Ddm/usc/16032007/1100/1a

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का सोलहवां दिवस      संख्‍या 12

 

 

शुक्रवार, 16 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

 विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(श्री मंगलाराम गोदारा व डा. श्रीगोपाल बाहेती द्वारा सदन कूप में धरना व अनशन)

 

श्री अध्‍यक्ष: अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल पर बैठे रहने वाले माननीय सदस्‍यों से मेरा निवेदन है कि वार्ता चल रही है, अच्‍छा है, आप इस समय यदि अपने-अपने स्‍थान पर बैठ जाएं तो ज्‍यादा उचित रहेगा। मैं, चूंकि संख्‍या भी बहुत क्षीण है...।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जिन माननीय सदस्‍यों के सवाल लगे हुए हैं, वे सवाल पूछना भी चाहते हैं और संख्‍या भी पूरी है।

श्री अध्‍यक्ष: उचित रहेगा, अभी वार्ता चल रही है, मैं समझती हूं उचित रहेगा आधे घण्‍टे के लिये...।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): क्‍वश्‍चन-अवर चलने दें। 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): 5 दिन से लगातार, सारे राजस्‍थान के लोगों के क्‍वशचंस हैं। और क्‍वश्‍चन-अवर चले तो कोई दिक्‍कत नहीं है। वार्ता चले, बैठ जाएं, रास्‍ता निकाल लें। हम सब उनके, मानननीय मुख्‍य मंत्रीजी भी आपसे कह चुकी हैं। क्‍वश्‍चन-अवर, मेरी तो आपसे प्रार्थना है, बाकी तो जैसा आप निर्णय लें। बाकी क्‍वश्‍चन अवर तो चलना ही चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: इसीलिये मैं कह रही हूं कि आधा घण्‍टे के लिये, 11.30 तक के लिये विधान सभा की कार्यवाही स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.02 बजे 11.30 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 


Vps/usc/16032007/1130/1d

 

(11.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(श्री मंगलाराम गोदारा व डा. श्रीगोपाल बाहेती द्वारा सदन कूप में धरना व अनशन)

 

श्री अध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही एक घंटे, अर्थात् 12 बज कर 30 मिनट तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.30 बजे 12.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

Spp/usc/12.30/1k/16.3.2007

 

(12.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(श्री मंगलाराम गोदारा एवं डॉ0 श्रीगोपाल बाहेती,

माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में धरना)

श्री अध्‍यक्ष : आमरण अनशन पर हो, हाथ तो जोड़ लिया करो। (व्‍यवधान)

अमराराम (धोद) : हाथ तो दोनों ही जोड़ रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मुख्‍य मंत्रीजी, डेडलॉक तोड़ने के लिये कुछ फरमायें आप।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, बहुत भयंकर ओलावृष्टि हुई है राजस्‍थान के अंदर और जगह जगह पर पकी हुई खड़ी फसल नष्‍ट हुई है। हमने सोचा था कि इस सदन में इसके बारे में अच्‍छी चर्चा होगी, बहुत सारे सुझाव निकलकर आयेंगे, जिनको हम आगे चलकर अपनी क्रियान्विति में भी जोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। पर दुर्भाग्‍यवश वह चर्चा नहीं हुई। इस भयंकर तबाही के अंदर मेरी सरकार की ओर से मैं आप सबको यह आश्‍वस्‍त करना चाहूंगी कि हम लोग कोई कमी या कोई कोर-कसर उनको मदद करने में नहीं छोड़ेंगे। इस भयंकर त्रासदी के अंदर जितनी मदद हमारी सरकार की ओर से हो सकती है, उसमें मैं फिर कहती हूं कि किसी किस्‍म की कमी हम लोग छोड़ेंगे नहीं। मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि पहले दिन मैं खुद दौरा कर चुकी हूं। दो जगह मैं खुद होकर आई हूं। साथ में जो राज्‍य मंत्री थे, उनको तीन दिन के दौरे पर तुरन्‍त ही भेज दिया था, वह आज ही सब अपने क्षेत्र से वापस लौटेंगे। कलक्‍टर्स को भी दिशा-निर्देश कर दिये गये हैं कि वह भी जाये और सब इन्‍फोर्मेशन कलेक्‍ट करे। 17, 18 व 19 तारीख को तो आपने भी सब माननीय सदस्‍यों को उस दिन छुट्टी दी है ताकि हम लोग जाकर क्षेत्र के अंदर किसानों की डायरेक्‍ट बातचीत करके खुद इनके क्षेत्र में जाकर, देखकर इस विषय के ऊपर जितनी भी जानकारी ला सकते हैं, वह यहां ले आयें। मैं समझती हूं कि 20-21 तारीख तक पूरी जानकारी हमारे पास आ जायेगी और उसको देखते हुए जो बेस्‍ट से बेस्‍ट हम अपने किसानों के लिये कर सकते हैं उसमें जैसे मैंने आपको कहा है हम कोई कमी छोड़ेंगे नहीं । मैं यह कहना चाहूंगी कि अगर आप कम्‍पेरिजन करें पिछले तीन सालों के अंदर तो हम लोगों ने जो पैसा दिया है, करीबन 33 करोड़ रुपये से ज्‍यादा पैसा दिया। और इन तीन-चार दिन के अंदर आलरेडी 13 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और मैं आपको यह विश्‍वास दिलाना चाहती हूं कि हम आगे भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, इसलिये उसी से इंटेंशन जाहिर हो जाता है। किसानों के ऊपर किसी तरीके से मुसीबत आये, वह हम लोग पूरी तरीके से वहन करेंगे। हमारी सरकार किसानों की सरकार है और इसलिए यह हमारी बहुत बड़ी जिम्‍मेदारी हो जाती है कि उनकी मुसीबत के अंदर हम लोग पूरी तरह से दृढ़-संकल्पित होकर उनकी मदद करें।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष। 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष जी, पिछले दिनों राजस्‍थान के अंदर 3-4 दिन में भयंकर नुकसान किसानों का हुआ। ऐसा नुकसान राजस्‍थान में पहले कहीं देखने को नहीं मिला था, यह प्रथम बार है। नेचुरल कैलेमिटी है। नेचुरल कैलेमिटी को मीट करने के लिये राजस्‍थान सरकार का ध्‍यान आकर्षित करने के लिये हमें भी अनप्‍लीजेंट कठोर कदम उठाना पडा। हमारी पार्टी के दो माननीय सदस्‍यों को हमें बैठाना पडा कि आपका ध्‍यान आकर्षित हो। आप द्रवित हों और द्रवित होकर किसानों को मदद पहुंचाने के लिये वादा करें। हमने यह तो कहा ही नहीं, आप अभी किसानों को दे दीजिये। हम तो बात ही चाहते थे। आपने यह घोषणा की है कि आप आपके खजाने के सारे किवाड़ खोल देंगी और मुक्‍त हाथ से, मुक्‍त मन से उनकी आप भरपूर मदद करेगी। यह आपका आश्‍वासन ही हम चाहते थे और कोई बात थी नहीं। यह जब आप कह रही हैं तो गेन आपको मिल रहा है, हमें तो कुछ नहीं मिल रहा । हम तो उनके लिये संघर्ष कर रहे हैं और आप आश्‍वासन दे रहे हो । उस आश्‍वासन के मुताबिक किसानों को दे देंगी तो आप गेनर हो जायेंगे, हम तो इस मायने में लूजर रहेंगे। लूजर इस मायने में रहेंगे कि हमने संघर्ष किया, जब आप मानी हैं। हमने संघर्ष किया। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसमें क्लियर करना चाह रही हूं कि यहां अच्‍छी चर्चा होती तो बहुत अच्‍छा होता, परन्‍तु जहां तक सरकार का सवाल है वह पहले दिन से ही हम सब लोग चाहे मंत्री महोदय हो, चाहे पूरे हमारे माननीय सदस्‍य हों, सब अपने अपने क्षेत्र के अंदर अपना काम करने के लिये निकले हैं, हमें किसी की जरूरत नहीं हमारी ड्यूटी हमें बताने के लिये। हमारी जो ड्यूटी है उसको हम पूरी तरह से करेंगे। पहले भी किया है, फिर करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं-नहीं, अब कुछ नहीं। ..(व्‍यवधान)..

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो चार दिन पहले लगातार किसानों की फसल नष्‍ट  हुई है..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है ..(व्‍यवधान)..

श्री अमराराम (धोद): चार दिन के बाद भी सरकार कोई बात सुनने के लिये तैयार नहीं है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब कुछ नहीं। ..(व्‍यवधान).. आप क्‍या कहना चाहते हैं? ..(व्‍यवधान).. कह दिया नेता प्रतिपक्ष ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य : इनकी तो कल मीटिंग हुई है 200 ..(व्‍यवधान).. इनका तो काम ही यह है ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या कहना चाहते हैं आप ? ..(व्‍यवधान).. क्‍या तरीका है?

श्री अमराराम (धोद): मैं तो मेरी बात कहूंगा। अध्‍यक्ष महोदय, जो भंयकर त्रासदी हुई है, 100 प्रतिशत फसल नष्‍ट हुई है। चार दिन के प्रतिवाद के बाद भी सरकार कोई मदद नहीं कर रही है, इसलिए मैं सदन से बहिर्गमन कर रहा हूं।

 (श्री अमराराम (धोद), माननीय सदस्‍य द्वारा सदन से बहिर्गमन)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, बात यह हुई थी कि आप यह भी माननीय सदस्‍यों को, जो आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, आप उनसे आग्रह करते कि बात हो गयी है, मुख्‍य मंत्रीजी ने आश्‍वासन दे दिया है कि वह कोई कसर नहीं रखेंगी किसानों को सहायता पहुंचाने में, अब आप कृपया इनको कह दीजिये कि अपने अपने स्‍थान पर चले जायें। माननीय सदस्‍य, अपने स्‍थानों पर चले जायें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं प्रार्थना करूंगा। मुझे आपने बोलने नहीं दिया न । मुख्‍य मंत्रीजी के ठीक बाद में मैं यही रिक्‍वेस्‍ट करने वाला था और .. ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: अनशन तो तुड़ाते बाहर अपने स्‍थान पर जाकर, यहां थोड़ी टूटेगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मुख्‍य मंत्रीजी को मेरी बात थोड़ी कड़वी लगी। मैंने कड़वी बात कोई दुर्भावना से नहीं कही है।

श्री अध्‍यक्ष: अब मीठी कह दो। अब मीठी कह दीजिये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अगर आपको उससे ठेस पहुंची हो.. ..(व्‍यवधान)..

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आपकी बात तो हमेशा अच्‍छी लगती है हम सबको। हमें आपकी बात कभी कड्वी नहीं लगी है और जहां तक किसानों की राहत का सवाल है, अध्‍यक्ष महोदय, हम लोगों ने तो पहले ही जो पैकेज दिया, हमारे रिलीफ मंत्रीजी ने अच्‍छी तरह से बता भी दिया था कि हमने 12 तारीख से पहले वाला जो नुकसान हुआ, ओलावृष्टि के अंदर दिया है उसको हमने अन्‍तरिम पैकेज मानकर ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): Don’t put it. Don’t misquote it. Madam I am sorry.

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): हमने उसको अन्‍तरिम मानकर दिया हुआ है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: सदन की नेता को समाप्‍त तो करने दें। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): The spirit we have to maintain it. If it is not in right spirit then what is this.

श्री अध्‍यक्ष: सदन की नेता को समाप्‍त तो कर लेने दें। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो मुख्‍य मंत्रीजी से कल भी निवेदन किया था, आज भी किया है और यह मानीं, इससे मुझे खुशी है, मेरी पार्टी को भी खुशी है। मैं आपको भी बताना चाहता हूं और आपको बताऊं चौधरी कुम्‍भाराम जी एक बार रेवेन्‍यू मिनिस्‍टर बने थे। उनके पास एक फाइल गयी। कुम्‍भाराम जी ने उस पर जो आदेश दिया था, उसकी टिप्‍पणी नीचे से प्रतिकूल आई। बोले, यह नियमों में है ही नहीं। कुम्‍भाराम जी ने उस फाइल पर लिखा ऐसा नियमों में नहीं है तो वह नियम बदल दिया जाये। यह मैंने आपसे कहा है।

 

Msr/usc/1240/1l/16032007

 

यह मैंने आपसे भी कहा। मैंने आपसे भी कहा है, ऐसे नियमों को आप बदल दें और जहां नियम नहीं हैं वो नियम किसानों के बना दो। अध्‍यक्ष महोदय, हम आपके साथ हैं इस मामले में।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोलते हैं? चर्चा सदन की नेता प्रतिपक्ष के नेता के बीच की है, आप क्‍यों बोलते हैं?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जीरा, धनिया, प्‍याज, टमाटर, ईसबगोल सब किसानों की चीज हैं, मान्‍यवर। अब टमाटर तो साफ हो गया बेचारे का, तो इन सब को आप लीजिए और हम आपका आभार मानेंगे, किसान खुश होगा।

इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करते हुए मेरे प्रतिपक्ष के साथियों को, जिनको हमने बैठाया था, में अनुरोध करूंगा हमारे पी.सी.सी. प्रेसिडेंट से, शिवचरणजी माथुर साहब वहां जायेंगे और इनको, इनसे प्रार्थना करेंगे कि सीट पर बैठाएं इनको।

एक माननीय सदस्‍य: जूस पिलाएं।

श्री अध्‍यक्ष: सदन में नहीं पिलाया जायेगा, सदन से बाहर जाकर के आप इनका अनशन तुड़वाएं, जूस पिलाइये और जो कुछ करिये लेकिन आप सदन से बाहर जा कर के करें यह काम।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): धन्‍यवाद दे दें आप।

( श्री मंगालाराम गोदारा एवं डा. श्रीगोपाल बाहेती द्वारा धरना समाप्‍त )

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप भी बता दो।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): बजा देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: बजा दी न, बजा तो दी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरे दल के दो माननीय सदस्‍यों को हमने बैठाया था, कड़वी घूट थी, कदम बहुत सख्‍त था लेकिन आपने भी बात मानी तो फिर इन्‍होंने भी बात मानी। मैं आपका और मेरी पार्टी का, दोनों माननीय सदस्‍यों का और मेरी पार्टी का मैं आभार मानता हूं, शुक्रिया अदा करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: और आसन का आभार बिलकुल नहीं मानेंगे आप?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आसन ने, अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो सहृदयता दिखायी, अनेक बार गतिरोध पैदा हो गया फिर भी आप लगी रहीं। प्रतिपक्ष, सत्‍तापक्ष ने माना या नहीं माना मैं कह नहीं सकता लेकिन हमने तो मान लिया था और मुख्‍यमंत्रीजी अड़ी नहीं कहीं भी लेकिन उनके सलाहकार जो थे, उनके जो सलाहकार थे, बुरा मत मान जाना, एक साल पहले इसी सभा के अन्‍दर, इसी बजट सत्र में कहा था कि माननीय मुख्‍यमंत्रीजी, आपके सलाहकार जो बैठे हैं आपके आगे और पीछे और बराबर मैं, इनसे आप सावधान रहो, यही आपको डुबो देंगे। अब मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप सावधान रहें। ... (व्‍यवधान)

स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

श्री अध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍न स्‍थगन प्रस्‍ताव की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की और से राज्‍य में विधि सचिव के पद पर पदस्‍थापन के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जा, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

वैसे भी इस मामले को मैंने राज्‍य सरकार को भेजा है टिप्‍पणी के लिए कि उनकी क्‍या टिप्‍पणी आती है और इसके अलावा बीस तारीख को जो न्‍याय प्रशासन की मांग है, उस पर भी माननीय सदस्‍य को यह प्रश्‍न उठाने की अनुमति होगी इसलिए मैं अनुमति देने में असमर्थ हूं।


नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं :-

(1)                  श्री खुशवीर सिंह, सदस्‍य की और से जिला पाली में पारम्‍परिक तरीके से ईंट कजावा व मिट्टी के बर्तन तैयार करने वालों को हो रही परेशानी के सम्‍बन्‍ध में।

(2)                  श्री हीरालाल मीणा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र बामनवास में सम्‍पर्क एवं लिंक सड़कों का निर्माण करने के सम्‍बन्‍ध में।

(3)                  श्री जालमसिंह रावलोत, सदस्‍य की और से जिला बाड़मेर एवं जैसलमेर के चिकित्‍सालयों में चिकित्‍सकों के रिक्‍त पदों को शीघ्र भरने के सम्‍बन्‍ध में।

(4)                  श्री हरलाल सिंह खर्रा, सदस्‍य की ओर से राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या-11 स्थित रींगस कस्‍बे में ट्रोमा अस्‍पताल खोलने के सम्‍बन्‍ध में।

माननीय सदस्‍य, चूंकि आज इसमें से एक-दो तो ऐसे ही हैं इन्‍हें पढ़ा हुआ मान लिया जायेगा क्‍योंकि आज बहुत बहत्‍वपूर्ण मांग है जिस पर सभी माननीय सदस्‍य अपने विचार प्रकट करना चाहेंगे।

पर्ची तो बाद में, अभी थोड़ी। हां, चूंकि इन्‍हें पढ़ा हुआ मान लिया इसलिए मैं चाहूंगी कि जिन चार सदस्‍यों की पर्ची है उनको में चार मिनट का समय दूंगी एक-एक को बोलने के लिए क्‍योंकि इसके बाद हम प्रारम्‍भ करना चाहेंगे चिकित्‍सा और स्‍वास्‍थ्‍य की मांग को।

श्री अर्जुनलाल मीणा। कृपया बोलें आप। 

 

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

मोहनलाल सुखाडि़या विश्‍वविद्यालय में आरक्षण विषयक

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय का ध्‍यान इस ओर दिलाना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: इसके बारे में आपने प्रश्‍न जब पूछा था, उठाया गया था प्रश्‍न तो माननीय मंत्रीजी ने कह दिया था कि वो साक्षात्‍कार रोक दिये हैं। वही प्रश्‍न तो है आपका।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा):  नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, नहीं रोगे।

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने सदन में जो आश्‍वासन दिया था उसके तहत मोहनलाल सुखाडि़या विश्‍वविद्यालय में जो प्रोफेसर के पदोन्‍नति में जो साक्षात्‍कार हो रहे हैं उनको रोका नहीं गया है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि 13.03.2007 से होने वाले प्राध्‍यापकों की पदोन्‍नति में विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के आरक्षण प्रावधानों की अवहेलना हो रही है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि 45 पदों में से एक भी पद एस.टी. केन्‍डीडेट नहीं है और पिछले 2001 में जो विश्‍वविद्यालय में भर्ती हुई थी उसमें भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के एक भी केन्‍डीडेट को भर्ती में नहीं लिया है।

अध्‍यक्ष महोदय, विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइड लाइन के आधार पर यू.जी.सी. की जो गाइड लाइन 2006 के बिंदू संख्‍या 8 (ए) (4) में एस.सी., एस.टी. के आरक्षण के आरक्षण का प्रावधान है उसमें यह भी प्रावधान है कि जो बोर्ड, चयन करने का जो बोर्ड बनेगा उसमें एस.सी., एस.टी. का भी एक प्रतिनिधि होगा। मोहनलाल सुखाडि़या विश्‍वविद्यालय में जो भर्ती हो रही है उसमें एक भी केन्‍डीडेट, एक भी प्रतिनिधि एस.सी., एस.टी. वर्ग का शायद नहीं लिया है इसलिए, अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि मंत्री महोदय इस पर अपना जवाब दें।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, इसका जवाब देंगे जिस दिन शिक्षा की मांग होगी। आप नोट कर लीजिए, इसका जवाब दे दीजियेगा आप।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): प्रमोशन तो अभी हो रहा है, इन्‍टरव्‍यू वल रहे हैं ... (व्‍यवधान) कालेज खुल जायेंगे उसके बाद क्‍या होगा?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, उसमें सलेक्‍शन कमेटी में जोधपुर यूनिवर्सिटी के एक्‍स वाईस चान्‍सलर प्रोफेसर श्‍यामलाल हैं उसमें जो शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के हैं। उसके अन्‍दर हैं वो। ... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह दो प्रकार के, पहले माननीय सदस्‍य ने उठाया था, 12 तारीख को जो साक्षात्‍कार हो रहे थे उनमें एस.सी., एस.टी. का बैकलोग नहीं था। यह सब्‍जैक्‍ट आपने उठाया था, उसको मैंने आपकी अनुमति से रोक दिया था।

यह जो है यह सी.एस. स्‍कीम के अन्‍तर्गत यह कार्यवाही हो रही है लेकिन इसमें भी मैं आपको इतना आश्‍वस्‍त कर सकता हूं कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की जो-जो अहर्ताएं हैं और जो आवश्‍यकताएं हैं उसके अन्‍तर्गत यह कार्यवाही होगी। में आपको यह आश्‍वस्‍त करता हूं कि हम यह निर्देश उनको भेज रहे हैं कि साक्षात्‍कार के बाद लिफाफे बंद रखेंगे और उनसे सारी जानकारी प्राप्‍त करने के बाद में जो-जो मापदण्‍ड तय किये गये हैं उन्‍हीं के आधार पर होगा। शिड्यूल्‍ड कास्‍ट का आदमी, अपने सज्‍जन जो हैं वो उसमें साक्षात्‍कार में हैं और इसलिए जो भी प्रावधान होगा उस प्रावधान का पूरा पालन किया जायेगा, किसी प्रकार से एस.सी., एस.टी. के साथ अन्‍याय मैं नहीं होने दूंगा। मैं आपको यह आश्‍वस्‍त करता हूं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एक ही निवेदन करना चाहूंगा, अध्‍यक्ष महोदय। जो इन्‍टरव्‍यू ले रहा है वह खुद ही एप्‍लीकेन्‍ट है। जज कभी खुद का फैसला देता है ... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह आदेश दे दिया है कि वो नहीं बैठेगा। रोक दिया है उसको।

श्री अध्‍यक्ष: श्री तगाराम चौधरी, बाड़मेर रिफाइनरी के सम्‍बन्‍ध में। (अनुपस्थित)

श्री हरीसिंह रावत।

आई.आई.टी. की स्‍थापना उदयपुर में करने विषयक

श्री हरीसिंह रावत (भीम): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं हमारे उदयपुर सम्‍भाग में इण्डियन टैक्‍नोलोजी ऑफ साईंस और आई.आई.टी. के बारे में कुछ मेरे सुझाव रखना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज विश्‍व में हमारा प्रदेश, हमारा देश चाहे चिकित्‍सा हो, चाहे टैक्‍नोलोजी हो, चाहे इन्‍जीनियरिंग हो हरेक में अग्रिम रहा है और इसका लोहा अमरीका के राष्‍ट्रपति मिस्‍टर बुश ने भी माना है और कहा है कि अमरीकियों, जागो, नहीं तो भारतीय आ जायेंगें।

 

Ars/usc/1250/1m/16032007/1

 

इसी के अन्‍तर्गत आज हमारे देश में भी आई आई टी खुलने के आसार हुए हैं जिसके अन्‍तर्गत मैं चाहता हूं कि आई आई टी हमारे उदयपुर में खुले। इसके कारण कि हमारे उदयपुर संभाग में कहीं भी कोई भी ऐसा बड़ा इन्‍स्‍टीट्यूट नहीं है। आज अगर हम देखें तो जोधपुर में एम्‍स या लॉ यूनिवर्सिटी है, जयपुर में एम एन आई टी एवं मेडिकल यूनिवर्सिटी, कोटा में टैक्निकल यूनिवर्सिटी एवं ओपन यूनिवर्सिटी तथा अजमेर में लोक सेवा आयोग एवं माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड जैसी राष्‍ट्रीय व अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की संस्‍थाएं हैं लेकिन उदयपुर में हमारी ऐसी कोई संस्‍था नहीं है। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि आई आई टी का यह प्रावधान जो है हमारे उदयपुर में रखा जाए। इसके कई हमारे बिंदु हैं, हमारे यहां पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है और दो हाई वेज हमारे यहां क्रास करते हैं। दूसरी सबसे बड़ी अहम भूमिका जो हम देंगे वह है जमीन की, हमारे पास चार जगह ऐसी जमीन है जो पांचसौ हेक्‍टेअर से भी अधिक है। जितनी भी जमीन चाहिएगी हम आपको उपलब्‍ध कराएंगे और उसके बाद भी अगर पैसों की जरुरत पड़ेगी तो हमारे पूरे संभाग के जितने भी हम विधायक और सांसद हैं हमारे फण्‍ड से देकर जो भी कमी होगी, हम पूर्ण करने की कोशिश करेंगे।

अत: आपके माध्‍यम से मैं मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करूंगा कि आई आई टी हमारे उदयपुर में स्‍थापित हो। इस सन्‍दर्भ में हमारे चपलोत साहब भी कुछ बोलना चाहेंगे। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमती वंदना मीणा।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने इसी बारे में पर्ची दी है और यह मेरा दुर्भाग्‍य है कि मैंने पहली बार पर्ची दी और खुली नहीं। आई आई टी उदयपुर में होना नितान्‍त आवश्‍यक है। राजस्‍थान को एक आई आई टी केन्‍द्र सरकार ने दी है  ...(व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से उसी को इजाजत दी जाती है जिसने पर्ची डाली हो। ...(व्‍यवधान)

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): एक मिनट की बात है मेरी ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): जोधपुर सबसे बढि़या जगह है, जोधपुर में आई आई टी ...(व्‍यवधान) जोधपुर में सबसे बढि़या जगह है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य..... ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): जोधपुर ठीक है और हर दृष्टि से जोधपुर में आवश्‍यक है। ...(व्‍यवधान)  जोधपुर सबसे उत्‍तम जगह है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है, ...(व्‍यवधान) आसन पांवों पर है, ...(व्‍यवधान) आसन पांवों पर है ...(व्‍यवधान) अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें ...(व्‍यवधान) कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें, नौ, नौ, स्‍थान ग्रहण करें, राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य, जिसकी पर्ची होती है केवल वही बोलता है, यह गलत परम्‍पराएं आप डाल रहे हैं, उचित नहीं है। श्रीमती वंदना मीणा।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इतना गतिरोध हाउस में हुआ है। मेरा आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन है कि आई आई टी जो सीपेज वाला क्षेत्र है ग्रामीण बड़ोप्‍पल टेन प्‍लस टू का भवन ही उपलब्‍ध नहीं है वहां बनाओ।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें, श्रीमती वंदना मीणा।

पंचायतों को पट्टे जारी करने का अधिकार देने विषयक

श्रीमती वन्‍दना मीणा (उदयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मेरे उदयपुर ग्रामीण में सत्रह पटवार मण्‍डल व इक्‍कीस पंचायतें हैं और इन पंचायतों में 67 गांव जो पैराफेरी में आते हैं, यह जो गांव पहले पंचायतों में थे और उसके बाद पैराफेरी में आने की वजह से इन गांवों में करीबन बारह हजार परिवार लाभान्वित होते हैं। मैं माननीय मुख्‍य मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि इन परिवारों को न तो पंचायत पट्टे दे सकती है क्‍योंकि यह पैरा फेरी में आने की वजह से पंचायत कहती है कि यह पैराफेरी में हैं इस वजह से हम पट्टे नहीं दे सकते हैं, यह नगर विकास प्रन्‍यास के द्वारा दिए जायेंगे। यह रोक पंचायतों ने लगा रखी है। उन पंचायतों में सभी मध्‍यम वर्ग के व गरीब परिवार रहते हैं।

मेरा अनुरोध है कि इन पंचायतों में इन परिवारों को पट्टे दिए जाएं और उसके साथ साथ नगर विकास प्रन्‍यास से विकास कार्य भी करवाए जाएं क्‍योंकि वहां पर चाहे स्‍कूल भवन हो, चाहे आंगनबाड़ी भवन हो वह पंचायत भी नहीं बना सकती है जब तक यू. आई. टी. एन. ओ. सी. नहीं देगी तब तक वहां भवन का निर्माण नहीं होगा। ऐसी पंचायतों में सरपंच जो ज्‍यादा बोलने वाले होते हैं वह तो काफी चक्‍कर लगाकर एन ओ.सी. लाते हैं तब जाकर उसका निर्माण होता है बाकी सीधे सादे सरपंच होते हैं उनके जूते तक टूट जाते हैं, वहां के अधिकारी सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसी स्थिति में मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री महोदय जी, इन पंचायतों को जो पैराफेरी के अन्‍तर्गत आती हैं उनकी समस्‍या का समाधान करें। कहीं न कहीं इसका रास्‍ता निकालना पड़ेगा। यह बारह हजार परिवार आपको हमेशा के लिए याद करेंगे। इसी आशा के साथ मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री तगाराम। हालांकि आपको समय पर आने की आदत डालनी चाहिए लेकिन चूंकि यह रिफाइनरी का मामला है इसलिए मैं आपको बोलने का मौका दे रही हूं।

बाड़मेर में तेल की रिफाइनरी

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपने मेरे को समय दिया इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। मैंने आपकी आज्ञा से पर्ची के माध्‍यम से बाड़मेर में तेल की रिफाइनरी लगे, इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री से और सदन से निवेदन करना चाहूंगा, जब से तेल निकला है बाड़मेर में तब से लेकर के और माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने बहुत प्रयत्‍न किया है रिफाइनरी के लिए, उसकी मैं भूरि भूरि प्रशंसा करता हूं। सर्वदलीय बैठकें बुलाईं, संकल्‍प पारित किए और सभी ने एकजुट होकर के बाड़मेर जिले में रिफाइनरी लगाने का तय किया था और बड़ी खुशी थी कि बाड़मेर में ही लगेगी। बीच में यहां से दल भी गए अधिकारियों के और वहां पर देखा गया किस जगह उपयुक्‍त है, क्‍या है।

मेरी तो उसमें मांग थी धौलपाडिया खाली जमीन पड़ी थी उसमें लगाने की,लीलाडा, जादुओ की ढाणी और बायतु में तय कर दिया था टीम ने और उसके कुछ ही समय बाद में भारत सरकार से भी हरी झण्‍डी मिल गई थी और रिफाइनरी लगना तय हो गया था। वहां पर राजनीतिक कारण से कुछ प्रतिपक्ष के नेताओं के इशारे पर कहो, वहां के बाड़मेर के उन्‍होंने वहां कुछ वाद विवाद भी उठाया था, टी.वी. में भी कई बार आया था, इस तरह की बातें भी हुईं उसके उपरांत मैं नाम किसी का नहीं ले रहा हूं। फिर बाद में भारत में पैट्रोलियम मंत्री जी बदल गये और अभी जो वर्तमान में मंत्री जी हैं वह या किसी कारण से यह जो मांग उठी है दुबारा इतनी रियायत देने की, बड़ी भारी रियायत देने की, यह समझ में नहीं आ रही है। जब तेल निकाला, किसानों ने अपनी जमीन दी है। माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने मेरे को आदेश फरमाया था मंगला-1 के लोकार्पण के दिन कि यह जमीन देनी है और आप काश्‍तकारों का मन बनाओ और यह देश का भले का मामला है, राजस्‍थान के भले का मामला है, इससे ज्‍यादा कोई अवसर हो नहीं सकता बाड़मेर के लिए।

 

vns/usc/13.00/1n/16.3.2007

 

कि बाड़मेर में रिफाइनरी खुले तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। उद्योगपतियों को उद्योग लगाने का अवसर मिलेगा। गाड़ी वालों को तेल की ढुलाई का अवसर मिलेगा और कई तरह के फायदे होंगे। राजस्‍थान अकेले को ही नहीं भारत को फायदा है। फिर यह रिफाइनरी आगे से आगे सरक रही है जिससे तेल का दोहन बीच में कई बार इस तरह से घोषणाएँ भी हुई कि तेल का दोहन 2005 में कर दिया जायेगा। फिर 2006 भी निकल गया, 2007 भी निकल गया। अब वहां पर केयर्न की मीटिंग कलेक्‍टर साहब की अध्‍यक्षता में हुई थी। केयर्न वाले कह रहे हैं 2009 में हम करेंगे। तो दिन-प्रतिदिन वह दोहन भी अभी बंद पड़ा है एक प्रकार से। गाडि़यों से, ट्रकों से यदि लोडिंग करके कच्‍चा तेल बाहर भी ले जाते तो बहुत गाड़ी वालों को फायदा होता। आज के दिन जो ट्रक युवा बेरोजगार चलाते हैं उनको काम मिलता नहीं है, बहुत काम मिलता। वहां पर भी रोजी लगती और यह फायदा ही फायदा है। मुझे बहुत ही विश्‍वास है माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया पर और पूरे सदन पर कि यह काम आप करवायेंगे। मैं पुरजोर शब्‍दों में मांग करता हूं माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया से भी.

श्री अध्‍यक्ष: वह जो गयीं।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): कि आप अपना पूरा प्रभाव काम में ले करके यह रिफाइनरी बाड़मेर में ही लगवाएं। यह मेरी प्रार्थना है पूरे सदन से। पुरजोर मांग है यह रिफाइनरी नहीं खुलती है तो मुझ कुछ भी करना पड़े मैं करूंगा और यह रिफाइनरी खुलनी चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: पुरजोर मांग ही मत करो। आप सदन से यह कहो कि सदन इस सम्‍बन्‍ध में संकल्‍प पारित करके भेजे।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मैं आपके माध्‍यम से...

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  यह एक गंभीर विषय है और हम सब तगाराम जी के साथ हैं। बाड़मेर में ही रिफाइनरी खुलनी चाहिये। जहां पर माल पैदा हो वहां नहीं खोल करके दूसरी जगह जो षडयंत्र किये जा रहे हैं यह राजस्‍थान की जनता कतई बर्दाश्‍त नहीं करेगी। राजस्‍थान में ही खुलेगी और बाड़मेर में ही रिफाइनरी खुलनी चाहिये ऐसा मेरा आपसे निवेदन है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मैं आपकी आज्ञानुसार...

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): अध्‍यक्ष महोदय, बाड़मेर में रिफाइनरी नहीं हो इसके लिये पूरे प्रयत्‍न हो रहे हैं। जो शर्तें रखी जा रही हैं 26,000 करोड़ की शर्त वह निश्चित रूप से एक ऐसी शर्त है जो कोई सरकार पूरा नहीं कर सकती जबकि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मध्‍य प्रदेश में और पंजाब में रिफाइनरी खोलने के लिये केवल 1500 सौ करोड़ रुपये की शर्त रखी थी और वहां रिफाइनरी चालू हो गयी है। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें नयी बात यह है मैं माननीय सदस्‍य तगाराम जी से कहना चाहता हूं..

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची तो उनकी है, बोल रहे हैं आप।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): कि वहां तेल भी नहीं है। जहां तेल नहीं है वहां रिफाइनरी चालू हो गयी है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  बहुत अच्‍छा होता यहां मुख्‍यमंत्री और सरकार अभिभाषण और बजट में इस पर कोई बात कहतीं। पूरे अभिभाषण और बजट में एक शब्‍द भी नहीं कहा रिफाइनरी के लिये। यह सरकार रिफाइनरी के प्रति कितनी गंभीर है यह इससे ही मालूम पड़ जाता है।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव):  जहां तेल है, कच्‍चा तेल है वहां रिफाइनरी नहीं हो इसके लिये *** राजस्‍थान के बाड़मेर जिले में रिफाइनरी नहीं हो यह केवल ***। आप उसे रोकें। मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी को साधुवाद देना चाहता हूं उनका प्रयत्‍न पूरा चल रहा है लेकिन प्रतिपक्ष के माननीय नेताजी से निवेदन करना चाहता हूं कि वह अपने प्रयत्‍न से केन्‍द्र सरकार को समझाएं रिफाइनरी बाड़मेर में ही होनी चाहिये। 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपकी पर्ची नहीं है। मिस्‍टर रावलोत, कृपया बिराज जाएं। जैसलमेर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया बिराजे। आपको इस पर्ची पर अनुमति नहीं है। स्‍थान ग्रहण करें। तगाराम जी, काफी बोल लिये आप तो। बात कह दी ना आपने अपनी।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपकी आज्ञा से पूरे सदन से और विशेष तौर से मुख्‍यमंत्री महोदया से निवेदन करना चाहता हूं कि पुन: पूरा सदन इस बहुत ही जन कल्‍याणकारी राजस्‍थान को आगे बढ़ाने के लिये और यहां के बेरोजगारों को रोजगार मिले, उद्योग मिले। बाड़मेर पिछड़ा हुआ रहा है बरसों से तो वहां पर उद्योग खुलें। इस तरह का बहुत ही अच्‍छा काम होगा इसके लिये संकल्‍प व्‍यक्‍त किया जाए सर्व सम्‍मति से। मैं आपके माध्‍यम से यही निवेदन करना चाहता हूं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हम भी उम्‍मीद करते हैं कि सदन यह संकल्‍प पारित करेगा कि बाड़मेर में ही रिफाइनरी खुलनी चाहिये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपने इस मामले को उठाया पर्ची के द्वारा सरकार से संबंधित जानकारी लेने के बारे में ही चीज उठायी जाती है लेकिन तगाराम जी ने तो प्रतिपक्ष के ऊपर आरोप लगा दिया कि हम तो कर रहे हैं लेकिन प्रतिपक्ष के लोग इसका विरोध कर रहे हैं..

श्री अध्‍यक्ष: यह किसने कहा है ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कहा है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): ऐसा बीच में हुआ। मान्‍यवर, ऐसा बीच में वहां पर हुआ था।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करूंगा कि उस पर्ची के तहत उन्‍होंने जो आरोप लगाया है उसको हटा दिया जाए कार्यवाही से।

श्री अध्‍यक्ष: हटा देंगे। ऐसा कहा है तो हटा देंगे। अब मंत्री कुछ कह रहे हैं। मंत्रीजी कुछ कहना चाह रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जब तगाराम जी ने यह बात कही सदन की नेता हाउस में उपस्थित थीं। अगर वह पहल करतीं और संकल्‍प लाने की कोई बात करतीं तो कोई बात बनती।

श्री अध्‍यक्ष: संकल्‍प वैसे भी आ सकता है। आ सकता है संकल्‍प।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  संसदीय कार्य मंत्रीजी बैठे हैं तो फिर संकल्‍प, यह सही है राजस्‍थान में लगनी चाहिये। बाड़मेर में लगनी चाहिये इसमें किसी को इल्‍तजा, किसी को इंकार नहीं है। पहल करिये आप। इल्जाम लगाने से क्‍या होता है कि यह नहीं कर रहे हैं, वह नहीं कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री खड़े है। कुछ बोलना चाह रहे हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं बाड़मेर से आने वाले माननीय सदस्‍य का आभार प्रकट करना चाहता हूं पर्ची के माध्‍यम से राजस्‍थान की साढ़े पाँच करोड़ जनता की धड़कन की आवाज है, जो मांग है उसके बारे में उन्‍होंने ध्‍यान आकर्षित किया इसके लिये मैं इनको धन्‍यवाद प्रेषित करता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  राजस्‍थान एक ऐसा पिछड़ा प्रदेश है जिसमें पिछले सौ साल में चालीस साल तो अकाल पड़ा। राजस्‍थान में पेयजल की समस्‍या, अकाल की समस्‍या है। राजस्‍थान में पहली बार प्रकृति मेहरबान हुई पश्चिमी राजस्‍थान में यहां पर पैट्रोलियम के अथाह भण्‍डार मिले। पिछले तीन साल के कार्यकाल में 138 कुओं के छिद्रण का कार्यक्रम हुआ जिसमें 380 मिलियन टन पैट्रोलियम के डिपाजिट प्राप्‍त हुए। पिछले 45-50 साल के कार्यकाल में 111 कुओं के छिद्रण का कार्यक्रम हुआ और मात्र 20 मिलियन टन डिपाजिट प्राप्‍त हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नवम्‍बर, 2004 में रिफाइनरी की स्‍थापना के लिये तेल कम्‍पनीज की एक मीटिंग मैंने आयोजित की थी जिसमें ओ एन जी सी और तमाम कम्‍पनीज थीं। उनसे आग्रह किया था कि कर्नाटक की तर्ज के आधार पर सेज, कर्नाटक की तर्ज के आधार पर रिफाइनरी पैट्रो केमिकल्‍स काम्‍पलेक्‍स आदि की स्‍थापना राजस्‍थान में की जानी चाहिये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हिन्‍दुस्‍तान पैट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड की कम्‍पनी ने रिफाइनरी के लिये अपनी सहमति दी थी और मीटिंग के अन्‍दर यह प्रस्‍ताव हुआ था। उसके बाद एम ओ यू साइन होना था। एच पी सी एल और राजस्‍थान सरकार के बीच में एम ओ यू साइन होना था परन्‍तु केन्‍द्र सरकार के दखल के कारण 98 के अन्‍दर यह एम ओ यू साइन नहीं हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  फिर मैंने राजस्‍थान के तमाम सांसदों को एक पत्र लिखकर आग्रह किया कि रिफाइनरी की स्थापना के लिये भारत सरकार से आग्रह किया जाये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  23 मई, 2005 को राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री जी ने भारत के प्रधानमंत्री को राजस्‍थान में रिफाइनरी लगाने के लिये पत्र प्रेषित किया और अक्तूबर, 2005 में राजस्‍थान प्रवास के दौरान ओ एन जी सी के चेयरमैन सुधीर रॉ जो एम ओ यू साइन होना धौलपुर पावर प्‍लांट के गैस आपूर्ति के समझौते में उसमें यहां के चेयरमैन सुधीर रॉ ने यह स्‍वीकार किया था कि राजस्‍थान में रिफाइनरी लगाने के लिये प्रोपर जगह है और इकोनामिकली वायबल है। यह बात ओ एन जी सी के चेयरमैन सुधीर रॉ ने स्‍वीकार की थी। यहां पर उन्‍होंने यह भी विश्‍वास दिलाया था कि राजस्‍थान में अगर परिस्थिति अनुकूल रही तो 36 और 40 माह के बीच के अन्‍दर रिफाइनरी का कार्य कम्‍पलीट कर दिया जायेगा उसके बाद..

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यह बताओ कोई उम्‍मीद है कि नहीं ? 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ओ एन जी सी द्वारा चाही गयी आधारभूत सुविधाओं, ओ एन जी सी के अधिकारियों के साथ चर्चा के लिये 30.11.2005 को एक मीटिंग आयोजित की उसमें आर के मदान एसोसियेट प्रोफेसरान और बिजनेस डवलपमेंट और एच पी एस आहूजा यह थे। मैं सभी चीज अभी आपको बता दूंगा। मुख्‍यमंत्री द्वारा तेल कुओं के फील्‍ड डवलपमेंट प्‍लांट की स्‍वीकृति के लिये रिफाइनरी की स्‍थापना हेतु केन्‍द्रीय पैट्रोलियम मिनिस्‍टर को पत्र प्रेषित किया ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मुख्‍यमंत्री जी का गुणगान तो थोड़ी बाद सब कर लेंगे। अगर आज करना है तो अध्‍यक्ष जी ने यह निर्देश दिया, आसन ने यह निर्देश दिया है कि आप लगाना चाहते हैं कि नहीं ? आपका सरप्‍लस बजट है। पैसा देना है कि नहीं ? आप एक बात कह दो। पत्र प्रेषित ... (व्‍यवधान) 

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  राजनीतिक भेदभाव के आधार पर यह रिफाइनरी राजस्‍थान में नहीं लगाना चाहते ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): जितनी आपको, मुख्‍यमंत्री जी ... (व्‍यवधान) राजस्‍थान में किसान ... (व्‍यवधान) अब तो कृपा करे नाटक बंद ... (व्‍यवधान) 

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): इनकी नीयत साफ है। सरप्‍लस बजट कोई रिफाइनरी लगती है क्‍या ... (व्‍यवधान) 

 

श्‍याम/चौहान   16.03.2007   13.10  1o

 

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): रिफाइनरी लगाते हैं क्‍या, आपकी मंशा भी नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो कृपया करके नाटक बंद करें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य गण, सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍य गण आसन का काम आप नहीं किया करें ...(व्‍यवधान) आपसे कह रही हूं आसन अपना काम करेगा, आप नहीं किया करें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमें पता है सब, आप गुणगान करके राजस्‍थान का भट्ठा बैठा रहे हैं और यह तरीका ठीक नहीं है ...(व्‍यवधान) जनता सब जानती है और हम सब जानते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): आसन का कहना नहीं मान रहे हैं, स्‍टेटमेंट आ रहा है राज्‍य सरकार का ...(व्‍यवधान) यह कहना नहीं मान रहे हैं, बीच में ही ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप आसन का काम करने लगते हैं ...(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, यह तो प्रश्‍न भी नहीं पूछने देना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, आसन खड़ा हो तो आपको भी स्‍थान ग्रहण कर लेना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के उप नेता ने जिस तरह से बात पेश की, आज राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री जी ने पक्ष और प्रतिपक्ष की सर्वदलीय बैठक आयोजित की, यह प्रश्‍न राजस्‍थान के तमाम साढ़े पाँच करोड़ जनता के हक की बात है, ना तो प्रतिपक्ष और ना पक्ष, यह बात है तो कि सामूहिक रूप से एक निर्णय किया जाये। भारत सरकार से इस प्रकार से आग्रह किया जाये कि हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने आंध्र प्रदेश के काकानाड़ी के अंदर, वहां पर ओ.एन.जी.सी. ने कहा था कि इकोनोमिकल वाइबल वहां रिफाइनरी के लिए नहीं है लेकिन उन्‍होंने हस्‍तक्षेप करके वापिस इस मामले को पुर्नविचार के लिए आग्रह किया।

अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने 15.01.2007 को रिफाइनरी की स्‍थापना के लिए केन्‍द्रीय पेट्रोलियम मिनिस्‍टर को पत्र लिखा। मैं आज प्रतिपक्ष पर या किसी सरकार पर आरोप-प्रत्‍योराप नहीं करना चाहता। मैं तो आप लोगों से निवेदन करना चाहता हूं कि सकारात्‍मक तरीका आप अपनाकर राजस्‍थान के हित के लिए, राजस्‍थान की साढ़े पाँच करोड़ जनता के लिए राजस्‍थान में रिफाइनरी लगवायें। इसमें पक्ष और प्रतिपक्ष सामूहिक रूप से एक साथ होकर भारत के प्रधानमंत्री, भारत के पेट्रोलियम मंत्रि महोदय से आग्रह करूंगा। जहां जिस क्षेत्र में पेट्रोल निकला, राजस्‍थान के पश्चिमी क्षेत्र में पेट्रोल निकला, बाम्‍बे हाई में पेट्रोल निकला वहां रिफाइनरी लगी, गुजरात में पेट्रोल निकला तो गुजरात में रिफाइनरी लगी, आसाम में पेट्रोल निकला तो आसाम में रिफाइनरी लगी तो राजस्‍थान की तमाम जनता का अधिकार बनता है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो यहां तक कहना चाहता हूं कि हमारा एक संवैधानिक अधिकार है कि जिस पश्चिमी राजस्‍थान में, जिस रेगिस्‍तान में पेयजल की समस्‍या है, अकाल की समस्‍या है, ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है तो रिफाइनरी के लिए अगर कोई न्‍यायोचित स्‍थान है तो राजस्‍थान है। राजस्‍थान भारत सरकार से आग्रह करता है। मुझे भारत के प्रधानमंत्री जी से मिलने का मौका मिला, मैंने उनसे भी आग्रह किया और पेट्रोलियम मिनिस्‍टर से भी, मैं धन्‍यवाद दूंगा हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवचरण जी माथुर को जिन्‍होंने मुख्‍यमंत्री जी को आग्रह किया, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह पक्ष और विपक्ष की बात नहीं है। यह राजस्‍थान के हित की बात है। राजस्‍थान के अधिकार की बात है, इसलिए राजस्‍थान के तमाम दो सौ विधायक सभी मिलकर के एक राय से रिफाइनरी राजस्‍थान में कैसे लगे, राजस्‍थान में दस हजार करोड़ का इनवेस्‍टमेंट कैसे लगे, इस बात पर आज चर्चा करनी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: लायें तो आप संकल्‍प, कौन ना कर रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो एक ही बात कह रहा हूं, आप शर्तें मान लो, भाषण नहीं, वह तो वोट के टाइम आप कर लेना ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं अभी बताता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप शर्तें मान लीजिये ...(व्‍यवधान) बहुत दु:खी हैं ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपने मानी है क्‍या ...(व्‍यवधान) आंध्र प्रदेश में मानी है, गुजरात में मानी है कि पंजाब में मानी है, जो हम मान लें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हैलीकॉप्‍टर आपके काम आता है, एयरोप्‍लेन आपके काम आता है, आप जाइये बात करिये ...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): 26 हजार करोड़ की शर्तें नहीं मान सकते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम भी अख़बार पढ़ते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इस प्रकार की अव्‍यावहारिक शर्तें लगाकर के राजस्‍थान में रिफाइनरी नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप इस प्रकार से राजस्‍थान का भला नहीं कर सकते ...(व्‍यवधान) आप बैठिये ...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): राजस्‍थान को विकसित राज्‍य बनाना हमारी सरकार का संकल्‍प है। राजस्‍थान अभी विकासशील है ...(व्‍यवधान) 26 हजार करोड़ संभव नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो लंबी बात नहीं करूंगा, एक ही बात कहूंगा कि शर्तें बैठकर के नेगोसिएट करें, राजस्‍थान का भला करो, कहीं दूसरी जगह चली जायेगी। आई.आई.टी. आप नहीं दे रहे। दूसरे प्रांत में चली जायेगी। आपकी जो कार्य शैली है उसको ठीक करो, गति लाओ। लोगों से मिलना-जुलना शुरू करो और चिटठी-नत्री की बात कम करो और प्रेक्टिकल बात ज्‍यादा करो ...(व्‍यवधान)

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): अध्‍यक्ष महोदय, शर्तें पहले तो थी ही नहीं, जिस समय हरी झंडी मिली थी दिल्‍ली से, उस समय शर्तें थी ही नहीं। अब शर्तें कहां से आयी ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो एनर्जेटिक हो। आप हर बात के लिए उधर क्‍यों देख रहे हो। आप बोलो हम चलेंगे, बात करेंगे लेकिन शर्तें तो माननी पड़ेंगी। अगर आप राजस्‍थान का भला चाहते हैं तो ...(व्‍यवधान) आप बैठकर सुनिये, जब हम बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) आपको थोड़ा सीखना चाहिए ...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): माननीय प्रतिपक्ष के उप नेता जब मंत्रि जी जवाब दे रहे हैं तो आप बार-बार क्‍यों उठ रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह क्‍या है, यह आप भाषण सुना रहे हैं ...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): माननीय मंत्रि जी पूरा चित्रण कर रहे हैं, आपकी काली करतूतें खोल रहे हैं। कांग्रेस राजस्‍थान में, बाड़मेर में रिफाइनरी खोलना नहीं चाहती है। शिवचरण जी माथुर जरूर लेते हैं ...(व्‍यवधान) लेकिन अशोक जी गहलोत नहीं आने दे रहे हैं यह मेरा आरोप है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रि जी, आप तो कृपया करके शर्तें मान लो और जो कंडीशन हैं, हम दिल्‍ली बात करते हैं फिर चलेंगे ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: आप बैठ तो जायें, भाषण नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 27 अक्‍टूबर, 2006 को ओ.एन.जी.सी. ने रिफाइनरी स्‍थापना हेतु इंसेंटिव की मांग की थी। 15 जनवरी, 2007 को माननीय मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा पेट्रोलियम मंत्रि जी को पत्र लिखा गया और इस रिफाइनरी के अंदर दखल का आग्रह किया। अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में 10 हजार का इनवेस्‍टमेंट रिफाइनरी का और 26 हजार करोड़ रूपये का इंसेंटिव, हमारे खान सचिव ने ओ.एन.जी.सी. के चेयरमैन को मांग की खुलासा के लिए पत्र प्रेषित किया और मांग की कि एस.बी.आई कैप के अंतर्गत फिजिबिलिटी रिपोर्ट जो है, वह हमें प्रेषित की जाये।

अध्‍यक्ष महोदय, ओ.एन.जी.सी. ने जो मांगा है वह सुपरिभाषित नहीं है और जो मांग का पैकेज पेश किया है वह बहुत अधिक है। जो उन्‍होंने पत्र लिखा है, जो इंसेंटिव उन्‍होंने मांगा है उसमें सूचनाओं का पूरा अभाव था और छूटों की राशि 26 हजार करोड़ या इससे अधिक की मांग थी। राज्‍य सरकार जानना चाहती है कि 10 हजार करोड़ रूपये का इनवेस्‍टमेंट और 26 हजार करोड़ की छूट मांगना कहा तक न्‍यायोचित है। इसके साथ में मांग की कि एस.बी.आई. कैप के द्वारा की गयी स्‍टेडी के आधार पर उसकी प्र‍ति भी हमें उपलब्‍ध की जाये। उसका जो सर्वे किया है उसकी प्रति हमें दी जाये ताकि हम उसका जवाब दे सकें। इसके साथ में वैक्‍स क्रूड की प्राइज नॉन वैक्‍स क्रूड के बराबर है या नहीं है इसके बारे में भी हमें जानकारी दी जाये। यह भी बताया जाये कि ट्रांसपोर्टेशन की कुल राशि ओ.एन.जी.सी. वहन करे। रिफाइनरी का प्रोडेक्‍ट प्रोफाइल बताया जाये।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आई एम पाइंट आफ ...(व्‍यवधान) मेरा निवेदन था कि या तो सरकार अलग से चर्चा करा ले, आप मर्जी से, यह सदन तो तय करेगा नहीं, तय करना है राजस्‍थान सरकार को और केन्‍द्र सरकार को तो वहीं जाकर के बात करें। इसमें सदन की क्‍या उपयोगिता हो सकती या तो गवर्नमेंट अपनी तरफ से अलग से रखे। आज पर्ची के माध्‍यम से चर्चा कराना उचित नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें ...(व्‍यवधान) माननीय मंत्रि जी आपने कठिनाई तो बता दी लेकिन आसन ने आपसे पूछा था कि अब भी कोई उम्‍मीद है कि नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इसके बारे में निश्चित रूप से राज्‍य सरकार को बताना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपने एक पर्ची के द्वारा तगाराम जी को यहां पर बोलने की बात कही। मैं समझता हूं कि उन्‍होंने अपनी बात को बहुत प्रभावी तरीक से उठा दिया। जहां तक सवाल रिफाइनरी का है ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माथुर साहब, अब आपकी ही बात कर रहा हूं। जो आपने चिट्ठी लिखी है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुन लें पहले ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप बैठें तो सही ...(व्‍यवधान) किसी को कोई एतराज नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप माथुर साहब को सुन लें, फिर आप दे दीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): किसी को कोई एतराज नहीं है, मैं तो कह रहा हूं कि मैं तो इसके लिए कमिटेड हूं और मैंने तो मुख्‍यमंत्री जी से एक बार नहीं कई बार कहा। अभी यहां पर बहस इन्‍होंने छेड़ दी। ओ.एन.जी.सी. लगाने वाली पार्टी थी उसने कुछ मांग की। इसका मतलब यह नहीं है कि उन मांगों पर आप बात नहीं करें, मैंने तो अभी रिसेंटली एक पत्र मुख्‍यमंत्री जी को लिखा है और मैंने कहा है कि उनसे कि आप आठ हजार करोड़ रूपया इस रिफाइनरी के माध्‍यम से राजस्‍थान में पैदा कर सकती हैं और इस राजस्‍थान को टैक्‍स फ्री स्‍टेट बना सकती हैं।

श्री अध्‍यक्ष: टैक्‍स फ्री स्‍टेट बना सकती हैं।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): यह मैंने कहा है। केवल भावना से बात नहीं कहता हूं। मैं तो इसके लिये आपके राम नाइक जी ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं आपका जिक्र करूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): सुनिये तो सही। आज बहस हो रही है क्‍या इस पर।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलने दें उन्‍हें। आप बोलने दें उन्‍हें ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): बहस हो रही है क्‍या यह ...(व्‍यवधान) आपने ऐसे तथ्‍य यहां पर प्रस्‍तुत किये ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं इनकी चिट्ठी का ही हवाला करूंगा ...(व्‍यवधान) अच्‍छी बात है स्‍वागत करता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलने दें उन्‍हें ...(व्‍यवधान) पहले बोलने दें ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप मुझसे बहस कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माथुर साहब, आप तो अपनी बात पर आयें ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं तो राम नाइक का भी कहना चाहता हूं ...(व्‍यवधान) वह एन.डी.ए. के मिनिस्‍टर थे और जिस अच्‍छी तरह से उन्‍होंने व्‍यवहार किया। वहीं से मैं इस बात को शुरू करना चाहता हूं। आप भारत सरकार पर दोष लगा रहे हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): नहीं लगाया है।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): लगाया है आपने। दोष लगाने से क्‍या होगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे-बैठे क्‍यों बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): दोष लगाने से आपकी क्‍या रिफाइनरी लग जायेगी।

 

जयगोविन्‍द/यूएस/16.3.7/13.20/1p

 

                           (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे-बैठे क्‍यों बोल रहे हैं, सुन लें उनको।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मणिशंकरजी अय्यर को मैंने तैयार किया। मैंने कहा लोक सभा में जब इस प्रकार की बात उठाई जा रही है, मेहरबानी करके आप इस में निर्णय कीजिए। भारत सरकार रिफाइनरी नहीं लगा रही है, ओ एन जी सी एक कॉमर्शियल पार्टी है, उसने कुछ शर्तों, कुछ बातें रखी हैं, उन पर चर्चा कीजिए, वह शर्तें आपको सूट नहीं करती है तो हिन्‍दुस्‍तान के अंदर दूसरे प्‍लेयर्स भी हैं उनको आप इन्‍वाइट कीजिए। जरूरी थोड़े है कि आप ओ एन जी सी से ही इसमें बात करें, आज बड़े-बड़े कंसर्न हैं, ऐसे कंसर्न हैं जो दुनिया के दूसरे देशों में एक बड़ी पार्टी की तरह कई स्‍टील प्‍लांट खरीद रहे हैं, उनसे आप बात कीजिए। आप केवल ओ एन जी सी को लेकर भारत सरकार को दोष देने की बात करें कि उन्‍होंने 26 हजार करोड़ का पैकेज आपके सामने रख दिया है। मैं समझता हूं कि आप क्‍या वातावरण पैदा कर रहे हैं रिफाइनरी लगाने का?

मैंने तो कल भी मुख्‍य मंत्रीजी से निवेदन किया कि इसमें क‍टिंग अक्रोस द पार्टी लाइन, आपको विश्‍वास दिला कर कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के आज के मंत्री मुरली देवड़ाजी, उनसे भी मैंने चर्चा की है, कहीं पर भी उनका कोई विरोध नहीं है। आप मुझे माफ करें मंत्री महोदय, पता नहीं यह कहां तक सच है लेकिन आपने तो एक बार यह भी कहा था कि भटिण्‍डा से निकलने वाली पाइप लाइन है, मैं इसको नहीं निकलने दूंगा, उसको ब्‍लास्‍ट कर दूंगा। आप कैसे ब्‍लास्‍ट कर देंगे? आपने नहीं कहा होगा लेकिन यह अखबारों में आया था। ...(व्‍यवधान)...

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैंने नहीं कहा था।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): अगर नहीं कहा था  तो यह बहुत अच्‍छी बात है लेकिन यह अखबारों में छपा था।

श्री अध्‍यक्ष: अखबारों में आया था।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): अखबारों में छपा था। रिफाइनरी लगाने का यह कोई तरीका नहीं है। मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)... मेरी बात सुन लीजिए।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): एच पी सी एल और आई ओ सी की लाइन निकल रही है राजस्‍थान से होकर, यह हमारा अधिकार बनता है, पहले एच पी सी एल ने आवेदन किया था, ओ एन जी सी ने भी इसको टर्न डाउन कर दिया और अपनी खुद की मांग रख दी थी।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): भटिण्‍डा की पाइप लाइन से आपको फायदा है। अगर 10 हजार करोड़ रुपए लगाकर 10 मिलियन टन की फैक्‍ट्री यहां पर लगाना चाहते हैं और यदि उसकी कैपेसिटी आपको बढ़ानी है तो भटिण्‍डा पाइप लाइन से आप तेल ले सकते हैं। आपको तो उसका स्‍वागत करना चाहिए। आपने कहा कि मैं उसको ब्‍लास्‍ट कर दूंगा, इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): ...(व्‍यवधान)... आप ब्‍लास्‍ट शब्‍द निकालें, वह किस समाचार पत्र में, किसी स्‍थान पर यह बात नहीं आई है, यह कोई आप मन से पैदा कर रहे हैं। यह ब्‍लास्‍ट की बात, कोई आतंकवादी थोड़े हैं जो ब्‍लास्‍ट की बात कर रहे हो? स्‍टेट के इण्‍टरेस्‍ट में, जो राज्‍य के हित में होगा, राजस्‍थान सरकार रिफाइनरी लगाने के लिए कृत संकल्‍प है।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो एक ही बात कहना चाहता हूं, 21 तारीख को मुख्‍य मंत्रीजी ने एक मीटिंग बुलाई। विरोधी पक्ष के नेता रामनारायणजी चौधरी, मैं और कल्‍लाजी कांग्रेस की तरफ से गए थे। दूसरी सभी पार्टियों के लोग भी वहां पर आए थे। एक राय से हमने मुख्‍य मंत्रीजी को कहा कि हम आपको अधिकृत करते हैं, इसमें आप जो कुछ भी हमारा  सहयोग लेना चाहते हैं वह लीजिए, कहीं दो राय नहीं है, इसमें कहां मतभेद है, लेकिन उसके तरीके होते हैं। आप भारत सरकार को गाली देने में लगे हैं, उसकी आलोचना करने में लगे  हैं। मुरली देवड़ाजी ने कहा कि कहा कि कहां हमारी तरफ से इन्‍कारी है, बैठें तो सही।

कल मुख्‍य मंत्रीजी कह रही थी कि मुरली देवड़ाजी से मेरी बात हो गई है, तय हो गया है, हम बैठ कर बात करेंगे। मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि मेरी पार्टी की तरफ से और व्‍यक्तिगत रूप से भी मैं जितना भी हमारा इसमें सहयोग होगा, हम रिफाइनरी बाड़मेर में लगाकर रहेंगे, यह मैं आपको कहना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पर्ची के द्वारा इस मामले को उठवा कर सदन के अन्‍दर एक नई बहस करवा रहे हैं और माननीय मंत्रीजी जिस तरह से जवाब दे रहे हैं, यह बॉल को अपने यहां से केन्‍द्र में फेंकना  चाहते हैं, जब बॉल आपकी साइड में है इसलिए है कि ओ एन जी सी ने जो शर्तें रखी....।

श्री अध्‍यक्ष: इन्‍होंने तो आपके पाले में फेंक दी केन्‍द्र को कहां भेजी, आपके पाले में डाल दी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं इनके पाले में है। आप बैठकर बात क्‍यों नहीं करते जैसा माथुर साहब ने कहा है, आपको रियायतें देनी पड़ेगी, आपको रियायतें देनी पड़ेगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में न बोलें। विराजिए।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अभी जैसे जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य उछल रहे थे, भाई ऐसे थोड़े काम चलेगा। आप तो व्‍यापारी आदमी हो और ओ एन जी सी भी व्‍यापारी है, वह निगोशिएशन करना चाहता है सरकार के साथ, अगर उसके साथ आपका नहीं बैठता है तो आप भारत सरकार से बात करें, भारत सरकार इन्‍टरवीन करेगी, हम भी मिलकर कोशिश करेंगे, ऐसे मत कहो कि हमारे मंत्रीजी ने लिख दिया, प्रधान मंत्रीजी को लिख दिया, चीफ मिनिस्‍टर साहब ने यह लिख दिया, हम यह कहां पूछ रहे हैं कि आपने क्‍या फर्ज किया और चीफ मिनिस्‍टर साहब ने क्‍या फर्ज किया, हमने तो कहीं पूछा नहीं, आपकी ही पार्टी के मैम्‍बर ने पूछा है तो आप यह साबित करना चाहते हैं कि आप तो पूरी चेष्‍टा कर रहे हैं लेकिन भारत सरकार नहीं लगा रही है, ऐसा मत करो। ...(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, आप बोल लेना बाद में, आप तो जवाब भी देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ लें, वैसे पर्ची पर ऐसा होता नहीं लेकिन आप पूछ लें प्रश्‍न। मैं ना नहीं कर रही, आप भी पूछ लीजिए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह राजस्‍थान की लाइफ लाइन है। जिस इलाके के अंदर अकाल पड़ता है और जहां पर हजारों करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं, अगर यह रिफाइनरी लग गई तो राजस्‍थान की आर्थिक स्थिति की दिशा और दशा बदल देगी। इसलिए यह बहुत महत्‍वपूर्ण मामला है। मैं जानना चाहता हूं कि जिस तरह से तेल निकालने के मामले में कुछ कम्‍पनियों को हमने एकाधिकार दिया हुआ था और वर्षों तक दिया हुआ रहा और मिडल इस्‍ट के दबाव में वे कम्‍पनियां पाकिस्‍तान में तेल निकालती रही, बाकी जगह तेल निकालती रही और हिन्‍दुस्‍तान के बाड़मेर में तेल नहीं निकाल सकी जानबूझकर। तो एक ओ एन जी सी ही नहीं है। मैं माथुर साहब की बात से सहमत हूं। एक ओ एन जी सी ही नहीं है, इस समय वर्ल्‍ड में ओपन मार्केट हो गया है, इसलिए आप अन्‍य मल्‍टी नेशनल कम्‍पनीज से भी चर्चा कीजिए, चर्चा करके जो भी हमारे राजस्‍थान के हित में हो, जो फायदा हो, उनसे बात करके रिफाइनरी लगाने की बात क्‍यों नहीं करते। हमारी पार्टी और सरकार, हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि रिफाइनरी राजस्‍थान में लगे, यह हमारी पार्टी का कमिटमेंट भी है लेकिन मंत्री महोदय, इस मामले में हमें सतर्कता बरतनी होगी कि एक ही पार्टी के साथ, अगर उस पार्टी ने कोई शर्त लगा दी, उन शर्तों को लेकर हम इसमें डिले करें, मैंने तो समाचार पत्रों में पढ़ा था, आपने भी पढ़ा होगा, मुझे मालूम नहीं कि फाइनेंस डिपाट्रमेंट में कुछ अधिकारियों के पास फाइल बहुत दिनों तक पड़ी रही। उन्‍होंने देखा तक नहीं। मुझे मालूम नहीं है, यह सही है या गलत है, अगर सही है तो यह बहुत गम्‍भीर बात है, सरकार को इस बात को देखना चाहिए, इतने सेंसेटिव इश्‍यू जो राजस्‍थान के हित से जुड़ा हुआ है, उसमें भी अधिकारी इस तरह की टालमटोल करे या उसको लाइट वे में लें तो यह उचित नहीं है  राजस्‍थान के लिए। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप जो भी कर सकें, प्रतिपक्ष से बात करें, भारत सरकार से बात करें, इतनी भी मल्‍टी नेशनल्‍स हैं जो इस क्षेत्र में काम कर रही हैं उनसे आप चर्चा करें और कोशिश यह करें कि जैसा आपने कहा टैक्‍स फ्री, आप भी यह मानते हैं कि टैक्‍स फ्री हो सकता है, टैक्‍स फ्री ही नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर रिफाइनरी लग गई तो टैक्‍स फ्री ही नहीं, हमारी इनकम इतनी बड़ी हो जाएगी ...(व्‍यवधान)... 

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): किसानों की जमीन ओ एन जी सी के नाम से अलॉट हो रही है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केवल टैक्‍स फ्री ही नहीं मैं इससे भी आगे की बात करना चाहता हूं कि यदि यह रिफाइनरी लग गई तो उसके बाद राजस्‍थान हिन्‍दुस्‍तान के जो विकसित प्रदेश हैं उनकी श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में आकर खड़ा हो जाएगा कुछ सालों के अंदर और हमारे लोगों को रोजगार मिलेगा। इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मामला गम्‍भीर है, मंत्री महोदय, आप इसे गम्‍भीरता से लीजिए और इसमें जवाब तो जैसा आप अपने अधिकारियों से डिस्‍कस करके आए हैं वह दे दीजिए लेकिन इस विषय को गम्‍भीरता से लीजिए और रिफाइनरी राजस्‍थान में लगे इसका प्रयास कीजिए, धन्‍यवाद। ...(व्‍यवधान)... 

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब मत दो, आप सीधी बात बता दो।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माथुर साहब को धन्‍यवाद प्रेषित करता हूं कि इन्‍होंने मुख्‍य मंत्रीजी को पत्र लिखा,  सोशल पॉलिसी रिसर्च इन्‍स्‍टीट्यूट के कार्यक्रम में मणि शंकरजी अय्यर, तत्‍कालीन पेट्रोलियम मंत्रीजी आए थे उन्‍होंने भी इस बात को स्‍वीकार किया कि राजस्‍थान के अंदर रिफाइनरी लगाने के लिए पर्याप्‍त माकूल परिस्थितियां हैं। मैं आपको यह भी धन्‍यवाद प्रेषित करना चाहता हूं कि आपने मुख्‍य मंत्री को पत्र लिखा। टेक्‍नो इकोनोमिक स्‍टडी जो केयर्न एनर्जी  के साथ हुई है उसमें 9 हजार करोड़ रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट की आपने बात बताई, इसके साथ आपने 7.5 एम एम टी पी ए की रिफाइनरी जो 15-20 साल तक चल सकती है अपने प्रोडक्‍शन के हिसाब से, डिपोजिट के हिसाब से, उसके साथ ही मैं धन्‍यवाद प्रेषित करना चाहता हूं कि आपने स्‍वयं ने इस बात को इस पत्र में जो माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को प्रेषित किया है उसमें इस बात को स्‍वीकारा है कि जो इन्‍सेंटिव ओ एन जी सी ने मांगे हैं वह पर्याप्‍त नहीं है, जितने हैं उसकी लागत के 50 प्रतिशत तक होने चाहिए। अगर 9 हजार करोड़ का इन्‍वेस्‍टमेंट होता है तो उसका आधा 50 प्रतिशत इन्‍सेंटिव मांगे जाने चाहिए। जब 10 हजार करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट है, 9 हजार करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट है और 26 हजार करोड़ रुपए के इन्‍सेंटिव मांगे जा रहे हैं तो इसको जस्टिफाइड आने भी नहीं माना इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद प्रेषित करना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो बात टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कही कि फाइनेंस सेक्रेटरी ने फाइल को इतने दिन रखा। इतनी बड़ी मांग उन्‍होंने की है उसको जस्‍टीफाई करने में  और उसका आकलन करने में समय लगता है। हमारे खान सचिव ने फरवरी, 2007 में चिट्ठी लिखी थी...।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, या तो इस पर पूरा दिन बहस रख  लीजिए। पर्ची के आधार पर इस तरह के मामले को उठा रहे हैं यह अच्‍छी बात नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब मैं क्‍या करूं? इतना महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न था कि मैं आपको नहीं रोक सकी तो दूसरों को भी नहीं रोक सकती।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 12 मार्च, 2007 को ओ एन जी सी के चेयरमैन ने मीटिंग करने के लिए पत्र लिखा है तो इस पर बैठकर चर्चा करेंगे। हमने जो अपनी बात है उनके सामने प्रस्‍तुत करेंगे। उन्‍होंने जो इन्‍सेंटिव मांगे हैं उन पर बैठकर चर्चा की जाएगी। यह हमारी साढ़े पाँच करोड़ जनता के अधिकारों का प्रश्‍न है...

 

Gpc/akt/16032007/1330/1q

 

राजस्‍थान में रिफाइनरी लगेगी उसमें पक्ष और प्रतिपक्ष और संपूर्ण राजस्‍थान की 5.5 करोड़ जनता इस मामले में है और भारत सरकार से पूरा आग्रह है कि जिस हिसाब से यहां पर पेट्रोलियम के डिपोजिट लगातार मिलते जा रहे हैं इसलिए इकोनोमिकल वायबिलिटी के हिसाब से परीक्षण के बाद में जो पत्र हमारे खान सचिव ने लिखा है उसके आधार पर इनका रिप्‍लाई आने के बाद में बैठक करने के बाद निश्चित रूप से आगे निर्णय किया जाएगा, मैं घन्‍यवाद प्रेषित करता हूं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  पाइंट ऑफ आर्डर। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।

नसीराबाद में छात्र-छात्राओं के साथ यौन उत्‍पीड़न की घटना

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  केन्‍द्रीय विद्यालय, नसीराबाद की छात्राओं के साथ जो यौन उत्‍पीड़न की घटना हुई और उसको वहां की प्रिंसिपल ने उजागर किया उसका तबादला पंजाब कर दिया गया है। इतना ही नहीं उस प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और जो केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन का जांच दल आया है वह पीडि़त छात्राओं के बयान बदलने की भी कोशिश कर रहा है। मेरा यह कहना है कि इससे राजस्‍थान में ही नहीं नसीराबाद, अजमेर जिला और राजस्‍थान में लोगों में आक्रोश है और महिलाओं में विशेष रूप से इस बात को लेकर आक्रोश है कि इस प्रकार के यौन उत्‍पीड़न को उजागर करने वाली महिला को इस प्रकार से स्‍थानान्‍तरित कर दिया जाए, उसको दण्डित करने का प्रयास किया जाए और जो पीडि़त छात्राएं हैं उनके बयान बदलने की कोशिश की जाए तो निश्चित रूप से इसमें राज्‍य सरकार को हस्‍तक्षेप करना चाहिए और दोषी लोग इसमें बचे नहीं इस बात के लिए राज्‍य सरकार को सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहिए यह मेरा कहना है।

श्री अध्‍यक्ष: गृह