Bhs/usc/1100/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
|
अंक
5 बारहवीं
राजस्थान
विधान सभा के
पांचवें
सत्र का ग्यारहवां
दिवस संख्या
8 |
शुक्रवार,10
मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री
अध्यक्ष:
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित।
गौवध/तस्करी
की रोकथाम
हेतु
कार्य-योजना
124.श्री
शकरसिंह
राजपुरोहित
(आहोर): क्या
गृह मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
क्या
यह सही है कि
राज्य में
गौवध एवं गौ
तस्करी पर
रोक होने के
बावजूद भी
गौवंश राज्य
के सीमावर्ती
क्षेत्र
गुजरात सीमा
से महाराष्ट्र
आदि राज्यों
की तरफ कटने
के लिए जाते
हैं?
राज्य
में गौवध एवं
गौ तस्करी से
संबंधित विगत
पाँच वर्षों
में कितने मामले
पुलिस थानों
में दर्ज
हुये? इनमें
लिप्त व्यक्तियों
व वाहनों के
संबंध में सरकार
द्वारा क्या
कार्यवाही की
गई तथा कितने
पशु कब-कब
पकड़े गये?
जिलेवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
क्या
सरकार गौवंश
की तस्करी के
उपयोग में
लाये जाने
वाले वाहनों
पर आबकारी नियम
69/4 के तहत वाहन
को जब्त कर
उसकी 50
प्रतिशत राशि
जमानत पर रखने
एवं वाहन चालक
तथा उसके वाहन
मालिक को भी
दण्डित करने
का नियम बनाने
का विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
गृह
मंत्री (श्री
गुलाबचंद
कटारिया): (1) यह
सही है कि गुजरात
सीमा से लगने
वाले जिलों
सिरोही,
जालोर,
डूंगरपुर, बांसवाड़ा
एवं उदयपुर से
गौवंश राज्य
की गुजरात की
सीमा से
महाराष्ट्र
आदि राज्यों
की तरफ अवैध
निर्यात कर ले
जाने की घटना
की शिकायतें
आती हैं।
(2) राज्य
में विगत पाँच
वर्षों में
गौवध के कुल 351
अभियोग एवं
गौवंशीय
पशुओं के अवैध
निर्यात के 992
अभियोग दर्ज
हुए हैं। इन
अभियोगों में
लिप्त 3333 व्यक्तियों
के खिलाफ न्यायालय
में चालान
प्रस्तुत
किये गये तथा 604
वाहनों को भी
वजह सबूत में
जब्त किया
जाकर अदालत के
निर्णय
अनुसार
कार्यवाही की
गई। गौवंशीय
पशुओं के अवैध
निर्यात के
संबंध में
पकड़े गये 24871
पशुओं की
सूचना जिला
वार एवं वर्ष
वार परिशिष्ट
‘अ' पर संलग्न
है।
(3) राजस्थान
गौवंशीय पशु
(वध का
प्रतिषेध और
अस्थाई
प्रवर्जन या
निर्यात का
विनियमन)
अधिनियम, 1995 के
अन्तर्गत
कारित अपराध
के लिये उपयोग
में आने वाले
वाहन को
आबकारी नियम
के तहत जब्त
करना विधि सम्मत
नहीं होगा। आबकारी
अधिनियम की व्यवस्था
के अनुरूप
राजस्थान
गौवंशीय पशु
(वध का
प्रतिषेध और अस्थाई
प्रवर्जन या
निर्यात का
विनियमन)
अधिनियम, 1995 में
अपराध के लिये
उपयोग में
लाये जाने वाले
वाहनों को जब्त
करने बाबत
प्रावधान
नहीं है।
अधिनियम में संशोधन
का अभी काई
प्रस्ताव
राज्य सरकार
के समक्ष नहीं
है।
श्री
शकर सिंह
राजपुरोहित:
मान्यवर, अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
बड़ा मार्मिक
एक राष्ट्रीय
अस्मिता से
जुड़ा हुआ
प्रश्न है और
मैं यह
मानूंगा कि यह
सदन पूरा राजस्थान
के उस गौवंश
को बचाना
चाहता है जो
गौवंश अवैध
रूप से तस्करी
के माध्यम से
कटने के लिए
जाता है। गाय
हमारा माता है
और उसे बचाना
हमारा एक धर्म
बन जाता है इसलिए
मैं प्रश्न
के माध्यम से
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से यह
निवेदन
करूंगा कि एक
तो बॉर्डर पर
जो ये बॉर्डर
के थाने हैं
उस पर सीमा पर
एक अलग से ऐसी
पुलिस फोर्स
बनाने की इच्छा
रखते हैं जो
पुलिस फोर्स
इस प्रकार की
तस्करी को
रोक सकती है
और दूसरा यह
जो जब्त वाहन
हैं माननीय
अध्यक्ष
महोदया, 2003 में
मंडार पुलिस
थाना जो सिरोही
विधान सभा
क्षेत्र में
आता है और उस
थाने में 2003 में
एक ट्रक को 10
दिन में तीन
बार पकड़ा गया
मतलब पाँच-दस
हजार रुपये
देकर वो ट्रक
छूट जाता है
यह एक गौवंश
के साथ अन्याय
हुआ है ।
दस दिन में
तीन बार छूट
गया तो यह
घटनाएं कितने
ये तो रिकार्ड
में आयी हुई
है बिना
रिकार्ड में
आयी हुई घटनाएं
कितनी हैं। मतलब यह
हमारे ऊपर कितना
बड़ा महापाप
लगा है कि
हमारे होते
हुए इतना
गौवंश कटने के
लिए जाता है
तो यह एक इस
प्रकार का
नियम बनाया
जाए जो कि वाहनों
को जब्त करके
और उनकी कीमत
वसूली जाए। जो एक्साइज
में जो नियम
लगता है कि
मादक
पदार्थों की
तस्करी में 69
बी में ऐसा
नियम है कि
वाहनों को जब्त
करके उसकी आधी
कीमत वसूली
जाती है ऐसा
एक नियम बनाने
की क्या
सरकार इच्छा
रखती है?
पशुपालन
मंत्री और गृह
मंत्री महोदय
आप दोनों से
निवेदन है क्या
ऐसा नियम बना
सकते हैं
जिससे गौवंश
को रोकने में
राजस्थान की
एक अस्मिता को
कायम रखने में
हम मजबूत बन
सकते हैं!
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, मैं भी
एक निवेदन
करना चाहूंगा
मंत्री महोदय
से मैंने
पूर्व में भी
किया था कि जो
गौवंश को
प्रोटेक्शन
के लिए एक्ट
बना हुआ है...।
श्री
अध्यक्ष:
पहले मूल
प्रश्नकर्ता
का जवाब दे
रहे हैं।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: मैं
एक बार बता
दूं उसके बाद। माननीय
सदस्य की जो
इस बारे में
ज्यादा चिन्ता
है वो यह है कि
ले जाने वाले
वाहनों को
रोकने में
आपका कानून
किस तरह से
काम करता है
तीन-तीन बार
भी वो ही
व्हिकल से अगर
जाता है तो
उसके बाद भी
नहीं तो जो
कानून हमने 1995
में बनाया उस
कानून की
धाराओं में
हमने पूरी सख्ती
के साथ इस
कानून को
बनाया। पालना
में इसमें
कहीं ढिलाई हो
सकती है कानून
में कोई ढिलाई
नहीं है। मैं
आपको बताता
हूं इस कानून
की धारा 3 में
गौवंशीय पशु
के वध का
प्रतिषेध
इसमें दिया
हुआ है, यदि
प्रवत्त
किसी भी विधि
से या किसी भी
प्रथा या
रूढ़ी के अन्तर्गत
किसी बात के
प्रतिकूल
होने पर भी
कोई भी व्यक्ति
किसी भी
गौवंशीय पशु
का वध नहीं
करेगा या नहीं
करवायेगा उसे
वध के लिए
प्रस्तावित
नहीं करेगा या
नहीं
करवायेग। गौमांस
के उत्पादों को
कब्जा,
विक्रय और
परिवहन पर
धारा 4 में स्पष्ट
है।
धारा-5 में वध
के प्रयोजन के
लिए गौवंशीय
पशु को
निर्यात
प्रतिषेध और
अन्य
प्रयोजन भी
इसमें हैं
इसके बाद
धारा-6 में जो परिवहन
का दुष्प्रेरक
हो उसके लिए
बनाया है जब
कभी इस अधिनियम
के अधीन किसी
भी अपराध के
किये जाने के
उद्देश्य को
अग्रेषित
करने केग
परिवहन के
किसी भी साधन
से गौवंशीय
पशुओं का
परिवहन किया
जाए तो परिवाहक
उक्त का दुष्प्रेरण
का दोषी होगा
और उसी दण्ड
से दण्डित
होगा जो उक्त
अपराध को करने
के लिए व्यक्ति
मतलब ले जाने
वाले को भी वो
ही सज़ा होगी
जो इसको
ट्रांसपोर्ट
कराता है
दोनों को सज़ा
में किसी
प्रकार का
अंतर नहीं है।
इसकी धारा 8
में जो
शक्तियां दी
हुई हैं इसमें
धारा 3 के उपबंधों
का उल्लंघन
करने या उल्लंघन
करने का
प्रयत्न
करना या उल्लंघन
का दुष्प्रेरण
करता है तो
दोष वृद्धि पर
ऐसी अवधि के कठोर
कारावास में
जो एक वर्ष से
कम का नहीं होगा
किन्तु दस
वर्ष तक का हो
सकेगा।
मतलब एक साल कम
से कम और दस
साल तक की
सज़ा है । जो स्वयं
खरीद कर ले
जाता है और जो
ट्रांसपोर्ट
करता है दोनों
का कानून एक
ही है कानून
की पालना में
जिस सख्ती का
रास्ता
निकलना चाहिए
उसमें कमी हो
सकती है इसी
तरह से आपने
देखा होगा कि
इसमें धारा 11
जो है इसमें
सबूत का भी उसी
को अपने सबूत
जुटाने हैं 11
में है।
सबूत का भार
जहां किसी भी
व्यक्ति को
इस अधिनियम के
उपबंधों के
अधीन में किसी
अपराध के लिए
अभियुक्त
किया जाए वहां
वह साबित करने
का भार भी उसी
पर होगा। मैं
सोचता हूं कि
यह भार भी उसी
पर है।
कानून में तो
प्रावधान मैं
सोचता हूं कि
एक्साइज एक्ट
से ज्यादा
हैं एक्साइज
एक्ट में एक्स्ट्रा
यह है कि उससे
पेनल्टी
वसूल करने का
अधिकार कमिश्नर
को होता है वो
उस गाड़ी को
किस तरह से कितना
फाइन लेकर
छोडेगा। यह जो
अधिकार है वह
न्यायालय को
है किसी हमारे
विभाग के
अधिकारी को नहीं
है दोनों का
अन्तर है
उससे भी कठोर
है उसमें एक
साल से लेकर
दस साल तक की
सज़ा है तो
मैं सोचता हूं
कि प्रावधानों
में तो पूरी
इसकी व्यवस्था
की है लेकिन
इसकी पालना या
पालना कराने
में या हमारी
तरफ से जो
प्रावधान
करने में अगर
इसमें कोई कमी
खामी है तो हम इसको
एक बार फिर
देखकर के उसी
ढंग से यह
लागू हो इसका
प्रयास
करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जुबेर
खान।
श्री
जुबेर खान:
अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि
मैंने पहले भी
यह बात कही थी
कि कानून में
कोई कमी नहीं है
जो 1995 में बनाया
है लेकिन एक
कमी जो महसूस
हो रही है
वास्तविकता
में जो
डिस्ट्रिक्ट
बोर्डर पर
लगते हैं
हरियाणा के
उत्तर
प्रदेश के
गुजरात के
बॉर्डर पर अगर
कोई गौधन ले
जाना चाहता है
तो आपने
तहसीलदार
एस.डी.ओ. को,
हमने पहले भी
आपसे निवेदन
किया था कि
इसमें कम से
कम कलेक्टर
या एस.पी. लेवल
के अधिकारी को
लगाइये कि उनके
परमिट बगैर
बॉर्डर
डिस्ट्रिक्ट्स
में कोई गौधन
को नहीं ले जा
पाएगा क्योंकि
होता क्या है
कि अध्यक्ष
महोदय,
सर्टीफिकेट
ले लिया
सिरोही जिले
का मान लीजिये
उदाहरण के तौर
पर या भरतपुर
जिले का आप रोक
नहीं सकते और
उससे इसकी तस्करी
हो रही है अगर
वास्तव में
आप गौधन को
बचाना चाहते
हैं तस्करी
से और वध्ं
से तो आपको यह
कानून में व्यवस्था
करनी पड़ेगी
कि राजस्थान
राज्य के
जितने भी
बॉर्डर
डिस्ट्रिक्ट्स
हैं उनमें
गौधन को ले
जाने के लिए
कम से कम
जिलाधीश या
एस.पी. के स्तर
के नीचे के
अधिकारी का
परमिट लागू
नहीं होना
चाहिए।
इसके बारे
में आपने पहले
भी सदन में
कहा था कि हम
इसके ऊपर कोई
न कोई कानूनी कार्यवाही
करने जा रहे
हैं तो आप सदन
को बतायें कि
इस संबंध में
आप क्या
कार्यवाही
करने जा रहे
हैं?
श्री
अध्यक्ष:
श्री जीतमल
खांट।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, यह
बात सच है कि ...।
श्री
अध्यक्ष: आ
जाने दीजिये
सबके प्रश्न
पहले, साथ ही
जवाब दे
दीजिये।
kas\usc\1110\10-3-06\1b
श्री
जीतमल खांट
(बागीदौरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
मैं मंत्री महोदय
से जानना
चाहूंगा कि
राज्य में
लगने वाले पशु
मेलों से जो
आदिवासी काश्तकार
बैल खरीदकर ले
जाते हैं उनके
विरुद्ध कुछ
संगठन के
कार्यकर्ताओं
के द्वारा
जबरन मारपीट क्यों
की जाती है ।
क्या इस
प्रकार के
प्रकरण आपकी
जानकारी में
है । नंबर 2 क्या
राज्य सरकार
इस प्रकार की
कार्यवाही को
रोकने के लिये
ऐसे
अधिकारियों
की नियुक्ति
का विचार रखती
है जो पशु
खरीदने का
परमिट मेला स्तर
पर कोई
अधिकारी
लगाने का
विचार रखते
हैं । माननीय
मंत्री जी ने
भी स्वीकार
किया है कि
बांसवाडा,
डूंगरपुर ,
उदयपुर यह
जिले
गुजरात की
सीमा से लगते
हुए हैं और आज
परिशिष्ट ‘अ' में
बताया है कि
सबसे ज्यादा
तस्करी के
प्रकरण
आदिवासियों
के खिलाफ दर्ज
कराये जाते
हैं और हमारा सारा
आदिवासी वहां
पर किसान है
और खेती करने
के लिहाज से
पशु मेलों से
बैल खरीद कर
ले जाते हैं ।
हम भी नहीं
चाहते गौवध हो
हम खुद चाहते
हैं कि गायों
के साथ जो इस
तरह की अनहोनी
घटना होती है
वह नहीं होनी
चाहिये । लेकिन
जिस तरीके से
बांसवाडा और
डूंगरपुर के
आदिवासियों
के साथ घटना
होती है सबसे
ज्यादा
पुलिस विभाग
में
आदिवासियों
के खिलाफ
मुकदमें दर्ज
हैं । मैं
निवेदन करना
चाहता हूं जिस
तरीके से खान
साहब ने बताया
कि बांसवाडा
और डूंगरपुर
जो गुजरात की
सीमा से लगते
हैं वहां पर
उच्च
अधिकारी
तैनात किया
जाये और कम से
कम पशु मेलों
में खरीदने के
लिये परमिट
अधिकारी
नियुक्त
किया जाये यह
मैं सदन के
माध्यम से
मांग करता हूं
।
श्री
जोगाराम पटेल
: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से एक प्रश्न
पूछना
चाहूंगा, इसके
साथ ही उत्तर
हो जायेगा ।
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता
का अधिकार है
।
श्री
जोगाराम पटेल
: आप जो जवाब
देंगे उससे
संबंधित है
साथ ही जवाब हो
जायेगा । इतना
है कि लाने ले
जाने वाले को
तो सज़ा दी जा
रही है परन्तु
जो व्हीकल
यूज हो रहा है
उसके खिलाफ क्या
पैनेल्टी है
।
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित :
अध्यक्ष
महोदय, अभी
मंत्री महोदय
ने जवाब दिया
कि व्हीकल
जब्त करने का
हमें अधिकार
नहीं है । मैं
यह बताना
चाहता हूं जो
ट्रक गौवंश की
तस्करी के
लिये काम में
आते हैं ..
श्री
अध्यक्ष:
बताना नहीं आप
पूछना चाहो ।
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित :
मैं पूछ रहा
हूं गौवंश की
तस्करी में
जो वाहन यूज
में आते हैं
वह कम से कम 80 हजार
रुपये लेता है
एक बार्डर से
दूसरी बार्डर
छोडने का । वह
यह देखता है
कि 5-10 हजार रुपये
देकर मैं छूट
जाऊंगा और 3-4
ट्रिप कर के
मैं मेरी ट्रक
फ्री कर लूंगा
। मैं पशु
पालन मंत्री जी
और गृह मंत्री
जी से निवेदन
करूंगा कि
किसी भी
प्रकार से गौ
वंश की तस्करी
के प्रयोग में
लाये जाने
वाले वाहन को
जब्त करने का
नियम बनाने का
विचार रखते
हैं क्या ?
श्री
सुभाषचन्द्र
शर्मा : अध्यक्ष
महोदय मेरा एक
निवेदन है कि
गौवंश को जिस
प्रकार से पशु
पालकों ने
आवारा छोड
दिया है और
जिस प्रकार से
वह आवारा
गौवंश इधर उधर
गांवों में
घूमते हैं तो
कटने के लिये
ले जाने वाले जितने
भी लोग हैं वह
गांवों में से
उन गायों को
इकट्ठी करके
अपने ट्रकों
में लोड करके
उनको ले जाते
हैं जिनकी कोई
गिनती नहीं,
कोई निगरानी
नहीं है । मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से यह
जानना
चाहूंगा कि इस
प्रकार के
गौवंश को कटने
से रोकने के
लिये सरकार क्या
विचार रखती है
। दूसरा,
गौशालाओं को
बढावा देकर इन
गायों को
गौशालाओं तक
ले जाकर सरकार
उनके संरक्षण
की क्या नीति
रखती है।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया : अध्यक्ष
महोदय , अभी जो
हमारे कानून
में है मेलों में
तो मेला
अधिकारी का
परमिट ही लागू
होता है ।
मेला अधिकारी
का परमिट है
तो उससे जा
सकते हैं।
सामान्यत: जो
ले जाते हैं
वह एडीएम के
स्तर के
अधिकारी उसको
ले जाने की स्वीकृति
देता है तो
उससे वह होता
है । आपका आग्रह
यह है कि जो
हमारे बार्डर
एरिया के लोग
हैं और जहां
इस प्रकार की
घटनाएं दुर्घटनाएं
होती रहती हैं
वहां परमिट
देने वाला अधिकारी
कलेक्टर या
एस पी लेवल का
किया जाये ।
मैंने जैसा आपको
कहा कि इस
बारे में क्योंकि
यह विशेष तो
है पशु पालन
विभाग का,
हमने उनसे बात
की है कि अगर
इसके परमिट
में और कोई सुधार
संभव है जिसके
कारण से जो
अपने राज्य
से बाहर जा
रहा है उसके
ऊपर कोई सख्ती
की जा सकती है
तो पशु पालन
विभाग और हम
दोनो मिलकर,
हमने अपनी तरफ
से उन्हें
भेजा है लेकिन
अभी उनकी तरफ
से इस बारे में कोई
विशेष नहीं
आया है, हम फिर
प्रयास
करेंगे कृषि
मंत्री जी से
। दूसरा यह है
कि जो परमिट
से जानवर ले
कर जाते हैं
उनको सामान्यत:
नहीं रोकते
हैं ।
बागीडोरा से
आने वाले माननीय
सदस्य ने कहा
यह बात जरूर
है निश्चित
रूप से उस क्षेत्र
में भी जो
बांसवाडा,
डूंगरपुर में
है केवल 2005 में
ही 12 मुकदमे
दर्ज हुए हैं
। 27 अभियुक्त
उसमें नामजद
हुए हैं ।
उसमें से 8 का
चालान भी किया
है । इसी तरह
से डूंगरपुर
है । यह केवल
एक साल का है,
पाँच साल का
चार्ट भी इसमें
दिया है । इस
प्रकार की
घटनाएं होती
हैं लेकिन
सामान्यत: जो
परमिट लेकर
जाता है उसे
नहीं रोकते
हैं । यह
विशेषकर जो
पकडी जाती है
ट्रकों की
ट्रकों में जो
गौवंश इधर से
उधर जाता है
उसको लोग जरूर
रास्ते में
पकड़ते हैं,
उतारते हैं और
अगर उनके पास
वैलिड परमिट
होता है तो
वहां का जो
अधिकारी होता
है उसको देखने
के बाद उसे
वापस छोडता भी
है । जिनके
पास सही परमिट
नहीं होता है...
श्री
जीतमल खांट :
गृह मंत्री जी
नहीं छोड़ते
हैं विशेषतौर
से बांसवाडा
और डूंगरपुर
के काश्तकार
इससे बहुत
दुःखी हैं ।
मैं आसन से
चाहूंगा कि आप
कोई न कोई ऐसी
नीति स्पष्ट
करें या जिला
कलेक्टर या
एसडीएम को
वहां तैनात
करें कि वह कम
से कम पशु
मेलों से
बैलों को लाने
के लिये परमिट
जारी करें ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया :
विशेषकर जो
हमारा अलवर और
भरतपुर क्षेत्र
है जहां इस
प्रकार की
दुखद घटनाएं
कई बार होती
है, मैंने
पिछली बार
विधान सभा में
घोषणा की थी
कि पाँच पाँच
चौकियां दोनो
ही मेवात
क्षेत्र में
भरतपुर और
अलवर में
लगायेंगे । पाँच
से ज्यादा
हमने अभी व्यवस्था
कर रखी है ।
भरतपुर में
हमने पाँच की
जगह 15 चौकियां
स्थापित की
है ताकि इन
रास्तों से
की जाने वाली
गौ तस्करी को
हम किसी तरह
से रोक सके और
अलवर में भी हमने
5 से बढाकर 7
चौकियों की स्थापना
की है । हमने
हमारी तरफ से
इस बात की कोशिश
की है । जहां
तक गाडी जब्त
करने का सवाल
है मैं सोचता
हूं कि यह
हमारे पास एक्साइज
की तरफ से
अपने एक्ट
में नहीं है
कि इस गाडी पर
कोई जुर्माना
लगाया जा सके
। मैं सोचता
हूं कि इस
बारे में हम
पशुपालन
विभाग से
मिलकर बात
करेंगे कि हव
जब्ती के
बारे में अगर
कानून में कोई
संशोधन करना
चाहे तो करें
। मैं सोचता
हूं कि सज़ा
का प्रावधान इतना
है कि अगर ले
जाने वाला जो
गाडी का मालिक
है और ड्राइवर
है उस पर भी
वही सज़ा है
जो उस तस्करी
के लिये गायों
को इकट्ठा
करके ले जाता
है । लेकिन यह
बात सच है कि
इस कानून की
पालना ले जाने
वाले ट्रक
मालिक के या
ड्राइवर के
खिलाफ इतनी
सख्त
कार्यवाही
अभी तक न्यायालय
से नहीं हो
पायी है । हम
कोशिश करेंगे कि
उन लोगों को
जो ट्रक के
मालिक है या
ड्राइवर हैं
उसको भी वही
सज़ा दी जाये
जो तस्करी के
लिये गायों को
इकट्ठा कर ले
जाता है । जहां
तक आपका सवाल
है यह जो
आवारा पशु हैं
उनको जब कभी
इस प्रकार से
ले जाते हैं
तो यह बिना
परमिट के होते
हैं । जहां
जहां लोगों का
इसके खिलाफ
कोई विरोध
होता है
उतारते हैं
वहां तो यह
पकडी जाती है
लेकिन कई बार
हो सकता है
जाने अनजाने
और इतना बराबर
नहीं होने से
कुछ जाती
होगी, इसके
लिये फिर
प्रयास करेंगे
इस प्रकार से
जो गाये जा
रही हैं उनको
भी कम से कम
बार्डर
डिस्ट्रिक्ट
पर हम विशेष
रूप से कुछ
चौकियों का
इंतजाम करेंगे
। जैसे मेवात
में तो हमने
किया है लेकिन
गुजरात और
महाराष्ट्र
के बार्डर पर
अभी हमारे पास
फोर्स नहीं है
। हम फिर
विचार करेंगे
विभाग की तरफ से
और अगर वहां
पर भी कुछ व्यवस्था
की जा सकती है
तो निश्चित
रूप से करेंगे
।
श्री
बंशीलाल खटीक:
अध्यक्ष
महोदय , एक
पूरक प्रश्न
है ..
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन,
श्री रामचन्द्र
सराधना । 18
मिनट हो गये
हैं एक प्रश्न
को । (व्यवधान)
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया है
। (व्यवधान)
अंकित नहीं हो
।
श्री
बंशीलाल खटीक
:***
श्री
जीतमल खांट: ***
श्री
बंशीलाल खटीक
: ***
श्री
फतेह सिंह : ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
ans\usc\10.3.2006\1c\1120\1
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्य, स्थान ग्रहण करें। (व्यवधान) यह बोलने का समय नहीं है, प्रश्न पूछने का समय है। बिल्कुल नहीं।
श्री बंशीलाल खटीक:***
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: बिल्कुल नहीं, यह भाषण देने का नहीं है, यह प्रश्नकाल है। स्थान ग्रहण करें। माननीय सदस्य स्थान ग्रहण करें। एक प्रश्न पर आप लोगों ने 20 मिनिट ले लिया है, बाकी प्रश्न भी महत्वपूर्ण होते हैं। गृह मंत्री जी ने उन सब बातों के पूरे जवाब दे दिये। (व्यवधान) अब क्या चाहते हैं? नहीं, अब मैंने नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया है।
श्री रामचन्द्र सराधना(जमुआरामगढ़): प्रश्न संख्या 125
श्री जीतमल खांट: ***
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: मैंने दूसरा प्रश्न पुकार लिया है1 मैंने नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया। मैंने दूसरा प्रश्न पुकार लिया नेता जी।
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: जद यू के नेता, मैंने दूसरा प्रश्न पुकार लिया है।
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो, मेरी अनुमति के जो बोलते हैं अंकित नहीं हो।
श्री जीतमल खांट: ***
श्री फतेह सिंह: ***
श्री अध्यक्ष: आपके नेता भी खडे़ हैं और आप भी खडे़ हैं, क्या बात है?
श्री जीतमल खांट: ***
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन।
जयपुर शहर की गैस एजेंसियों में व्याप्त अनियमितताएं
125. श्री रामचन्द्र सराधना(जमुआरामगढ़): क्या खाद्य एवम नागरिक आपूर्ति मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) क्या यह सही है कि सरकार को जयपुर शहर में विभिन्न एल.पी.जी. गैस एजेंसियों के विरूद्ध रसोई गैस की कालाबाजारी, अनियमित आपूर्ति व रसोई गैस के दुरूपयोग की अनेक शिकायतें प्राप्त हुई है ? यदि हां, तो 01जनवरी,2005 से अब तक जयपुर शहर में कुल कितनी शिकायतें उपभोक्ताओं से प्राप्त हुई औरउनमें से कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।
(2) क्या यह सही है कि रसद विभाग व पेट्रोलियम कम्पनियों ने मिलकर रसोई गैस के दुरूपयोग को रोकने के लिए अभियान चलाया था ? यदि हां, तो कब व इस अभियान में दुरूपयोग के कितने प्रकरण सामने आये और उनके आधार पर किन-किन गैस एजेंसियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई? विवरण सदन की मेज पर रखें।
(3) उक्त अवधि में सरकार द्वारा किस-किस गैस एजेंसी में अनियमितता/ रसोई गैस के दुरूपयोग में लिप्त होना पाया गया और उनके विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई ? विवरण सदन की मेज पर रखें।
(4) सरकार उपभोक्ता को समय पर नियमानुसार रसोई गैस की समुचित सप्लाई के लिए क्या कोई कदम उठाने का विचार रखती है? विवरण सदन की मेज पर रखें।
खाद्य एवम नागरिक आपूर्ति मंत्रि (डा. किरोडीलाल मीणा): (1) हां यह सही है कि जयपुर शहर में विभिन्न एल.पी.जी. गैस एजेंसियों के खिलाफ रसोई गैस की कालाबाजारी,अनियमित आपूर्ति व रसोई गैस दुरूपयोग की अनेक शिकायतें आई है।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप लोग इतने जोर से बोलते हैं कि सदन डिस्टर्ब
होता है।
डा. किरोडीलाल मीणा: माह जनवरी,05 से अब तक प्राप्त शिकायतों/ आकस्मिक निरीक्षणों के आधार पर गैस एजेंसियों के विरूद्ध कुल 22 प्रकरण बनाये गये।(जयपुर शहर में बनाये गये प्रकरणों की सूची संलग्न परिशिष्ट-1 पर है) इसके अतिरिक्त उक्त अवधि में जिला रसद अधिकारी कार्यालय में 28 लिखित शिकायतें प्राप्त हुई जिनमें से 9 का निराकरण कर दिया गया एवम 19 विचाराधीन है। (सूची परिशिष्ट-2 पर संलग्न है)
(2)यह सही है कि रसद विभाग व पैट्रोलियम कम्पनियों ने मिलकर माह अक्टूबर,05 में दिनांक 17.10.2005 से 20.10.05 तक चार दिवसीय अभियान रसोई गैस के दुरूपयोग को रोकने हेतु चलाया था। इस अभियान के तहत तेल कम्पनियों के अधिकारियों द्वारा 232 प्रकरणों में दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही कर 360 घरेलू गैस के अनाधिकृत उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के विरूद्ध था इसलिए अभियान के दौरान गैस एजेंसियों के विरूद्ध किसी भी प्रकार की जांच अपेक्षित नहीं थी।
(3) 1 जनवरी,05 से अब तक जयपुर शहर में विभिन्न गैस कम्पनियों के विरूद्ध कुल 22 प्रकरण बनाये गये, जिनकी सूची परिशिष्ट-1 पर संलग्न है।
(4) राज्य सरकार द्वारा उपभोक्ता को समय पर नियमानुसार गैस की समुचित सप्लाई सनिश्चित करने के लिए समय समय पार तेल कम्पनियों एवम जिला कलक्टर/ जिला रसद अधिकारी को निर्देश जारी किये गये हैं जिसमें आरपीपीएल आर्डर, 1990 के खण्ड 19 के तहत जिला कलक्टर द्वारा गैस एजेंसियों को रिकार्ड उपलब्ध कराना,दैनिक सूचना भिजवाना, एलपीजी अनुज्ञापत्रधारी निर्धारित समयानुसार अपना व्यापार परिसर तथा गौदाम खुला रखकर उपभोक्ता के लिए कुकिंग गैस की बुकिंग एवम आपूर्ति संबंधी कार्यवाही संपादित करेंगे शामिल है। एलपीजी वितरण उपभोक्ताओं को गैस रिफलिंग के समय अन्य कोई वस्तु क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं करेगा आदि के संबंध में निर्धारित आदेश में गैस एजेंसियों के लिए निर्देश है। (विभाग द्वारा जारी निर्देश पत्र प्रति संलग्न है)
इसके अतिरिक्त तेल कम्पनियों को एवम जिला कलक्टर को गैस आपूर्ति की समुचित आपूर्ति की व्यवस्था बनाये रखने हेतु निर्देश किया हआ है। माह जनवरी 06 में सड़क सुंरक्षा सप्ताह के तहत भी घरेलू एलपीजी गैस सिलेण्डरों का चौपाहिया वाहनों में उपयोग को रोकने के संबंध में परिवहन विभाग, तेल कम्पनियों एवम समस्त जिला प्रशासन को निर्देश जारी किये गये हैं।
राज्य सरकार न सिर्फ रसोई गैस आपूर्ति करने हेतु प्रयासशील है अपित रसोई गैस का अनाधिकृत उपयोग रोककर उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु कटिबद्ध है।
श्री रामचन्द्र सराधना: माननीय अध्यक्ष महोदय, एलपीजी गैस का, जहां पर अनियमिताओं का और अनुपलब्धता का मामला आता है, महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार होती है। उनको ज्यादा परेशानी होती है। मैं मंत्री जी के जवाब के अनुसार, आपने बताया है कि 22 प्रकरण विभाग ने बनाये हैं और उनमें नाममात्र का दंड देकर, किसी के 250 रूपये, किसी के 300रूपये किसी के 500रूपये जब्त करके उनको छोड़ दिया है। मंत्री महोदय ने स्वंय ने भण्डारण का एक निरीक्षण किया था मैसर्स उर्मिला गैस एजेंसी का और उसमें भण्डारण क्षमता से अधिक मात्रा का भण्डारण मिला, आपने हजार रूपये प्रतिभूति राशि जब्त करके छोड़ दिया