गोपाल/अरुण/05032007/1100/1a

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक : 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का पांचवां दिवस   संख्‍या : 3

 

सोमवार, 05 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन )

 

 

श्री उपाध्‍यक्ष:  प्रश्‍नकाल। माननीय सदस्‍यगण ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई नई बात आज नहीं हुई है, जो बात 3 तारीख को थी वही बात आज है। जब तक उपाध्‍यक्ष महोदय, इस मामले का रिजोलुशन नहीं होगा तब तक सदन में हमारा प्रोटेस्‍ट जारी रहेगा। आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि सबसे पहले लोकतंत्र में अपोजिशन को अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए। यह सरकार उन पार्टी के लोगों को प्रोटेस्‍ट करने का मौका नहीं देना चाहती। लोकतंत्र में हमारा अधिकार है राइट टू प्रोटेस्‍ट।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इस अधिकार को खत्‍म करके सरकार ..(व्‍यवधान).. हम प्रोटेस्‍ट जारी रखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा राजस्‍थान देख रहा है, राजस्‍थान की जनता देख रही है ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): लोकतंत्र में राइट टू प्रोटेस्‍ट हमारा अधिकार है। लोकतंत्र में प्रोटेस्‍ट करना हमारा अधिकार है। सरकार लोकतंत्र में तानाशाही की प्रवृत्ति कायम करना चाहती है, इसको हम लोकतंत्र में बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। ..(व्‍यवधान).. उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार अपनी क्रिडेंशल्‍स एस्‍टेब्लिश करें कि लोकतंत्र में विश्‍वास है या राजशाही में विश्‍वास है। ..(व्‍यवधान).. पहले गवर्नमेंट अपनी क्रिडेंशल्‍स एस्‍टेब्लिश करे। उपाध्‍यक्ष महोदय, बिना हाउस के लोकतंत्र नहीं चल सकता। ..(व्‍यवधान).. लोकतंत्र की व्‍यवस्‍था ही नहीं है तो उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा क्‍या करेगी? विधान और उपाध्‍यक्ष की गरिमा लोकतंत्र की पद्धति के अंदर है राजशाही और तानाशाही के अंतर्गत नहीं है। यह तानाशाही और राजशाही के अंतर्गत राज चलाकर लोकतंत्र को कुचलना चाहते हैं तो विधान सभा की आवश्‍यकता क्‍या है? इसलिए सबसे पहले उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इस हाउस ..(व्‍यवधान).. उसके बिना लोकतंत्र नहीं चल सकता। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, लोकतंत्र का मखौल किसने उड़ाया है? ..(व्‍यवधान).. विधान सभा की गरिमा किसने गिरायी है ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा अधिकार है, हम किसी की मर्सी पर नहीं आये हैं, जनता ने हमको निर्वाचित करके भेजा है, विपक्ष में बिठाया है। विपक्ष में अपनी बात कहेंगे। ..(व्‍यवधान).. उपाध्‍यक्ष महोदय, हम अपनी बात को कहेंगे। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमें जनता ने जनता की बात करने के लिए चुना है, राज करने के लिए नहीं चुना है। हम अपना राइट टू प्रोटेस्‍ट करने के लिए मना नहीं करेंगे। ..(व्‍यवधान).. उपाध्‍यक्ष महोदय, हम अपने राइट टू प्रोटेस्‍ट को कंक्‍लूड नहीं करेंगे। लोकतंत्र में अपनी बात करने का अधिकार ..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह लोकतंत्र का तरीका है महामहिम राज्‍यपाल का अनादर किया जाए, महामहिम के सामने आकर नारेबाजी की जाए और उसके बाद उनको भले ही कुछ दिन के लिए निकाल दिया गया हो, यह तो अध्‍यक्ष महोदय की सहृदयता है कि उन्‍होंने केवल माफी मांगने के बाद उनको अलाऊ करने की बात कह दी, मैं समझता हूं यह शायद पहले नहीं हुआ होगा इनको सत्र के लिए निकाला गया हो ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): आदिवासियों के हत्‍यारे गृह मंत्री जिन्‍होंने ऋषभदेव में गोलियां चलवायीं। आदिवासियों के हत्‍यारे हैं गृह मंत्री ..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इन्‍होंने कृपा करके केवल माफी मांगने से इनको अंदर करने की इजाजत दे दी ..(व्‍यवधान).. महामहिम राज्‍यपाल का अनादर हो और सारा सदन देखे और लोकतंत्र का तमाशा आपने और हम सबने राज्‍यपाल के अभिभाषण के समय देखा ..(व्‍यवधान).. उसके बाद भी हम सब चाहते हैं कि वो सदन में आये और सदन में आकर अपने प्रतिपक्ष का पूरा रोल अदा करे। वे सदन में आये ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): माननीय गृह मंत्रीजी लोकतंत्र के हत्‍यारे आप हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं समझता हूं इससे ज्‍यादा और क्‍या होगा ..(व्‍यवधान).. आप चाहते हैं हठधर्मी चलेगी तो मैं समझता हूं यह कांग्रेस के लिए भी उचित नहीं रहेगा ..(व्‍यवधान).. हम इस बात का समर्थन करते हैं प्रतिपक्ष रहना चाहिए, प्रतिपक्ष अपनी बात कहे, हम उनकी बात से सहमत हैं, लेकिन उन्‍होंने जो कृत्‍य किया उस कृत्‍य की सज़ा केवल अध्‍यक्ष महोदय ने माफी मांगने तक सीमि‍त कर दी हो और उसके बाद भी यह सदन अड़ा रहे, प्रतिपक्ष अड़ा रहे तो यह इस सदन का सम्‍मान नहीं होगा। मैं सोचता हूं इससे ज्‍यादा कुछ किया नहीं जा सकता। जो अध्‍यक्ष जी ने केवल क्षमायाचना पर उनको हाउस में आकर अपनी बात कहने के लिए छोड़ दिया ..(व्‍यवधान).. मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि हम सबका धर्म है कि यहां ठीक प्रकार से चर्चा हो और आप इस चर्चा में भाग लें, लेकिन इतना बड़ा अपराध करने की सज़ा अगर इतनी कम करने के बाद भी अगर हम उस पर अड़े रहते हैं तो यह इस सदन का दुर्भाग्‍य होगा ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): आपने जातिवाद को ध्‍यान में रखकर गोलियां चलवायी हैं। माननीय गृह मंत्रीजी, आपको इस्‍तीफा दे देना चाहिए। आपको इस पवित्र सदन में गृह मंत्री के रूप में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। आपने आदिवासियों पर गोलियां चलवायी हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): बार-बार इस प्रकार की घटना होगी और लोग इसी तरीके से तमाशा देखेंगे ..(व्‍यवधान).. उनको सदन में बुलाकर लाएंगे तो यह शायद इस लोकतंत्र का ..(व्‍यवधान).. अपने-अपने दायरे से ऊपर उठकर अगर ..(व्‍यवधान)..

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): गृह मंत्रीजी, आप प्रजातंत्र का हवाला दे रहे हैं आपसे तो किसानों ने पानी मांगा और गोली दी है और आप प्रजातंत्र की दुहाई दे रहे हैं। शर्म आनी चाहिए आपको।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): विपक्ष का रोल निश्चित रूप से रहना चाहिए और ..(व्‍यवधान).. केवल क्षमायाचना करने से  ..(व्‍यवधान).. हमने यहां कई बार क्षमायाचना की, हमारे किसी सदस्‍य ने भी कुछ किया, हमने स्‍वयं ने उठकर क्षमा मांगी। इस सदन से सर्वोपरि और कौन हो सकता है? क्षमा मांगने से कोई आदमी की आयु कम हो जाती है? इतना बड़ा अपराध महामहिम के सामने हुआ ..(व्‍यवधान)..

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपकी पुलिस उनको सदन में आने नहीं दे रही क्षमायाचना कहां से करेंगे?

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने आदिवासियों पर गोली चलवायी है ..(व्‍यवधान).. आप इस्‍तीफा दो। आपने जातिवाद को ध्‍यान में रखकर ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): आपने ऋषभदेव में जातिवाद को ध्‍यान में रखकर आदिवासियों पर गोलियां चलवायीं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, लोकतंत्र में लोक का गला घोंटकर लोकतंत्र नहीं चलाया जा सकता। खाली राज्‍यपाल के अभिभाषण का अपमान करने की बात नहीं है, पूरे लोकतंत्र का अपमान किया जा रहा है। लोकतंत्र में राइट टू प्रोटेस्‍ट के अधिकार का हनन किया जा रहा है। ..(व्‍यवधान).. राइट टू प्रोटेस्‍ट पर विरोध करना हमारा अधिकार है। लोकतंत्र की मूल भावना को ही खत्‍म कर देना चाहते हो। राज्‍यपाल का अभिभाषण विधान सभा तक ही ठीक है ..(व्‍यवधान).. किसानों पर गोली चला रहे हो, आदिवासियों पर गोली चला रहे हो, लोगों से बात नहीं कर रहे हैं, यह लोकतंत्र है क्‍या? लोकतंत्र में जिनका विश्‍वास नहीं है ..(व्‍यवधान).. यह नहीं हो सकता उपाध्‍यक्ष महोदय, ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, श्रद्धांजलि जब दी जाती है, शोकाभिव्‍यक्ति दी जाती है तब तो सारा सदन एक साथ सुनता है और पहली बार शोकाभिव्‍यक्ति की जा रही थी तब भी सारे माननीय सदस्‍यगण नारेबाजी कर रहे थे। ..(व्‍यवधान).. और यह प्रजातंत्र की दुहाई दे रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): लोगों से बात नहीं करें यह लोकतंत्र है क्‍या? ..(व्‍यवधान)..

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न पुकारें। हमार मंत्रीगण तैयार बैठे हैं ..(व्‍यवधान).. एक-एक प्रश्‍न पर कितना खर्चा बैठता है? आप प्रश्‍न पुकारें उपाध्‍यक्ष महोदय। ..(व्‍यवधान)..

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): यह बड़े आश्‍चर्य की बात है। इन कांग्रेस वालों को बाहर निकाल दो आप। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, सौ-सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज करने जा रही है। लोकसभा तो चलने नहीं दे रहे और यहां कह रहे हैं। लोकसभा में प्रोटेस्‍ट कर रहे हैं और यहां भाषण दे रहे हैं कि गलत कर रहे हो। ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): सीपी जोशी साहब, आप भी लोक सभा का बदला यहां ले रहे हो ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उपाध्‍यक्ष महोदय, ..(व्‍यवधान).. एक तरफ ये लगातार तीन साल से कर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद भी लोक सभा के अध्‍यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने एक भी इनके आदमी को बाहर नहीं निकाला और इन्‍होंने किया। ..(व्‍यवधान).. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार का आचरण ये कर रहे हैं, पार्लियामेंट नहीं चलने देना चाहते ..(व्‍यवधान).. फिर भी लोकसभा के अध्‍यक्ष ने एक भी भारतीय जनता पार्टी के पार्लियामेंट के सदस्‍य को आज तक लोक सभा की कार्यवाही से निष्‍कासित नहीं किया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लोकतंत्र में सदन नहीं चलने का अधिकार ..(व्‍यवधान).. ये बौछार का सामना करने को तैयार नहीं हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने अभिभाषण का बहिष्‍कार ही नहीं किया बल्कि उनका अपमान किया और ..(व्‍यवधान).. उस तरह की बात करके लोकतंत्र की दुहाई देकर ..(व्‍यवधान)..

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/05032007/1b/1110 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।  ...(व्‍यवधान)...

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): और जो राज्‍यपाल महोदय का अपमान करता है, यह इस तरह की बात लोकतंत्र की दुहाई देकर उनका फेवर ले रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... और फिर आप कह रहे हैं कि ...(व्‍यवधान)... केवल माफी मांगने पर उन्‍हें सदन में आने के लिए अध्‍यक्ष महोदय ने व्‍यवस्‍था दे दी। वे सदन में आएं और माफी मांगें तो यह सद उन्‍हें माफ कर सकता है। ...(व्‍यवधान)... चोरी भी करें और सीनाजोरी भी करें। ...(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जनजाति मंत्री महोदय पर भ्रष्‍टाचार का आरोप है। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): इस मुद्दाविहीन प्रतिपक्ष के पास किसी प्रकार की जनता की समस्‍याओं से कोई सरोकार नहीं है। ...(व्‍यवधान)... हम जवाब देने के लिए तैयार हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और यदि कांग्रेस के सदस्‍य प्रश्‍न नहीं पुकारते हैं तो हमारे सदस्‍य तैयार हैं और मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य भी तैयार हैं उत्‍तर देने के लिए। आप प्रश्‍न काल पुकारें, उपाध्‍यक्ष महोदय । यह तो गैर जिम्‍मेदार हैं। कांग्रेस के सदस्‍य नहीं पुकारते हैं तो हमारे सदस्‍य तैयार हैं। ...(व्‍यवधान)... आप आगे का प्रश्‍न पुकारें। हमारे सदस्‍य प्रश्‍न करने के लिए तैयार हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): आप लोग बाहर जाइए न, हाउस को चलने दो, पधारो आप लोग। ...(व्‍यवधान)... विरोध तो आपको करना आता नहीं है। ...(व्‍यवधान)... बाहर जाइए आप। उपाध्‍यक्ष महोदय, इन सब को बाहर निकालो। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): लोकतंत्र का गला घोंटना चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 12.00 तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की कार्यवाही 11.12 बजे 12.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई)

 

 


Skp/akt/05032007/1200/1g/1

 

(पुन: समवेत होने पर)

(12.00 बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद हाउस की कार्यवाही शुरू नहीं कर रहे उसके लिए।

श्री अध्‍यक्ष: मैं 295 के लिए नाम पुकार रही हूं। श्री बाबूसिंह राठौड़। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके सामने जो स्थिति तीन तारीख को थी, आज भी वही स्थिति है। लोकतंत्र में विरोध पक्ष की आवाज दबाकर लोकतंत्र नहीं चल सकता अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अपनी बात कह सकते हैं। (व्‍यवधान) वो अपनी बात कहने के लिए तैयार नहीं हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): विधान सभा की गरिमा, अध्‍यक्ष पद की गरिमा, सरकार की गरिमा तब रहती है अध्‍यक्ष महोदय, जब विरोध पक्ष को अपनी बात कहने का अवसर मिले। यह दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है अध्‍यक्ष महोदय कि यह सरकार, लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार जिस तरह से कार्यवाही कर रही है न केवल तानाशाही में ऐसी कार्यवाही होती है, न केवल राजशाही में ऐसी कार्यवाही होती है। अध्‍यक्ष महोदय, किसान आंदोलन कर रहे हैं उसके ऊपर गोली चलायें, पानी मांगे तो गोली चलायें, आदिवासियों की समस्‍या के सम्‍बन्‍ध में सरकार ठीक ढंग से कदम नहीं उठा सके और आदिवासियों पर गोली चलानी पड़े, इससे बड़ी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार की नहीं। (व्‍यवधान) न बिजली की व्‍यवस्‍था हो और लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अवसर भी नहीं मिले। अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं, आप स्‍वयं को आगे आकर के यह बात करनी चाहिए कि लोकतंत्र मजबूत हो। यह तानाशाही.... (व्‍यवधान) राजशाही मनमानी कर सके.... (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपको फैसला करना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

 

ग्राम देचू (जोधपुर) में अनाज उप मण्‍डी यार्ड स्‍थापित करने विषयक

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको जोधपुर (अनाज) मण्‍डी क्षेत्र देचू में उप मण्‍डी प्रांगण की स्‍थापना एवं निर्माण हेतु भूमि का चयन/आवंटन के बारे में अवगत करवाना चाहूंगा कि:-

ग्राम देचू के आस-पास की घनी आबादी के गांव निवासी यहीं से दैनिक उपयोगी एवं आवश्‍यक सामान की खरीद करते रहने से यह एक व्‍यापारिक केन्‍द्र है।

देचू क्षेत्र चांदसमा, कलाऊ, जेठानिया, सेतरावा, तेना, सोमेसर इत्‍यादि गांवों में करीब 300-400 ट्यूबवैल होने एवं पास में से इन्दिरा गांधी नहर की नजदीकी एवं उपजाऊ जमीन होने से कृषि की बहुलता के कारण रबी एवं खरीफ की पैदावार भी प्रचुर मात्रा में होती है।

अभी हाल ही में ट्यूबवैल नये स्‍थापित होने से जीरा, रायड़ा, मिर्च, इसबगोल, इत्‍यादि फसल बहुतायत से हो रही है तथा आगे भी इनकी पैदावार एवं क्षेत्र में भी वृद्धि की संभावना है।

ग्राम देचू में कृषि जिन्‍सों की पैदावार एवं व्‍यापार की स्थिति को देखते हुए ग्राम देचू एवं उसके नजदीक के क्षेत्रों की कुल मण्‍डी शुल्‍क से वर्ष 2002 से दिसम्‍बर, 2006 तक औसल 44,352/- रुपये आय प्राप्‍त हुई है जो उप मण्‍डी यार्ड स्‍थापित करते हेतु दिये गये उक्‍त प्रकार का व्‍यवसाय निर्धारित मापदण्‍डों से अधिक है।

किसानों द्वारा उत्‍पादित फसलों को बेचने हेतु स्‍थानीय मण्‍डी नहीं होने के कारण उनका उचित मूल्‍य किसानों को स्‍थानीय व्‍यापारियों से नहीं मिलता है। इस कारण किसानों को अपनी फसल बेचने हेतु अन्‍यत्र कृषि मण्‍डी अर्थात् जोधपुर, ओसियां, फलौदी जाना पड़ता है। इस प्रकार फसल परिवहन पर व्‍यय होने के कारण किसानों के फसलों की लागत बढ़ जाती है एवं उन्‍हें आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।

इस सम्‍बन्‍ध में कार्यालय कृषि उपज मण्‍डी समिति (अनाज) जोधपुर के सचिव ने प्रस्‍ताव पारित कर अपनी अनुशंषा क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कृषि विपणन विभाग, जोधपुर को भिजवाई है एवं क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कृषि विपणन विभाग, जोधपुर ने इस पर कार्यवाही करते हुए अपनी अनुशंषा श्रीमान् निदेशक महोदय, कृषि विपणन निदेशालय, राजस्‍थान जयपुर को अपने कार्यालय पत्रांक 295-96 दिनांक 18 जनवरी, 2007 द्वारा भिजवाई है।

अत: उक्‍त बिन्‍दुओं पर व्‍यक्तिगत रूप से गौर फरमाते हुए कृषि उपज मण्‍डी समिति अनाज, जोधपुर के मण्‍डी क्षेत्र के ग्राम देचू में उप मण्‍डी यार्ड स्‍थापित करवाकर स्‍थानीय कृषकों को राहत प्रदान करवाने का श्रम करावें।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामलाल शर्मा।

 

ग्राम पंचायत खेजरोली तहसील चौमूं में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने विषयक

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निवेदन है कि दिनांक 10.2.2007 को चौमूं तहसील की ग्राम पंचायत खेजरोली में ओलावृष्टि से ग्राम पंचायत के सैकड़ों किसानों की गेहूं, जौ, सरसों की फसल चौपट हो गई। तहसील की गिरदावरी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 453 किसान इस ओलावृष्टि से प्रभावित हुए तथा लगभग 458 हेक्‍टेयर भूमि की फसलों का नुकसान हुआ जबकि सरकार के द्वारा मात्र 168 किसानों को ही मुआवजा दिया गया। मुआवजा जिन मापदण्‍डों के अनुसार दिया गया उनमें भी संशोधन की आवश्‍यकता है। किसान चाहे किसी भी श्रेणी का हो, उसकी फसल का नुकसान तो हुआ ही है। अत: मुआवजे के मापदण्‍डों को संशोधित कर सभी किसानों को मुआवजा दिलवाने का श्रम करें तथा कई परिवार ऐसे हैं जिनका राजस्‍व रिकार्ड में संयुक्‍त खातेदारी के कारण भी मुआवजे से वंचित होना पड़ा।

अत: आपके माध्‍यम से राज्‍य सरकार से अनुरोध है कि ओलावृष्टि से प्रभावित सभी किसानों को मुआवजा दिलाने का श्रम करें। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: 295 के प्रस्‍ताव जिन माननीय सदस्‍यों ने यहां पर प्रस्‍तुत किये हैं वो पढ़े हुए मान लिये गये। अब मैं एक बार आपसे भी कुछ निवेदन कर रही हूं। एक बार आपसे कुछ निवेदन कर रही हूं।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

मुदार्बाद तो करिये आप। (व्‍यवधान) आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। माननीय सदस्‍य, मैं आपसे निवेदन कर रही हूं.... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जब इस तरह से कर रहे हैं, ये मुर्दाबाद कर रहे हैं जिस तरह से.... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैं आपसे निवेदन कर रही हूं। इस सदन की गौरवमयी परम्‍पराएं रही हैं, इस सदन की गरिमा और प्रतिष्‍ठा बनाये रखने की जिम्‍मेदारी आपकी भी है, पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों की है। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप अपने स्‍थानों पर चले जाएं। आप मुझे मजबूर न करें। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप लोग अपने-अपने स्‍थान पर चले जाएं। आप लोग अपने-अपने स्‍थान पर चले जाएं। मैं आपसे निवेदन कर रही हूं, आप अपने-अपने स्‍थान पर चले जाएं। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप अपने-अपने स्‍थान पर चले जाएं। पर्ची किसकी है? (व्‍यवधान) मैं सदन को सूचना देना चाह रही हूं।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

सरकार तो बदल लेना आप, लेकिन मैं एक सूचना दे रही हूं वो सूचना सुन लीजिये आप। मैं सदन को सूचना दे रही हूं।

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि दिनांक 3.3.2007 को कस्‍बा नवलगढ़ में शांति भंग करने के प्रयास के आरोप में पुलिस थाना नवलगढ़ में रात्रि लगभग 10.05 बजे विधान सभा क्षेत्र गुढ़ा से विधायक श्री रणवीर सिंह गुढ़ा को 151 दण्‍ड प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तार किया गया। श्री रणवीर सिंह गुढ़ा नवलगढ़ कस्‍बा में प्रतिवर्ष धुलण्‍डी के अवसर पर निकाले जाने वाले गेर जुलुस के रास्‍ते को बदलने की मांग को लेकर कस्‍बे में लोगों को बरगलाने का प्रयास कर रहे थे और प्रयास करके दोनों सम्‍प्रदायों में साम्‍प्रदायिक सद्भावना को प्रभावित कर रहे थे। दिनांक 4.3.2007 को कस्‍बा नवलगढ़ में गेर निकलती है। अत: शांति भंग होने की सम्‍भावना को देखते हुए माननीय विधायक श्री रणवीर सिंह गुढ़ा को गिरफ्तार किया गया।

अब पर्ची पर बोलने के लिए मैं सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य श्री मदन राठौड़ का नाम पुकार रही हूं।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुददे

सुमेरपुर सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में चिकित्साकर्मियों का पदस्‍थापन

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद कि आपने मुझे सदन में अपने क्षेत्र की समस्‍या रखने के लिए अवसर दिया।....

विजय/अरुण/05032007/1210/1h

 

अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर का चिकित्‍सालय सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है लेकिन मुझे इस बात का बहुत दु:ख है कि पहले भी वहां का प्रतिनिधित्‍व कोई मंत्री ने किया था जो कांग्रेस सरकार में मंत्री थीं और एक और आश्‍चर्य की बात है कि पाली जिले से ही कांग्रेस के राज में एक चिकित्‍सा मंत्री भी थे और जो सोजत से विधायक थे और वह राजस्‍थान के चिकित्‍सा मंत्री भी थे लेकिन सुमेरपुर के अस्‍पताल में अभी‍डिस्‍पेंसरी के निमित्‍त जितने डाक्‍टर होने चाहिए, उतने ही डाक्‍टर्स उन्‍होंने लगाये। सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में कम से कम 11 डाक्‍टर्स होने चाहिए। वहां पर निश्‍चेतन का डाक्‍टर होना चाहिए जो वहां पर नहीं लगाया गया। वहां पर शिशु रोग का कनिष्‍ठ विशेषज्ञ लगाया जाना चाहिए, वह भी नहीं लगाया गया। वहां पर ई.एन.टी. का डाक्‍टर लगना चाहिए था, वह भी नहीं लगाया और आर्थोपेडिक्‍स का डाक्‍टर भी नहीं लगाया यानी इन्‍होंने चार-चार डाक्‍टर के पद भी सृजित नहीं किये, यह बड़े आश्‍चर्य की बात है। सी.एच.सी. में जहां 11 डाक्‍टर होने चाहिए, वहां पर सुमेरपुर में केवल पाँच डाक्‍टर लगाये गये और वहां पर केवल चार नर्सेज लगाई गईं जबकि वह नेशनल हाईवे पर स्थित है, राष्‍ट्रीय राजमार्ग 14 पर यह सुमेरपुर का अस्‍पताल स्थित है। जहां पर आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, कई मरीज वहां पर आते हैं। यह सब इसलिए किया गया अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि पहले कांग्रेस के राज में जो मंत्री थे या वहां का जो प्रतिनिधित्‍व करती थीं, उनका निजी चिकित्‍सालयों से सम्‍बन्‍ध था। नि‍जी चिकित्‍सालयों को लाभ‍दिलवाने के लिए वहां पर इस प्रकार के डाक्‍टर्स की नियुक्ति नहीं की गई। यह बड़े दुर्भाग्‍य की बात है और मैं मेरी सरकार से भी निवेदन करना चाहूंगा कि अब वहां पर जिस प्रकार से सी.एच.सी. पर जितने डाक्‍टर्स होने चाहिए, वे पद सृजित करवाने की कृपा करें। पूर्ववर्ती सरकार गैर जवाबदार रही और बिलकुल लापरवाही की उन्‍होंने और यह दृश्‍य वे आज भी यहां सदन में उपस्थित कर रहे हैं। ये कांग्रेस के लोग कभी भी जवाबदार नहीं हैं, गम्‍भीर नहीं है। ये चिंता नहीं करते हैं, जनता के हितों की रक्षा करने के लिए कतई गम्‍भीर नहीं हैं। आज भी कई ऐसे महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न थे जिन पर भी इन्‍होंने चर्चा नहीं चलने दी, प्रश्‍नों को नहीं आने दिया। यह बड़े दुर्भाग्‍य की बात है और आज मैं पर्ची के माध्‍यम से क्‍योंकि हमारे प्रश्‍न थे, बहुत गम्‍भीर प्रश्‍न थे, जिन प्रश्‍नों को भी इन्‍होंने नहीं उठाने दिया। मैंने आपसे निवेदन किया कि पर्ची के माध्‍यम से...(व्‍यवधान) मैं कहना चाहूंगा कि सुमेरपुर में आपका वहां पर अस्‍पताल है, सुमेरपुर के सी.एच.सी. में कम से कम 11 डाक्‍टर्स होने चाहिए और कम से कम आठ पैरा-मेडिकल स्‍टाफ होने चाहिए। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा चिकित्‍सा मंत्रीजी को कि जिन्‍होंने अभी चार डाक्‍टर्स के क्‍वार्टर्स के लिए धन उपलब्‍ध करवाया। यही नहीं, चार पैरा-मेडिकल स्‍टाफ के क्‍वार्टर्स बनाने के लिए इन्‍होंने धन उपलब्‍ध करवाया, इसके लिए चिकित्‍सा मंत्रीजी को मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा। यही नहीं, दो क्‍लास फोर्थ कर्मचारियों के लिए और लिपिक के लिए रहने के लिए सुविधा उपलब्‍ध करवाने के लिए इन्‍होंने धन उपलब्‍ध करवाया, इसके लिए मैं इस सदन के माध्‍यम से चिकित्‍सा मंत्रीजी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा।

मैं यह भी चाहूंगा कि यह सी.एच.सी. है, नेशनल हाईवे पर स्थित है, जहां आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कृपा करके सी.एच.सी. के निमित्‍त जो सुविधाएं हैं, वह सुविधाएं आप मुहैया करवाने का कष्‍ट करें। वहां पर पाँच डाक्‍टर्स, एक वरिष्‍ठ चिकित्‍सक की जरूरत है। चार और डाक्‍टर्स की आवश्‍यकता है जो सी.एच.सी. में होने चाहिए। 11 डाक्‍टर्स होने चाहिए लेकिन पूर्व की सरकार ने वहां पर भेदभाव रखा क्‍योंकि सुमेरपुर नगर ने पूर्व की सरकार को कभी भी समर्थन नहीं दिया। पहले वहां पर सुमेरपुर नगर में हमेशा बोर्ड हमारा रहा, इनका बोर्ड नहीं रहा....

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन के कूप में नारेबाजी व व्यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। (व्‍यवधान) कृपया समाप्‍त करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ...ये ऐसे भेदभावपूर्ण तरीके से कार्य करते रहे। मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि जहां पर वहां जरूरत है अभी, एक पद सृजित होना चाहिए कनिष् विशेषज्ञ निश्चेतन का, एक होना चाहिए आर्थोपेडिक् के कनिष् विशेषज्ञ का, एक होना चाहिए नेत्र विशेषज्ञ का, एक होना चाहिए .एन.टी. का, ये पद होने चाहिए। एक वरिष् चिकित्सा अधिकारी का पद भी होना चाहिए और चिकित्सा अधिकारी के चार अन् जिसमें डेंटिस् चिकित्सा अधिकारी, यह वहां पर हो। यह व्यवस्‍था कृपा करके आप करवाने का कष्‍ट करें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। माननीय सदस्‍य, कृपया समाप्‍त करें। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं यह भी निवेदन करूंगा कि मेल नर्स के पद जो कम हैं, सी.एच.सी. में होने चाहिए। एक मेल नर्स और पाँच फिमेल नर्स के और ए.एन.एम. का पद एक कम है, जो मैं आपके सामने रख रहा हूं। जो हैं, वह आपने भर दिये, इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा और मैं मंत्रीजी से भी निवेदन करना चाहूंगा कि कृपा करके....

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ...सदन में यह घोषणा करे ताकि मेरे क्षेत्र की जनता यह समझे कि आपका प्रतिनिधित्‍व सफल रहा है और आपको धन्‍यवाद दे सके। (व्‍यवधान)

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): सोनियाजी को रो रहे हो क्‍या? सोनियाजी तो राज़ी-खुशी है, उनको रो रहे हो क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ये जनता के हितों की रक्षा नहीं कर रहे हैं, ये केवल हाय-हाय करने के लिए कर रहे हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहूंगा कि यह जो एक एम.एल.ए. आये थे सी.पी.जोशी साहब, इन्‍होंने सदन में कहा था, हम यहां हाय-हाय करने के लिए आये हैं। बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि इन्‍होंने सदन में स्‍वीकार किया कि हम हाय-हाय करने के लिए आये। हम हाय-हाय करने के लिए नहीं, हम धन्‍यवाद करने के लिए और अपने क्षेत्र के हितों की रक्षा करने के लिए, सदन में अपनी बात रखने के लिए आये हैं और इनके लिए दुर्भाग्‍य बना रहे, यह शर्म इनको नहीं आती, इनको निश्चित रूप से शर्म आनी चाहिए। अब मैं कृपा करके मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि कृपया यह घोषणा करने का कष्‍ट करें ताकि मेरे क्षेत्र की जनता आपको धन्‍यवाद दे सकें। (व्‍यवधान)

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन के कूप में नारेबाजी एवं व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय....

श्री अध्‍यक्ष: चूंकि मैं कुछ सुन नहीं पा रही हूं इसलिए सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है। (व्‍यवधान) आप जवाब दे रहे हैं? दे दीजिये। अब स्‍थगित कर दिया, सदन की कार्यवाही स्‍थगित कर दी।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन के कूप में नारेबाजी एवं व्‍यवधान)

(सदन की बैठक 12.16 बजे, दोपहर दो बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

Jkj/akt/14.00/5.3/2007/2c

 

(14.00 बजे )

पुन: समवेत् होने पर

( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन )

 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 14.00 बजे आधा घंटे के लिए स्‍थगित हुई।)

 

     Lpm/akt/1430/2f/5032007

 

(14.30 बजे)

पुन: समवेत् होने पर

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्यक्ष महोदय, सारे देश की जनता और वैसे सब लोग जानते हैं कि राजस्‍थान की विधानसभा का एक बहुत ही गौरवशाली इतिहास है और यहां की जो परम्‍परायें हैं, गरिमा की एक अलग ही पहचान बनी है। इसी विधानसभा में महामहिम उप-राष्‍ट्रपति श्री भैरोसिंहजी शेखावत जैसे व्‍यक्तित्‍व ने बहुत लम्‍बा समय निकाला और आज के समय में भी प्रतिपक्ष के तीन माननीय सदस्‍य श्री अशोक गहलोतजी, श्री माथूर साहब और श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या जी प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे हैं। फिर भी मुझे बहुत अफसोस है कि विगत तीन दिनों में जिस तरह का वातावरण इस विधानसभा में बना वह हम सब के लिए बहुत ही तकलीफदेह है। सदन को चलाने की जिम्‍मेदारी अगर पक्ष की है तो साथ में प्रतिपक्ष की भी है। यें सर्वोच्‍च सदन है और यहां राजस्‍थान की जनता का हम सब प्रतिनिधित्‍व करते हैं। यहां तार्किक और रचनात्‍मक बहस हो यह हम सब का उद्देश्‍य रहना चाहिए। मैं तो यह चाहूंगी कि यह गतिरोध टूटे। आसन और सदन के प्रति सम्‍मान रहे और अध्‍यक्ष महोदया भविष्‍य में भी ऐसी बात फिर न हो, इसके लिए मैं निवेदन यह करना चाहूंगी कि एक कोड ऑफ कॉन्‍डेक्‍ट बने ताकि ऐसे रेपिटेशन्‍स फिर न हो और मैं समझती हूं कि इस पर प्रतिपक्ष भी सहमत होगी।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 3-4 दिन से जो चल रहा है उस पर मुख्‍यमंत्रीजी ने जो बात कहीं है मैं भी यह महसूस करता हूं कि यह अच्‍छा नहीं हुआ और मुझे तो खुद को इतना अफसोस है कि इस प्रकार की घटना हुई। इसको यही समाप्‍त करके और इनका निलम्‍बन को वापस ले लिया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: घटना तो अशोभनीय थी ना, अफसोस तो जताओ थोड़ा आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): घटना अशोभनीय थी और मुझे इस पर अफसोस है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, इसमें हंसने की क्‍या बात हुई? ठीक बात कहीं है उन्‍होंने हँसे क्‍यों? माननीय जो सदस्‍य निलम्बित हैं पहले आप.. वो पहले कैसे आयेंगे जब तक आप रिवोक नहीं करोगे How can कैसे एंट्री होगी उनकी?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): तीन आ रहे हैं या चार...

श्री अध्‍यक्ष: तीन हैं, लेकिन पहले आप रिवोक करेंगे तब ही क्षमा मांगेंगे ना, जो सदन में उपस्थित होगा एक्‍सप्रेशन उसी का तो रद्द होगा। चौथे आ जाए, जब वह आ जाएंगे तो उनका भी हो जाएगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 292 (2) के अन्‍तर्गत प्रस्‍ताव । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 1 मार्च,2007  को सदन द्वारा प्रस्‍ताव पारित किया गया। जिससे श्री अमराराम धोद, श्री सुरेश मीणा, श्री मुरारीलाल मीणा सदस्‍य राजस्‍थान विधानसभा को आसन के निर्देशों की लगातार अवहेलना करने के कारण महामहिम राज्‍यपाल के संवैधानिक पद की गरिमा, मर्यादाओं एवं सदन की स्‍वस्‍थ परम्‍पराओं का उल्‍लंघन करते हुए लगातार हौ-हुल्‍ला, नारेबाजी एवं अमर्यादित आचरण के कारण वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिए निलम्बित किया गया था। राजस्‍थान विधानसभा की उच्‍च गौरवशाली संसदीय परम्‍परायें रही हैं लेकिन महामहिम राज्‍यपाल के बजट अभिभाषण के समय सदन में जो कुछ हुआ उससे महामहिम राज्‍यपाल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन के नेता सहित संपूर्ण सदन के सदस्‍य काफी आहत हुए हैं। पक्ष और विपक्ष के मध्‍य सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे, यह सदन जन-आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करें और इस सदन की गौरवशाली परम्‍परायें अक्षुण्ण बनी रहें, इस हेतु मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि माननीय सदस्‍य श्री अमराराम धोद, श्री सुरेश मीणा, श्री मुरारीलाल मीणा द्वारा अफसोस जाहिर करने पर उपरोक्‍त तीनों सदस्‍यों का निलम्‍बन नियम 292 के परंतुक के अन्‍तर्गत अब तक के निलम्‍बन को पर्याप्‍त मानते हुए सदन द्वारा यह संकल्‍प किए जाने के बाद शेष निलम्‍बन तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त किया जाए। अत: मैं धरिये क्षमा, विवेक, कोप न किजे प्रियतमा, प्रस्‍ताव करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपने इसमें इतना और संशोधन कर दें कि यदि गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य भी अपना अफसोस और खेद प्रकट करते हैं तो उनका भी निलम्‍बन कर दिया जाएगा रद्द, रद्द कर दिया जाएगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी भावना से पूर्णत: सहमत हूं यदि माननीय गुढ़ा जी भी यहां पर आकर अफसोस जाहिर करते हैं तो उनका भी निलम्‍बन वापस लिया जाता है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि जो प्रस्‍ताव सरकारी मुख्‍य सचेतक ने प्रस्‍तुत किया है उसे स्‍वीकार किया जाए?

(स्‍वीकृत)

प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया। 

अब उन तीनों को बुला लीजिए, सदन में बुला लीजिए ताकि वो भी अफसोस जाहिर कर दें। बुलाइए... सदन ऐसे बैठे नहीं रह सकता इसलिए कृपया शीघ्रता करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक प्रार्थना कर रहा था कि शून्‍यकाल के अन्‍दर कुछ माननीय सदस्‍यों को अपने विचार प्रकट करने थे, व्‍यवधान के कारण प्रकट नहीं कर पाये। आपने तो इतनी उदारता दिखाई है तो कृपया जो आज माननीय सदस्‍य हैं जिनकी पर्ची निकली थी, जो अपनी बात कुछ कहना चाहते थे आपके माध्‍यम से उनको अनुमति और प्रदान कर दें तो बड़ी कृपा हो जाएगी आपकी।

श्री अध्‍यक्ष: शून्‍यकाल समाप्‍त हो गया है, अब आप आगे का काम चलने दें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उनको कल अगर मौका दें दे तो बड़ी कृपा हो जाएगी आपकी।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम जी।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो राज्‍यपाल के अभिभाषण के वक्‍त मैंने और माननीय तीन सदस्‍यों ने राजस्‍थान की जनता की जन-भावनाओं को रखने की कोशिश की है और उसमें भावेश में कोई भी ऐसी चीज हुई है तो उसके लिए सदन की गरिमा को कोई ठेस पहुंची है तो उसके लिए मैं , माननीय चारों सदस्‍यों की और से अफसोस जाहिर करता हूं कि सदन की परम्‍पराओं के अनुसार राजस्‍थान की जनता की भावनाओं पर विचार हो और सरकार उन पर समाधान करें, इसमें कोई भी भावेश में कोई चीज ऐसी हुई है जिसमें गरिमा को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए तो मैं अफसोस करता हूं लेकिन जो भावनायें राजस्‍थान की जनता की हैं वो हमने रखने की कोशिश की हैं। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने बड़ी उदारता दिखाई थी, हम सभी लोग थे, आपने यह कहा था कि जो कुछ हुआ सदन की गरिमा के प्रतिकूल हुआ। उसके लिए माननीय सदस्‍य अफसोस प्रकट करेंगे। अब इन्‍होंने यदि शब्‍द लगाकर हमने भावनाएं राजस्‍थान की जनता की प्रकट की थी, इनको अधिकार है राजस्‍थान की जनता की भावनाओं को प्रकट करने के लिए अध्‍यक्ष महोदय यह नियमों और प्रक्रिया में आते और कुछ भी बात कहते। अगर आज आसन सर्वोपरि है अध्‍यक्ष महोदय आपके सामने हम अगर क्षमा-याचना कर लें, हम कोई बौने नहीं हो जाएंगे अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए अध्‍यक्ष महोदय आप निर्देश दें।

श्री अध्‍यक्ष: हो गया है, अफसोस जाहिर कर तो उन्‍होंने....

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संसदीय मंत्री होने के नाते सबकी तरफ से आज खेद व्‍यक्‍त कर दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: आप काइको बोल रहे हैं। अधिसूचनाएं श्री विरेन्‍द्र मीणा।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्यसूची में किए गए उल्‍लेख के अनुसार वित्‍त विभाग की 42 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं ।

 

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(43)वित्/कर/2005-89 दिनांक 20.9.2006 जिसके द्वारा जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर महेन्द्रा वर्ल् सिटी (जयपुर) लि. द्वारा स्पेशन इकॉनोमिक जोन (सेज) स्थापित करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा रीको के पक्ष में निष्पादित लीज-विलेख पर स्टाम् ड्यूटी में छूट प्रदान की गई है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्/कर/2006-90 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा वित् अधिनियम के चेप्टर VII अर्थात् भूमि कर को 25.9.2006 से लागू किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्/कर/2006-91 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा राजस्थान कर बोर्ड को रीवीजन ऑथोरिटी (भूमि कर) बनाया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्/कर/2006-92 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा राजस्थान भूमि कर नियम, 2006 विरचित किये गये है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-93 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-84 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-94 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-86 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.2(30)वित्/कर/2006-95 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा आवश्यक वस्तुओं पर नियंत्रण हेतु स्टाम् अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत स्टाम् ड्यूटी में कमी की गई है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-96 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-II में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-97 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यवहारियों को कार के प्रयोग हेतु सशर्त कर 1 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(14)वित्/कर/2005-98 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(14)वित्/कर/2006-137 दिनांक 8.3.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(11)वित्/कर/99-99 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-160 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.16(3)वित्/कर/2004-पार्ट-I-100 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा आयुक् वाणिज्यिक कर विभाग, राजस्थान जयपुर को राजस् जिला भरतपुर की राजस् तहसील पहाडी में सैण् स्टोन का खण्डा पर कर संग्रहण हेतु निर्देशित किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-101 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा पंजीकृत व्यवहारियों के सरसो, सरसों तेल के विक्रय पर कर की दर 1 प्रतिशत से बढाकर 2 प्रतिशत की गई है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-102 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची IV में संशोधन किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(103)वित्/कर/2005-103 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-104 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-105 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-175 दिनांक 31.3.2006 (समय-समय पर यथासंशोधित) में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-106 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-II में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-107 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा बुनकर संघ के कतिपय उत्पादों को कर मुक् किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-108 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान स्टेट हैण्डलूम डवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, जयपुर के कतिपय उत्पादों को कर मुक् किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.4(15)वित्/कर/2003-109 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(15)वित्/कर/2003-68 दिनांक 7.7.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.4(30)वित्/कर/97-110 दिनांक 19.10.2006 जिसके द्वारा प्रति 40 टन चावल पर कर की राशि पर बोनस का परिहार किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(87)वित्/कर/2006-111 दिनांक 14.11.2006 जिसके द्वारा कम्जोजीशन स्कीम टू ढाबा एण् भोजनालय-2006 लागू की गई है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्/कर/98-पार्ट-112 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(35)वित्/ग्रुप-IV/87-38 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्/कर/98-पार्ट-113 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(35)वित्/ग्रुप-IV/87-39 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है  

   

अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्/कर/98-पार्ट-114 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(66)वित्/ग्रुप-IV/82-40 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है   

   

अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्/कर/98-पार्ट-115 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(66)वित्/ग्रुप-IV/82-41 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है   

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-116 दिनांक 27.11.2006 जिसके द्वारा द्वितीय तिमाही रिटर्न भरने की तिथि 30.11.2006 तक बढाई गई है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(80)वित्/कर/2005-117 दिनांक 1.12.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(20)वित्/कर/2005-पार्ट-118 दिनांक 1.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)वित्/कर/99-266 दिनांक 21.1.2000 एवं अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)वित्/कर/2000-303 दिनांक 30.3.2000 निरस् किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(58)वित्/कर/2005-पार्ट-119 दिनांक 7.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(58)वित्/कर/2005-पार्ट-40 दिनांक 6.5.2006 (समय-समय पर यथासंशोधित) में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-119 दिनांक 13.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-84 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-121 दिनांक 13.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-86 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(142)वित्/कर/2006-122 दिनांक 2.1.2007 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-67 दिनांक 5.7.2006 में संशोधन किया गया है

   

अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्/कर/2005-123 दिनांक 8.1.2007 जिसके द्वारा वर्ल् फूड प्रोग्राम एजेंसी को कर में छूट प्रदान की