jkj/akt/07032007/1100/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 7
बारहवीं
विधान सभा के
सातवें सत्र
का सातवां
दिवस
संख्या : 5
बुधवार, 07
मार्च, 2007
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष्
महोदय, मैं
आपका ध्यान
आकर्षण नियम 306
की तरफ करना
चाहूंगा कि....
श्री
अध्यक्ष:
श्री अशोक
कुमार नवलखा।
श्री
जुबेर खान:
पंजाब के मुख्य
मंत्री ने,
पंजाब की
सरकार ने जो
रवैया अख्तियार
कर रखा है
यहां राजस्थान
के पानी बंद
करने का.....
श्री
अध्यक्ष: यह
जीरो आवर में
उठाइयेगा।
श्री
जुबेर खान:
राजस्थान
सरकार एक शब्द
उसके लिए नहीं
बोली है।
श्री
अध्यक्ष: यह
कोई तरीका
नहीं है उठाने
का, आप नियमों
में आइये। आप
नियमों में
आइये, यह क्वेश्चन
आवर है।
श्री
जुबेर खान:
जबकि हरियाणा
के मुख्य
मंत्री ने इस
बात की निंदा
की है।
हम यह प्रस्ताव
लाते हैं 306 के
अंतर्गत, यह
सदन की
कार्यवाही
रोकिये, यह
राजस्थान की
सरकार अपने
कर्त्तव्य
का निर्वहन
नहीं कर पाई
है।
श्री
अध्यक्ष: आप
क्वेश्चन
आवर के बाद
रखना। अंकित
नहीं हो। अंकित
नहीं हो।
श्री
जुबेर खान: 000
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा है।
अंकित नहीं
हो रहा है।
श्री
जुबेर खान: 000 (व्यवधान)
श्री
अमरा राम(धोद): 000
श्री
अध्यक्ष: सदन
शाम के सात,
साढ़े सात बजे
तक चलेगा, आपको
फिर मौका था उठाने
का लेकिन
आपने....(व्यवधान)
श्री
अमरा राम(धोद): 000
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
अमरा राम(धोद): 000
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री अमरा
राम(धोद): 000 (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आर्डर,
आर्डर।
माननीय सदस्य,
आप जिस 306 नियम
का हवाला दे
रहे हैं, कल भी
मैंने यह कहा
था कि पहले
सारे
पार्टियां
बैठें, और बैठ
कर इस इश्यू
पर बात करके
और उसके बाद
संकल्प
लायें, फिर
तैयार हैं
लेकिन यह
तरीका नहीं
है। (व्यवधान)
बिलकुल गलत
बात है आपकी।
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
अध्यक्ष: तो
आपने...
श्री
जुबेर खान: 000
श्री
अध्यक्ष: आप 306
नियम का हवाला
दे रहे हैंतो 306
का नियम सब के
साथ...(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
अध्यक्ष: पढ़
लिया मैंने।
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
अमरा राम(धोद): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: 000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
सरकार का उत्तर
आयेगा उस पर।
(व्यवधान)
सरकार का उत्तर
आयेगा, सरकार
बोलेगी।
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: 000
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा। (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
श्री
अध्यक्ष:
यहां किसी का
भी अंकित नहीं
हो रहा है, किसी
का भी अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री महावीर
प्रसाद जैन: 000
डा.सी.पी.जोशी:
000
श्री
जुबेर खान: 000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
श्री
अमरा राम(धोद): 000
डा.सी.पी.जोशी:
000 (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
रामगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य,
अख़बार
छोडि़ये। रामगढ़
से आने वाले
माननीय सदस्य,
अख़बार
छोडि़ये।
इनका अख़बार
ले आओ। (व्यवधान)
डा.बुलाकीदास
कल्ला: 000
श्री
अध्यक्ष:
मैंने किसी को
भी अलाउ नहीं
किया है, जो कोई
बोले हैं किसी
को भी अलाउ
नहीं किया है,
मैं कह रही
हूं आपको कोई
मुद्दा उठाना
है तो क्वेश्चन
आवर के बाद आप
उसे उठायें,
लेकिन इस समय
बोलने का मैं
किसी को भी
मौका, अवसर
नहीं दूंगी।
(व्यवधान)
नहीं, आप उसके
बाद उठाना। I will give you
opportunity. लेकिन
उसके बाद। क्वेश्चन
आवर के बाद।
(व्यवधान) No-No. क्वेश्चन
आवर।
क्वेश्चन
आवर। अशोक
कुमार नवलखा।
अशोक कुमार
नवलखा।
श्री
अमरा राम(धोद): 000
श्री
सी.डी.देवल: 000 (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कुछ
नहीं। अंकित
नहीं। अंकित
नहीं।
श्री
जुबेर खान: 000
श्री
सी.डी.देवल: 000 (व्यवधान)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
परिवहन
चैक पोस्ट
निम्बाहेड़ा
का
सुदृढ़ीकरण
एवं उन्नयन
58.श्री
अशोक कुमार
नवलखा(निम्बाहेड़ा):
क्या
यातायात
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
परिवहन चैक
पोस्ट, निम्बाहेड़ा
की वर्ष 2003-04 से 2006-07
की
प्राप्तियां
एवं आय कितनी
है ? वर्षवार
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2)
परिवहन चैक
पोस्ट, निम्बाहेड़ा
पर वर्ष 2006-07 में
कितने वाहनों
की किस्मवार(मेक)
आवक-जावक हुई?
माहवार सूची
सदन की मेज पर
रखें।
(3) क्या
यह सही है कि
परिवहन चैक
पोस्ट निम्बाहेड़ा
पर वर्ष 2006-07 में
ओवरलोड व अन्य
विसंगतियों
के चालान बनाए
गये तथा राशि
वसूलकी गई?
यदि हां, तो
कितनी? माहवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(4) क्या
सरकार की इस
चैक पोस्ट को
राजस्व आय की
दृष्टि से और
अधिक सुदृढ़
बनाने की योजना
है? यदि हां, तो
किस प्रकार व
नहीं, तो क्यों?
यातायात
मंत्री(श्री
युनूस खान): (1) कर
संग्रह केन्द्र
निम्बाहेड़ा
जिला चित्तौड़गढ़
की वर्ष 2003-04 से 2006-07
तक की
प्राप्तियां
एवं आय का
वर्षवार विवरण
निम्नानुसार
है:-
वर्ष प्राप्तियां
व आय (रू.लाखों
में)
2003-04 1584.77
2004-05 1337.23
2005-06 1471.72
2006-07 998.38(माह
जनवरी 07 तक)
(2) राज्य
सरकार द्वारा
अधिसूचना
दिनांक 29
अप्रैल, 1995
द्वारा चैक
पोस्ट स्थापित
कर बेरियर
लगाने सम्बन्धी
समस्त
निर्देशों को
वापस लिया
जाकर दिनांक
01-05.1995 से परिवहन
चैक पोस्ट
समाप्त कर दी
गयी तथा इन्हें
कर संग्रह
केन्द्र के
रूप में
परिवर्तित कर
दिया गया। दिनांक
01.05.1995 से इन कर
संग्रह केन्द्रों
....
डा.बुलाकीदास
कल्ला: 000
श्री
युनूस खान: से
गुजरने वाले
किसी भी
प्रकार के वाहनों
के आने-जाने
की प्रविष्टि
दर्ज किये जाने
का कोई अभिलेख
संधारित नहीं
किया जाता है।
(प्रतिपक्ष
के माननीय
सदस्यों
द्वारा
नारेबाजी)
श्री
अध्यक्ष:
इनका जवाब देओ
आप। (व्यवधान)
श्री
युनूस खान: (3) इस
कर संग्रह
केन्द्र पर
वर्ष 2006-07 में
ओवरलोड व अन्य
विसंगतियों
के बनाए गए
चालानों तथा
वसूली की गई
राशि का विवरण
संलग्न
परिशिष्ट क
पर उपलब्ध
है।
(4)
सरकार द्वारा
राजस्व
लक्ष्यों की
पूर्ति तथा आय
में वृध्दि
हेतु अन्य कर
संग्रह केन्द्रों
के अनुरूप ही
निम्बाहेड़ा
कर संग्रह
केन्द्र पर
भी आवश्यक
प्रवर्तन स्टाफ
लगाया जाकर
आवश्यक
सुविधायें
उपलब्ध
करायी जाती
हैं।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हरिमोहन
शर्मा।
हरिमोहन
शर्मा।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: प्रश्न
संख्या 2 ।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न संख्या
2 ।
श्री
युनूस खान: वह
सप्लीमेंट्री
पूछ रहे हैं
अध्यक्ष
महोदय। सप्लीमेंट्री
पूछा है उन्होंने।
श्री
अशोक कुमार
नवलखा: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री महोदय
से जानना
चाहता हूं कि
वर्ष 2003-04 में कर
संग्रह केन्द्र
निम्बाहेड़ा
की
प्राप्तियां
एवं आय 1584.77 लाख
रूपये थी,
लगातार आय एवं
प्राप्तियां
हर वर्ष कम हो
रही है इसका
क्या कारण है
तथा इसके लिए
किसकी जिम्मेदारी
बनती है। खण्ड
दो, माननीय
मंत्री
महोदयजी से
जानना चाहता
हूं कि विभाग
ने वर्ष 2006-07 के
लिए क्या
लक्ष्य
निर्धारित
किये हैं, क्या
जनवरी 2007 की अब
तक की
प्राप्तियां
998.38 लाख के विरूध्द
दो माह में
लक्ष्य किस
तरह अर्जित हो
सकेंगे। खण्ड
तीन, कर
संग्रह केन्द्र
पर प्रत्येक
वाहन के
प्रकार के
हिसाब से ही
चालान एवं कर संग्रह
वसूला जाता
है, फिर विभाग
के पास सूची क्यों
नहीं उपलब्ध
है।
नम्बर चार,
ओवरलोड चालान
व विसंगतियों
के चालान में
अप्रैल, 2006 से
अक्टूबर, 2006 तक
प्रति माह एक
करोड़ रूपये
से कम की वसूली
हुई है, इसका
क्या कारण
रहा है। खण्ड
पाँच, सरकार
द्वारा राजस्व
लक्ष्यों की
पूर्ति हेतु
प्रवर्तक स्टाफ
एवं
सुविधायें तो
उपलब्ध
करायी जाती है
लेकिन राजस्व
वसूली की
पूर्ति नहीं
होने के लिए
कौन जिम्मेदार
है.....
Lpm/akt/1110/1b/70302207
तथा
विभाग इस बारे
में क्या कदम
उठा रहा है।
मैं माननीय
मंत्री महोदय
से यह निवेदन
करूंगा कि
कृपया लगातार
जो विभागीय आय
कम पड़ रही है
इसके बारे में
अपना स्पष्टीकरण
प्रस्तुत
करें। धन्यवाद।
श्री
युनूस खान
(यातायात
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
निम्बाहेड़ा
से आने वाले
मानीय सदस्य
ने जो आय
गिरने की बात
कहीं
अधिसूचना 1995
में जारी की
गई उस
अधिसूचना के
तहत हमारे जो
मतलब है
टी.सी.सीज. थी
हमने अब टैक्स
कलेक्शन
सेन्टर बना
दिये हैं।
पहले चैक पोस्ट
हुआ करती थी
अब जो है उनको
माननीय उच्चतम
न्यायालय के
आदेश के
अनुसार
ओवर-लोड पर
बंदीश लगने की
वजह से आय में
गिरावट आई है।
चूंकि पहले
वहां पर चैक
पोस्ट होती
थी और चैक
पोस्ट के
माध्यम से
प्रत्येक
वाहन की जांच
की जाती थी इस
कारण से आय ज्यादा
होती थी। अब
खाली टैक्स
कलेक्शन
सेन्टर बना
दिया गया है
माननीय अध्यक्ष
महोदय इसलिए
स्वेच्छया
से जो मतलब
ऑनर है वह
टैक्स जमा
कराता है उसी से
और कोई व्यक्ति
अगर वहां टैक्स
जमा नहीं
कराता है आगे
आ जाता है तो
उस पर पाँच
गुणा पेनेल्टी
लगाई जाती है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय जहां तक
वहां मतलब कर
संग्रह केन्द्र
पर अधिक भीड़
होने का सवाल
है माननीय अध्यक्ष
महोदय वहां पर
मैं स्वयं
मौके पर गया था
माननीय
विधायकजी के
साथ, हमने
सार्वजनिक निर्माण
विभाग को,
माननीय
सार्वजनिक
निर्माण विभाग
को हमने पत्र
लिखा है और
चूंकि यह
नेशनल हाइवे
में आती है
इसलिए नेशनल
हाइवे को भी
पत्र लिखा है।
जिला कलेक्टर
और हमारे
आर.टी.ओ. ने भी
पत्र लिखा है।
हमारे परिवहन
कार्यालय से
भी पत्र गया
है जब हमारे
को नेशनल
हाइवे से
परमिशन मिल
जाएगी तो वहां
पर लेबोई
बनाकर के जो
असुविधा हो
रही है उसका
निराकरण
करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
श्री हरिमोहन
शर्मा। श्री
हीरालाल।
जिला
टोंक में
कुपोषित बच्चों
हेतु वितरित
पोषाहार
सामग्री
60. श्री
हीरालाल
(निवाई) क्या
महिला एवं बाल
विकास मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
1. विभागीय
गणना के
अनुसार 31
दिसम्बर,2006 तक
टोंक जिले में
छ: वर्ष तक की
आयु के कितने
बच्चे
कुपोषित हैं?
इन कुपोषित
बच्चों में
कितने बच्चे
गंभीर रूप से
कुपोषित की
श्रेणी में
हैं? ब्लॉकवार
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
2. उक्त
कुपोषित व
गंभीर
कुपोषित बच्चों
में कुपोषण का
स्तर कम करने
के लिए क्या
प्रयास किये
जा रहे हैं?
विवरण सदन की
मेज पर रखे।
3. वर्ष
2006 में टोंक
जिले में क्या-क्या
व कितनी-कितनी
पोषाहार
सामग्री
वितरित की गई?
ब्लॉकवार
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
महिला
एवं बाल विकास
मंत्री (श्री
कनकमल कटारा):- (1)
विभागीय
सूचना के
अनुसार टोंक
जिले में
संचालित आंगनबाड़ी
केन्द्रों
पर 31 दिसम्बर,2006
को 6 वर्ष तक के
आयु के 57 हजार 646
बच्चे
कुपोषित एवं 599
गंभीर रूप से
कुपोषित बच्चों
की श्रेणी में
थे। ब्लॉकवार
विवरण निम्न
प्रकार है:-
|
क्र.सं. |
परियोजना
का नाम |
6
वर्ष तक के
आयु के
कुपोषित बच्चों
की संख्या |
गंभीर
रूप से
कुपोषित की
श्रेणी के
बच्चों की
संख्या |
|
1 |
अलीगढ़ |
7,728 |
201 |
|
2 |
देवली |
9,092 |
05 |
|
3 |
मालपुरा |
9,045 |
97 |
|
4 |
निवाई |
8,267 |
73 |
|
5 |
टोडारायसिंह |
6,139 |
05 |
|
6 |
टोंक
शहर |
4,337 |
168 |
|
7 |
टोंक
ग्रामीण |
13,038 |
50 |
|
|
योग |
57,646 |
599 |
(2) टोंक
जिले में बच्चों
में कुपोषण की
रोकथाम हेतु
आंगनबाड़ी केन्द्रों
के माध्यम से
पूरक पोषाहार
का वितरण किया
जा रहा है। केन्द्रों
पर पंजीकृत
अतिकुपोषित
बच्चों को
दुगुनी
मात्रा में
पोषाहार दिया
जा रहा है।
इसके अतिरिक्त
प्रत्येक
माह में एक
निश्चित दिवस
को मातृ शिशु
स्वास्थ्य
एवं पोषण दिवस
का आयोजन कर
बच्चों की
वृद्धि
निगरानी
तालिका का
संधारण, उनके
स्वास्थ्य
की जांच,
टीकारण,
परिजनों को
बच्चे की
पोषण की
जरूरतों को
पूरा करने के
लिए सलाह तथा
जटिल स्थिति
होने पर
चिकित्सीय
जांच का
परामर्श दिया
जाता है।
कुपोषण की रोकथाम
हेतु राज्य
स्तरीय
कार्य योजना
के अंतर्गत
आंगनबाड़ी
कार्यकर्ताओं
एवं
सहयोगिनियों
को विशेष
प्रशिक्षण
देकर
अति-कुपोषित
बच्चों की
उचित देखभाल
हेतु क्षमता
वर्धन किया जा
रहा है।
अति-कुपोषित
बच्चों की
चिकित्सा
एवं पुनर्वास
हेतु टोंक
जिले में जिला
चिकित्सालय
पर कुपोषण
निदान केन्द्र
भी स्थापित
किया गया है।
इस केन्द्र
द्वारा वर्ष 2006
में 134 कुपोषित
बच्चों को स्वस्थ
किया गया।
(3) वर्ष 206
में टोंक जिले
में 3 वर्ष से
कम आयु वर्ग
के बच्चों को
बेबी मिक्स
तथा 3-6 वर्ष के
बच्चों को
गरम पूरक आहार
में मीठा
दलिया/खिचड़ी
एवं मुरमुरों
का वितरण किया
गया है। कुल 14
हजार 102 क्विंटल
पोषाहार
सामग्री का
वितरण बच्चों
को किया गया,
जिसका ब्लॉकवार
विवरण निम्न
प्रकार है:-
(क्विं.में)
|
क्र.सं. |
परियोजना
का नाम |
बेबीमिक्स |
गरम
पूरक पोषाहार |
मुरमुरे |
महिला
स्वयं
सहायता समूह
द्वारा
निर्मित
बेबीमिक्स |
|
1 |
अलीगढ़ |
693 |
730 |
577 |
0 |
|
2 |
देवली |
833 |
748 |
698 |
0 |
|
3 |
मालपुरा |
974 |
837 |
818 |
0 |
|
4 |
निवाई |
623 |
638 |
573 |
0 |
|
5 |
टोडारायसिंह |
576 |
661 |
467 |
0 |
|
6 |
टोंक
शहर |
316 |
302 |
244 |
0 |
|
7 |
टोंक
ग्रामीण |
630 |
1249 |
788 |
127 |
|
|
योग |
4,645 |
5,165 |
4,165 |
127 |
(भारी
व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: सदन
की कार्यवाही
12 बजे तक के लिए
स्थगित की
जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 11.18
बजे 12.00 बजे तक के
लिए स्थगित हुई।)
भीम/अरुण/6.3.07/12.00/1g
(12:00 बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही 12.30
बजे तक के लिए
स्थगित की
जाती है।
(समय:
12.30 बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही 12.45
बजे तक के
लिये स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 12.30
बजे 12.45 बजे तक के
लिये स्थगित
हुई।)
ans/usc 12:40 1l
07.03.2007
(12:45 बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
विभिन्न
विषयों पर
विचार
पंजाब
एवं राजस्थान
के मध्य
जल-बंटवारा
श्री
अध्यक्ष:
सुबह
प्रतिपक्ष की
और से एक
प्रश्न
उठाया गया था
कि राजस्थान
सरकार ने,
पंजाब के मुख्य
मंत्री के जो
कुछ वक्तव्य उन्होंने
दिये हैं पानी
के बारे में,
उस बारे में अपना
किसी प्रकार
का, मुख्यमंत्री
जी की और से
कोई
प्रतिक्रिया
व्यक्त
नहीं की।
इसलिए अब मुख्यमंत्री
जी सदन में है,
मैं चाहूंगी
कि इस बारे
में वह अपनी
और से कुछ
प्रतिक्रिया
दे।(व्यवधान)
वह कह रही है,
फिर आप क्या
करेंगे। आप
चाहे इस विषय
में तो बाद
में इसको, आप
चाहते हैं तो 306
में उठाकर फिर
आप चर्चा करना।
अब तो मुख्यमंत्री
जी अपनी
प्रतिक्रिया
दे रही है।
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,आज
प्रश्नकाल
नहीं चला और
सदन की
कार्यवाही के
अंदर काफी
बाधा पहुची
है। मैं मानती
हूं कि इस
हाउस के अंदर
हम अपनी समस्याओं
को एक दूसरे
के सामने रखते
हैं और उसका समाधान
भी दलगत
राजनीति से
ऊपर उठकर करने
की कोशिश करते
हैं। यह भी
सही है कि 12
जुलाई,2004 के
अंदर पंजाब
टर्मिनेशनल
ऑफ अग्रीमेंट
बिल पारित
किया गया था
पंजाब के
अंदर। मैं
इसके अंदर
खाली एक बात
पढ़ना
चाहूंगी कि इसके
अंदर, पूरा
एक्ट जिसके
ऊपर एक
प्रेसीडेंसियल
रेफरेंस किया गया
है सुप्रीम
कोर्ट के अंदर
और जिसके अंदर
हम लोग
बार-बार राजस्थान
की और से कह रहे हैं
कि अगर स्पेशल
बैंच भी अगर
जरूरत पड़े तो
लगा दिया जाए ताकि
इसको जल्दी
से जल्दी
इसकी हियरिंग
हो सके। उस
टर्मिनेशल आफ
अग्रीमेंट
बिल के अंदर
क्लाज 3 को
अगर पढ़ा जाए,
जो मैं पढ़ना
चाहूंगी आपके
सामने ”Notwithstanding anything contained in any
other law for the time being in force, any judgment, decree, and decision of
any court, tribunal or authority, the agreement shall be deemed to have
been…..” That means all agreements; Ravi Beas etc. जो
भी हुए हैं “…shall all be deemed to have been terminated
with effect from the respective dates they were executed or made as the case
may be.” Clause goes further. कहता
हैं ki “Notwithstanding anything contained in any
other law for the time being in force, any judgment, decree, order and decision
of any court, tribunal, authority, any obligation of the Government of Punjab
arising from the agreement shall be deemed to have been fully discharged with
effect from the respective dates they were executed or made as the case may
be.” And this is a very serious allegation. जो
इस अग्रीमेंट
के अंदर हुआ
था और इसके
अगेन्स्ट
हम लोगों ने
यहां सर्वसम्मत्ति
से संकल्प
लिया था और
संकल्प लेने
के बाद हम
लोगों ने
प्रधानमंत्री
जी से भी बात
की, हम लोग
उनसे भी मिले
और हम लोगों
ने अपनी तरफ
से जितना भी
हो सकता है
कोर्ट के अंदर
प्रयास करने
की कोशिश की
है। जैसा
मैंने आपको
अभी बताया चिट्ठी
लिखकर स्पेशल
बैंच की भी
कोशिश की है
कि हमारा यह काम
जल्दी से जल्दी
हो जाए । यह
चिंता स्वाभाविक
है । राजस्थान
के हितों के
ऊपर अगर कोई
कुठाराघात
करता है तो यह
आपकी भी चिंता
वाजिब है और
हमारी भी चिंता
है। मैं समझती
हूं कि इसके
ऊपर हम लोगों
को जो कदम
उठाने की
जरूरत पड़ी है
वह हमने उठाया
है। तुरंत ही
जैसे ही हमारे
ध्यान में यह
बात आई हम
लोगों ने,
मैंने तो मुख्यमंत्री
पंजाब से कल
ही बात की और
उनसे पूछा कि आपका स्टेटमेंट
आया है उसके
बारे में आप
क्या कहना
चाहेंगे, तो
उन्होंने
मुझे आश्वस्त
किया कि किसी
भी तरीके से
राजस्थान के
हितों के ऊपर,
जो
अग्रीमेंटस
हुए हैं कोई
कुठाराघात हम
लोग नहीं होने
देंगे, यह
उनहोंने कहा।
उसके बावजूद
भी क्योंकि डिले हो
रहा है
सुप्रीम कोर्ट
के अंदर और
हमारी बात अभी
तक सुनी नहीं
जा रही है, हम
लोगों ने अपनी
एपलीकेशन
बनाकर पेश
करने की, बहुत
ही जल्दी हम
करने वाले हैं
क्योंकि हम
समझते हैं कि
हमारी
भी एपलीकेशन
उसके अंदर
लगनी चाहिये,
तो हमारी तरफ
से कोई कमी,
कमजोरी नहीं
होने वाली है।
दुर्गा/चौहान
070307 1250 1m
हम
आपको यह आश्वस्त
कर सकते हैं
कि राजस्थान
सरकार पूरी
तरह से हमारी
प्राब्लम और
संकट से वाकिफ
है और राजस्थान
के हितों के
ऊपर किसी तरह
का भी
कुठाराघात
नहीं होने
देंगे। यह मैं
आप सबको विश्वास
दिलाना चाहता
हूं। (व्यवधान)
मैं
तो इतना ही
कहना चाहूंगी
अध्यक्ष
महोदय, जिन
लोगों ने
हमारे हितों
के ऊपर
कुठाराघात किया
है पानी के
ऊपर, जिन
लोगों ने
एग्रीमेंट किये
हैं और जिन
लोगों ने उस
एग्रीमेंट की
वजह से राजस्थान
के हितों को
अलग से रखकर
रखा है, उनको
इसके ऊपर जवाब
देना चाहिए कि
8एम ए एफ पानी
हमको मिल रहा
है, 0.6 एम ए एफ कहां चला
गया, उसके
बारे में ये
भी तो जवाब
दें, ऐसे लोग
बतायें।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
अध्यक्ष
महोदय, पंजाब
के मुख्य
मंत्री
प्रकाशसिंहजी
बादल ने जो स्टेटमेंट
दिया और उस पर
जो चिन्ता
मुख्य
मंत्रीजी ने
यहां पर प्रकट
की, हम उनसे
सहमत हैं।
मेरा प्रश्न
केवल यह है कि
यह जो हाउस है
सबसे पहले
उसकी प्रतिक्रिया
यहां होनी
चाहिए। एक बात
और मैं आपसे
कहना चाहूंगा
कि यदि उनका
जो स्टेटमेंट
अखबारों में
छपा है, क्या
स्टेटमेंट
दिया है पता
नहीं, जो
अखबारों में
छपा है उसमें
राइपेरियन थ्योरी
आफ
डिस्ट्रिब्यूशन
आफ वाटर का
रेफरेंस दिया
है, जिसको कि
पानी के बंटवारे
के वक्त में
कई कमीशंस
बने, गुलाटी
कमीशन बना, कई
कमीशन बने,
इण्डस वाटर
ट्रीटी
एग्रीमेंट
हुआ, 1960 का। और
उसमें साफ
बताया गया,
हिन्दुस्तान
और पाकिस्तान
के बंटवारे के
बारे में, जो
तीन नदियां हमारे
हिस्से में
आयी थीं, रावी,
व्यास और
सतलज, उन
तीनों नदियों
के पानी को एक
समय-सीमा के
अन्दर हमको
अपने देश में
उपयोग करने के
लिये इंतजाम
करना चाहिए।
वह इंतजाम
करने के लिये
अगर राइपेरियन
थ्योरी की
बात हम करते
हैं तो मैं
समझता हूं कि
वह उपयोग नहीं
हो सकता है।
इसलिये
कमीशंस ने और
जब भी
एग्रीमेंट्स
हुए, उसमें यह
माना कि राजस्थान
भी इण्डस
बेसिन का एक
पार्ट है और यहां
पर, चूंकि
जमीन पर लेवल
परमिट करते
हैं इसलिये इस
पानी को राजस्थान
को डाइवर्ट
करके और राजस्थान
की सूखी धरती
पर पानी
पहुंचाया
जाना चाहिए।
और उसका परिणाम
यह है कि यहां
इन्दिरा
गांधी कैनाल
और दूसरे बाँध
बने ओर पानी
हमारे यहां
आया। इसलिये
राइपेरियन थ्योरी
की जो बात उन्होंने
कही है,
टेलीफोन पर
आपने, मोटे
तौर पर उन्होने
कह दिया कि
आपके हितों पर
मैं
कुठाराघात नहीं
होने दूंगा,
यह तो कई बार
कहा जा सकता
है, यह जबानी
कहा है, स्टेटमेंट
के तौर पर
उसको ...।
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री): एक
मिनट, मैं
इतना ही कहना
चाहूंगी,
जबानी ही नहीं
सुना है हमने।
हमने उसके
साथ-साथ एप्लीकेशन
भी लगाने की
तैयारी कर दी
है। हम जबानी
नहीं कर रहे
हैं इसको। और
मैं खाली आपको
इसमें यह
बताना चाहती
हूं, आदरणीय
माथुर साहब कि
इसमें अगर आप
अपने
मेनिफेस्टो
को देख लें, एक
मिनट के लिये,
अपने पंजाब
वाले
मेनिफेस्टो
के पेज 10 के ऊपर
अगर आप इतना
ही देख लें तो
उसमें आपने यह
लिखा है कि – “On January 13, 2003, Punjab Government has
filed a complaint u/s 3 of the Inter-State Water Disputes Act…” और
इसके अन्दर you have said that you want to get away from
the relief of constructing the canals and everything else that goes with it.
And our government has passed the historic Punjab Termination Act, 2004. यह
तो लिखा हुआ
है इनका घोषणा
पत्र। इस
घोषणा पत्र के
तहत हम सब लोग
कोर्ट में
गये, कोर्ट में
हम ही नहीं
गये,
प्रेसीडेंशियल
रेफरेंस हुआ कोर्ट
के अन्दर और
मैं यह खाली
करना चाहती
हूं कि अपन उस
मामले में
आयें ना कि
राजस्थान के
हितों के ऊपर
हम कुठाराघात
नहीं होने
देंगे। यह
हमने पहले भी
किया है, आज भी
हम लोग कायम
हैं।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
मैं यह नहीं
कह रहा हूं कि
आप राजस्थान
के हितों पर
कुठाराघात
होने देंगी।
मैं यह नहीं
कह रहा हूं।
इसमें हम सब
एक हैं और एक
सम्पूर्ण
सकंल्प
पारित भी किया
हुआ है। एक
एक्ट भी हमने
उस प्रकार का
बनाया हुआ है।
वह एक बहुत
महत्वपूर्ण
बात है जिसको
कोई डिनाइ
नहीं करता है।
मैं तो अख़बार
में जो उन्होंने
राइपेरियन थ्योरी
आफ डिस्ट्रीब्यूशन
आफ वाटर की जो
बात कही है, उस
पर एक सीधी प्रतिक्रिया
ढंग से आपको
देनी चाहिए थी,
एक बात तो यह
मैं कहना
चाहता हूं।
दूसरी
बात, आपके वक्तव्य
में भी, आपने
अन्तिम जो
वाक्य कहे और
शायद महावीर
प्रसादजी ने
भी बहुत उत्पीड़न
ढंग से उसको
कहा। मैं कहना
चाहता हूं कि 1981
में जो
एग्रीमेंट किया,
तीन
गवर्नमेंट्स
ने, उस समय एक
मिलियन एकड़
फुट पानी हमको
मिलता था और
वह 25 साल की जो
फ्लो सीरिज थी
उसके बेसिस पर
हमने कहा कि
अब 40 साल की
फ्लो सीरिज पर
आप पानी का बंटवारा
कीजिये। तो 40
साल की फ्लो
सीरिज पर जब
हिसाब लगाया
गया तो राजस्थान
के हिस्से
में 8.6 एम ए एफ
आया लेकिन उस
वक्त हमारे
पास उस पानी को
लेने की
क्षमता नहीं
थी तो इसलिये
कांशस
डिसीजन था।(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): घुटने
टेक दिये
आपने।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
सांवरलालजी,
आप कुछ भी कह
सकते हैं,
सांवरलालजी
आप मुझे देशद्रोही
भी कह सकते
हैं। सब कुछ
कह सकते हैं।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
मैंने नहीं
कहा।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
नहीं, कहा है।
महावीर
प्रसादजी ने
कहा है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैंने
देशद्रोही
नहीं कहा।
मैंने कहा
राजस्थान के
हितों को यदि
किसी ने गिरवी
रखा है तो वह
शिवचरणजी
माथुर ने रखा
है। वह 81 के अन्दर
जो समझौता
किया..।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
मैंने कोई
गिरवी नहीं
रखा, बिलकुल
गलत बात है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य सचेतक):
वह 81 के अन्दर
जो समझौता
किया, घुटने
टेक दिये उस
समय। राजस्थान
विधान सभा में
मांग करते
रहे, आपने
उसमें जवाब तक
नहीं दिया।
उसमें सदस्य
था। मैंने
देखा, आपने
बोलने तक नहीं
दिया। आपने
कोई जवाब नहीं
दिया। उस समय
आपके मुंह से
यह नहीं निकला
कि हम राजस्थान
के हितों की
रक्षा
करेंगे।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
मैं उस बात को,
क्या जवाब
नहीं दिया, क्या
जवाब नहीं
दिया, क्या
जवाब नहीं
दिया।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपने
उस समय यह
नहीं कहा कि 0.6 एम
ए एफ पानी को
हम किसी
प्रकार से ....।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
आप एग्रीमेंट
पढ़ लीजिये 81
का।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
प्रोसीडिंग्स
लाकर पढ़ाता
हूं आपको।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
महावीर प्रसादजी,
अगर आप तथ्यों
को जानना
चाहते हैं, 81 का
एग्रीमेंट
पढ़ लीजिये,
एक-एक उसमें..।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
माथुर साहब,
माफ करना, क्यों
पत्ते खोल
रहे हो। उस
समय आपकी
कुर्सी के
पाये हिल रहे
थे इसलिये
राजस्थान का
0.6 एम ए
एफ पानी आप
छोड़कर आ
गये।
आज राजस्थान
की जनता
गांव-गांव
में आपको कोस
रही है।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
कोई हमारी
कुर्सी नहीं
हिल रही थी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): गांव-गांव
में कोस रहे
हैं, 1981 में जो
कुछ आपने किया
है।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
दरबारासिंहजी
हमारी पार्टी
के मुख्यमंत्री
पंजाब में थे।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप कुर्सी के
पायों की बात
मत करो। आप पानी
की बात करो।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
इस तरह
की बात कहना
मैं समझता हूं
कि तथ्यों को
मुकरना है और
खास तौर से आप
यदि जिम्मेदार
व्यक्ति,
बगैर चीजों को
देखे हुए,
बेक-ग्राउण्ड
को समझे हुए,
एक जो आपने
बात कह दी,
मुझे महावीर
प्रसादजी कही
बात पर, उनकी
तो आदत है और
मैं समझता
हूं, लेकिन आप
यदि ऐसी बात
कहेंगी।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): मैं
सदन में था। सदन
में बहस हुई थी,
सदन में यह
बात तय हो गयी
थी फिर 0.6 एम ए एफ
पानी की आपने
बिल चढ़ाई। इस
बात को राजस्थान
की जनता कभी
भी नहीं भूल
सकती है, न
आपको माफ कर
सकती है।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
इसका तो एक ही
उपाय है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह जो
अलोकेशन आपने
किया, यह आप
पढि़ये।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
सुन तो लो। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
जिसमें आपने
(व्यवधान)
जिसमें
भजनलालजी के,
शिवरचरणजी
माथुर के और
दरबारासिंहजी
के हस्ताक्षर
हैं।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप बीच-बीच
में ऐसे करेंगे
क्या। (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय,
बीच-बीच में
डिस्टर्ब
करेंगे क्या,
आप सुन लो
बात।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
आप चीफ व्हिप
हैं अपनी
पार्टी के।
तरीका यह होता
है कि एक
वयक्ति बोल
रहा है और अगर
वह यील्ड
नहीं करता है
तो आप उसको
डिस्टर्ब
नहीं कर सकते।
हमने तो इसको
फालो किया है,
लेकिन आगे
फालो नहीं
होता है तो
दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति है।
मैं जो बोल
रहा हूं, मेरे
बैठने के बाद
आप कुछ भी
कहिये, बात
समझ में आती है।
मैं आपको, यह
इतना महत्वपूर्ण
विषय है, अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे सिफारिश
करना चाहूंगा
कि आप इस पर
फुल लेंग्थ
डिबेट
रखियेगा। सन 81
के एग्रीमेंट
को भी इसमें
आप कीजिये।
मेरा निवेदन
है आपसे, 81 के
एग्रीमेंट पर
भी आप डिस्कशन
कीजिये।
श्री
अध्यक्ष:
हां, डिबेट आप
जब चाहें कर
लें, वह तो सदन
चाहेगा, कभी भी
कर ले, डिबेट
में क्या
दिक्कत है।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य सचेतक):
हमें दिक्कत
नहीं है।
हमारे सम्बन्ध
खराब नहीं
हों। (व्यवधान)
राजस्थान के
हितों पर सब
एक हैं। वैसे
तो डाकूमेंट हैं।
अध्यक्ष
महोदय,
डाकूमेंट हैं,
यह
डाकूमेंटरी
प्रूफ है।
श्री
अध्यक्ष: तो
उस वक्त इस
में। यदि यह
बहस करने को
तैयार हैं तो
आप जवाब देना।
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहस हो
चुकी है।
राजस्थान के
सदन में बहस
हो गयी और यह
तय हो गया था 0.6 एम
ए एफ पानी को
शिवचरणजी
माथुर और तत्कालीन
सरकार ने
छोड़ा। और
राजस्थान की
विधान सभा में
हमको बाहर
निकाल दिया।
बहस नहीं करने
दी, यह किया उस
समय उन्होंने।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): वह
एक्स्ट्रा
लिया था। (व्यवधान)
एक्स्ट्रा
लिया था पानी।
(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
भैरोंसिंहजी
के नेतृत्व
में गाड़ी में
बैठकर गये थे
दिल्ली आप। आप
क्या करके आ
गये थे। आपने
भी तो यह कहा
था, हम सुप्रीम
कोर्ट में
जाएंगे। मुख्य
मंत्रीजी तो
हाउस में नहीं
थीं। हम तो
हाउस में थे,
आपने
प्रोटेस्ट
किया था। आप
गये थे दिल्ली
में
भैरोंसिंहजी
के नेतृत्व
में, आपने कहा,
सुप्रीम
कोर्ट में
जाएंगे। क्यों
रुके सुप्रीम
कोर्ट में
जाने से।
किसने रोका।
(व्यवधान)
खाली बातें
करते हो।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हम
गये और हमने सबको
ज्ञापन दिया।
(व्यवधान)
सुप्रीम
कोर्ट में
सरकार जाती।
सुप्रीम
कोर्ट में
सरकार जाती,
सरकार को जाना
चाहिए था।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप सु्प्रीम
कोर्ट में
जाते। यदि
सरकार ने गलत
फैसला किया था
तो सुप्रीम
कोर्ट में
जाते। आप उस
समय सुप्रीम
कोर्ट में
नहीं गये।
बातें करना
चाहते हो आप।
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आज
सारा राजस्थान
जानता है कि सारे
जितने मामले
हैं.. (व्यवधान)
और कांग्रेस
पार्टी जिम्मेदार
है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप बिलकुल फैल
गये। आपने
जनता के साथ
धोखा किया।
आपने सुप्रीम
कोर्ट में
जाने के लिये
कहा और
सुप्रीम
कोर्ट में नहीं
गये। हम भी
सदस्य थे, हम
भी सदन में थे
उस समय। आप
लेकर गये थे
वहां पहले।
(व्यवधान) क्या
कर लिया था
आपने।
आपने अपना
धर्म निभाया
था क्या।
आपने जनता को
कहा था कि हम
सुप्रीम
कोर्ट में
जाएंगे। आपने
कहा सुप्रीम
कोर्ट में जाएंगे।
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हम
विपक्ष में थे
और हमने
विपक्ष की
भूमिका निभाई
थी। जहां तक
राजस्थान की
जनता का सवाल
है, आपको
कठघरे में
खड़ा करने का
काम हमने
किया। (व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपकी याददाश्त
कमजोर है।
आपने कहा
सुप्रीम
कोर्ट में
जाएंगे और
सुप्रीम
कोर्ट में
नहीं गये।
आपने जनता के साथ
धोखा किया और
खड़े होकर
भाषण दे रहे
हैं। (व्यवधान)
आप बातें कर
रहे हो यहां
खाम खां। (व्यवधान)
सुप्रीम
कोर्ट में
जाने की बात
करके गये थे।
और सुप्रीम
कोर्ट में गये
नहीं, भाषण दे रहे
हो। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): इराडी
कमीशन में
ज्ञापन दिया।
(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपने कहा था,
हम सुप्रीम
कोर्ट में
जाएंगे। सुप्रीम
कोर्ट में
नहीं गये। क्यों
नहीं गये
सुप्रीम
कोर्ट में। आप
जाते सुप्रीम
कोर्ट में, क्यों
नहीं गये
सुप्रीम
कोर्ट में।
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
श्रीमती
इन्दिरा
गांधी के
सामने इन्होंने
घुटने टेके।
घुटने टेके
राजस्थान
सरकार ने। (व्यवधान)
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
राजस्थान के
हितों के साथ
जिस प्रकार
कुठाराघात कांग्रेस
पार्टी ने
किया.. (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
राजस्थान के
हितों के साथ
जो कुठाराघात
किया, वह काला
अध्याय है
जिसको सालों
तक राजस्थान
पढ़ेगा।
Vps- usc-07032007-1300-1n
वह काला अध्याय है जिसको वर्षों तक राजस्थान पढ़ेगा। ... (व्यवधान)
डा. ओ. पी. महेन्द्रा (सरकारी उप मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कहना भी गलत होगा कि हमारे पास केपेसिटी नहीं थी। यह कहना गलत होगा कि हमारे पास केपेसिटी नहीं थी। हमारे पास केपेसिटी थी। 8.6 एम.ए.एफ पानी हम ले सकते थे। केपेसिटी थी हमारे पास। आप देख लीजिए। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, 13 फरवरी को पालिसी एण्ड प्रोग्राम प्रक्रिया जारी किया है। शिरोमणि अकाली दल ने और बी.जे.पी. की सरकार ने ... (व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कल्ला साहब, एक मिनट। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपका प्रश्न था ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): सांवरलालजी, मैं बोल लूं, उसके बादजवाब दे देना। ... (व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप बोल लेना। मैं तो आधा मिनट ले रहा हूं। मेरे बाद बोल लेना आप। मेरे बाद बोल लेना आप। प्लीज, मैं आधा मिनट ले रहा हूं।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मेरे बाद बोल लेना आप, प्लीज।
श्री अध्यक्ष: अब आप क्या चाहते हो? मुख्य मंत्रीजी ने दे दिया रिएक्शन, अब आप क्या चाहते हो? मुख्य मंत्रीजी ने अपना रिएक्शन दे दिया। अब आप क्या चाहते हो?
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं तो आधा मिनट ले रहा हूं। आप भाषण देंगे। मैं भाषण नहीं दूंगा। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं पहले कल्ला साहब खड़े हैं लेकिन मैं कल्ला साहब से कहना चाहूंगी कि आपकी डिमांड थी कि मुख्य मंत्रीजी ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। मुख्य मंत्रीजी अपना रिएक्शन दे दिया और कह दिया कि राजस्थान के हितों का पूरा संरक्षण करेंगे और राजस्थान के हितों पर कुठाराघात नहीं होने देंगे और क्या बताएंगे आप?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, उसी पर सप्लीमैंट्री कर रहा हूं। उसी पर सप्लीमैंट्री कर रहा हूं।
श्री अध्यक्ष: हां, अब आप और क्या बताएंगे?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं बता रहा हूं। आप विराजिये, एक मिनट।
श्री अध्यक्ष: नहीं मैं तो बैठ जाऊंगी। दो मिनट में ही आप अपनी बात कह दीजिए। दो मिनट में। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं संक्षेप में बताऊंगा। हां, दो मिनट में।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान पालिसी प्रोग्राम जो 13 फरवरी को पंजाब में जारी हुआ था, उसकी कुछ लाइनें पढ़कर सुनाता हूं। रिवर वाटर इश्यू, इसमें यह लिखा हुआ है – “On the river water issue …”
श्री अध्यक्ष: प्लीज, अगेन आप, दुबारा से, कब हुआ यह?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह पालिसी प्रोग्राम 13 फरवरी, 2007 को जारी किया था।
श्री अध्यक्ष: 2000, सन् कौनसा?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): 2007 है।
श्री अध्यक्ष: 2007, 13 फरवरी, 2007 ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह चुनाव से पहले जारी हुआ था, इसमें लिखा था – “On the river water issue, the Shiromani Akali Dal has always demanded the implementation of the nationally and internationally accepted riparian principle.” और उसके बाद आगे के पेज में यह लिखा हुआ है – “This clause strikes at the very root of the riparian principle completely contradicting the Punjab’s stand i.e. Haryana and Rajasthan are non riparian States. They have no right to have share in Punjab’s river waters. The SAD-BJP government will take political, legal and constitutional steps to redress the grievous wrong done to the people of the State.” इसी में माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने साफ ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट राइपेरियन को थोड़े ही मान रहा है यह स्टेट वाले कह रहे हैं न ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): स्टेट वाले कह रहे हैं। इन्होंने कहा है कि हमारी गवर्नमैंट आएगी तो हम धारा 5 को, मुख्य मंत्रीजी ने ... (व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्य मंत्रीजी भाषण देने गयी हैं यहां। प्रचार करने गयी हैं इनके लिए ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह राइपेरियन थ्योरी है क्या?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मुख्य मंत्रीजी ने अभी टर्मिनेशन आफ एग्रीमैंट बिल, ... (व्यवधान) 12 जुलाई, 2004 का जिक्र किया है। उसमें यह धारा 3 और 4 का जिक्र किया है लेकिन 5 में यह कहा गया है कि राजस्थान को जो पानी मिल रहा है वह मिलता रहेगा। उन्होंने तो केवल पाइंट 6 मिलियन एकड फिट पर कुदृष्टि डाली थी। उसमें हम सब लोगों ने साथ दिया और हमने इनसे कहा कि कोई बिल भी लेकर आये लेकिन राजस्थान की विधान सभा ने एक मत होकर यह कहा था कि आपको हम प्रशासनिक, विधिक, कोई भी कार्यवाही आप करें, आपको अधिकृत करते हैं लेकिन अफसोस है कि आप शिरोमणि अकाली दल और बी.जे.पी. की वहां पर पॉलिसी प्रोग्राम बनता है और वे कहते हैं कि हम राजस्थान में इस धारा 5 में भी टर्मिनेट कर देंगे। खतम कर देंगे। राजस्थान को एक बूंद पानी नहीं देंगे। उसके प्रचार के लिए आप जाती हैं और 3 दिन से हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, सभी अखबारों में यह छप रहा है कि बादल साहब कह रहे हैं कि मैं धारा 5 को हटाऊंगा और प्रिवियस गवर्नमैंट, जो केन्द्र की कांग्रेस रही है और पंजाब की कांग्रेस की गवर्नमैंट ने राजस्थान को पानी दिया है, उस पानी के हक को हम नहीं मानते हैं। ... (व्यवधान)
श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हम इसको नॉन राइपेरियन स्टेट मानते हुए पंजाब जो है वह राजस्थान को और हरियाणा को पानी नहीं देगा और उसके बाद आप चुप बैठी रहे? मैं जानना चाहता हूं कि आप इस पॉलिसी प्रोग्राम को बड़ा ... (व्यवधान)
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मेरे दो प्रश्न हैं। दो प्रशनों का जवाब दे दें। एक मिनट। विराजिये, पूरा तो कर लूं। Let me complete first.
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, एक मिनट। क्या आपने ... (व्यवधान) मेरे को पूरा कर लेने दो। ... (व्यवधान)
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसे नहीं चलेगा।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): क्या आप राजस्थान के हितों के खिलाफ पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और आपकी बी.जे.पी. की सरकार ने वहां पर संकल्प लिया था कि ... (व्यवधान)
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): आप मर्जी आये जो कहते रहे, यह चलेगा नहीं। ऐसे नहीं चलेगा। माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): 000
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): आपको जो कहना है, खड़े होकर ऐसे नहीं कह सकते। नहीं, बिलकुल नहीं कह सकते। जितना कुछ ज्यादा ... (व्यवधान) जो कांग्रेस पार्टी ने किया है वह तो ... (व्यवधान) ऐसे नहीं कह सकते। कहां से आप कह रहे हैं यह? खाली लंग्स से बात मनवाना चाहते हैं। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): 000
श्री अध्यक्ष: अब आप विराजिये, सदन की नेता खड़ी हैं। अब आप विराज जाएं, सदन की नेता खड़ी है।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): लीडर आफ हाउस खड़ी हैं। ... (व्यवधान)
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, हाउस अगर यह सोचे, माननीय सदस्य अगर यह सोचें कि सिर्फ लंग्स पावर से हम राजस्थान में अपनी बात मनवा लेंगे तो यह तो काम नहीं होगा। मैं तो यह क्लियरली कहना चाहती हूं कि जो लाइन ली गयी है वह राजस्थान की जनता से कोई छिपी तो नहीं है। कोई नयी बात नहीं आयी है इनके सामने। आपने जो रस्ता लिया है वह सबके सामने है, कहां आपने पाइंट 6 एम.ए.एफ छोड़ा? कहां आपने कैसे एग्रीमैंट्स किये, वह सब हिस्ट्री है और वह सबके सामने है तो कौन गया चुनाव में, कौन नहीं गया चुनाव में, उससे आप कोई अप-टर्न करने वाले नहीं हो क्योंकि हम लोग जो बातें करते हैं वह एक्चुअली करके दिखाते हैं। हमने अगर पानी लाया तो जिस तरीके से पानी इन तीन सालों में पूरे क्षेत्र के अन्दर लगा है वह पिछले सालों में नहीं लगा है। मैं छाती ठोककर कह सकती हूं और वह जब आपने टर्मिनेशन आफ एग्रीमैंट और क्या-क्या किया वह सब करने के बावजूद हम लोगों ने लाकर यह दिया है और मैं यह कह सकती हूं आपको कि जो स्टेप्स लेने की जरूरत है वह स्टेप्स हमने लिये हैं। वह स्टेप्स हम लेंगे और यहां राजनीति करने से राजस्थान की जनता को आप बरगला नहीं सकेंगे। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): 000
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): 000
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको उस एग्रीमैंट की कुछ लाइने पढ़कर सुनाना चाहता हूं “Until such time as Rajasthan is in a position to utilise its full share Punjab shall be free to utilise the waters supplied to Rajasthan’s requirements ..” (interruptions) ..
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): 000
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): यह अपन ने जो समझौता किया है, उसकी लाइनें हैं ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): 000
श्री अध्यक्ष: गृह मंत्रीजी खड़े हैं। गृह मंत्रीजी।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अफसोस है कि पाइंट 6 एम.ए.एफ ... (व्यवधान) 1981 के समझौते को हमने यहां हाउस में घंटों डिस्कस किया था और आपने उस समय जो पाइंट 6 एम.ए.एफ छोड़कर आये, उसी दिन से यह सब राजस्थान का अहित प्रारम्भ हुआ है। यह सच है। ... (व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): यह बिलकुल गलत है, बिलकुल गलत है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): अपने इस हाउस में घंटों तक इस विषय पर डिस्कशन हुआ है। घंटों तक हमने, आपके इस विषय को कि आपने इंदिरा गांधी के प्रेसर के आगे झुक कर आज आप स्वीकार करके आये और हमारा हित छोड़ा है आपने और आज आप बड़े हिमायती बन गये। गलती आपने की और उस गलती का दण्ड हमारे माथे लगा रहे हो। आपने जिस प्रकार से गलती की है, राजस्थान 1981 के समझौते के कारण से ... (व्यवधान) राजस्थान धधक रहा है और राजस्थान के खेत जल रहे हैं। ... (व्यवधान) अगर उसी दिन आप इंदिरा के सामने अपने घुटने नहीं टेकते तो राजस्थान को इस स्थिति से बचाया जा सकता था। ... (व्यवधान) केवल राजनीतिक दबाव के कारण से आपने पाइंट 6 एम.ए.एफ पानी ... (व्यवधान) हमने हाउस में भैरोंसिंहजी के नेतृत्व में घंटों तक इस विषय पर चर्चा की थी कि आपने राजस्थान की बलि दे दी। उसके बारे में तो आपने उस समय कोई स्टेप नहीं उठाये और आज जब आप बड़े ... (व्यवधान) हमदर्द बनते हो, राजस्थान के। अपने हाथों से राजस्थान की बलि चढ़ाकर आये हैं ... (व्यवधान) आज आप क्या कह रहे हैं ... (व्यवधान) लेकिन यह भी बात सच है कि इस पाप के ... (व्यवधान) आपने प्रेसर में आकर यह समझौता किया। राजस्थान आज तक भुगत रहा है। घंटों तक आपसे इस विषय पर चर्चा की थी। भैरोंसिंहजी ने यहां बैठकर जैसे ही समझौता करके आप लोटे थे, तब भैरोंसिंहजी ने कहा कि केवल इंदिरा को खुश करने के लिए, राजगद्दी बचाये रखने के लिए पाइंट 6 एम.ए.एफ. पानी राजस्थान को ... (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष महोदय, वह सारी प्रोसीडिंग्स निकाली जाए। उस दिन की प्रोसीडिंग्स में सब लिखा है। सब माननीय सदस्यों को वितरित की जाए वह। हर मैम्बर इस बारे में सोचेगा कि वास्तव में चर्चा क्या हुई थी ताकि बेनकाब हो सके। क्या आप ... (व्यवधान) मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि उस दिन की चर्चा ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): उस दिन की चर्चा जो 1981 में समझौते के बाद जो चर्चा हाउस में हुई थी उसकी प्रोसीडिंग्स निकाल कर सभी माननीय सदस्यों को दी जाए।
शिव/चौहान/13.10/1o/7.3.2007(1)
कि 81 के
समझौते पर इस
सदन में क्या
चर्चा हुई थी
और उसका कौन
दोषी था, उसका
सही पता लगेगा
आपको। ..(व्यवधान)...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): मैं
मांग करता हूं
81 के बाद में इस
पर जितनी बहस
हुई है ..(व्यवधान)...
एक मिनट, मेरे
पर सीधी बात
कही गयी है। ..(व्यवधान)...
मेरे पर
आक्षेप लगाया
गया है ..(व्यवधान)...
मुझे अधिकार
है..(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): माथुर
साहब, आप एक
मिनट
बिराजें। ..(व्यवधान)...
आप दोनों की
बातों का ही
जवाब ..(व्यवधान)...
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा): To keep the record straight कि
कांग्रेस ने
इस पानी को
लेकर इस राजस्थान
के हितों पर
कुठाराघात
किया है और
वसुन्धरा
राजे की सरकार
ने, भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार ने
पिछले तीन साल
में अथक
प्रयास करके
..(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यहां
के संकल्प का
मजाक उड़ाया
है। इस सदन
में जो संकल्प
पारित कर
दिया, मुख्य
मंत्रीजी को
अधिकृत कर
दिया उसके बाद
पंजाब जाकर
उनके लिये वोट
मांगना, इस
सदन का अपमान
है। ..(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
सारा
मामला..(व्यवधान)...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): मेरी
बात कहने का
मुझे अधिकार
है। ..(व्यवधान)...
मेरी बात कहने
का मुझे
अधिकार है।
..(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): आपको
अधिकार है, पर सरकार
का जवाब सुनने
की सहन शक्ति
भी आपके पास
होनी चाहिये।
..(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): थोड़ा
वरिष्ठता का
तो ध्यान
रखो। ..(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): केवल
अधिकार ही
नहीं, अपनी
जिम्मेदारी
और दायित्व
भी बनता है।
..(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
थोड़ा ध्यान
रखो, कामनसेंस
एप्लाई करो।
यह तरीका नहीं
है। ..(व्यवधान)...
आप थोड़ा
वरिष्ठता का
ध्यान रखो।
..(व्यवधान)...
सीनियर मैम्बर
खड़े हैं। ऐज
की दृष्टि से, सभी
दृष्टि से
सीनियर हैं
।..(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य
: वह तो बोल रहे
हैं, आप क्यों
खड़े हैं ? ..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
पहले माथुर
साहब को कह
लेने दीजिये
।..(व्यवधान)...
पूर्व मुख्य
मंत्री बोल
रहे हैं। ..(व्यवधान)...
पूर्व मुख्य
मंत्री बोल
रहे हैं, सुन
लो इनको। ..(व्यवधान)...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): 26
साल उस समझौते
को हो गये और
उसमें बहुत बहस
हुई है। मैं
कटारिया जी से
चाहूंगा उस
सारी बहस को
यहां पर देख
लें। इस पर
फुल-डे डिबेट
रख लीजिये।
..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
बोलने दें उन्हें।
आपको भी मौका
मिलेगा इनके
बाद। ..(व्यवधान)...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
एक बात,
सीरियस चार्ज
कटारिया जी ने
लगाया और खास
तौर से मुख्य
मंत्रीजी ने
लगाया है। मैं
कहना चाहूंगा
आपने कहा 81 के
बाद कई बार
बहस हुई । उन
सब बहस के आधार
पर एक लम्बी
चर्चा यहां पर
रख लीजियेगा।
26 साल उस
एग्रीमेंट को
हो गये It has stood the test of time. और
उसके बाद 81 के
बाद दो बार दस
साल तो हमारी
गवर्नमेंट
उसके बाद आई
है उसके बाद
फिर गवर्नमेंट
आई है। लेकिन
जिस प्रकार का
चार्ज यहां पर
लगाया गया,
खास तौर से
मुख्य मंत्रीजी
ने कहा है।
मैं चाहूंगा
कि आप पूरे
दिन की बहस इस
पर रखियेयगा
ताकि सब बात
साफ हो सके।
यहां पर यह
बात कहना कहां
तक उचित है। 8.06
की बात कही
गयी है । ..(व्यवधान)...
मैं तो कम से
कम इसको बहुत
हर्ट फील करता
हूं। आपसे
निवेदन
करूंगा इस
पाइंट पर हमें
यहां नहीं
बैठना
चाहिये। ..(व्यवधान)...
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, आपकी
परमिशन हो तो
मैं बोल लूं।
..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
हां, आप भी बोल
लीजिये। ..(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, जिस
तरह से संकल्प
की धज्जियां राजस्थान
के मुख्य
मंत्री ने
पंजाब जाकर
भारतीय जनता
पार्टी और
अकाली दल ..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो। ..(व्यवधान)...
(घोर
व्यवधान व
प्रतिपक्ष
द्वारा नारेबाजी)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
लक्ष्मी
नारायण दवे : 000
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
श्री
मदन दिलावर : 000
श्री
अमराराम(धोद): 000
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : 000
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी : 000
डॉ0
बुलाकीदास
कल्ला : 000
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया : 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : 000
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
मदन दिलावर : 000
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा
: 000
श्री
कनकमल कटारा : 000
श्री
अमराराम : 000
श्री
मदन राठौड़ : 000
श्री
श्रवण कुमार : 000
श्री
अध्यक्ष :
माननीय सदस्यगण,
..(व्यवधान)...
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यगण,
आप हाउस को
चलाना चाहते
हैं कि नहीं ?
..(व्यवधान)...
(
प्रतिपक्ष के
सदस्यों
द्वारा
नारेबाजी )
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया : 000
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
अध्यक्ष :
माननीय सदस्यगण,
..(व्यवधान)...
सत्ता पक्ष
के माननीय
सदस्यगण , ..(व्यवधान)...
माननीय गृह
मंत्रीजी, आप
ज्यादा उत्तेजित
नहीं हों। ..(व्यवधान)...
माननीय गृह
मंत्रीजी, ज्यादा
उत्तेजित
नहीं होवें।
..(व्यवधान)... क्या
प्रतिपक्ष का
इरादा सदन को
चलाने का नहीं
हैं ? ..(व्यवधान)...
क्या
प्रतिपक्ष का
इरादा सदन को
चलाने का नहीं
है ? ..(व्यवधान)...
डॉ;
बुलाकीदास कल्ला
: 000
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
अमराराम : 000
श्री
अध्यक्ष:
नेता
प्रतिपक्ष,
मैं आपसे पूछ
रही हूं क्या
आपका इरादा
सदन को आगे
चलने देने का
नहीं है ? प्लीज,
सिट डाउन । ..(व्यवधान)...
श्री
अमराराम : 000
श्री
अध्यक्ष :
आपका इरादा
सदन को चलाने
का है ? ..(व्यवधान)...
क्या आपका
इरादा है कि
सदन चले ? ..(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
अध्यक्ष:
आपके नेता
खड़े हैं और
आप सब लोग
खड़े हैं। प्लीज
सिट डाउन।..(व्यवधान)...
नेता
प्रतिपक्ष,
..(व्यवधान)...
नेता नहीं
मानते क्या
इनको ? डरा
दिया
सी.पी.जोशी ने
और नेता बैठ
गये।
सदन की
कार्यवाही 2.00
बजे तक के
लिये स्थगित
की जाती है।
(तत्पश्चात्
सदन की बैठक 13.18
बजे 14.00 बजे तक के
लिये स्थगित
हुई।)
msr/usc/2c/1400/07032007
(पुन:
समवेत होने
पर)
(14.00
बजे)
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
विभिन्न
विषयों पर
विचार
पंजाब
एवं राजस्थान
के मध्य
जल-बंटवारा
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जिंदाबाद,
जिंदाबाद, आइये।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: मैं
चाहती हूं।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आपकी अध्यक्षता
में जो संकल्प
पारित कर के
मुख्यमंत्री,
राजस्थान को
अधिकृत किया
था कि राजस्थान
की जनता के
पानी के लिए
आपको वैधानिक
और एग्जिक्युटिव,
सारी पावर दी
जाती है और उस
मुख्यमंत्री
की मौजूदगी
में पंजाब के
मुख्यमंत्री
शपथ समारोह
में कहते हैं
राजस्थान को
पानी नहीं
देंगे और मुख्यमंत्री
वहां चुप बैठी
रहें, यह सदन
के संकल्प का
विरोध है,
अपमान है ...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से प्रतिपक्ष
के माननीय
सदस्यों से
निवेदन करना
चाहता हूं ...(व्यवधान)...
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप
लोग किसी
मुद्दे को
रखते हो तो
उसका जवाब सुनने
का माद्दा भी
रखिये अपने आप
में। ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
संकल्प जो
सदन ने पारित
किया उसका
अपमान मुख्यमंत्री
ने किया है।
...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मुख्यमंत्रीजी
ने सारी
स्थिति स्पष्ट
कर दी। ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मुख्यमंत्रीजी
की मौजूदगी
में राजस्थान
को पानी नहीं
देने की बात
...(व्यवधान)... और
मुख्यमंत्री
वहां कुछ नहीं
बोलें।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान को
पानी नहीं
देने की बात,
यह फोटो छप
रही है सोनिया
गांधी की। ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह इस
सदन के संकल्प
का अपमान है।
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सोनिया
गांधी की फोटो
देखो। यह
प्रधानमंत्री
की फोटो, यह
प्रधानमंत्री
क्या कह रहे
हैं आपके?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): यह
सोनिया और
मनमोहन
सिंहजी की
फोटो, इसको
सुन लीजिए और
इसमें से पढ़
कर मैं सुनाता
हूं ...(व्यवधान)...
इसको पढि़ये,
इसको,
थोड़ी-बहुत
नैतिकता
रखिये, राजस्थान
की जनता को
जवाब देना पड़ेगा,
केवल बातें
करने से कुछ
नहीं होगा, जो
हकीकत है उसको
सुनिये आप।
...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
संकल्प का
अपमान है,
संकल्प के
विरुद्ध में
इस सरकार की
मुख्यमंत्री
ने काम किया
है। ...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): जिस
पार्टी का चुनाव
प्रचार करने
प्रधानमंत्री
और कांग्रेस की
राष्ट्रीय
अध्यक्ष,
सोनिया गांधी
गयी हैं उसका
आप छुटभैया मेरी
बात सुनिये,
आप इसको
पढ़ें, आप देख
लीजिए ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
इसको पढ़ के
देखो, यह कहते
हैं “Haryana and
Rajasthan are not Riperian States. They are…..” (Interruptions)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): ……Punjab Agreement Act, 2004 on July 1, (Interruptions)
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 000
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): 000
(
कांग्रेस के
माननीय सदस्यों
द्वारा
नारेबाजी )
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 000
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): 000
( व्यवस्था
सूचक घण्टी )
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
धर्मेन्द्र
कुमार मोची
(टिब्बी): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
श्री
लालचन्द
कटारिया
(आमेर): 000
(
कांग्रेस के
माननीय सदस्यों
द्वारा
लगातार
नारेबाजी )
(
भारतीय जनता
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा
नारेबाजी )
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण।
माननीय सदस्यगण।
आपसे जनता को
बहुत
अपेक्षाएं
हैं, आपको
जनता ने अपनी
आवाज उठाने के
लिए और जन
समस्याओं के
निराकरण के
लिए भेजा था।
(
माननीय सदस्यों
द्वारा
लगातार
नारेबाजी )
आप
जब से सत्र
शुरू हुआ है
तब से इसी प्रकार
हाय-हाय लगा
रहे हैं। जनता
देख रही है और
सुन रही है।
आप राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर
सरकार को
कटघरे में नहीं
खड़ा करना
चाहते? क्या
आपके पास
बोलने के लिए
कुछ नहीं है
कि आप इस तरीके
से नारे लगा
रहे हैं?
आपको
चाहिए
सकारात्मक
बहस करें। आप
सकारात्मक बहस
करें ताकि
समस्याओं का
निराकरण हो
सके।
यदि
आप सदन नहीं
चलाना चाहते
हैं तो सदन की
कार्यवाही
तीन बजे तक के
लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 14.06
बजे, 15.00 बजे तक
के लिए स्थगित
हुई)
Ars/usc/1500/2j/07032007/1
(1500
बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष: विपक्ष
की मंशा नहीं
दिखती है चलाने
की । सदन की
कार्यवाही
आधे घंटे के
लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 15.00
बजे 15.30 बजे तक के
लिए स्थगित
हुई।)
vns/usc/15.30/2m/7.3.2007
(15.30
बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
निलम्बन
निरस्तीकरण
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा के
निलम्बन की
समाप्ति
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
प्रक्रिया के
नियम 292(2) के अन्तर्गत
प्रस्ताव।
माननीय
महोदय, दिनांक
1 मार्च, 2007 को
सदन द्वारा
प्रस्ताव
पारित किया
गया जिसमें
श्री रणवीर
सिंह (गुढ़ा),
सदस्य, राजस्थान
विधान सभा को
आसन के
निर्देशों की
लगातार अवहेलना
करने, महामहिम
राज्यपाल के
संवैधानिक पद
की मर्यादाओं
एवं इस सदन की
स्वस्थ
परम्पराओं
का उल्लंघन
करते हुए
लगातार हो-हल्ला,
नारेबाजी एवं
अमर्यादित
आचरण करने के
कारण वर्तमान
सत्र की शेष
अवधि के लिये
निलम्बित किया
गया था।
राजस्थान
विधान सभा की
उच्च और
गौरवशाली
संसदीय परम्पराएं
रही हैं।
लेकिन
महामहिम राज्यपाल
के बजट
अभिभाषण के
समय सदन में
जो कुछ हुआ उससे
महामहिम राज्यपाल,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सदन के
नेता सहित सम्पूर्ण
सदन के सदस्य
काफी आहत हुए
हैं। पक्ष और
विपक्ष के मध्य
सौहार्द्रपूर्ण
वातावरण बना
रहे, यह सदन जन आकांक्षाओं
के अनुरूप
कार्य करे और
इस सदन की गौरवशाली
परम्पराएं
अक्षुण्ण
बनी रहें इस
हेतु मैं
प्रस्ताव
प्रस्तुत
करता हूं कि
माननीय सदस्य
श्री रणवीर
सिंह गुढ़ा
द्वारा खेद व्यक्त
करने पर उनका
निलम्बन
प्रक्रिया के
नियम 292(2) के परन्तुक
के अन्तर्गत
अब तक के
निलम्बन को
पर्याप्त
मानते हुए सदन
द्वारा यह
संकल्प किये
जाने के बाद
तत्काल
प्रभाव से
समाप्त किया
जाय।
श्री
अध्यक्ष:
गुढ़ा को
बुलाया जाय इस
सदन में।
गुढ़ा सदन में
आएं।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुख्य
सचेतक महोदय
जो प्रस्ताव
लेकर आये हैं
और वह प्रस्ताव
जो 5 तारीख को
लेकर आये थे
उससे एक शब्द
मैं समझता हूं
भिन्न रूप से
आपने रखा है।
उसमें खेद का
नहीं था, अफसोस
का था तो
अफसोस होना
चाहिये।
श्री
अध्यक्ष: खेद
और अफसोस में
कोई अंतर है
क्या ? खेद और
अफसोस में कोई
अंतर है ? खेद
का मतलब भी
वही है। अफसोस
का मतलब भी
वही है।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब
चारों के लिये
यह बात आयी थी
तो अफसोस उसमें
ही रखा था।
श्री
अध्यक्ष: खेद
और अफसोस
दानों एक ही
बात हैं। खेद
में, अफसोस
में कोई अंतर
नहीं है।
माननीय गुढ़ा।
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा (गुढ़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राज्यपाल
के अभिभाषण के
दौरान जो भी
घटनाक्रम हुआ
उसके लिये सदन
के नेता ने,
प्रतिपक्ष के
नेता ने और
हमारे
अमराराम जी
(धोद), सुरेश जी मीणा,
मुरारी जी ने
जो अपने विचार
प्रकट किये थे
मैं उससे सहमत
हूं।
श्री
अध्यक्ष: यह
क्या हुआ ? यह
क्या बात हुई
? आपको अपने
कृत्य पर काई
अफसोस नहीं है
?
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा (गुढ़ा):
पूरे सदन को
ही अफसोस है।
मुझे भी अफसोस
है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि सरकारी
मुख्य सचेतक
महोदय ने जो
प्रस्ताव
प्रस्तुत
किया है, उसे
स्वीकार
किया जाय ?
(स्वीकृत)
प्रस्ताव
स्वीकार
किया गया।
अब मैं
आज के जीरो
आवर के स्थगन
प्रस्ताव,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
चर्चा और परची
के माध्यम से
उठाये जाने
वाले जो विषय
थे उनको कल के
लिये, चूंकि
राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर
प्रतिपक्ष भी
अपनी बात रखना
चाहेगा, सत्ता
पक्ष के लोग
भी कुछ बोलना
चाहेंगे और ज्यादा
से ज्यादा 5.30
बजे का कह रही
हैं मुख्यमंत्री
जी लेकिन 6.00 बजे
से अधिक देर
से नहीं। उन्हें
आगे भी तैयारी
करनी है बजट
की तो 6.00 बजे का
केवल हमारे
पास समय है आज
का इसलिये मैं
आज के जीरो
आवर को कल के
लिये छोड़ रही
हूं कि उनको
मौका मिलेगा
अपनी बात कहने
का। जीरो आवर
का, जीरो आवर
का केवल। जीरो
आवर था।
जिसमें यह तीनों
बातें स्थगन
प्रस्ताव,
प्रक्रिया के
नियम 295 और परची,
यह कल के लिये ले
ली जायेंगी।
अब मैं राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
जो इश्यु आज
सदन के सामने
है मैं समझता
हूं कि अभी जो
बातचीत हुई उस
हिसाब से मुख्यमंत्री
जी अपना कुछ
वक्तव्य दे
दें तो उसके
बाद कोई बात
हो।
श्री
अध्यक्ष:
मुख्यमंत्री
जी।
विभिन्न
विषयों पर
विचार
पंजाब
एवं राजस्थान
के मध्य
जल-बंटवारा
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, कुछ
दिन पहले हम
लोगों ने
मिलकर एक
संकल्प पास
किया था हाउस
के अन्दर
जिसमें राजस्थान
के पानी के
ऊपर आधारित
संकल्प था।
मैं आज भी सब
लोगों को कहना
चाहती हूं क्योंकि
काफी व्यवधान
भी हो चुका
लेकिन मैं
सबको यह आश्वस्त
करना चाहूंगी
कि राजस्थान
के हितों के
लिये जितना
पक्ष चिंतित
है उतना मैं
मानती हूं कि
विपक्ष भी
चिंतित है और
इसलिये जो भी
हम लोगों ने
उस संकल्प के
अन्दर बात
रखी थी वह तो
हम बात फिर
दोहराते हुए
आप लोगों को
यह कहना चाहते
हैं चाहे कोई
भी सरकार आए,
चाहे वह कोई
भी बात रखे, हम
सब कृत संकल्प
हैं राजस्थान
के हितों के
ऊपर किसी भी
तरीके से
कुठाराघात नहीं
होने देंगे।
श्री
अध्यक्ष:
याचिकाओं का
उपस्थापन।
श्रीमती
प्रतिभा
सिंह।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निम्नलिखित
याचिकाओं का
उपस्थापन
करती हूं:-
विधान
सभा क्षेत्र
नवलगढ़ से
कोलसिया तक
सड़क की मरम्मत
करवाने बाबत,
विधान
सभा क्षेत्र
नवलगढ़ के
ग्राम नवलड़ी
में धावड़ा की
ढाणी ग्राम
जाजडिया की
ढाणी एवं
ग्राम
गढ़वालों की
ढाणी में नया
ट्यूबवैल एवं
पानी की टंकी
का निर्माण
करवाने बाबत,
एवं
विधान
सभा क्षेत्र
नवलगढ़ में
मुकन्दगढ़
से जेजूसर
वाया सोरकरा
नयी डामर सड़क
स्वीकृत
कराने बाबत।
श्री
अध्यक्ष:
आपको कुछ
बोलना था ? आप
कहेंगे इस
बारे में ?
ठीक है,
आपने रख दी।
उपस्थापित
कर दी आपने।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): ठीक
है। थैंक यू।
श्री
अध्यक्ष: आप
बोल दें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
क्या कहूं ?
फरमाओ आप।
श्री
अध्यक्ष:
मुख्यमंत्री
जी ने राजस्थान
के हितों के
प्रोटक्शन
के लिये जो
कुछ संकल्प
के जरिये आपसे
अपेक्षा की है
उनका साथ देने
के लिये यह
फरमा दें आप
तो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
रहस्योदघाटन
हो गया हरेक
चीज
प्रतिपक्ष के
नेता आपसे
पूछकर ही करते
हैं। आपसे
पूछा है क्या
कहूं। अब आप
बता दें उनको
क्या कहें।
विभिन्न
विषयों पर
विचार
पंजाब
एवं राजस्थान
के मध्य
जल-बंटवारा
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
बता दिया ना।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज
जो सदन में
समस्या उत्पन्न
हुई और हाउस
के अन्दर काम
नहीं हुआ। एक
तरह से सारा
काम ठप्प हो
गया, यह तो एक
दुःख का विषय
है। इस पर
विचार-विमर्श
करके और यह
तरीका निकाला
है कि जो उत्तेजना
भड़की है आज
वह कौनसे
अख़बार में क्या
आया है मैंने
तो नहीं पढ़ा
लेकिन हमारी
पार्टी के लोग
कह रहे हैं कि
उसके अन्दर ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हंसे नहीं। प्लीज
चुप रहें।
बैठे नहीं
बोले। माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता को
सुनें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मैंने तो उसको
नहीं पढ़ा
लेकिन बता रहे
हैं कि बादल
साहब ने कुछ
स्टेटमेंट
ऐसा दिया है
कि एक बूंद
पानी मैं राजस्थान
को नहीं
दूंगा। तो मैं
तो कहता हूं
कि वह बादल
साहब आकाश
सिंह भी बन
जाएं तब भी
राजस्थान का
हिस्सा यह
उनकी ताकत
नहीं कि वह
काट लें। नहीं
काट सकेंगे।
एग्रीमेंट
किया हुआ है।
इतने स्वतन्त्र
नहीं है स्टेटस
इंडिया में कि
वह मर्जी आवे
जैसा कर
लेंगे। क्या
फिर गृह युद्ध
होगा राजस्थान
और पंजाब के
बीच में पानी
पर और केन्द्र
ऐसा होने देगा
? कोई कल्पना
की ही बात
नहीं है यह।
क्यों ऐसी
खबर उछाली है
मीडिया ने ? क्यों
उछाली है ? यह
बात मेरी समझ
में नहीं आती
और वास्तव
में उन्होंने
बादल साहब ने
ऐसा कह दिया
तो बड़े अफसोस
की बात है कि
पंजाब के
लोगों ने उनको
मुख्यमंत्री
बना दिया।
Skp/akt/07032007/1540/2n/1
श्री अध्यक्ष:
अब आप बीच में
नहीं। बीच में
नहीं बोलें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इस तरह की
बचकानी बात
करने वाले लोग
मुख्य
मंत्री हैं और
लिखा है कि
चार बार, अबकी
पांच बार बन
गये तो यह तो
भगवान का फख्र
है। माननीय मुख्य
मंत्री जी ने,
हमने जो संकल्प
पास किया था
इस विधान सभा
के अन्दर, उस
संकल्प को
आपने दोहराया
है और उस
संकल्प को
आपने इन शब्दों
में कह कर कि
आप पूरी रक्षा
करेंगे, हमें
विश्वास है
कि आप इसके
अन्दर कोई
कमी नहीं आने
देंगी।
श्री अध्यक्ष:
यदि आपका
सहयोग हो।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
और मुझे भी
विश्वास है
कि आप कोई कमी
नहीं आने
देंगी। तो हम
इस मामले में,
पानी के मामले
में पूरा सदन
एक है। हमसे
जितना सहयोग
होगा, हम पूरा
सहयोग
करेंगे। आप
मजबूती के साथ
जैसा आपने कहा
है, इसी
मजबूती के साथ
आपको रहना
होगा। आप कृपा
करके बादल से
टेलीफोन पर
बात करें और
उनको कहें कि
राजस्थान के
अन्दर विप्लव
हो रहा है, यह
आप क्या बोल
गये। इन्हीं
शब्दों को आप
उनको कहिये कि
राजस्थान
में विप्लव
हो रहा है।
श्री अध्यक्ष:
विप्लव मतलब
विद्रोह।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आंदोलन से भी
ज्यादा हो
रहा है, विप्लव
हो रहा है
किसानों में।
इससे सारी
समस्या हो
जाएगी। पीने
के पानी की
समस्या हो
जाएगी। खेती
की ही बात
नहीं, पीने के
पानी की भी
समस्या हो
जाएगी। तो
आपने यह क्या
कह दिया, इसका
थोड़ा स्पष्टीकरण
जारी करो आप,
आपको यह बात
फरमानी चाहिए,
कहनी चाहिए।
अध्यक्ष
महोदय, इन्हीं
शब्दों के
साथ मैं आपका
धन्यवाद
करता हूं कि
आपने मुझे
बोलने के लिए
दो मिनट दिये।
श्री अध्यक्ष:
श्री
रामनारायण
मीणा याचिका
का उपस्थापन
करेंगे।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
दुगारी बाँध
(जिला बूंदी)
की चेन संख्या
84 से ग्राम
लक्ष्मीपुरा
के माल की ओर 3
कि.मी. छोटी
माइनर (धोरे)
का निर्माण
कराये जाने
बाबत् पांच व्यक्तियों
द्वारा हस्ताक्षरित
याचिका का
उपस्थापन
करता हूं।
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
वाद-विवाद
श्री अध्यक्ष:
राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर
वाद-विवाद। डाक्टर
चन्द्रशेखर
बैद।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर जो
प्रस्ताव
रखा गया उसके
विरोध में मैं
कुछ कहने खड़ा
हुआ हूं।
सर्वप्रथम
मैं राज्यपाल
के अभिभाषण के
पैरा नम्बर
दो पर जो राज्यपाल
साहब से यह कहलवाया
गया कि कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन,
शुरू से लेकर
के पिछले तीन
साल से
अलग-अलग सभाओं
में, नेशनल हो
चाहे
इंटरनेशनल हो,
माननीय मुख्य
मंत्री जी एक
शब्द को अपने
साथ चिपकाकर
रखना चाहती
हैं, कुशल वित्तीय
प्रबन्धन।
मैं इसी बारे
में आपको यह
कहना चाहूंगा
कि यह कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन
कहने का क्या
अभिप्राय है
और कुशल वित्तीय
प्रबन्धन कह
कर के राजस्थान
की जनता को आज
क्या मिला
है? कुशल वित्तीय
प्रबन्धन के
बारे में
पिछले तीन साल
के अन्दर
जैसा कि पैरा
नम्बर दो में
कहा गया कि 22853
करोड़ रुपये
पिछले तीन साल
में 10वीं
पंचवर्षीय
योजना के अन्दर
खर्च किये
जाने की
संभावना है।
साथ ही में पैरा
नम्बर तीन के
अन्दर यह कहा
गया कि 68422 करोड़
रुपये की नई
11वीं पंचवर्षीय
योजना की
शुरूआत की
जाएगी जो कि
राजस्थान के
इतिहास में
सबसे बड़ी
योजना होगी।
इसी के साथ ही
यह भी उसमें
मेंशन किया
गया कि 2007-08 जो कि
11वीं
पंचवर्षीय योजना
का प्रथम वर्ष
होगा, उसके
अन्दर 11,638
करोड़ रुपये
खर्च किये
जाएंगे। मैं
यह जानना
चाहता हूं
सरकार से और
माननीय वित्त
मंत्री, मुख्य
मंत्री जी से
कि इसका सोर्स
ऑफ फाइनेंस क्या
होगा? क्या
आप ऋण लेकर के
इतनी बड़ी
कार्य योजना
बनाने जा रहे
हैं? इससे
राजस्थान की
जनता के ऊपर
ऋण का बोझ
बढ़ेगा, कर का
भार बढ़ेगा।
जैसा कि अभी
तक वर्तमान
सरकार यह दावा
भी करती आई है
और सत्य भी
है कि आपकी जो
रेवेन्यू
जनरेशन ग्रोथ
है उसके अन्दर
22 से 25 प्रतिशत
की लगातार
बढ़ोतरी हुई
है। क्या
राजस्थान की
जनता को यह
जानने का
अधिकार नहीं
है कि इस इतनी
बड़ी योजना के
अन्दर जो
योजना 68,422 करोड़
की राजस्थान
सरकार ने
बनाई, उस
कार्य योजना
के अन्दर इस
बढ़े हुए
रेवेन्यू
ग्रोथ का
कितना हिस्सा
उसमें शामिल
किया जाएगा या
सारा का सारा
बोझ, लोन लेकर
के यह कार्य
योजना बनाई गई
है? अब आप यह
देखें, अपने
संसाधनों से
इसके अन्दर
कितना
कंट्रीब्यूशन
होगा यह राजस्थान
की जनता और यह
पवित्र सदन
जानना चाहता
है। साथ में
इतनी बड़ी
कार्य योजना, 32
जिले और एक बार
बीच में कोई
अन-कांस्टीट्यूशनल
अथोरिटी ने यह
भी कहा कि हर
जिले की अलग
कार्य योजना
बनेगी, हर
जिले के बारे
में अलग से
निर्णय होगा तो
एक तो उनको
इसको कहने का
कोई अधिकार
नहीं था और
दूसरा, जब
इतनी बड़ी
योजना बन रही
है तो पूरे
सदन के अन्दर
200 विधायक हैं, 200
विधान सभा
क्षेत्र हैं,
क्या यह इन
विधायकों से
जानने का
प्रयास किया
गया कि आपके
क्षेत्र की क्या
समस्याएं
हैं, आपके
क्षेत्र की
समस्याओं
में
प्राथमिकता
क्या? कौनसी
योजना का पहले
और कौनसी
योजना को बाद
में इसमें
शरीक किया
जाए? सदन को
कान्फीडेंस
में नहीं लिया
गया और जैसा
कि पिछले कुछ
दिनों में विगत
हुआ कि
मंत्रिमण्डल
के सदस्यों
को भी
पूर्णतया
विश्वास में
नहीं लेकर के
इतनी बड़ी
कार्य योजना राज्य
सरकार बनाने
जा रही है जो
कि
डेमोक्रेटिक
नहीं है।
डेमोक्रेटिक
तरीके से
सासरे सदन को
राजनीति से
ऊपर उठकर के
विश्वास में
लेकर के इतनी
बड़ी योजना
बनाई जाए तो
सफलतापूर्वक
आगे आने वाले
समय में राजस्थान
की गरीब जनता
की सही रूप से,
सुचारू रूप से
सेवा की जा
सकती है। हम
यह क्या
मानें कि
माननीय मुख्य
मंत्री जी 2-3
अन-कांस्टीट्यूशनल
अथोरिटी को
साथ में लेकर
के और फिर इतनी
बड़ी योजना
राजस्थान की
जनता के लिए
अगले आने वाले
पांच साल के
लिए बनायेंगी
जो कि उचित
नहीं है। 1
दिसम्बर, 1998-99
को जब पहली
बार कांग्रेस
का राज आया
राजस्थान के
अन्दर तो
राजस्थान के
ऊपर कर्ज था 26
हजार करोड़
रुपये और जब
पांच साल बाद
कांग्रेस का
राज था तो
कर्ज था 48 हजार
करोड़ रुपये।
मैं एक दिसम्बर
की बात कर रहा
हूं, मार्च की
बात नहीं कर
रहा हूं। 31
मार्च 2007 को
राजस्थान के
ऊपर कर्ज का
बोझ हो गया 72
हजार करोड़
रुपये। इतना
बड़ा कर्ज, अब
आप यह देखें
कि पिछले कांग्रेस
के शासनकाल
में जब पहले 40
महीनों के अन्दर
कर्ज का बोझ
बढ़ा 15 हजार
करोड़ और इसी
को यदि आप
भारतीय जनता
पार्टी के
शुरू के 40
महीनों से कम्पेरीजन
करें तो कर्ज
बढ़ा है 24 हजार
करोड़। तो इतना
कर्ज लेकर के
इतनी बड़ी
कार्य योजना
बनाने का क्या
अभिप्राय है
यह समझ में
नहीं आता। 60
प्रतिशत ज्यादा
कर्ज का बोझ
बढ़ा है शुरू
के 40 महीने में बनिस्बत
कांग्रेस के
शुरू के 40
महीने के।
जबकि वास्तविकता
यह है कि सारे
जो एफ आर बी एम
के अन्दर
कानून-कायदे
लागू किये
गये, रेवेन्यू
जनरेशन ग्रोथ
22 से 25 प्रतिशत
बढ़ी है। इसी
रफ्तार से यदि
राजस्थान की
जनता के ऊपर
कर्ज बढ़ता
रहा तो जब
वर्तमान
सरकार 2008 में
रुखसत होगी तो
कर्ज का बोझ
हो जाएगा 90
हजार करोड़
रुपये। क्योंकि
आप इसमें कम
से कम 30 हजार
करोड़ रुपये
और मान लो जो
कार्य योजना
11वीं
पंचवर्षीय
योजना के पहले
और दूसरे वर्ष
के अन्दर
होगी। मैं
आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि केन्द्र
सरकार ने, अब
कुशल वित्तीय
प्रबन्धन क्या
होता है? कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन वो
होता है
जिसमें राजस्थान
की आम जनता को
राहत पहुंचाई
जाए और आम जनता
को प्रगति का
रास्ता
दिखाया जाए।
केन्द्र
सरकार ने
पैट्रोल और
डीजल पर पांच
बार अटेंम्प्ट
किया पिछले
तीन साल के अन्दर
कि उनकी
कीमतों में
गिरावट आये।
क्या राजस्थान
सरकार ने
उसमें सहयोग
किया? आज हम
देखें कि
हरियाणा,
पंजाब और दिल्ली
के अन्दर जो
पैट्रोल और
डीजल के दाम
हैं वह राजस्थान
के बनिस्बत
सिग्निफिकेंटली
कम हैं।...
Gpc/usc/07032007/1550/2o
तीन से
पाँच रुपये
प्रति लीटर कम
है। केन्द्र
सरकार ने दो
बार इसके अंदर
गिरावट की,
एक्साइज में
दो बार गिरावट
की, दो बार कस्टम
ड्यूटी कम की।
एक बार उन्होंने
तेल कंपनियों
पर दबाव डालकर
तेल की कीमतें
कम करने पर
मजबूर किया,
लेकिन राज्य
सरकार ने इन
सब चीजों को
नजरअंदाज किया।
आज भी पूरे
देश के अंदर
सबसे महंगा
तेल अगर कहीं
मिलता है तो
राजस्थान के
अंदर मिलता है
और जो सेल्स
टैक्स की
इनकम है, ये
कहते हैं
रेवेन्यू
जनरेशन आपने
इन्क्रीज कर
लिया, सेल्स
टैक्स की जो
इन्कम है More than 45 % is because of tax which is being charged
by the Government. इतनी
बड़ी इन्कम
खाली इसके ऊपर
टैक्स लगाने
की वजह से हुई
है। नतीजा क्या
निकला आज
जितने भी
बोर्डर के
अपने डिस्ट्रिक्ट्स
हैं, जैसे
चूरू
डिस्ट्रिक्ट
है, माननीय
मंत्रीजी
बैठे हैं आपको
इस बात की
जानकारी होगी
कि कितना डीजल
और पेट्रोल आसपास
के हरियाणा और
पंजाब से गैर
कानूनी तरीके
से राजस्थान
में लाया जाता
है और बेचा
जाता है और
राज्य को
कितना बड़ा
रेवेन्यू का
लोस इस वजह से
हो रहा है यह
आप अंदाज नहीं
लगा सकते।
एक तरफ
तो हम यह कहते
हैं वित्तीय
प्रबंधन बहुत
अच्दा है,
गरीब आदमी को
हमने राहत
पहुंचायी। क्या
राहत
पहुंचायी
गरीब आदमी को?
आप यह कहते हैं
कि हमारा
खजाना हमेशा
भरा हुआ है।
जब आपका खजाना
भरा हुआ है तो
राजस्थान के
रूरल एरिया
में बीपीएल की
संख्या में 3
लाख 61 हजार
परिवार आपने
काट दिये। यह
कहकर काट दिये
कि केन्द्र
सरकार का
निर्देश था।
..(व्यवधान)..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सर्वे
किसके वक्त
में हुआ था?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बीच में डिस्टर्ब
न करें,
माननीय मुख्यमंत्रीजी
जवाब दे
देंगी।
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): गलत
फैक्ट्स के
आधार पर तो मत
करो। ..(व्यवधान)..
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): 31
अगस्त को
राज्य सरकार
ने यह निर्णय
लिया कि नयी
बीपीएल की सूची
15 सितम्बर को
जारी कर दी
जाएगी। यह एक
फैक्ट है और
नोटिफिकेशन
निकाल दिया और
नयी बीपीएल सूची
में ग्रामीण
राजस्थान के
3 लाख 61 हजार
परिवार कम कर
दिये गये। यह
कहकर कम कर दिये
गये कि केन्द्र
सरकार और प्लानिंग
कमीशन के
निर्देशानुसार
..(व्यवधान).. आप
मेरी पूरी बात
सुनें। केन्द्र
सरकार और प्लानिंग
कमीशन के
निर्देशानुसार।
हमारी मजबूरी
है कि हम इतने
लाख परिवार
राजस्थान
में कम करें।
अब जब आपकी
मजबूरी है तो
क्या आप अपने
संसाधनों से
बीपीएल
परिवारों की संख्या
जहां कि
लगातार आठ साल
से पश्चिमी
राजस्थान
में अकाल पड़
रहा है, कई
डिस्ट्रिक्ट्स
में बाढ़ की
स्थिति है।
ऐसी स्थिति को
देखते हुए
बीपीएल
परिवारों की
संख्या अपने
संसाधनों से
बढ़ानी चाहिए
थी क्योंकि
आप हमेशा यह
कहते हैं कि
हमारा कुशल
वित्तीय
प्रबंधन है,
जैसा कि
पड़ोसी राज्यों
में किया गया
है। आज
आंध्रप्रदेश
के अंदर प्लानिंग
कमीशन और केन्द्र
सरकार ने कहा
कि आपको हम 41
लाख परिवारों
की सहायता
उपलब्ध
कराएंगे।
आंध्रप्रदेश
ने कहा कि
नहीं, हमारे
यहां बीपीएल
की संख्या हम
एक करोड़ 21 लाख
मानेंगे, बाकी
लोगों को, बाकी
परिवारों को
हम अपने
संसाधनों से
यह सुविधा
मुहैया
कराएंगे। इसी
प्रकार आपका
बीजेपी का
जहां राज है
आज की तारीख
में गुजरात
में और मध्य
प्रदेश में
केन्द्र
सरकार द्वारा
निर्धारित की
गई बीपीएल की
संख्या से
कहीं अधिक
बीपीएल की
सूची घोषित कर
रखी है। वो
कहते हैं कि
हम अपने
संसाधनों से
इन गरीब
परिवारों को
लाभान्वित
करेंगे। इतनी
बड़ी
कार्ययोजना
और यह लेबल कि
हमारा कुशल
वित्तीय
प्रबंधन है और
जो गरीब आदमी
है उसको आप राहत
नहीं पहुंचा पाओ
और जहां
लगातार अकाल
और बाढ़ की
स्थिति बनी
हुई है वहां
पर इन बीपीएल
परिवारों को
सुविधा नहीं
मिले तो यह
कैसा कुशल
वित्तीय
प्रबंधन है।
बीपीएल की जो
दुर्दशा
वर्तमान राज
में हुई है
उतनी राजस्थान
के इतिहास में
कभी नहीं हुई।