Bhs/usc/12.3.07/11.00/1a

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक : 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का बारहवां दिवस   संख्‍या : 8

 

सोमवार, 12 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

 

( श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन )

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: आज सख्‍ंया इतनी क्षीण कैसे है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बजट रखा तब भी कहा था कि सन्निपात में हैं सब लोग अभी होश आने वाला नहीं है इनको। थोड़ा समय लगेगा, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: तमिलनाडु विधान सभा की एक कमेटी आने वाली है और वो अभी यहां पर बैठेगी और इतनी संख्‍या कम है तो क्‍या सोचेंगे अपने बारे में?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हमारे बारे में नहीं अध्‍यक्ष महोदय, उनके बारे में सोचेंगे।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, बजट इतना अच्‍छा था कि उससे आहत हो गये और उठकर आने में असमर्थ हो रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): ...(व्‍यवधान)... इधर वाले काहें से आहत हैं? वो बता दो।

श्री जीवाराम चौधरी (सांचौर): उनको यह समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या जवाब दें कैसे जाएं अन्‍दर।

श्री अध्‍यक्ष: श्री केसरदेव बाबर।


प्रधानमंत्री सड़क योजनान्‍तर्गत ठेकेदारों का लम्बित भुगतान

113. श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गत तीन वर्षों में कुल कितनी सड़कें बनाई गई एवं उन पर कितनी राशि व्‍यय की गयी?

(2) कितनी लम्‍बाई की सड़कों का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है एवं यह कब तक पूर्ण हो जाएगा?

(3) क्‍या यह सही है कि राज्‍य में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजनान्‍तर्गत ठेकेदारों का भुगतान बकाया है? यदि हां, तो कितनी राशि का एवं क्‍यों? विवरण सदन की मेज़ पर रखें।

(4) क्‍या सरकार ठेकेदारों का बकाया भुगतान शीघ्र करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा से (1) राज्‍य में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत दिसम्‍बर, 2003 से फरवरी, 2007 तक कुल 4490 सड़कें बनाई गई एवं उन पर कुल राशि रुपये 2380.07 करोड़ व्‍यय किये गये।

(2) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 10767.76 कि.मी. लम्‍बाई की सड़कों का कार्य प्रगति पर है एवं इन्‍हें मार्च, 2008 तक पूर्ण किया जाना प्रस्‍तावित है।

(3) जी, नहीं।

(4) इस योजना में वर्तमान में ठेकेदारों का कोई भुगतान बकाया नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: वो प्रस्‍तावित ही है या कर भी देंगे पूर्ण?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): निश्चित तौर पर अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: तो आपने तो कहा है कि प्रस्‍तावित है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, पूर्ण होना प्रस्‍तावित है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने बताया कि ठेकेदारों का कोई भुगतान बकाया नहीं है इसके लिए तो इनका धन्‍यवाद। मैं इस तथ्‍य से जुड़े तीन चार सवाल पूछना चाहूंगा। मंत्री महोदय से बताने की कृपा करेंगे कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में केन्‍द्र से अब तक कितना अंश मिला और कितना बकाया है ? क्‍या यह सही है कि ढाई सौ की आबादी वाले गांव, ढाणियों को सड़क से जोड़ा जाएगा? यदि हां, तो कब तक ? मंत्री महोदय कृपया जवाब दें।

श्री अध्‍यक्ष: आपने अपने क्षेत्र का तो अलग से पूछा नहीं है आपने तो कुल पूछा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में अब तक केन्‍द्र से 2847 करोड़ रुपये मिले हैं। अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान पहला प्रदेश है जिसने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का प्रथम चरण से लेकर चतुर्थ चरण तक पूरा कर लिया है और पांचवें और छठे चरण का कार्य चल रहा है। अध्‍यक्ष महोदय, मार्च, 2008 तक हम राजस्‍थान के वो सारे गांव जिनकी आबादी पाँच सौ तक है उनको जोड़ देंगे। ढाई सौ तक की आबादी जिसके बारे में माननीय सदस्‍य ने जानना चाहा ट्राइबल और डेजर्ट के अन्‍दर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्‍तर्गत ढाई सौ तक की आबादी को जोड़ने के लिए हमने 1764 गांवों के प्रस्‍ताव बनाकर केन्‍द्र सरकार को भेजे हैं और हमें उम्‍मीद है कि जल्‍दी ही हमें इसकी जब स्‍वीकृति मिलेगी तो हम इनको भी जोड़ देंगे।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में ...।

श्री अध्‍यक्ष: आपने अपने का पूछा कहां है? आपने तो जनरल पूछा है पूरे राजस्‍थान का।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ा मुद्दा है इसलिए मैं पूछ रहा हूं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्‍तर्गत ग्राम मनासिया विधान सभा क्षेत्र लक्ष्‍मणगढ़ के सड़क के टेण्‍डर हो गये थे लेकिन इसका कार्य अभी रुका हआ है यदि कार्य रुका हुआ है तो सार्वजनिक निर्माण विभाग इसमें क्‍या प्रयास कर रहा है? कब शुरू कर देंगे? दूसरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जाना चाहूंगा कि पीएमजीएसवाई में जो भारत सरकार अथवा राजस्‍थान सरकार की जो गाइड लाइंस हैं इनमें ऐसे कई गांव और ढाणियां जिनकी आबादी आठ सौ या हजार है लेकिन ये राजस्‍व गांव नहीं हैं। ऐसे गांव बहुत हैं जिनकी मूल गांवों से दूरी लगभग दो या तीन किलोमीटर तक की है लेकिन अभी ये गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से नहीं जुड़ सके हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है ।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): मैं उदाहरण के तौर पर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निवेदन करूं कि एक ग्राम देवरा जो कि सौ वर्ष पुराना गांव है और नागौर और सीकर जिले...।

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण दे रहे हो कि आप प्रश्‍न पूछ रहे हो?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): प्रश्‍न पूछ रहा हूं अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: मूल में नहीं लिखा हुआ है। आप प्रश्‍न पूछें।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): नागौर जिले और सीकर जिले के बॉर्डर पर एक गांव हैं उस गांव का नाम देवरा है और वहां पर देवनारायण भगवान का मंदिर भी है और उस गांव की आबादी लगभग आठ सौ है, सौ वर्ष पुराना गांव है लेकिन...।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ लीजिये भाषण का समय नहीं है यह।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, यह भाषण नहीं है यह प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: तो भाषण नहीं है तो क्‍या है? आप प्रश्‍न पूछिये।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): क्‍या इस गांव को ग्राम देवरा को सड़क से जोड़ने का सरकार विचार रखती है या ऐसे गांव जिनकी आबादी पाँच सौ से अधिक है लेकिन वो गांव तीन या चार किलोमीटर दूर हैं इन गांवों को जोड़ने का क्‍या प्रयास करेंगे?

श्री अध्‍यक्ष: मि.बाबर, आप प्रश्‍न पूछिये।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): ...(व्‍यवधान)... माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  पहले मैंने जो पूछा है उसका जवाब आ जाए।

श्री सुभाषचंद्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रश्‍न इसी से जुड़ा हुआ है ...।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप पूछेंगे।

श्री सुभाषचंद्र शर्मा (कोटपूतली): निवेदन यह है कि ढाई सौ और उससे ज्‍यादा  की आबादी की ढाणियों को...।

श्री अध्‍यक्ष: श्री जयराम जाटव पूछेंगे।

श्री सुभाषचंद्र शर्मा (कोटपूतली):.... क्‍या राजस्‍व गांव बनाकर सड़क से जोड़ने का विचार रखती है सरकार? जब तक वो राजस्‍व गांव नहीं बनेंगे, सरकार नहीं जोड़ेगी तो माननीय मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं कि क्‍या ढाई सौ से ऊपर की आबादी की ढाणियों को राजस्‍व गांव बनाकर उनको सड़कों से जोड़ने का विचार रखते है?

श्री अध्‍यक्ष: श्री जयराम जाटव।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी से कि कुछ गांव जो क्राइटेरिया में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में आते हैं वो जुड़ गये, कुछ रोड़ों को इस तरह से जोड़ दिया गया है कि चाहे वो ग्राम पंचायत से किसी से आधा किलोमीटर या कहीं कुछ थोड़ा चौथाई सीसी रोड बना दी और सार्वजनिक निर्माण विभाग ने उनको प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ा दिखा रखा है ऐसे कुछ गांव हैं जिनकी लंबाई एक-एक किलोमीटर बच गयी और वो गांव सड़क से वंचित हैं, तीसरा...।

श्री अध्‍यक्ष: मि. जाटव, अलग से प्रश्‍न है यह।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): कुछ ढाणियां ऐसी हैं माननीय अध्‍यक्षजी, जो गांव से अधिक बड़ी ढाणी है क्‍या उनको भी जोड़ने का विचार रखते हैं? ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में संवेदक को...।

श्री अध्‍यक्ष: श्री टीकमचंद कांत। ...(व्‍यवधान)... मैंने नाम टीकमचंद जी कांत का पुकार लिया।

श्री टीकमचंद कांत (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, रेवेन्‍यु विलेज की बात नहीं है वहां संख्‍या और हेबीटेट लिखा हुआ है या वो जगह जहां पाँच सौ की आबादी है वो राजस्‍व ग्राम में लिखी हुई है उस पर इसलिए मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि जो भी पाँच सौ की आबादी वाली जगह है उस आबादी को जोड़ने वाली बात है। माननीय मंत्री जी इसको क्लियर करें नहीं तो हमारे यहां राजस्‍व गांव की तो लिस्‍ट है इनके पास लेकिन आबादी नहीं है। पीएचईडी ने ऐसा किया था कि आईडेंटीफाइड ढाणीज उनकी जनसंख्‍या थी वगैरह थी यदि पीडब्‍ल्‍यूडी भी आईडेंटीफाइड आबादी कर दे ये जो पाँच सौ की है ढाई सौ की है तो वो सारा क्षेत्र जुड़ सकता है जो इस संख्‍या में आ सकते हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ये भारत सरकार की जो गाइड लाइंस हैं जो दिशा-निर्देश उन्‍होंने जारी किये उसके अनुसार चलती है । अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि उसके अन्‍दर हेबीटेशन की बात नहीं है परन्‍तु उसके के, मैं पढ़कर सुनाना चाहता हूं जो गाइड लाइन हमें मिली है उसका पैरा 3.4 “…..the above reference, the population size of the habitations, the population has recorded in the census 2001…..”

2001 के अन्‍दर अध्‍यक्ष महोदय, जनसंख्‍या के जो आंकड़े प्रकाशित हुए हैं जो पुस्तिका प्रकाशित हुई है उसमें जिन गांवों को, जिन रेवेन्‍यु   विलेजेज को, जिन ढाणियों को जिनको सम्मिलित किया गया है उसी के आधार पर ये योजना बनी है। अध्‍यक्ष महोदय, लक्ष्‍मणगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक गांव के बारे में पूछा है ये जो मानेशिया गांव की सड़क थी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में स्‍वीकृत हुई परन्‍तु वहां पास में मोदी इंस्टिटयूट है उन्‍होंने कोई न्‍यायालय से स्‍थगन लिया है इसकी तारीख 19 मार्च है अध्‍यक्ष महोदय, हम कोशिश करेंगे कि ये जो स्‍थगन आया है इसमें उसका प्रतिवाद करके जल्‍दी से जल्‍दी स्‍थगन खारिज हो और उसके बाद इस सड़का के निर्माण कार्य को हम पूरा करेंगे।  ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। ...(व्‍यवधान)... अब सारी बात आ गयी।  श्री अमराराम (धोद)।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं-नहीं, एक दो महत्‍वपूर्ण बातें हैं साहब।

डॉ.सी.एस. बैद (तारानगर): अध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)... इससे जुड़ी हुई बात है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने श्री अमराराम (धोद) का नाम पुकार लिया। मैंने नाम पुकारा है श्री अमराराम।

 

कैलाश/चौहान     12.3.07  11.10  1b  

 

श्री अमराराम (धोद): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के संवेदकों को यह पाबंदी है कि वह पाँच साल में अगर वह सड़क टूटेगी तो उसको वापस मेनटेन करने की जिम्‍मेदारी उनकी होगी । आपने पत्र भी लिखे हैं लेकिन मैंने डेढ साल पहले मंगरानी की जो सड़क इस योजना में बनी थी उसके टूटने के बाद आज तक वह नहीं बनी है ऐसे अधिकारी और ऐसे संवेदकों के खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हो । बाकी राजस्‍थान में भी जो सडकें इस योजना में बनी है जिनको पाँच साल तक मेनटेन करने की जिम्‍मेदारी है उन अधिकारी और संवेदकों के खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात आ गई, बताइए ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना जो राजस्‍थान में बनी है वह खास मानक की बनी है इसके लिये वर्ल्‍ड बैंक ने कई कई बार अपनी टीम भेज कर इसको इंसपेक्‍ट करवाया है । भारत सरकार के जो सड़कों के बारे में गुण नियंत्रक हैं उनका एक मिशन भी आया जिसने चार जिलों में लगभग सात दिन तक अलग अलग आकस्मिक दौरे किये और उन सबने यह कहा कि पूरे देश में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राजस्‍थान में निर्मित सडकें जो 15 लाख रुपये प्रति किलो मीटर के हिसाब से बन रही हैं वह सर्वश्रेष्‍ठ हैं और इसके साथ साथ उन्‍होंने यह भी कहा कि कार्य ठीक चल रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: सर्वश्रेष्‍ठ वाली बात तो मान ली आपकी, आप तो मेंटीनेंस की बात बता दो, मेनटीनेंस की जिम्‍मेदारी उनकी है या नहीं और है तो कितने दिनों तक ?

श्री अमराराम (धोद): और जो टूट गई उनका क्‍या होगा ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं मेंटीनेंस की बात बता रहा हूं ।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, जो सडकें उधड गई हैं, जो सडकें टाइम पीरियड के पहले खत्‍म हो गई हैं उनके लिये सरकार क्‍या कर रही है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न का जवाब आने दीजिए ।

श्री अमराराम (धोद): अभी मेरे विधान सभा क्षेत्र में जगतपुरा में सड़क बनी है और आप मानक की बात कर रह हैं, बनने के 10 दिन बाद में वह पूरी की पूरी वापस उधड गई ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न का जवाब आने दीजिए ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने स्‍वयं ने सभी माननीय विधायकों को पत्र लिखें हैं और पत्र लिख कर उनको यह भी अवगत कराया है कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में जो संवेदक हैं पाँच साल तक सड़क को मेनटेन करने की जिम्‍मेदारी उनकी है । मैंने राजस्‍थान के सारे प्रधानों को भी पत्र लिखें हैं । अध्‍यक्ष महोदय, धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य जिस सड़क का जिक्र कर रहे हैं अगर यह मुझे पत्र लिखते तो मैं क्‍वालिटी कंट्रोल की पूरी टीम भेजकर उसको इंसपेक्‍ट करवाता और मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं और सदन के सभी माननीय सदस्‍य को निवेदन करना चाहता हूं कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना या दूसरी योजना जो बाकी है उनमें तीन साल की गारंटी है और प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में पाँच साल की है । अगर कहीं कोई सड़क बने और सड़क उसी पीरियड में टूट जाये तो निश्चित तौर पर न केवल उसको ठीक करवाया जायेगा और उसकी रिपोर्ट अगर आप करोगे संबंधित जे.ईएन, ए.ईएन जिसने रिपोर्ट नहीं की उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी । हमारे सब की मंशा है कि राजस्‍थान का सड़क तंत्र ठीक हो और सड़क अच्‍छी बने ।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री हेमराज मीणा ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय मंत्री जी 2001 के बाद जो राजस्‍व ग्राम बने हैं उनकी आबादी अगर 500 से ज्‍यादा है तो आप उनको लेंगे या नहीं लेंगे । 2001 के बाद जो राजस्‍व ग्राम बने हैं उनके बारे में आप क्‍या विचार करते हैं क्‍योंकि 2001 की जनसंख्‍या में उनका नाम नहीं है ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): साथ ही प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में जो स्‍वीकृति हुई है उनमें फोरेस्‍ट विभाग ने कई जगह रोक लगा रखी है ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): गांवों से जुडा हुआ महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है । आधे घंटे से हम हाथ खड़ा कर रहे हैं आप बोलने की इजाजत नहीं देती । 2001 के बाद जो रेवेन्‍यु विलेज बने हैं उन गांवों का क्‍या होगा क्‍योंकि वह 500 की आबादी में नहीं आते हैं और 2000 की जनसंख्‍या की लिस्‍ट में भी उनका नाम नहीं है ।

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री हेमराज मीणा । अंकित नहीं हो ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा ।


विधान सभा क्षेत्र किशनगंज में सहरिया विकास परियोजनान्‍तर्गत

स्‍वयं सहायता समूहों द्वारा ट्यूब वैलों पर व्‍यय

 

114. श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) विधान सभा क्षेत्र किशनगंज में सहरिया विकास परियोजना के अंतर्गत स्‍वयं सहायता समूह द्वारा विगत 3 वर्षों में कहां कहां पेयजल हेतु ट्यूब वैल स्‍थापित किये गये और किन किन ग्रामों को पानी सुलभ हुआ ? सूची सदन की मेज पर रखें।

(2) स्‍थापित ट्यूब वैलों में से कितने ट्यूब वैल वर्तमान में चालू हैं व कितने खराब हैं ? इन पर कितनी कितनी राशि व्‍यय की गई व इनका भौतिक सत्‍यापन किसके द्वारा किया गया ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(3) क्‍या यह भी सही है कि इन ट्यूब वैलों से पूर्ण पानी आज तक सुलभ नहीं हो पा रहा है ? यदि हां, तो क्‍यों ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): (1) विधान सभा क्षेत्र किशनगंज में सहरिया विकास परियोजना के अंतर्गत विगत तीन वर्षों में संलग्‍न परिशिष्‍ठ अ' पर अंकित 31 ग्रामों में सहरिया विकास समितियों के माध्‍यम से पेयजल हेतु ट्यूब वैल स्‍थापित किये गये है।

(2) स्‍थापित किये गये 31 ट्यूब वैल वर्तमान में चालू हैं । इन ट्यूब वेलों की स्‍थापना पर व्‍यय की गई राशि का विवरण परिशिष्‍ठ पर संलग्‍न है ।

इनका भौतिक सत्‍यापन संयुक्‍त भौतिक सत्‍यापन समिति द्वारा किया गया है जिसमें सहायक अभियंता जन स्‍वास्‍थ्‍य अभीयान्त्रिकी विभाग शाहाबाद, संबंधित अध्‍यक्ष सहारिया ग्राम विकास समिति एवं सहरिया प्रतिनिधि श्री मोरपाल सहरिया शामिल है।

(3) जी हां । संयुक्‍त भौतिक सत्‍यापन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार उक्‍त 31 ट्यूब वैल चालू हैं जिनसे पूर्ण पानी सुलभ हो रहा है ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में कुल कितने ट्यूब वैल स्‍वीकृत हुए और जो यह ट्यूब वैल लगे हैं इनमें कौनसे मार्का की मोटर, कौनसा जनरेटर, कौनसे मार्का के पाइप डले यह भी मैं आपसे जानना चाहूंगा ।अध्‍यक्ष महोदय, 35 ट्यूब वैल मेरी जानकारी में है, इस सरकार के द्वारा 35 ट्यूब वैल मंजूर हुए थे लेकिन 31 ट्यूब वैल लगे हैं और चार ट्यूब वैलों का भुगतान ऊपर के ऊपर उठ गया मेरे पास उसकी फोटो ग्राफी भी है । केवल मात्र बोरिंग हुई ह, ढक्‍कन लगे हुए हैं उसकी मेरे पास फोटो ग्राफी भी है । मंत्री महोदय बता रहे हैं 31 ट्यूब वैलों से पेयजल मिल रहा है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहूंगा सारे ट्यूब वैल खराब पडे हुए हैं और एक भी ट्यूब वैल से पेयजल सुलभ नहीं है । मैं यह कहना चाहूंगा कि जिन ट्यूब वैलों का फर्जी भुगतान हुआ है उसके लिये कौन कौन अधिकारी दोषी है, कौनसे समिति के लोग दोषी है, कौन ठेकेदार दोषी है उनके खिलाफ कब कार्यवाही करेंगे 1 अध्‍यक्ष महोदय, भुगतान उठाने की मेरे पास सूची भी है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिए भाषण नहीं ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): मैं आपको नाम बताना चाहूंगा निवाडी, माधोपुरा, बालदा और खिरीया । मैं इन चारों की फोटो टेबल पर फाइल करना चाहूंगा । चारों में केवल ट्यूब वैल के डंडे डंडे खडे हैं और वहां पर सहरिया परियोजना से पूरा भुगतान हो गया  लेकिन वहां पर ट्यूब वैल चालू नहीं है , न मोटर लगी है न जनरेटर लगा है और न पेयजल सुलभ हो रहा है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह चाहूंगा कि जिन लोंगों ने इसमें पैसा खाया है जिन्‍होंने पैसा उठाया है, जो अधिकारी इसमें दोषी है अध्‍यक्ष महोदय, सहरिया परियोजना का अध्‍यक्ष जिला कलेक्‍टर है और एडीएम परियोजना के प्रोजेक्‍ट आफिसर है उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही हो, उनको निलम्‍बन किया जाना चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं प्रश्‍न पूछिए ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): दो साल हो गये इन पैसों को उठे लेकिन कार्यवाही नहीं हुई है । मैं चाहूंगा कि इन चार ट्यूब वैलों का जो भुगतान उठा है ...

श्री अध्‍यक्ष: आपने प्रश्‍न तो पूछा कुछ और है और आप इस समय बोल कुछ और रहे हैं । 31 ट्यूब वैल खोदे वह कह रहे हैं 31 में पानी आ रहा है, आप कह रहे हैं पानी नहीं आ रहा है ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मैं फोटो पेश करना चाहूंगा ।

श्री अध्‍यक्ष: अगर वह गलत जवाब दे रहे हैं तो आप नियम में आइए कौन मना करता है आपको ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय को अधिकारियों ने गलत जानकारी दी है । मैं तो फोटो पेश करना चाहता हूं । इनमें न कोई मोटर लगी हुई है न कोई ट्यूब वैल लगे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: गलत सूचना दे रहे हैं तो आप नियमों में आइए ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न है उसमें कुछ तथ्‍य है । केन्‍द्र सरकार से हमको 38 हैंड पम्‍प लगाने के लिये 57 लाख रुपये प्रति हैंड पम्‍प डेढ लाख के हिसाब से स्‍वीकृत हुए ।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, हैंड पम्‍प का तो सवाल ही नहीं है ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जी हां, ट्यूब वैल का पैसा स्‍वीकृत हुआ । उसमें से तीन ट्यूब वैल यह जो भू सर्वेक्षण विभाग है उसने फिजीबल नहीं माना । उसके बाद 35 ट्यूब वैल रहे उसमें से 31 तो बिलकुल तैयार हो कर उनका सत्‍यापन सर्टिफ़िकेट है वह सारा वहां की जो कमेटी है जो मेम्‍बर बने हैं इसमें और जो ए.ईएन इसमें हैं उसके द्वारा मिला है । यह जो 4 ट्यूब वैल है इनकी पहली किश्‍त जारी हुई थी 13.5.06 को एक लाख रुपया और यह उप निदेशक, उदयपुर के आदेश से इन 4 ट्यूब वैल का पैसा स्‍वीकृत हुआ । दूसरी किश्‍त भी इनकी फिर जारी हुई और वह सातवें महीने में 25.7.05 को हुई । लेकिन चूंकि इसका सत्‍यापन का सर्टिफिकेट न तो वहां की लोकल एजेंसी ने दिया न इसको प्राप्‍त हुआ । जो 6 लाख रुपये उनको देना था उसमें 5 लाख 50 हजार का पेमेंट निश्चित रूप से इन ट्यूब वैल के अगेंस्‍ट हुआ । पहली किश्‍त और दूसरी किश्‍त दोनों मिलाकर पेमेंट हो गया । फाइनल पेमेंट इसका नहीं हो पाया क्‍योंकि इसका सत्‍यापन होना था और जिस कमेटी के द्वारा होकर आना था वह प्राप्‍त नहीं हुआ उसके कारण से हुआ और इसलिए यह विषय कि निश्चित रूप से पहली किश्‍त तो सामान्‍यत: जब भी सेंक्‍शन करते हैं तो जारी कर देते हैं लेकिन दूसरी किश्‍त जारी करने के पहले ए.ईएन से रिपोर्ट जरूर लेनी चाहिये थी और उस रिपोर्ट के आधार पर दूसरी किश्‍त जानी चाहिये थी ।

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब तो कुछ और ही दे रहे हैं ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): निश्चित रूप से जिसने भी बिना ए.ईएन की रिपोर्ट के यह दूसरी किश्‍त जारी की है उसके लिये जो भी व्‍यक्ति दोषी है....

 

ans /usc  1c   11:20   12.03.2007

 

उसके लिए जो भी आवश्‍यक कार्यवाही होगी वह हम निश्चित रूप से करेंगे। यह बात सच है कि चार टयूबवैल, जिनका नाम आपने लिया, आज भी कमीशन नहीं हुआ है।   उनसे पानी प्राप्‍त नहीं हो रहा है, यह बात सच है लेकिन यह जांच का विषय रहेगा कि दूसरी किश्‍त जारी करने का अधिकार किसको था और बिना सूचना प्राप्‍त हुए क्‍यों जारी की, इतनी सी इसमें कमी है। यह जो चार टयूबवैल है,अभी तक भी कमीशन नहीं हुआ है। ( व्‍यवधान)  

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): क्‍या सुपरवीजन किया...( व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह है कि  जो 31 टयूबवैल लगे हुए हैं, जिनसे मंत्री महोदय बता रहे हैं पानी नहीं मिल रहा लेकिन इसमें कौनसी मार्का की मोटर,आइएसआई मार्का नहीं है। 

श्री अध्‍यक्ष: यह आपने नहीं पूछा कि कौनसे मार्का की मोटर है। आपने पूछा पानी मिल रहा है कि नहीं मिल रहा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरा टयूबवैल , मैं यह पूछ रहा हूं कि जो बोरिंग हुआ है पेयजल सुलभ कराने के लिए...( व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): भ्रष्‍टाचार की बात भी पूछने दीजिए। यह तो पूछने दीजिए कम से कम। (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): पेयजल सुलभ कराने के लिए मोटर भी डाली होगी,उसमें जनरेटर भी लगाया, कौनसे मार्का का है, आईएसआई मार्का का है कि नहीं है ? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, सारा फर्जीवाड़ा हुआ है। 31 टयूबवैल, मंत्री जी को जो सूचना अधिकारियों ने दी है वह बिल्‍कुल गलत दी है। सारे 31 टयूबवैल, मैं एक-एक टयूबवैल का फोटो खिंचवाकर लाया हूं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप तो प्रश्‍न पूछिये..(व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सारे टयूबवैल बिल्‍कुल बंद हो चुके हैं, किसी से भी पेयजल सुलभ नहीं हो रहा। सभी में लोकल मेड की मोटर, लोकल मेड का जनरेटर, लोकल मेड की टंकी रखी हुई है। एक को भी पेयजल सुलभ नहीं है।  ठेकेदारों ने, अधिकारियों ने मिलकर, पूरा पैसा भुगतान हो गया, मैं चाहूंगा  चार टयूबवैल का पैसा भुगतान हो गया, कमिशन में(व्‍यवधान) उनके खिलाफ मंत्री जी क्‍या कार्यवाही करेंगे कौन-कौन अधिकारी इसमें दोषी हैं।

अध्‍यक्ष महोदय, सहरिया परियोजना का अध्‍यक्ष कलक्‍टर होता है , कोई छोटा-मोटा अधिकारी नहीं है। सहरिया परियोजना का अध्‍यक्ष कलक्‍टर है, प्रोजेक्‍ट आफिसर एडीएम है। ( व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): दोनों आफिसर आईएएस, आरएएस आफिसर होने के बाद घोटाला हो गया। साढ़े पाँच लाख रूपये का भुगतान हो गया, टयूबवैल  कमीशन नहीं हुए। (व्‍यवधान) आप क्या कार्यवाही करेंगे इस संबंध में?

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रश्‍न मेरा भी है ।

श्री अध्‍यक्ष: पहले जवाब आने दीजिए उनका। मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आने दीजिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ठीक है साहब।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, जितनी मोटर, जनरेटर लगे हु ए हैं आइएसआइ है कि नहीं ? ( व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पूछ लिया उन्‍होंने, आपको पूछने  की आवश्‍यकता नहीं है। पूछ चुके  वह।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री):अध्‍यक्ष महोदय, इस योजना के तहत सहरिया पर, स्‍वंय सहायता समूह उसी पंचायत का गठित होता है, उसका एक अध्‍यक्ष होता है, एक कोषाध्‍यक्ष होता है  एक मंत्री होता है और दो मैम्‍बर  उसी गांव के होते हैं। कलक्‍टर की अध्‍यक्षता में जिला स्‍तर पर कमेटी बनी हुई है यह  सीधा पैसा स्‍वंय सहायता समूह को चैक के द्वारा पेमेंट करते हैं और सारा  पेमेंट  चैक के द्वारा हुआ है।

इसकी जांच के लिए भी, जैसा मैंने कहा कि सैकण्‍ड किश्‍त प्राप्‍त होने के लिए पहली किश्‍त तो पहले ही दिन, जिस दिन इसका आदेश करते हैं, एक लाख के चैक उस समिति के खाते में जमा हो जाता है। सैकण्‍ड किश्‍त देने के पहले एक राइडर है इसका कि उसकी रिपोर्ट एईएन के द्वारा प्राप्‍त हो  उसके बाद सैकण्‍ड किश्‍त जारी हो  चाहे वह 40 की हो,50 की हो या 60 की। जितनी भी उसकी कीमत होती है वह सैकण्‍ड किश्‍त उसके बाद जारी होती है।

31 में से प्रत्‍येक,जो गांव की स्‍वंय सहायता समूह  काहै उनका प्रत्‍येक का सर्टिफिकेट इसमें है, इसमें किसी भी गवर्नमेंट एजेंसी ने काम नहीं किया। वहां का जो स्‍वंय सहायता समूह बना हुआ है पाँच लोगों का , उसी गांव के प्रमुख लोगों को मिलाकर बनाया है, उन्‍होंने ही काम करवाया है, उनके द्वारा ही राजकीय अधिकारी एईएन है वह  अपने साथ कमेटी की रिपोर्ट देने के बाद, उसके सत्‍यापित होने के बाद, यहां जो ऊपर की एजेंसी है उसका काम केवल पैसे का भुगतान करने का काम है। पीएचइडी के द्वारा जो अधिकारी है वह उसको वेरीफाई करते है, इतना ही काम है। मैं सोचता हूं कि  इसमें न तो कलक्‍टर का बेड इन्‍टेशन है न इसमें स्‍वंय सहायता समूह, यह केन्‍द्र की योजना है और योजना के पीछे भी भावना यह है कि  उस पंचायत में लगने वाला टयूबवैल उसी पंचायत के पाँच लोगों की कमेटी के द्वारा ही, सारा का सारा लगाना भी, जितना लगाया उसकी रिपोर्ट देना और कमीशन होना यह सारा काम स्‍वंय सहायता समूह की, जो उस पंचायत की है, पाँच लोगों की है  वह बनी हुई है उसी के आधार पर चैक के द्वारा पैसा सरकार की तरफ से उनको गया,उनके द्वारा उसको पेमेंट किया ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इंस्‍टालेशन का वेरीफिकेशन ..(व्‍यवधान) इंस्‍टालेशन का वेरीफिकेशन जिस अधिकारी ने किया , चाहे कलक्‍टर ने किया, दूसरे ने किया, वह दोषी नहीं है क्‍या, वहां सही हुआ कि नहीं हुआ ? (  व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): कलक्‍टर और एडीएम ने अपने आपको बचाने के लिए  एईएन को, उसमे वेरिफिकेशन (व्‍यवधान) में लगा दिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप कह रहे हैं पाँच आदमी से

(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:Your mike is not working. माइक देख लिया करो पहले आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि इस मामले पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था दीजिए। माननीय सदस्‍य, एजीटेटेड है। सरकार के वक्‍तव्‍य को वह गलत बता रहे हैं। वह दूसरे तथ्‍य दे रहे हैं। होम मिनिस्‍टर साहब दूसरे बोल रहे हैं।  स्‍पष्‍टीकरण होना चाहिये सरकार की तरफ से। आप कह रहे हैं कि पाँच आदमियों के द्वारा हुआ है, वह कहते हैं कि किसी के द्वारा भी हुआ(व्‍यवधान) रूपया खर्च नहीं हो पाया, बेईमानी हुई है1 सरकार के उत्‍तर को चेलेंज का रहे हैं। किसी में पानी  नहीं मिल रहा।

श्री अमराराम (धोद): पानी नहीं मिल रहा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप यह प्रमाण पत्र क्‍यों दे रहे हैं बार-'बार....( व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गलत जवाब दिया तो दूसरे नियम में आइये ना, कौन ना करता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नियम क्‍या...(  व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): यह नियम नहीं है ?

श्री अध्‍यक्ष: चर्चा कराओ ना। ( व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नियम, आप बैठे है ना।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष जी, क्‍या संबंधित कलक्‍टर और एडीएम को हटाकर सरकार कार्यवाही करने का विचार रखती है ? जांच करवाये, उनके रहते हुए जांच होगी, कैसे जांच होगी...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लाखों रूपये आदिवासियों के उद्वार के लिए...(व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): उनके रहते हुए कैसे जांच होगी, यह कैसे संभव हो सकता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राजस्‍थान सरकार दुरुपयोग कर रही है। केन्‍द्र सरकार के द्वारा दिये गये पैसो का सही ढंग से काम सहरिया में नहीं हुआ। करोड़ों रूपये का सरकार दुरूपयोग कर रही है। जो अधिकारी जिम्‍मेदार है उनको बचाने की कोशिश कर रही हे।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता बोल रहे हैं, आपके लिए फिर आवश्‍यक है बोलना ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): विधान सभा के सदस्‍यों की कमेटी बनाकर इनको निर्देश दे। इसकी जांच कराये, आखिर सहरिया विकास के लिए वर्षों से...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: कृपया अपना स्‍थान ग्रहण कर ले, वह पूछ चुके हैं।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें। अंकित नहीं हो।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता बोल चुके हैं। 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000 

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): 000

श्री अध्‍यक्ष:आपके लिए बोलना आवश्‍यक है ? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इस पर व्‍यवस्‍था दी जाये। कन्‍सर्न मंत्री है...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप खड़े हुए, आपने पूछ लिया, मंत्री जी खड़े होते उससे  पहले तो आपके सदस्‍य खड़े हो-होकर अपनी विद्वता का प्रदर्शन करने लगे, क्‍या किया जाए। आपकी बात का जवाब तो आने ही नहीं दिया वह तो अपने आपको आपसे ज्‍यादा बुद्विमान समझते हैं इसीलिए आपके बाद खड़े होते हैं और आपके ही प्रश्‍न को दोहराते हैं। 

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):  000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कन्‍सर्न मंत्री आज नहीं है और एवज में होम मिनिस्‍टर जवाब दे रहे हैं, जिनको जानकारी का अभाव है इसलिए इस पर आप व्‍यवस्‍था दीजिए। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद):000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एवजी है1

श्री अध्‍यक्ष: दे रहे हैं ना जवाब।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एवजी है।

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे तो सही, देंगे जवाब। आप बिराजे तब देंगे जवाब।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इन्‍होंने तो विभाग की कुछ समय के लिए चूड़ी पहन रखी है। इन्‍होंने तो विभाग की कुछ समय के लिए..(व्‍यवधान) चूडी पहन रखी है कुछ समय के लिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हो उनको छूट है इसलिए आप नहीं कह सकते।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो कहा जा रहा है कि करोड़ों रूपये का गड़बड हो गया, कुल सैंक्‍शन,38 टयूबवैल के लिए केन्‍द्र सरकार से 52 लाख रूपये कुल प्राप्‍त हुए..(व्‍यवधान)  इसमें कोई भी चीज नहीं छिपाई, जहां कमी रही वह मैंने आपके सामने बता दी। 31 हैण्‍डपम्‍प व्‍यवस्थित रूप से लगे। तीन लोगों की जो कमेटी है , टयूबवैल वेरीफाई किये और वेरीफाई करने के बाद उनका पूरा पेमेंट हुआ। केवल चार टयूबवैल ऐसे थे जिनका पहली किश्‍त तो सामान्‍यतया जिस दिन सैंक्‍शन करते हैं उसके साथ ही, वहां जो ग्राम की, पंचायत की, स्‍वंय सहायता समूह होता है उसके अकाउण्‍ट में ट्रान्‍सफर हो जाता है। उसके बाद सैकण्‍ड किश्‍त देने के पहले जरूर यह राइडर लगा रखा है कि वह सत्‍यापित होकर आए उसके बाद लगे,  यहां यह भूल हुई है। चार अभी तक कमीशन नहीं हुए हैं, वह अधूरे पड़े है वह निश्चित रूप से सैकण्‍ड किश्‍त उनको नहीं जानी थी जब तक इसका वेरीफिकेशन नहीं होता। यह कमी रही है। मैंने पहले ही कह दिया इस कमी के लिए जो भी उत्‍तरदायी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी...(व्‍यवधान)

श्री देवीसिंह भाटी (कोलायत): नहीं अध्‍यक्ष महोदय, सहरिया परियोजना..

(व्‍यवधान) पानी नहीं आ रहा...(व्‍यवधान)

 

दुर्गा/‍चौहान 120307 1130 1d

 

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय्, सहरिया परियोजना का अभी पानी नहीं आ रहा है। उसमें ए.डी.एम. और कलक्‍टर, दोनों शामिल हैं तो आप जांच किससे करवायेंगे। क्‍या कलक्‍टर को हटाकर जांच करवाएंगे। (व्‍यवधान) क्‍या कलक्‍टर और ए.डी.एम. को हटाकर जांच करवाएंगे क्‍या। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। कृपया स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)

श्री देवीसिंह भाटी (कोलायत): 31 में से एक में भी पानी नहीं आ रहा है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। माननीय मंत्रीजी, जब वे चुनौती दे रहे हैं कि हैण्‍डपम्‍प, टयूबवैल, जो हैं यह टयूबवैल काम नहीं कर रहे हैं, पूरा पानी नहीं दे रहे हैं तो पूरे मामले की जांच कराने में क्‍या दिक्‍कत है। आप करवाइये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): विधान सभा सदस्‍यों से। (व्‍यवधान) उस कलक्‍टर और एस.पी. से जांच नहीं होनी चाहिए, अध्‍यक्ष महोदय। वह अधिकारी क्‍या जांच करेंगे जिन्‍होंने पैसा दिया है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है, जोर से बोल लेने से कोई गलत चीज को सही नहीं कर सकते हैं। मैं बिलकुल खुला हूं और आप यहां जोर से बोलकर के अगर यह....। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): मंत्रीजी, गलत काम। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, यह कह रहे हैं 31 में भी पानी नहीं मिल रहा है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हमने यह नहीं कहा कि आप भ्रष्‍टाचार कर रहे हो। हमने यह कभी नहीं कहा कि आप भ्रष्‍टाचार कर रहे हो। (व्‍यवधान) लेकिन सहरिया क्षेत्र में जो भ्रष्‍टाचार हो रहा है उसके बारे में सरकार का ध्‍यान कर रहे हैं। हमने कभी नहीं कहा कि आप भ्रष्‍ट हैं। लेकिन वहां के जो अधिकारी भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं उसको रोकने की जवाबदारी भी राजस्‍थान सरकार की है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अब यह ट्यूबवेल कहां, अब यह ट्यूबवेल की जगह भी मालूम है कहां है। (व्‍यवधान) यह ट्यूबवेल कौनसे जिले में हैं। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह तो एक झांकी है, इसके अलावा सहरिया क्षेत्र में जितना भ्रष्‍टाचार हुआ है उसकी विधान सभा की ...। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। आप इनके बैठने के बाद दीजिये जवाब। सुनते तो हैं नहीं। (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं कह रहा हूं। आपका सम्‍मान करते हुए, जो 31 लगे हुए हैं वह भी अगर ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं तो निश्चित रूप से अधिकारियों को भेजकर उसकी जांच करवा लूंगा कि वह वास्‍तव में चल रहे हैं कि नहीं चल रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। श्री भरतसिंह।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना यह था। (व्‍यवधान) नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब पूरा नहीं आया। नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब पूरा नहीं आया। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, बात हो गयी, अब नहीं, अब नहीं। श्री भरतसिंह।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सारे मैं फोटो लेकर आया हूं। मेरे सवाल का जवाब नहीं आया है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जब जांच करने की बात कह दी।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): उसमें कलक्‍टर और ए.डी.एम. दोनों शामिल हैं। कुछ तो बतायें मंत्रीजी, जांच किससे करवाएंगे। ए.डी.एम. और कलक्‍टर, दोनों शामिल हैं तो जांच किससे करवाएंगे। या तो विधान सभा की कमेटी से जांच करायें। (व्‍यवधान) या कलक्‍टर से ऊपर की कमेटी बनायें। या गवर्नमेंट से अधिकारी भेजकर जांच करायें। (व्‍यवधान) मैं कह रहा हूं यह पूरा भुगतान उठ गया, सबका। एक भी ट्यूबवेल चालू नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, सबके फोटो पेश कर रहा हूं। मंत्रीजी यह तो बतायें कि कलक्‍टर और ए.डी.एम. दोनों शामिल हैं उसमें तो जांच किससे कराएंगे। या विधान सभा की कमेटी बनाएंगे। या कोई गवर्नमेंट, राज्‍य सरकार किससे जांच कराएगी। इतना तो मेरे को बतायें। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लगातार आपकी सरकार के गुणगान करते रहे हैं, उनकी वाजिब बात तो मान लो आप। इनकी वाजिब बात तो मानो।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जब आप कलक्‍टर और एस.डी.एम. दोनों पर आरोप लगा रहे हैं तो यह मानकर चलिये कि इनसे हायर आफिसर से जांच कराई जाएगी। यह मानकर चलिये, आप।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): कहें मंत्रीजी इस बात को।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप इनको यहां दो।

(माननीय सदस्‍य श्री हेमराज मीणा (किशनगंज) द्वारा फोटो माननीय अध्‍यक्ष महोदय को दिये गये।)

माननीय सदस्‍य, आप यह मानकर चलिये कि यदि आपका आरोप कलक्‍टर और एस.डी.एम. पर है। (व्‍यवधान) आसन पांवों पर है और आप भाग रहे हैं, यहां सदन में। कमाल करते हैं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, आप यह बतायें कलक्‍टर और ए.डी.एम., दोनों शामिल हैं उसमें।

श्री अध्‍यक्ष: नो, मैंने कहा, स्‍थान ग्रहण करें। जब कह दिया मंत्रीजी ने तो यह मानकर चलिये जब कलक्‍टर और एस.डी.एम. दोनों को आप इसमें इन्‍वाल्‍व मान रहे हैं तो आप यह मानकर चलिये कि इनसे हायर आफिसर से ही जांच कराई जाएगी।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): घोषणा करें मंत्रीजी। मंत्रीजी अनाउंस करें।

श्री अध्‍यक्ष: मतलब यही है और क्‍या है।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): इनके रहते कैसे जांच होगी।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अनांउस तो करें मंत्रीजी, किससे जांच कराएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: आसन ने कह दिया तो इसके बाद कोई आवश्‍यकता रह गयी, आवश्‍यकता रह गयी? श्री भरत सिंह।

नगर निगम क्षेत्र कोटा की गौशालाओं में व्‍याप्‍त अनियमिततायें

 

115. श्री भरत सिंह (दीगोद): क्‍या स्‍वायत्‍त शासन राज्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) नगर निगम कोटा में कुल कितने स्‍थाई व अस्‍थाई कर्मचारी हैं तथा उनके वेतन व भत्‍तों पर प्रतिवर्ष कुल कितनी राशि व्‍यय की जा रही है?

(2) क्‍या यह सही है कि नगर निगम द्वारा संचालित गौशालाओं में बड़ी संख्‍या में पशुओं की मृत्‍यु हुई है? यदि हां, तो इस वर्ष कोटा की विभिन्‍न गौशालाओं में कितनी गायों की मृत्‍यु हुई है?

(3) क्‍या यह सही है कि कोटा की गौशालाओं में अव्‍यवस्‍था के कारण ताला तोड़कर गायें चुराने की घटना भी घटित हो चुकी है? यदि हां, तो कब-कब तथा इस संबंध में सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

(4) सरकार द्वारा कोटा में गौशालाओं के संचालन पर प्रतिवर्ष कुल कितनी राशि व्‍यय की जाती है?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): (1) नगर निगम कोटा में कुल 2560 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिसमें 2540 स्‍थाई एवं 20 अस्‍थाई कर्मचारी हैं। इनके वेतन-भत्‍तों पर वर्ष 2005-06 में 29.64 करोड़ रुपये की राशि व्‍यय हुई है।

(2) नगर निगम, कोटा द्वारा दो गौशालाएं क्रमश: किशोरपुरा व बंधा धर्मपुरा संचालित की जाती हैं। चालू वर्ष 2007 में 28 फरवरी तक बंधा धर्मपुरा गौशाला में 212 एवं किशोरपुरा में 40 पशु, कुल 252 पशुओं की मृत्‍यु हुई है।

(3) यह सही है कि कुछ असामाजिक तत्‍वों द्वारा निगम कर्मचारियों के ड्यूटी पर होते हुये भी दिनांक 19.09.06 को किशोरपुरा कायंन हाऊस से 338 व गौश्‍ंाला से 52 एवं दिनांक 06.12.06 को किशोरपुरा गौशाला के पिछले गेट का ताला तोड़कर 35 जानवरी बाहर निकाले गये थे। इस सम्‍बन्‍ध में प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस थाना किशोरपुरा में क्रमश: 230, दिनांक 21.09.06 व 267, दिनांक 09.12.06 द्वारा दर्ज करवाई गई है। नगर निगम द्वारा उक्‍त घटनाओं के घटित होने के कारण 2-2 सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी तीन पारियों में और लगाई जा कर सुरक्षा व्‍यवस्‍था सुदृढ़ की गई है।

(4) नगर निगम कोटा द्वारा संचालित गौशालाओं पर वर्ष 2005-06 में 51.74 लाख रुपये व्‍यय किये गये हैं। चालू वर्ष 2006-07 में 28 फरवरी तक 31.34 लाख रुपये व्‍यय हुए हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्षजी, जो उत्‍तर प्रदान किया गया है, मैंने उनसे पूछा था कि इस वर्ष कितनी गायें कोटा की गौशालाओं में मरी हैं। वित्‍तीय वर्ष अभी चालू है, पूर साल का मैंने इनसे फिगर मांगा था। इन्‍होंने 2007 का फिगर दिया है दो महीनों का और उसका आप औसत देखेंगे तो प्रतिदिन गौशाला में एक दिन में 4 गायें मर रही हैं। आज 13 तारीख है, आज के 13 दिन अगर और जोड़ लें तो 50 गायें और मर गयीं जब तक यह उत्‍तर आया उसके अन्‍दर। मैंने इस गम्‍भीर विषय पर सदन का ध्‍यान दिलाया है और मैं माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहूंगा कि क्‍या यह सही है कि कोटा में गौशालाओं की बिगड़ी स्थिति के ऊपर 6 महीने पहले आपका ध्‍यान दिलाया गया था। कोटा की गौशालाओं में 2 गौशालाओं में जहां आप 50 लाख रुपये साल का खर्च कर रहे हैं, उस नगर निगम में जहां 30 करोड़ रुपये साल का खर्च हो रहा है व्‍यवस्‍था के ऊपर, उसमें एक हजार से अधिक गायें, एक साल के अन्‍दर मर चुकी हैं।

आपने जो खण्‍ड दो में उत्‍तर दिया है उसके बारे में भी मैं आपसे जानना चाहूंगा कि जिनको आप असामाजिक तत्‍वों का नाम देकर पुकार रहे हैं क्‍या ये असामाजिक तत्‍व, उस सम्‍बन्धित बंधा धर्मपुरा क्षेत्र की पंचायत समिति के सदस्‍य और सरपंच को तो नहीं संबोधित कर रहे हैं आप। क्‍योंकि यह पंचायत समिति सदस्‍य और वहां के सरपंच जो हमारे एक माननीय सदस्‍य के भाई हैं उन्‍होंने इस अव्‍यवस्‍था को लेकर गौशाला का ताला तोड़ा है, जिसका आप असामाजिक तत्‍व, आप यह बताइये कि आप कोटा सम्‍भाग होने के बावजूद, आपने इन गौशालाओं का अवलोकन किया। क्‍या आपने हालात को जाकर समझा और क्‍या उसके अन्‍दर स्थिति में सुधार के लिये आपने प्रयास किये। 6 महीने पहले आपको इस सम्‍बन्‍ध में सूचित किया गया था। और अगर सूचित किया गया था तो क्‍या कारण रहे कि उस टाइम 3 गायों का औसत था मरने का और अब 2 महीने के बाद 4 गायें एक महीने में मर रही हैं। क्‍या कारण है कि यह सरकार जो गौ-माता के संरक्षण का नाम ले रही है, अपनी गौशालाओं में ही गायों को बचाने में असमर्थ रही है। आप इसका जवाब दीजिये।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से माननीय सदस्‍य ने कहा कि किसी माननीय सदस्‍य के भाई हैं और वह पंचायत समिति के सदस्‍य हैं, यह तो मैं नहीं कह सकता हूं। पर जिस प्रकार से उनकी वहां गौशालाओं की चोरी हुई, हमने तुरन्‍त वहां पर एफ.आई.आर. दर्ज करा दी। अब कौन चोर था, कौन चौर नहीं है, इसका तो मैं खुलासा नहीं कर सकता हूं, न मैं बता सकता हूं। यह पुलिस का काम है। पुलिस ही इसकी इंक्‍वायरी कर रही है और पुलिस ने इंक्‍वायरी करने के बाद इसमें अदम-पता एफ.आर. लगा दी है जो कि न्‍यायालय से भी मंजूर हो चुकी है।

दूसरा, आपने जिस प्रकार का निवेदन किया कि यह इतने पशुओं के मरने का क्‍या कारण रहा, इसमें अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि पशुओं के मरने का कारण विशेषकर पोलीथिन की थेलियां रहीं और वृद्ध पशु, जो बीमार और आवारा पशु जो सड़कों पर मरते हैं उनको हम देखरेख के लिये गौशालाओं में ले जाते हैं। वह पशु जो बीमार हैं और वृद्ध अवस्‍था के पशु थे, वह मरे हैं। इस प्रकार की हमने व्‍यवस्‍था की है, वहां पर ग्रीन फोडर की भी व्‍यवस्‍था की है। उनको बांटें की भी व्‍यवस्‍था करते हैं, चारे-पानी की भी व्‍यवस्‍था करते हैं। सरकार की तरफ से गौशालाओं को संरक्षण देने में किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। कोटा नगर-निगम द्वारा भी गौशालाएं ढंग से संचालित की जा रही हैं। परन्‍तु जो वृद्ध पशु हैं, हर आदमी की एक उम्र होती है, वैसे ही जानवर की उम्र होती है। उम्र आने पर सब समाप्‍त होते ही हैं। विशेषकर पोलीथिन एक कारण रहा है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्षजी, मैं माननीय मंत्रीजी से यह जानना चाहूंगा कि एक हजार गायें मरी हैं, क्‍या गायों का पोस्‍टमार्टम करवाया है।

 

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और कराया है तो कितनी गायें पोलीथिन से मरी हैं और अगर पोलीथिन से मेरी है तो पोलीथिन के संबंध में जो आपने कानून बनाये, कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही करी आपने कोटा में, आप यह बताइये। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हां, बताता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोटा में जो गायों का, जिस प्रकार से कोटा का जिक्र किया है और भी हमारी नगरपालिकाओं द्वारा या नगर निगमों द्वारा संचालित गोशालाएं हैं इनका टाइम-टाइम पर इस प्रकार की जब गायों की मौतें होती हैं तो उनका पोस्‍टमार्टम कराया गया है।

श्री भरत सिंह (दीगोद): एक हजार में से कितनी मरी? पोस्‍टमार्टम में क्‍या रिपोर्ट आयी है? कितनी थैलियों से मरी हैं, यह बताइये, मंत्रीजी। गोलमाल जवाब नहीं। कितनी गायें मरी हैं? आपने कैसे कह दिया है कि जो मरी हैं उनका पोस्‍टमार्टन करवाया है? क्‍या आपने करवाया है तो रिपोर्ट दीजिए कि एक हजार में से इतनी तो ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अब मैंने कारण बता दिया कि पोस्‍टमार्टम में ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हूं कि वहां पर हमने चिकित्‍सा की व्‍यवस्‍था करवायी हुई है। वहां पर डाक्‍टर लगाये हुए हैं। समय-समय पर जो गायें मरती हैं उनका पोस्‍टमार्टम भी करवाया जाता है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): मंत्रीजी, यह बताइये कि एक हजार में से ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): डाक्‍टर लगाने के बाद भी एक हजार गायें मर गयीं। डाक्‍टर लगाने के बाद भी एक हजार गायें मर गयीं तो ऐसे डाक्‍टरों के खिलाफ आपने क्‍या कार्यवाही की? क्‍यों नहीं उन डाक्‍टरों ने उनको ठीक प्रकार से ट्रीट किया? ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जो पोलीथिन खाने से मरी हैं उनको किसी प्रकार से ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): पोलीथिन खाने से है तो वह रिपोर्ट दीजिए। रिपोर्ट दीजिए पोस्‍टमार्टम की। रिपोर्ट दीजिए और आपने ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): किसी को नहीं छिपाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आपके अगर कोटा में पोलीथिन खाने से मरी तो और जगह आपने क्‍या व्‍यवस्‍था की, यह बताइये। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बैठिये तो वह जवाब दे रहे हैं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि पशु चिकित्‍सा हेतु एक डाक्‍टर, डाक्‍टर सत्‍येन्‍द्र कुमार राजोरिया, सेवानिवृत्‍त पशु चिकित्‍सक व एक कम्‍पाउंडर श्री मोहनलाल गौतम को नगर निगम, कोटा द्वारा गोशालाओं हेतु लगाया हुआ है जो सप्‍ताह में दो बार विजीट करके पशुओं की चिकित्‍सा की व्‍यवस्‍था करता है और आवश्‍यकता पड़ने पर... (व्‍यवधान) 

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): इसके बावजूद भी गायें मर रही हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): और आवश्‍यकता पड़ने पर दो विजीट अतिरिक्‍त कराये जाते हैं। उनके द्वारा प्रायोजित औषधियां यथा समय पर्याप्‍त मात्रा में पशुओं को दी जाने की पूर्ण व्‍यवस्‍था की हुई है। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक मिनट ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे मंत्रीजी से यह अनुरोध कर रहा हूं कि सिर्फ मुझे मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर दे दीजिए कि एक हजार गायों का पोस्‍टमार्टम करवाया क्‍या? और कितनी गायें पो‍लीथिन थैली खाने से मरी हैं। क्या रिपोर्ट है? कितनी गायें मरी हैं और यह एक बहुत गम्‍भीर शहरों की समस्‍या है कि अगर पोलीथिन से गायें इतनी संख्‍या में मर रही है तो उसके संबंध में क्‍या कार्यवाही करी है इन्‍होंने? पोलीथिन से कितनी मरी है? यह बता रहे हैं कि पोलीथिन खाने से मर रही है, हम भी यह स्‍वीकार करते हैं कि मरी होगी। कितनी गायें मरी हैं इसमें, यह उसका उत्‍तर बतायें और ... (व्‍यवधान) कराते नहीं तो यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपने यह जो 300 बताया है यह जो ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो गायें पकड़ी जाती हैं, अवारा, ज्‍यादातर अवारा गायें पकड़ी जाती हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 338 निकाल दी, यह उत्‍तर में है इनका। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): इनका सेम्‍प्‍ल पोस्‍टमार्टम करवाते हैं, उनमें ज्‍यादातर यह रिपोर्ट आयी है कि पोलीथिन की थैलियां खाने से मरी हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): आपने कितने सेम्‍प्‍ल पोस्‍टमार्टम करवाये हैं?

श्री सुरेश मीणा (करौली): उनके खाने की व्‍यवस्‍था करो। भूख से मरती है। गायें भूख से मर रही है। चारे की व्‍यवस्‍था करें वे भूख से मर रही हैं।  ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): कितनी भूख से मरी हैं?

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाय से जुड़ा हुआ मुद्दा है। सम्‍माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल मैं पूछना चाहता हूं कि गाय किस कारण से मरी? आज से तीन साल पहले पूर्व सरकार ने गायों की कोई व्‍यवस्‍था नहीं की। गली-गली में गायें घूमती रहीं, इस कारण से गायों ने पोलीथिन खायी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद गायों को एक जगह इकट्ठी की, गायों की सेवा की, मेन कारण है कि आपके कार्यकाल में गायें घूमती रहीं, इस कारण से मरी हैं यह गायें। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तीन साल तक गायें तो गोशालाओं में रही है। यह कार्यवाही आपने की है। यह क्‍या है? कोटा के माननीय दिलावर साहब को इनकी पूरी नॉलेज है कि इन्‍होंने क्‍वेश्‍चन लगाया था, वह बतायें कि क्‍या हुआ? बताइये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इन्‍होंने मान लिया कि पिछली जो गायें मरी हैं उनका पोस्‍टमार्टम नहीं करवाया।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍यों नहीं करवाया?

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन फ्यूचर के अन्‍दर वे कह रहे हैं कि आइन्‍दा यदि कोई गाय मरेगी तो उसका पोस्‍टमार्टम करवाएंगे लेकिन यह सही बात हैं कि लोगबाग जैसे पालक के पत्ते कर लिये और उसके पीछे जो डंठल छोड़ करके प्‍लास्टिक की थैली में डालकर बाहर डाल दिये और प्‍लास्टिक की थैली समेत उसे वह खा जाती है क्‍योंकि वह निगल तो पाती नहीं है और उसको ही चबा लेती है तो वह प्‍लास्टिक की थैलियां खाने से यह ... (व्‍यवधान)  

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह गायें तो गोशाला में बंद थीं । गोशालाएं इन्‍तजाम करती थी। गोशाला के अन्‍दर थी। गोशाला के अन्‍दर पोलीथिन की थैलियां कहां से चली गयीं। कौन लाया गोशाला में पोलीथिन की थैलियां? पोलीथिन की थैलियां गोशाला में कौन लेकर आया है? वह तो गोशाला के अन्‍दर थी? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गोशाला के अन्‍दर प्‍लास्टिक की थैली लेकर कौन आया है?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह पोलीथिन की थैलियां कहां से आयी वहां पर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री) : अवारा गायों को उठाकर, सम्‍भालकर सरकार वहां पर लायी थी गोशाला में। यह तो आपके कारनामे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इन्‍होंने डाली है तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गोशाला में जाने से पहले भी प्‍लास्टिक खा सकती है और प्‍लास्टिक की कोई एक थैली खाने से नहीं मरती है। जब थैलियां काफी हो जाती है जब जाकर गाय मरती है। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: क्‍या यह सही है कि अनेक गायें गुड़ खाने से भी मरी हैं? गुड़ की अधिकता से मरी है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं कोई जस्टिफिकेशन नहीं दे रही हूं। हां, यह जस्टिफिकेशन नहीं दे रही हूं कि एक हजार गायें मर गयीं थैली खाने से लेकिन थैली, एक थैली खाने से नहीं मरती है। कई थैलियां खाएगी जब जाकर मरेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक प्रश्‍न करना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): चारे की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए। भूख से मर रही है। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): भूख से भी मरी है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह गाय के नाम पर वोट मांगने वाले महानुभावों, आप लोगों को कुछ तो रहम आनी चाहिए। आपकी सरकार है। सरकार ने गायों को बांधकर वहां मार दिया भूखा। सरकार से अनुदान लेते हो और वहां व्‍यापारियों से भी आप सब सहायता लेते हो और गायों को इस तरह से भूखा मारते हो ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): चारा चर गये। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): करेक्‍ट।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप माफी मांगिये इस सदन से। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह माननीय प्रतिपक्ष के नेता को मैं निवेदन करना चाहूंगा कि आपके समय जब सरकार थी तब ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप छोडि़ये न बात। आप अपनी बात करिये न। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जानवरों के लिए पूरा अनुदान तक नहीं दिया गया और लोगों ने ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): कितनी मरी हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो रिकार्ड कायम करो भ्रष्‍टाचार में भी ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): गायें तीन-तीन साल से गोशाला में है वह ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अब तो सरकार आपकी है। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हमको जो इन्‍तजाम करना पड़ रहा है वह करेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अब तो आपकी सरकार में मर रही है। यह सपना मत लेओ। उनकी नहीं, आपकी सरकार है और तीन साल से आप हो। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): तीन-तीन साल से गोशालाओं में है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, और ऐसी-ऐसी गायें मरी हैं। भूख की वजह से मरी है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: दूद से आने वाले माननीय सदस्‍य। अब आप जब चाहे खड़े हो जाते हैं। आप सब लोग खड़े हो जाता है। दूद से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): गायों के संरक्षण के लिए यह सरकार प्रतिबद्ध है और सारी व्‍यवस्‍था हम कर रहे हैं1 ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्रीजी, आप तो यह बताइये कि भूख से कितनी मरीं और पोलीथिन से कितनी मरीं? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता। मूल प्रश्‍नकर्ता।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस तथ्‍य को हमने मान लिया कि पोलीथिन से मरी है। मैं मंत्रीजी से एक प्रश्‍न कर रहा हूं कि जहां 30 करोड़ रुपया हम सफाई की व्‍यवस्‍था पर खर्च कर रहे हैं इन्‍होंने पोलीथिन की एक जो निर्धारित आपकी थिकनैस है, उससे कम की जो पोलीथिन की थैलियां हैं, उसमें कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही की इस बेकग्राउंड में कि इससे गायें मर रही हैं? इन्‍होंने एक आदमी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की और पोलीथिन की बात कर रहे हैं जब नियम बनाया है इन्‍होंने पोलीथिन का इसमें बिल पास किया है कि इस थिकनैस से कम साइल की उसकी पोलीथिन यूज करेंगे तो, एक हजार गायें मरने के बाद भी, यह मंत्रीजी, जो सेंसेटिव नहीं है इस इश्‍यू के प्रति कि हम उन लोगों के खिलाफ चालान करें जो थैलियां फेंक रहे हैं और जिससे गायें मर रही है, यह एक प्रश्‍न है मेरा और इसका जवाब दें, मंत्रीजी। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां, यह एक हजार आपने किस आधार पर कहा? आप यह बताइये पहले।  ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): यह विधान सभा के उत्‍तर में, यह छह महीने पहले इन्‍होंने उत्‍तर दिया था उसमें 700 मर चुकी हैं। 250 यह है। 13 दिन और निकल गये, चार का औसत जोड़ लें आप। एक हजार से अधिक हो गया।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): पूरा हिसाब है।

श्री भरत सिंह (दीगोद): पूरा हिसाब है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप पूरा राजस्‍थान का बता दें। गोशालाओं में गायें मर रही हैं। एक ही इस गोशाला का नहीं है, यह जोधपुर का पूछ लीजिए, यह सांगसिंहजी बैठे हैं। पोकरण का पूछ लीजिए। इनको पूरे का बताइये। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पहला प्रश्‍न है। छह महीने पहले भी ... (व्‍यवधान) मर चुकी थी। 250 अब मर गयी। 50 और मर गयी। यह एक हजार से ऊपर हो गयी। चार के हिसाब से औसत लगा लीजिए आप। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: विराजिये।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): गो हत्‍या का पाप लग रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप भी मान चुकी हैं कि इतनी गायें पोलीथिन खाने से लगातार, एक हजार नहीं मरती हैं1 आप भी गो-पालक हो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने कह दिया है न कि माफी माँगों सदन से। आपने सुझाव दे दिया न इनको कि माफी माँगों सदन से। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी गो-पालक हो। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी गो-पालक हैं। आपके भी गायें हैं। ... (व्‍यवधान) आपने व्‍यवस्‍था दे दी कि इतनी एक साथ नहीं मर सकती। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इसीलिए मैं जानती हूं गाय के बारे में। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसके बाद भी मंत्री महोदय कोई उत्‍तर नहीं दे रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): आप चाहे तो मैं इसको ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैं उत्‍तर बराबर दे रहा हूं। उत्‍तर में कहीं कोई कमी नहीं है। माननीय नेता प्रतिपक्ष, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार अभी मूल प्रश्‍नकर्ता ने पूछा कि आपने पोलीथिन की थैलियों का कचरा व्‍यवस्‍था हटाने के लिए क्‍या कार्यवाही अब तक नगर निगम ने की है तो मैं माननीय सदस्‍य को निवेदन करना चाहूंगा कि कोटा नगर निगम क्षेत्र में पोलीथिन और सफाई के बारे में निर्देश का उल्‍लंघन करने वाले 101 मामलों को हमने दर्ज करवाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): चालान कितने पेश करें? 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): करेंगे पेश। दर्ज करवाये हैं तो पेश भी करेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पुन: आप इसकी जांच करवाइये कि एक हजार गायें कैसे मरीं। गोशाला में एक हजार गायें, गोशाला में कैसे मरीं इसका क्‍या कारण रहा, इसकी जांच करवाइये। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैंने आपको निवेदन किया है कि मरने का कारण एक तो पोलीथिन की थैलियां खाना और एक वृद्धावस्‍था होना और बीमार होना है। हम उन गायों को पकड़ते हैं जो अवारा पशु होते हैं, जो सड़कों पर घूमते हैं उन जानवरों को पकड़ कर हम गोशालाओं में या ... (व्‍यवधान) में डालते हैं1

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अनुमान से बता रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: तीन साल तक इलाज हमने करवाया लेकिन सरकार बचा नहीं पायी। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वे भूख से मरी हैं। उनके लिए चारे की व्‍यवस्‍था करवाओ।

श्री भरत सिंह (दीगोद): उस टाइम इतनी ज्‍यादा ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय, क्‍या वे गायें मरी हैं उनका मेडिकल करवाया है आपने? ... (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय मंत्रीजी, आप गायों के बारे में कहते हो ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): गाय का चारा तो ... (व्‍यवधान) गायें भूख से मर गयीं। ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): मेडिकल करवाया आपने कि वह गायें कैसे मरीं? वह बीमार होकर मरी या वृद्धावस्‍था से मरी, आपने यह करवाया क्‍या? ... (व्‍यवधान) यह प्रमाण दें आप। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): सेम्‍प्‍ल पोस्‍टमार्टम करवाया है। पोलीथिन का खाना पाया गया है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय मंत्री महोदय, जयपुर में ही नगर निगम की गोशाला में चालीस गायें परसों मर गयीं, उसकी आपने कोई, कोई रिपोर्ट है आपके पास में? ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप जांच करवाइये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोटा गोशाला की जांच होनी चाहिए। लगातार एक हजार गायें मरने का क्‍या कारण रहा है? ... (व्‍यवधान)

spp/usc/11.50/1f/12.3.2007 (1)

 

होम मिनिस्‍टर साहब, आप गौ-भक्‍त हो । गऊ के नाम पर आप लोगों ने वोट मांगे हैं। आपका कर्म और धर्म दोनों बनता है कि आप इसकी जांच कराइये।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि हमारा कर्म और धर्म दोनों बनता है कि गायों की रक्षा की जाये और सरकार गायों की रक्षा में कभी पीछे नहीं हटेगी, धन्‍यवाद।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, भूख से कितनी मरी हैं, यह बताइये। ..(व्‍यवधान).. पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में भूख से कितनी गायें मरीं ?

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): चारे का भुगतान हुआ, नगर निगम में कितने चारे का भुगतान हुआ ? यह गायों का चारा कौन खा गया, यह तो बता दें आप। भूख से कितनी मरी, पॉ‍लिथिन से कितनी मरी ? यह बता दें आप और बीमारी से कितनी मरीं ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): किशनगंज से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा कि यह चारा घोटाला हो रहा है और चारा कौन खा गया ? अगर आपके पास स्‍पेसिफिक जानकारी हो तो आप बता दें। आप स्‍वयं इसकी जांच कर लेना और कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्यवाही करूंगा। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं-नहीं, यह कहना गलत है कि चारा खा गये। यह सरकार चारा नहीं खाती, यह 90 बी में खाती है। ..(व्‍यवधान)..

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रिप्‍लाई तो आ गयी है। ..(व्‍यवधान).. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न की रिप्‍लाई आ गयी है, अगला प्रश्‍न आप पुकारें। ..(व्‍यवधान).. रिप्‍लाई आ गयी है, नैक्‍स्‍ट पुकारें। ..(व्‍यवधान)..

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, आप यह बताने का कष्‍ट करें क्‍या पॉलिथिन खाने के अलावा किन्‍हीं और कारणों से गौशालाओं में गायों की मृत्‍यु हुई है पिछले समय में। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: पोस्‍टमार्टम ही नहीं कराया तो क्‍या बतायेंगे ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): बताया है न। मैंने बताया है और भी कारण रहे हैं पॉलिथिन के अलावा बीमारी भी कारण रहा है, उनकी उम्र भी कारण रही है। ..(व्‍यवधान)..

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): क्‍या यह सही है कि जिला बीकानेर में गुड़ अधिक मात्रा में खिलाये जाने से गायों की मौत हुई है। ..(व्‍यवधान)..

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मूल प्रश्‍न से अलग प्रश्‍न है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बात कोटा की चल रही है, बीकानेर की नहीं चल रही है। ..(व्‍यवधान)..

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): बताइये, बताइये मंत्री महोदय, कारण बताइये। कमजोरी है या गुड़ खाने से मरी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल जीनगर (अनुपस्थित)                         प्रश्‍न संख्‍या 116

(अनुपस्थित : कृपया आगे देखें)

नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन । श्री संयम लोढ़ा ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): गायें मर रही हैं और गौ ..(व्‍यवधान).. जांच का आश्‍वासन तो कम से कम दें, इतनी गायें मर रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा ।

 

तहसील जैसलमेर में भू - आंवटन प्रकरण

 

117. श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या राजस्‍व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) तहसील जैसलमेर में वर्ष 2006 में सरकार द्वारा कितनी भूमि का आंवटन

किस किस के नाम किया गया एवं इसके लिये क्‍या प्रक्रिया अपनाई गई ? प्रत्‍येक आवंटित भूमि के लिये किस किस के कितने आवेदन थे ? प्रत्‍येक आवंटन की आवेदकों की सूची सहित एवं आवंटन आदेशों की प्रति सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) किस किस आवंटन को लेकर सरकार को शिकायतें प्राप्‍त हुईं एवं उनकी किनके द्वारा जाचं करवाई गई ?

राजस्‍व मंत्री (श्री रामनारायण डूडी) : (1) तहसील जैसलमेर में वर्ष 2006 में 6391.08 बीघा भूमि का आवंटन तत्‍समय प्रचलित नियमों के अन्‍तर्गत किया गया है। प्रत्‍येक आवंटन के लिये प्राप्‍त आवेदनों की नामवार सूची परिशिष्‍ट 'क' एवं आवंटन आदेशों की प्रतियां परिशिष्‍ट 'ख' संलग्‍न है।

(2) राज्‍य सरकार के स्‍तर पर कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। जिला कलक्‍टर जैसलमेर को श्रीमती ऋतु राठी, प्रो0 गोल्‍डन ड्यून्‍स कैम्‍प रिसोर्ट द्वारा उनका आवंटन हेतु आवेदन राज्‍य सरकार को न भेजे जाने का एक शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्‍तुत किया गया है जिसकी जांच जिला कलक्‍टर जैसलमेर के स्‍तर से अतिरिक्‍त जिला कलक्‍टर, जैसलमेर द्वारा करवाई जा रही है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि जैसलमेर के सम क्षेत्र में अस्‍थाई टैण्‍ट लगाकर पर्यटन का कारोबार चलता है। मैं सिर्फ, आपने जो उत्‍तर दिया है, उसमें तीन इकाइयों का जो लैण्‍ड अलॉटमेंट आपने किया है 22, 23 और 24- अभिषेक रिसोर्ट, भादरिया रिसोर्ट एवं मनोहर रिसोर्ट, मैं आपके माध्‍यम से सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है कि जिला कलक्‍टर जैसलमेर ने इन तीनों रिसोर्टों को अस्‍थाई आवंटन के लिये राज्‍य सरकार को प्रस्‍ताव भेजा था, फिर वह कौनसे कारण हैं कि अस्‍थाई आवंटन के प्रस्‍ताव भेजे जाने के बाद भी राज्‍य सरकार ने इन तीनों रिसोर्टों को स्‍थाई आवंटन कर दिया। दूसरा, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहता हूं कि क्‍या जिला कलक्‍टर जैसलमेर ने राज्‍य सरकार को यह भी लिखा है कि इस क्षेत्र में स्‍थाई आवंटन करने के लिये कोई स्‍पष्‍ट नीति बनाये जाने की आवश्‍यकता है और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी तरह की स्‍पष्‍ट नीति बनाये जाने के बिना कौनसे कारण हैं जिससे सरकार ने स्‍थाई आवंटन करने का फैसला किया और दूसरा प्रश्‍न के क्रम- दो में जो आपने जवाब दिया है जिसमें आपने गोल्‍डन ड्यून्‍स कैम्‍प रिसोर्ट की कम्‍पलेंट का जिक्र किया है, क्‍या यह सही है कि गोल्‍डन ड्यून्‍स कैम्‍प रिसोर्ट द्वारा जो एप्‍लीकेशन लगायी गयी थी, उसको नहीं भेजकर इसके स्‍थान पर भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक के बेटे के प्रस्‍ताव भेजकर, जो कि अस्‍थाई भेजा गया था और लैण्‍ड अलॉट कर दिया गया।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): प्रश्‍न है। प्रश्‍न ही है यह। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न नहीं है, भाषण है। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): भाषण कैसे हैं । तीनों स्‍पेसिफिक क्‍वेश्‍चंस पूछे हैं। क्‍या यह सही है कि अस्‍थाई आवंटन के प्रस्‍ताव भेजे गये थे उसके बाद स्‍थाई अलाटमेंट कर दिया। क्‍या इस संबंध में जिला कलक्‍टर जैसलमेर ने स्‍पष्‍ट नीति के लिये राज्‍य सरकार को लिखा था । कौनसे कारण हैं कि बिना नीति बनाये आपने आवंटन कर दिया और क्‍या यह सही है कि इन तीनों आवंटन में एक आवंटन भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक के बेटे को किया गया था नियमों के   विपरीत ?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो माननीय सदस्‍य को प्रत्‍युत्‍तर दिया था और जिन तीन महानुभावों को हमने अलाटमेंट किया है, वह 1959 के आधार पर किया है और अध्‍यक्ष महोदय, नियम 1959 यह कहता है, कलक्‍टर के पास अस्‍थाई तौर पर कैम्‍प के लिये उन्‍होंने भेजे थे मगर अस्‍थाई आवंटन के कोई रूल्‍स नहीं बने थे और मैं यह निवेदन करना चाहूंगा जो कलक्‍टर ने हमारे पास 13 आवेदन भेजे थे और उनमें तीन व्‍यक्तियों ने, जो आवेदक थे और जब नियमों में अस्‍थाई का प्रावधान नहीं था तो उन्‍होंने यह कहा, हमें तो स्‍थाई तौर पर एप्‍लीकेशन दी और अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने अपना प्रोजेक्‍ट चेंज करवाया और चेंज करवाने पर कि स्‍थाई भू-आवंटन किया जाये हमें और नियमों में स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि इनको हमने स्‍थाई किया है, जो भी फोरमैलिटी वगैरह कम्‍पलीट की थी । जहां तक माननीय सदस्‍य ने जो अभी कहा है कि माननीय विधायक जी के लड़के को कर दी होगी। अब विधायक जी के लड़के को की है या हमारे सामने जो पत्रावली आई है और जो तीन पत्रावलियां थीं, उसमें कौन विधायक का बेटा है और कौन विधायक का जंवाई है और कौन मंत्रीजी का बेटा है, यह तो मैंने देखा नहीं है और मैंने केवल नियमों के अन्‍तर्गत जो भी आ रहा था, उससे एक इंच भी इधर - उधर न होते हुए हमने इनको आवंटन किया है और इनकी शंका जो है अध्‍यक्ष महोदय, यह जिस व्‍यक्ति के लिये, आवेदक के लिये बता रहे हैं  श्रीमती ऋतु के लिये, उनका राज्‍य स्‍तर पर आवेदन आया ही नहीं तो उन पर विचार करने का सवाल ही पैदा नहीं होता और वह भी उन नियमों में आती कि हमें परमानेंट चाहिये, टैम्‍परेरी कैम्पिन नहीं चाहिये तो आप हमें यह बता देते तो हम उनका भी कर देते और हमारे पास उनका भी आवेदन पत्र होता, मगर यह आया नहीं और मैं यह निवेदन करना चाहता हूं ... ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आपने बाकी जो किये हैं वह सारे किये हैं सीमा चौकियों को, विंग फोरम के लिये तो आप प्राइवेट को क्‍यों करते ? आपको करना ही नहीं चाहिये था। आता तो भी नहीं करना चाहिये था। ..(व्‍यवधान).. यह क्‍या बात हुई, क्‍यों करते आप ?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उसमें अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं न तो हमारे दाल में काला है और न दाल काली है।..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): दाला में काला नहीं, आपके पूरी दाल ही काली है। पूरी दाल काली है। राजस्‍थान में तहसीलदारों के तबादलों में आपने जो किया है, पूरा राजस्‍थान जानता है आपको मंत्रीजी। ..(व्‍यवधान).. आप क्‍या काली दाल की बात कर रहे हो, पूरा राजस्‍थान जानता है । ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मुझे तो पूरा राजस्‍थान जानता है अध्‍यक्ष महोदय, मगर आपको भी सब जानते हैं। ..(व्‍यवधान).. यहां हल्‍ला करने से कुछ भी बात नहीं है । ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप से तो पटवारी सीधे काम करवा कर ले जाते हैं।..(व्‍यवधान)..

डॉ0 भँवर लाल राजपुरोहित : अध्‍यक्ष महोदय, विधायक के लड़के की एक अलग इकाई है। उसको लैण्‍ड अलॉट होना कोई प्राब्‍लम है क्‍या ? ..(व्‍यवधान)..

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आरोप लगाया गया है बिना नोटिस दिये। ..(व्‍यवधान).. यह हटाया जाये । या नोटिस देकर आरोप लगाया जाये। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आवेदक ने स्‍थाई के लिये एप्‍लीकेशन पेश की और नियमों के अंदर दिया है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलने दीजिये न मंत्रीजी को। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): रूपान्‍तरण के अदंर दिया है। एक भी गलत नहीं किया । ..(व्‍यवधान).. और हमने दिया है विंग फोरम को दिया है। ..(व्‍यवधान).. टेलीफोन एक्‍सचेंज को दिया है।

msr/usc/1200/1g/12032007

 

स्‍कूल को दिया है, कॉलेजों को दिया है, जो भी किसने मांगा है उनको हमने इसमें नियमों के आधार पर ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई पहली दफा थोड़ी हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है ...(व्‍यवधान)... यह कोई साधारण आबंटन नहीं है, अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनके राज में ...(व्‍यवधान)... इन्‍होंने जो दी जमीन, उनको पढ़ कर सुनाओ न। ...(व्‍यवधान)... 1959 के रूल का फायदा जितना कांग्रेस के राज में आप लोगों ने किया उतना  किसी ने नहीं किया। दुरुपयोग किया ...(व्‍यवधान)...