ans/usc  13.03.2007  1a  11:00

 

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राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7     बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का तेरहवां दिवस    संख्‍या  9

 

 

मंगलवार, 13 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह से कल ओलावृष्टि हुई है...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नकाल स्‍थगित कर, कल हुई भंयकर ओलावृष्टि से किसान की सब फसलें बरबाद हो गई पूरे राजस्‍थान में। कोई एक जिले की बात नहीं है, पूरे राजस्‍थान में नष्‍ट हो गई। (व्‍यवधान) प्रश्‍नकाल का कोई महत्‍व नहीं है। जब तक यह सरकार इसका स्‍पष्‍टीकरण नहीं दे और सरकार क्या व्‍यवस्‍था कर रही है उसकी जानकारी सदन को नहीं दे तब तक सदन बहुत चिंतित है और चाहता है कि इस पर पहले विचार हो।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण (व्‍यवधान)  माननीय सदस्‍य....

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): फसलें  बरबाद हो गई, भारी नुकसान हुआ है।(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): भारी नुकसान हुआ है। कल तो आपके झुन्‍झुनू में भी....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप लोग जो कहना चाहते हैं मैं वही कहने जा रही हूं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): किसानों की चिंता है, पहले सरकार से(व्‍यवधान) आना चाहिये, बाद में प्रश्‍नकाल होगा। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप जो कहना चाह रहे हैं मैं वही कहना चाह रही हूं।

श्री लालचन्‍द कटारिया (आमेर): भारी नुकसान हुआ है। 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): पूरे राजस्‍थान में हुआ है(व्‍यवधान) सब फसल खराब हो गई, सरसों की, गेंहू की।

श्री अमराराम (धोद): पिछले पाँच दशक में भी इतनी ओलावृष्टि नहीं हुई ।  (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): विधान सभा की कार्यवाही को रोककर तत्‍काल किसानों की समस्‍या की तरफ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद):आधा-आधा किलो के पड़े है( व्‍यवधान) हजारों, करोड की फसल नष्‍ट हो गई।

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे सुनेगे कि नहीं, मैं जानना चाह रही हूं ? मैं जानना चाह रही हूं कि आसन को सुनेंगे कि नहीं। ओलावृष्टि और तबाही पर जितना चिंतित आप है उतना ही आसन भी है और उतना ही सरकार भी है1 मैं चाहूंगी कि आज वक्‍तव्‍य दे मंत्री जी..(व्‍यवधान) आप सुनेंगे कि नहीं ?

श्री लालचन्‍द कटारिया (आमेर): अध्‍यक्ष महोदय सरकार का..(व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आपके झुन्‍झुनू में भी ओले पड़े हैं। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अगर सरकार चिंतित थी तो पहले...( व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): नुकसान हुआ है। (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप आसन को सुनने को तैयार नहीं है1 ( व्‍यवधान) अंकित नहीं हो। मैं कहती हूं स्‍थान ग्रहण करें। आप पहले मुझे कहने दीजिए। आसन को पहले कहने दीजिए1  आप पहले मुझे कहने दीजिए। (व्‍यवधान) मैंने अपनी बात खतम नहीं की है।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैंने अपनी बात खतम नहीं की है1 (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद):000

श्री अध्‍यक्ष: आसन ने अपनी बात खतम नहीं की है।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आसन ने अपनी बात समाप्‍त नहीं की है। अंकित नहीं हो रहा है।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले आसन को पूरी बात कहने दीजिए और उसके बाद आपको बोलने का अधिकार है। ( व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद):000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अमराराम (धोद):000

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करिये (व्‍यवधान) मैं कह रही हूं आप स्‍थान ग्रहण करिये।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष:  कृपया स्‍थान ग्रहण कर ले ( व्‍यवधान) मतलब आपको समस्‍या का निवारण नहीं चाहिये, आपको शोरगुल से मतलब है ?

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अकाल राहत मंत्री जी वक्‍तव्‍य देने को तैयार है (व्‍यवधान) राज्‍य की मुख्‍यमंत्री, ओलावृष्टि का (व्‍यवधान) घटना स्‍थल पर रवाना हो चुकी है। 

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मुख्‍यमंत्री जी प्रभावित एरिया पर (व्‍यवधान) रवाना हो चुकी है।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): किसानों को मदद यह सरकार ही कर रही है और करेगी1 ( व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):000

श्री अध्‍यक्ष: आसन को भी नहीं सुनना चाहते( व्‍यवधान) जो माननीय सदस्‍यगण खड़े हैं मैं उन सबसे निवेदन कर रही हूं कि कृपया स्‍थान ग्रहण करें।    (व्‍यवधान) पहले आसन को अपनी बात कहने दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं- नहीं, आप मेरी बात सुनिये। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप आसन की बात को पहले सुनेगे और उसके बाद(व्‍यवधान) अंकित नहीं हो रहा है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000 

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। आप आसन को सुनना ही नहीं चाह रहे, सवाल तो यह है, मैं जो कहना चाह रही थी, मुख्‍यमंत्री जी उन गांवों में जा चुकी है, स्‍वंय देखने के लिए, जहां ओले पड़े हैं। (व्‍यवधान) आगे सुनने को को तैयार नहीं है?   

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण):  000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं क्‍या कहने जा रही हूं आप सुन नहीं रहे।  नेता प्रतिपक्ष, आपसे कह रही हूं आप अपने माननीय सदस्‍यों को व्‍यवस्थित करे और पहले आसन को सुने, आप सब माननीय सदस्‍यों से कहिये। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं-नहीं, कुछ नहीं, आप स्‍थान ग्रहण करें। धोद से आने वाले सदस्‍य स्‍थान ग्रहण करे। 

श्री अमराराम (धोद):000

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य आप आसन की बराबर अवहेलना करते जा रहे हैं । (व्‍यवधान) आप बराबर रोजाना आसन की अवहेलना करते हैं यह ठीक नहीं है। (व्‍यवधान) नहीं, मैं आपका नाम लेकर पुकारूंगी।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य आप आसन को सुनना नहीं चाह रहे हैं मैं क्‍या व्‍यवस्‍था देने जा रही हूं..(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: हजारो-करोड़ों के एक आप ही शुभचिन्‍तक नहीं हो, हमें भी उतनी ही चिंता है, आसन को भी  उतनी ही चिंता है। आप बात ही नहीं सुनना चाह रहे हो। (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कीजिए। इस गम्‍भीर समस्‍या से, जो पकी-पकाई फसल है एकदम नष्‍ट हो गई, किसानों की जो पाच-छह महीने की मेहनत थी वह सब बेकार चली गई, वह रो रहे हैं मैं मानती हूं लेकिन इसका निदान इस तरीके से, शोरगुल से नहीं निकलेगा। मैं चाहूंगी, आज तो वक्‍तव्‍य दे ही रहे हैं मंत्री जी लेकिन मैं चाहूंगी कि आप लोग अपने-अपने इलाको में  जाए। अपने इलाकों में 17 तारीख को जाए। 17,18,19 तीन दिन छुट्टी होगी 20 तारीख को चेटीचण्‍ड के रोज यहां पर वापस मिलेगे और जो कुछ समस्‍या है उस बारे में विस्‍तृत चर्चा होगी और विस्‍तृत चर्चा होकर उस बारे में आगे का फैसला लिया जाएगा1 निश्चित तौर से सरकार से भी मैं चाहूंगी ।(व्‍यवधान) अब आप बीच में नहीं बोले। शांत रहे, पूरी बात सुने1 मैं चाहूंगी सरकार भी..(व्‍यवधान) अब आप फिर वही बात कर रहे हैं...

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई):  000

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर ले ।(व्‍यवधान) कृपया स्‍थान ग्रहण करें। जब तक कहां-कहां कितना नुकसान हुआ है उस नुकसान का भी पता लग जाएगा और और उस नुकसान का पता लगने के बाद निश्चित तौर से सरकार उसके अंदर, उन किसानों को जिनकी ओलावृष्टि और इस तूफान से फसल तबाह हुई है निश्चित तौर से उनको अपनी और से कुछ न कुछ राहत प्रदान करेगा। विस्‍तृत चर्चा होगी इस बारे में। 

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: सरकार को भी तो पूरी जानकारी चाहिये कि कहां-कहां कितना...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपके मार्फत बात करना चाहता हूं...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आज मौका है ना आपको बोलने का। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने व्‍यवस्‍था दे दी है कि मुख्‍य मंत्री जी कल ही ओला प्रभावित क्षेत्रों को आंखों से देखकर आई है।

दुर्गा/चौहान 130307 1110 1b

 

श्री अध्‍यक्ष: हां गयी हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): गयी हैं, आपने व्‍यवस्‍था दे दी है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं कह रही हूं, गयीं. She has gone. मेरे से पूछकर गयी हैं। मुझे कहा है, मैं आज नहीं रहूंगी।

श्री अमराराम (धोद):  000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपने चेटीचण्‍ड तक का अवकाश दे दिया। आज की विधान सभा 1952, 57, 62, 67 की विधान सभा नहीं है। आज हर विधायक हर व्‍यक्ति, हर गांव और हर ढाणी से जुड़ा हुआ है। क्‍या हुआ है, सबको पता है। इसलिये आप चेटीचण्‍ड तक नहीं दें। मेरी आपसे प्रार्थना है कि मुख्‍य मंत्रीजी, सदन की नेता विधान सभा में अपने आफिस में विराज रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं विराज रही हैं, वे जा चुकी हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, हैं। नहीं, हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वे चली गयी हैं। मैं बता रही हूं आपको। मुझसे पूछकर गयी हैं। उन्‍होंने कहा, मैं जा रही हूं। इसलिये मैं आज सदन में नहीं रहूंगी। मैं शाम तक आऊंगी, जो भी अपनी मीटिंग थी, बेस्‍ट विधायक के सलेक्‍शन की। उसके लिये भी उन्‍होंने कहा कि तीन के बजाय साढे छह बजे का समय आप कर लें। वे जा चुकी हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, सदन तभी शांत होगा, प्रतिपक्ष तभी शांत होगा, सत्‍तापक्ष में तो सरदारजी बैठे हैं, उधर लास्‍ट के अन्‍दर, उनके तो कोई नुकसान हुआ नहीं है। इसलिये उनको तो कोई चिन्‍ता नहीं है। क्‍योंकि सारा सिंचित एरिया है।

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): 000

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या मतलब है। (व्‍यवधान)

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री जीतराम (मालपुरा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजस्‍थान प्रभावित हो गया। फसल नष्‍ट हो गयी और आज आप बात कर रहे हो। सारा राजस्‍थान ओलावृष्टि से प्रभावित है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के किसानों के ऊपर बहुत भंयकर प्राकृतिक आपदा हुई है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज के माहौल में ...(व्‍यवधान) खाद के, बीज के पैसे देने पड़ते हैं। आप लोगों की मजाक कर रहे हो, किसानों के साथ (व्‍यवधान) मुख्‍य मंत्रीजी दौरा करने जा रही हैं।

        (प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी व व्‍यवधान)

भारत सरकार पैसा देती नहीं है। उसके बावजूद भी सरकार किसानों की पूरी मदद कर रही है। (व्‍यवधान) सभी अधिकारियों को कह दिया गया है। जो नुकसान हुआ है, उसका आकलन शुरू हो गया है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

        (प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी व व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अपने-अपने स्‍थान पर जाइये, अपने-अपने स्‍थानों पर जाएं। (व्‍यवधान)

सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 1120 बजे12.00 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 

Vps-usc-13032007-1200-1g-1

 

          

(12.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, विराजिये।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह प्रतिपक्ष के लोग किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार वक्‍तव्‍य देने के लिए तैयार है और यह पहली सरकार है जिसने ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए पूरा पैकेज दिया है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा मुआवजा दिया। मुख्‍य मंत्रीजी, ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के लिए गयी हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज जिस तरीके से राजस्‍थान में लगातार दस साल से अकाल पड़ रहा है उसके बावजूद जो ओलावृष्टि हुई है और राजस्‍थान में बारिश हुई है ... (व्‍यवधान) किसानों की खड़ी फसल खराब हो गयी है। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ... (व्‍यवधान) आज जिस तरीके से माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। ... (व्‍यवधान) यह घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उनको किसानों से कोई लेना-देना नहीं है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): कोई मतलब नहीं है इनको। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, बैठिये। ... (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आज किसानों के पास कमा-खाने का कोई साधन नहीं है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): किसानों की कोई चिन्‍ता नहीं है प्रतिपक्ष के लोगों को, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर चिन्‍ता होती तो माननीय मंत्री महोदय का वक्‍तव्‍य सुनते। ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार द्वारा मुआवजे की तुरन्‍त घोषणा की जाए। ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आज राजस्‍थान के किसानों के ऊपर जो कहर बरपा है, सरकार कुछ करना चाहती है मदद ... (व्‍यवधान) राजस्‍थान के किसानों को राहत पहुंचाना चाहती है यह सरकार। ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): यह सरकार किसान विरोधी है। ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): केवल शोरगुल करना ही, बोलना ही, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इनका काम रह गया है।

एक माननीय सदस्‍य: सांवरलालजी, आपके भी पड़े होंगे ओले। ... (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, बहुत महत्‍वपूर्ण बात है। बहुत महत्‍वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी है। आप स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कीजिए। ... (व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। घडि़याली आंसू बहा रहे हैं। घडि़याली आंसू बहा रहे हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि अकाल राहत मंत्रीजी आ गये हैं, वे वक्‍तव्‍य देना चाहते हैं। वक्‍तव्‍य देने को तैयार है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही गम्‍भीर विषय है ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अकाल राहत मंत्रीजी कुछ कह रहे हैं। विराजिये। ... (व्‍यवधान) मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं। कुछ कह रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): अकाल राहत मंत्रीजी खुद ही कुछ कहना चाहते हैं। ... (व्‍यवधान) यह सिर्फ घडि़याली आंसू बहा रहे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): वक्‍तव्‍य सुनना ही नहीं चाहते हैं यह। ... (व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): खाली घडि़याली आंसू बहा रहे हैं, कोई लेना-देना नहीं है इनको किसानों से। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं आपको। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इन विधायकों में से कोई गम्‍भीर नहीं है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही गम्‍भीर मामला है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप लोगों को आराम से सुनना चाहिए। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): विपक्ष सरकार से सहायता ही दिलवाना चाहती है, राजस्‍थान का हित चाहते हैं तो ... (व्‍यवधान) 50 परसेंट यह राजस्‍थान सरकार का और 50 परसेंट केन्‍द्र सरकार का होना चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप लोग सुनना ही नहीं चाहते हैं यहां पर मंत्रीजी को। ... (व्‍यवधान) और कोई वजह तो है ही नहीं ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं माननीय सदस्‍यों से निवेदन करना चाहता हूं कि यह घडि़याली आंसू बहाने की जगह केन्‍द्र सरकार को भी, केन्‍द्र सरकार को बाध्‍य करें। केन्‍द्र सरकार को भी बाध्‍य करें कि किसानों के आंसू पोंछने के लिए 50 परसेंट राशि केन्‍द्र सरकार की तरफ से दिलवायी जाए। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे रहे हैं।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): प्रतिपक्ष की किसानों के प्रति ... (व्‍यवधान) सदन में सिवाय शोरगुल करने के अलावा, हो-हल्‍ला करने के अलावा कोई काम नहीं है। किसानों की कोई सोचता ही नहीं है। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देने को तैयार हैं तो उसके बाद सदन में जो उन्‍हें कहना है वह कहें। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी स्‍टेटमैंट देना चाहते हैं। ... (व्‍यवधान) आप सुनिये तो सही।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): किसानों को पहले भी अनुदान दिया गया है। मंत्रीजी सदन में कुछ कहना चाह रहे हैं। उसके बाद भी यह विपक्ष के लोग यहां ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप माननीय सदस्‍यगण, अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, नहीं-नहीं ... (व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): ऐसे कुछ नहीं मिलने वाला है। ... (व्‍यवधान) केवल समय बरबाद कर रहे हैं। ऐसे कीमती समय बरबाद ही कर रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर सरकार को बदलना है तो केन्‍द्र से पाँच हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा तय करवा दो, अपने आप ही बदल जाएगी। ... (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): आधा हिस्‍सा, सही बात है, आधा हिस्‍सा स्‍टेट का और आधा केन्‍द्र का होना चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देना चाहते हैं, आप सुनिये तो सही। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): सवाल तो यही है। अखबारों में कल छप जाना है और कुछ नहीं ... (व्‍यवधान) अगर वाकई में गम्‍भीर हो और मुआवजा दिलाना चाहते हो तो केन्‍द्र सरकार को भी बराबर दबाव बनाया जाए। ... (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देने के लिए तैयार हैं, उसके बाद भी यह ... (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): और इनको थोड़ा पहले यह ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आपकी पार्टी ने तो हल्‍ला ही करना सिखाया है आपको। किसानों के प्रति गम्‍भीर नहीं हो। ... (व्‍यवधान) सरकार से वक्‍तव्‍य आ रहा है। ... (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में भारी नारेबाजी व शोरगुल)

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थिगित की जाती है। सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.06 बजे 14.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

 

 

 

spp/usc/14.00/2c/13.3.2007

 

(1400 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार वक्‍तव्‍य देने के लिये तैयार है। राजस्‍थान के अंदर जो त्रासदी हुई है, सरकार वक्‍तव्‍य देने के लिये तैयार है। आसन ने व्‍यवस्‍था दी थी कि अध्‍यक्ष जी आ जायें तब सरकार वक्‍तव्‍य देने को तैयार है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सरकार वक्‍तव्‍य देने के लिये तैयार है। माननीय सदस्‍यों को चाहिये ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): किसानों को मुआवजा दो। ...(व्‍यवधान)...किसानों को मुआवजा दो। ...(व्‍यवधान)...

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, वक्‍तव्‍य दिलाओ। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देना चाहते हैं। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देना चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार वक्‍तव्‍य दे रही है तो इनको सुनना चाहिये और वक्‍तव्‍य देने के बाद भी अगर कोई कार्यवाही नहीं हो ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): या तो किसानों को मुआवजा दो नहीं तो कुर्सी छोड़ दो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मैं चाहती हूं कि आप माननीय मंत्रीजी का वक्‍तव्‍य सुनें, उसके बाद आपको पूरा समय दिया जायेगा कि आप जो कुछ बात पूछना चाहते हैं या कहना चाहते हैं, वह बात कहने का आपको अवसर भी दूंगी। ओलावृष्टि में कॉमर्शियल क्रोप्स नहीं है, उसमें इन्‍क्‍लुड नहीं है, इसलिए कुछ लोग उसके बारे में भी अपनी बात कहना चाहते हैं। इसलिए मैं चाहूंगी कि आप शांतिपूर्वक मंत्रीजी का वक्‍तव्‍य सुनें ताकि मंत्रीजी के वक्‍तव्‍य के बाद कुछ शेष रह जाये, वह शेष बात आपको कहने का मौका मिले। मैं पुन: आग्रह कंरूगी कि आप शांतिपूर्वक अपने अपने स्‍थान पर चले जायें और अपना अपना स्‍थान ग्रहण कर लें। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, आपको फिर निवेदन कर रही हूं कि आप अपने अपने स्‍थान पर चले जायें और आप स्‍थान पर जाकर मंत्रीजी का वक्‍तव्‍य सुनें। मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दें। ...(व्‍यवधान)...

शासकीय वक्‍तव्‍य

राज्‍य में ओलावृष्टि से प्रभावित लोगों को सहायता

 

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हाल ही में राज्‍य में 20 जिले ओलावृष्टि से प्रभावित हुए। माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने स्थिति की समीक्षा करते हुए मुझे निर्देश दिये कि वे सभी जिला प्रभारी मंत्रीगण व सभी प्रभारी सचिवगण को ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों में तुरन्‍त भेजें तथा मंत्रीगण व सचिवगण अपनी रिपोर्ट दिनांक 15 फरवरी, 2007 तक प्रेषित करें। मेरे द्वारा सभी ओलावृष्टि प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्रीगण को पत्र द्वारा उपर्युक्‍तानुसार निवेदन किया गया। इसी क्रम में प्रभारी मंत्रीगण एवं सचिवगण द्वारा अपने अपने प्रभार वाले जिले का दौरा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर दी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मुख्‍य मंत्रीजी की घोषणा को सुनिये। इनके स्‍टेटमेंट को सुनिये, उसके बाद बात करिये। ..(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): प्रभारी मंत्रीगण, प्रभारी सचिवगण व जिला कलेक्‍टर से प्राप्‍त रिपोर्ट के आधार पर इन 20 जिलों में लगभग 775 गांवों में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ। परन्‍तु इनमें से 150 गांवों में खराबा 50 प्रतिशत से अधिक हुआ। इन 150 गांवों में से 48 गांव वे थे जो पूर्व में संवत 2063 में अभावग्रस्‍त घोषित किये जा चुके थे। शेष रहे बीकानेर के 1, धौलपुर के 19, श्रीगंगानगर के 57, हनुमानगढ़ के 18 व जयपुर जिले के 7, इस प्रकार कुल 102 गांवों राजस्‍थान अफेक्‍टेड एरियाज एक्‍ट 1952 की धारा 3 व 4 के अन्‍तर्गत दिनांक 20.2.07 को अभावग्रस्‍त घोषित कर दिया गया। ...(व्‍यवधान)... दिनांक 12 मार्च एवं 13 मार्च 2007 को जो ओलावृष्टि हुई है, उसके सर्वे के निर्देश भी दे दिये गये हैं। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी जायेगी। ...(व्‍यवधान)... इसके लिये राजस्‍थान की सरकार ने एक विशेष पैकेज की घोषणा की है। ...(व्‍यवधान)... ओलावृष्टि से मृतकों के परिवारों को 50 हजार रुपये, गंभीर रुप से घायलों के परिवारों को 25 हजार रुपये एवं सामान्‍य घायलों के परिवारों को 5 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति अनुग्रह सहायता उपलब्‍ध कराई जायेगी। पक्‍के मकानों के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्‍त हो जाने पर 10 हजार रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों को 2 हजार रुपये तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों को 800 रुपये प्रति मकान की दर से आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराई जायेगी। कच्‍चे मकानों के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्‍त हो जाने पर 6 हजार रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों के लिये 1200 रुपयें तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों के लिये 800 रुपये की दर से आर्थिक सहायता उपलब्‍ध करायी जायेगी। ...(व्‍यवधान)... जिन लघु एवं सीमान्‍त कृषकों की फसल क्षति हुई है, उनको सिंचित क्षेत्र के लिये 2500 रुपये प्रति हैक्‍टेयर एवं असिंचित क्षेत्र के लिये 1000 रुपये प्रति हैक्‍टेयर की दर से कृषि आदान अनुदान सहायता उपलब्‍ध कराई जायेगी । ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ढाई हजार रुपये प्रति हैक्‍टेयर, यह किसानों की हितैषी सरकार है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ढाई हजार रुपये प्रति हैक्‍टेयर ...(व्‍यवधान)... किसकी हाय-हाय ? ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अन्‍य किसानों को भी लघु एवं सीमान्‍त कृषकों की भांति कृषि आदान अनुदान दिया जावेगा। ये कृषि आदान अनुदान दो हैक्‍टेयर तक ही देय होगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भी पहली बार राजस्‍थान की सरकार ने किया है।

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

ओलावृष्टि से प्रभावित 50 प्रतिशत से अधिक खराबा वाले काश्‍तकारों का सिंचाई विभाग द्वारा लिया जाने वाला आबियाना शुल्‍क माफ किया जायेगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आबियाना माफ कर दिया गया।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आबियान माफ कर दिया गया ओलावृष्टि से प्रभावित ......(व्‍यवधान) ...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): जिन प्रभावित परिवारों के मकान पूर्ण रूप से नष्‍ट हो गये हैं, उनको तुरन्‍त सहायता के रूप में 20 रुपये प्रति वयस्‍क एवं 10 रुपये प्रति बच्‍चे प्रतिदिन की दर से अन्‍य वैकल्पिक व्‍यवस्‍था तक नकद अनुग्रह सहायता व कपड़ों के लिये 500 रुपये एवं बर्तनों के 500 रुपयों की राशि प्रति परिवार उपलब्‍ध कराई जायेगी।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सबसे बढि़या है। पूरे राजस्‍थान में आज से पहले नहीं था वाह-वाह। ..(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): ओलावृष्टि से प्रभावित वे गांव जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक फसल का नुकसान हुआ है उन क्षेत्रों को अभावग्रस्‍त घोषित कर दिया गया है तथा भू-राजस्‍व स्‍थगित कर दिया गया है। सहकारी अल्‍पकालीन ऋणों की वसूली स्‍थगित कर रिफेजिंग की जायेगी। ..(व्‍यवधान)...जिन किसानों की फसलों में 50 प्रतिशत से अधिक खराबा हुआ है, उनके दो माह के बिजली के बिल माफ किये जावेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बिजली के बिल माफ करेंगे। ..(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): दो माह के बिजली के बिल माफ, वाह-वाह ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यों को कुछ कहना है तो कह सकते हैं, प्रश्‍न पूछ सकते हैं ..(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूरे सदन से यह निवेदन करना चाहता हूं कि ओलावृष्टि से जो काश्‍तकारों का नुकसान हुआ है, प्राकृतिक प्रकोप से जो नुकसान हुआ है, उसमें जीरा ..(व्‍यवधान)... हुआ है । काश्‍तकार का बहुत नुकसान हुआ है ..(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): इतना पैकेज दिया, आपने सुना नहीं क्‍या ? ..(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इन फसलों की भरपाई नहीं हो रही है। मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करता हूं कि कृषि जिंस चाहे किसी प्रकार की हो, वह इसमें सम्मिलित की जाये और इसके साथ साथ अगर विपक्ष गंभीर है तो मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा दो हजार रुपये केन्‍द्र सरकार से और दो हजार रुपये राज्‍य सरकार से देने की वकालत करो। ..(व्‍यवधान)... राज्‍य सरकार ने पहली बार 625 रुपये प्रति बीघा सीमान्‍त काश्‍तकार को छोड़कर दूसरे जो काश्‍तकार हैं, उनको मुआवजा देने का जो निर्णय किया है, यह बहुत ही सराहनीय कदम है। खाली हाउस के अंदर शोर-शराबा करने से काश्‍तकारों का भला नहीं होने वाला है।

 

Msr/usc/13032007/1410/2d

 

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

इस सदन का कोई भी माननीय सदस्‍य अगर हाउस में बोलेगा तो हो सकता है कोई सार्थक बात निकले, कोई काश्‍तकारों के हित की बात हो सकती है। बहस करने से ही सब कुछ हो सकता है, बिना बहस किये बिना कोई जानकारी, हो-हल्‍ला ...(व्‍यवधान)...

पिछले 50 वर्षों से काश्‍तकारों के लिए खाली घडि़याली आंसू बहाने से उनके घावों पर मरहम नहीं लगेगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि ... (व्‍यवधान) इस देश के अन्‍दर जब काश्‍तकारों की प्राकृतिक प्रकोप से नष्‍ट होने वाली फसल के लिए मुआवजा जब तक तय नहीं होगा तब तक इस देश के किसान खुशहाल होने वाले नहीं हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के इतिहास में आजादी के 60 साल बाद किसानों की यह सरकार ... (व्‍यवधान) ओलावृष्टि की वजह से ... (व्‍यवधान)

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): खाली नारे लगाने से कुछ होने वाला नहीं है। ... (व्‍यवधान) अगर प्रतिपक्ष इस पर गम्‍भीर है तो ... (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के इतिहास में पहले भी ओलावृष्टि होती रही है लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में कभी किसानों को एक पैसा मुआवजा नहीं दिया, पहली बार सरकार ने इतना पडा पैकेज घोषित किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से प्रतिपक्ष से निवेदन करना चाहूंगा कि प्रस्‍ताव पारित करें ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: किसानों से कोई सरोकार नहीं है ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): राज्‍य सरकार से 50 प्रतिशत राशि मांगनी चाहिए। अगर राज्‍य सरकार एक हजार रुपये देती है तो कम से कम केन्‍द्र सरकार से एक हजार रुपये देने की तो वकालत करो। ... (व्‍यवधान) खाली घडि़याली आंसू बहाने से कुछ नहीं होने वाला, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, काश्‍तकार बरबाद हो गया और काश्‍तकार की जो तकलीफ है, पीड़ा है वो इस हाउस में सभी माननीय सदस्‍यों को अपने-अपने क्षेत्र में जितना नुकसान हुआ है उसकी भरपायी ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: पहली बार, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हुआ है ... (व्‍यवधान) बिजली का बिल माफ कर दिया और इस तरह की जो घोषणा की है मंत्री महोदय ने ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसके साथ यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि 11 तारीख की राजस्‍थान पत्रिका में मैंने पढ़ा है कि 2200 करोड़ रुपये कर के रूप में राजस्‍थान सरकार के बकाया हैं। 2200 करोड़ रुपये व्‍यापारियों की तरफ से कर बकाया है। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की यशस्‍वी सरकार ने ... (व्‍यवधान) यहां पहली बार अनूठा काम किया है ... (व्‍यवधान) किसानों की, नौजवानों की सरकार ... (व्‍यवधान)

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर वो राशि वसूल कर के और राजस्‍थान सरकार काश्‍तकार के नुकसान की  भरपाई कर सकती है। यह मैं निवेदन करना चाहता हूं और व्‍यापारियों ने वो कर दस वर्ष पूर्व उपभोक्‍ताओं से वसूल कर लिया है। व्‍यापारी कोई अपने घर से कर नहीं देता। व्‍यापारियों ने जब उपभोक्‍ताओं से कर वसूल और राज्‍य सरकार उस कर को सख्‍ती से वसूल करे और काश्‍तकारों की प्राकृतिक प्रकोप से जो फसल नष्‍ट हुई है उसकी भरपाई कर ले, यह भी निवेदन करना चाहता हूं।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जितना रिलीफ ओलावृष्टि या अतिवृष्टि से हुआ है, सी.पी. साहब।

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कोई सरकार की वकालत नहीं कर रहा हूं ना कोई विपक्ष की कर रहा हूं, जो हकीकत है वो मैं निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर विपक्ष इतना ही गम्‍भीर है तो एक संकल्‍प पारित करने में क्‍या दिक्‍कत है? केन्‍द्र सरकार से मुआवजा मांगने के लिए पक्ष और विपक्ष एक संकल्‍प पारित कर के केन्‍द्र सरकार को भेजें।

मैं इसके साथ-साथ यह भी चाहूंगा कि राज्‍य सरकार ने बजट में कोई कमी नहीं छोड़ी, अगर कमी है तो सिर्फ काश्‍तकारों को प्राकृतिक प्रकोप से जो फसल नष्‍ट होती है उसका मुआवजा देने की आपने व्‍यवस्‍था जरूर की है, पहले सीमांत और लघु सीमांत था अब आपने आठ बीघा तक हर काश्‍तकार को मुआवजा देने का जो कदम उठाया है यह  तो बहुत सराहनीय कदम है। ... (व्‍यवधान)

इसके साथ-साथ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में इस सरकार को दोबारा रिपीट होना है काश्‍तकारों के मुआवजे की घोषणा करो। ... (व्‍यवधान) अगर राज्‍य सरकार यह घोषणा करती है तो इस सरकार को कोई रोकने वाला नहीं है। ... (व्‍यवधान)

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद। ... (व्‍यवधान)

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, आज दो 295 के प्रस्‍ताव यहां पर आये हैं, उनको पढ़ा हुआ मान लिया गया।

सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि ।

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

अधिसूचनाएं 

वित्‍त विभाग

 

श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार वित्‍त विभाग की निम्‍नांकित चार अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:-

 

1.   अधिसूचना संख्‍या-48(14)वित्‍त/कर/99-131 दिनांक 21.2.2007 जिसके द्वारा राजस्‍थान हिंदी ग्रंथ अकादमी, जयपुर को उसकी जयपुर नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि एवं भवन पर बकाया कर रूपये 12.89 लाख एवं देय ब्‍याज एवं शास्‍ती की सम्‍पूर्ण बकाया राशि की छूट प्रदान की गई है ।

2. अधिसूचना संख्‍या-एफ.2(26)एफ.डी./टैक्‍स/2006-132 दिनांक 23.2.2007 जिसके द्वारा भूमि कर में राजस्‍थान वित्‍त अधिनियम, 2006 की धारा 42(4) के अंतर्गत अंतिम रूप दी गई सूचियों की प्रभावी तिथि अधिसूचित की गई
है ।

3. अधिसूचना संख्‍या-एफ.2(6)एफ.डी./टैक्‍स/2007-133 दिनांक 28.2.2007 जिसके द्वारा भूमि कर में 10 हैक्‍टेयर से कम भूमि के भूमि धारकों पर कर माफ करने एवं 10 हैक्‍टेयर से 50 हैक्‍टेयर भूमि के भूमि धारकों के लिये कर की दर कम की गई है ।

4. अधिसूचना संख्‍या-प.10(3)वित्‍त/कर/95-134 दिनांक 6.3.2007 जिसके द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्‍थान द्वारा राजमंदिर सिनेमा में प्रायोजित फिल्‍म 'डोर' के एक शो को मनोरंजन कर से परिहार किया गया है ।

 

प्रतिवेदन

  श्री अध्‍यक्ष: प्रतिवेदन।

  श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के निम्‍नांकित तीन प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखता हूं:-

 

I    भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च, 2006 को समाप्‍त वर्ष के लिए प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) ;

II    भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च, 2006 को समाप्‍त वर्ष के लिए प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) ;  एवं

III   भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च, 2006 को समाप्‍त वर्ष के लिए प्रतिवेदन (सिविल) 

 

 

याचिकाओं का उपस्‍थापन

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री खुशवीर सिंह, याचिका का उपस्‍थापन करें।

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

श्री भागीरथ चौधरी, याचिका का उपस्‍थापन करें।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार निम्‍नांकित दो याचिकाएं-

 

I    किशनगढ़ (अजमेर) उपखण्‍ड मुख्‍यालय पर स्थित 132 KVGSS चौकी का विस्‍तार कर 220 KVGSS में परिवर्तित करने बाबत् चार व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एवं 

II    किशनगढ़ (अजमेर) मुख्‍यालय पर संत नागरीदास स्‍टेडियम के निर्माण बाबत्  चार व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका उपस्‍थापित करता हूं। 

श्री अध्‍यक्ष: श्री अशोक बैरवा खण्‍डार, याचिका का उपस्‍थापन करें।

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

मैं चाहती थी कि आप अकाल राहत मंत्रीजी के वक्‍तव्‍य के बाद में अपने सुझाव देते, अपनी बात कहते लेकिन आप ऐसा नहीं कर के ऐं ऐं ही कर रहे हैं इसलिए मैं सदन की, मैं चाहती हूं कि आप इतना संवेदनशील मामला है कि राजस्‍थान के अधिकांश भाग में भयंकर ओलावृष्टि से तबाही हुई है इसलिए मैं चाहती हूं कि आप अपने-अपने इलाके में जाएं और अपने-अपने इलाकों में जाकर के और आप देखें और जो सुझाव आपको देने हैं 15 तारीख के रोज आप यहां पर वापस आएं और 15 तारीख को मुख्‍यमंत्रीजी जब बोलेंगी तो वो इस बात को भी उसमें सम्मिलित करेंगी और यथा संभव किसान को जो कुछ मदद यह सरकार कर सकती है वो करेगी।

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

मैं सदन की कार्यवाही कल दिनांक 14, बुधवार, प्रात: 11 बजे तक के लिए स्‍थगित करती हूं।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 1418 बजे, बुधवार 

14 मार्च, 2007 के  1100 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई)

 

 

             

 

 

 

 

 

 



000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

000  अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।