ans\usc\1100\1a
अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृत्तान्त
अंक: 5 बारहवीं
विधान सभा के पंचम
सत्र का पंचम दिवस
संख्या: 5
शनिवार;
4 मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की बैठक 1100 बजे
विधान सभा
भवन] जयपुर
में प्रारम्भ
हुई ।
(श्रीमती सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
स्थगन प्रस्तावों पर अध्यक्षीय व्यवस्था
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मुझे आपको सूचित करना है कि निम्नांकित स्थगन प्रस्तावों की सूचना प्राप्त हुई है:-
(1) श्री रणवीर सिंह गुढा एवम दो अन्य सदस्यों की और से जोधपुर के एडवोकेट श्री सुरेश शर्मा हत्याकाण्ड में शामिल प्राभावशील लोगोंके खिलाफ कार्यवाही नहीं करने से उत्पन्न स्थिति के सम्बन्ध में।
(2) श्री जुबेर खान सदस्य की और से जयपुर स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल गलताजी के चल रहे विवाद के सम्बन्ध में।
(3) श्री बाबूलाल नागर सदस्य की और से दूदू में सरसो समर्थन मूल्य केन्द्र खोलने के सम्बन्ध में।
यद्यपि उपरोक्त प्रस्ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाए, अंत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्य को अपनी बात कहने के लिए दो मिनिट का समय दूंगी, दो मिनिट में अपनी बात कहने की अनुमति होगी।
नियम 295 के अन्तर्गत प्राप्त सूचनाएं
मुझे
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
के प्रस्ताव
प्राप्त हुए
हैं:-
(।) श्री हरिमोहन शर्मा, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र हिण्डोली में औसत से कम वर्षा होने के कारण उत्पन्न स्थिति के सम्बन्ध में।
(2) श्री हरिशचन्द्र कुमावत, सदस्य की ओर से नगरपालिका मेड़ता के अधिशाषी अधिकारी एवम अध्यक्ष द्वारा पद का दुरूपयोग करने के सम्बन्ध में।
(3) श्री ज्ञानचन्द पारख, सदस्य की और से पाली के कपड़े की रँगाई-छपाई के उद्योग से किसानों की भूमि प्रदूषित होने के सम्बन्ध में।
(4) श्री प्रभुलाल वर्मा, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र पिपल्दा का इन्द्रगढ़ से ढीपरी राज्य मार्ग क्षतिग्रस्त होने के सम्बन्ध में।
(5) श्री महिपाल सिंह यादव, सदस्य की और से कस्बा बानसूर से गुजर रहे स्टेट हाईवे 52 के दोनों और की जमीन पर अतिक्रमण होने के सम्बन्ध में।
(6) श्री बंशीलाल खटीक, सदस्य की और से राजसमन्द के आर. के. चिकित्सालय को 200 बैड का करने के सम्बन्ध में।
(7) श्री अर्जुन सिंह, सदस्य की और से विधान क्षेत्र दानपुर में पुलिसा का निर्माण करने के सम्बन्ध में।
(8) श्री बनवारी लाल शर्मा, सदस्य की और से धौलपुर शहर में ड्रेनेज स्कीम की क्रियान्विति के सम्बन्ध में।
(9) श्री रणधीर सिंह भीण्डर, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र बल्लभनगर में यातायात के साधनों की समुसिचत व्ययवस्था नहीं होने के सम्बन्ध में।
(10) श्री संयम लोढ़ा, सदस्य की और से शिवगंज नगरपालिका द्वारा सीमा क्षेत्र(पैराफैरी) में भूमि रूपान्तरण की राशि बंडगांव व केसरपुरा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करवाने के सम्बन्ध में।
(11) श्री खुशवीर सिंह, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र खारची में राहत कार्य आरम्भ करने के सम्बन्ध में।
(12) श्री मांगीलाल गरासिया, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र गोगुन्दा की कतिपय सड़कों को पक्का करने के सम्बन्ध में।
माननीय सदस्यों से निवेदन करना चाहूंगी कि इन्हें पढ़ा हुआ मान लिया जाए क्योंकि अब हमारे पास वाद-विवाद के लिए केवल साढ़े पाँच घण्टे का समय है।
श्री सुरेश मीणा(करौली): माननीय अध्यक्ष महोदय, इससे पहले कोई ऐसा मामला है जो सदन में रखना चाहता हूं, मेरे क्षेत्र में.....
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं, तो आपका पढ़ा हुआ मान लेंगे ना।
श्री सुरेश मीणा: मेरे क्षेत्र में इस पानी को जनता पी रही है, इस पानी को, माननीय अध्यक्ष महोदय, इस चीज के बारे में...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: पढ़ा हुआ मान रहे हैं इसका मतलब कार्यवाही होगी ना। गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्य आप क्यों खडे़ हो गए, मैं बैठी थोडे़ ही हूं।
श्री सुरेश मीणा: इस पानी को जनता पीती है और हम बिसलरी का पानी पीते हैं, इसको हमारी जनता पीती है, इसको देखा जाए, इस पानी को,, यह अख़बार में छपा मामला है, सारा मामला है। इस तरह की पाँच स्कीम चल रही है राज्य सरकार की लेकिन आज तक स्कीम पूरी नहीं हुई और यह पानी पीया जा रहा है माननीय मंत्री जी।
श्री अध्यक्ष: आपका तो कोई प्रस्ताव है नहीं केवल पानी को लेकर खडे़ हो गए आप। देखिये, मौका आयेगा बजट भाषण पर बोलियेगा, पानी दिखा दीजियेगा।
श्री सुरेश मीणा: बजट भाषण, पानी पीने का मामला है अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष: तो पानी दिखा दीजियेगा ना, मैं कब ना कर रही हूं, मैं आपको बोलने का..(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: इस पानी से लोग मर रहे हैं साहब।
श्री अध्यक्ष: बोलने का मौका दूंगी।
श्री सुरेश मीणा: माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर जो अधिकारी लगे हुये हैं, दस-दस साल से वह वही टिके हुये हैं, मनमानी कर रहे हैं, उनको हटाया जाए वरना यहां धरने पर बैठूंगा, तब तक बैठूंगा जब तक मांग पूरी नहीं होगी। मैं धरने पर बैठता हूं।
(माननीय सदस्य सुरेश मीणा द्वारा सदन कूप में आकर भाषणबाजी)
श्री अध्यक्ष: आपको बोलने का मौका देंगे तब आप..(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़: आश्वासन किसका चाहिये, स्थानान्तरण का चाहिये या पानी की समस्या का,अधिकारियों के तबादले का आश्वासन चाहिये या पानी की समस्या के समाधान का, पानी की समस्या का चाहिये, ट्रान्सफर का ?
श्री अमराराम धोद(धोद): लोगों को इतना गंदा पानी पिला रहे हो।
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप पहले....
श्री अमराराम धोद: ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिये। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप पहले वहां जाइये, आप अपने स्थान पर जाइये, वहां से बात करिये, आप अपने स्थान पर जाइये, वैल में आकर बोलने का आपको कोई अधिकार नहीं है।(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा(नैनवा): करौली से आने वाले ..
श्री अध्यक्ष: एक सैकण्ड, मुझे कहने दीजिये, आपने यदि पहले माननीय मंत्री जी का ध्यान पानी के सम्बन्ध में आकर्षित किया है और उन्होंने सुना नहीं है,कार्यवाही नहीं हु ई है तब तो आपका यहां सब कहना उचित है और यदि आपने नहीं तो पहले ही आकर आप बोतल लेकर खडे़ हो गए और दिखाने लग गए, मैं समझती हूं यह परम्परा ठीक नहीं है, अब आप मंत्री जी बोलिये।
श्री रामनारायण मीणा: मंत्री जी, मैं एक लाइन में अर्ज करूं यह सवाल करौली का नहीं है, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह मेरे करवर में बूंदी जिले में चार दिन से धरने प्रदर्शन चल रहे हैं,पीने के पानी की...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह आप क्या बता रहे हो बूंदी की ? आप उपनेता हो,क्या कर रहे हो,क्या कह रहे हो इस समय ?
श्री सांवरलाल जाट(सिंचाई मंत्री): आप उपनेता है माननीय सदस्य, आपको इस तरह से बीच में नहीं बोलना चाहिये। पानी के ऊपर पूरे दिन बहस होगी, जो भी समस्या है आप उसमें उठाइये। माननीय सदस्य अख़बार की कतरन और बोतल भरकर लाए हैं माननीय अध्यक्ष महोदय..(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: हकीकत बात है। कमेटी बनाकर भेज दीजिये इसमें गलती हो तो, हकीकत बात बता रहा हूं,हकीकत बात बता रहा हूं, इसमें कोई डर..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप सुनो तो सही। आप मंत्री जी को सुने तो सही।
श्री सांवरलाल जाट: हकीकत है क्या है थोड़ा बहुत सुनो तो सही। बात आ गई आपकी। आपने अपनी बोतल रख दी इससे ज्यादा और क्या कहना है आपको ? अध्यक्ष महोदय,पीने के पानी की व्यवस्था करवाना और शुद्ध पानी उपलब्ध कराना राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी है और जिस प्रकार की भौगोलिक स्थिति राजस्थान की है सारे सदस्य और जनता भी वाकिफ है। राजस्थान में 10 प्रतिशत हिस्सा पूरे हिन्दुस्तान का है और 1.16 सरफेस वाटर है, जो भी बरसात के ऊपर निर्भर करता है, अंडरग्राउण्ड वाटर का लगातार डिप्लेसन हो रहा है। धरती के अंदर जो पानी है वह खारा है या फलोराइड का है,वही है,बाकी सब जगह हालात बडे़ गम्भीर है फिर भी सरकार की तरफ से अब हमने जल अभियान भी शुरू किया है जिसमें जो उपलब्ध जल है उसका ओप्टीमम यूटिलाइजेशन करें, इस प्रकार की चेतना पैदा करे और इसके साथ ही बरसात का पानी अगर गिरता है तो उसको रोकने के लिए सरकार व्यवस्था करे जिससे भूजल ऊपर आये।
श्री अध्यक्ष: आप तो इनके प्रश्न का जवाब दे दीजिये।
श्री सांवरलाल जाट: थोड़ा बैकग्राउण्ड तो बता दूं मान्यवर।
श्री अध्यक्ष: बैकग्राउण्ड की आवश्यकता नहीं है।
श्री सांवरलाल जाट: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य की बात से सहमति और असहमति व्यक्त नहीं कर सकता। माननीय सदस्य ने इस विधान सभा में, इस बोतल के अलावा मुझे कभी नहीं कहा कि मेरे एरिया में इतना गंदा पानी पी रहे हैं आप व्यवस्था कीजिए, अब विधान सभा चल रही है और बोतल दिखाने के लिये लाये हो तो इसमें मुझे कुछ नहीं कहना। बाकी माननीय सदस्य की जिम्मेदारी बनती है...(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: मैं आपको दिखाने के लिए(व्यवधान) हकीकत बात है यह।
श्री सांवरलाल जाट: आप बैठिये, आप सुनो पूरी,आपकी जिम्मेदारी यह भी बनती है कि अगर आपकी जनता को शुद्ध पानी नहीं मिलता है तो हमारे को पत्र लिखते, हमारे पास आकर बताते कि ऐसी हालत है, बाकी मैं आपको यह विश्वास दिला सकता हूं अगर इस पानी में दोष होगा और ऐसा पानी जनता पी रही होगी तो हम अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: मंत्री महोदय, मैं निवेदन कर रहा हूं एक कमेटी गठित करके आज ही वहां पर जाया जाये और इस चीज को देखा जाए।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बोल दिया ना उन्होंने।
श्री सांवरलाल जाट: कभी आपने कहा नहीं कि हमारी जनता ऐसा पानी पी रही है,आपने आज विधान सभा में कहा,तो हमें जानकारी लेने दीजिये उसके बाद
अगी वास्तव में आपकी बात ठीक होगी तो हम कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: मंत्री महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं।
श्री ओम बिरला(कोटा): मंत्री जी ने जवाबदे दिया कि जांच करेंगे, ऐसा पानी जनता पी रही है तो कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: जवाब कुछ नहीं है।
श्री सांवरलाल जाट: आपके इसी विधान सभा सत्र में यह रिपोर्ट लाकर आपको बता देंगे अगर गड़बड़ी होगी तो एक्शन करके बता देंगे।
श्री सुरेश मीणा: माननीय मंत्री महोदय, मैं निवेदन कर रहा हूं जो अधिकारी...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: श्री रणवीर सिंह गुढा।
श्री सुरेश मीणा: जो अधिकारी वहां पर दस साल से बैठे हुए हैं, पाइप लाइन का जो पाइप आता है उसको बेच दिया जाता है आज तक पाइप नहीं बिछवाई गई जबकि वहां पर बोरिंग है, वहां पर जीएलआर बने हुए हैं लेकिन पाइप लाइन नहीं बिछाई।(व्यवधान)
श्री सांवरलाल जाट: अधिकारी तो 60 साल की नौकरी करते हैं जो तो कह देंगे राजस्थान से बाहर भेज दो।
श्री सुरेश मीणा: पाँच-पाँच साल से, दस साल से अधिकारी वहां पर बैठे हुए हैं।
श्री
अध्यक्ष: करौली
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आपने सब बता
दिया उसके बाद
भी आप उत्तेजित
हो रहे हैं।
Ddm/usc/1110/1b
श्री
सुरेश मीणा: नहीं अध्यक्ष
महोदय, हमको
चुनकर भेजा है
और हम इस पानी को
पिलाते हैं
जनता को, हम
सरकार से यह
कह सकते हैं
इस बात को ।
श्री
अध्यक्ष: तो उन्होंने
आपको यह आश्वासन
दिया है (व्यवधान)
आपको यह आश्वासन
दिया है (व्यवधान)
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
।
श्री
बंशीलाल खटीक: यह
प्रमाणित है
क्या, यह
प्रमाणित
करके यहां लाए
हैं क्या कि
यह वहां का ही
पानी है (व्यवधान)
यह सरकार को बदनाम
करने की साजिश
है। यह सरकार
को बदनाम करने
की साजिश है ।
यह प्रमाणित
है क्याकि
वहां का पानी
है । यह झूठा
करके लेकर आये
हैं । (व्यवधान)
इतने दिन क्या
आपकी आँख फूट
गयी (व्यवधान)
इतने दिन आपकी
आंखें फूट गयी
थी क्या, ऐसा
पानी पिला रहे
थे । यह
प्रमाणित है
क्या वहां का
पानी है । (व्यवधान)यह
जांच करवा लें
यह वहां का
प्रमाणित
पानी है क्या,
यह सरकार को
बदनाम करने की
साजिश है । यह
वहां का पानी
नहीं है । (व्यवधान)
डा.दिगम्बरसिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह उस
इलाके का पानी
है ही नहीं । यह
कौनसा तरीका
हुआ ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें,
स्थान ग्रहण
करें ।
(श्री
सुरेश मीणा, सदस्य
द्वारा सदन
कूप में धरना)
श्री
जीतमल खांट: पूरे राजस्थान
का ठेका ले
रखा है क्या ?
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण करें ।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें । आप
कृपया स्थान
ग्रहण करें,
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ।
श्री
रामनारायण
चौधरी: स्थान
ग्रहण करेंगे
तो वहां इनकी
पिटाई हो
जाएगी । फिर
पिटेगें वहां
पर ।
श्री
मुरारीलाल
मीणा: मैं आपको
बताना
चाहूंगा..(व्यवधान)..करौली
जिला ऐसा जिला
है जहां से
चम्बल नदी
गुजरती है ।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
आपका नाम तो
नहीं पुकारा,
मैंने बोलने
के लिये आपका नाम
नहीं पुकारा
है । माननीय
सदस्य, मैंने
नाम नहीं
पुकारा है ।
(व्यवधान)
करौली से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
जब यह आश्वासन
दे दिया कि
यदि यह पानी,
आप सही होंगे
तो निश्चित
तौर से उन
अधिकारियों
के खिलाफ
कार्यवाही की
जाएगी । अब आप
और क्या
चाहते हैं ।
अब आप क्या
चाहते हैं ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा ।
(श्री
मुरारीलाल
मीणा, सदस्य भी
धरने पर बैठे)
(दोनों
माननीय सदस्यों
द्वारा धरना
समाप्त)
श्री
सुरेश मीणा: देखों
मंत्रीजी, ऐसे
+++ को बीच में
क्यों बोलने
देते हैं । +++ को
बीच में नहीं
बोलने दिया
कीजिए ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह कौनसी
भाषा का
प्रयोग कर रहे
हैं आप ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप मुझे मजबूर
न करें, नाम
लेकर पुकारने
के लिये ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: इस भाषा का
उपयोग मत
कीजिए आप । इस
भाषा का उपयोग
मत कीजिए ।
श्री
बंशीलाल खटीक: सरकार को
बदनाम करने पर
तुले हुए हैं
। आपका काम ही
सरकार को
बदनाम करने का
है । आपका काम
क्या है,
सरकार को
बदनाम करने पर
तुले हुए हो
आप लोग ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
मैं आपको
चेतावनी दे
रही हूं,
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
मैं आपको
चेतावनी दे
रही हूं ।
मंत्रीजी जवाब
देते हैं, आप
बीच में क्यों
खड़े होते हैं
। आपकी जिम्मेदारी
नहीं है जवाब
देने की । (व्यवधान)
अब आप खामखा
में उत्तेजित
हो रहे हैं, अब
आप भी शांत
होइये । अब आप
भी शांत होइये
।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मेरी
एक प्रार्थना
है, माननीय सदस्य
ने उत्तेजना
में राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य
के लिये +++ और
दूसरे शब्दों
का उपयोग
किया, इन्हें
कार्यवाही से
निकलवा
दीजिये ।
श्री
अध्यक्ष: क्या कहा ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: +++ और दूसरे
शब्दों का,
इन +++ का बीच में
बोलना बंद
कराओ ।
असंसदीय शब्द
जो भी हैं
इनको
कार्यवाही से
निकलवायें ।
श्री
अध्यक्ष: +++ ?
श्री
सुरेश मीणा: मंत्रीजी,
यह हमारा पानी
का मामला है,
इसमें बीच में
बोलने की जरुरत
क्या थी,
मेरे कहने का
मतलब यह था बस
। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: करौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
करौली से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
भी ऐसी भाषा
का उपयोग नहीं
करना चाहिए ।
मैं +++ शब्द को
एक्सपंज कर
रही हूं ।
श्री
रामनारायण
मीणा: यह असंसदीय
नहीं है ।
श्री
सुरेश मीणा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, रोजाना
पता नहीं क्या
..(व्यवधान)
सबको डिस्टर्ब
करते हैं ये ।
डा.
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, +++ असंसदीय
नहीं है । +++ शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है। यह
असंसदीय शब्द
नहीं है । +++
शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है ।
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा: +++ शब्द यहां
पर अनपार्लियामेंट्री
है । (व्यवधान)
+++ शब्द यहां
पर
अनपार्लियामेंट्री
है । असंसदीय
है यहां इस
सम्बन्ध
में । (व्यवधान)
+++ शब्द कभी
भी संसदीय
नहीं हो सकता
है ।
डा.सी.पी.
जोशी: अध्यक्ष
महोदय, +++ शब्द कोई
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है । (व्यवधान)
+++ शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है । +++
शबद कोई
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है ।
आपको सदस्य
को रोकना
चाहिए था, वह
काम तो कर
नहीं रहे हैं आप
।
श्री
जोगाराम पटेल: जिस
परिप्रेक्ष्य
में कहा गया
है, उस
परिप्रेक्ष्य
में असंसदीय
है ।
+++
शब्द हो सकता
है संसदीय हो
पर उसका सेंस
असंसदीय हो
रहा है ।
श्री
सांवरलाल : माननीय
सदस्य के
लिये +++ बोलना उचित
मानते हो
क्या ?
श्री
बंशीलाल खटीक: +++ शब्द एक
अभिशाप है, +++ शब्द
एक अभिशाप है, +++ शब्द
कभी भी संसदीय
नहीं हो सकता
है ।
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
मैं आपको
सूचित करना
चाहूंगी, मैं
आपका ध्यान
दिलाना
चाहूंगी कि
यदि कोई शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं भी हो तो
भी यह आसन उसे
एक्सपंज कर
सकता है ।
डा.सी.पी.
जोशी: मानते हैं,
आपकी बात से
सहमत हैं, पर
अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर आप
नहीं कर सकते
हैं । आपको यह
अधिकार है
पूरी की पूरी
प्रोसीडिंग
को बाहर निकाल
दें ना आप । यह
आपको अधिकार
है परन्तु अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर
नहीं निकाल
सकते हैं । यह
आपको अधिकार
है, आप पूरी प्रोसीडिंग
को बाहर निकाल
दें, आपको
अधिकार है ।
लेकिन अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर
नहीं निकाल
सकते हैं आप ।
श्री
जोगाराम पटेल: माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस
परिप्रेक्ष्य
में इस शब्द
का प्रयोग
किया गया
था...(व्यवधान)
श्री
सांवरलाल: अध्यक्ष
महोदय, जिस
रूप में आप इस
शब्द को पढ़
रहे हो
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
यदि हर सदस्य
के लिये +++ शब्द
का इस्तेमाल
होगा तो मत
कहना आप ।
श्री
जोगाराम पटेल: जिस भावना
से कहा गया है
इसलिये वह
असंसदीय शब्द
बन जाता है (व्यवधान)
सभी माननीय
सदस्य स्वतंत्र
हैं ।
श्री
सुरेश मीणा: मंत्रीजी,
हमें इतना सा
आश्वासन दे
दें 10 साल से जो
भ्रष्टाचारी
अधिकारी वहां
लगे हुए हैं
उनको तुरन्त
प्रभाव से
हटाया जाए ।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ये तो
ट्रांसफर का
तय करके आये
हैं ।
श्री
जोगाराम पटेल: ट्रांसफर
करवाने की
साजिश है और
कुछ नहीं है ।
श्री
सांवरलाल: आप विराजो
तो सही, मुझे
यह समझ में
नहीं आ रहा है
कि मैंने इतना
आश्वासन दे
दिया उसके
बावजूद आप
अभी के अभी
सस्पेंड
करवाना चाह
रहे हो क्या,
मैं कह रहा
हूं कि जांच
हो जायेगी इसी
सत्र के अन्दर
आपको सारी
स्थिति से
अवगत करा
देंगे । इतना
स्पष्ट
कहने के
बावजूद भी अगर
आप संतुष्ट
नहीं हों तो
क्या इलाज है
।
श्री
अध्यक्ष: कृपया
शांत रहें ।
आप बोलिये ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि आपने एक
संगीन विषय पर
मुझे बोलने का
मौका दिया ।
श्री
अध्यक्ष: बात कह दो
अपनी, धन्यवाद
तो कर दो, बात
कह दें ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय गृह
मंत्रीजी से
यह पूछना
चाहता हूं कि
क्या जोधपुर
के एडवोकेट
सुरेश शर्मा
हत्याकाण्ड
के अन्दर
एफ.आई.आर. के
अन्दर दर्ज
व्यक्तियों
से पूछताछ की
गयी, छानबीन
की गयी । माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जो एडवोकेट
सुरेश शर्मा
जोधपुर के
एडवोकेट,
जिनकी हत्या
हुई थी उनकी
जमीन थी 102 बीघा,
उस जमीन के
उुपर शुरू से
लेकर आज तक
मालिकाना हक
कब्जा और नाम
एडवोकेट
सुरेश शर्मा
का था और उसके विश्वास
पात्र रिश्तेदार
पृथ्वीराज
पुत्र सूरजमल
जो कि हरियाणा
में रहता है
वह सुरेश
शर्मा के
पिताजी के काम
करते थे, उनके
नाम कुछ जमीन
थी । मैं आपके
माध्यम से
पूछना चाहता
हूं, उसमें
हमारे मंत्री
महोदय, नाम
नहीं लेना
चाहूंगा, उन्होंने
50 बीघा जमीन
अपने नाम
नामान्तरण
करवाकर.....
श्री
अध्यक्ष: मंत्रीजी
का नाम लेने
के लिये 273 में
नोटिस देना
पड़ेगा ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: मैं नाम
नहीं ले रहा
हूं । हमारे
मंत्रीजी हैं,
उन्होंने
पने नाम से,
अपनी दो
बेटियों के
नाम से हिमानी
और चाँदनी
पूनिया के नाम
से 50 बीघा जमीन अपने
नाम करवाई ।
श्री
अध्यक्ष: अब आपने
पूनिया कहकर
बात तो स्पष्ट
कर ही दी । अब
देखिये,
पूनिया कहकर
बात आपने स्पष्ट
कर दी । 273 का
नोटिस दिया
हुआ नहीं है ।
बात गलत है
आपकी एक तरह
से । आप 273 का
नोटिस देकर
उठाते(व्यवधान)
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, 2004 में (व्यवधान)
अपराध जगत से
जुड़ा हुआ
मामला है, हत्या
का मामला है
और 2 साल पहले 2004
में एडवोकेट
सुरेश शर्मा
ने अपनी निजी
डायरी में
लिखा है कि उनको
उनकी जान को
खतरा है, उनके
पास में, यह
निजी डायरी की
फोटो कापी
मेरे पास में
है । उनके पास
में फोन आया
कि यू.पी. के
शूटरों को
बुलाकर उनकी
हत्या करवाई
जा सकती है,
अगर वह जमीन
के रास्ते
में से,
मंत्री के बीच
में से नहीं
हटेगें तो। 23 तारीख
को सुरेश
शर्मा बुलाया
। 23 तारीख को
सुरेश श्ंर्मा
की गुमशुदगी
की रिपोर्ट
उनके पुत्र ने
दर्ज करवाई
नवनीत शर्मा
ने । माननीय
अध्यक्ष
महोदय, नवनीत
शर्मा ने
साफ-साफ लिखा
है कि मेरे
पापा को जो
बुलाया गया है
मुझे पूरी शंका
है कि मेरे
पापा की हत्या
कर दी गयी है
या उनके साथ
में को ई
अनहोनी घटना
घट सकती है और
रिपोर्ट में साफ-साफ
विजय पूनिया
का नाम लिखा
गया है, अध्यक्ष
महोदय, जो एक
मंत्री के
पुत्र हैं,
शाम को उनकी
हत्या हो गयी
। (व्यवधान)
शाम को उनकी
हत्या हो गयी
और 24 तारीख को,
अध्यक्ष
महोदय...(व्यवधान)...माननीय
अध्यक्ष
महोदय, संगीन
मामला है,
इतना संगीन
मामला है ।
एक
माननीय सदस्य:
ये गम्भीर
आरोप लगा रहे
हैं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह क्या
बात हुई, कोई
नियम नहीं है
। कोई भी आरोप
लगा दे, यह क्या
बात हुई अध्यक्ष
महोदय । (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण करें,
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें । अंकित
नहीं हो । (व्यवधान)
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्रीमती
उषा पूनिया: ***
श्री
ओम बिड़ला: ***
श्री
अध्यक्ष: अब आपका स्थान
ग्रहण करें ।
(व्यवधान) अब
अरन गृह
मंत्रीजी को
दे दें जो कुछ
देना है ।
आपको जो कुछ
देना है, गृह
मंत्रीजी को
दे दें आप । अब
आपका समय खत्म
हुआ, अब आपका
समय समाप्त
हुआ । (व्यवधान)
Vps/usc/1120/4-3-06/1c.
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा : ***
श्रीमती
उषा पूनिया: यह बातें
आप बाहर
करिये, आप पर
मानहानि का
दावा मैं
करूंगी।
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो, अंकित
नहीं हो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: अब आप
गृह मंत्री की
बात सुनें।
आपका तो अंकित
नहीं हो रहा
है। आपका
अंकित नहीं हो
रहा है। आप
गृह मंत्रीजी
को सुनिये।
आपका समय
समाप्त हुआ।
मैंने केवल दो
मिनट का समय
दिया था आपको।
आप ऊटपटाँग
बात बोल रहे
हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया(गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय यह सही
है कि 22 तारीख
की रात को
सुरेश शर्मा
की हत्या
हुई। 23 तारीख
को सवेरे एफ.आई.आर.
लिखायी गयी और
27 तारीख को
हमने तीन
मुल्जिम जो इस
घटना में, क्योंकि
उनके घर के
पास खून के
छींटे देखे और
उसके आधार पर
पहुंचे कि
उसमें एक
हेमलता सोनी
जो उसमें
मुल्जिम थी,
उसको हमने
पकड़ लिया।
उसके बाद उसके
पति और एक और
नरपतसिंह को
और भंवरसिंह
को, उनको तीन
को तो हमने 27
तारीख को ही
गिरफ्तार कर
लिया जो अभी
भी जे.सी. में
है और उनसे
पूछताछ से यह
चार लोगों के
नाम और निकल
कर आये जो
हेमलता के
पीहर पक्ष के
भाई और उनके
लड़के हैं।
जिसमें धनेश,
बादल, जावेद
और सतीश है।
यह चार लोग
आये। उनको भी
जिस होटल में
यह रुके इसके
पहले भी एक
अटेम्प किया
था और यह लोग
उस होटल में
रुके उसका
रिकार्ड पहले
का भी मिला और
उस समय यह काम
नहीं कर पाये।
उसके बाद
दूसरी तारीख
को जब यह घटना
हुई तो उनको
आइडेंटिफाई
किया और उस
होटल में यह
चार लोग भी
रुके। यह सात
लोग उसमें
मुल्जिम हैं।
एफ.आई.आर. में
किसी का नाम
नहीं था । यह
तो ढूँढ़ते-ढूँढ़ते
इस घटना से ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पहले
बैठिये आप।
सुनिये आप कि
क्या कह रहे
हैं यह। रोज
बोल देते हो
मर्जी आये सो ...
(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया:
तफ्तीश
जैसे-जैसे आगे
बढ़ी उसके
आधार पर इसमें
नाम निकलकर
आये हैं। आप
जो आरोप लगा
रहे हैं, अभी
तक कि मेरी
जांच से इस
प्रकार की कोई
बात नहीं
निकली है। मैं
आपको यह यकीन
दिलाता हूं कि
इसमें किसी को
भी संदेह नहीं
रहना चाहिए कि
हमने किसी भी
प्रकार, अगर
और मुल्जिम हो
उसको छोड़ने
की मंशा हो,
कोई सवाल ही
नहीं पैदा
होता और इसलिए
इसके बादि भी
जब वहां के
लोगों ने कहा
कि हमें
तफ्तीश में
संदेह है तो
मैंने सी.आई.डी. को कल
ही फाईल
ट्रांसफर की
है । कहीं पर
भी आपको संदेह
करने का कोई
कारण नहीं
होगा अगर
मुल्जिम होगा
तो ही मैं
मुल्जिम
बनाऊंगा।
जबरदस्ती
कोई प्रेशर से
किसी को
मुल्जिम
बनाना चाहे तो
यह मेरा धर्म
नहीं कहता है
कि मैं उसको
कोई जबरदस्ती
मुल्जिम
बनाऊं।
मैं
सदन को आश्वस्त कर रहा
हूं कि सही
जांच करके
कहीं पर भी कोई
संदेह का कोई
कारण नहीं
होगा। अगर
किसी प्रकार
की घटना में
से निकल कर
आये। अभी जैसे
चार लोगों को
हमें जो फरार
हैं, उनको
पकड़ने के बाद
और कोई नयी
बात उसमें से
निकलेगी तो
उसके बाद ही
आगे बढ़ा जा
सकता है ।
इतना मैं कहना
चाहता हूं। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा:***
श्रीमती
उषा पूनिया: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
अध्यक्ष
महोदय ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछने की
इजाजत नहीं
है।
नहीं-नहीं,
नो-नो
बिलकुल
इजाजत नहीं
है। कतई नहीं
है । नो-नो ।
अंकित नहीं
हो, कुछ नहीं।
आप स्थान
ग्रहण करें।
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ***
श्री
सांवरलाल: ***
श्री
अध्यक्ष: आपके
पास कोई कागज
है तो दे
दीजिए ...
(व्यवधान)
आपके पास कोई
कागज है तो
गृह मंत्री को
दे दीजिए। आप
गृह मंत्री को
कागज दे दीजिए
।... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: मुझे आप
मजबूर नहीं
करें। गुढ़ा
से आने वाले माननीय
सदस्य, आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं। आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं। मैं
निवेदन कर रही
हूं कि आप
मुझे मजबूर
नहीं करें।
मैं आपसे कह
रही हूं कि
अंकित नहीं हो
रहा है। मैं आपसे कह
रही हूं कि आप
सदन छोड़कर
चले जाएं। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य।
... (व्यवधान)
श्रीमती
उषा पूनिया: I am on an
explanation.
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें,
नहीं तो सदन
छोड़कर चले
जाएं। मुझे आप
मजबूर कर रहे
हैं। आप मुझे
मजबूर कर रहे
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा:***
श्री
अध्यक्ष: आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं।
सार्जेण्ट
एट आर्म्स ।
अंकित कुछ
नहीं हो रहा
है। अंकित
नहीं हो रहा
है। आप
ढींगामस्ती
नहीं करें। ... (व्यवधान)
सार्जेण्ट
एट आर्म्स,
इनको बाहर
करो। नहीं
करो-करो। ऐसे
नहीं मानेंगे
यह ।... (व्यवधान)
(श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा,
माननीय सदस्य
को मार्शल
द्वारा सदन से
बाहर ले जाया
गया।)
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा(नोहर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
से गलत दस्तखत
करवाये गये
हैं। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आपके
लिए तो मैंने
कब कहा ? दो ही
तो सदस्यों
का नाम लिया
है मैंने।
आपका तो लिया
नहीं मैंने। ... (व्यवधान)
श्रीमती
उषा पूनिया: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह जो
आरोप लगा रहे
हैं, यह
निराधार है।
इनमें कोई
लेना-देना
नहीं है। उसकी
कार्यवाही हो
रही है और जो
सारा केस है
वह सामने आ जाएगा।
दोषी पाये
जाएंगे तब मैं
देखती हूं ।
मैं तो
चाहूंगी, फिर
मैं देखती हूं
कि इन पर क्या
लिया जाएगा? यह
झूठा है
बिलकुल केस।
इसका कोई आधार
ही नहीं है।
इसके बारे में
हमारे को न
कोई जानकारी
है, न इसका कोई
आधार है। यह
बिलकुल झूठा
साबित होगा जब
मैं देखूंगी
कि अपने
माननीय सदस्य
को क्या सज़ा
दी जाती है?
श्री
अध्यक्ष: ठीक है।
श्री जुबेर
खान।
श्री
जुबेर खान(रामगढ़):
सम्माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से बड़ी
शालीनता से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
जयपुर में
स्थित ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: दो
मिनट में।
श्री
जुबेर खान: हां।
गलता पीठ
जयपुर में ही
नहीं बल्कि
सम्पूर्ण
भारत के लोगों
के लिए प्रमुख
तीर्थ स्थल
है। इस गलता
पीठ की स्थापना
सन् 1960 में श्री
कृष्णदास
पयोहारीजी
महाराज
द्वारा की गयी
थी जो इसके सबसे
पहले महंत
बनें और इसको
तत्कालीन
महाराजा सवाई
मानसिंहजी
ने और उसके
बाद राज्य
सरकार ने मान्यता
दी।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे निवेदन है
कि 15 फरवरी, 2006 को
महंत आदरणीय
रामोदाराचार्यजी
ब्रह्मलीन हो
गये और उनके अन्तिम
संस्कार के
बाद जो
कार्यक्रम
होते हैं,
नवें दिन,
सुबह साढ़े
पाँच बजे के
लगभग प्रात:,
जब नवें दिन
के कार्यक्रम
उनके परिवार
द्वारा वहां
निवास स्थान
पर कर रहे थे,
तो कुछ
साधु-संत के
वेश में जो लोग
गये, उनके साथ
में कुछ ऐसे
कार्यकर्ता
गये जिन्होंने
पुलिस के
संरक्षण में
जहां वहां पर
अन्तिम कार्यक्रम
की रश्में
पूरी की जा
रही थीं, सुबह
साढ़े पाँच
बजे ही जाकर
जिस तरह से
हमला किया और
पुलिस के संरक्षण
में किया, यह
अत्यन्त
दु:ख की बात
है।
एक
निवेदन मैं और
करना चाहूंगा
कि चूंकि 2004 में
माननीय उच्च
न्यायालय ने
उसमें स्थगन
आदेश दिये हुए
हैं कि जब तक
न्यायालय
कोई फैसला
नहीं कर देगा,
गलता पीठ में यथास्थिति
रहेगी। जो
महंत साहब थे
वह रहेंगे और
उनके
क्रियाकर्म
के बाद उनके
ज्येष्ठ
पुत्र महंत
अवधेश
कुमारजी को
उनकी जगह गद्दी
नसीन होना था।
उसके पहले ही
जिस तरह से
वहां पर कुछ
लोगों द्वारा
आतंक फैलाया गया
और मेरा
आदरणीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
आरोप है कि
भारतीय जनता
पार्टी सत्ता
के लोगों
द्वारा जुड़े
हुए, जिस तरह
गलता महाराज
की पीठ को
हथियाने की
कोशिश की जा
रही है,
असंवैधानिक
तरीके से, गैर-कानूनी
तरीके से, गैर-धार्मिक
तरीके से, यह
सरासर अन्याय
है । मैं आपके
माध्यम से यह
चाहता हूं कि
सरकार इसको स्पष्ट
करे कि सरकार
इसके ऊपर, आज
वातावरण क्या
है, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, वहां
पर पुलिस की
छावनी बनी हुई
है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप क्या
चाहते हैं ? आप
चाहते क्या
हैं? ... (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
श्रद्धालु जो
नहीं जा पा
रहे हैं ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह सब
तो आपने कह
दिया ।
श्री
जुबेर खान: मैं
आपके माध्यम
से चाहता हूं
कि सरकार इसके
ऊपर, सरकार इस
गलता पीठ को
बचाना चाहती
है या अपने
बलबूते पर कब्जा
करना चाहती है
? मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं । ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मैंने केवल
आपको ... (व्यवधान)
श्री
भवानी सिंह
राजावत: आपसी
विवाद को इस
पवित्र सदन
में नहीं
उठाया जाना
चाहिए। यह
पवित्र सदन
है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: श्री
बाबूलाल नागर। केवल दो
मिनट में ही
अपनी बात
कहेंगे, मैं
तीसरी मिनट नहीं
दूंगी आपको ।... (व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता: जो भी
विवाद है
सरकार ने उसके
बारे में
पूर्णतया न्यायिक
दृष्टिकोण
अपनाकर ही काम
किया है। माननीय
सदस्य, यहां
तथ्यों को
गलत रूप से
प्रस्तुत कर
रहे हैं। अभी
वर्तमान में जो
पीठ है वह
उसको पब्लिक
ट्रस्ट नहीं
कर रही है, वह
फैमिली ट्रस्ट
बना रखा है,
उसको आप इजाजत
देंगे कि गलता
को फैमिली
ट्रस्ट बना
दिया जाए ?
फैमिली ट्रस्ट
कर रखा है ...
(व्यवधान)
Spp/usc/1130/1d
डॉ.बुलाकीदास कल्ला: मैंने परमिशन ली है, दो मिनट में अपनी बात कह दूंगा।
श्री अध्यक्ष: आपने पर्ची थोड़े ही दी है।
डॉ.बुलाकीदास
कल्ला: बहुत
पब्लिक
इंटरेस्ट का
इश्यू है।
श्री
अध्यक्ष: आप जब भाषण
दें तो उसमें
इसका भी जिक्र
कर दीजियेगा।
डॉ.बुलाकीदास कल्ला: ठीक है।
श्री अध्यक्ष: बाबूलाल नागर।
श्री बाबूलाल नागर(दूदू): अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से सहकारिता मंत्रीजी का मैं ध्यान आकर्षित करना चाह रहा हूं । दूदू विधान सभा क्षेत्र में हमेशा वर्षा का अभाव रहता है। वहां की मुख्य फसल सरसों हैं और क्रय-विक्रय सहकारी समिति...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप भूमिका बाँध रहे हो, इस पर आ जाओ आप। आप भूमिका मत बांधो। हां, बस आ जाओ अपनी बात पर।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि सरसों समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र सरकार वहां पर खोलती है जहां पर सरसों की पैदावार हो और कृषि उपज मण्डी यार्ड हो, वहां गोदाम हो।
श्री अध्यक्ष: आप सीधी अपनी बात कहो कि दूदू में भी खोल दिया जाये, बस खत्म बात। यह कह दें आप बस। हां, यही कह दें।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, एक निवेदन करना चाह रहा हूं आप सही फरमा रही हैं कि दूदू में खोल दिया जाये। एक चीज आपके ध्यान में लाना चाहता हूं। अध्यक्ष महोदय, अभी 2005-06 में सांभर हमारे पास में सरसों खरीद केन्द्र है उसमें 60 हजार....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सीधी सी बात है कि आपने लिखकर दिया दूदू में सरसों समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र खोलना, इतनी-सी बात है।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, मैं तो नहीं बोलूंगा, चलो मेरा काम हो जाना चाहिये।
श्री अध्यक्ष: बस ठीक है, हो जायेगा।
श्री बाबूलाल नागर: बिलकुल मेरा काम हो जाना चाहिये। मंत्रीजी बोल तो दो।
श्री अध्यक्ष: मंत्रीजी ने सुन लिया, ध्यान रखेंगे। मंत्रीजी ध्यान रखियेगा। मंत्रीजी ध्यान रखिये। अब बिराजिये। अब पर्ची पर बोलेंगे श्री कालीचरण जी। कालीचरण जी, केवल चार मिनट का समय है । आप तो बोल चुके हैं लेकिन और माननीय सदस्यों को वाद-विवाद में अपना हिस्सा लेना है इसलिये आप चार मिनट में अपनी बात कह दें।
श्री रामनारायण मीणा(नैनवां): अध्यक्ष महोदय, एक मिनट में एक बात कहना चाहूंगा, माननीय मंत्रीजी सरसों की खरीद नहीं हो रही है। किसान परेशान है। मैं आसन से आग्रह करूंगा कि इस बारे में सरकार नोटिस ले और सरसों एक क्विंटल भी नहीं खरीदी जा रही है । मोइश्चर के नाम पर किसानों को वापस भेजा जा रहा है। किसान इतने परेशान है कि बिचौलियों को सरसों बेचनी पड़ रही है। सरकार इस बारे में ध्यान दे और किसानों का हित साधन करे।
श्री अध्यक्ष: न पर्ची है, न बात, आप खड़े हो गये यूं ही। बोलिये कालीचरणजी।
श्री कालीचरण सर्राफ(जौहरी बाजार): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पर्ची के माध्यम से राजस्थान में जो अकाल की स्थिति है और उसमें केन्द्रीय सरकार सहायता करने में जो कोताही बरती जा रही है, राजनीतिक भेदभाव के आधार पर पर्याप्त सहायता नहीं कर रही है उसके बारे में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय राजस्थान की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार की है कि यहां हर वर्ष कहीं न कहीं अकाल की स्थिति रहती है। कभी पूरे राजस्थान प्रदेश में अकाल की स्थिति रहती है, कभी कई जिलों में अकाल की स्थिति रहती है। इस वर्ष भी गिरदावरी की रिपोर्ट के आधार पर 22 जिलों में 15,778 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया है। राजस्थान सरकार ने 1 जनवरी, 2006 से अकाल राहत के काम अभावग्रस्त क्षेत्रों में प्रारम्भ कर दिये हैं। चारा डिपो भी लगभग 265 स्थानों पर खोल दिये हैं। 50 हजार रूपये की राशि चारा डिपो को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में प्रदान भी कर दी गयी है। भारत सरकार को 26 दिसम्बर को ज्ञापन भी प्रस्तुत कर दिया गया । 1464.25 करोड़ रूपये का 15.86 लाख मीट्रिक टन गेहूं की मांग भी उसमें शामिल की गयी है। भारत सरकार का अध्ययन दल आ गया । उसने विस्तृत रिपोर्ट भी दे दी परन्तु मुझे कहते हुए अफसोस है कि अकाल की इतनी भीषण विकरालता को देखते हुए अभी तक भारत सरकार ने केवल 146;5 करोड़ रूपये की राशि आंवटित की है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ध्यान दिलाना चाहूंगा कि जब यहां कांग्रस की सरकार थी और केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, बिना किसी राजनैतिक भेदभाव के केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जब यहां भीषण अकाल की स्थिति थी तो खुले हाथों से यहां पर सहायता दी थी। मैं बताना चाहूंगा कि बीजेपी सरकार ने 946.82 करोड़ रूपये राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि और 32.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की मदद उस समय की थी। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा इस सदन के माध्यम से केन्द्रीय सरकार को कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखे और यहां जिस प्रकार की अकाल की स्थिति बनती जा रही है और अभी जब यह स्थिति है तो आने वाले दिनों में- अप्रैल, मई और जून में और ज्यादा यहां स्थिति बिगड़ने वाली है तो केन्द्रीय सरकार इसमें उदारता के साथ बिना किसी भेदभाव के अकाल राहत के कामों के बारे में राशि आवंटित करे और गेहूं भी आवंटित करे। मैं आपके माध्यम से यही कहना चाहता हूं।
श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्डौली): पहले राजस्थान सरकार तो न्याय करे। कई तहसीलें और कई जिले, जहां अकाल की स्थिति है, राजस्थान सरकार जान-बूझकर, पक्षपात कर वहां अकाल घोषित नहीं करती और यह केन्द्र की बात करते हैं। पहले अपना अन्याय तो सुधारो जो आपने हमारे साथ किया है।
श्री कालीचरण सर्राफ: कोई जगह ऐसी नहीं है जहां अकाल राहत कार्य प्रारम्भ नहीं किया हो। परन्तु केन्द्रीय सरकार राजनैतिक भेदभाव के आधार पर गेहूं और राशि आवंटित नहीं कर रही है।
श्री श्रवण कुमार: झुन्झुनूं जिला अकाल से पीडि़त है। माननीय अध्यक्ष महोदय झुन्झुनूं जिले में जाकर आईं, इनसे पूछो। माननीय अध्यक्ष महोदय दौरा करके आई हैं,लोग पानी के लिये तरस रहे हैं, भूख से तड़प रहे हैं और कह रहे हैं कि कोई पीडि़त नहीं है। ....
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो।
श्री श्रवण कुमार:***
श्री अध्यक्ष: जो मेरी बिना अनुमति के बोलते हों, उनका बिल्कुल अंकित नहीं किया जाये।
श्री श्रवण कुमार: ***
श्री अध्यक्ष: आप क्या कहना चाहते हैं ?
श्री प्रद्युम्न सिंह: (राजाखेड़ा): आप अवसर दें, दो शब्द कह दूं।
श्री अध्यक्ष: हां, आप दो शब्द कह दें।
श्री प्रद्युम्न सिंह: राज्य सरकार के पास 540 करोड़ रूपया अकाल के पेटे बचा हुआ है एन.सी.सी.एफ. के तहत, पहले उस पैसे को तो खर्च कर लें और उसके उपरान्त ट्वेल्थ फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट के बाद एक अप्रैल से राज्य सरकार 313 करोड़ रूपया नैक्स्ट फाइनेंशन ईयर में मिलेगा, उसके अंदर 25 प्रतिशत राज्य सरकार का बजट का हिस्सा होगा।
श्री अध्यक्ष: आप बजट पर बोल लेना। राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर नहीं बोला क्या ?
श्री प्रद्युम्न सिंह: मुझे कह लेने दीजिये क्योंकि अनर्गल बात सदन के अंदर आई है। रिकार्ड सही हो जाये, 373 करोड़ रूपये वह और 540 करोड़ रूपये वह इनको मिलाकर 920 के करीब होता है उस पैसे को राज्य सरकार खर्च नहीं कर रही है और यहां पर अनर्गल आरोप केन्द्रीय सरकार के ऊपर लगाये जा रहे हैं। यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।
श्री अध्यक्ष: मोहम्मद माहिर आजाद।
डॉ; किरोड़ी लाल(खाद्य मंत्री): अकाल के बारे में प्रद्युम्न सिंह जी ने जो बात कही उसके बारे में सदन में स्थिति स्पष्ट करना चाहूंगा। राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य ने जो कहा है इतनी राशि राज्य सरकार के पास नहीं है। हमको दिसम्बर में 146 करोड़ रूपये जो सीआरएफ का देना था वह पैसा आपकी केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है । आप चाहो तो मैं सदन के पटल पर रख दूं। हमने मांग रख दी है।
श्री प्रद्युम्न सिंह: आपके पास 540 करोड़ बचा है या नहीं पुराने अकेले के पेटे और सालों का, वह आप बता दीजिये।
डॉ. किरोड़ी लाल: हमारे पास 540 करोड़ रूपया नहीं बचा।
श्री प्रद्युम्न सिंह: यह आप गलत कह रहे हैं। आपके पास 540 करोड़ बचा है। आप बार बार केन्द्र सरकार से कह रहे हैं कि उस 540 करोड़ रूपये को जो बचा हुआ है उसको प्लेन्ड एक्सपेंडिचर में काउंट किया जाये।
श्री राजेन्द्र राठौड़: यह काम आपने नहीं किया था क्या?
डॉ.सी.पी.जोशी: हमने किया था ...
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो।
डॉ. सी.पी.जोशी: ***
msr/usc/1140/1e
श्री
अध्यक्ष: अब
अंकित हो।
डॉ.
किरोड़ी लाल मीणा
(खाद्य एवं
नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
कह रहे थे 860
करोड़, 500...
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
अध्यक्ष: आप
बिना आसन की
अनुमति के
बोलने लग जाते
हैं, सी.पी.जोशी
साहब।
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव
(बानसूर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ***
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
अध्यक्ष: आप इस
तरह का आरोप
लगाते हैं आसन
के ऊपर, मैंने जब
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
खड़े हुए,
मैंने उनको
अनुमति दी
बोलने के लिए।
...(व्यवधान)... आप
रोज ही
आक्षेप...(व्यवधान)...
(श्री
अध्यक्ष ने
इशारे से
अंकित नहीं
करने के
निर्देश दिये)
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
महावीर प्रसाद जैन: ***
डॉ.
बुलाकीदास
कल्ला: ***
...(भारी व्यवधन)...
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवा): ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
डॉ.
किरोड़ी लाल मीणा:
माननीय सदस्य,
आप विराजो।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
रामनारायण
मीणा: ***
श्री
श्रवण कुमार : ***
श्री
ओम बिरला: ***
श्री
हरिमहोन
शर्मा: ***
श्री
कन्हैयालाल
मीणा (बस्सी):
***
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
अध्यक्ष: जो भी
माननीय सदस्य
मेरी बिना
अनुमति के
बोलते हैं वह
अंकित तो हो
नहीं रहा है
इसलिए, माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण कर लें
तो उचित
रहेगा। मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा (मेड़ता):
***
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद, बोलना
प्रारम्भ
करें, यह तो
यों ही बोलते
रहेंगे।
बोलना प्रारम्भ
करें। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
कन्हैयालाल
मीणा: ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपस में
तर्क-वितर्क
नहीं करें,
आपस में सवाल-जवाब
नहीं करें।
मैं जिसका नाम
पुकारूंगी
केवल उसी का
अंकित होगा
इसलिए आप
खामखा में
खड़े होकर के
अपनी शक्ति को
यों ही व्यर्थ
गंवा रहे हैं।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष :
मैंने नाम
नहीं पुकारा
आपका, आपका
कोई विषय भी
नहीं है।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद।
मोहम्मद
माहिर आजाद(नगर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन कर
रहा हूं...
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: मैं
मेरा उत्तर
तो पूरा कर
लूं।
श्री
अध्यक्ष: आप क्या
कहना चाहते
हैं? बात तो हो
गयी।
मोहम्मद
माहिर आजाद: अब क्या
करें, साहब, जब
मंत्री ही
नहीं आपके
आदेश की पालना
करते हैं...(व्यवधान)...
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: मेरे
पर चार्जेज
लगा दिये ...(व्यवधन)...
मोहम्मद
माहिर आजाद: अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
ही आपके आदेश
की पालना नहीं
करें, मैं
बोलने के लिए
खड़ा हो गया
पिफर यह खड़े
हो जाते हैं।
अब इनका अंकित
कराओगे आप ...(भारी
व्यवधन)...
अब
अंकित तो मेरा
होगा, माननीय
खाद्य
मंत्रीजी।
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण करें।
यदि
कोई विधान सभा
में इस तरह का
प्रश्न
उठाया गया है
जिसकी तरफ से
सरकार को जवाब
देना आवश्यक
हो तो मंत्री
उठ कर के अपनी
सूचना दे सकते
हैं। ...(भारी व्यवधन)...
मोहम्मद
माहिर आजाद: जब
सहकारिता
मंत्रीजी
खड़े हुए थे
श्री बाबूलाल
नागर का जवाब
देने के लिए
तब आपने उनको
बैठा दिया। जब
बाबूलालजी
नागर का जवाब
देना चाहते थे
माननीय मदन
दिलावरजी...(व्यवधान)...
मदन दिलावरजी
खड़े हुए थे
बाबूलालजी
नागर का जवाब
देने तब उनको
बैठा दिया था
और इनको खड़ा
कर दिया। ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: अब
हमारी बात सुन
लो। मेरी बात
सुन लो।
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण्कर
लें तो उचित
रहेगा। स्थान
ग्रहण करें।
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
***
श्री
अध्यक्ष: यह
अकाल पर चर्चा
नहीं हो रही थ
यह चर्चा भारत
सरकार से जो
अनाज मिलना
चाहिए उसकी
चर्चा हो रही
है। ..(व्यवधान)...
इस पर जवाब दे
रहे हैं।
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: अध्यक्ष
महोदय।
श्री
हेमाराम
चौधरी: ***
श्री अध्यक्ष: वह आपको मौका मिलेगा धन्यवाद प्रस्सताव पर जब आप बोलें, तब यह सब बातें कहियेगा आप। आपको मौका जब मिले धन्यवाद प्रस्ताव पर उस समय बात कहियेगा आप य