Gpc/akt/20032007/1100/1a
अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृतान्त
अंक 7 बारहवीं
विधान सभा के सातवें
सत्र का बीसवां
दिवस संख्या
13
मंगलवार, 20 मार्च, 2007
राजस्थान
विधान सभा की बैठक
11:00 बजे
विधान सभा
भवन जयपुर, में
प्रारम्भ हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री अध्यक्ष:
वैसे कौल और शकधर
में लिखा हुआ है
कि मुंह से कुछ
नहीं बोलते हैं,
केवल हाथ ही जोड़ते
हैं। मुंह से कुछ
नहीं बोलते हैं।
श्री प्रमोद जैन
‘’भाया’’।
भारतीय
तकनीकी संस्थान
(आई.आई.टी.) की स्थापना
हेतु स्थल चयन
131. श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): क्या
तकनीकी शिक्षा
मंत्री यह बताने
की कृपा करेंगे:-
(1) राज्य में
किन-किन स्थानों
को इण्डियन इंस्टीट्यूट
ऑफ टेक्नोलॉजी
खोलने हेतु चिह्नित
किया गया है? विवरण
सदन की मेज पर रखें।
(2) केन्द्र सरकार
द्वारा राज्य
में इण्डियन इंस्टीट्यूट
ऑफ टेक्नोलॉजी
खोलने की स्वीकृति
संबंधी प्रस्ताव
पत्र किस तारीख
को प्राप्त हुआ
एवं इसमें क्या-क्या
सुविधाएं मांगी
गईं? विवरण सदन
की मेज पर रखें।
(3) सरकार द्वारा
अंतिम रूप से इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ टेक्नोलॉजी
खोलने हेतु स्थान
का निर्धारण नहीं
करने के क्या
कारण रहे?
तकनीकी शिक्षा
मंत्री (श्री घनश्याम
तिवाड़ी): (1) आई.आई.टी.
स्थापित करने
के स्थान का चयन
केन्द्र सरकार
तथा राज्य सरकार
के अधिकारियों
द्वारा संयुक्त
रूप से किया जायेगा।
इस संबंध में अभी
तक निर्णय नहीं
लिया गया है।
(2) केन्द्र सरकार
से आई.आई.टी. खोले
जाने के संबंध
में स्वीकृति
संबंधी प्रस्ताव
पत्र दिनांक 16 दिसम्बर,
2006 के द्वारा प्राप्त
हुआ है। केन्द्र
सरकार से प्राप्त
पत्र के अनुसार
आई.आई.टी. की स्थापना
के लिए 500-600 एकड़ भूमि
नि:शुल्क उपलब्ध
करवानी होगी तथा
यह स्थान सड़क,
रेल व वायु यातायात
से भली-भांति जुड़ा
हुआ होना चाहिए
एवं इस स्थान
पर आवश्यक भौतिक
एवं सामाजिक आधारभूत
सुविधाएं उपलब्ध
होनी चाहिए।
(3) अंतिम निर्णय
केन्द्र सरकार
एवं राज्य सरकार
द्वारा संयुक्त
रूप से ही लिया
जायेगा, जो प्रक्रियाधीन
है।
श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम
से माननीय मंत्री
महोदय से जानना
चाहता हूं कि केन्द्र
सरकार द्वारा निर्धारित
मापदण्डों वाले
संभावित स्थानों
के चयन के प्रस्ताव
राज्य सरकार से
मांगे गये, परन्तु
तीन माह बाद भी
आई.आई.टी. के संबंधित
स्थानों के प्रस्ताव
भिजवाने में असक्षम
रहने के क्या
कारण रहे, सदन को
स्पष्ट करें।
नम्बर दो, प्रश्न
के बिन्दु संख्या
एक के जवाब में
बताया गया है कि
स्थान का चयन
केन्द्र सरकार
तथा राज्य सरकार
के अधिकारियों
द्वारा संयुक्त
रूप से किया जाएगा
जबकि वास्तविकता
यह है कि राज्य
सरकार द्वारा पहले
स्थान प्रस्तावित
किया जाएगा उसके
बाद में संयुक्त
रूप से टीम उस पर
निर्णय लेगी। माननीय
मत्री महोदय ने
सदन में गलत उत्तर
देकर सदन को क्यों
गुमराह किया, कृपया
यह स्पष्ट करें।
नम्बर तीन,
प्रस्तावित आई.आई.टी.
हेतु प्रस्तावित
स्थानों के चयन
के प्रस्ताव नहीं
भेजने पर क्या
केन्द्र सरकार,
राज्य सरकार के
प्रस्तावों का
इंतजार करने के
लिए बाध्य है
एवं आई.आई.टी. क्या
राजस्थान राज्य
के लिए ही रिजर्व
किया हुआ है, स्थिति
स्पष्ट करें।
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न पूछें।
भाषण नहीं, प्रश्न
पूछें।
श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): प्रश्न
ही पूछा है।
श्री शांतिलाल
चपलोत (मावली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, क्या यह सही
है उदयपुर में
आई.आई.टी. ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्नकर्ता
का उत्तर तो आने
दीजिए।
श्री शांतिलाल
चपलोत (मावली): वह
इसी के साथ है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
ज्वलंत है। क्या
यह सही है कि उदयपुर
में आई.आई.टी. के
लिए प्रतिनिधिमण्डल
आपसे, मुख्यमंत्रीजी
से मिला? वहां पर
इंटरनेशनल एयरपोर्ट
है, वहां पर भूमि
500 हैक्टेयर से
ज्यादा उपलब्ध
है। उसके कागजात
आपको और मुख्यमंत्रीजी
को दिये गये हैं
और वहां दो नेशनल
हाईवे क्रोस होते
हैं। इसलिए मेरा
आपसे अनुरोध है
कि इस बारे में
आपका क्या विचार
चल रहा है? उदयपुर
से ज्यादा प्राथमिकता
और किसी की नहीं
हो सकती।
श्री हरीसिंह
रावत (भीम): उदयपुर
में सारी सुविधा
है, नेशनल एयरपोर्ट
है, नेशनल हाईवे
है। ..(व्यवधान)..
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी): जोधपुर में
सारी सुविधा है।
जोधपुर में सारी
सुविधा उपलब्ध
है। जोधपुर से
उपयुक्त स्थान
और कोई नहीं हो
सकता।
श्री अध्यक्ष:
आप मूल प्रश्नकर्ता
का जवाब आने दीजिए।
श्री बद्रीलाल
जाट (कपासन): माननीय
अध्यक्ष महोदय, ..(व्यवधान)..
एक माननीय सदस्य:
आई.आई.टी. के लिए
अन्तरराष्ट्रीय
हवाई अड्डा होना
आवश्यक नहीं है।
रुड़की में, खड़गपुर
में अन्तरराष्ट्रीय
हवाई अड्डा नहीं
है।
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान ग्रहण
करें। ..(व्यवधान)..
माननीय सदस्य।
..(व्यवधान)..
श्री भवानी
सिंह राजावत (संसदीय
सचिव): कोटा में
ब्राडगेज है, कोटा
में नेशनल हाईवे
है, कोटा में 40 हजार
बच्चे पूरे देश
के पढ़ रहे हैं
..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आसन पांवों पर।
आसन पांवों पर।
मैं देख रही हूं
आसन पांवों पर
है तब कौन-कौन खड़ा
है, मैं बराबर देख
रही हूं। ..(व्यवधान)..
जब आसन पांवों
पर होता है, चाहे
मंत्रीगण हो, चाहे
संसदीय सचिव हो,
चाहे माननीय सदस्य
हो, मैं इस बात का
ध्यान रखूंगी
कि जब आसन पांवों
पर होता है तब कौन-कौन
खड़े होते हैं।
इसलिए मैं सबसे
कहना चाह रही हूं,
पुन: कहना चाह रही
हूं कि इस बात का
खयाल रखें जब आसन
पांवों पर है तो
खड़े होने का प्रयत्न
न करे। ..(व्यवधान)..
अब आप एक बार विराजें।
..(व्यवधान).. अभी
कुछ नहीं, नो, नो।
मूल प्रश्नकर्ता
ने और मावली से
आने वाले माननीय
सदस्य ने जो पूछा
उसका जवाब दें,
उसके बाद में दूसरे
को अलाऊ करूंगी।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय
सदस्यों ने निवेदन
करना चाहूंगा पहली
बात तो यह है कि
भारत सरकार ने
कहा है कि ग्यारहवीं
पंचवर्षीय योजना
के अंतर्गत तीन
नये भारतीय प्रौद्योगिकी
संस्थान खोले
जाएंगे उसमें एक
राजस्थान, एक
आंध्रप्रदेश और
एक बिहार होगा।
नम्बर दो, उन्होंने
यह भी कहा कि ये
तीनों खोले जाएंगे
इनके लिए तीन प्रकार
की सुविधा उनको
चाहिए। एक उन्होंने
कहा कि 500 से लेकर
600 एकड़ तक उनको नि:शुल्क
भूमि उपलब्ध करानी
पड़ेगा, दूसरा
वह स्थान होगा
वह इस प्रकार का
होना चाहिए जो
रेल यातायात से,
सड़क यातायात से
और वायु यातायात
से सुलभ हो।
तीसरा उन्होंने
कहा कि यहां पर
जो आई.आई.टी. लगेगी
उसमें जो फैकल्टीज्
आएगी उसमें सारे
देश और दुनिया
भर के लोग आएंगे
इसलिए उसको इस
स्थान पर होना
चाहिए कि हम ऐसे
लोगों को आकर्षित
भी कर सकें और उन्होंने
इसके लिए हमको
कहा कि आप एक नोडल
अधिकारी नियुक्त
कर दीजिए उसके
बाद में भारत सरकार
एक नोडल अधिकारी
नियुक्त करेगी
और वह दोनों नियुक्त
होने के पश्चात
वे दोनों मिलकर
इसमें कार्यवाही
करेंगे। 16 दिसम्बर
को हमको यह पत्र
मिला, 23 तारीख को
ए.के. पाण्डे जो
अतिरिक्त मुख्य
सचिव है उनको राजस्थान
सरकार ने इसका
अधिकारी नियुक्त
कर दिया और भारत
सरकार को इसका
पत्र लिख दिया।
भारत सरकार की
तरफ से अभी तक कोई
अधिकारी नियुक्त
नहीं हुआ है। ज्यों
ही भारत सरकार
द्वारा अधिकारी
नियुक्त होगा
राजस्थान सरकार
और भारत सरकार
के अधिकारी मिलकर
स्थान के बारे
में चयन कर लेंगे।
अभी तक बिहार के
लिए भी नियुक्त
नहीं किया है।
भारत सरकार ने
केवल आंध्रप्रदेश
के लिए एक नोडल
अधिकारी नियुक्त
किया है। स्थान
का चयन वहां भी
नहीं हुआ है इसलिए
न तो राज्य सरकार
ने इसमें विलम्ब
किया है, राज्य
को तो एक खुशी की
बात है कि 2000 से लेकर
3000 करोड़ रुपये का
इसमें इन्वेस्टमेंट
होगा, राज्य का
इससे विकास होगा,
राजस्थान का नाम
इसमें आएगा, इसलिए
राज्य सरकार किसी
भी प्रकार से किसी
भी प्रकार की ढिलाई
आई.आई.टी. के मामले
में नहीं करना
चाहती। जहां तक
स्थान के चयन
का सवाल है मुझे
बहुत जगहों से
ज्ञापन मिला है
मालपुरा से आने
वाले माननीय सदस्य
ने भी ज्ञापन दिया,
माननीय मुख्यमंत्रीजी
को भी दिया, अन्य
बहुत से स्थानों
से ज्ञापन भी आए
हैं, समितियां
भी बनी है, मैं तो
आपको एक ही विश्वास
दिला सकता हूं
यह विवाद का विषय
है ही नहीं। राजस्थान
में जो सबसे बढि़या
स्थान होगा जिसको
भारत सरकार और
राज्य सरकार के
अधिकारी मिलकर
और विशेषज्ञ मिलकर
तय करेंगे उस स्थान
पर आई.आई.टी. बनेगी।
अभी तक किसी स्थान
का चयन नहीं हुआ
है, सरकार की इसमें
कोई ढिलाई नहीं
है। हम निरंतर
जागरुक और सक्रिय
रहकर इस काम को
प्रारंभ करेंगे।
दूसरी बात यह
कहना चाहूंगा कि
आई.आई.टी. बनेगी
उसको बनाने से
उस स्थान का भी
विकास होगा, लेकिन
उस स्थान के लड़कों
या पढ़ने वालों
को कोई प्रायरटी
मिलेगी ऐसा नहीं
है, वह तो ऑल इण्डिया
की परीक्षा है
और इसमें लोग भर्ती
होते हैं, होंगे,
लेकिन हमारे यहां
विनियोजन होगा,
राजस्थान का नाम
होगा, टेक्नीकल
एजुकेशन में आगे
बढ़ेंगे यह सारी
स्थिति है जो अध्यक्ष
महोदय,
मैंने आपको
स्पष्ट कर दी
है। ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
अब क्या बाकी
रह गया? सारी बात
तो कह दी। ..(व्यवधान)..
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, उसी
में आप आई.आई.टी.
खोलिए। इससे बढि़या
कोई स्थान नहीं
हो सकता। ..(व्यवधान)..
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी): माननीय
अध्यक्ष महोदय, जोधपुर की तरफ
से जो ..(व्यवधान)..
वहां प्रयोगशाला
उपलब्ध कराई ..(व्यवधान)..
इसलिए जोधपुर से
उपयुक्त स्थान
कोई नहीं हो सकता।
..(व्यवधान)..
श्री शांतिलाल
चपलोत (मावली): उदयपुर
में ..(व्यवधान)..
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी): हमारा
निवेदन है कि जोधपुर
से उपयुक्त स्थान
नहीं हो सकता।
श्री सुरेश
मीणा (करौली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, दौसा में खोल
दो, अलवर में खोल
दो, भरतपुर में
खोल दो, कहीं भी
खोल दो। ..(व्यवधान)..
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी): वहां
जमीन उपलब्ध है,
एडिशनल जमीन उपलब्ध
कराने को तैयार
हैं ..(व्यवधान)..
श्री शांतिलाल
चपलोत (मावली): हमारे
पास इतनी लेण्ड
है ..(व्यवधान).. नेशनल
हाईवे है। ..(व्यवधान)..
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं/20032007/1110/1b
श्री सुरेश
मीणा (करौली): ...(व्यवधान)...
इस प्रकार का कोई
भी इंस्टीट्यूट
नहीं है। ...(व्यवधान)...
आईआईटी जो इंस्टीट्यूट
है उसको पूर्वी
राजस्थान में
खोला जाए, किसी
भी एरिया में खोल
दें, चाहे कोटा
में खोल दो। ...(व्यवधान)...
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी): यह इंस्टीट्यूट
कहीं पर भी नहीं
होनी चाहिए, जोधपुर
में होनी चाहिए।
...(व्यवधान)...
एक माननीय सदस्य:
सबसे अच्छी व्यवस्था
कोटा में है। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्नकर्ता
का अधिकार है दो
सप्लीमेंटरी
पूछने का, और मैं
आप लोगों से ...(व्यवधान)...
प्लीज, सिट डाउन।
आप लोग, कई माननीय
सदस्यों को मैं
देख रही हूं, नाम
नहीं लूंगा, लेकिन
मैं अंत में नाम
लूंगी कि आप लोग
खड़े हो जाते हैं,
एक साथ चार चार,
पांच पांच लोग,
जो तरीके से कोई
बात पूछना चाहता
है उसको आप पू्छने
नहीं देते हैं।
मूल प्रश्नकर्ता
का प्रश्न था
उनको दो सप्लीमेंटरी
का अधिकार है, वह
एक बार फिर अपना
एक सप्लीमेंटरी
और भाषण नहीं देंगे,
सप्लीमेंटरी
पूछिए।
श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मै आपके
माध्यम से माननीय
मंत्री महोदय से
जानना चाहता हूं
कि केन्द्रीय
मानव संसाधन राज्य
मंत्री ने कोटा
प्रवास के दौरान
यह स्टेटमेंट
दिया है कि राज्य
सरकार ने मात्र
धन्यवाद का पत्र
भिजवाया है, इसके
अलावा, कोई पत्र
सरकार को अभी तक
नहीं भेजा है और
अन्य दो राज्यों
द्वारा स्थान
का चयन करके स्थान
के नाम हमको भिजवा
दिये हैं तो क्या
माननीय मंत्री
महोदय सही कह रहे
हैं या माननीय
केन्द्रीय मंत्री
महोदय सही कह रहे
हैं। यह स्थिति
सदन को स्पष्ट
करें।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
मैं स्पष्ट
कर देता हूं, मैं
पत्र ही पढ़ देता
हूं जो मानव संसाधन
मंत्री जी से मिला
है, वह पांच लाईन
का है।
श्री अध्यक्ष:
नहीं आप तो अपना
पढि़ए, जो आपने
लिखा है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): हमने बताया
न, अध्यक्ष महोदय, हमने
तो दिसम्बर, 2006 में,
16 दिसम्बर को पत्र
हुआ और ए के पाण्डे
साहब को नियुक्त
करके भेज दिया,
भारत सरकार ने
अभी नोडल अधिकारी
नियुक्त नहीं
किया।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पत्र कब भेजा ?
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): पत्र मेरे
पास नहीं है, मैं
कह रहा हूं, आप सुनिए
न, धन्यवाद तो
देना ही था।
श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): गुमराह
कर रहे हैं सदन
को।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): मैं सदन
को कभी मेरी जिन्दगी
में गुमराह नहीं
कर सकता।
श्री प्रमोद
जैन 'भाया' (बारां): आप उस
पत्र को सदन के
पटल पर रखें।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): हां, मैं
रख रहा हूं, रख रहा
हूं न, आप बैठ जाएं,
सुनिए आप। मैं
सदन को रिलिजियसली
लेता हूं, सदन मेरे
लिए है। मैं सदन
को कोई गलत बात,
गुमराह नहीं करना
चाहता। मैं, अध्यक्ष
महोदय,
माननीय
अर्जुन सिंह जी
ने जो पत्र लिखा
उसमें लिखा है
; "The
Ministry now proposes to establish 3 new Indian Institutes of Technology during
the 11th Five Year Plan period. I am glad to inform you that one of them would
be set up in your State."
दूसरा उन्होंने
लिखा है - "I am directing you to kindly allot
free of cost approximately 500-600 acres of land for this purpose." और
अन्त में उन्होंने
लिखा है वह बहुत
महत्वपूर्ण है - "I suggest that you may
nominate a senior officer of your State to interact with the officers of my
Ministry so that we may be able to jointly identify a suitable location for the
proposed IIT in your State."
यह पत्र
उन्होंने भेजा
और इस पत्र के बाद
में 16 तारीख को पत्र
आया दिसम्बर में
और दिसम्बर में
ही हमने ए के पाण्डे
साहब को नियुक्त
कर दिया। पुन: एक
पत्र लिख देंगे,
हमने नियुक्त
कर दिया, आप नियुक्त
करें और भारत सरकार
ज्यों ही अधिकारी
नियुक्त करेगी,
जितने भी हमारे
पास प्रस्ताव
आये हैं, किसी से
भेदभाव नहीं होगा,
किसी स्थान की
प्रायोरिटी नहीं
और किसी स्थान
की प्रायोरिटी
कम होने का सवाल
नहीं, सारा काम
करके हम यह करेंगे।
और सब राज्यों
के साथ साथ हम इसको
कराने की कोशिश
करेंगे। कौन सा
ऐसा राज्य होगा
जो गलतफहमी में
आईआईटी नियुक्त
नहीं करवाएगा।
श्री अध्यक्ष:
बात सही है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): हम कोशिश
करके लाए हैं, बार
बार बात की है और
उन्होंने दिया
है, इतना अवसर आया
है इसलिए मैं सदन
के सभी माननीय
सदस्यों को आश्वस्त
करना चाहता हूं
कि निश्चित रूप
से हम हमारी प्रक्रिया
जारी रखेंगे, जो
भी उपयुक्त स्थान
वह टीम मिलकर तय
करेगी उसी स्थान
पर आईआईटी लगेगी।
धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष:
पूछ लीजिए प्रश्न।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
क्या यह
सही है कि कोटा
में गत चार और पांच
सालों में आईआईटी
की कोचिंग क्लासेज
चलाई जा रही हैं
और पूरे देश में
कोटा के जो कोचिंग
क्लासेज हैं उनमें
से ही सर्वाधिक
स्टूडेंट चयन
होकर के गये हैं।
नम्बर दो, क्या
यह सही है कि एक
कोटा का प्रतिनिधि
मण्डल माननीय
मंत्री जी से मिलकर
जो जो इन्फ्रास्ट्रक्चर
गवर्नमेंट आफ इण्डिया
ने जो तय किये हैं,
जो मापदण्ड तय
किये हैं उन मापदण्डों
के हिसाब से हर
पाइंट पर अपना
जवाब, अपना जो टारगेट
था वह देकर के, उनको
आया है और उन पर
अब तक क्या विचार
हुआ है ?
श्री अध्यक्ष:
बहुत अच्छा है।
...(व्यवधान)... सारी
बातें आ गई हैं।
श्री सुरेन्द्र
गोयल (जैतारण): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मेरा
निवेदन इतना ही
है मंत्री जी से
कि मंत्री जी ने
अभी कहा कि सेंट्रल
से जो गाइड लाइन
आई हैं उसमें अधिकारी
तय करेंगे कि कहां
खोलना है, कहां
नहीं खोलना है।
मेरा निवेदन यह
है कि क्या अधिकारी
तय करेंगे या पोलिटिकली
तय होगा ?
श्री अध्यक्ष:
अधिकारी जो नोडल
अधिकारी हैं, तय
करेंगे।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): हिण्डौली
से आने वाले माननीय
सदस्य ने भी कहा
है, यह बात सही है
कि कोटा में कोचिंग
बहुत बढि़या है,
आपकी भी कोचिंग
बहुत ठीक ढंग से
हुई हुई है, कोचिंग
चल रही है।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कोचिंग में तो
आपने पूरे राजस्थान
को मात दे रखी है
सब को। ...(व्यवधान)...
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): तो कोचिंग
भी ठीक है और मैं
यह कहा रहा हूं
कि सारे ज्ञापन
माननीय मुख्य
मंत्री जी को मिले
हैं, मुझे भी मिले
हैं, विभिन्न
स्थानों के भी
मिले हैं, मैं उनका
विवरण नहीं करना
चाहता हूं और सब
ने अपना अपना क्लेम
किया है, वह भी देखे
हैं तो सारे क्लेम
के साथ लेकिन मैंने
कहा, तीन बात उन्होंने
सिर्फ मांगीं हैं।
नम्बर एक, पांच
सौ, छह सौ एकड़ जमीन
होनी चाहिए, रेल,
वायुयान और सड़क
इनसे जुड़े हुए
होने चाहिए और
शैक्षणिक व सामाजिक
स्तर से उसका
वह होना चाहिए,
तीनों चीजें उन्होंने
मांगी हैं। ...(व्यवधान)...
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जुड़ा हुआ नहीं
है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): क्या
?
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्री
जी के हिसाब से
तो झुंझुनूं का
नम्बर आना चाहिए।
झुंझुनू वायुयान
से भी जुड़ा हुआ
है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): बड़ा सवाल
यह है कि कौन तय
करेगा।
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्री
जी, महिला शिक्षा
में सबसे आगे, एजुकेशन
इंस्टीट्यूट
सबसे ज्यादा,
केवल टेक्निकल
एजुकेशन की कमी
है और वायुयान
से भी जुड़ा हुआ
है, एयरस्कीम
है वहां पर झुंझुनूं
में। वायु से, रेल
से, सड़क से सबसे
जुड़ा हुआ है, तब
तो उसका नम्बर
आना चाहिए। ...(व्यवधान)...
डा. ओ. पी. महेन्द्रा
(सरकारी उप मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय,
इसमें तो
गंगानगर का भी
दावा है कि गंगानगर
में एक कृषि विश्वविद्यालय
खोलना था लेकिन
नहीं खुला तो मेरा
आपके माध्यम से
सरकार से आग्रह
है कि श्रीगंगानगर
को भी आईआईटी के
लिए कंसीडर किया
जाए क्योंकि गंगानगर
भी इसके लिए उपयुक्त
है। ...(व्यवधान)...
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आपने अपनी
बात कह कर सरकार
तो आपकी बात से
ज्यादा प्रभावित
हो जाएगी और हम
वैसे ही मारे जाएंगे।
आपको तो निष्पक्ष
रहना चाहिए और
किसी एक जगह के
लिए आपको नहीं
कहना चाहिए। आपको
तो अध्यक्ष के
नाते पूरे राजस्थान
के प्रति....
श्री अध्यक्ष:
आसन बिलकुल निष्पक्ष
है, आसन बिलकुल
निष्पक्ष है क्योंकि
उन्होंने तीन
शर्तें बताई थी,
शर्तों के मुताबिक
मैंने कहा, बाकी
निष्पक्ष है आसन
तो। ...(व्यवधान)...
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
जयपुर सारी शर्तें
पूरी करता है, जयपुर
तीनों शर्तें पूरी
करता है, माननीय
अध्यक्ष महोदय।
...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): आसन
से एक बार जो व्यवस्था
हो जाती है उसको
चुनौती नहीं दी
जा सकती इसलिए
आसन ने जो फरमाया
है।
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
यह तीनों शार्तें
तो जयपुर ही करता
है पूरी। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन,
हरिमोहन जी शर्मा
।
श्री रामप्रताप
कासनिया (पीलीबंगा):
गंगानगर और हनुमानगढ़
सबसे पिछड़े हुए
हैं शिक्षा के
मामले में तो न्याय
ही करना है तो जहां
शिक्षित है वहां
शिक्षित करने की
आवश्यकता नहीं
है, जहां शिक्षित
कम हैं, वहां यह
करो, सारा सदन का
विवाद कम हो जाएगा।
श्री अध्यक्ष:
नेता प्रतिपक्ष
खड़े हैं, प्लीज।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके
मार्फत जानना चाहता
हूं शिक्षा मंत्री
जी से कि सीकर शेखावाटी
आज नहीं तो फिर
कभी नहीं, इस संबंध
में आपने सोचा
है कि नहीं ?
श्री अध्यक्ष:
आपके मंत्री रहते
हुए यह काम होना
ही चाहिए।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सीकर शेखावाटी
यदि नहीं है है।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
छोडि़ए, सीकर, चूरू,
झुंझुनूं यह बात
करो।
श्री अध्यक्ष:
सीकर और चूरू के
बीच में ही तो झुंझुनूं
है। सीकर, चूरू
के बीच में है झुंझुनूं।
श्री रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
आपके मंत्री
जी को प्रभावित
कर रहे हैं और सबसे
पहले बांगड़ कालेज
इंजिनियरिंग की
जो शाखा राजस्थान
के अन्दर जोधपुर
में खुली है, मैं
इसलिए यदि जो आपने
आसन से यह कहा तो
मैं भी मेरी भावना
इनको कर देता हूं।
...(व्यवधान)...
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): अध्यक्ष
महोदय,
फैसला करके
आओ। ये केबिनेट
में कलेक्टिव फैसला
करके सदन में आवें,
जनता को बताएं,
आप यह एक्सप्रेस
क्यों कर रहे
हैं। मैं समझता
हूं, इससे बड़ा
दुर्भाग्य और
कुछ नहीं हो सकता,
ये मिनिस्टर कलेक्टिव
डिसीजन नहीं ले
सकते और हाउस में
आकर बोल रहे हैं,
इससे बड़ा दुर्भाग्य
क्या हो सकता
है। अध्यक्ष महोदय, पार्लियामेंटरी
प्रेक्टिसेज का
कम से कम इतना तो
ध्यान रखना पड़ेगा
कि लेजिस्लेचर
के प्रति कौन सा
मंत्री रेस्पोंसिबिल
है, इनके खुद के
ब्यूज अलग अलग
हैं। ऐसी कौन सी
सरकार चल रही है
जिस सरकार की कोई
जिम्मेदारी भी
नहीं है कुछ भी।
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष
: नैक्स्ट क्वेश्चन
श्री हरिमोहन शर्मा।
सुरेन्द्र/अरुण/20.3.2007/11.20/1c/1
राष्ट्रीय
बागवानी मिशन के
तहत चयनित जिले
132. श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
क्या कृषि मंत्री
यह बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या यह सही
है कि वर्ष 2005-06, 2006-07 और
इसके आगे के वर्षों
के लिये राष्ट्रीय
बागवानी मिशन के
अन्तर्गत कोई
योजना केन्द्र
सरकार ने प्रस्तावित
की है, जिसके अन्तर्गत
किसानों को अनुदान
उपलब्ध कराया
जाता है? यदि हां,
तो इस योजना का
विवरण तथा केन्द्र
द्वारा दिये गये
दिशा-निर्देश एवं
उपलब्ध कराये
अनुदान का विवरण
सदन की मेज पर रखें।
(2) उक्त योजनान्तर्गत
वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 के
लिये कितना-कितना
बजट प्रावधान किया
गया? यह योजना किस-किस
जिले में आरम्भ
की गई और किस-किस
जिले को कितना-कितना
बजट आवंटित किया
गया तथा जिले के
चयन का मानदण्ड
क्या था?
(3) फसलों व पौधों
के लिये कीटनाशक
दवाइयों की उपलब्धता
एवं विक्रय करने
हेतु किन-किन कम्पनियों
को अधिकृत किया
गया है तथा इनमें
से किन-किन कम्पनियों
को राज्य सरकार
द्वारा दिये जाने
वाला अनुदान प्राप्त
करने के लिये अधिकृत
किया गया और क्या
इनका वर्गीकरण
किया गया है? यदि
हां, तो कौन-कौनसी
कम्पनी किस वर्ग
के अन्तर्गत आती
है?
(4) क्या उक्त
प्रकार की दवाइयां
खरीदने हेतु यह
भी निर्देशित किया
गया था कि केवल
‘ए’
ग्रेड कम्पनी
से ही ये दवाइयां
खरीदी जायें? क्या
उन निर्देशों के
अन्तर्गत सहकारी
समितियों ने ‘ए’ ग्रेड
वाली कम्पनियों
से ही माल खरीदा
है? यदि हां, तो किन-किन
से व नहीं, तो क्यों?
(5) ‘ए’
ग्रेड कम्पनी
से खरीदे गये माल
की अधिकतम खुदरा
मूल्य में दर्शाये
गये मूल्य के
मुकाबले में ‘बी’
ग्रेड व
अन्य ग्रेडों
से खरीदे गये माल
की अधिकतम खुदरा
मूल्य कितनी अधिक
अथवा कम थी? और यदि
‘बी’
व अन्य
ग्रेडों की अधिकतम
खुदरा मूल्य ‘ग’ ग्रेड
के मुकाबले अधिक
थी तो क्यों?
(6) सरकार द्वारा
वर्ष 2005-06 व 2006-07 में किन-किन
सहकारी समितियों
को कितने-कितने
अनुदान का भुगतान
तय दिशा-निर्देशों
के अनुसार किया
गया? विवरण सदन
की मेज पर रखें।
(7) किन-किन कम्पनियों
ने सहकारी समितियों
को किस-किस ग्रेड
का माल बेचा व कितना-कितना
भुगतान सहकारी
समितियों द्वारा
किया गया?
राज्य मंत्री, कृषि (श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी) : (1) जी
हां। केन्द्र
सरकार द्वारा वर्ष
2005-06, 2006-07 और इसके आगे
के वर्षों के लिए
राष्ट्रीय बागवानी
मिशन योजना राज्य
में लागू की है।
भारत सरकार द्वारा
प्रेषित गाइडलाइन
एवं योजना का विवरण
परिशिष्ट-1 पर
संलग्न है।
(2) राष्ट्रीय
बागवानी मिशन के
अन्तर्गत वर्ष
2005-06 के लिए राशि 41.02
करोड़ एवं वर्ष
2006-07 के लिए राशि 76.27
करोड़ रुपये का
बजट प्रावधान किया
गया है। यह योजना
वर्तमान में राज्य
के 17 जिलों (जयपुर,
अलवर, अजमेर, नागौर,
कोटा, झालावाड़,
बारां, चित्तौड़,
जोधपुर, जालौर,
पाली, बाड़मेर,
श्रीगंगानगर, करौली,
सवाई माधोपुर,
टोंक एवं बांसवाड़ा)
में लागू की गई
है। वर्ष 2005-06 एवं
2006-07 में जिलेवार
बजट आवंटन परिशिष्ट-2
पर संलग्न है।
विभाग ने राज्य
के सभी 32 जिलों के
चयन हेतु भारत
सरकार को प्रस्ताव
भिजवाये थे। भारत
सरकार के द्वारा
राष्ट्रीय बागवानी
मिशन अन्तर्गत
जिले का चयन जिले
में उद्यानिकी
की वर्तमान स्थिति
एवं भविष्य की
संभावनाओं के मद्देनजर
कलस्टर एप्रोच
के आधार पर किया
गया है।
(3) फसलों व पौधों
में अनुदान पर
कीटनाशक दवाइयों
की उपलब्धता एवं
विक्रय हेतु पंजीकृत
की गई कम्पनियों
की सूची परिशिष्ट-3
पर संलग्न है।
कृषि विभाग द्वारा
विगत वर्षों में
विभिन्न निर्माताओं
द्वारा विक्रय
किये गये कीटनाशकों
की गुणवत्ता रिपोर्ट
अमानक नमूनों के
प्रतिशत के आधार
पर ‘ए’,
‘बी’,
‘सी’
व ‘डी’ ग्रेड
में वर्गीकरण किया
गया है जिनकी सूची
परिशिष्ट-4 पर
संलग्न है। यह
वर्गीकरण भविष्य
में गुणवत्ता
के लिए नमूने लेने
के लिए किया गया
है जिसका सम्बन्ध
अनुदान पर कीटनाशी
रसायन उपलब्ध
करवाने से नहीं
था।
(4) उद्यान विभाग
द्वारा प्राथमिकता
के आधार पर ए ग्रेड
की कीटनाशी सहकारी
समितियों के माध्यम
से कृषकों द्वारा
स्वयं क्रय करने
के निर्देश दिये
गये थे। यदि कोई
रसायन ‘ए’ श्रेणी
के निर्माता द्वारा
उत्पादित नहीं
किया जा रहा है
तो क्रमश- बी, सी
या डी श्रेणी के
निर्माताओं द्वारा
उत्पादित कीटनाशी
ली जा सकेगी। सहकारी
समितियों द्वारा
वर्गीकरण की प्राथमिकता
के अनुसार कीटनाशी
कृषकों को उपलब्ध
कराये गये हैं।
(5) कीटनाशी रसायनों
की दरों पर नियंत्रण
लागू नहीं हैं।
निर्माताओं द्वारा
प्रतिस्पर्धा
दर पर कीटनाशी
विक्रय किये जाते
हैं।
(6) विभाग द्वारा
विभागीय योजनाओं
में दिशा-निर्देशों
के अनुसार वर्ष
2005-06 एवं वर्ष 2006-07 में
क्रमश: 3.70 करोड़ रुपये
व 1.60 करोड़ रुपये
के अनुदान का भुगतान
सहकारी समितियों
को किया गया है।
(7) सहकारी समितियों
द्वारा विभिन्न
निर्माताओं द्वारा
आपूर्ति किये गये
कीटनाशी रसायनों
के लिए कुल राशि
5.30 करोड़ रुपये का
भुगतान किया गया
है। कृषि विभाग
द्वारा राज्य
में ए बी सी एवं
डी ग्रेडवार 180 कीटनाशी
निर्माता कम्पनियों
को वर्गीकृत किया
गया है। परिशिष्ट-4
पर समितिवार, कम्पनीवार
व ग्रेडवार उपलब्ध
कराई गई कीटनाशी
की सूची पूरे राज्य
से संकलित करने
में समय लगेगा
जिसकी सूचना प्राप्त
होने के उपरांत
पृथक रूप से अलग
कराई जानी संभव
होगी।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जवाब तो जो आपको
दिया गया है उससे
भिन्न बताया है
इन्होंने।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
वह तो पढ़कर के
सुना दिया न साहब।
मैं तो मेरे प्रश्न
पूछ रहा हूं। आपको
जो 2005-06 में 41 करोड़
और 2006-07 में 76 करोड़
रुपया केन्द्र
सरकार से मिला
उसमें से आपने
कुल कितना खर्चा
किया? नम्बर दो,
जब आपने यह डायरेक्शन
यहां से दे रखे
थे, आपने वर्गीकरण
किया हुआ है कम्पनीज
का ए बी सी एण्ड
डी और डायरेक्शन
उसमें यह है कि
आप ए ग्रेड की कम्पनी
से ही यह माल खरीदेंगे
तो फिर आपने उसके
विपरीत ए ग्रेड
का उत्पादन होने
के बावजूद भी सी
और डी कम्पनी
का माल जिसका ग्रेड
आपने फिक्स किया
था उनसे क्यों
खरीदा?
श्री अध्यक्ष:
मंत्री जी, आप एक
बात बता दीजिये
कि यह 76.27 करोड़ है
यह राजस्थान के
लिए है या फिर भारत
के लिए है?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
राजस्थान के लिए
है। पिछले वर्ष
70 प्रतिशत...
श्री अध्यक्ष:
राजस्थान का तो
उन्होंने पूछा
ही नहीं। वह तो
राष्ट्रीय मिशन
में आया है...
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
राजस्थान के जिन
जिलों में राष्ट्रीय
बागवानी मिशन काम
करता है उन जिलों
के लिए अनुदान
आया है। उसके अन्दर
70 प्रतिशत पिछली
बार खर्च हुआ और
इस बार लगभग 90 प्रतिशत
होने की संभावना
है।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
सम्भावना नहीं,
सम्भावना तो सारा
ही कर दोगे।
श्री अध्यक्ष:
मंत्री जी, आप यह
बतायें कि यह 76.27 करोड़
रुपया है यह राजस्थान
के लिए ही है?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
राजस्थान के
17 जिलों के लिए है।
श्री प्रभुलाल
सैनी (कृषि मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस राशि
का जिक्र किया
गया है वह राजस्थान
के 17 जिलों के लिए
है। 17 जिलों के लिए
यह राशि आवंटित
की गई है। 17 जिलों
में 2005-06 में 13 जिले
सम्मिलित किये
गये थे और इस वर्ष
4 जिले और जिनमें
बांसवाड़ा, सवाई
माधोपुर, करौली
और टोंक हैं उनको
सम्मिलित किया
गया है।
श्री अध्यक्ष:
17 जिलों के लिए है।
मैं क्लियर होना
चाहता हूं कि यह
17 जिलों के लिए आवंटित
है.... (व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
2004-05 में 15.26 करोड़ रुपये
और 2006-07 में 24.55 करोड़
रुपये की राशि
खर्च की गई है।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कुल कितना खर्च
किया आपने बजट
प्रावधान में से?
एक तो यह बता दें
आप।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
2004-05 में 25.26 करोड़ और
2006-07 में 24.25 करोड़....
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
तो इतने करोड़
रुपये का आप उपयोग
क्यों नहीं कर
पाये? आपका जो बजट
प्रावधान था,
2006-07 अब खत्म हो रहा
है तो आपको जब इतना
करोड़ रुपया गवर्नमेंट
ऑफ इण्डिया ने
दिया और दो साल
में भी आप उसको
उपयोग क्यों नहीं
कर पाये? नम्बर
दो, जो आपने ग्रेड
की है कम्पनी
की ए बी सी और डी,
आप यह बता दें कि
जो माल का प्रोडक्शन
कम्पनी कर रही
है उसकी कोस्ट
के मुकाबले में
बी सी एण्ड डी
कम्पनी की जो
कोस्टिंग है वह
कितनी अधिक है?
तीसरा, यह है कि
आपने इनका जवाब
दिया है वह यह दिया
है कि हमने प्राइस
फिक्स नहीं कर
रखी है तो बी सी
और डी कम्पनी,
उनकी प्राइस क्लाइमेक्स
पर है और जो ए क्लास
कम्पनी जो प्रोडक्शन
कर रही है उनके
कम्पेरेटिवली
उनकी लो है तो यह
माल उस बी सी और
डी ग्रेड कम्पनी
से इसलिए खरीदा
जा रहा है कि वह
सारा का सारा गोल-गप्पा
उस अनुदान में
वो कर देते हैं।
उसमें प्राइस अधिक
है, उनको अधिक प्राइस
देनी पड़ती है।
श्री अध्यक्ष:
श्री सी. पी. जोशी।
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
क्या यह सही है
कि भारत सरकार
ने हॉर्टिकल्चर
के सम्बन्ध में
तीन साल पहले राजस्थान
सरकार को सूचित
किया और सूचित
करने के बाद क्या
राजस्थान सरकार
ने उस हॉर्टिकल्चर
कमीशन का लाभ उठाने
के लिए कोई तैयारी
की और जो तैयारी
की तो 700 करोड़ रुपये
में से केवल मात्र
अभी तक 40 करोड़ रुपये
ही क्यों खर्च
हुए?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
माननीय अध्यक्ष
जी, यह योजना जिन
जिलों में लागू
हुई हैं उन कई जिलों
में बागवानी की
तरफ किसान आकष्र्ज्ञित
नहीं थे। हमने
प्रचार-प्रसार
करके 10 हजार हैक्टर
में नये बाग़ इस
बार लगाये हैं।
पूरे राजस्थान
में 50 सासल में 35 हजार
हैक्टर में केवल
बाग़ थे और हमने
केवल एक साल के
अन्दर 10-10 हजार हैक्टर
बाग़ की परिधि
की है। धीरे-धीरे
लोग इसकी ओर आकर्षित
हो रहे हैं। पिछले
साल जो कम हुआ उसका
कारणा था लोगों
की अट्रेक्शन
कम थी और अब लोगों
को इस योजना का
लाभ और इसके बारे
में बता रहे हैं,
लोग आ रहे हैं।
इस बार 90 प्रतिशत
तक खर्च होगा और
अगली बार मुझे
उम्मीद है कि
हण्डरेड प्रतिशत
और उससे आगे हम
बढ़ जायेंगे।
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): 700 करोड़
में से 70 करोड़ रुपये
खर्च नहीं हुए
हैं और केवल मात्र
सब्सिडी के नाम
पर, सब्सिडी का
इंसेंटिव देकर
उन किसानों की
एक गैंग बन गई है
जो गैंग लाभ उठा
रही है। सरकार
कोई काम नहीं कर
रही है, बता दो सरकार
काम कर रही है तो।
केवल वो आदमी जो
सब्सिडी लेने वाले
हैं वो सब्सिडी
का लाभ उठाने के
लिए कर रहे हैं,
सरकार की कोई तैयारी
नहीं है।
श्री रामप्रताप
कासनिया (पीलीबंगा):
अध्यक्ष महोदय,
यह बिल्कुल सही
है कि जो लोग इस
मामले में बहुत
ही एक्सपर्ट,
चतुर, चालाक और
शिक्षित हैं वो
लोग ही इस सब्सिडी
का फायदा ले रहे
हैं। अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से माननीय
मंत्री महोदय से
यह भी जानना चाहूंगा
कि यह सब्सिडी
प्राप्त करने
में काश्तकार
को कितनी कठिनाई
आती है। मैं पूरी
डिटेल सदन में
नहीं बताना चाहूंगा
पर इस बात से आप
वाकिफ हैं कि काश्तकार
सब्सिडी लेने में
कितना परेशान हो
रहा है और क्या-क्या
इस मामले में परेशानी
होती है। इसके
सम्बन्ध में
मैंने आपको व्यक्तिगत
भी जानकारी दी
थी। यह बात सही
है कि काश्तकार
जागरूक बहुत है,
सब्सिडी लेना चाहते
हैं, बाग़ भी लगाना
चाहते हैं पर कुछ
कठिनाइयां हैं
वो मैं अध्यक्ष
महोदय....
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न पूछिये,
भाषण नहीं दें।
प्रश्न पूछें।
vkj/akt/20032007/1130/1d
श्री रामप्रताप
कासनिया (पीलीबंगा):
अध्यक्ष महोदय,
भाषण नहीं है, कठिनाइयां
नहीं हैं। यह सब्सिडी
काश्तकार जो लेना
चाहते हैं, उसको
आसानी से नहीं
मिलती हैं। जयपुर
तक आने की उसकी
हैसियत नहीं है,
यह मैं निवेदन
करना चाहता हूं
अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष:
श्री भरतसिंह।
श्री भरत
सिंह (दीगोद): माननीय
अध्यक्षजी, केन्द्र
सरकार कृषि का
विस्तार करने
के लिए होर्टीकल्चर
को एम्फेसिस कर
रही है और उन्होंने
दो साल में 117 करोड़
रुपये राजस्थान
सरकार को इस मद
में दिये हैं होर्टीकल्चर
के लिए। मैं कृषि
मंत्रीजी से जानना
चाहूंगा कि क्या
सरकार इस होर्टीकल्चर
को सही रूप से लागू
करने के लिए इसमें
गम्भीर है और
अगर है तो जिन 17 जिलों
में यह योजना लागू
हो रही हैं, उनमें
कितने कर्मचारी
एक्सटेंशन में
होर्टीकल्चर
में ट्रेंड है
और क्या सरकार
और इन लोगों को
भर्ती कर रही हैं
और दूसरी चीज, होर्टीकल्चर
का एग्जाम्पल
ले रहे हैं और यह
मिसाल देने के
लिए कि जो सरकारी
फार्म कृषि विभाग
के पास हैं, क्या
उन्होंने दो साल
के अन्दर उन कृषि
फार्म्स पर एग्जाम्पलरी
होर्टीकल्चर
फार्म स्थापित
करने का प्रयास
किया है, करेगी
सरकार? यह मैं इनसे
जानना चाहता हूं।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): सम्माननीय
अध्यक्षजी, जहां
तक सब्सिडी आने
का प्रश्न है,
केवल बागवानी पर
नहीं, बहुत से ग्रीन
हाउस पर, पैक हाउस
पर और हाईटेक नर्सरी
पर, इन सबमें यह
सब्सिडी सरकार
द्वारा भेजी गई
है लेकिन हमारा
किसान अभी तक इतना
एडवांस नहीं है।
हर वर्ष हम 50-50 हजार
पुस्तकें विभाग
की तरफ से छपवाते
हैं और किसान को
हर पंचायत तक हम
उनको भिजवाते हैं,
उनको जानकारी दी
है कि आप होर्टीकल्चर
मिशन में क्या-क्या
फायदा ले सकते
हैं और उसी का नतीजा
है कि पिछले 50 साल
में जो 35,000 हैक्टेयर
में बाग़ थे, हमने
दो साल में 15,000 हैक्टेयर
से ज्यादा बगीचे
इस योजना के कारण
बनाये हैं और धीरे-धीरे.....
श्री भरत
सिंह (दीगोद): आदमी
कितने हैं? किताबें
नहीं, आदमी कितने
हैं उसमें क्रियान्वित
करने के लिए और
किताबें तो आप
लाखों बांट दो,
कर्मचारी हैं क्या
आपके पास? (व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): नहीं
नहीं, मैं कोई बात
कर रहा हूं।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
117 करोड़ में से 47
करोड़ का केवल
मात्र भुगतान हुआ
है। माननीय अध्यक्ष
महोदय, 117 करोड़ रुपये
में से केवल मात्र
47 करोड़ रुपये खर्च
हुए हैं और उसके
साथ ही बी सी एण्ड
डी कम्पनियां
हैं, उनकी आप रेट
देखो, वह तो खरीदा
गया है और जो ''ए'' क्लास
है, उनके कम्पेरिजन
में रेट कम है, उसको
जान-बूझकर नहीं
खरीदा गया है।
इस प्रकार यह उन
कम्पनियों ने
मिलकर सारे अनुदान
का दुरुपयोग किया
गया है और कम्पनियों
के माध्यम से
जो सहकारी समितियों
में जो काम करने
वाले हैं और इसके
अलावा जो एग्रीकल्चरल
विभाग में जो वेरीफिकेशन
करने वाले अधिकारी
हैं, इन सबकी मिलीभगत
से इन अनुदान का
दुरुपयोग किया
गया है और अनुचित
अनुदान उठाया गया
है।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): सम्माननीय
अध्यक्ष महोदय,
हमारे विभाग से
जो निर्देश जारी
हुए थे कि किसानों
को उच्च क्वालिटी
का कीटनाशक उपलब्ध
करवाने में प्राथमिकता
दी जाये और उस पत्र
में यह भी लिखा
गया था कि अगर किसान
उच्च क्वालिटी
का नहीं लेना चाहता
है या वह कम्पनियां
पैदा नहीं कर सकती
या करती हैं तो
आप बाजार से खरीद
सकते हैं और उस
पर अनुदान हम देंगे।
किसानों को बाजार
से भी खरीदने का
हमने उस पत्र में
लिखा है लेकिन
चूंकि किसानों
से फीडबैक आ रहा
था कि बी और सी कम्पनियां
हैं, इनका माल ज्यादा
सोसायटियां खरीदती
हैं और ''ए'' ग्रेड
का कम मिलता है
तो हमने पत्र जारी
करके ''ए'' ग्रेड उपलब्ध
करवाने के लिए
लिखा है तो उसमें
कोई किसानों का
बुरा नहीं है, इसमें
तो किसान की भलाई
हुई है, उसमें ''ए''
ग्रेड का माल उसको
मिला है। बी और
सी डी कम्पनियों
का अगर कोई किसान
लेना चाहता है
तो उसको भी सब्सिडी
मिलेगी।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं नहीं नहीं
नहीं, उसमें यह
नहीं है अध्यक्ष
महोदय, आप स्वयं
जानते हैं, उसमें
यह नहीं है। वह
सी और डी कम्पनियां...
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): मैं
तो अध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
यह जानना चाहता
था, चूंकि मामला
स्पष्ट है, पहली
बात तो यह है कि
क्या सरकार ''ए''
ग्रेड का माल नहीं
खरीदने वाले जो
अधिकारी हैं या
जो भी संबंधित
लोग हैं और सोसायटी
में जिस प्रकार
से घोटाला हुआ
है, उन सबके बारे
में जांच करायेगी,
नम्बर एक।
श्री अध्यक्ष:
यह तो अलग से प्रश्न
है।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): दूसरा,
एक प्रश्न और
हैं माननीय अध्यक्ष
महोदय। माननीय
मंत्रीजी, आप सुनें,
इर्रिटेट मत होइये।
दूसरा एक और प्रश्न
है। मेरा प्रश्न
यह है कि सरकार
यह कहती है कि भारत
सरकार से जो पैसा
आया है, उसके मुताबिक
हमने बागवानी का
काम बढ़ाया है।
मुझे याद है माननीय
अध्यक्ष महोदय,
बूंदी में ईसरी
गार्डन की जमीन
तक आपने दूसरों
को दे दी, लाखों
रुपये आपने खर्च
कर दिये। आपने
तो सरकारी फार्म,
जैसा दीगोद से
आने वाले माननीय
सदस्य ने कहा,
सरकारी फार्म कम
करते जा रहे हैं।
आपके कर्मचारी
नहीं हैं। जहां
घोटाला हो रहा
है, उसकी जांच आप
करने की स्थिति
में नहीं हैं।
आप स्पष्ट बता
दो, आप स्पष्ट
बता दो...(व्यवधान)
आप सुनिये तो सही,
मंत्रीजी, आप सीनियर
आदमी हो, आप सुनिये
तो सही। आप तो यह
करिये, आप इसके
बारे में सरकार
क्या करेगी, किस
प्रकार से गड़बड़-घोटाले
करने वाले लोग
हैं, उनके खिलाफ
क्या एक्शन लेंगी?
सरकारी फार्म्स
जिन्होंने ट्रांसफर
किये हैं और बागवानी
रकबा कम किया है
और कर्मचारी कम
हैं तो उनको कैसे
बढ़ायेगी? इन सबके
बारे में बतायें,
इस सदन में बता
दो क्योंकि यह
बहुत अहम मसला
है। भारत सरकार
जितना पैसा दे
रही है, उस पैसे
का सदुपयोग नहीं
हो रहा है, उस पैसे
से घोटाले हो रहे
हैं।
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्रीजी,
आप वहां जो दुरुपयोग
करने वाली बात
है, वह बता दें।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
साथ ही यह भी बतायें,
''ए'' ग्रेड की कौन-कौनसी
दवाइयां उपलब्ध
नहीं थीं और ''बी''
और ''ए'' का रेट का कम्पेरिजन
भी आप बतायें।
आप कैसे कहते हैं
कि ''ए'' ग्रेड कम्पनी
वाले के पास दवाइयां
नहीं थीं, अपनी
मर्जी से ही आप
कह रहे हो कि ''ए'' ग्रेड
वाले के पास दवाइयां
नहीं थी। आपने
क्या वेरीफाई
करवाया है कि कौन-कौनसी
दवाइयां ''ए'' क्लास
के पास थी या नहीं
थी उस समय? उस समय
तो दवाइयों की
आवश्यकता थी।
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल (लूणकरणसर):
अध्यक्ष महोदय,
मेरा भी इसी से
सम्बन्धित प्रश्न
है मंत्री महोदय।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): सम्माननीय
अध्यक्षजी, 140 कम्पनियां
हमारे यहां विभाग
में रजिस्टर्ड
हैं और इसमें जो
हमारे अमानक नमूने
हैं, उनके आधार
पर 44 कम्पनियों
को ''ए'' ग्रेड का दर्जा
मिला हुआ है। हमने
किसी एक कम्पनी
के लिए नहीं कहा।
हमने किसानों को
''ए'' ग्रेड की दवाइयां
उपलब्ध कराने
के निर्देश दिये
और उसके साथ यह
भी कहा कि अगर किसान
बाजार से खरीदना
चाहे तो सी बी और
डी ग्रेड की भी
खरीद सकता है।
कोई जरूरी नहीं
है कि वह ''ए'' ग्रेड
की ही खरीदे लेकिन
''ए'' ग्रेड की दवाइयां
गुणवत्ता में
अच्छी हैं और
उसके अन्दर जब
हम पौध लगाते हैं
तथा उसमें अच्छी
गुणवत्ता की दवाइयां
मिलेंगी तो पौधा
सरवाइव जल्दी
करता है और जहां
तक सब्सिडी का
सवाल है, आपके राज
में 25 प्रतिशत सब्सिडी
थी और एक हैक्टेयर
पर थी और हमने उसको
चार हैक्टेयर
में किया और 50 प्रतिशत
किया। आपके राज
में 1500 रुपये प्रति
हैक्टेयर था,
हमने...
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह तो दिल्ली
से पैसा आया है,
आपने क्या दे
दिया? सारा पैसा
दिल्ली से आया
है और अनुदान में
और घोटाला कर दिया
आपने और बी सी और
डी ग्रेड की जितनी
हाई रेट की दवाइयां
थीं, उनसे खरीद
ली गईं।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): ...हमने
22000 रुपये प्रति हैक्टेयर
किया, 11 गुना कर दिया,
11 गुना कर दिया।
आपके राज में एक
पैसा नहींमिलता
था, हमने 7000 प्रति
हैक्टेयर किसानों
को दिया। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न का
जवाब तो सुनिये।(व्यवधान)
आप जवाब तो सुनिये
पहले।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, करोड़ों
रुपयों का मामला
है। बी सी और डी
की रेट की क्यों
खरीदी जब ''ए'' ग्रेड
कम्पनी के पास
दवाई थी। (व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): मंत्रीजी,
आप उपलब्धि मत
बताओ। आपके आदेश
की पालना नहीं
हुई।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): माननीय
अध्यक्षजी, 17000 हैक्टेयर
में नये बागवान
लगाना, दो साल में
17000 हैक्टेयर में
एक कीर्तिमान बना
है।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): आपके
आदेश की पालना
नहीं हुई। आप इर्रिटेट
मत हो, मैंने पहले
भी अर्ज किया है।
आपके आदेश की पालना
नहीं हुई और ''ए'' ग्रेड
की दवाइयां नहीं
खरीदी गई हैं।
आप क्या कर रहे
हो, यह बताओ। लम्बी
बात मत करो।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): आप एक
मिनट सुन लें पहले।
सम्माननीय अध्यक्षजी,
मूल्य निर्धारण
हम नहीं करते हैं,
न हम कोई सीधी दवाई
खरीदते हैं। किसान
खरीदता है और अपना
शेयर जमा कराता
है और उसके बाद
हम उनको अनुदान
देते हैं।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, किसान नहीं
खरीदता है। मेनिपुलेशन
है, मेनिपुलेशन
है। वह दवाई विक्रेता
ही किसानों के
नाम से बिल बनाता
है, वह खुद ही बनाकर
खुद ही सारे अनुदान
का पैसा ले लेता
है।
श्री अध्यक्ष:
यह बहुत गलत बात
है। आप मंत्रीजी
का जवाब सुनते
नहीं हो। खुद ही
बोलते जाते हो।
आप मंत्रीजी को
सुनिये पहले।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):...और
किसी भी किसान
की फर्जी लिस्ट
वहां पर दे देता
है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बहुत गलत बात है।
हिण्डौली से आने
वाले माननीय सदस्य,
मंत्री का जवाब
भी सुनना चाहिए।
सुनने के बाद यदि
आपको कोई शक हो,
शुबहा हो तो फिर
पूछ लीजिये आप।
श्री भरत
सिंह (दीगोद): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
जवाब ही नहीं मिला
है।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): सम्माननीय
अध्यक्षजी, प्रावधान
यह है कि जितना
प्रतिशत सब्सिडी
होती है, मान लो,
90 प्रतिशत सब्सिडी
है, किसान स्वयं
अपनी इच्छा से
उस कम्पनी का
माल लेना चाहता
है, उसके लिए 10 प्रतिशत
पैसा जमा कराता
है और 90 प्रतिशत
हम बाद में भुगतान
करते हैं जब किसान
ले जाता है। हम
किसी भी कम्पनी
को यह नहीं कहते
कि यह दवाई आप वहां
रखो। ''ए'' ग्रेड की
15 कम्पनी हैं।
किसी भी कम्पनी
की वहां वह दवाई
ले सकता है।
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्रीजी,
आप मेरी एक बात
का जवाब दीजिये।
जो आपकी दवाइयां
स्फूरियस है या
सब-स्टैण्डर्ड
है और आपको कम्प्लेंट
की। आज दिन तक किसी
भी कम्पनी को
ब्लैकलिस्ट
किया आपने?
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जांच नहीं हुई।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): चार-चार
कम्पनियों के
लाइसेंस रद्द हुए
हैं। जो भी हम नमूने
लेते हैं, उसमें
दोषी पाये जाने
पर कम्पनियों
के लाइसेंस रद्द
कर देते हैं।
श्री अध्यक्ष:
आप मेरी एक बात
तो जवाब दे दीजिये,
कितनों को ब्लैकलिस्टेड
किया आपने, यह बतायें।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): चार कम्पनियों
को किया।
श्री अध्यक्ष:
चार कम्पनियों
को किया? इसमें
चार कम्पनियां
ही नहीं हैं, इसमें
200 कम्पनियां हैं।
(व्यवधान) More than two
hundred.
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय,
आपने होर्टीकल्चर
के सम्बन्ध में
एक भी कम्पनी
को ब्लैकलिस्ट
नहीं किया, कोई
भी कम्पनी को
ब्लैकलिस्टेड
नहीं किया है आज
दिन तक, आप यह बतायें।
होर्टीकल्चर
के सम्बन्ध में
एक भी कम्पनी
को ब्लैकलिस्टेड
नहीं किया।
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल (लूणकरणसर):
यह वह कम्पनियां
हैं, जिनके दो-दो
के नाम से है। एक
को तो रिजेक्ट
कर दिया, दूसरी
से काम चला रहे
हैं। आप तो मंत्रीजी,
यह बतायें कि यह
डिग्गी जिनकी
बनवा दी, उनको भी
अनुदान-वनुदान
देकर, आपने पैसा
तो ले लिया, कनेक्शन
दे रहे हैं क्या
बिजली के?
श्री अध्यक्ष:
अब आसन ने पूछ लिया,
अब आपका बाकी है
क्या? मेरे प्रश्न
का जवाब नहीं आया।
जब आसन ने पूछ लिया,
वह जवाब देंगे।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पहले आपका आ जाये।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि): सम्माननीय
अध्यक्षजी, हमारे
विभाग में रजिस्ट्रेशन
करने का तरीका
है। तीन साल के
जो अमानक नमूने
100 प्रतिशत, 80 प्रतिशत
तक उसमें दर्ज
हैं, उसमें जितनी
भी दवाइयां, जो
हमारे मापदण्ड
हैं, उसमें आती
हैं, उसको ही हम
रजिस्टर करते
हैं, दूसरों को
हम रजिस्टर नहीं
करते हैं। 140 कम्पनियां
रजिस्टर्ड की
हैं हमने। जो सब-स्टैण्डर्ड
पाई जाती हैं, उसको
हम रजिस्ट्रेशन
ही नहीं करते हैं।
वह तो रजिस्टर्ड
तब होती है, जब तीन
साल तक सारे नमूने
सही पाये जाते
हैं। (व्यवधान)
श्री बद्रीलाल
जाट (कपासन): आदरणीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपके माध्यम
से जानना चाहता
हूं कि...
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय,
आधे घंटे की चर्चा
करवा लें यहां
पर। अध्यक्ष महोदय,
इस प्रश्न पर
आधा घंटे की चर्चा
करवा लें। अध्यक्ष
महोदय, अच्छा
यह रहेगा कि इस
प्रश्न पर आधा
घंटे की चर्चा
की जाये। भारत
सरकार से इतना
बड़ा पैसा आ रहा
है, सरकार की तैयारी
नहीं है और लोगों
को क्वालिटी की
दवाइयां नहीं मिल
रही हैं, सब-स्टैण्डर्ड
की दवाइयां मिल
रही हैं। यह तो
केवल सब्सिडी के
आधार पर यह होर्टीकल्चर
हो रहा है, इसका
कोई आधार नहीं
है।
श्री बद्रीलाल
जाट (कपासन): मैं
आपके माध्यम से
यह मंत्रीजी से
विनती करना चाहता
हूं...(व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं एक निवेदन
करूं, यह जो इन्होंने
कहा कि किसान खरीदता
है....
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
एक साथ पूछना शुरू
कर देते हैं। आप
एक-एक पूछिये।
माननीय सदस्य,
एक-एक पूछें।
Jkj/akt/11.40/1e/20.3.2007
श्री बद्रीलाल
जाट: अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से मंत्री
महोदय से यह निवेदन
करना चाहूंगा कि
क्या इस प्लान
में चित्तौड़
जिला सम्मिलित
है और सम्मिलित
है तो क्या सब्सीडी
में कोई कटौती
हुई है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मंत्री महोदय,
जब प्रश्न पूछते
हैं माननीय सदस्य,
तो आपको बैठ जाना
चाहिए। (व्यवधान)
श्री भरत
सिंह: माननीय अध्यक्षजी,
मैंने इनसे एक
बुनियादी प्रश्न
किया था कि 17 जिलों
में आपका प्रोग्राम
चल रहा है, कितने
आपके पास ट्रेंड,
प्रशिक्षक वहां
पर ग्रामसेवक हैं
हार्टीकल्चर
में, उसका उत्तर
दीजिये।
श्री अध्यक्ष:
नहीं, है ही नहीं
कोई, है ही नहीं,
मैं कह रही हूं
न कि नहीं है, मुझे
मालूम है, नहीं
है।
श्री भरत
सिंह: माननीय अध्यक्षजी,
इतना बड़ा प्रोग्राम
है और इसमें राजस्थान
का भविष्य जुड़ा
हुआ है, हमारे नौ
हजार से ऊपर ग्राम
पंचायते हैं, चालीस
गांव वालों पर
एक एक्सटेंशन
का आदमी और हार्टीकल्चर
का प्रोग्राम तो
भारत, यह राजस्थान
सरकार इस दिशा
में क्या पहल
कर रही है कि यह
कार्यक्रम सफल
हो और हम इसको गांवों
तक पहुंचा सकें।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब आप एक-एक का जवाब
तो आने दीजिये।
नो-नो, बहुत महत्वपूर्ण
प्रश्न पूछा है।
महत्वपूर्ण प्रश्न
है। माननीय मंत्रीजी,
क्या ट्रेंड आपके
पास ग्रामसेवक
हैं जो हार्टीकल्चर
के बारे में जानते
हों और जो उनको
जानकारी दे सकते
हों, काश्तकारों
को। (व्यवधान)
आप स्थान ग्रहण
करें।
श्री सुरेन्द्र
पाल सिंह टी.टी.:
पर्टीकुलरली हार्टीकल्चर,
बी.एससी. जो लड़के
हैं, बी.एससी.(एग्रीकल्चर)...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
तो भी उनके जवाब
तो देने दीजिये।
(व्यवधान)
श्री बद्रीलाल
जाट: इन सतरह जिलों
के प्लान में
क्या चित्तौड़
जिला सम्मिलित
और क्या राजस्थान
सरकार ने सब्सीडी
कम करने के कोई
आदेश जारी किये
हैं। जिन
काश्तकारों ने
बागवानी के जो
प्लान थे उन्होंने
आंवला के प्रोजेक्ट
लगाये, उन्होंने
लगाये थे सर, जुलाई
से पूर्व और उन्होंने
बिल भी सबमिट कर
दिये और उसके बाद
जुलाई-अगस्त में
तो उनकी सब्सीडी
22.50 हजार प्रति हैक्टेयर
थी और 29 जनवरी को
एक आदेश निकला
कि उनकी सब्सीडी
12.5 हजार प्रति हैक्टेयर
कर दी। उन
काश्तकारों का
भविष्य अंधकार
में, वास्तव में
सर, चिंता का विषय
है कि जिन्होंने
इतनी मेहनत की
और इतना इंसेंटिव
प्रोग्राम है उसमें
उन्होंने सहभागिता
निभा कर सारी व्यवस्थाएं
कीं और उसके बाद
उनके साथ ऐसा कुठाराघात
हुआ है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्नों का
जवाब तो आने नहीं
देते, बीच में खड़े
हो जाते हैं।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: माननीय
अध्यक्षजी, माननीय
विधायकजी ने जो
क्वेश्चन किया
है, हार्टीकल्चर
डिपार्टमेंट के
अलग से 187 कृषि पर्यवेक्षक
हैं और उनमें से...
श्री अध्यक्ष:
कितने?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: 187। और हार्टीकल्चर
के अंदर तो अलग
हैं, उनके ए.डी. भी
अलग हैं, उनके हार्टीकल्चर
कृषि पर्यवेक्षक...
श्री प्रमोद
जैन भाया: कितनी
ग्राम पंचायते
हैं, यह भी स्पष्ट
करें।
श्री अध्यक्ष:
यह गलत बात है, आपको
उनको जवाब देने
दीजिये।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: 187 कृषि
पर्यवेक्षक हैं
और समय-समय पर उनको
प्रशिक्षण भी दिया
जाता है और जो भी
कार्यक्रम आता
है इसको लागू कराने
में यह 187 कृषि पर्यवेक्षक
काम करते हैं। यह हार्टीकल्चर
के हैं और बी.एससी.(एग्रीकल्चर)
भी इसमें, जो इनकी
क्वालिफिकेशन
है शुरू की, बी.एससी.(एग्रीकल्चर)
के यह लड़के होते
हैं।
श्री अध्यक्ष:
यह 187 इन सतरह जिलों
में नियुक्त हैं
या कहीं और भी हैं
?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: हार्टीकल्चर
के अंदर हैं, 187 ।
श्री अध्यक्ष:
इन सतरह जिलों
में ही?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: हां,
जी। (व्यवधान)
श्री भरत
सिंह: पूरे राजस्थान
के बता रहे हैं
मैडम। यह
पूरे राजस्थान
के बता रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: अब बाड़मेर,
जैसलमेर में हार्टीकल्चर
का काम नहीं है,
वहां कैसे होंगे।
जहां-जहां जिस
जिले में काम है
वहीं होंगे। बाड़मेर,
जैसलमेर, चूरू
वहां कोई होगा
तो एकाध होगा।
नहीं है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नहीं, मैंने तो
यों ही पूछा। (व्यवधान)
अब जवाब देने दीजिये।
श्री हरिमोहन
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मेरा बहुत साफ
आरोप है कि जो सी
और डी कम्पनी
की, ए और बी कम्पनी
की मेडिसिन की
जो रेट बहुत हायर
है, किसानों के
दस प्रतिशत भीवह
खुद ही अपने पास
से उसमें एडजस्ट
करते हैं और किसानों
की फर्जी लिस्ट
बनाकर दवाइयां
अपने पास रखकर
मार्केटिंग सोसाइटीज
में उस बिलों को
पेश कर देते हैं
और यह सारी अनुदान
की राशि वह खुद
ही खा जाते हैं,
इसकी जांच कराइये
आप, वह खुद ही खा
जाते हैं। (व्यवधान)
श्री सांवर
लाल: कोई है क्या
उदाहरण आपके पास
एक-दो?
श्री हरिमोहन
शर्मा: हां, हां।
हां, हां। (व्यवधान)
श्री सांवर
लाल: ऐसे अनर्गल
आरोप नहीं लगाते
हैं सदन में।
श्री हरिमोहन
शर्मा: हां, हां।
रेट उठा कर देख
लो...(व्यवधान)
श्री सांवर
लाल: सदन पटल पर
रख दें, जांच करवा
देगी सरकार। क्या
बकवास बातें करते
हो। केवल सामान्य
बात करने से कोई
नहीं होता है, अगर
आपके पास तथ्य
हैं तो मामला रख
दें। (व्यवधान)
जबरदस्ती आरोप
लगाकर के..(व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा: यह सिंचाई
नहीं है। यह सिंचाई
नहीं है, यह कृषि
है।
श्री सांवर
लाल: यहां कोई भाषण
नहीं देते, अगर
आपके पास तथ्य
है तो रखिये।(व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा: या तो आप
यह कहो कि कृषि
मंत्री जवाब नहीं
दे सकते।(व्यवधान)
श्री रामप्रताप
कासनिया: उदाहरण
विचाराधीन हैं,
चल रहे हैं, गंगानगर,
हनुमानगढ़ का मामला
है, पहले से ही चल
रहा है जांच में।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण करें,
स्थान ग्रहण करें।
माननीय मंत्रीजी,
क्या आपके पास
बागवानी करने वाले
काश्तकारों का
कोई रजिस्ट्रेशन
या कोई जानकारी
है कि कौन-कौन किस
जिले में कितने
आपके ऐसे व्यक्ति
हैं जो हार्टीकल्चर
करके बागवानी कर
रहे हैं और क्या
नियमित रूप से
कोई आपका अधिकारी
है जो वहां जाकर
उनको सलाह देता
हो।
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: हर जिले
के अंदर अलग से
हार्टीकल्चर
का अधिकारी है
और बीस जिलों के
अंदर 187 पर्यवेक्षक
हैं। जैसा आप पूछ
रहे हैं, बीस जिलों
में हार्टीकल्चर
का काम है, वहां
187 कृषि पर्यवेक्षक
केवल हार्टीकल्चर
का काम करते हैं
और वह जो भी किसान
बागवानी करना चाहता
है उनसे वह सम्पर्क
करके रजिस्ट्रेशन
करके उन्हें पौधारोपण
कराना और तीन साल
तक उनको देखना...
श्री अध्यक्ष:
आपके पास रजिस्ट्रेशन
है क्या उनका?
रजिस्ट्रेशन
है आपके पास?
श्री सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: उसका
रजिस्ट्रेशन
जब अनुदान लेगा
तब रजिस्ट्रेशन...
श्री अध्यक्ष:
जानकारी। मेरा
मतलब जानकारी से
है। क्या आपके
पास इस तरह की कोई
सूची है कि इस जिले
में इतने लोग बागवानी
करते हैं। ऐसी
कोई सूची है? कोई
सूची नहीं है आपके
पास । (व्यवधान)
आपके पास कोई सूची
नहीं है, मैं कह
रही हूं। (व्यवधान)
श्री जोगेश्वर
गर्ग: अध्यक्ष
महोदय, जो आपने
जानकारी मांगी
थी, मैं भी, अध्यक्ष
महोदय, यही जानना
चाहता था, मैं भी
यही जानना चाह
रहा था...
श्री रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से मंत्री
महोदय से यह जानना
चाहता हूं कि जो
पौधे, जो दवा सब्सीडी
पर मिलती है उससे
उसी रेट में जैसे
आपने सब्सीडी
दे दी, कोई चीज दस
रूपये की मिल रही
है और उसमें सब्सीडी
शामिल है, क्या
यह सही है कि वही
चीज बाजार में
कम रेट पर उपलब्ध
होती है, इसके प्रमाण
गंगानगर, हनुमानगढ़
जिले में तो मैं
एक नहीं, सैंकड़ों
प्रमाण पेश कर
दूं।
श्री जोगेश्वर
गर्ग: अध्यक्ष
महोदय, जो आपने
प्रश्न किया,
मैं जालौर एवं
पाली के संदर्भ
में...
श्री अध्यक्ष:
नहीं। माननीय मंत्रीजी।
श्री जोगेश्वर
गर्ग: वही जानकारी
करना चाहता हूं,
क्या सरकार को
यह जानकारी है
कि घूम-फिरकर के
वही दस-बीस काश्तकार
बार-बार वही फायदा
ले लेते हैं और
ये प्रभावशाली
लोग हैं, उनकी सूची
आप देखें और जांच
करेंगे क्या उसकी?
श्री अध्यक्ष:
सूची है ही नहीं
इनके पास। (व्यवधान)
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल: मेरा
एक प्रश्न है
अध्यक्ष महोदय।
यह इतना बड़ा मिशन
चल रहा है...
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्री।
(व्यवधान) नो, नो,
माननीय मंत्री
खड़े हुए हैं भाई।
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल: मेरा
इसी के संबंध में
प्रश्न है अध्यक्ष
महोदय, मैं बहुत
देर से प्रयास
कर रहा हूं।
श्री राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
की बात तो सुन लें
अध्यक्ष महोदय।
एक सवाल पर, अध्यक्ष
महोदय, चालीस मिनट
हो गये। चालीस
मिनट हो गये।
श्री अध्यक्ष:
आप इनकी बात सुनिये।
नो, नो। अब आपको
पूछना है, उसके
बाद पूछियेगा।
माननीय मंत्री।
श्री प्रभुलाल सैनी(कृषि मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, हिण्डौली से आने वाले माननीय सदस्य ने यहां यह आरोप लगाया सदन में कि कीटनाशकों के वितरण और उनके अनुदान में घोटाला हुआ है, यह निरर्थक है। मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा, राज्य का कृषि विभाग एक भी पैसे की दवा नहीं खरीदता है। नम्बर दो, मैं यह भी सदन में जानकारी देना चाहूंगा कि जिन कम्पनीज के बारे में जिक्र हुआ है, ए क्लास, बी क्लास, सी क्लास और डी क्लास, इन कम्पनियों का श्रेणीकरण उनके द्वारा जितने सेम्पल्स हम लोगों ने लिये हैं, उदाहरण के लिए ए कम्पनी के हमने सौ सेम्पल लिये हैं, यदि पाँच प्रतिशत से कम उनकी अमानकता पाई जाती है ऐसी कम्पनी को ए श्रेणी का दर्जा दिया गया है। इसमें ऐसा नहीं है कि बहुत बड़ी कम्पनी जिसने बहुत अधिक दवा बनाई हो और उसको, ऐसा नहीं है माननीय अध्यक्ष महोदय। उन कम्पनियों का दर्जा उनके मानकीकरण के आधार पर हम लोगों ने दिया है। हमारा इस प्रकार का सर्कुलर जारी करने का जो उद्देश्य था माननीय अध्यक्ष महोदय, उसके पीछे एक ही मंशा थी कि ऐसी कम्पनियां जिनकी मानकता सही मिलती है, सबसे पहले काश्तकारों को हम लोगों ने सलाह देने का प्रयास किया कि ए क्लास से लें, फिर उसके बाद बी से लें, इस प्रकार का दिया। एक और जानकारी देना चाहूंगा, जितनी भी सब्सीडी, जो अनुदान दिया गया है वह केवीएस और सहकारी समिति के माध्यम से भुगतान किया जाता है, उनको भुगतान किया जाता है, किसानों के अनुदान की जो हिस्सा राशि है, किसान अपने आप स्वयं जमाता है, विभाग के पास न तो कोई उसके बारे में हम लोग किसी को सजेस्ट करते हैं कि फलां कम्पनी से ही आप खरीदें। यह उसका विकल्प है, यह उस