क्‍या और मैं यह समझता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी विराजमान है कम से कम जिला हैडक्‍वार्टर पर तो कॉलेज की जरूर व्‍यवस्‍था होनी चाहिए जिससे बच्‍चों को पढ़ने में सुविधा हो और हायर एजुकेशन प्राप्‍त करने के बाद या हायर सेकेण्‍डरी करने के बाद बहुत दूरदराज जाना पड़ता है तो कम से कम जिला हैडक्‍वार्टर पर जरूर खुलवाने की व्‍यवस्‍था करेंगे। धनयवाद।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा (बस्‍सी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि जब कस्‍बे के लोग भवन बनाकरके जमीन दे करके आपको कॉलेज की पूरी बिल्डिंग नियमानुसार जितना होता है बनाकर देते हैं तो उसके पश्‍चात् क्‍या महिला महाविद्यालय खोलने का विचार रखते हैं?

श्री वासुदेव देवनानी: सरकारी की नीति के अनुसार ऐसे 5 जिला मुख्‍यालय हैं जहां पर राजकीय गर्ल्‍स कॉलेजेज नहीं हैं चूंरू, धौलपुर, राजसमन्‍द, हनुमानगढ़ और सीकर इन महाविद्यालयों के लिए सरकार ने एक नीति लागू की है कि राज्‍य सरकार एक टोकन लीज पर भूमि उपलब्‍ध करायेगी, भवन निर्माण कराके देगी और वहां कोई स्‍वयंसेवी संस्‍था यदि उसे चलाना चाहेगी तो सरकार उसमें सहायक बनेगी ऐसे पांचों जिलों के प्रस्‍तावाव सरकार के पास आ गये हैं और विचाराधीन है प्रक्रियाधीन है ।  मैं समझता हूं कि इस वर्ष यदि इन्‍होंने शुरू किया तो पांचों जिलों में ये कॉलेजेज स्‍थापित हो जायेंगे।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा:  माननीय मंत्री महोदय, मैंने निवेदन किया था कि आपको जब हम भवन बना कर के दे रहे हैं भूमि दे रहे हैं आपके नियमानुसार उसके बावजूद आपको खोलने में क्‍या परेशानी है?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी(शिक्षा मंत्री): अब तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उलटा काम  यह कर हरे हैं कि हम भवन बनाकर दे रहे हैं, हम भूमि दे रहे हैं आप चलाओ।  एक मैं सूचना देना चाहूंगा कि यह जो नीति बदली उससे कल माननीय जोशी जी ने कहा था, उसमें इतना परिवर्तन हुआ है कि राजस्‍थान में कुल 23 लाख 27 हजार

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     284 कॉलेज स्‍टूडेंट्स हैं उनमें शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के परसेंटेज के हिसाब से 48 हजार होने चाहिए और आज के दिन मुझे यह कहते हुए खुशी है कि 47,726 शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के विद्यार्थी भर्ती हो गये हैं और 36,710 शिड्यूल्‍ड ट्राइव के हैं और पहली बार राजस्‍थान में यह कॉलेज की शिक्षा नीति बदलने से सब उपखंडों पर खोलने से शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और शिड्यूल्‍ड ट्राइव के बच्‍चे अम के बराबर आ गये हैं और राजस्‍थान पहला राज्‍य है माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि हमने कॉलेज के लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिये हैं ।

डॉ.सी.पी.जोशी: मंत्री महोदय, आपको धन्‍यवाद।  इन कॉलेजों को खोलने से एस.सी./एस.टी. का एक भी बच्‍चा साइंस और कामर्स नहीं ले पा रहा है।  आप यह बताइये आपने जो नीति बनायी है जिस नीति के अन्‍तर्गत आप प्राइवेट कॉलेज खोल रहे हैं उसमें कामर्स और साइंस फैकल्‍टी नहीं है तो यह एस.सी./एस.टी. के बच्‍चों के साथ न्‍याय है या अन्‍याय है? सरकार को आगे करना चाहिए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  ये कामर्स की और साइंस की फैकल्‍टी भी शामिल है आर्ट्स की भी शामिल है।

डॉ.सी.पी.जोशी: र्मै फिर आपको निवेदन करना चाहता हूं माननीय मंत्री जी, आप पिछली बार भी कह गये बट में कि राजसमंद में गर्ल्‍स कॉलेज खोलेंगे आप चैक कर लें।  आप बहुत अति उत्‍साह में जवाब देते हैं।  रिकार्ड में है पिछली बार भी राजसमंद में आपका, आपको बताया मैंने आपके बजट भाषण में लिखा हुआ है कि राजसमंद में कॉलेज खोलेंगे और आज दिन तक राजसमंद में गर्ल्‍स कॉलेज नहीं है ।  सरकारी कॉलेज कह दिया आपने।  आज ये आंकड़े हैं आर्ट्स के हैं साइंस और कामर्स के विद्यार्थी एस.सी/एस.टी. के नहीं बढ़े हैं जब 12वीं में लड़के नहीं है तो फर्स्‍ट ईयर में कहां से आ रहे हैं?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: ये आंकड़े केवल आर्ट्स के नहीं हैं इन आंकड़ों में आर्ट्स साइंस, कामर्स सब के हैं और आपको इस बात की तकलीफ नहीं होनी चाहिए कि शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और शिड्यूल्‍ड ट्राइव के लड़के भी आपके बराबर पढ़ने के लिए आ गये हैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: मुझे तकलीफ नहीं हो रही है तकलीफ आपको हो रही है आपको तकलीफ हो रही है ...(व्‍यवधान) साइंस और कामर्स नहीं पढ़ाना चाहते हैं तकलीफ तो आपको हो रही है।

श्री वासुदेव देवनानी:  राजसमन्‍द जिला मुख्‍यालय पर गर्ल्‍स कॉलेज स्‍वीकृत हो गया है।

 

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डॉ.सी.पी.जोशी: आप बता दीजिये साइंस और आर्ट्स के फीगर।  आप खड़े होकर बताइये ।  आपके सेकेट्री बैठे हैं बताइये साइंस और आर्ट्स के फर्स्‍ट ईयर में कितने लड़के हैं एस.सी./एस.टी. के?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  मैं बता रहा हूं। सभी सरकारी कॉलेजों में आर्ट्स और साइंस जो है उनमें सब में एस.सी./एस.टी. के लड़कों का आरक्षण है और उसी अनुपात में उनकी भर्ती भी हुई है।

डॉ.सी.पी.जोशी: संख्‍या बताइये संख्‍या भाषण नहीं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  हां बता रहा हूं जोशी जी मैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: आपके राज में आने के बाद आपने जो नीति बनायी है उससे राजस्‍थान में एक भी साइंस और कामर्स की फैकल्‍टी नहीं खुली है और इसमें एस.सी./एस.टी. के लड़के भर्ती नहीं हुए हैं।  खाली भाषण दे रहे हैं कि हमने नीति नीति बना दी है।  आप फिगर बताइये मंत्री जी, फीगर बताइये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  आपने पाँच कॉलेज खोले थे पाँच वर्ष में और एक में भी आपने साइंस नहीं खोली।

डॉ.सी.पी.जोशी: आपके राज में आने के बाद फर्स्‍ट ईयर में साइंस और कामर्स के कितने लड़के हैं बताइये आप?

श्री संयम लोढ़ा: मंत्री जी, पाँच साल में पाँच नहीं हमारी सरकार ने पहले साल में 13 कॉलेज खोले थे फर्स्‍ट ईयर में।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  पाँच वर्ष में सिर्फ पाँच कॉलेज खोले थे और दो वर्ष में हमने 344 कॉलेज खोले हैं। (व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: आपने पाँच सौ खोले होंगे साइंस और आर्ट्स के फीगर बताइये । भाषण दे रहे हैं। साइंस और कामर्स का एक भी कॉलेज आपने नहीं खोला है एस.सी./एस.टी. का लड़का आर्ट्स पढ़े, इनकंपीटेंट आदमी से पढ़े, साइंस, कामर्स नहीं पढ़ सके। यह आपके ऊपर आरोप है ।  आप खड़े होकर बताइये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  यह आरोप है कि पाँच वर्ष में आपने पाँच कॉलेज खोले उनमें एक भी साइंस का नहीं खोला हमने जो कॉलेज खोले हैं उनमें सबमें साइंस के स्‍टूडेंट्स हैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: एक भी कॉलेज नहीं खोला है आपने एक भी साइंस की फैकल्‍टी नहीं खोली है। माननीय मंत्री जी, एक भी साइंस और कामर्स की फैकल्‍टी नहीं खोली है।  लड़के ही नहीं है हजार लड़के साइंस और कामर्स में ।  भाषण दिये जा रहे हैं हम ने यह कर दिया वो कर दिया। (व्‍यवधान) फीगर बताइये आप फीगर।  44 एम.एल.ए. एस.सी./एस.टी. के बैठे हुए हैं फीगर बताइये आप।

 

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श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  हां बता रहा हूं।

डॉ.सी.पी.जोशी: खाली मुख्‍यमंत्री जी बैठी हुई हैं अपनी परफार्मेंस बता रहे हैं ।  आप फीगर बताइये आपके सेकेट्री बैठे हुए हैं फीगर बताइये आप।  बताइये एस.सी./एस.टी. के लड़के कितने साइंस और कामर्स में भर्ती हुए हैं बताइये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: हां फिगर हैं।  एस.सी./एस.टी. के सारे लड़के आपने पढ़ाना बंद कर दिये थे हमने चालू कर दिया।

डॉ.सी.पी.जोशी: हमने तो ताला लगा दिया था गिनती बनायी थी आप बताइये। हमने तो ताला लगाया है हमने तो गिनती बनाई है इसलिए बैठे हैं यहां पर।  आपकी नीति से एक भी लड़का साइंस और कामर्स में एस.सी. और एस.टी. का भर्ती नहीं हुआ है । (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  आपने पाँच कॉलेज खोले हैं पाँच में एक भी साइंस और कामर्स नहीं खोली है और आपने कॉलेज खोलना बंद कर दिया था।

डॉ.सी.पी.जोशी: आप एस.सी./एस.टी. के साथि अन्‍याय कर रहे हो राज कर रहे हो अन्‍याय कर रहे हो 44 आदमी बैठे हुए हैं एक भी आदमी के साथ न्‍याय नहीं कर रहे हो।  बताइये फीगर बताइये भाषण देने से काम नहीं चलेगा फीगर बताइये आप।

श्री वासुदेव देवनानी:  माननीय विधायक महोदय, हमारी सरकार ने ...।

श्री सांवर लाल : माननीय जोशी जी, लड़के विषय अपने हिसाब से अपनी इच्‍छा के हिसाब से सलेक्‍ट करते हैं और मेरी बात सुनिये आप।

डॉ.सी.पी.जोशी:  डॉ. साहब एग्रीड। आपके प्राइवेट कॉलेज में फैकल्‍टी नहीं है कहां से आएंगे लड़के?  आप बताइये जितने कॉलेज खोले हैं प्राइवेट में उनमें एक में भी साइंस फैकल्‍टी नहीं है खोली हो तो बताइये आप?

श्री सांवर लाल : जब मैं कामर्स कॉलेज में गया तो उस समय 60% का नंबर नहीं आता था आज वहां 45% वाले भी एडमिशन नहीं लेते हैं ट्रेंड देखिये आप। लड़के अपनी इच्‍छा के हिसाब से फैकल्‍टी का चयन करते हैं ..(व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: डॉ.साहब एक भी प्राइवेट कॉलेज में फैकल्‍टी खोली हो तो बताइये आप।

श्री सांवर लाल: जितनी भी सिविल सर्विसेज हैं उनमें आर्ट्स वाले भी पीछे नहीं रहते हैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: मान्‍यवर, आप तो एक भी फैकल्‍टी खोली हो वो बताइये प्राइवेट कॉलेज में साइंस और कामर्स की?

 

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श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  अध्‍यक्ष महोदय, अभी तीन खोले हैं थानागाजी, खैरवाड़ा और झुंझुनूं तीनों सरकारी कॉलेजों में साइंस फैकल्‍टी है। आपने पाँच खोले पांचों में एक में भी नहीं खोला है।

डॉ.सी.पी.जोशी:  मान्‍यवर, प्राइवेट की पूछ रहा हूं मैं।  हल्‍ला करने से नहीं होता है प्राइवेट के सवासौ कॉलेज खोले हैं उनमें एक में भी साइंस,कामर्स नहीं है।  तीन का नाम ले रहे हैं आपने सवासौ प्राइवेट कॉलेज खोले हैं एक में भी साइंस और कामर्स नहीं है ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  तीनों में है झुंझुनूं, खैरवाड़ा, थानागाजी तीनों में साइंस की फैकल्‍टी है ।

डॉ.सी.पी.जोशी: श्रीमान् 125 प्राइवेट कॉलेज का बोलिये आप भाषण दे रहे हैं ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  सरकारी में भी हमने खोली है आपने तो नहीं खोली।

डॉ.सी.पी.जोशी: आप बताइये लड़के इन तीन कॉलेजों  में भी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: बता रहा हूं आप विराजिये। जब तारीफ हो रही थी गजरे के फूलों की तो खामोश बैठे रहे,...।

डॉ.सी.पी.जोशी: ये सब सुनाइये पार्टी मीटिंग में यहां तो फीगर दीजिये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: हां दे रहा हूं। ... और जब जख्‍में जिगर हमने दिखाया तो बुरा मान गई।

डॉ.सी.पी.जोशी : नहीं हम तो नहीं मान रहे हैं वो जख्‍मे जिगर तो आप मुख्‍यमंत्री को बताइये हमें मत बताइये।

श्री संयम लोढ़ा: ये जख्‍म बगल वालों को दिखाओ बगल वालों को।

डॉ.सी.पी.जोशी: आप बताइये लड़के बोलिये न ।लड़के बताइये ।

श्री संयम लोढ़ा: ये जख्‍म उधर दिखाओ।

डॉ.सी.पी.जोशी: साइंस फैकल्‍टी में लड़के बताओ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  जितने लड़के थे सब भर्ती हो गये।

डॉ.सी.पी.जोशी: सब भर्ती हो गये आर.एस.एस. का कार्यालय थोड़े ही है।  एक भी साइंस और कामर्स का लड़का मेरा आरोप है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार पर आरोप है कि सरकार ने प्राइवेट कॉलेज के नाम पर एस.सी./एस.टी. के साथ अन्‍याय किया है साइंस और कामर्स फैकल्‍टी नहीं खोली है लड़के आगे नहीं पढ़ सके। (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें आर.एस.एस. कहां से आ गया? हर मुद्दे पर आर.एस.एस. और कोई मुद्दा ही नहीं है आपके पास और कोई मुद्दा हो तो बताइये। (व्‍यवधान)

 

श्री बंसीलाल खटीक: बारबार आर.एस.एस. पर आरोप लगाया जा रहा है आपके पास आर.एस.एस. के सिवाय और कोई मुद्दा है कि नहीं?

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श्री बंशीलाल खटीक:.....जारी...

 आर.एस.एस. की वजह से आप जीवित हो वरना आज तक चल गये होते आप लोग।

डा.सी.पी.जोशी:  हम आरती उतार रहे थे आपकी ।

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य दो दिन तो आप चुप रहे और आज फिर लग गये ।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍य मंत्री जी बैठी हुई हैं मैं माफी मांग लूंगा  वह बताये दो साल में इस सरकार ने प्राइवेट कालेज खोले 125, वह उपखंड हैं जहां एसटी, एससी, के लोग ज्‍यादा रहते हैं एक में भी इन्‍होंने साइंस की फैकेल्‍टी नहीं खोली है । आप भाषण देना चाह रहे हैं हम बता रहे हैं । दो साल में आपने गरीब  आदमी के साथ अन्‍याय किया है और खाली भाषण दिये जा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष : राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें ।

श्री घनश्‍याम तिवाडी : अध्‍यक्ष महोदय, यह आरोप सरासर गलत है ।सरकार ने तीन कालेज खोले तीनों में साइंस की फैकेल्‍टी खोली और तीनों में उनकी संख्‍या को हमने पूरा किया ।

डा.सी.पी.जोशी: लडके बताइए आप लडके, भाषण दे रहे हैं ।

श्री घनश्‍याम तिवाडी । भाषण की बात नहीं है, लडके बता रहा हूं आप सुनिये, सुनने का माद्दा रखिये ।

डा.सी.पी.जोशी: बहुत ज्‍यादा माद्दा है । 750 लैक्‍चरर भर्ती कर देंगे बजट में लिखा है, एक भी भर्ती नहीं किया । भाषण दिये जा रहे हो बराबर । 2004-05 में 750 लैक्‍चरर भर्ती कर देंगे एक आदमी को भर्ती नहीं किया और भाषण दिये जा रहे हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाडी : अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बडी तकलीफ यह है कि अभी कल ही इन्‍होंने आंकडा दिया था उसमें कांग्रेस  पार्टी के समय में एससी,एसटी की संख्‍या कम थी और चूंकि राजस्‍थान में इतने कालेज खोलने से एससी,एसटी की 17 परसेंट और 12 परसेंट संख्‍या बराबर भर्ती हो गई है इसलिए इनको तकलीफ हो रही है ।

डा.सी.पी.जोशी:साइंस और कामर्स कें लडके बताइए भाषण दिये जा रहे हैं । अपनी गलती तो मान नहीं रहे हैं और भाषण दिये जा रहे हैं । यह आप अपने लोगों को खुख कर रहे हो  । (व्‍यवधान) आप फीगर बताइये भाषण दिये जा रहे हैं फीगर आपके पास है नहीं । खाली कहे जा रहे हैं हमने यह कर दिया, वह कर दिया ।

श्री सांवरलाल : आप किस सब्‍जेक्‍ट के प्रोफेसर हैं जोशी जी ।

डा.सी.पी.जोशी : जिस सब्‍जेक्‍ट में आप हैं उसमें नहीं हूं ।

श्री सांवरलाल : आप यहां पर आर्ट्स को डिमोरलाइज करना चाहते हो । जो बच्‍चा जो पढना चाहेगा वही पढेगा आप जबरदस्‍ती भर्ती कराना चाहते हो ।

डा.सी.पी.जोशी : जी, हां साहब । जिस सरकार का धर्म है...(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल : सारी सुविधाएं राजस्‍थान में है (व्‍यवधान) राजस्‍थान में हर प्रकार की शिक्षा की सुविधा है...(व्‍यवधान) जबरदस्‍ती अपनी मर्जी से भर्ती कराओगे क्‍या ।

डा.सी.पी.जोशी : यह राज का धर्म बनता है कि एससी,एसटी के साथ हम न्‍याय करें ।

श्री सांवरलाल : लडका जो पढना चाहता है वही पढेगा ।

डा.सी.पी.जोशी : कहां से पढेगा आपके घर आकर पढेगा क्‍या  वहां साइंस फैकेल्‍टी ही नहीं है ।

श्री ओ.पी.महेन्‍द्रा : अध्‍यक्ष महोदय मैं नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य से यह जानना चाहता हूं कि आप भी शिक्षा मंत्री रहे हैं आपने किस प्रकार प्राइवेट कालेज खोले थे । प्राइवेट कालेज मे जो प्राइवेट संस्‍थाएं हैं ..(व्‍यवधान) उसी सब्‍जेक्‍ट का वहां महाविद्यालय खोला जाता है । (व्‍यवधान) आप भी शिक्षा मंत्री रहे हैं आप बताये आपने प्राइवेट कालेज किस प्रकार से खोले थे । प्राइवेट कालेज किस प्रकार से खोले थे ।

डा.सी.पी.जोशी : यहां बैठने के लिये खोले थे ।

श्री ओ.पी.महेन्‍द्रा : निजी महाविद्यालय जिस प्रकार से आवेदन करते हैं उसको परमिशन दी जाती है, आप भी शिक्षा मंत्री रहे हैं आपने किस प्रकार खोले थे आप बताइये ।

श्री रामप्रताप कासनिया : अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नकाल कितना महत्‍वपूर्ण है आये दिन शोर शराबे में प्रश्‍नकाल समाप्‍त कर दिया जाता है इससे हमारा दल तो बिलकुल ही सहमत नहीं है ।

श्री अमराराम(धोद) : अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में 32 जिलो में मात्र 4 जिला हैडक्‍वाटर ऐसे हैं जहां आज तक भी गर्ल्‍स गवर्नमेंट कालेज नहीं है । मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से इतना ही निवेदन है और उनका तो गृह जिला भी जहां बडी शिक्षा के प्रसार की बात कर रहे हैं और राजस्‍थान में मात्र 4 जिला हैडक्‍वाटर ऐसे हैं क्‍या मंत्री महोदय उन 4 जिला हैडक्‍वाटर पर जिससे कम से कम राजस्‍थान में एकरूपता आये क्‍या सरकारी कालेज खोलने का इरादा रखते हैं । कम से कम सीकर जिसमें आप पढकर आये हैं और उसमें गर्ल्‍स गवर्नमेंट कालेज नहीं है तो 4 जिला हैडक्‍वाटर पर सरकारी गर्ल्‍स कालेज खोलकर राजस्‍थान में जहां महिला मुख्‍य मंत्री, महिला राज्‍यपाल, महिला विधान सभा अध्‍यक्ष हैं और कम से कम महिलाओं के लिये इतनी मेहरबानी तो आप कीजिए कि 4 जिला हैडक्‍वार्टर पर सरकारी कालेज की इस बजट में मुख्‍य मंत्री जी से घोषणा कराने का प्रयास करें ।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया(गृह मंत्री) : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन के सभी माननीय सदस्‍यों के यह ध्‍यान में लाना चाहता हूं अबकी बार हमने जितने भी विद्यालयों को रियायती दरों पर जमीन उपलब्‍ध कराई गई है उनके साथ यह शर्त लगाई है कि जितना भी एससी,एसटी का आरक्षण है उतने बच्‍चे भर्ती होने चाहिये और आधी फीस पर भर्ती होने चाहिये । यह निर्णय लिया हमने और निर्णय लेकर उन सबको अलाटमेंट की शर्त के साथ बांधा है कि भविष्‍य में आपके विद्यालय में जो आरक्षण कोटा है एससी, एसटी का उतने बच्‍चे भर्ती होंगे, जो आपकी कोमन फीस होगी महीने की मान लो 400 है तो इन बच्‍चों से आपको 200 रुपये ही लेनी पडेगी तभी आपको जमीन उपलब्‍ध होगी ।

श्री मुरारीलाल मीणा : लोकसभा में बीजेपी ने बहिष्‍कार कर दिया शिक्षण संस्‍थाओं में आरक्षण का ।

श्री वासुदेव देवनानी : अध्‍यक्ष महोदय, हमने एससी,एसटी, के जो क्षेत्र हैं उनके लिये एफ डी आर ..(व्‍यवधान) इसके अंतर्गत आते हैं 32 एस सी, 24 एस टी..(व्‍यवधान) जो विधान सभा क्षेत्र के हैं उनको छूट दी है आपने तो कभी दी नहीं हमने छूट दी है तो आपको तकलीफ हो रही है ।

श्री मुरारीलाल मीणा : मंत्री महोदय इतने ही हमदर्द हो रहे हो तो कर्मचारियों का कोटा पूरा कर दो । (व्‍यवधान) आप इतना ही श्रेय लेना चाहते हो तो...(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार : माननीय शिक्षा मंत्री जी आप जो प्राइवेट कालेज खुलवा रहे हो सरकारी जमीन देकर उससे कोई सरकार को फायदा होने वाला नहीं है । जहां जंगलों में पशु चरते थे लोग उसको काम में ले रहे थे आप लोग उस पर कब्‍जा करवा कर कालेज खुलवा रहे हो, मैं समझता हूं यह नीति के खिलाफ है और इस तरह का जो काम कर रहे हैं उससे कोई फायदा होने वाला नहीं है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड (संसदीय कार्य मंत्री) : अध्‍यक्ष महोदय इस सवाल पर बहुत चर्चा हो चुकी है आप नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकारो ।

श्री अध्‍यक्ष : मैंने तो दूसरे का नाम पुकार लिया श्री भरत सिंह लेकिन कुछ माननीय सदस्‍य मानते ही नहीं है बोलते चले जाते हैं । मैं पूर्व में भी कह चुकी हूं कि जो कोई माननीय सदस्‍य बिना आसन की अनुमति के बोलेगा उसी अंकित नहीं किया जायेगा फिर भी माननीय सदस्‍य ध्‍यान नहीं दे रहे हैं । माननीय भरत सिंह जी ।

 

निम्‍न आय वर्ग के व्‍यक्तियों को कुक्‍कुट शालाओं की स्‍थापना हेतु प्रशिक्षण

 

23.श्री भरत सिंह(दिगोद): क्‍या पशु पालन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

 

               राज्‍य में गत 5 वर्षों में कुल कितने निम्‍न आय वर्ग के परिवारों को कुक्‍कुट शाला लगाने हेतु सरकार द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है जिलेवार नामों की सूची सदन की मेज पर रखे ।

               क्‍या यह सही है कि प्रदेश की जनसंख्‍या 5.5 करोड के मुकाबले राज्‍य में अण्‍डों का उत्‍पादन 16 से 18 लाख प्रतिदिन के बीच है एवं अन्‍य प्रदेशों से अण्‍डे मंगवाकर मांग की पूर्ति की जा रही है यदि हां, तो प्रदेश में अण्‍डों की प्रतिदिन कुल खपत क्‍या है तथा क्‍या सरकार इस मांग को प्रदेश की कुक्‍कुट शालाओं से ही पूरी करने हेतु कार्य योजना बनाने का विचार रखती है । यदि हां, तो क्‍या व कब तक तथा नहीं तो क्‍यों ।

श्री प्रभुलाल सैनी(पशु पालन मंत्री):(1) राज्‍य में गत 5 वर्षों में कुल 1354 व्‍यक्तियों को कुक्‍कुट पालन का प्रशिक्षण दिया गया । जिलेवार नामों की सूची सदन की मेज पर रख दी गइ है ।

    (2) प्रदेश में 2004-05 में 6932 लाख अंडों का उत्‍पादन हुआ जो औसतन प्रतिदिन 18.99 लाख है । प्रदेश में अंडों की मांग उत्‍पादन के मुकाबले कम होने के कारण अन्‍य प्रदेशों से अंडों की आपूर्ति नहीं की जा रही है ।

श्री भरत सिंह : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पशु पालन मंत्री जी के साथ मुख्‍य मंत्री जी का भी ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि प्रदेश में बढती बेरोजगारी की समस्‍या के समाधान के लिये कुक्‍कुट व्‍यवसाय में जो संभावना है उसकी तुलना में पिछले 5 साल में 1354 व्‍यक्तियों को ट्रेनिंग दी । इसका मतलब कि औसतन 300 व्‍यक्तियों से कम ट्रेनिंग प्रतिवर्ष लोगों को दी गई । मैं मंत्री जी से एक चीज तो यह जानना चाहूंगा कि जो ट्रेंडशुदा व्‍यक्ति हैं इनमें से कितने लोगों ने इस व्‍यवसाय को अपनाया और सरकार ने उनकी क्‍या मदद की । दूसरा मेरा प्रश्‍न है कि जो देश में अभी बर्ड फ्लू आया उससे प्रदेश में क्‍या कोई घटना रिपोर्ट हुई है और इसके दुष्‍प्रभाव से जो पोलट्री व्‍यवसाय प्रभावित हुआ है उनमें उन लोगों को जिन्‍होंने ट्रेनिंग ली है और जो लोग इस व्‍यवसाय में लगे हैं उनके संरक्षण के लिये विभाग ने क्‍या पहल की और तीसरा मेरा प्रश्‍न यह है कि हमारी जो साढे पांच करोड से अधिक जनसंख्‍या है उस दृष्टि से जो अंडो की और बायलर का उत्‍पादन हमारे राजस्‍थान में है वह अत्‍यन्‍त कम है और दूसरे प्रदेशों के पोलट्री फार्मर्स बायलर की सप्‍लाई करते हैं । अंडों के बारे में आपने उल्‍लेख किया कि अंडे बाहर से मंगाये नहीं जा रहे हैं मगर जब आवश्‍यकता पडती है मंगाये जाते हैं पर मैं उस पर नहीं जाना चाहता । मैं तो आपसे इतना ही निवेदन करता हूं कि हमारे जो आदिवासी क्षेत्र हैं उसमें रोजगार की संभावना बहुत कम है । आदिवासी क्षेत्र में पोल्‍ट्री की स्‍थापना करके और मिड डे मिल के रूप में जो आदिवासी क्षेत्र हैं...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप प्रश्‍न पूछे भाषण नहीं दें ।

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श्री भरत सिंह: मैं भूमिका बाधूंगा तभी तो।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं,प्रश्‍न में भूमिका नहीं बांधी जाती है,प्रश्‍न तो सीधा पूछा जाता है।

श्री भरत सिंह: मैं यह कह रहा हूं, आप जो आदिवासी लोगों को घूघरी खिलाते हैं अगर उनको इस  व्‍यवस्‍था से जोड़ दे,उनके अंडे की खपत,आदिवासी में मिड डे मिल के अंदर अंडे की उनकी देने की व्‍यवस्‍था करेंगे क्‍या?

श्री बंशीलाल खटीक: हम विरोध करते हैं।

श्री भरत सिंह: अध्‍यक्ष जी, यह इनको करना है अगर यह सुनने में  भी बर्दाश्‍त नहीं कर सकते,बेरोजगारी से जुड़ा प्रश्‍न है। मुझे खुशी है कि मुख्‍यमंत्री जी यहां पर है। मैं इस प्रश्‍न को इसलिये उठा रहा हूं कि आन्‍ध्रप्रदेश(व्‍यवधान) अंडे से ही है क्‍योंकि जब आप बजट पेश करेंगी तो रोजगार,आज प्रदेश में बेरोजगारी की बहुत बड़ी समस्‍या है,उस प्रोबलम को एडजेस्‍ट करना है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: अंडे नहीं यह डण्‍डे मंगवा सकते हैं डण्‍डे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: जो मीट खाते हैं, नंदलाल बंशीवाल जो खड़े हैं यह रोज मुर्गा खाते हैं।( व्‍यवधान)

श्री नंदलाल बंशीवाल(दौसा): आप खडे़ होते हैं बार-बार, मैं खड़ा हो गया तो कोई अपराध कर दिया क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक: मैं इस चीज का विरोध करता हूं। अंडे देने का विरोध करता हूं। (व्‍यवधान)

श्री नंदलाल बंशीवाल: आपसे पूछकर आये हैं क्‍या ?

श्री बंशीलाल खटीक: मिड डे मिल में अंडे नहीं दिये जाये,सभी शाकाहारियों को मांसाहारी बनाने की कवायद चल रही है। (व्‍यवधान)

श्री नंदलाल बंशीवाल:नगर जाना,आपको देखूंगा ही देखूंगा दौसा में,नगर जाना दौसा में देखूंगा 

श्री बंशीलाल खटीक: सब शाकाहारियों को मांसाहारी बनाने की कवायद आपकी नहीं चलेगी, हम विरोध करते हैं इस बारे में, मिड डे मिल में अंडे नहीं देने की,विरोध करते हैं।(व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह: मैं तो शाकाहारी अंडे की बात कर रहा हूं।

श्री नंदलाल बंशीवाल:आप तो अवैध शिकार के करके खाते हो और अंडे और मुर्गियों की बात करते हो।(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मदन राठौड़ जी तो मुर्गियों के दाने की फैक्‍ट्री चलाते हैं।

    यह तो शाकाहारी है यह मुर्गे से थोडे़ हो रहे है....(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक:अंडा शाकाहारी नहीं है, उसमें से तो जीव पैदा होता है अंडे में से।

श्री मदन राठौड(सुमेरपुर): यह आजाद साहब ने गलत आरोप लगाया है, मेरी कोई मुर्गियों के अंडे की फैक्‍ट्री नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य एक दूसरे से सवाल जवाब नहीं।

श्री मदन राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, मेरे कोई मुर्गियों के अंडे की फैक्‍ट्री नहीं है। यह असत्‍य बोलते हैं आजाद साहब ।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नगर से आने वाले ,आपसे में सवाल जवाब नहीं करें,मंत्री जी का जवाब आने दे आप प्रश्‍न  के हिसाब से पूछिये, आप तो भाषण देने लग गये।

श्री भरत सिंह: भूमिका तो बांधनी ही पडे़गी नहीं तो समझ में नहीं आयेगा।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न के लिये कोई भूमिका नहीं बांधी जाती।

श्री भरत सिंह: माननीय अध्‍यक्ष जी, एक शाकाहारी मंत्री को इस प्रकार का प्रश्‍न समझने में भी देर लगेगी।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर।

श्री अशोक बैरवा(खण्‍डार): मंत्री महोदय जवाब.....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य,कुछ नहीं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़(सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अंडे और मुर्गियों का ज्ञान संयम लोढ़ा जी को ज्‍यादा है।

श्री अध्‍यक्ष: केसर देव बाबर।

श्री केसर देव बाबर(लक्ष्‍मणगढ़,सीकर): प्रश्‍न संख्‍या 24. (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा: न तो मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आया न इसमें एक भी पूरक प्रश्‍न हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें,आप भी विरोजे, आप इनको स्‍थान ग्रहण करने दें।

श्री केसर देव बाबर: प्रश्‍न संख्‍या 24.

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है(व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्री अशोक बैरवा: ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या प्रश्‍न का जवाब आयेगा वह तो भूमिका बाँध रहे हैं ।

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री अध्‍यक्ष: भूमिका बा रहे हैं,नो नौ।

श्रीमती ममता शर्मा:***

श्री अध्‍यक्ष:  I have called the next question.

श्री नंदलाल बंशीवाल: *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: दौसा से आने वाले माननीय सदस्‍य,दौसा से आने वाले माननीय बंशीलाल स्‍थान ग्रहण करें।

श्री भरतसिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मांसाहारी बनाने की बात कर रहे हैं सबको।(व्‍यवधान)

श्री भरतसिंह : ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय,भरत सिंह जी ने जो प्रश्‍न किया यह हमारा,आज का स्‍टार स्‍पीकर है,इन्‍होंने जो प्रश्‍न पूछा है एक सप्‍लीमेंट्री का तो उत्‍तर दिलवाइये। एक का भी उत्‍तर नहीं दिया,एक का तो दिलवाइये,यह तो उचित होगा।

 श्री अध्‍यक्ष: उसको जवाब के लायक नहीं समझा इसलिये नहीं दिया।

श्री रामनारायण चौधरी: हम एक  सप्‍लीमेंट्री का उत्‍तर सरकार से मांग रहे हैं वह भी आप नहीं दिलवाते हो।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है,आप  दूसरे नियम से आइये,मैंने पुकार लिया है दूसरा  प्रश्‍न।

      विधान सभा क्षेत्र लक्ष्‍मणगढ़(सीकर) के भूमिहीन अनुसूचित जाति- जनजाति परिवारों को भू-आवंटन।

      24.श्री केसर देव बाबर(लक्ष्‍मणगढ़,सीकर): क्‍या राजस्‍व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

      (1) विधान सभा क्षेत्र लक्ष्‍मण्‍गढ़ (सीकर) में अनुसूचित जाति एवम जनजाति के कितने भूमिहीन परिवार है? ग्रामवार सूची सदन की मेज पर रखें।

      (2) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र लक्ष्‍मणगढ़ में काफी मात्रा में सिवाय चक ,गैर मुमकिन एवम चारागाह भूमि है ? यदि हां, तो किस किस ग्राम में एवम कितनी कितनी तथा क्‍या उक्‍त भूमि को सरकार भूमि‍हीन परिवारों को आवंटित करने का विचार  रखती है ? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

      राजस्‍व मंत्री (श्री रामनारायण डूडी): 1.विधान सभा क्षेत्र लक्ष्‍मणगढ़(सीकर) में अनुसूचित जाति के 168 तथा अनुसूचित जनजाति के 02 (कुल 170) भूमिहीन परिवार हैं जिनकी ग्रामवार सूची अ पर संलग्‍न है।

      2. जी हां,सिवायचक,गैरमुमकिन एवम चारागाह भूमि उपलब्‍ध है । ग्रामवार सूची ब संलग्‍न है।

      जी नहीं ,क्‍योंकि उक्‍त भूमि प्रतिबंधित श्रेणी की होने,माननीय उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा प्रतिबंधिंत भूमि होने तथा कृषि योग्‍य न होने से आंवटन किया जाना संभव नहीं है।

श्रीमती ममता शर्मा:***

श्री अशोक बैरवा: ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री जुबेर खान: ***

श्री नंदलाल बंशीवाल: ***

श्री भरतसिंह: ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, टाइम बरबाद हो रहा है,हम  आपको कोपरेट कर रहे हैं इधर से। आप एक सप्‍लीमेंट्री का उत्‍तर दिलवा दें आसन की तरफ से। यह हमारे साथ ज्‍यादती है,हम कापरेट कर रहे हैं,संचालन में आपका सहयोग कर रहे हैं और  सत्‍ता पक्ष को आप यह नहीं कह सकती कि इसका जवाब दे दीजिये। यह कोई बात थोडे़ ही हुई। आपने फरमा दिया कि मैंने दूसरा काल कर लिया है(व्‍यवधान) हंगामें में प्रश्‍न रूकवा दिया।

श्री नंदलाल बंशीवाल: ***

श्री रामनारायण चौधरी: फायदा क्‍या होगा अध्‍यक्ष महोदय,यह कायदा रहा है,परम्‍परा भी रही है प्रश्‍न पुकार लिया है उसके बाद भी उसके महत्‍व को  देखते हुये,कौन उठा रहा है उसके महत्‍व  को  देखते हुये प्रतिपक्ष यह मांग कर रहा है उसके महत्‍व को देखते हुये,आप इस तरह से इगनोर कर रही है जैसे कोई  सिर में से जूं निकालकर बाहर फैकता है,ऐसा व्‍यवहार तो मत करिये। दृष्‍टान्‍त है कि दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया उसके बाद भी टाइम दिया है,आप दिला दीजिये, आपसे कोई कन्‍फ्रेटेशन नहीं  चाहते हैं न हम सरकार से चाहते हैं। एक सप्‍लीमेंट्री का सवाल है,एक ऐसा व्‍यक्ति जो क्लियर बोलता है आज उनका नाम बोलने वालो में हैं,यह तो कोई बात नहीं हुई साहब।  नाम पुकार लिया क्‍या हुआ?

श्री अध्‍यक्ष:  नेता प्रतिपक्ष वह घूघरी में अंडे खिला रहे थे और सरकार  घूघरी में अंडे खिलाना  नहीं चाहती है(व्‍यवधान) भूमिका बना रहे थे,क्‍या करती मैं,वह तो भूमिका बना रहे थे।

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री कनकमल कटारा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***                                         

 

Ddm/usc/ 2.3.6/1200/2a

 

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

श्री राकेश मेघवाल: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: ***

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, आपने हमारी छोटी सी बात को ठुकरा दिया।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मुझे सदन को सूचित करना है कि श्री नारायण सिंह, सदस्‍य, विधान सभा ने .....(व्‍यवधान) ....

श्री रामनारायण चौधरी: और हमें आपसे सख्‍त नाराजगी है, हम आज इस आपकी व्‍यवस्‍था में भाग नहीं लेंगे और हमारा विरोज आपको दर्ज करवा रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: शारीरिक अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 28 फरवरी, 2006 से सत्रांत तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है ।

                  (कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन से बर्हिगमन)

श्री महावीर प्रसाद जैन: इस मुद्दे पर आपका वाक आउट उचित नहीं है । (व्‍यवधान) आप बहुत पुराने सदस्‍य हैं, आप इन बच्‍चों के कहने में आ रहे हैं । (व्‍यवधान) अब तो आप भ्रमित हो रहे हैं ।

                        (व्‍यवस्‍था-सूचक-घण्‍टी)

श्री अध्‍यक्ष: मुझे सदन को सूचित करना है कि श्री नारायण सिंह सदस्‍य, विधान सभा ने शारीरिक अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 28 फरवरी, 2006 से सत्रांत तक

   सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है ।

      क्‍या सदन की अनुमति है कि उन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की जाय?

                        (स्‍वीकृत)

   अनुमति प्रदान की गयी ।

                     स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था  

                मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

श्री संयम लोढा एवं 23 अन्‍य सदस्‍यों की और से नाबालिग लड़कियों से बलात्‍कार के मामले में सहायता राशि में कथित भेदभाव के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से जिला अलवर की असाध्‍य विधवा महिलाओं को अपनी बेटियों की शादी हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने के सम्‍बन्‍ध में ।

   उपरोक्‍त दोनों ही प्रस्‍तावों में हाल ही में घटित किसी विशिष्‍ट घटना का उल्‍लेख नहीं है, अत: स्‍थगन प्रस्‍ताव के रूप में अनुमति देने में असमर्थ हूं । माननीय सदस्‍य सदन में अन्‍य माध्‍यम से इन विषयों को उठा सकते हैं ।

            प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र बैराठ के ग्राम रामपुरा में वन क्षेत्र में नीलामी में बरती गई गम्‍भीर अनियमितता के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री भरतसिंह, सदस्‍य की और से छबड़ा थर्मल प्‍लान्‍ट हेतु अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा देने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री अमराराम धोद, सदस्‍य की और से विनोदिनी स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय खेतड़ी की विशेष आडिट के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री बीरूसिंह राठौड़, सदस्‍य की ओर से वैशाली नगर एरियामें अवागमन की पर्याप्‍त एवं माकूल व्‍यवस्‍था कराने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री रामकिशोर मीणा, सदस्‍य की और से सिकराय विधान सभा क्षेत्र में 25 एम.वी.ए. के दो ट्रांसफार्मर उपलब्‍ध करवाने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र डेगाना की राजकीय पाठशालाओं में रिक्‍त पदों के सम्‍बन्‍ध में ।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास, सदस्‍य की और से राज्‍य में एच.आई.वी. की समुचित जांच प्रणाली विकसित करने एवं एड्स के मरीजों को नि:शुल्‍क चिकित्‍सा उपलब्‍ध करवाये जाने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री हरिसिंह रावत, सदस्‍य की और से जिला पूनल के वाहनों की स्थिति अत्‍यन्‍त खराब होने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री श्रवण कुमार, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र पिलानी के गांव हमीनपुर में अतिक्रमणियों के खिलाफ कार्यवाही करने के समबन्‍ध में ।

श्री नाथूराम अहारी, सदस्‍य की और से जिला डूंगरपुर में अकाल राहत कार्य शुरू करने के सम्‍बन्‍ध् में ।

श्री रामलाल शर्मा, सदस्‍य की और से कृषि विद्युत कनेक्‍शनों को सामान्‍य श्रेणी में परिवर्तित करने के सम्‍बन्‍ध में ।

श्री हीरालाल, सदस्‍य की और से निवाई उप खण्‍ड मुख्‍यालय पर ट्रोमा हास्पिटल खोले जाने के सम्‍बन्‍ध में ।

        माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गयी सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी ।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह। 

 

 

 

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों के नियम 295 के अन्‍तर्गत निवेदन है कि वर्ष 2002 में बैराठ विधान सभा क्षेत्र के ग्राम रामपुरा के वन क्षेत्र में सूखे पे़ों के नाम पर ग्राम पंचायत द्वाराहरे पेड़ों की अवैध नीलामी में गम्‍भीर अनियमितताएं बरती गयी थीं । इस प्रकरण में मेरे द्वारा विधान सभा में विभिन्‍न माध्‍यमों यथा- तारांकित प्रश्‍न, विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍ध्‍ंी नियमों के नियम 131 के अन्‍तर्गत ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव के माध्‍यम से सदन का ध्‍यान दिलाये जाने के बावजूद भी आज तक दोषियों से न तो राजस्‍व हानि की वसूली की गयी है और न ही अभी तक किसी को सज़ा दी गयी है ।

      इस सम्‍बन्‍ध में यह भी निवेदन है कि इस प्रकरण में अतिरिक्‍त जिला कलक्‍टर, चतुर्थ, जयपुर उप वन संरक्षक (मध्‍य) एवं कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, जयपुर एवं अन्‍य अधिकारियों द्वारा जांच करने के उपरांत पंचायत विभाग एवं वन विभाग, दोनों ही विभागों की जांच रिपोर्ट में इन अनियमितताओं का सत्‍यापन हो गया है लेकिन इस सत&