lpm/usc/1a/1100/09102006
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 6
बारहवीं
विधान सभा के
छठे सत्र का सातवां
दिवस
संख्या 5
सोमवार,
09
अक्टूबर, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन, जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट का अन्तर
हो गया है आज।
श्री
अध्यक्ष:
क्षमा करना
मैं लेट नहीं
थी क्योंकि
इन्होंने
आते ही टोक
दिया तो अपना
जवाब देने के
लिए मैंने
सोचा, तैयारी
की कि मुझे क्या
कहना है? मेरे
यहां एक
माननीय सदस्य
की अनुपस्थिति
के लिया आया
है और मुझे
उन्होंने
वहां दिया
यहां जब मैं
खड़ी थी और उनसे
मैंने कहा कि
क्योंकि एक
दिन की कोई
आवश्यकता
नहीं है तो
उन्होंने
कहा कि नहीं
वो तो पूरे ही
सत्र नहीं आये
तो मुझे इसलिए
एक सैकण्ड की
देरी हुई,
क्षमा चाहती
हूं।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे
एक स्पष्टीकरण
देना आपसे....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: स्पष्टीकरण
देना है तो क्वेश्चन
आवर के बाद
दीजिएगा।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): क्वेश्चन
आवर के बाद
में विधान सभा
में क्या
स्थिति बने,
हाउस चले या
नहीं चले।
श्री
अध्यक्ष: हाउस
क्यों नहीं
चलेगा?
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): इससे
पहले आप....(व्यवधान)
आप दो मिनट का
समय दे दें तो
आपका आभारी रहूंगा...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह
गलत परम्परा
होगी। डेगाना
से आने वाले
माननीय सदस्य,
यह गलत परम्परा
हो जाएगी, ऐसा
नहीं होता है
पहले क्वेश्चन
आवर होगा, क्वेश्चन
आवर के बाद
में.......(व्यवधान)
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): क्वेश्चन
आवर के तुरन्त
बाद आप....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पहले सुनिये न
आप बात,
पहले बैठिये,
पहले बैठिये।
क्वेश्चन आवर
की समाप्ति के
बाद जब मैं व्यवस्था
दे दूं स्थगन
प्रस्तावों
पर, पर्ची के
ऊपर उसके बाद
मैं आपको बोलने
का मौका
दूंगी, उससे
पहले नहीं।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे निवेदन
है....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: फिर
वहीं बात जब
मैंने एक बार
कह दिया अब क्वेश्चन
आवर नहीं,
आपको जो बात
कहनी है.....(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
मेरा आपसे
निवेदन है कि
क्वेश्चन आवर
को स्थगित
करके गंगानगर,
हनुमानगढ़,
बीकानेर में
राजस्थान की
सरकार के
इशारों पर जिस
तरह का आतंक
पुलिस ने मचा
रखा है, पुलिस
ने ऐसा आतंक
मचा रखा है
जहां दर्जनों
लोगों को
गिरफ्तार
किया है....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपको अपनी बात
कहने का मौका
मिलेगा। यह
बहुत गलत है
कि आप क्वेश्चन
आवर के अन्दर
खड़े हो जाए।
आपको नियमों
की जानकारी
है, नियमों की
जानकारी होते
हुए आप नियमों
का उल्लंघन
करते हैं,
उचित नहीं है,
यह ठीक नहीं
है।
श्री
अमराराम (धोद):
..(व्यवधान)
मैं तो आपसे
रिक्वेस्ट
करना चाहता
हूं कि प्रश्न
आवर स्थगित
करके इस तरह
के आतंक, सरकार
के इशारों से
पुलिस ने
हनुमानगढ़
....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आपने
स्थगन प्रस्ताप
दिया है, सॉरी,
माननीय सदस्य
मैं आपसे
निवेदन कर रही
हूं कि .....(व्यवधान)
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें,
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
आपने स्थगन प्रस्ताव
दिया है, आपको
कोई अधिकार
नहीं बोलने
का। आप बैठ
जाएं। आई से
सिट डाउन।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान ।
तहसील
क्षेत्र
तिजारा (अलवर)
की
औद्योगिक
इकाइयों में
बकाया बिक्री
कर की वसूली
63.
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): क्या
वित्त मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1)
क्या यह सही
है कि राज्य
के अलवर जिले
की तहसील
तिजारा स्थित
औद्योगिक
क्षेत्र
भिवाड़ी,
खुशकेडा,
चौपानकी में
स्थित
औद्योगिक
इकाइयों पर
बिक्री कर के
रूप में काफी
राशि बकाया
है, यदि हां, तो
किस किस इकाई पर
कब कब से
कितनी-कितनी
राशि बकाया
है, विवरण सदन
की मेज पर
रखें।
(2)
क्या यह सही
है कि कई
इकाइयों का
बिक्री कर
निर्धारण का
कार्य बकाया
है, यदि हां, तो
क्यों, सरकार
अब कब तक
बकाया राशि का
निर्धारण कर
वसूली करने का
विचार रखती
है?
राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण
(श्री वीरेन्द्र
मीणा): (1) जी हां।
सूची परिशिष्ट
ए व बी पर
संलग्न है।
(2) जी
हां। वर्ष 2004-05
के कर
निर्धारण
प्रकरण
निर्धारित
समयावधि 31
मार्च, 2007 तक सम्पादित
किये जाने
हैं।
समस्त
बकाया कर
निर्धारण,
निर्धारित
समयावधि में सम्पूरित
कर,
नियमानुसार
वसूली की
कार्यवाही की जाएगी।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से राजस्थान
सरकार का
शुक्रिया अदा
करना चाहता
हूं कि इन्होंने
जो एक डिटेल
भिवाड़ी की
दी है यह ढाई
हजार इण्डस्ट्रीज्
की है और जो
इसमें मैंने
जो फिगर्स देखे
हैं उसमें यह
डेढ सौ करोड़
रूपए के आउटस्टेण्डिंग्स
इन्होंने
बताये हैं।
कुछ समय पहले
जब इन्होंने
जो जवाब में
लिखा 2004-2005 से इन्होंने
यह सूची दी है
तो मैं जानना
चाहता हूं कि
इससे पहले के
असेसमेंट्स
पूरे हो गये
हैं कि नहीं
हो गये हैं और
सभी फर्मों के
2004-2005 से पहले के
हैं। दूसरा
मैं जानना चाहूंगा
कि यह बकाया
वसूली के लिए
क्या
कार्यवाही हो
रही है और
इसमें इसके क्या
नतीजे निकले
हैं और अगर
इसमें कोई
कार्यवाही
में कोई कमी
है तो रिकवरी
के लिए कोई लॉ
में सरकार
चेंज लाने का
कुछ सोच रही
है ताकि इसमें
रिकवरी जल्दी
हो सके। इसके
साथ-साथ जो
आपका अब तक सेल-टैक्स
का एक्सपीरियंस
रहा है रिकवरी
का उसको देखते
हुए अब आपने
इस समय से वैट
लागू कर दिया
है अब वैट में
आप जो लॉ लाये
हैं तो उसमें
इसको देखते
हुए जो आपको
परेशानियां
हुई हैं
रिकवरी में वह
इस वैट के लॉ
में आपने उसको
इनकारपोरेट
किया है कि
आगे आने वाले
समय में
रिकवरी में
आपको कोई
परेशानियां
नहीं आये। यह
मैं जानना
चाहूंगा।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
अध्यक्ष
महोदय..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हां, आप भी पूछ
लीजिएगा।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मानननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्री महोदय,
स्पीकर ने
मुझे अलाउ कर
दिया है।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
मंत्री इनको
भी पूछ लेने
दीजिए।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपने
कहा समय अवधि
के अन्दर कर
निर्धारण
पूरा कर दिया
जाएगा, कृपया
यह बताने की
कृपा करें
मोटी-मोटी क्योंकि
ढाई हजार इण्डस्ट्रीज्
आपने बहुत
होशियारी से
आपने जो उत्तर
दिया है उसमें
कब से ....(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
भी उतनी ही
होशियारी से
दिया करते थे।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे
प्रोटेक्शन
चाहिए आपका।
श्री
अध्यक्ष:
पूछिए पूछिए
हकीकत कई बार
कहनी पड़ती है,
पूछिए आप।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मुझे
प्रोटेक्शन
चाहिए आपसे,
अब आप पुरानी
बातें याद कराकर
आप उनका मार्ग
प्रशस्त
नहीं करे आप।
अब आप उनका
मार्ग प्रशस्त
नहीं करें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप कोई
जमाना था जब
यहां से बोलते
थे, अब वहां से
बोलते हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में नहीं
बोले, प्रश्न
पूछने दें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं आपसे यह
पूछना चाहता हूं
कि आखिर इसके
अन्दर कर
निर्धारण की
अवधि क्या एक
और आपने बहुत
चतुराई से
आपके विभाग
में यह कब से पैण्डिंग
है वह आपने
इसमें कहीं
नहीं बताया
है। आपको
यूनिटवाइज
लिखना चाहिए
कि आउटस्टेण्डिंग
कहां से...(व्यवधान)
आप खुद भी देख
लें अध्यक्ष
महोदय,
समयावधि के
अन्दर हम
इसको पूरा
देंगे। असल
में इसके अन्दर
पहले तो एक
जवाब तो आप यह
दे दे फिर
मेरा नैक्स्ट
सप्लीमेंट्री
यह है कि
उद्योग विभाग
से आपका
तालमेल का
अभाव है। वित्त
विभाग का कतई
तालमेल नहीं
है क्योंकि रिवाइवल
का जो पैकेज
जो इन्होंने
दिया था
आर.एफ.सी. ने
दिया था, रीको
ने दिया था,
गवर्नमेंट ने
इसके बारे में
एक नियम बनाये
थे कोई
गाइडलाइंस
बनायी थी कि सिक
इण्डस्ट्रीज्
को रिवाइज
कैसे किया
जाएगा? अगर आज
आपका उद्योग
विभाग से
तालमेल होता
तो रिवाइवल के
पैकेज के तहत
कितनी इण्डस्ट्रीज्
रिवाइव हुई है
वह आप कह
देंगे यह तो
मेरे महकमे का
सवाल नहीं है
इसका मतलब रिवाइव
हो सकती थी
इण्डस्ट्रीज
पहले आप दो
प्रश्न का
जवाब दें
दीजिए फिर मैं
वैट से सम्बन्धित
एक प्रश्न और
पूछना
चाहूंगा इनसे
इसके बारे में
आपसे जानकारी
चाहूंगा।
श्री
अध्यक्ष: आप
दो का जवाब दे
दीजिए, आपकी
ही ठेकेदारी
नहीं है सारे
सवालों की, आप
दो का दे
दीजिए।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी
माननीय
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने और हमारे
एमादुद्दीन
साहब ने
असेसमेण्ट
के बारे में
जो पूछा है
असेसमेण्ट
एक...(व्यवधान)
श्री
समर्थ लाल
(राजगढ़): अध्यक्ष
महोदय, क्वेश्चन
आवर के अन्दर
यह परम्परा
है जो प्रश्नकर्ता
होता है अगर
वह कोई प्रश्न
पूछे, उत्तर
सुनने के बाद
पहले उसका
जवाब दिया
जाता है और
उसके बाद कोई
सप्लीमेण्ट्री
सदन में कोई
भी माननीय
सदस्य पूछे
उसके बाद उसका
उत्तर दिया
जाता है। जो
प्रश्नकर्ता
होता है वह
गौण हो जाता
है और जैसा
अभी-अभी
भूतपूर्व
वित्त मंत्री
महोदय पूछ
बैठे और उत्तर
का सवाल
मंत्रीजी
उनका दे रहे
हैं, प्रश्नकर्ता
का जो सवाल था
वो गौण हो
गया।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकर्ता
भी देंगे।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
अध्यक्ष
महोदय, मैं तो
उसी बात पर आ
रहा हूं असेसमेंट
एक प्रक्रिया
है पूरा और
इसके अन्दर असेसमेंट
करके उसके बाद
में असेसमेंट
वर्ष समाप्ति
के दो वर्ष के
भीतर करना
अनिवार्य
होता है और असेसमेंट
से पहले व्यापारी
से हम किसी
प्रकार की
वसूली नहीं कर
सकते। असेसमेंट
होने के बाद
उसको 30 दिवस का
समय दिया जाता
है। 30 दिवस के
समय के अन्दर
अगर वह राशि
जमा नहीं
कराता तो उसके
बाद उसके ऊपर
विभाग कोई
कार्यवाही
करता है और
फिर अगर डिले
होता है उसमें
तो उसको उस व्यापारी
को उस राशि का
ब्याज है वह
देना पड़ता
है। कोई भी
इसकी सीमा नहीं
होती अगर 10 साल
बाद भी किसी
व्यापारी के
प्रति कोई
पैसा निकलता
है तो विभाग
उसके खिलाफ
कार्यवाही कर सकता
है,पहली बात तो
यह है।
भीम/चौहान/9.10.06/11.10/1b
दूसरा
माननीय
एमादुद्दीन
साहब ने जो
प्रश्न
उठाया है
उसमें मैं
आपको बताना
चाहूंगा माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जिस
सर्किल की आप
बात कर रहे
हैं जिसमें
खुशकेड़ा,
भिवाड़ी और चौपानकी
उसमें
निश्चित 146.31
करोड़ रुपये
बाकी है और वो
जिस-जिस हैड
के अन्दर
बाकी है उसके
बारे में मैं
आपको पूरी
डिटेलवाइज
बता दूं इसमें
पहले तो है Demand is
pending for want of declaration of forms.
उसमें
57.26 करोड़ रुपये
बाकी है Demand relates to assumption
under incentive scheme of 1987. Matter is pending before DLS. इसमें
4 करोड़ 43 लाख
बाकी है इसके
बाद Ex-party assessment order. Firm is closed.
इसमें
3.21 करोड़ रुपये
बाकी है फर्म
इज क्लोज्ड
बंद फर्मों के
45 करोड़ रुपये
बाकी है इसी
प्रकार
माननीय अध्यक्ष
महोदय, Recovery proceedings share under process वो
चल रहा है 13
करोड़ 47 लाख
रुपये अंडर
लिक्विडिशन 5.59
लाख रुपये
अंडर रेक्टीफिकेशन
29 लाख रुपये,
अंडर स्टे 6
करोड़ 75 लाख
रुपये इसी
प्रकार
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पूरी
राशि 146.31 करोड़
जो बाकी है
इसके अन्दर
पिछले पाँच
वर्ष के अन्दर
इसमें से वर्ष
2001-2002 में 33 करोड़ 55
लाख रुपये
वसूल किये,
वर्ष 2002-03 में
हमने 69.61 करोड़
रुपये वसूल
किये, 2003-2004 में 31.7
करोड़ वसूल
किये, 55.85 करोड़
रुपये हमने 2004-05
में किये, 2005-06
में हमने 159.75 लाख
रुपये वसूल
किये, 2006-07 में
हमने 126.79 लाख
रुपये इस
पर्टीकूलर
सर्किल में
वसूल किये
हैं। फिर भी
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, राज्य
सरकार ने अभी
इसी वित्तीय
वर्ष के अन्दर
कुछ पोस्टें
क्रियेट की
हैं। अभी 2.9.06 को
नोटिफिकेशन
निकाल करके
हमनें पाँच सीटीओज
की पोस्टें
क्रियेट की
हैं। उसके अन्दर
इस कर
निर्धारण की
प्रक्रिया, इस
राशि को वसूल
करने के लिए
एक पोस्ट
हमने भिवाड़ी
में क्रियेट
की है । माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो
फरमाया ढाई हजार
इंडस्ट्रीज
जिनके खिलाफ
यह पैसा बाकी
है उसमें एक पोस्ट
पर्टीकूलर
भिवाड़ी में
कियेट की है
और वो जल्दी
से जल्दी
जितना भी पैसा
है सख्त से
सख्त
कार्यवाही
करके और विभाग
इसको वसूल
करेगा। अभी
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य....।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
नहीं, मेरे
सवाल का जवाब
माननीय
मंत्री महोदय,
आप पिछले सालों
की रिकवरी, यह
तो सतत
प्रक्रिया है
हर साल असेस्मेंट
होता है हर
साल आता है
आपने बड़ी
खूबसूरती से
जवाब दिया कि
2004-05 के कर निर्धारण
की जो समयावधि
है वो 2007 तक है तो
क्या मैं
आपसे पूछ सकता
हूं यह जितना
पैसा जितनी
इंडस्ट्रीज
हैं सबका
असेस्मेंट 2004-05
में ड्यू था?
पहले से चल
रहा है आपका।
सवाल यह है
आपका पहले से
चल रहा है।
सीधा सवाल यह है
कि आप इनसे
वसूली, क्योंकि
फर्मर्स क्लॉज
होकर चली गयी,
लोग बंद करके
चले गये इंडस्ट्रीज
घाटे में आयी।
आपने जो
इंसेंटिव स्कीम
जो इन्होंने
इंडिस्ट्रीज
डिपार्टमेंट ने
और जो बीडी के
द्वारा
अप्रूव है
आपने उस इंसेंटिव,
क्योंकि तालमेल
का कतई अभाव
है
इंडस्ट्रिज
के अन्दर और
वित्त विभाग
के अंदर अगर
यह इंसेंटिव
स्कीम के तहत
आपने उनको
रिवाइवल का
पेकेज दिया यह
मैं जानता हूं
इंडस्ट्रिज
बंद हुई हैं आरएफसी
को, बिजली को
इतना मिलेगा,
इनकी बिक्री
होगी,
बिक्रीकर विभाग
को इतना
मिलेगा,
कंसर्ड
फाइनेंशियल
इंस्टिटयूशन
को इतना पैसा
मिलेगा, मैं
आपसे यह पूछ
रहा था....।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं
प्रश्न।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हां प्रश्न
ही पूछ रहा
हूं। इसके
बारे में आपकी
जानकारी में
तो यह स्कीम
होगी नहीं क्योंकि
वहां जो बंद
पड़ी हुई हैं अध्यक्ष
महोदय, आज हालत
यह है कि जो
बंद
इंडस्ट्रिज
हैं उनकी सारी
मशीनरीज या तो
लोग खोल करके
ले गये, इनकी
जमीन रह गयी
है या चोरी हो गया
वहां से
सामान, जब
आपको बकाया
वसूलना था अगर
दोनों में तालमेल
हो तो इससे
सरकार का जो
रुपया बाकी पड़ा
हुआ है क्योंकि
इन्होंने
कहा 2004-05 का 2007 तक हम
कर देंगे, यह
बताने की
कोशिश की इसमें
कितना पैसा और
तारीख दी नहीं
किस की, उसकी
आगे की कब से
बाकाया है
उसके ऊपर जो
लंबी समयावधि
का पैसा बाकी
रह गया है
उसकी रिकवरी
के लिए आपने
क्या कारगर
कदम उठाये
हैं? यह बताने
की आप कृपा करें।
जो बहुत लंबे
अर्से से दस
वर्ष बाद भी
कोई पेमेन्ट
कर दे तो वो तो हर
एक को मालूम
है राज्य का
पैसा आता है
आप लेते हैं आउटस्टेंडिंग
बाकी रहता है
लेकिन जो लोग
लंबी समयावधि
का जो पैसा
बाकी पड़ा हुआ
है उसको वसूल
करने की दिशा
में आप क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं? यह आप
बताने की कृपा
करें।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय,
मेरा एक सप्लीमेंट्री
है आप तो
मंत्री जी, यह
बता दें कि आपके
आने के बाद
सैल्स टैक्स
के एरियर में
वृद्धि हुई है
या कमी हुई है?
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो प्रश्न
उठाया है उसके
बारे में मैं
पूर्व में भी
आपसे कह चुका
हूं कि सैल्स
टैक्स
डिपार्टमेंट
के अन्दर
राज्य सरकार
ने पोस्टें
क्रियेट की
हैं उसकी
डिटेलवाइज
मैं आपको और
बताना
चाहूंगा। ...(व्यवधान)...
सुन तो लें आप
मेरी बात तो
सुन लें।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): पोस्ट
एक और क्रियेट
की है वो तो
मालूम है आपने
एक पोस्ट
भिवाड़ी में
और बढ़ा दी
उसका तो मालूम
है वो अभी तक
उस पोस्ट पर
कोई गया नहीं
है वहां । आप
फीगर्स की बात
करिये।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
इस फाइनेंशियल
ईयर के अन्दर
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस
फाइनेंशियल
ईयर में एडिश्नल
कमिश्नर की 2
पोस्ट, डीसीज
की 3 पोस्ट,
एसीज की 4, सीटीओ
के 5, एसीटीओ के 32
और इंस्पेक्टर्स
की 32 पोस्टें
हैं।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): पोस्ट
से कोई मतलब
नहीं है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इस प्रकार की
बातें से क्या
मतलब है आप
भिवाड़ी की
बात करें आपने
राजस्थान में
इतनी पोस्टें
क्रियेट कर दी
हैं फलानीं
जगह इतनी कर
दी आप भिवाड़ी
की बात करें।
सवाल यह है कि
भिवाड़ी में
स्टे लिया था
...(व्यवधान)...
इंडिस्ट्रियल
एरिया का अध्यक्ष
महोदय, और एक
सबसे बड़ी
समस्या क्या
हुआ है कि वेट
के तहत जिन
आइटम्स का
एग्जम्प्शन
दिया जाता था
जो कि आम
सहमति
देश के स्तर
के ऊपर बनी थी
उसके परे हटकर
के वेट की एक
सुपर पॉवर
कमेटी बना दी
गई राजस्थान
के अन्दर
मंत्री जी का
कोई लेना देना
नहीं है वो जो
कमेटी,
ग्रिवेंसेज
कमेटी के नाम
से एक कमेटी
बना दी गई ।
श्री
अध्यक्ष: इस
प्रश्न से क्या
ताल्लुक है
उसका?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
एक मिनट सुन
लें, आप कृपया
सुन लें।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): नहीं
मैडम, इससे
वेट का ताल्लुक
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
ताल्लुक है
इसका। अब इस उम्मीद
में लोग बैठे
हुए हैं असेस्मेंट
क्यों नहीं
करा रहे हैं
वो भी प्रयत्न
कर रहे हैं
आइटम्स दस
आइटम्स के
ऊपर देश के
अन्दर सहमति
बनी थी स्टेट
बेस नीड के
आधार पर
वेट एग्जम्पशन
स्टेट्स
अलाउड किया
हुआ था ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बकाया
का सवाल वेट
का कहां है ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
है वेट से है
यह ...(व्यवधान)...
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): वेट
का ताल्लुक
है। है क्यों
नहीं ...(व्यवधान)... अध्यक्ष
महोदय, वेट का तो
ताल्लुक है सेल्स
टैक्स की जगह
वेट आया है ...(व्यवधान)...
सैल्स टैक्स
की जगह वेट
लगाया है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इसी उम्मीद
के अन्दर लोग
बैठे हुए हैं
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप सवाल
पूछो न ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
क्या मतलब
है? क्या
मजाक है? Why you are trying to protect
the Minister? मैं आपसे एक
बात कह रहा
हूं कि इस उम्मीद
में लोग बैठे
हुए हैं They are also making efforts. क्योंकि
दस की सीमा को
इस कमेटी ने
पार कर दिया
है वो इसका क्या
हश्र होगा यह
तो भविष्य
बतायेगा।
श्री
अध्यक्ष: यह
बिक्री कर के
संबंध में है।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): अध्यक्ष
महोदय, वेट से
संबंध है
बिकॉज 2006-07 में
वेट ही लगेगा
न।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): 2006-07
में वेट
लगेगा।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): फिर
सेल्स टैक्स
कहां लगेगा?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):।
मैं आपसे कह
रहा हूं कि इस उम्मीद
में लोग बैठे
हुए हैं कि हम
भी प्रयत्न
करेंगे कि
सर्टेन टाइप
की इंडस्ट्रिज
को इस वेट से
एग्जम्पशन
करा लेंगे क्योंकि
सैल्स टैक्स
का स्थान वेट
ने ले लिया।
अब सेल्स
टैक्स का स्थान
ने ले लिया
इसलिए मैं
आपसे कह रहा
हूं कि ये मामला
इतना कम्लैक्स्ड
है।
श्री
अध्यक्ष: वेट
में लेने के
बाद की बात तो
...(व्यवधान)... की
बात करें आप
तो।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
चलिये मैं
उसकी बात कर
रहा हूं। आज
मैं आपसे कह
रहा हूं ....।
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने रिलेवेंट
प्रश्न पूछा
कि आपके आने
के बाद में
उसमें कमी हुई
या बढ़ोतरी
हुई।
श्री
नरपतसिंह
राजवी(उद्योग मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने
कोआर्डिनेशन
के अभाव की
बात कही तो आप भी
वित्त
मंत्री थे
इंडस्ट्रिज
मिनिस्टर भी
थे, रिप्स भी
इंडस्ट्रिज
के नहीं हैं
जो एडमिनिस्ट्रेटिव
डिपार्टमेंट
है वो फाइनेंश
डिपार्टमेंट
है और सिक
यूनिट्स की जो
स्कीम है
उसका भी
फाइनेंस
डिपार्टमेंट
ही है तो
कोओर्डिनेशन
के अभाव की
बात नहीं है
आप जिस तरह से
घुमाना चाह
रहे हैं प्रन
को वेट पर
लाना चाह रहे
हैं वो नहीं...।
श्री
प्रद्युम्न सिंह
(राजाखेड़ा):
आपका कोओर्डिनेशन
कैसा है वो हम
अखबारों में
सब पढ़ चुके
हैं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अमाउंट बता
दें साहब अमाउंट।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
जो बात पूछ
रहे हैं एक तो
वेट से है और
एक जो पर्टीकूलर
सर्किल की बात
कह रहे हैं वो
दोनों बात अलग
अलग है।
दूसरा
वेट में जहां
तक इन्होंने
कमेटी की बात
की माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो केन्द्र
की स्टेट एम्पावर्ड
कमेटी है
फाइनेंस
मिनिस्टर्स
की उसके अन्दर
मैं अकसर जाता
रहता हूं
राजाखेड़ा से
आने वाले माननीय
सदस्य भी
उसके पहले
मैंबर थे आप
भी जाते रहते
हैं । वहां
पर..।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं अब नहीं
जाता।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
पहले जाते
रहते थे आप ।
आपको सारा पता
है यह वेट की
जो कमेटी
प्रदेश में
हमने बनायी
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहुत व्यपारियों
से ...।
श्री
अध्यक्ष: आप
वेट के झगडे
में क्यों जा
रहे हैं? आप
बिक्रीकर की
बात करें।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): मेरा
सवाल जो था
उसका जवाब...।
श्री
अध्यक्ष: वो
तो एक्स
फाइनेंस
मिनिस्टर
हैं। वो पूर्व
वित्त
मंत्री है।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): ... अध्यक्ष
महोदय, उसका
जवाब नहीं आया
मेरे सवाल का
..।
श्री
मदन
राठौड़(सुमेरपुर):
.... ...(व्यवधान)...
दूसरा पूछना
शुरू कर देता
है मूल प्रश्नकर्ता
तो वंचित ही
है।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): मेरा
एक सवाल जो
मैंने शुरू
में पूछा था
उसका अभी तक
जवाब नहीं आया
कि इनका जो
एक्सपीरियेंस
है सेल्स
टैक्स को
लेकर कि इनकी
सेल्स टैक्स
की जो रिकवरी
पूरी तरह से
ठीक तरह से हो
नहीं पा रही
है उसका डेढ़
करोड़ रुपया
पेंडिंग है अब
जो नया वेट
आया है उसमें
इन्होंने क्या
लॉ में
प्राविजन रखा
है ...
कैलाश/ 9.10.2006
11.20 (1) 1c
जिससे इसकी
रिकवरी में
देरी नहीं हो
और टाइम पर
रिकवरी हो
जाये पहले भी
और आगे आने
वाले में भी ।
इसलिए वैट का
इससे संबंध है
मैडम ।
श्री
अध्यक्ष:
आपने यह प्रश्न
तो कहीं नहीं
पूछा ।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): क्यों
नहीं पूछा ।
इसमें मैंने
कोई ईयर तो
दिया नहीं है
मैंने तो शुरू
से पूछा है और
आज तक का पूछा
है । इसमें
मैंने अवधि तो
दी नहीं कि
कौनसे साल से
कौनसे साल का
है यह तो जनरल
पूरे टाइम का
है । उसमें जब
सैल्स टैक्स
नहीं रहेगा तो
उसकी जगह आपने
वैट लगा दिया
है तो नेचुरली
वैट भी इसमें
कवर होगा ।
श्री
अध्यक्ष: आपे
प्रश्न में
तो कहीं यह
नहीं है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
एक हजार करोड
रुपये का
एरियर बढा है,
जवाब दें । मैं
फीगर दे रहा
हूं एक हजार
करोड रुपये का
। पिछली सरकार
से इस सरकार
के आने के बाद
एक हजार करोड
रुपये का सैल्स
टैक्स का
एरियर बढा है,
मना कर दें ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप गलत
कह रहे हैं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
आप मना कर दें,
फीगर बताये ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): जब इन्होंने
शासन छोडा था
जब 1708 करोड का
सैल्स टैक्स
राजस्थान
में बकाया था
। आज की तारीख
में यह 1954 करोड
का है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
आप करेक्ट कर
लें । (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह
रिकार्ड पर है
।
हाईपोथेटिकल
बात करना
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
की आदत पड गई
है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं 2005-06 की
फीगर दे रहा
हूं । मना करा
दीजिए । 2005-06 के सीएजी
की फीगर दे
रहा हूं , आप
मना कर दीजिए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं 2005-06
की फीगर दे
रहा हूं आपको
। 2336 करोड थे
अगस्त तक 353
करोड वसूल हो
गये और आज की
तारीख में 1954
करोड 17 लाख
रुपये राजस्थान
का सैल्स
टैक्स का
बकाया है यह
रिकार्ड पर रख
देता हूं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
एग्रीड ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): एग्रीड
।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
मैं फिर
दुबारा कह रहा
हूं 2005-06 की
सीएजी की
रिपोर्ट में
पिछली
कांग्रेस
सरकार के शासन
छोडने के बाद
एक हजार करोड
रुपये से ज्यादा
सैल्स टैक्स
का एरियर बाकी
था । Still I am saying this. Let it be recorded . मैं फिर
दुबारा रिपीट
कर रहा हूं 2005-06
की सीएजी की
रिपोर्ट का
फीगर दे रहा
हूं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं जिम्मेदारी
से कह रहा हूं
1.4.03 को 1708 करोड 21
लाख रुपये
बिक्री कर के
बकाया थे । यह
रिकार्ड पर है
।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, में 2005-06 की
कह रहा हूं
मंत्री जी 2003 की
कह रहे हैं बडी
अजीब बात है ।
मंत्री जी मैं
2005-06 की कह रहा
हूं आप
2003 की कह रहे हैं,
करेक्ट करें
अपने आपको ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, देखों
डांट रहे हैं
। मेरे को
डांट भी रहे
हैं और मेरे
को डरा भी रहे
है ।
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
आप कहने दें
उन्हें, आपने
अपनी बात कह
दी उन्हें भी
सुने ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, दो बात एक
साथ कर रहे
हैं मेरे को
डांट भी रहे हैं
और मेरे को
डरा भी रहे
हैं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं डांट
नहीं रहा हूं
पार्लियामेंट्री
अफेयर मिनिस्टर
मंत्री को
बोलने नहीं दे
रहे हैं । Let him say
it.
श्री
अध्यक्ष:
डांटना और
डराना तो एक
ही बात है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, यह सरकार
कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
को मानती है
तो यह मंत्री
जो जवाब दे
रहे हैं वह
फाइनेंस
मिनिस्टर का
जवाब है । आप
जो जवाब दे
रहे हैं वह
फाइनेंस मिनिस्टर
का जवाब है ? आप
कहिए पहले यह
जो जवाब दे
रहे हैं वह
फाइनेंस मिनिस्टर
का जवाब मान
लूंगा मैं ।
कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
में आप कहिए
कि यह फाइनेंस
मिनिस्टर का
जवाब है ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह
कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
के आधार पर
जवाब है और
ओथेंटिक जवाब
है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
फाइनेंस
मिनिस्टर का
जवाब है ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): फाइनेंस
मिनिस्टर
मैं नहीं हूं
पर कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
के आधार पर
मैं जो कह रहा
हूं, अध्यक्ष
महोदय, मैं टेबल
कर सकता हूं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):Madam let him
say.
अध्यक्ष
महोदय, इनको
हाउस में कहना
पडेगा कि वित्त
मंत्री की
हैसियत से
कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
पर जवाब दे
रहे हैं । (व्यवधान)
स्टेट
मिनिस्टर बैठे
हुए हैं, यह क्या
मतलब है । Let the State
Minister say it.
श्री
अध्यक्ष: एक
मंत्री दूसरे
मंत्री को
असीस्ट कर
सकता है । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
नहीं दे सकता,
अध्यक्ष
महोदय, आप इनको
अलाऊ करते
पहले Why you have allowed the State Minister?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
सरकार की तरफ
से जवाब है और
इस बात पर कोई
विवाद नहीं है
कि सैल्स
टैक्स की
रिकवरी होनी
चाहिये ।
सरकार
इफेक्टिवली प्रयास
करेगी । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
यह बात नहीं
है । आप तो बताइए
कि पिछली
सरकार से यह
पैसा बढा है
या घटा है,
मंत्री जवाब
दें इस बात का
। Don’t side track it. फाइनेंस
मिनिस्टर
जवाब दे ।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
आपके विततीय
प्रबन्धन की
पोल खुल रही
है जिसका बार
बार आप कहते
हो । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, वित्त
राज्य
मंत्री को
बोलने दें,
किसने मना
किया है । वित्त
राज्य
मंत्री खडे
होकर बोलें ।
(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): दिल्ली
की सरकार .. (व्यवधान)
मैनेजमेंट
में नंबर वन
है ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
कलेक्टिव
रेस्पोसेबिलिटी
के आधार पर
खडे होकर बोले
। यह नंबर वन
है या नंबर दो
है, मंत्री
खडे होकर जवाब
दें ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): जो भी
रिकवरी बाकी है
राजस्थान
सरकार
इफेक्टिवली
उसकी वसूली
करेगी । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):Prof. Saheb
don’t side track. आप
फीगर पर आइए ।
पिछली सरकार
के बाद एक
हजार करोड कर एरियर
बढा है आप मना
करना चाहते हो
इस बात को ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): आपने
एक हजार करोड का
एरियर छोडा था
। (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
यह कोई मुख्य
मंत्री का
मंत्री नहीं
बोल रहा है यह
राजस्थान का
वित्त
मंत्री बैठा
है, वह बोले ।
फीगर मालूम
नहीं खडे होकर
बोल देते हैं।
Don’t
mislead the House. You are misleading the party and misleading the House. आप
पार्टी को भी
मिसलीड कर रहे
हैं और सरकार
को भी मिसलीड
कर रहे हैं,
खडे होकर
बोलिए आप । (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट
श्री
शिवजीराम
मीणा ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, don’t protect this thing.
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): अध्यक्ष
महोदय, मेरा
जवाब ही नहीं
आया।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, पहले
तिजारा से आने
वाले माननीय
सदस्य का
जवाब आने
दीजिए ।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी के
पास जितनी
जानकारी थी
उन्होंने दे
दी । (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
मंत्री जी
इतना महत्वपूर्ण
प्रश्न है,
किसानों पर
पैनेल्टी
लगाई जाती है
और उद्योगों
से पैसा वसूल
नहीं किया
जाता । अगर
बिजली का बिल
एक दिन लेट हो
गया तो उस पर
पेनेल्टी
लगती है ... (व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): ... (व्यवधान)
वसूली
इफेक्टिवली
तरीके से
करेंगे।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, इनके पास
जवाब नहीं है
तो आप प्रश्न
को स्थगित
करवाइए ।
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, आप हमारी
बात सुनिए ।
आप रोज स्थगित
कर रही हैं
इसको भी स्थगित
कीजिए । आप स्वयं
कह रही हैं कि
इनके पास
जितनी
जानकारी थी वह
दे दी ।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
करें । आप स्थान
ग्रहण करें ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, आप न्याय
करें, सबके
साथ समान व्यवहार
करें ।
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा):
आपके चार चार
मंत्रियों ने
जवाब दिया फिर
भी जवाब सही
नहीं हुआ । (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): वैट
के माध्यम से
लाखों रुपये
का भ्रष्टाचार
हो रहा है और
उस ओर आप ध्यान
नहीं दिलाना
चाह रहे हो ।
सारे व्यापारी
लुट रहे हैं ।
एक सुपर स्कीम
बन गई इनकी ।
आप तो विधान
सभा में वैट
का प्रश्न ले
आईं ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: रायपुर
से आने वाले
माननीय सदस्य
मंत्रीजी के
पास जितनी
जानकारी थी वह
विस्तृत रूप
से आपको दे दी
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, तो इसे स्थगित
करवा दीजिए ।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
मंत्री जी को
तो बोलने ही नहीं
दिया ।
संबंधित
मंत्री को तो
बोलने ही नहीं
दे रहे हैं
दूसरे मंत्री
। उनके पास
जानकारी तो
बहुत है लेकिन
बोलने दे जब
ना । (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन
।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): अध्यक्ष
महोदय, मैं वाक आउट
कर रहा हूं,
मेरे सवाल का
जवाब नहीं आ
रहा है, मैं
आपसे
प्रोटेक्शन
मांग रहा हूं
और आप मुझे
प्रोटेक्शन
नहीं दे रहे
हैं इसलिए मैं
सदन से वाक
आउट कर रहा
हूं ।
(माननीय
सदस्य श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
अध्यक्ष:
इतनी लंबी
सूची देने के
बाद तिजारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो प्रश्न
पूछा है उसके
साथ इतनी
सूचनाएं दी गई
हैं इससे भी
यदि आप संतुष्ट
नहीं हो तो
मैं नहीं
समझती .. (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, उसका तो
कोई उल्लेख
ही नहीं है
इसमें । कहीं हो
तो बता दीजिए
आप । (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न सिंह
(राजाखेड़ा): ...
बेकार
सूचनाएं हैं जिससे
कोई अभिप्राय
नहीं है ।
मैंने इन्हें
देखी है I have seen it.
मैडम, आपके
लिये हो सकती
हैं मैं इसको
समझता हूं
इसके कहीं कोई
तथ्य नहीं है
यह हाउस को और
मैम्बर्स को
मिसलीड करने
वाली सूचनाएं
हैं ।
श्री
अध्यक्ष:
मिसलीड करने
वाली हैं तो
आप दूसरे
नियमों में
आइए कौन ना
करता है ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह तो आज आखिरी
दिन है नहीं
हम तो सब ले
आते, आज आखिरी
दिन है ।
श्री
अध्यक्ष: अगले
सदन का कोई
आखिरी दिन
थोडे ही है
उसके बाद फिर सैशन
आयेगें ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
बजट सैशन
आयेगा तब
लेंगे ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप जब
इनके प्रश्न
का जवाब नहीं
देते हैं तो
उसको आप स्थगित
कर देते हैं,
आप कम से कम स्थगित
तो करवाइए ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): कोई
स्थगित नहीं
होगा ... (व्यवधान)
उससे ज्यादा
जानकारी दी है
हमने ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आपसे
न्याय की
अपेक्षा है आप
न्याय तो
करें । आप
हमेशा उनका
प्रोटेक्शन
करती हो और
विपक्ष को
हमेशा दबाती
हो ।
श्री
अध्यक्ष:
इनको बोलने
दीजिए, इनका
अंकित नहीं हो
।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन के
प्रति जो टिप्पणी
माननीय सदस्य
ने की है यह
आसन का अपमान
है इसे एक्सपंज
करवाइए।
श्री
अध्यक्ष: वह
आइएएस आफिसर
है वह चाहे
जैसा बोलते
हैं । (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
***
श्री
अध्यक्ष: उन्हें
सदन के नियमों
की और आसन की
गरिमा की जानकारी
नहीं है ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
विधान
सभा क्षेत्र
जहाजपुर में
गैर सरकारी
संस्थाओं
द्वारा
लाभान्वित व्यक्ति
64.
श्री
शिवजीराम
मीणा
(जहाजपुर): क्या
जनजाति
क्षेत्रीय
विकास मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1)
क्या यह सही
है कि विधान
सभा क्षेत्र
जहाजपुर में
बायफ (गैर
सरकारी संस्था)
द्वारा किसी
प्रकार के
कार्य करवाये
जा रहे हैं ? यदि
हां, तो
दिनांक 01
अप्रैल, 2001 से अब
तक किये गये
कार्यों की
सूची सदन की
मेज पर रखें ।
(2)
क्या यह सही
है कि बायफ
द्वारा
जहाजपुर
क्षेत्र में
व्यक्तिगत
लाभार्थियों
को लाभान्वित
किया गया है ? यदि
हां, तो
दिनांक 01
अप्रैल, 2001 से अब
तक के व्यक्तिगत
लाभार्थियों
की ग्रामवार
सूची सदन की
मेज पर रखें ।
(3)
क्या यह सही
है कि सरकार
द्वारा इन
लाभार्थियों का
भौतिक सत्यापन
किया गया है ? यदि
हां, तो
दिनांक 01
अप्रैल, 2001 से अब
तक के
लाभार्थियों
का कब कब
भौतिक सत्यापन
किया गया एवं
उनमें क्या
क्या कमियां
पाई गईं ?
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): (1) जी हां
। बायफ संस्था
द्वारा विधान
सभा क्षेत्र
जहाजपुर में
दिनांक 1.4.2001 से
निम्न विकास
कार्य करवाये
जा रहे हैं :-
1.
सामुदायिक
चारागाह
विकास कार्य
2.
पशुधन
विकास केन्द्र
3.
पैरावेट
केन्द्र
4.
फलोद्यान
विकास
कार्यक्रम
सूची
परिशिष्ठ ‘अ'
पर संलग्न है
।
(2)
जी हां । बायफ
द्वारा
जहाजपुर
क्षेत्र में व्यक्तिगत
लाभार्थियों
को लाभान्वित
किया गया है ।
विभिन्न
विकास
कार्यों में
दिनांक 1.4.2001 से ब
तक की व्यक्तिगत
लार्भाथियों
की ग्रामवार
सूची परिशिष्ठभ्‘ब’
पर संलग्न है
।
(3)
जी हां ।
दिनांक 1.4.2001 से
जहाजपुर
क्षेत्र में
बायफ संस्थ्ंा
को स्वीकृत
कार्यों का
भौतिक सत्यापन
निम्नानुसार
किया गया है :-
1.
पैरावेट केन्द्र
जालमपुरा एवं
पशुधन विकास
केन्द्र
द्योड,
लुहारीकलां,
ऊँचा के
लाभार्थियों का
भौतिक सत्यापन
माह नवम्बर, 2002
में किया गया
। भौतिक सत्यापन
में ंकार्य
सही पाया गया
।
2.
सामुदायिक
चारागाह
विकास
कार्यों में
से नमूना जांच
के आधार पर
ग्राम
रतनपुरा, तीखी
एवं मेडिया के
चारागाह
विकास
कार्यों का
भौतिक सत्यापन
माह जुलाई, 2003
में किया गया
। भौतिक सत्यापन
में कार्य सही
पाया गया ।
श्री
शिवजीराम
मीणा
(जहाजपुर): अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
मंत्री महोदय
से जानना
चाहता हूं कि
फलोद्यान
विकास
कार्यक्रम में
व्यक्तिगत
लाभार्थियों
को कितनी
कितनी राशि किस
किस फलोद्यान
हेतु उपलब्ध
कराई गई है ।
विष्णु/
यू.एस./ 09.10.06/ 11.30/1d
मैं खण्ड 3 में यह जानना चाह रहा था कि क्या आपने कभी इन वैयक्तिक लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करवाया है? आपने जो सूचियां दी हैं वह केवल ... (व्यवधान) केन्द्र का और चारागाह की दी है। मैं आपसे यह भी जानना चाह रहा हूं कि आपके द्वारा व्यक्तिगत लाभार्थियों का कब-कब भौतिक सत्यापन किया गया है? दूसरा, मैं यह जानना चाहता हूं कि सामुदायिक चारागाह विकास कार्यक्रम में अब तक प्रथम एवं द्वितीय चरण में कितनी-कितनी राशि व्यय की गयी एवं यह कार्य श्रमिकों द्वारा करवाया गया या मशीनों द्वारा? तीसरा, मैं आपसे माननीय मंत्री महोदय, यह जानना चाहता हूं कि क्या यह कार्य मानव दिवस सृजित करने के लिए श्रमिकों से करवाये जाने का प्रावधान है या मशीनों से करवाये जाने का नियमों में प्रावधान है? नम्बर-4, मैं यह जानना चाहता हूं कि सामुदायिक चारागाह विकास कार्यक्रम चरण- 2 में अमरासियन-लोहारीकलां में क्या-क्या कार्य करवाये गये, कृपया सूचना देने का कष्ट करें। ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, जहाजपुर क्षेत्र के अन्दर जो कार्य करवाये गये हैं इसकी प्रगति और उसका भौतिक सत्यापन और कार्य किस प्रकार से किये गये हैं, यह तमाम जानकारी आपने चाही है इसके अन्तर्गत। मूल प्रश्न जनजाति क्षेत्र विभाग का, यह इस क्षेत्र के अन्तर्गत जो कार्य किये हैं उसमें फलोद्यान विकास कार्य इस विभाग से संबंधित है। शेष कार्य जो है वह पंचायती राज विभाग से सम्पन्न करवाये जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत पहला है फलोद्यान विकास परियोजना और उसके अन्तर्गत यह जो उपलब्धि और उसका भौतिक सत्यापन यानि फलोद्यान विकास कार्य के अन्तर्गत वर्ष 2004-05 के अन्तर्गत उसका लक्ष्य 635 था, भौतिक उपलब्धि 635 थी। आवंटन उसका 28 था। वर्ष 2005-06 के अन्तर्गत लक्ष्य 1164 और उपलब्धि 1164 थी। ऐसे ही 2006-07 में 353 इसका लक्ष्य है, उसी प्रकार बंजर भूमि विकास के अन्तर्गत 2005 के अन्दर 555 और उपलब्धि 555, 2005-06 के अन्तर्गत 1294, 1294 उसकी उपलब्धियां हैं। पशुधन विकास केन्द्रों का संचालन, 2004-05 में 2 और उपलब्धियां भी 2, 2006-07 में इसकी उपलब्धियां, इसमें फलोद्यान में भी लगभग प्रति बाड़ी 1230, 300 रुपये उसका व्यय आता है और इसी तरह से यह कार्य जो है वह ग्राम विकास समिति के माध्यम से वहां जहां लोकल पंचायतबार किया जा रहा है, जिसकी परिशिष्ट 400 पेज में पूरी सूची चाही है, लाभार्थियां की इसके अन्तर्गत है।
श्री अध्यक्ष: हां, 400 पेज की सूची दे दी इन्होंने।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): उसके अन्तर्गत दी गयी है और इसी प्रकार आपने कहा कि यहां पर जहाजपुर में जो बायफ काम कर रही है, उसके अन्तर्गत रतनपुरा गांव के अन्तर्गत आपने कहा है लेकिन इसकी सूचना जो मेरे पास है वह निवेदन करना चाहूंगा कि भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील में रतनपुरा में चारागाह प्रबंध समिति एवं ग्राम पंचायत समिति सरपंच के बीच में आपसी ताल-मेल कम है इससे यह स्पष्ट है कि चारागाह का भविष्य खतरे में है और इसके कारण से ग्राम पंचायत की भूमि एवं इनके कोष की राशि स्थानांतरित करना अनिवार्य हो रही है। ग्राम पंचायत समिति इसका विरोध करती है। ग्राम पंचायत समिति इसका विरोध करती है कि ... (व्यवधान) दोनों के चारागाह को ध्यान में रखते हुए ... (व्यवधान) यह पूरे लाभार्थियां की दे दी है। ... (व्यवधान)
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय मंत्रीजी, यह ग्राम सभा की है। ग्राम पंचायत की कोई बात ही नहीं पूछ रहा हूं मैं आपसे। मैं तो आपसे यह निवेदन करना चाह रहा हूं कि आप तो आपके विभाग की बात बता दीजिए।
श्री अध्यक्ष: यह आपने 400 पेज की सूची तो दे दी इनको और क्या बाकी रह गया अब?
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और यह जो चारागाह, जिसके अन्तर्गत यह रतनपुरा जो जगह है वह 11 तारीख आने वाली 11 तारीख को एक मीटिंग इनकी रखी है। इसके अन्तर्गत यह पूरा उसका समाधान होना है ... (व्यवधान)
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): झगड़े की तो कोई बात ही नहीं है, मंत्रीजी। झगड़े की कहां बात आ रही है इसमें? नहीं, झगड़े की तो कोई बात ही नहीं है। मैं तो आपसे यह निवेदन करना चाह रहा हूं ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: जहाजपुर से आने वाले माननीय सदस्य, आपको इतनी विस्तृत सूची दे दी, अब क्या बाकी रह गया?
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप तो आपके विभाग की ही बता दीजिए मेरे को। आप तो यह बता दीजिए कि ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, 400 पेज से भी ऊपर पूरी सूची है, इसके अन्दर एक-एक लाभार्थी को क्या-क्या सुविधा, क्या-क्या स्थिति है और माननीय, उसमें भौतिक सत्यापन की दृष्टि से भी मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: श्री रामचन्द्र जारोड़ा।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): जिसके अन्तर्गत हमारा जो बी.डी.ओ. है उसने भी इसकी जांच की है।
श्री अध्यक्ष: आप स्थान ग्रहण करें।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): इसके अलावा बायफ संस्था के अधिकारियों द्वारा भी इसकी जांच की गयी है और उसका प्रशस्ति पत्र भी दिया है।
श्री अध्यक्ष: कृपया, स्थान ग्रहण करें। वे जवाब तो दे रहे हैं आपको। ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और माननीय सदस्य ने भी उनको प्रशस्ति पत्र दिया है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप स्थान ग्रहण करें। जब मंत्री बोलते हैं तो सदस्य को स्थान ग्रहण कर लेना चाहिए। ... (व्यवधान)
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह पूरी रिपोर्ट मेरे पास में है, जिसमें आप ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं,, आप स्थान ग्रहण करिये। ... (व्यवधान)
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, केवल आपके विभाग से संबंधित जानकारी दे दीजिए मेरे को। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: इतनी विस्तृत जानकारी के बाद और क्या चाहते हैं आप?
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): आपने फलोद्यान कार्यक्रम में जो कार्य करवाया है। आपने जिन लाभार्थियों की सूची दी है, उनको कितना-कितना भुगतान कर दिया और कब-कब किया यह बता दीजिए मेरे को। ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): आपने जो कहा है उसके अन्तर्गत मैंने निवेदन किया कि एक-एक का अगर आप पूछेंगे तो मैं पूरा ही आपके सामने यहां विवरण रख रहा हूं अगर आप चाहे तो पूरा एक-एक का मैं डिटेल दे सकता हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप काहे को डिटेल में जाने की बात कर रहे हैं? आपने तो विस्तृत जानकारी दे दी। ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नहीं, यह चाहे तो मैं पूरा एक-एक करके पूरा बता सकता हूं।
श्री अध्यक्ष: इतना लम्बा तो दे दिया। आज दिन तक आया ही नहीं इतना। इतनी लम्बी सूची कभी आयी ही नहीं।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): जिसके अन्तर्गत उस कार्य के अन्तर्गत पूरा उसमें ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय मंत्रीजी, बैठिये। आपने काफी सूचनाएं उनको दे दीं। नेक्स्ट क्वेश्चन। श्री रामचन्द्र जारोड़ा।
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): आप तो एक का ही बता दीजिए कि साहब आपने कब इसमें भुगतान किया इसको बता दीजिए। आप तो एक बार का ही बता दीजिए कि कब भुगतान हुआ? एक आदमी का ही यह बता दीजिए मेरे को। आप तो केवल एक आदमी का ही बता दीजिए। ... (व्यवधान)
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): क्या चीज?
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): फलोद्यान के लिए आपने कब भुगतान किया?
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): एक आदमी हो तो, मैं तो पूरी सूची 400 पेज की, मैं आपको पढ़कर सुना दूं ?
श्री अध्यक्ष: एक-एक व्यक्ति का नाम तो दिया है आपको।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह 400 से ऊपर पेज की है। व्यक्तिगत, अब कोई जांच अगर करनी है, 400 पेज की है। जितने लाभार्थी है उसमें से स्पेसिफिक रेण्डम प्रणाली के आधार पर उसकी जांच की जाती है, उसके आधार पर हम इसकी जांच करवा सकते हैं और आप चाहे जो स्पेसिफिक बता दें, कोई एक व्यक्ति की हमारे यहां पर आवश्यकता है, उसकी जांच करवाकर मैं उसको देखकर आपको बता दूंगा।
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): नहीं, मैं जांच की बात नहीं कर रहा हूं। मैं तो केवल यही निवेदन कर रहा हूं, मुझे एक आदमी का नाम बता दो, कब भुगतान किया उसका? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन श्री रामचन्द्र जारोड़ा। आप स्थान ग्रहण करें, माननीय सदस्य।
श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): एक ही लाभार्थी का नाम बता दीजिए, जिसको आपने भुगतान किया ?
श्री अध्यक्ष: जहाजपुर से आने वाले माननीय सदस्य। नेक्स्ट क्वेश्चन।
श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): इसकी पूरी सूची है।
श्री अध्यक्ष: सार्वजनिक निर्माण मंत्री। नहीं-नहीं राजस्व मंत्री। राजस्व मंत्री। राजस्व मंत्री।
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, आज राजस्व मंत्रीजी का जन्म दिन भी है।
श्री अध्यक्ष: बधाई हो। आपको सम्पूर्ण सदन की और से जन्मदिन की बधाई।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, आप सभी का धन्यवाद और आपकी कृपा दृष्टि बनी रहे।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): बिना लड्डू के कोई बधाई दी जाती है क्या? लड्डू बटते हैं। दोनों पक्षों में बटते हैं। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: अकाल पडा हुआ है।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अकाल पडा हुआ है, अख़बार तो भरे हुए है बधाई से। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पहला सवाल तो यही है कि आप लड्डू खिलाओगे या नहीं?
श्री अध्यक्ष: यह क्या खिलाएंगे, पी.ए.डी. मिनिस्टर आप हैं, आप खिलाइये सबको।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप आसन से व्यवस्था दे रहे हैं तो माननीय अध्यक्ष महोदय, आज्ञा की पालना करेंगे। ... (व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): आसन ही व्यवस्था करेगा या आप भी अपने आप भी कुछ सोच लिया करो। ... (व्यवधान)
मेड़ता
सिटी को जिले
का दर्जा
65. श्री रामचन्द्र जारोड़ा (मेड़ता): क्या राजस्व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) राज्य में कितने नये जिले बनाने की सरकार की योजना है व इनको कब तक बना दिया जावेगा? यदि नहीं, तो क्यों?
(2) क्या सरकार मेड़ता सिटी को जिला बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्यों?
राजस्व मंत्री (श्री रामनारायण डूडी): (1) कोई संख्या निर्धारित नहीं है। नवीन जिलों के गठन के संबंध में दिनांक 18.3.2006 को अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, अजमेर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही नये जिले बनाने पर गुणावगुण के आधार पर विचार किया जा सकेगा।
(2) खण्ड संख्या-एक में उल्लेखित समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही गुणावगुण के आधार पर निर्णय लिया जा सकेगा।
श्री रामचन्द्र जारोड़ा (मेड़ता): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि यह समिति के गठन होने के बाद इसकी कितनी बैठकें हुईं और कब-कब बैठकें हुईं, इसकी रिपोर्ट बतायें। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अभी तो बनायी ही है कमेटी।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): कोई निश्चित अवधि तो आप बताओ। आपके कार्यकाल में रिपोर्ट ही नहीं आये तो फिर आप कैसे जिले बनाओगे?
श्री रामचन्द्र जारोड़ा (मेड़ता): माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि किन-किन नये जिलों के बनाने का यह प्रस्ताव रख रहे हैं?
श्री अध्यक्ष: अभी कह दिया न इन्होंने, जवाब दे दिया।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, एक फरवरी, 2002 के बाद में परिसीमन चुनाव आयोग का प्रतिबंध हटा था नये जिले बनाने का और करने का, उसके बाद के अन्दर और पहले से हमारे पास काफी जिला से संबंधित प्रार्थना पत्र आये हुए थे अलग-अलग जगह से और उनके बाद में एक समिति का गठन किया गया। फिर 18.3.2006 को एक समिति बनायी गयी और उस समिति में अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, अजमेर, प्रमुख शासन सचिव, राजस्व विभाग, सदस्य है, प्रमुख शासन सचिव, वित्त सदस्य हैं और प्रमुख शासन सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, यह सदस्य, चेयरमैन रेवेन्यू बोर्ड की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया।
श्री रामचन्द्र जारोड़ा (मेड़ता): बैठक हुई या नहीं हुई?
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): इसकी
दो बैठकें हो
चुकी हैं।
शिव/चौहान/11.40/1e/9.10.2006
और
दो बैठकों के
अंदर प्रथम
बैठक 27 मार्च, 2006
को हुई और दूसरी
बैठक 19.8.2006 को सम्पन्न
हुई और इसमें
रेवेन्यू
बोर्ड के
जितने भी
प्रस्ताव
आये या सरकार
के पास सीधे
प्रस्ताव
आये कि अमुक
जगह को जिला
बनाया जाये,
उन सब पर
विचार किया जा
रहा है और
उनकी पूरी
रिपोर्ट
मंगाई जा रही
है।
श्री
अध्यक्ष:
हां, कमेटी को
रेफर कर दिया।
वह सब कमेटी
को रेफर कर
दिये। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी: और
कमेटी गठित कर
दी है।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा : कमेटी
निर्णय कब
करेगी ? (व्यवधान)
....
श्री
अध्यक्ष: नैक्स्ट
क्वेश्चन
अशोक कुमार
नवलखा। (व्यवधान)...
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा : अध्यक्ष
महोदय, जवाब
तो दिलाइये।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सुनवाई
नहीं हुई। (व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
कमेटी को रेफर
कर दिया।
कमेटी की
रिपोर्ट
आयेगी, उसके
बाद जिले
बनेंगे। (व्यवधान)
... नहीं, कुछ
नहीं । (व्यवधान)
.. नैक्स्ट
क्वेश्चन
श्री अशोक
कुमार नवलखा।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा :
रिपोर्ट कब
आयेगी ? यह
जवाब कब तक
पेश करेंगे ?
(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा :
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री महोदय
से यह जानना
चाहूंगा कि यह
कमेटी का
निर्धारित
समय क्या है ?
(व्यवधान) ...
श्री
अध्यक्ष: आप
बैठिये।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा :
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्रीजी से
यह पूछना
चाहता हूं कि
यह अगली सरकार
करेगी या यह
सरकार करेगी ?
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन,
कितनी बार कह
दिया कि कमेटी
को रेफर कर
दिया, कमेटी
बना दी, कमेटी
की रिपोर्ट
आयेगी, उसके अनुसार
कार्य
करेंगे। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा : यह
सरकार करेगी
या अगली सरकार
करेगी? (व्यवधान)
श्री
सांवरलाल :
वसुन्धरा जी
की सरकार
करेगी ।
(व्यवधान) ....
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्रीजी ।
(व्यवधान)
श्री अशोक कुमार
नवलखा।
जिला
चित्तौड़गढ़
के
धार्मिक/दर्शनीय
स्थलों हेतु
सड़क मार्ग
66.श्री
अशोक कुमार
नवलखा (निम्बाहेड़ा):
क्या
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) क्या
सरकार की
प्रमुख
धार्मिक एवं
दर्शनीय स्थलों
को सड़क मार्ग
से जोड़ने की
योजना है ? यदि
हां, तो इस
वर्ष हेतु
कितना बजट
प्रावधान किया
गया है? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(2) क्या
सरकार निम्बाहेड़ा
व छोटी सादड़ी
तहसील के
धार्मिक स्थानों
को सड़क
मार्गों से
जोड़ने का
विचार रखती है
? यदि हां, तो
कौन-कौनसे
धार्मिक स्थान
चिन्हित किये
गये ? इन स्थानों
को कब तक सड़क
से जोड़ दिया
जायेगा?
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री (श्री
राजेन्द्र
राठौड़) : (1) जी
हां। वर्ष 2006-07
में महत्वपूर्ण
धार्मिक एवं
पर्यटक स्थलों
को सड़क से
जोड़ने हेतु रुपये
20.00 करोड़ का
प्रावधान रखा
गया है।
(2) जी
हां। निम्बाहेड़ा
व छोटी सादड़ी
तहसील के
धार्मिक स्थानों
को सड़क मार्ग
से जोड़ने का
कार्य राज्य
के उपलब्ध
वित्तीय
संसाधनों एवं
प्राथमिकता
पर निर्भर करता
है।
श्री
अध्यक्ष:
आपने कौन-कौन से
धार्मिक स्थान
चिन्हित किये,
यह बताये ही
नहीं?
श्री
अशोक कुमार
नवलखा: माननीय
मंत्री महोदय
से यह जानना
चाहता हूं, आपको इस
बात के लिये
तो धन्यवाद
कि आपने
धार्मिक एवं
पर्यटन स्थलों
को जोड़ने के
लिये इस वर्ष 20
करोड़ रुपये का
बजट रखा है और
आपने खण्ड-2
में उत्तर
दिया है कि एक
तो मैंने पूछा
था कि क्या
सरकार निम्बाहेड़ा
व छोटी सादड़ी
के धार्मिक स्थानों
को सड़क मार्ग
से जोड़ने का
विचार रखती है
? यदि हां, तो
कौन-कौनसे
धार्मिक स्थान
चिन्हित किये
गये ? एक तो
माननीय
मंत्री महोदय
यह जो धार्मिक
स्थान
चिन्हित किये
गये, कृपया वह
बताने की कृपा
करें कि आपने
इस उत्तर में
लिखा है कि सरकार
के वित्तीय
संस्थानों
पर निर्भर
करता है। जब
आपने वित्तीय
संसाधन इस बार
20 करोड़ रुपये
बताये हैं तो मैं
चाहूंगा कि 20
करोड़ में से
निम्बाहेड़ा,
छोटी सादड़ी
विधान सभा
क्षेत्र के लिये
आप कितनी
सड़कों का
इसमें
प्रावधान
रखते हैं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, जहां
तक धार्मिक स्थानों
का चयन करने
का प्रकरण है।
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
तो एक ऐसी
धरती है जहां
घट-घट में राम
भी है, ईश्वर
भी है और
धार्मिक स्थान
भी हैं । अध्यक्ष
महोदय, अगर हम
बालाजी की बात
भी करें तो करंट
के बालाजी
यहां हैं, लंगड़े
बालाजी यहां
हैं, घाट के
बालाजी यहां
हैं, पंचमुखी
बालाजी यहां
हैं, नहर के
बालाजी यहां है,
खड़े बालाजी
यहां हैं,
बैठे बालाजी
यहां है ... (व्यवधान)
..
श्री
अध्यक्ष:
बालाजी को आप
लंगड़ा तो मत
करो कम से कम । (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : नहीं,
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन कर रहा
था कि धार्मिक
स्थलों का
अगर पूरा चयन
करने की बात
करें तो हर गांव
में कोई न कोई
धार्मिक स्थल
है पर इसमें
कोई शक नहीं
कि कुछ हमारी
धार्मिक मान्यताओं
के आधार पर जहां
बहुत बड़ी
संख्या में
धार्मिक लोग
हैं उनको
जोड़ने के
लिये निश्चित
रूप से पहली
बार सरकार ने
प्रावधान किया
है। इसमें,
अध्यक्ष
महोदय, यही
नहीं पिछली
बार भी हमने
इसमें कुछ
राशि का
प्रावधान
किया था।
पिछली बार 12 ऐसे
स्थान चयनित
किये और 7
करोड़ 52 लाख
रुपये करके
हमने इन
धार्मिक स्थलों
को जोड़ा और
इस बार, अध्यक्ष
महोदय, 50 ऐसे स्थान
हैं, जिनके
लिये 22 करोड़
की स्वीकृति हमने
जारी कर दी है
और निश्चित
तौर पर सरकार
की यह मान्यता
है और इच्छा
शक्ति भी है
कि सरकार ऐसे
धार्मिक स्थल,
जो सड़क से
जुड़े हुए
नहीं हैं और
जहां श्रद्धालु
लोग ज्यादा
जाते हैं उनका
चिन्हितिकरण
करके हम उनको
शनै:-शनै: जैसे
जैसे वित्तीय
संसाधन उपलब्ध
होंगे, हम
उनको
जोड़ेंगे।
श्री
अशोक कुमार
नवलखा : माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन कर रहा
था निम्बाहेड़ा,
छोटी सादड़ी
मेरे विधान
सभा की जो प्रमुख
सड़कें थीं
जैसे भम्भौरी
से गंगेश्वर
महादेव, पार्श्वनाथ
भगवान का
तीर्थ स्थान,
बुलबुला
महादेव
आदिवासी क्ष्ज्ञेत्र
का एक प्रमुख
मंदिर है वह
तथा निम्बाहेड़ा
क्षेत्र के
कनेरा से
सीमला महादेव
और 113 बाड़ी से
रूसी रानी महल
तक, यह ऐसे
तीर्थ स्थान
और ऐसे
धार्मिक स्थल
हैं जहां
प्रतिवर्ष
मेले लगते हैं
और हजारों की
संख्या में
लोग आते हैं।
इस प्रकार की
यह सड़कें हैं
माननीय
मंत्रीजी।
..(व्यवधान) ...
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछें भाषण न
दें।
श्री
अशोक कुमार
नवलखा : यह
निवेदन कर रहा
हूं कि इन धार्मिक
स्थलों को भी
इसमें
चिन्हित किया
जावे।
श्री
अध्यक्ष: कह
तो दिया । उन्होंने
बता दिया न ।
(व्यवधान) ...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : निश्चित
रूप से छोटी
सादड़ी में भी
काफी ऐसे स्थान
हैं, मैं इनसे
चर्चा करके
जहां बड़ी
संख्या में
श्रद्धालु
जाते हैं,
उनको
करवायेंगे। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
श्री प्रमोद
जैन’भाया’ ।
(व्यवधान) ..
श्री
सी.डी.देवल :
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
भी एक प्रश्न
है। (व्यवधान)
..माननीय अध्यक्ष
महोदय, विधान
सभा के पटल पर
माननीय देवस्थान
मंत्रीजी ने
एक धाणेश्वर
महादेव की
सड़क जोड़ने
का आश्वासन
दिया था। मेरी
बात तो
सुनिये। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: डॉ0
चन्द्रशेखर
बैद। (व्यवधान)
श्री
सी.डी.देवल:
विधान सभा में
देवस्थान
मंत्रीजी ने
आश्वासन
दिया था कि
तीन कि.मी.
धाणेश्वर
महादेव को
जोड़ दिया
जायेगा, तो
इसको कब तक जोड़
दिया जावेगा ? फिर
मंत्रीजी
यहां विधान
सभा में आश्वासन
ही क्यों
देते हैं ? (व्यवधान)
इसके अंदर
देवस्थान का
वह मंदिर नहीं
आया। (व्यवधान)
...
श्री
अध्यक्ष:
आपका अलग से
प्रश्न है
बूंदी से आने
वाली माननीया
सदस्या। (व्यवधान)
अंकित नहीं
हो।
श्रीमती
ममता शर्मा : ***
श्री
सी.डी.देवल : ***
श्री
अध्यक्ष: मैंने
नैक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया।
रायपुर से आने
वाले माननीय
सदस्य, कृपया
सदन का समय
खराब नहीं
करें । मैंने
नैक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया।
डॉ0 चन्द्रशेखर
बैद। (व्यवधान)
...
श्री
सी.डी.देवल : ***
डॉ0
चन्द्रशेखर
बैद : ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : ***
श्री
सी.डी.देवल : ***
श्री
अध्यक्ष:
प्रमोद जैन ‘भाया’
कहां हैं ? (व्यवधान)
... प्रमोद जैन ‘भाया’,
प्रश्न
पूछिये ना ।
(व्यवधान)...
भ्रूण
हत्या पर
रोकथाम हेतु
कार्य योजना
66-क. श्री प्रमोद
जैन ‘भाया’
(बारां) एवं डॉ0
चन्द्रशेखर
बैद(तारानगर) : क्या
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री यह बताने
की कृपा
करेंगे :-
(1) प्रदेश
में वर्ष 2004 से
अब तक कितने
भ्रूण हत्या
के मामले
प्रकाश में
आये? वर्षवार
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2) उक्त
हत्याओं में
किन-किन
चिकित्सकों/चिकित्सालयों
के विरूद्ध
किन-किन धाराओं
में कहां-कहां
रिपोर्ट दर्ज
करवाई गई एवं
सरकार द्वारा
अब तक क्या
कार्यवाही की
गयी ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(3) सरकार
द्वारा उक्त
प्रकार के
कृत्यों को
रोकने हेतु क्या
कारगर कदम
उठाये गये ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(4) विभागीय
आदेशों के बाद
भी प्रथम
सूचना
रिपोर्ट दर्ज
कराने में
विलम्ब करने
हेतु कौन-कौन
मुख्य
चिकित्सा
अधिकारी दोषी
हैं ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(5) क्या
यह सही है कि
वर्ष 2006 में एक
निजी
टी.वी.चैनल
द्वारा कन्या
भ्रूण हत्या
से संबंधित
मामलों में
नर्सिंग
होम/चिकित्सालयों
व चिकित्सकों
को चिन्हित
किया गया था ?
(6) क्या
यह सही है कि
उक्त निजी
टी.वी.चैनल
द्वारा सरकार
को साक्ष्य
उपलब्ध करा
दिये गये हैं ? यदि
हां, तो कब ?
(7) क्या
यह सही है कि उक्त
साक्ष्यों
को सही मानते
हुए सरकार
द्वारा
चिन्हित डाक्टरों
व चिकित्सा
संस्थाओं के
विरूद्ध
कार्यवाही की
गयी है ? यदि
हां, तो क्या
व उक्त
कार्यवाही के
क्या परिणाम
रहे ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(8) क्या
यह सही है कि
सरकार द्वारा
उक्त प्रकरण
में लिप्त
चिकित्सकों
का पंजीयन
निलम्बित
करने हेतु
मेडिकल काउन्सिल
ऑफ इण्डिया को
अनुरोध पत्र
लिखा गया है ? यदि
हां, तो पत्र
की प्रति सदन
की मेज पर
रखें तथा नहीं
तो क्यों?
(9) क्या
उक्त निजी
टी.वी.चैनल
कर्मियों
द्वारा इस
कुकृत्य को
उजागर करने के
लिये सरकार
उन्हें
पुरस्कृत
करने का विचार
रखती है ? यदि
हां, तो कब तक व
नहीं तो क्यों
?
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री (डॉ0
दिगम्बर
सिंह) : (1) प्रदेश
में वर्ष 2004 एवं
2005 में इस प्रकार
का मामला
प्रकाश में
नहीं आया है।
वर्ष 2006 में उदयपुर
की फतहसागर
झील में तीन
मृत कन्या
भ्रूण पाये
गये हैं, जिस
संबंध में
पुलिस द्वारा
अनुसंधान
किया जा रहा
है।
(2) मृत
कन्या भ्रूण
मिलने के क्रम
में मुख्य
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
अधिकारी,
उदयपुर
द्वारा निम्न
कार्यवाही की
गयी :-
- अपर्णा
हास्पिटल एवं
डायग्नोस्टिक
सेन्टर,
उदयपुर में
अधिनियम के
अन्तर्गत
अभिलेख
संधारण में
कमियां पाये
पाये जाने के
कारण संस्थान
की
सोनोग्राफी
मशीन एवं
एमटीपी रजिस्ट्रेशन
निलम्बित
किया गया।- कस्तूरबा
मातृ मंदिर,
उदयपुर में
रिकार्ड का संधारण
सही नहीं पाये
जाने के कारण
संस्थान की
सोनोग्राफी मशीन
को सील एवं
सीज किया गया
एव एमटीपी
रजिस्ट्रेशन
निलम्बित
किया गया। उक्त
संस्थान के
विरूद्ध पी सी
पी एन डी टी
एक्ट, 1994 के अन्तर्गत
इस्तगासा
दायर कर दिया
गया है।
-
महावीर
हॉस्पिटल
उदयपुर
द्वारा
अधिनियम के
विरूद्ध
सोनोग्राफी करके
एम टी पी करने
के कारण संस्थान
की
सोनोग्राफी
मशीन को सील
एवं सीज किया
गया एवं एम टी
पी रजिस्ट्रेशन
निलम्बित
किया गया। उक्त
संस्थान के
विरूद्ध पी सी
पी एम डी टी
एक्ट, 1994 के अन्तर्गत
एफ आई आर दर्ज
करा दी गयी
है।
(3) विभाग
द्वारा कन्या
भ्रूण हत्या
रोकने हेतु
विज्ञापनों,
होर्डिंग्स,
बैनर्स, पोस्टर्स
आदि के द्वारा
जन जन में
समग्र प्रचार
प्रसार किया
जा रहा है।
विभाग द्वारा
भ्रूण हत्या
हेतु लिंग चयन
की प्रवृत्ति को
रोकने के लिये
केन्द्र
सरकार द्वारा
गर्भ धारण
पूर्व और
प्रसव पूर्व
निदान तकनीक (लिंग
चयन प्रतिषेध)
अधिनियम, 1994
दिनांक 1.1.96 से
प्रभावशील
किया। राज्य
सरकार ने इस
अधिनियम को
राजस्थान
प्रदेश में
दिनांक 1.1.96 से
लागू किया है।
विभाग द्वारा
उक्त
अधिनियम की
क्रियान्विति
के संबंध में
की गई
कार्यवाही का
विवरण
परिशिष्ट-1
पर उपलब्ध
है।
(4) विभागीय
आदेशों के बाद
भी प्रथम
सूचना रिपोर्ट
दर्ज कराने
में विलम्ब
करने हेतु कोई
भी मुख्य
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
अधिकारी दोषी नहीं
है, क्योंकि
टी.वी.चैनल
राष्ट्रीय
सहारा समय
द्वारा
प्रकरण से
संबंधित असम्पादित
सी डी, पूर्ण
साक्ष्य, दस्तावेज
गवाहों के
नाम, पते आदि
अभी तक उपलब्ध
नहीं करवाये जाने
के कारण इस्तगासा
एवं एफ आई आर
दर्ज करवाने
में विलम्ब
हो रहा है।
(5) जी
हां।
(6) उक्त
निजी टी वी
चैनल द्वारा
सरकार को
पूर्ण साक्ष्य
उपलब्ध नहीं
करवाये गये
हैं। टी वी
चैनल द्वारा
वर्ष 2006 में
गर्भधारण
पूर्व और
प्रसव पूर्व
निदान तकनीक
(लिंग चयन
प्रतिषेध)
अधिनियम, 1994 एवं
गर्भ का
चिकित्सकीय
समापन
अधिनियम 1971 के
प्रावधानों
की अवहेलना
करने से संबंधित
उजागर किये
गये 55
सरकारी/निजी
चिकित्सकों
एवं एक
प्रसाविका
में से अभी तक
केवल 20 सरकारी/निजी
चिकित्सकों
की असम्पादित
सी डी उपलब्ध
करवाई गई है।
महेन्द्र/चौहान/1f/1150/09102006
उक्त
चैनल द्वारा शेष
35 सरकारी व
निजी चिकित्सकों
से सम्बन्धित
असम्पादित
सी.डी. अभी तक
उपलब्ध नहीं
करवायी गयी है
अथा साक्ष्य
के रूप में
सभी सरकारी
एवं निजी
चिकित्सकों
के सम्बन्ध
में पूर्ण
साक्ष्य, दस्तावेज,
गवाहों के
नाम, पते आदि
अभी तक उपलब्ध
नहीं करवाये
गये हैं।
(7) टी.सी.
चैनल द्वारा
दिनांक 05.04.2006 से 23.04.2006
एवं 13.06.2006 को 'कोख
में कत्ल'
नाम शीर्षक से
प्रसारित
समाचारों के
आधार पर विभाग
द्वारा
गर्भधारण
पूर्व और
प्रसव पूर्व
निदान तकनीक
(लिंग चयन
प्रतिषेध)
अधिनियम, 1994 के
अन्तर्गत 55
सरकारी एवं
निजी चिकित्सकों
एवं एक
प्रसाविका के
विरुद्ध
कार्यवाही की
गई है। विभाग
द्वारा की गई
कार्यवाही का विवरण
परिशिष्ट-2
एवं परिशिष्ट-3
पर उपलब्ध
है।
(8) जी
नहीं।
गर्भधारण
पूर्व और
प्रसव पूर्व
निदान तकनीक
(लिंग चयन
प्रतिषेध)
अधिनियम, 1994 की
धारा 23 (2) जो कि
निम्न
प्रकार उद्धत
है:-"The
name of the registered medical practitioner shall be reported by the
Appropriate Authority to the State Medical Council concerned for taking
necessary action including suspension of the registration if the charges are
framed by the court and till the case is disposed of and on conviction for
removal of his name from the register of the Council for a period of five years
for the first offence and permanently for the subsequent offence."
इसको
ध्यान में
रखते हुए
चूंकि अभी तक
किसी भी चिकित्सक
के खिलाफ
कोर्ट में
चार्ज फ्रेम
नहीं हुआ है
इसलिए
निदेशालय
द्वारा राजस्थान
मेडिकल
काउंसिल को
चिकित्सकों
के पंजीयन
निलम्बित
करने हेतु
पत्र नहीं
लिखा गया है
परन्तु
निदेशालय
द्वारा सम्बन्धित
मुख्य
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
अधिकारियों
को 20 चिकित्सकों
के विरुद्ध
अधिनियम, 1994 के
अन्तर्गत
इस्तगासा
दायर करने एवं
35 सरकारी एवं
निजी चिकित्सकों
के विरुद्ध
अधिनियम, 1994 के
अन्तर्गत
इस्तगासा
दायरकरने तथा
एम.टी.पी. एक्ट,
1971 के अन्तर्गत
एफ.आई.आर. दर्ज
कराने सम्बन्धी
पत्र क्रमांक
494 दिनांक 04.08.06 एवं
क्रमांक 495
दिनांक 04.08.06 की
प्रति राजस्थान
मेडिकल
काउंसिल को
सूचनार्थ एवं
आवश्यक
कार्यवाही
हेतु भिजवायी
गयी है। उक्त
दोनों पत्रों
की प्रति
परिशिष्ट-4
एवं परिशिष्ट-5
पर उपलब्ध
है।
यह
उल्लेखनीय
है कि राजस्थान
मेडिकल
काउंसिल
द्वारा उक्त चिकित्सकों
से सम्बन्धित
असम्पादित
सी.डी. प्राप्त
कर अपनी कमेटी
में प्रकरण की
जांच कर के
इंडियन
मेडिकल
काउंसिल के
अधिनियम के
नियम 2002 के चैप्टर
8 (5) के अन्तर्गत
7 चिकित्सकों
को
सोनोग्राफी
और गायनी के
कार्य पर 6 महीने
या जांच पूर्ण
होने तक के
लिए प्रतिबन्ध
लगाया है
जिसका विवरण
परिशिष्ट-2
एवं परिशिष्ट-3
पर उपलब्ध
है।
(9) टी.वी.
चैनल द्वारा
उजागर किये
गये प्रकरणों के
सम्बन्ध
में अभी
अनुसंधान
जारी है तत्पश्चात्
ही इस सम्बन्ध
में विचार
किया जावेगा।
श्री
प्रमोद जैन 'भाया' (बारां):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
माननीय
मंत्री महोदय
द्वारा खण्ड
चार का जो
जवाब दिया गया
है वह बिलकुल
तथ्यों के
परे है। आपने
कहा है कि
-विभागीय
आदेशें के बाद
भी प्रथम
सूचना
रिपोर्ट दर्ज
कराने में
विलम्ब करने
हेतु कोई भी
मुख्य
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
अधिकारी दोषी
नहीं है क्योंकि
टी.वी. चैनल
राष्ट्रीय
सहारा समय
द्वारा
प्रकरण से सम्बन्धित
असम्पादित
सी.डी. या
साक्ष पेश
नहीं कराये
गये हैं। जबकि
खुद यह
कार्यालय
उप-मुख्य
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
अधिकारी
द्वारा थाने
को जो रिपोर्ट
लिखी गयी है,
यह रिपोर्ट
लिखी गयी है 29
तारीख को और
वह जब जब यह
प्रश्न
तारांकित में
लिस्टेड हो
गया और उसमें
इन्होंने स्पष्ट
रिपोर्ट में
थाने में
सी.डी. और यह सब
कापियां
उपलब्ध
करायी हैं तो
जब सी.डी. और यह
वहां है और यह
चीज निदेशक के
पत्र क्रमांक
2006/594 के द्वारा 04.08.06
को ही सी.एम.एण्ड
एच.ओ. बारां को
भ्जिवा दिये
थे तो जब 04.08.06 को
यह सी.डी. और यह
सब बारां
सी.एम. एण्ड
एच.ओ. को जा
चुकी थी तो 29
तारीख को
एफ.आई.आर. दर्ज के
लिए क्यों
लिखी, इतने
दिन तक दोषी
जो अधिकारी है
उसके लिए
सरकार क्या
कार्यवाही
करेगी? और सदन
में जो गलत
तथ्य पेश
किये गये हैं,
इसके लिए आप
क्या
कार्यवाही
करेंगे? कृपया
सदन को अवगत
करावें।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसी
से जुड़ा हुआ
सवाल है, में
साथ ही पूंछ
लेता हूं।
एक तो
आज 2004, जनवरी से
लेकर अब तक
आपने तीन
सवालों के
जवाब दिये
हैं, 2004 में, 2005 में
और 2006 बजट तक,
आपने यह स्वीकार
किया है कि
कन्या भ्रूण
हत्या राजस्थान
राज्य में
नहीं हो रही
है। पहली बार
आपने 7 अप्रैल, 2005
को इस पवित्र
सदन में यह स्टेटमेण्ट
दिया था, उसके
बाद जो
पीसीपीएनडीटी
एक्ट है, 1994
अमेन्डेंट
इन 2002, उसको आपने ध्यान
से पढ़ा ही
नहीं क्योंकि
उसके अन्दर
जो क्लॉज दे
रखा है, क्लॉज
नम्बर 16 (ए)
उसमें साफ लिख
रखा है कि स्टेट
सुपरवाइजरी
बोर्ड का गठन
किया जायेगा
और उस स्टे
सुपरवाइजरी
बोर्ड के अध्यक्ष
कौन होंगे The Minister-in-Charge of
Health and Family Welfare.
अब इसका
जनवरी, 2004 के बाद
पहली बैठक
आपने इसकी कब
बुलायी? आपने
इसकी पहली
बैठक बुलायी
22.05.2006 को और उस
बैठक में आपकी
जो
सीन्सियरिटी
है पीसीपीएनडीटी
एक्ट के
प्रति वो इससे
जाहिर होती है
कि आपकी ही पार्टी
की तीन महिला
एम.एल.ए.
साहिबान जो
इसकी सदस्य
हैं, तीनों ही
उस मीटिंग के
अन्दर
एपसेण्ट
थीं। साथ ही
में मैं आपसे
यह भी निवेदन
करना चाहता
हूं कि जो
डिस्ट्रिक्ट
एडवाइजरी
कमेटीज
हैउसका गठन
अभी तक नहीं
किया गया। ...(व्यवधान)...
आपने
पीसीपीएनडीटी
एक्ट के अन्दर
जो फार्म एफ
भरते हैं ---
श्रीमती
लक्ष्मी बारूपाल
(देसूरी): उस
दिन हमारी
महिला और बाल
विकास कमेटी
की बैठक थी और
दोनों का टाइम
एक क्रैश कर
रहा थ इसकी
वजह से नहीं
आये थे हम।
श्री
अध्यक्ष: आप
थीं क्या
उसमें एक? ...(व्यवधान)...
आप भी हो क्या?
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
फार्म है, आप
तो गायनोकोलोजिस्ट
हो, आप के यहां
सारे फार्म एफ
भरे जाते हैं,
इसकी सख्ती
से पालना आज
तक नहीं की
गयी ---
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिये।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
और लास्ट क्वेश्चन
यह पूछ रहा
हूं कि जो
टी.वी. चैनल पर
आपने कहा कि
हम को सूचना
उपलब्ध नहीं
करायी, आपको 20
सी.डी. जो
ओरीजिनल थीं,
अभी तक उपलब्ध
करा दी गयी
हैं। उस 20 में
से आपने कितनी
कार्यवाही की?
सिर्फ सात पर
आपने
कार्यवाही
की। ऐसा क्यों?
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
तारानगर से
आने वाले
माननीय सदस्य
वैसे तो मेरे
साथी चिकित्सक
भी हैं पर ---
श्री
प्रमोद जैन 'भाया' (बारां):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
पहले मेरा भी
जवाब दें,
हुकुम, जिसमें
सी.डी. आपको
डेढ़ महीने
पहले मिल गयी,
रिपोर्ट भी
नहीं की गयी
और आप कह रहे
हैं कि विभाग
को सी.डी. नहीं मिली।
गलत तथ्य दे
रहे हैं आप
सदन को।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): मैं
आपको कोई गलत
बात सदन में
नहीं कह रहा
हूं और आप
अपनी गलत बात
को सही साबित
करने की कोशिश
गलत ढंग से कर
रहे हैं। मेरा
सदन में ...
श्री
प्रमोद जैन 'भाया' (बारां):
या तो आपके यह
विभाग के लैटर
गलत हैं।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
बिलकुल सही
हैं लैटर,
बिलकुल गलत नहीं
हैं।
श्री
प्रमोद जैन 'भाया' (बारां):
इसमें लिखा
हुआ है सी.डी.
और यह सब पेश
कर रखी है।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): लैटर
गलत नहीं हैं।
...(व्यवधान)...
लैटर भी गलत
नहीं हैं,
मेरी बात भी
गलत नहीं है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपको यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
पहली बार
राजस्थान
में इस सरकार
ने इस एक्ट
को इतनी सख्ती
से लागू किया,
इतने एक्शंस
हुए हैं,
सरकार तो इससे
पहले भी कर
रही है। आज तक
भ्रूण हत्या
का प्रकरण गत
जो सरकार थी
उसके समय पर
एक भी उजागर
हुआ हो, एक पर
भी एक्शन हुआ
हो, ऐसा तो
नहीं है ...
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
टी.वी. चैनल
में आने के पहले
एक भी केस
आपने दर्ज
नहीं किया।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): आप
मेरी बात सुन
लें, माननीय
सदस्य। ...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य,
मेरी बात सुन
लें। यह टी.वी.
चैनल से पहले
भी हमने एक्शंस
लिये हैं, वह
भी मैं आपको
पहले इस सदन
में बता चुका
हूं और आज भी
कहता हूं कि
यह टी.वी. चैनल पर
जो स्टिंग
आपरेशन हुआ
उससे पहले
हमने एक्शंस
लिये हैं और
उसमें दो तो
भरतपुर के
इंस्टिट्युशन
थे, जयपुर का
एक
इंस्टिट्युशन
था, उसके
खिलाफ हमने
पहले भी एक्शन
लिया, ऐसा
नहीं है कि
टी.वी. स्टिंग
आपरेशन से
पहले हमने
इसमें कोई एक्शन
नहीं लिये।
मैं
आपसे निवेदन
करना चाह रहा
हूं कि ऐसा
नहीं है कि
ढ़ाई साल में
यह लिंग
परीक्षण का और
यह काम शुरू
हुआ हो या यह जो
भ्रूण हत्या
का काम शुरू
हुआ हो, आपकी
सरकार में तो
बहुत लम्बे
समय तक इतना
बावेला मचा
था, मुझे ध्यान
में आपके ही
एक साथी
विधायक के घर
में उनके
परिवार में
भ्रूण हत्या
पुश्तैनी
मतलब
पीढि़यों से
होती आयी हैं,
आप इस चीज को ---
श्री
अध्यक्ष: क्या
बात है, वो
भ्रूण हत्या
नहीं थी, वो
जन्म के बाद
हत्या थी
इसलिए भ्रूण
हत्या नहीं
थी वो।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): वो
फीमेल फीटिसाइड
था वो।
श्री
अध्यक्ष: वो
अलग बात है, इट
अज डिफरेंट।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, फीमेल फीटिसाइड
था।