Kas/usc/21032007/1100/1a

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का इक्‍कीसवां दिवस   संख्‍या 14

 

बुधवार, 21 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुनलाल जीनगर ।

 

191. राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम के लाभ/हानि के आगार

 

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): क्‍या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य पथ परिवहन निगम के कितने आगार लाभ में व कितने हानि में चल रहे हैं? सूची सदन की मेज पर रखें ।

(2) सरकार द्वारा घाटे में चल रहे आगारों को लाभ में लाने के लिए अब तक क्‍या प्रयास किये गये ?

(3) क्‍या सरकार घाटे में चलने वाले आगार के अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करने का विचार रखती है ? यदि हां तो चित्‍तोडगढ आगार प्रबन्‍धक के विरूद्ध अब तक क्‍या कार्यवाही की गई व नहीं तो क्‍यों ?

(4) राजस्‍थान पथ राज्‍य पथ परिवहन निगम की किन किन राज्‍यों में कितनी कितनी बसें चल रही है ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(5) क्‍या यह सही है कि राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम में कर्मचारियों की कमी है ? यदि हां तो किस किस श्रेणी के कितने अधिकारी व कर्मचारी कम है ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।  

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): (1) वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में अप्रैल, 06 से जनवरी, 07 के संकलित शुद्ध लाभ हानि खाते के अनुसार निगम के 48 आगारों में से 4 आगार लाभ में व शेष 44 आगार हानि में है सूची परिशिष्‍ट 1 पर संलग्‍न है ।

(2) निगम स्‍तर पर घाटे में चलने वाले आगारों को लाभ में लाने हेतु किये गये प्रयासों का विवरण परिशिष्‍ट 2 पर संलग्‍न है ।

(3) जी नहीं । घाटे के लिए अनेक कारक उत्‍तरदायी है अंत: सिर्फ अधिकारियों को घाटे के लिए उत्‍तरदायी नहीं ठहराया जा सकता । उपरोक्‍त कारणों में से घाटे के आधार पर चित्‍तौडगढ आगार प्रबंधक के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की गई है ।

(4) वर्तमान में राजस्‍थान परिवहन निगम की बसें 11 पडौसी राज्‍यों में संचालित हो रही है, राज्‍यवार दैनिक संचालन हेतु स्‍वीकृत एकल परिचक्रों की संख्‍या दर्शाते हुए विवरण परिशिष्‍ट 3 पर संलग्‍न है ।

(5) जी हां । रिक्‍त पदों की सूची परिशिष्‍ट 4 पर संलग्‍न है ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि राजस्‍थान में 48 आगारों में से मात्र 4 आगार ही लाभ में है ऐसा धंधा कौन करता है । एक अच्‍छा व्‍यापारी, एक अच्‍छी सरकार कभी ऐसा धंधा नहीं करेगी । लेकिन जो कारण इन्‍होंने बताये हैं कि अभी भी हमारा डिपो घाटे में है और ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं जिससे यह लाभ में आ सकते हैं । वाहन उपयोगिता प्रतिदिन इन्‍होंने 10 बताये हैं । वर्ष 2003-04 में 342, 2004-05 में 346 और फिर बाद में बढते बढते यह उपयोगिता 370 हो गई फिर भी घाटे में है । ऐसे इन्‍होंने 6 पाइंट बताये हैं उनमें सारा का सारा ऐसा विवरण है जिससे यह आगार कभी घाटे में जाने ही नहीं चाहिये फिर भी यह घाटे में जा रहे हैं ।  मैं यह पूछना चाहता हूं कि क्‍या सरकार जिन अधिकारियों की वजह से जो रोडवेज को घाटे में ले जा रहे हैं और जिनकी जांच रिपोर्ट आ गई है उसके बाद भी आप कार्यवाही नहीं करना चाह रहे हैं उसके पीछे क्‍या कारण है । दूसरा पिछले वर्षों में हर साल मई जून के महीने में चित्‍तोडगढ आगार की आय अधिक हुई है लेकिन अभी वर्तमान में जो आगार प्रबन्‍धक है उसके रहते हुए यह घाटे में क्‍यों गया । तीसरा क्‍या चित्‍तेडगढ उदयपुर की जो बस है वह 16 रुपये 30 पैसे प्रति किलो मीटर के हिसाब से लाभ पहुंचा रही थी उसको 14 रुपये 33 पैसे में ठेके पर क्‍यों दिया गया । इस कारण से भी पर्टीकूलर लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्‍य से उन्‍होंने यह ठेका पद्धति की है । मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं लेकिन इतना काम होने के बाद भी यह घाटे में है । क्‍या अप्रैल मई 2006 में मैरिज सीजन में..

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण दे रहे हैं, प्रश्‍न पूछिए ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): मेरा प्रश्‍न है क्‍या 27 बसे मई 2006 में बारातों के लिये कांट्रेक्‍ट पर दी गई ? क्‍या उनका पूरा पैसा जमा हुआ और पैसा जमा नहीं हुआ, लगभग 9000 रुपये जमा नहीं हुए उसकी लेखा शाखा ने आडिट कर के उसके खिलाफ कार्यवाही करनी चाही फिर भी कार्यवाही नहीं हुई । क्‍या 100 रुपये के गबन होने पर किसी कंडक्टर या अधिकारी को निलंबित किया जाता है तो उसके 9-10 हजार रुपये के गबन करने के बाद भी उसको सस्‍पेंड क्‍यों नहीं किया गया ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण दे रहे हो आप सीधी सी बात पूछिए घाटे के कारण क्‍या है ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): चित्‍तोड में पर्टीकूलर घाटे के कारण...

श्री अध्‍यक्ष: वह इनसे पूछो ना ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): आप इसके लिये क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं ।

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, इससे जुडा हुआ मेरा प्रश्‍न है ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप उनका जवाब आने दीजिए । मंत्री जी घाटे के कारण बताइए ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, दोनों का साथ ही आ जायेगा मैं भी प्रश्‍नकर्ता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको भी मौका दूंगी, आपको भी दूंगी पहले जवाब आने दीजिए । हां बताइए, आप तो घाटे के कारण बता दो बस और बातें छोडो ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार शासन में आई है ।

श्री अध्‍यक्ष: जब से आप ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर बने हो ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): जी हां । लगभग 12 बार डीजल की कीमतें बढी हैं उसके विरुद्ध हमने किसी भी तरीके का किराया नहीं बढाया है । दिसम्‍बर, 03 में जब हम लोग आये थे उसके पश्‍चात् मैंने आपको बताया कि लगभग 12 बार डीजल की दरे बढी । जो डीजल 20 रुपये था वह आज 33 रुपये के करीब हम लोगों को मिल रहा है । महत्‍वपूर्ण जो कारण है वह डीजल की दरों में लगातार होती बढोत्‍तरी है । उस समय में और आज के समय में जो वृद्धि हुई है वह 75 प्रतिशत के लगभग हुई है और किराया 33 पैसा प्रति यात्री प्रति किलो मीटर था उसको आज हमने बढा कर 40 पैसे किया है जो कि मात्र 30-33 प्रतिशत किराया बढाया है । यह जो फर्क है एक तो किराया नहीं बढना, राजस्‍थान की जनता पर किसी तरीके का भार नहीं डालना और समय समय पर इस तरीके से डीजल में बढोत्‍तरी हो जाना यह एक मुख्‍य कारण रहा है जिसकी वजह से निगम के आगार ज्‍यादातर घाटे में गये हैं । अगर हम आंकडों को उठाकर देखें तो हमारे कार्यकाल में जो घाटा हुआ है वह बहुत कम है और जो डीजल में बढोत्‍तरी हुई है वह बहुत ज्‍यादा है ।

श्री अध्‍यक्ष: प्राइवेट वाले सब घाटे में चल रहे हैं क्‍या ?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं आपसे निवेदन कर दूं सारे ।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री जी आपकी सरकार ने भी तो डीजल पर सैस 50 पैसे प्रति लीटर लगाया है और 180 करोड़ रुपये सालाना का बोझ राजस्‍थान की जनता पर डाला है । वह उसमें कारण नहीं है क्‍या ? आपकी गवर्नमेंट से सैस हटवा दो ।

श्री अध्‍यक्ष: वह अलग प्रश्‍न है, वह आप इसके साथ जोड रहे हैं ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): .(व्‍यवधान) सैस का जो पैसा आता है वह पैसा सडकों के विकास में खर्च करते हैं उससे कोई बहुत ज्‍यादा फर्क नहीं पडा है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उससे फायदा हो रहा होगा ?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): नहीं वह तो जनता के हित में ही लग रहा है जो सैस लगाया है वह अलग से लगाया है । वह कोई रोडवेज ने नहीं लगाया है । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): रोडवेज के नहीं लगा रहा है, रोडवेज बिना सैस के डीजल ले रही है क्‍या ? (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): (व्‍यवधान) दोनों बातें कैसे कर रहे हैं आप ।

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): (व्‍यवधान) इन्‍होंने रोडवेज के घाटे के कारणों को पूछा है इसलिए मैं निवेदन करुंगा कि हमारे ऊपर लगभग 45 करोड़ रुपये प्रति वर्ष जो भार पडा है वह एक मात्र डीजल से पडा है और आपको पता है आज केन्‍द्र में किस की सरकार है, कितनी बार डीजल बढा है । 75 प्रतिशत लगातार डीजल में बढोत्‍तरी होना ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, जिन बसों में लाभ हो रहा था उनको ठेके पर क्‍यों दी ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको नहीं पुकारा है । बीच में नहीं बोले । (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगा ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, जब डीजल के भाव में बढोत्‍तरी से रोडवेज घाटे में आ रहा है तो क्‍या राजस्‍थान सरकार उस सैस को वापस लेगी क्‍या ? उस सैस को वापस लेकर राजस्‍थान रोडवेज को ...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ।


श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):  000

श्री अध्‍यक्ष: आपकी आवाज कमजोर है मैं क्‍या करूं, आपकी बात तो मुझे सुनाई ही नहीं दे रही है ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो, जिसका नाम मैंने नहीं पुकारा है उसका अंकित नहीं हो।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा है ।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा है । श्री मोहनलाल गुप्‍ता ।

 

ans/usc   11.10  1b   21.03.2007  

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, पहली प्रायोरिटी तो मुझे मिलनी चाहिये, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता हूं। मेरा प्रश्‍न है, आप मोहन लाल जी को बुला रही है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): साहब मुझे चांस दिया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): देखिये, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: सॉरी, मैंने आपका नाम देखा नहीं था। आई एम सॉरी। हां, गुप्‍ता जी एक बार बिराजिए। मोहम्‍मद माहिर आजाद। (व्‍यवधान) मूल प्रश्‍नकर्ता है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं बोल रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनके बाद बोलिये। इनके बाद पूछ ली‍जिएगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि कुल 48 आगार है राजस्‍थान में उनमें से 4 आगार तो लाभ में चल रहे हैं,44 घाटे में चल रहे हैं। जिसमें मंत्री जी के खुद के निर्वाचित क्षेत्र डीडवाना की आगार भी घाटे में चल रही है, जो इन्‍होंने अभी मंत्री बनने के बाद खोली थी कि यह बहुत आवश्‍यक है, यात्री परेशान होते हैं, आगार खुल जाएगा तो बड़ा लाभ होगा और यह होगा।

मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है, कुल मिलाकर हमारी चिंता यह है कि रोडवेज को घाटे से कैसे उबारा जाए। मैं मं त्री जी से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जो सख्‍त कदम आपने जयपुर में उठाए, आपने प्राइवेट बसों को रोका सख्‍ती से, गृहमंत्री जी का भी सहयोग रहा इसलिए यह 3 आगार सांगानेर, डीलक्‍स और जयपुर लाभ  में आई। इन 44 आगारों में भी आ इसी तरीके के सख्‍त कदम उठाये। प्राइवेट बसें तो लाभ उठा रही है1 एक बस वाल दस बस का प‍रमिट लेता है और 30-30 बस संचालित कर रहा है। रोडवेज के अधिकारियों की मिलीभगत से कर रहा है। उसको रोकोंगे तो आपका यह रोडवेज लाभ में आएगा।

दूसरा निवेदन, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं आप इनके जवाब परिशिष्‍ठ दो पढ़े, कितनी विरोधाभास बात, आप खुद जवाब में दे रहे हैं, आप अपने उत्‍तर में निगम को हानि से उबारने हेतु किये जा रहे प्रयास में, आप क्रम संख्‍या दो पर बता रहे हैं कि राज्‍य सरकार की अधिसूचना दिनांक 6 जुलाई,2006 द्वारा यात्री किराये में वृद्धि की गई है जिससे अब निगम घाटे से उबर सकता है। इसी में बिन्‍दु दस में लिख रहे हैं कि प्रतिस्‍पर्धा में टिकने हेतु युक्तिपूर्ण तरीके से किराये में कमी की जा रही है। मेरे यह समझ में नहीं आ रहा यह  नियम दे रहे हैं आप इसको क्लियरफाई करें कि एक तरफ आप वृद्धि का कारण बता रहे हैं, दूसरी तरफ कमी का भी कारण बता रहे हैं।

तीसरा निवेदन, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह करना चाहता हूं कि एक तरफ यह कह रहे हैं कि हमने तेल कम्‍पनियों से बात कर ली, उससे हमको जो सस्‍ता तेल मिलेगा  तो 4 करोड़ रूपये  प्रतिवर्ष की बचत होगी, यह उपाय आपने लिखा यह उपाय आप तीन साल पहले भी तो कर सकते थे। आज 4 करो़ड रूपये की एक साल में आपको डीजल के कन्‍ज्‍म्‍पशन से डायरेक्‍ट लेने में बचत हो रही है, आप इसकी जांच करवाइये कि यह आज से पहले दो साल में क्‍यों नहीं की या ऊपर ही ऊपर इसका कमीशन लेते रहे, अब रोड़वेज को करने के प्रयास किये जा रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, सवाल तो स्‍पेसिफिक यह है कि आप  घाटे के कारण, कितना घाटा है और रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए क्‍या कठोर प्रयास उठाएंगे वह बता दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: प्रयास तो लिख दिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रयास करने की कोशिश कर रहे हैं, करे क्‍या इन्‍होंने ? (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, वो ही जवाब दे रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो अवैध वाहनों पर(व्‍यवधान) सब ठीक हो जाएगा।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, सारे प्रश्‍न आ जाए तब जवाब दे देना।

श्री अध्‍यक्ष: वह जवाब दे रहे हैं, उसके बाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): ठीक है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नगर से आने वाले सदस्‍य ने तीन मुद्दे विशेष रूप से उठाये हैं मैं आपसे निवेदन करूं कि परिशिष्‍ट दो पर जो दूसरे नम्‍बर का पाइंट है उसके लिए  आपने यह कहा, यह बात सही है राजस्‍थान सरकार स्‍टेज केरिज के परमीट राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम को भी देती है और निजि क्षेत्र में दूसरे ओपरेटर है उनको भी देती है। यह दोनों हमारे यहां पर एक तरीके से राज्‍य सरकार के पास परिवहन विभाग में ओपरेटर के रूप में काम करते हैं, तो किराया बढ़ाने की और न्‍यूनतम रखने की सीमा राज्‍य सरकार तय करती है। जहां तक न्‍यूनतम का सवाल है उसमें राज्‍य सरकार का कोई राइडर नहीं है लेकिन अधिकतम किराये के अंदर राज्‍य सरकार राइडर तय करती है और आज राजस्‍थान के अंदर जो किराया हमने तय किया है पहले 33 पैसा, जैसा मैंने निवेदन किया, पहले 33 प्रतियात्री प्रति किलोमीटर था उसको बढ़ाकर हमने 40 पैसा किया और 40 पैसे से,दूसरी बार जिस पाइंट को आपने अभी उठाया  उसको 40 पैसे प्रति किलोमीटर प्रतियात्री को बढ़ाकर हमने 46 पैसे किया लेकिन उसके पश्‍चात भी रोडवेज ने अपना किराया अभी भी कम कर रखा है और वह लगभग 40 पैसे ले रहा है। एक फ्लेक्सिब्लिटी केबीनेट की बैठक के बाद राज्‍य सरकार ने रोडवेज को दी है वह यह है कि वह अपना राइडर तक किराया अपना स्‍वंय का घटा और बढ़ा सकता है परिस्थितियों के अनुकूल।

दूसरा पाइंट प्रतिस्‍पर्धा का आपने उठाया है, यदि प्रतिस्‍पर्धा आती है तो रोडवेज को यह अधिकार दिया है राज्‍य सरकार ने केबीनेट में फैसला लेकर कि वह अपना किराया बढ़ा और घटा सकती है। ईवन हमने तो यहां तक दिया है कि अगर डीजल की कीमते बढ़े  उसी प्रक्‍योसमेंट में वह अपना किराया बढ़ा सकते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करूं कि यह दोनों पाइंट अलग-अलग है। चूंकि राज्‍य सरकार ने उनको परमीशन दी इसलिए उन्‍होंने किराया बढ़ाया, एक किराया बढ़ना भी कारण है उसकी वजह से। जब किराया बढ़ता है तो लोड फैक्‍टर नीचे आता है और जब लोड फैक्‍टर नीचे आता है तो रेवेन्‍यू पर उसका असर पड़ता है। जिस समय डीजल बढ़ता है उस समय अगर यह किराया बढ़ाएंगे  तो निश्चित रूप से इसका असर आयेगा।

प्रतिस्‍पर्धा की बात हमने कही, आपने यह कही, इन्‍होंने यह उपाय किये हैं तीन साल में, कभी इन्‍होंने किराया बढ़ाया है तो घटाया भी है और किराया घटाने से इनका लोडफैक्‍टर बढ़ा है और रोडवेज का रेवेन्‍यू भी बढ़ा है। मैं आपसे निवेदन कर दूं कि प्रतिवर्ष हमने कोई भी तरीके का फ्लीट बढाये बगैर 100 करोड़ रूपये की आय, बिना किराया बढ़ाये  और लोड फैक्‍टर को बढाकर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रूपये की आय बढाई।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो दूसरा मुद्दा उठाया उसमें हमने यहां जयपुर के अंदर गृहविभाग के सहयोग से इस तरीके का अभियान चलाया और उसमें निश्चित रूप से सफलता मिली। 30 साला से लगातार हमारा सिंधी कैम्‍प बस स्‍टैण्‍ड था उसके सामने इस तरीके से प्राइवेट ओपरेटर रात को बस चलाते थे, उन पर पूरी बंदिश लगाकर हमने उसको रोका, उसका परिणाम (व्‍यवधान) एक मिनिट बिराजिए आप, बिराजे साहब, मेरी बात पूरी होने दीजिए। आपका जवाब दूंगा, बिराजे आप।

श्री अमराराम (धोद): हट गई तो 50 कदम दूर से चल रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): बिराजिये, मैं आपका जवाब दूंगा ना। आप बिराजिए, मैं जवाब दूंगा ना।

श्री अमराराम (धोद): सिंधी कैम्‍प के सामने से हट गई तो 50 कदम दूर से चल रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री):बैठो तो सही, उसका भी जवाब दूंगा। आप जो पूछेंगे उसका जवाब दूंगा, मेरे पास सबके जवाब है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय हमने सिंधी कैम्‍प से यह एक्‍सपेरिमेंट किया और यह माननीय नगर से आने वाले सदस्‍य ने जो मुद्दा उठाया उसके लिए में निवेदन करूं कि हमने इस तरीके के आगार और इस तरीके के जिले चिह्नित, परिवहन विभाग के मंत्री होने के नाते तय किए हैं कि कोनसे ऐसे जिले हैं जिनमें इस तरीके का संचालन हो रहा है जो रूकना चाहिये क्‍योंकि उससे राज्‍य सरकार को एक तो अगर कहीं भी अवैध तरीके का संचालन होता है तो आय की हानि होती है, दूसरी तरफ हमारे रोडवेज में भी लोडफैक्‍टर कम आता है तो उससे भी आय में गिरावट आती है। तो हमने अब अप्रैल माह से..(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आप मंत्री है, नागौर का ध्‍यान रखना..(व्‍यवधान) आपका जिला है....

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करूंगा दूसरा आपने सवाल उठाया, अब हम अप्रैल माह में जोधपुर, कोटा विशेष रूप से कोटा पूरा सम्‍भाग,जोधपुर सम्‍भाग,बीकानेर पूरा सम्‍भाग अलग-अलग सम्‍भाग में हम इस तरीके का अभियान चलाएंगे। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा माननीय गृहमंत्री जी को और गृह विभाग को कि आपने सहयोग दिया। एक बात मैं जरूर स्‍वीकार करूंगा कि परिवहन विभाग के अंदर लगभग हमारे पास 365 इंस्‍पेक्‍टर और सब इंस्‍पेक्‍टर का स्‍टाफ है उसमें भी जो राजस्‍व हमारा आता है वह उन्‍हीं पर निर्भर करता है हमारे डी.एफ एस हो या एफ एस उनके माध्‍यम से   हम पैसे का कलेक्‍शन करते हैं।                                                                                      

365 आदमियों को 32 जिलों में  अगर पदस्‍थापन करें तो इस तरीके का सम्‍भव नहीं है इसलिए हमारे के गृहविभाग का सहयोग मिलता है उसके माध्‍यम से हम रोक पाने में सम्‍भव है। 

अब की बार हम विशेष रूप से कोटा और जोधपुर प्रारम्भिक रूप से ले रहे हैं। हम अलग-अलग डिविजन बाई इस तरीके से जो अवैध संचालन हो रहे हैं उनक खिलाफ कार्य करेंगे। एक मुद्दा मैं जरूर निवेदन करना चाहूंगा, राज्‍य सरकार एक कल्‍याणकारी सरकार होती है, उसका मकसद होता है जनता को सुविधाएं देना, आज रोडवेज लगभग 48 आगारों के माध्‍यम से लगभग साढ़े सौलह लाख किलोमीटर प्रतिदिन  गाड़ी चलती है और गांव में भी जाती है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन आपसे जरूर करना चाहूंगा और सभी सदस्‍यों को बताना चाहूंगा आपने प्राइवेट से रोडवेज का कम्‍पेरिजन किया, मैं आपसे कहूंगा कि रोडवेज के अंदर और प्राइवेट के अंदर कोई कम्‍पेरिजन इसलिए नहीं हो सकता, प्राइवेट के अंदर जो लोग गाड़ी चलाते हैं चाहे वो हमारा स्‍टेज केरजि का परमिट लेकर चलाए , चाहे कान्‍ट्रेक्‍ट केरिज का परमिट लेकर चलाए, उस व्‍यक्ति के पास एक ड्राइवर होता है, न्‍यूनतम वेतन के बराबर भी उसको वेतन नहीं मिलता। उसके अलावा उसके पास एक कंडक्‍टर होता है, चाहे जहां रोक लेता है जबकि राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम स्‍वंय बस स्‍टैण्‍ड की व्‍यवस्‍था करता है, जहां पीने का पानी होता है, जहां बैठने की व्‍यवस्‍था होती है, साफ-सफाई की व्‍यवस्‍था होती है। एक गाड़ी पर लगभग 6 लोगों को लगाए रखते हैं। लगभग साढ़े बाईस हजार लोग,  कुल हमारी जो 4445 गाडियां जो चलती है, 4537 गाडि़यां जो चलती है,6 के औसत से लगभग साढ़े बाईस हजार कर्मचारी रोजगार लिए हुए हैं। उनको प्रोविडेंट फण्‍ड देना पड़ता है, उनको पेंशन देनी पड़ती है। उनको फिफ्थ पे कमीशन के ऊपर कोई इस तरीके का....(व्‍यवधान(

श्री अध्‍यक्ष: माहिर आजाद..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सैकण्‍ड सप्‍लीमेंट्री, सैकण्‍ड सप्‍लीमेंट्री...(व्‍यवधान) 

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आपने एक बात कही, डीडवाना निश्चित रूप से मेरा विधान सभा क्षेत्र है।( व्‍यवधान)

 

दुर्गा/चौहान 210307 1120 1c

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक अहम मुद्दा उठाया है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे निवेदन करना है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले सुनिये, सुनिये। आप विराजें ना।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनका उत्‍तर नहीं आयेगा तो फिर ये नाराज हो जाएंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्षजी गुप्‍ताजी को बैठा रही हैं, आपको थोड़ी बैठा रही हैं। उन्‍होंने तो गुप्‍ताजी को बैठाया है, आपको थोड़ी बैठाया है। आप तो जवाब दो। गुप्‍ताजी को बैठाया है, आप बैठ जाते हैं बारबार। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, एक समय में एक ही सदस्‍य बोले।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे आज्ञा दी थी। आपने मुझे आज्ञा दी है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले मोहम्‍मद माहिर आजाद, मूल प्रश्‍नकर्ता हैं। (व्‍यवधान) नो, मैं जिनका नाम पुकारुंगी, उन्‍हीं का अंकित करना है। (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली):  000

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा है। नो, जवाब देने की कोई आवश्‍यकता नहीं है, अंकित नहीं हो रहा है। जो बिना मेरी आज्ञा के, आसन की आज्ञा के बिना जो बोलना शुरू करेंगे, न उनका प्रश्‍न अंकित होगा, न उसका जवाब दिया जाएगा। इसलिये केवल उन्‍हीं काअंकित होगा जिनका नाम पुकारा जाएगा आसन के द्वारा। मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सप्‍लीमेंट्री मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं, एक तो आपने आयल कम्‍पनियों की जो 4 करोड़ की बचत है, उसका जवाब नहीं दिया। दूसरा मेरासवाल यह है कि आपने परिशिष्‍ठ 4 पर जो कर्मचारियों के रिक्‍त पदों की सूची उपलब्‍ध कराई है, जरा इसका अध्‍ययन करें कि आपके सहायक यांत्रिक अभियंता के 44 में से 23 पद रिक्‍त हैं। आपके जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, उनके 28 में से 22 पद रिक्‍त हैं। आपके आगार प्रबन्‍धकों के 46 में से 48 पद, यानि 60 प्रतिशत पद रिक्‍त हैं। कनिष्‍ठ अभियंता के 54 में से 44 पद रिक्‍त हैं। वरिष्‍ठ कार्यालयाध्‍यक्ष के 18 में से 12 पद रिक्‍त हैं। जब ये इतने बड़े-बड़े जो काम के अधिकारी हैं, आपके इंस्‍पेक्‍टरों के उठाकर देखें तो सहायक यातायात निरीक्षकों के 300 में से 140 पद आपके रिक्‍त चल रहे हैं। आपके सुरक्षा प्रहरियों के 200 में से 177 पद रिक्‍त हैं। तो यह यातायात निरीक्षक और दूसरे हैं जिनसे आय बढ़ती है, जो टिकट चेक करते हैं, वह तो इतने लम्‍बे समय से रिक्‍त चल रहे हैं। इनको आप कब तक भर देंगे। एक तो आप यह बता दें। एक वह मैंने आयल कम्‍पनियों का कहा कि 3 साल पहले क्‍यों नहीं आपने डाइरेक्‍ट कांट्रेक्‍ट कर लिया जो और बचत होती। उसका जवाब दे दें। अन्‍त में मेरा आखिरी सवाल यह है कि आप इन 44 जो घाटे में आगार चल रहे हैं, यहां निजी बसों को, जिनका किराया रोडवेज से कम होता है, अच्‍छी बेहतर सुविधा होती है जिनके कारण रोडवेज घाटे में चल रही है। आप गृह विभाग का या यातायात विभाग का सहयोग लेकर प्रभावी कार्यवाही करें ताकि आपका रोडवेज विभाग घाटे से उभर सके।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल जीनगर।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): 000

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चित्‍तोड़ डिपो आगार प्रबन्‍धन के द्वारा जो अनियमितताएं की गयीं, उनके विरुद्ध अब तक क्‍या कार्यवाही की गयी है, या करने का विचार है या नहीं। नम्‍बर-दो, लाभ में चलने वाले रुटों को कम दर पर ठेके पर क्‍यों दिया गया, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही होने वाली है। तीसरा, चित्‍तोड़-भीलवाड़ा, चित्‍तोड़-उदयपुर रुटों पर जो अवैध वाहन चलते हैं उनको रोकने का सरकार कब तक प्रयास करेगी। अन्‍त में मेरा सवाल है गंगरार कस्‍बे में और सोनियारा कस्‍बे में रोडवेज की लोकल बसें, हमेशा जाती रहीं, पिछले 30 साल से, अब क्‍यों बंद कर दी गयीं, ऐसे क्‍या कारण रहे। इन प्रश्‍नों का जवाब दें। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नाथूसिंह गुर्जर।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत ही शोर्ट में पूछना चाहूंगा कि क्‍या यह सही है कि आपकी जो बसें हैं वह 10-10, 15-15 साल पुरानी हैं, इसलिये उनके डीजल का एक्‍सपंडीचर और दूसरे एक्‍सपंडीचर ज्‍यादा आ रहे हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल):  000

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप बैठ जाएं। स्‍पीकर को चेलेंज नहीं कर सकते हैं। बैठ जाइये। मेरा नाम पुकार लिया, बैठ जाएं।

अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सही है कि बसें 10-10, 15-15 साल पुरानी हैं जिसके कारण, और बसों की संख्‍या कम है उसके कारण आपका खर्चा, डीजल पर और बाकी चीजों पर ज्‍यादा होता है तो एक घाटे का कारण यह है, क्‍या यह सही है। दूसरा आपके डीजल और टायर पर वेट के कारण 4 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत, टायर पर वेट हो गया। और डीजल पर 13 प्रतिशत हो गया। क्‍या यह सही है। दूसरा, जो आपके 17 कैटेगिरिज हैं, जो कंसेशनल रेट पर ट्रेवल करते हैं जिसके कारण से 25 करोड़ रुपये का आपके ऊपर भार आता है तो इन फेक्‍टर्स को आप हटाने के लिये क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं। और मेरा एक अन्तिम प्रश्‍न यह है कि आपने जो आपके पास सेंक्‍शंड स्‍टाफ है, वह है 26332, इसके अगेंस्‍ट में वर्किंग स्‍टाफ 21891 है। तो यह जो वेकेंट पोस्‍टें हैं इसके कारण से उस पर प्रभाव पड़ रहा है। एक जो मिलीभगत से, जो प्राइवेट अभी आपने कहा कि हमने किराया नहीं बढ़ाया इसके कारण, यदि आप किराया बढ़ाने की गलती करेंगे तो आपका लोड-फेक्‍टर प्राइवेट व्‍हीकल्‍स की तरफ डाइवर्ट हो जाएगा और हम और ज्‍यादा घाटे में आएंगे। तो क्‍या मिलीभगत के कारण प्राइवेट बसें और प्राइवेट व्‍हीकल्‍स चल रहे हैं जिसके कारण आपका घाटा है। कहीं तो प्रोफिट में आ गये और कहीं घाटे में चल रहे हैं। आज बीकानेर, कोटा, जोधपुर, कोई चार करोड़ से दो करोड़ घाटे में है। कोई छह करोड़, तो मेरा प्रश्‍न यह है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से...।

श्री अध्‍यक्ष: आप समाप्‍त करें। हो गया प्रश्‍न।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपके माध्‍यम से कि आप रोडवेज को घाटे से उभारने के लिये क्‍या यह सही है कि आपके प्रशासन ने ही लिखकर दिया है कि एक हजार नई बसें हमको दे दो, पुरानी बसों को अलग हटाओ, और जो पुराने सेंक्‍शंड पद हैं...।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण तो दो मत।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): तो इसको पूरा करने के लिये आप कब तक कार्यवाही करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: हां, मोहनलाल गुप्‍ता। पहले इतने प्रश्‍न पूछ लिये हैं, पहले इनका तो जवाब आ जाने दीजिये।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मेरा इनसे सम्‍बंधित ही है। आखिरी इन्‍होंने प्रश्‍न पूछ लिया। मैं यह कहना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि किसी भी कारपोरेशन में या किसी भी व्‍यापारिक संस्‍थान की दो कोस्‍ट होती है, डाइरेक्‍ट और इनडाइरेक्‍ट कोस्‍ट। मंत्री महोदय ने यह तो बता दिया कि रोडवेज की कई प्रकार की दिक्‍कतें हैं, यात्री-भाड़ा नहीं बढ़या और कई बातें हुईं। मैंने कहा आपकी जो डाइरेक्‍ट कोस्‍ट है, वह प्राइवेट वालों से ज्‍यादा आ रही है। पहली बात डीजल का आपका एवरेज बहुत कम आ रहा है। आपकी कोस्‍ट आफ रनिंग आफ बस, वह बहुत ज्‍यादा आ रही है। डीजल का एवरेज कम आ रहा है, कोस्‍ट आफ रनिंग ज्‍यादा आ रही है। आपके एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज ज्‍यादा हैं। उन एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज की वजह से प्राइवेट लोगों के पास में ..। (व्‍यवधान) बस आप ले जा रहे हैं, आपके एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज को कम करने के लिये आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं। एवरेज को बढ़ाने के लिये आप क्‍या कर रहे हैं। अन-इकोनोमिकल जो रुट्स हैं, उनको आप इकोनोमिकल रुट बनायें, उसके सम्‍बन्‍ध में आपकी क्‍या-क्‍या योजनाएं हैं। वह भी कृपया बताने का कष्‍ट करें। और क्‍या आपको यह मालूम है कि मध्‍य प्रदेश सरकार ने रोडवेज को बंद कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण मत दें और सीधा प्रश्‍न पूछें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): रोडवेज को बंद कर दिया। क्‍या ऐसा प्रस्‍ताव भी आपके विचाराधीन है कि हम इस रोडवेज को बंद करके और उसकी जगह घाटे मं चलने वाली बसें हैं, इसको बंद करके उन प्राइवेट लोगों को चालू रखें, क्‍योंकि इसका फायदा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। सुन लिया। मंत्रीजी, मंत्रीजी। (व्‍यवधान) इतने प्रश्‍न एक साथ पूछ लिये हैं, पहले जवाब देने दें।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर):  000

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अध्‍यक्ष: पहले के प्रश्‍नों का जवाब तो आने दीजिये।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): 000

श्री अध्‍यक्ष: 28 मिनट हो गये हैं, नहीं, अब आप स्‍थान ग्रहण करें। 28 मिनट हो गये हैं। अब इनके जवाब आने दीजिये। मंत्रीजी खड़े हैं जवाब देने के लिये। अंकित नहीं हो।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना):  000

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब मंत्रीजी खड़े हैं जवाब देने के लिये। नहीं, अब नहीं, गुंजल साहब, अब नहीं। आप प्रश्‍न का जवाब सुनें। जो पहले पूछे गये हैं, महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न हैं, जवाब सुनिये पहले, नो, नो। (व्‍यवधान)  मंत्रीजी जवाब दीजिये।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने आयल से सम्‍बन्धित जो बात उठाई, यह बात सही है कि हमारी सरकार आने से पहले इस तरीके का कोई नेगोसिएशन नहीं हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपके हाथ को देख लिया।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): और हम सरकार में आने के बाद हमने जो भारत सरकार की चार आयल कम्‍पनियां हैं उनसे नेगोसिएशन किया और नेगोसिएशन करके डीजल में हमने छूट प्राप्‍त की। और अब भी हम हर वर्ष्‍ं, जब नया वित्‍तीय वर्ष आयेगा तो निश्चित रूप से चारों कम्‍पनियों को बुलाकर के उनके बाकायदा टेण्‍डर इन्‍वाइट करेंगे और उसके बाद में लोएस्‍ट रेट आयेगी उसको हम इस तरीके का देंगे। इसका मैं उदाहरण देकर आपको बताना चाहूंगा कि आज 16.02.2007 को जो डीजल की रेट बाजार के अन्‍दर 33 रुपये 8 पैसे है, वही हम रोडवेज में 30 रुपये 26 पैसे में ले रहे हैं।

 

Vps-usc-21032007-1130-1d

 

अगर आप इससे पहले के आकड़े देखें और यह हमने 2004-05, 2005-06, 2006-07 में इस तरीके से किया है। यह लगभग पौने तीन रुपये के आस-पास हम जो है, बाजार दर से कम पर डीजल ले रहे हैं। इसका भी मतलब हमारे को रोडवेज को लाभ हो रहा है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने दूसरा बहुत महत्‍वपूर्ण इश्‍यू उठाया कि जो हमारे खाली पद पड़े हैं, विशेष रूप से आपने प्रशासनिक पदों की खाली की बात कही। मैंने आपसे निवेदन किया कि आज रोडवेज जो है उसकी संख्‍या लगभग 4500 के करीब है अगर हम औसत देखें तो 6 व्‍यक्ति प्रति एक बस पर हमारे पास अभी भी है। स्‍टाफ अवेलेबल है। बसें कम हैं और स्‍टाफ ज्‍यादा है इसलिए एक तो चूंकि बेन लगा हुआ है। एक्‍ट लागू है इसलिए नयी भर्तियां नहीं हुईं। दूसरा अभी भर्तियों के अन्‍दर ड्राइवर और कंडक्‍टर पर हम जरूर विचार कर रहे हैं बाकी दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों  को ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इससे तो खर्चा और बढ़ जाएगा आपका। आपका खर्चा और बढ़ जाएगा।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): थोड़ा सा। तीसरा जो विशेष रूप से ... (व्‍यवधान) नहीं, मैं आपका जवाब दे रहा हूं न, साहब। मैंने लिख रखे हैं। मैं सबका जवाब दूंगा। बीच में बोलने की जरूरत ही नहीं है। विशेष रूप से जो खाली पद हैं, चालक और परिचालक और टेक्निशियन, इस पर हम विचार कर रहे हैं और राज्‍य सरकार से परमिशन मिली तो इन भर्तियों को किया जाएगा बाकी जो प्रशा‍सनिक पद थे, जिस तरीके से एस.पी., डीवाई.एस.पी., एडिशनल एस.पी. उन लोगों को स्‍थानांतरण के बाद में हमने नहीं भरा क्‍योंकि वह एक तरीके से भार था। इंटरनल चैकिंग के माध्‍यम से हमने इस तरीके की जो चोरी हो रही थी उसको रोकने का प्रयास किया है।

दूसरा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गंगरार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने चित्‍तौड़गढ़ डिपो की बात विशेष रूप से उठायी। मैं आपसे निवेदन करूं कि आपने यह कहा कि कोई अनियमितता हुई है। मैं सदन को और गंगरार से आने वाले माननीय सदस्‍य को बताना चाहूंगा कि अगर किसी भी तरीके की अनियमितता अगर डिपो मेनेजर ने की है तो उसकी हम जांच करवाकर उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। जहां तक घाटे का सवाल है ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): कितने दिनों में करा देंगे?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अप्रैल महीने के अन्‍दर ही, विधान सभा सत्र पूरा होने, 15 अप्रैल तक अगर कोई भी तरीके की अनियमितता है, कोई भी शिकायत आयी है तो 15 अप्रैल तक हम उस अधिकारी के खिलाफ सख्‍ती से कार्यवाही करेंगे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा आपने अपने स्‍वयं के गांव, जिसका नाम ... (व्‍यवधान) नहीं-नहीं गंगरार नहीं है इनका गांव। आपका खुद का गांव कौनसा है? राशमी गांव।   

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): तीन-तीन साल हो गये हमें भी माननीय मंत्री महोदय।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): डीडवाना का भी बताऊंगा। डीडवाना की जनता ने यहां भेजा है तो डीडवाना के बारे में भी बताऊंगा। आप विराजिये। डीडवाना की जनता ने यहां पर भेजा है, डीडवाना के बारे में भी बताऊंगा।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): हमारे विधान सभा क्षेत्र में गाडि़यां नहीं चलतीं। तीन-तीन साल हो गये। तीन-तीन एम.एल.ए. ने आपको लिखकर दिया, आज तक गाडि़यां नहीं चलीं। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आप विराजिये। विराजिये।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): क्‍या विराजिये? आपके आर्डर ही नहीं चलते हैं। आपने आर्डर दिये थे वे चलते ही नहीं हैं।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): राशमी के बारे में, बसों के बारे में ... (व्‍यवधान) वे खड़े हो जाएंगे अगर आप खड़े होंगे तो। वे पीछे हमारे भी एक हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): खड़े होने दो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा? आपको किसने पुकारा? अंकित नहीं हो। कोई आवश्‍यकता नहीं है जवाब देने की। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राशमी के बारे में यह बताना चाहूंगा कि आजकल बसें अगर कोई इंटीरियल में जाती हैं और एक या दो किलोमीटर पर मुख्‍य सड़क मार्ग से अगर कोई गांव है तो वहां पर उस बस में, वह गांव में जाकर वापस आती है। 15-20 मिनट लगते हैं और जो एक्‍सप्रेस या जो सीधे जाने वाले यात्री उन बसों में नहीं बैठते हैं। यह मुख्‍य कारण है इसलिए एक या दो किलोमीटर के अन्‍दर जाने वाली बसों में हमारे लिए संचालन करना मुश्किल है फिर भी गंगरार के माननीय सदस्‍य ने बात कही है ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  30 वर्षों से गंगरार में बस जा रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): तो उस पर हम विचार करके उस बस का संचालन करेंगे, यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। दूसरा, हमारे माननीय सदस्‍य नाथूसिंहजी ने वेट के संबंध में इश्‍यू उठाया। ... (व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे-बैठे नहीं बोलेंगे। अंकित नहीं हो।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): वेट से संबंधित इश्‍यू उठाया है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वेट से संबंधित आपने इश्‍यू उठाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): क्‍या आप उस डिपो मेनेजर को हटाकर जांच करेंगे या उसको रखकर करेंगे?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): हटाकर जांच कर देंगे। उसमें क्‍या है, हटाकर जांच कर देंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यातायात मंत्रीजी, इतना ही बता दीजिए ... (व्‍यवधान) एक प्रश्‍न है इनका। माननीय सदस्‍य, एक प्रश्‍न पर 35 मिनट हो गये हैं। अं‍कित नहीं हो। माननीय सदस्‍य, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍यगण, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय मंत्रीजी, आप मोटी सी इतनी बात बता दीजिए कि 2004 में कितना घाटा था, वह घाटा आपने कम किया है या वह घाटा और बढ़ गया? बस, इतनी सी बात बता दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान)

श्री हरीसिंह रावत (भीम): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप तो मोटी बात बता दीजिए। अंकित नहीं हो रहा है। जवाब आने दीजिए पहले।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो रहा है। लेट हिम सिट। ... (व्‍यवधान) आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, एक मिनट में मैं ... (व्‍यवधान)

श्री हीरालाल (निवाई): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अध्‍यक्ष: पहले प्रश्‍न का जवाब दे रहे हैं वह। आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। आसन ने जो कहा है उसका जवाब दे रहे हैं वह। ... (व्‍यवधान) प्‍लीज, बैठिये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप एक मिनट, जवाब तो देने दीजिए। ... (व्‍यवधान) स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री अमराराम (धोद):  000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो रहा है। आप आसन से भी बड़े हो गये कि उनको जवाब नहीं आया अभी तक आसन का और आप बीच में खड़े हो गये, स्‍थान ग्रहण करिये।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपका जवाब बाद में निकलेगा। मैंने कहा स्‍थान ग्रहण करें। आपसे कह रही हूं, स्‍थान ग्रहण करें। मैं आपसे निवेदन कर रही हूं कि आप स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन का आदेश हुआ है। मैं निवेदन करूंगा कि 1998 में जब हमारे मित्र सत्‍ता में आये तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप 98 में चले जा रहे हो। ... (व्‍यवधान) 

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): तो कम्‍पेरीजन तो होगा। कम्‍पेरीजन तो होगा। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 1998 से 2007 तक का पूरा देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इतने महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न पर आप इतने आदमी खड़े हो जाते हो। ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री):... (व्‍यवधान)  आपने क्‍या-क्‍या किया, क्‍या-क्‍या उपाय किया, कितने लाभ में आये, पहले क्‍या था, दोनों स्थितियों का कम्‍पेरीजन होगा। बेलेंसशीट तो दोनों की ही बतायी जाएगी। रोडवेज ने कोई सजावटी विज्ञापन नहीं दिये हैं हमने। ... (व्‍यवधान)  रोडवेज ने हमारे आने के बाद एक भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिये गया है। यह आप असत्‍य बात कह रहे हैं। एक भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिया गया। रोडवेज के प्रचार-प्रसार के अलावा कोई भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिया। जब हमारी रोडवेज का एक अक्‍टूबर का जन्‍म दिन आता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तो हम विज्ञापन देते हैं। इसके अलावा रोडवेज कभी भी कोई सजावटी विज्ञापन नहीं देती है। आप विज्ञापन भी निकाल कर देख सकते हैं। विज्ञापन निकाल कर देख सकते हैं। जब रोडवेज का जन्‍म दिन आता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस दिन निश्चित रूप से हम अखबारों के माध्‍यम से, मीडिया के माध्‍यम से विज्ञापन देते हैं। मैं आपको कहना चाहूंगा कि हमारे आने के बाद में हमने किसी भी तरीके का कोई विज्ञापन नहीं दिया। सिर्फ सजावटी विज्ञापन वह दिये हैं जब हमारे रोडवेज का जन्‍म दिन था। ... (व्‍यवधान)

 

spp/usc/11.40/1e/21.3.2007(1)

 

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब क्‍यों दे रहे हैं, अंकित ही नहीं हो रहा। जवाब क्‍यों दे रहे हैं आप, मैंने अंकित ही नहीं करने दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी बात का उत्‍तर रह जायेगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1998-99 में 44 करोड़ का घाटा था, आगे 73 करोड़ का घाटा था, मतलब इनके पाँच साल के कार्यकाल में 44 करोड़ का घाटा निगम को हुआ।  ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): और हमारे आने के बाद में 2004-05 में...(व्‍यवधान)....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री हीरालाल (निवाई): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं आपके सत्‍ता में आने के बाद की बात कर रहा हूं, पहले की तो बात ही नहीं कर रहा। पहले तो माननीय भैरोंसिंह जी के राज में रोडवेज प्‍लस में थी। उसको अगर कोई घाटे में लेकर आया तो आपकी सरकार लेकर आई और माननीय भैरोंसिंह जी के शासन में वह प्‍लस में थी और जो 250 करोड़ रुपये का घाटा दिया, वह हमारे को विरासत में मिला। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि 2006-07 में इनके किये हुए पापों को धोकर इस वर्ष यह रोडवेज प्‍लस में आयेगी। यह विश्‍वास मैं सदन को दिलाना चाहता हूं । हम अच्‍छी स्थिति में आये हैं, राजस्‍थान की जनता को नई बसें दी हैं और आज जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो सर्वे हुआ है, वह इन तीन राज्‍यों में - उड़ीसा, तमिलनाडु और राजस्‍थान के बीच में कम्‍पीटिशन है और मुझे विश्‍वास है कि आप सब के आशीर्वाद से, जनता के सहयोग से यह राजस्‍थान राज्‍य प‍थ परिवहन निगम अव्‍वल स्‍थान पर इस वर्ष आयेगी और इस वर्ष में हम घाटे से उबरकर पहली बार दस साल बाद में फायदे में आयेंगे, यह स्थिति आज की तारीख में बनी हुई है, यह मैं हमारी विधान सभा में कहना चाहता हूं, धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रतिभा सिंह, नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): अध्‍यक्ष महोदय, पौन घण्‍टे से मेरा हाथ ऊपर है। अध्‍यक्ष महोदय, पौन घण्‍टे से मेरा हाथ ऊपर है और मुझे बहुत अफसोस है, अनुशासन की कोई कद्र नहीं है। नियम पालन करने वाले की कोई कद्र नहीं है। अनुशासन की कोई कद्र नहीं है आपके यहां, सॉरी।

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर 42 मिनट हो गये हैं और सभी के प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय जोगेश्‍वर जी, पिछले पौने तीन साल में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ही नहीं देख पायीं हाथ तो अध्‍यक्ष जी कैसे देख पायेंगी ?

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमती प्रतिभा सिंह, आपको प्रश्‍न नहीं पूछना क्‍या ?

श्रीमती प्रतिभा सिंह : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न नम्‍बर बोल दिया।

ग्राम पंचायत क्षेत्र टोडपुरा (नवलगढ़) के विकास हेतु आवंटित राशि

192. श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) सरकार द्वारा बिखरी जनजाति के विकास हेतु वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में कुल कितना बजट आवंटित किया गया ?

(2) विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में बिखरी जनजाति के विकास हेतु उक्‍त अविध में कितनी राशि व्‍यय की गयी तथा कितने व्‍यक्तियों को लाभान्वित किया गया ? प्रत्‍येक कार्य एवं राशि सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ की ग्राम पंचायत टोडपुरा में काफी संख्‍या में जनजाति की जनसंख्‍या है ? यदि हां, तो इनके लिये सरकार द्वारा कितनी कितनी राशि आंवटित की गई व नहीं , तो क्‍यों ?

(4) क्‍या सरकार ग्राम पंचायत टोडपुरा पंचायत समिति नवलगढ़ जिला झुन्‍झुनूं को बिखरी जनजाति विकास हेतु अतिरिक्‍त बजट आवंटित करने का विचार रखती   है ? यदि हां, तो कितना एवं कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा): (1) सरकार द्वारा बिखरी जनजाति हेतु वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में क्रमश: राशि 1142.83 लाख एवं 1891.31 लाख कुल 3034.14 लाख रुपये का बजट आंवटन किया गया।

(2) विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में उक्‍त अवधि में व्‍यय की गई राशि एवं लाभान्वित व्‍यक्तियों का विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(3) जी हां, उक्‍त अवधि में ग्राम पंचायत टोडपुरा के लिये राशि रू0 .013 लाख आवंटित किये।

(4) बजट की उपलब्‍धता एवं प्राप्‍त प्रस्‍तावों के अनुसार राशि आवंटित की जाती है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍मम से मंत्रीजी से पूछना चाहूंगी कि सन् 2006-07 में पूरे नवलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में आपने प्रतिभावान छात्रवृत्ति के नाम पर 3500 रुपये दिये । इतने बड़े इलाके में जहां पर पूरी जनजाति क्षेत्र के लिये एक पंचायत आरक्षित हैं, वहां आपको एक ही व्‍यक्ति मिला 3500 रुपये देने के लिये, बड़ी शोचनीय बात है तो इसका कारण बतायेंगे कि पूरे इलाके में एक ही को क्‍यों चुना ?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिभावान छात्र होगा उसको ही मिलेगा, हर किसी को तो मिलेगा नहीं। जो प्रस्‍ताव आया उसके अनुसार आवंटित कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिभा तो आपके पास आई और प्रतिभावान बचे ही कहां ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रतिभा सिंह तो राज्‍यपाल भी हैं, एक ही कैसे हैं।

श्री मुरारीलाल मीणा : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगा सन्  2005-06 और 2006-07 में 30.34 लाख रुपये कुल बजट आवंटित हुआ जनजाति बिखरी आबादी के लिये।

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है।

श्री मुरारीलाल मीणा : इसमें से टोटल खर्चा कितना हुआ, पहले कितना था और बैलेंस कितना रहा ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, नवलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में 2005-06 में तो 2 लाख 25 हजार रुपये खर्च किया और 2006-07 में मात्र 3500 रुपये खर्च किये। यह आपने एक साल में इतना भेदभाव सिर्फ इसलिए किया कि ये कांग्रेस की एसोसियेट मैम्‍बर हो गयीं ।

श्री मुरारीलाल मीणा : अध्‍यक्ष महोदय, टोटल राजस्‍थान के लिये 30.34 लाख का बजट ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह मंत्रीजी आपका उत्‍तर कह रहा हूं । 2005-06 में आपने 2 लाख 25 हजार रुपये खर्च किये और 2006-07 में मात्र 3500 रुपये खर्च किये। आप राजनैतिक आधार पर भेदभाव कर रहे हो और जो कांग्रेस से जुड़े हुए सदस्‍य हैं, उनके क्षेत्र की उपेक्षा कर रहे हो आप ।

एक माननीय सदस्‍य : यह आरोप असत्‍य है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आपका उत्‍तर कह रहा हूं । ..(व्‍यवधान)..

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मंत्री महोदय, आपके दिये आंकड़े इस तथ्‍य की पुष्टि कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)....

श्री मुरारीलाल मीणा :  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सारे ट्राइबल की उपेक्षा हो रही है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि 30.34 लाख रुपये दोनों सालों में आंवटित हुआ, उसमें से पूरे राजस्‍थान में कितना खर्च हुआ और बैलेंस कितना रहा और क्‍यों रहा ?

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्षजी, क्‍या सरकार के पास बिखरी हुई आबादी ...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने जीतमल खांट का नाम पुकारा है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष जी, मंत्रीजी यह बतायें कि ग्राम पंचायत टोडपुरा में मात्र 13 हजार रुपये खर्च किये हैं । मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि ग्राम पंचायत टोडपुरा में आदिवासी परिवारों की कितनी संख्‍या है ?

श्री अध्‍यक्ष: आदिवासी नहीं, जनजाति हैं। आदिवासी नहीं हैं वहां ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): जनजाति हैं, और एक परिवार के हिस्‍से में कितनी राशि आती है, यह आप बता दें।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष जी, यह आपका कहना कि 13 हजार रुपये किये, यह 1300 रुपये हैं और टोडपुरा में कुल जनसंख्‍या ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): यह तो बहुत बड़ी तकलीफ है 13 हजार के बजाय 1300 रुपये हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनो तो सही।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): टोडपुरा में कुल जनसंख्‍या 4,932 हैं, उसमें जनजाति की हैं 1281, एक गांव और पड़ता है इस पंचायत में किरोड़ी, जिसके अंदर 1526 कुल जनंसख्‍या और उसमें 56 मात्र जनजाति में और इसलिए जो हिस्‍सा राशि जो को-ऑपरेटिव संस्‍था की सदस्‍य बनने को देना था, वह पूरी पीछे 1 से 26 तक जितने भी नाम हैं, चाहें तो मैं पढ़ दूं, यह पूरी की पूरी हिस्‍सा राशि इनको जमा करवा दी है।

श्री अध्‍यक्ष: डॉ.पी.पी.जोशी।   

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में दो तरह के आदिवासी हो जायेंगे। एक वह आदिवासी जो ट्राइबल सब प्‍लान में रहते हैं, दूसरे आदिवासी, जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं। क्‍या मंत्री महोदय यह बतायेंगे कि जो आदिवासी ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं, खास तौर से मावली, कुम्‍भलगढ़, गोगुन्‍दा और नाथद्वारा और बहुत-से क्षेत्र हैं, बूंदी भी हैं वह जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहने वाले आदिवासी हैं उनकी संख्‍या लगभग 12 लाख से ज्‍यादा हैं। क्‍या राजस्‍थान सरकार को बिखरी हुई जनसंख्‍या, जो आदिवासी की है, वह जनसंख्‍या, उन जनसंख्‍या के आधार पर पैसे का अलोकेशन करने का विचार रखती हैं ?

श्री अध्‍यक्ष: यह तो अलग से प्रश्‍न है आपका ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसके अंदर है। बिखरी जनसंख्‍या यह हमारी सरकार की बता रहा हूं। बिखरी जनसंख्‍या में राजस्‍थान सरकार और भारत सरकार को पैसा मिलता है । यह राजस्‍थान सरकार और भारत सरकार लिखा है इसमें से केवल मात्र 20 करोड़ रुपये करते थे 12 लाख आदमी के हिस्‍से में 1500 रुपये दे रहे हैं आप तो नोन ट्राइबल इलाके में जितने आदिवासी हैं, उन आदमियों के 100 रुपये हिस्‍से आयेंगे और राजस्‍थान में दो तरह के आदिवासी हो जायेंगे । इससे आप भला नहीं कर पायेंगे। इसलिए बिखरी हुई जनसंख्‍या और माडा में रहने वाली जनसंख्‍या के लिये पैसे की व्‍यवस्‍था करें।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि क्‍या सरकार के पास उन आदिवासियों के लिये कोई प्‍लान है जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं, जो छितरी हुई आबादी में हैं । हमारे यहां 32 हजार की आबादी है आदिवासियों की और उनके लिये क्‍या प्‍लान है ? क्‍या आप ट्राइबल सब प्‍लान में रहने वाले आदिवासी और उस जनरल कास्‍ट की जगह रहने वाले आदिवासियों में भेद करना चाहते हैं । आखिर आके पास उसके लिये क्‍या प्‍लान है ? क्‍या वह ऐसे का ऐसा रहेगा । आज जनजाति के लिये सारा का सारा प्‍लान है। कहीं पर भी जनजाति का व्‍यक्ति होगा, वह लाभ उठा सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण नहीं दें, प्रश्‍न पूछें।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): अगर अनुसूचित जाति का व्‍यक्ति हमारे एरिये में है, उसको कोई लाभ नहीं मिल सकता है, उसके लिये किस प्रकार की व्‍यवस्‍था आप करने जा रहे हैं। 

 

Msr/usc/1150/1f/21032007

 

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, आप प्रश्‍न पूछिये। भाषण दे रहे हैं आप।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): और अनुसूचित जनजाति का व्‍यक्ति हमारे एरिया में है उसको कोई लाभ नहीं मिल सकता। किस प्रकार की व्‍यवस्‍था आप करने जा रहे हैं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बिखरी क्षेत्र और मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भी इस पर चिंता जाहिर की है कि बिखरी माडा, टाडा क्षेत्र में रहने वाले ऐसे जनजाति भाइयों के लिए राशि और उस पर व्‍यय कम किया जा रहा है, इनके लिए क्‍या होगा?

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): नहीं, माननीय मंत्री महोदय, मैं माडा, टाडा की बात नहीं कह रहा हूं, माडा टाडा के अलावा दूसरी आबादी और है। माडा, टाडा में हमारे यहां दो विलेज हैं। केवल डबोक अकेले में 1500 आदीवासी हैं और नाहरमगरा में 2500 लोग हैं जो माडा और टाडा में नहीं आते हैं उनके लिए आपके पास क्‍या प्‍लान है?

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो सुन नहीं रहे हो आप और खड़े हो जाते हो बीच में।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माटा, टाडा के अन्‍दर बिखरी योजना के अन्‍तर्गत भी हम ने राशि का प्रावधान इस बार किया है। मैं मुख्‍यमंत्रीजी को बहुत-बहुत आभार, धन्‍यवाद आप सब की ओर से देना चाहूंगा कि पहली बार बहुत अच्‍छा बजट, एक करोड़ 54 लाख का बिखरी जाति के लोगों के लिए दिया है और इसलिए मैं सोच रहा हूं कि इसमें बहुत कुछ, आपके जितने भी प्रस्‍ताव आयेंगे तो बजट की उपलब्‍धता के आधार पर इसमें लेकर आयेंगे। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप क्‍या बात कर रहे हो? आपका टोटल ट्रायबल सब प्‍लान का कितना पैसा है? महाराष्‍ट्र पैटर्न के हिसाब से दस डिपार्टमेंट का आपका यह डेढ़ परसेंट पैसा आ रहा है। आपका बजट है करीब 400, 500 करोड़ रुपये का जो नोन ट्रायबल में रहते हैं, मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिड्यूल्‍ड कास्‍ट का आदमी किसी भी जगह रहे उसको पूरा फायदा मिलता है लेकिन ट्रायबल जो है एस.टी. उसमें ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा जो आदिवासी रह रहा है  उसको वो लाभ नहीं मिल रहा, ना व्‍यक्तिगत लाभ मिल रहा है ना एरिया डवलपमेंट का लाभ मिल रहा है।

क्‍या राजस्‍थान सरकार नोन ट्रायबल में रहने वाले राजस्‍थान के जो ट्रायबल हैं, चाहे वो माडा में आएं चाहे स्‍केटर्ड पापुलेशन में आएं चाहे नहीं आएं, उन ट्रायबल को भी एस.सी. की तरह लाभ देने के लिए योजना बनानी रही है? एक करोड़ तो 12 लाख में कोई पैसा ही नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार को सिद्धांतत: इस बात की स्‍वीकृति देनी पड़ेगी कि ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा जो ट्रायबल हैं उन सब को भी वह लाभ मिले। यह सरकार की मंशा है या नहीं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जब शासन में थे तब भी ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम शासन में थे जब आरती उतार रहे थे। यह 1986 में बिखरी वाला ही हमने किया, यह माडा वाला हमने ही किया, खड़े होकर बताओ सरकार, बिना जानकारी के बात नहीं करते हैं।

राजस्‍थान सरकार को और माननीय कनकमलजी, आप काबिल मंत्री हैं, आप से आशा करते हैं कि राजस्‍थान सरकार से सिद्धांतत: फैसला कराएं कि राजस्‍थान सरकार ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा भी राजस्‍थान में जो ट्रायबल रह रहा है चाहे वो माडा में आता है चाहे बिखरी जनसंख्‍या में आता है या नहीं आता है, व्‍यक्तिगत लाभ की योजना भी उन सब आदिवासियों को मिलेगी, इसका हम एलोकेशन करेंगे, यह घोषणा करिये आप।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी चिंता वाजिब है और उसके अनुसार आप जब सरकार में थे उस समय 43 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति और अभी भी 81 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति का प्रावधान हमने रखा है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे मूल प्रश्‍नकर्ता के तो कोई जवाब ही नहीं आ रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतनी देर से हाथ उठा रखा है, आप देख भी नहीं रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी खड़े हैं न, तो मंत्रीजी का जवाब तो सुन लो। ...(व्‍यवधान)... बैठ जाइये आप, जवाब सुन कर फिर ...(व्‍यवधान)...

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और उसके अनुसार ही पिछले समय में उसके अनुसार सभी को लाभ मिलेगा। इसके अलावा छात्रावासों में जितने भी जनजाति छात्र हैं इनको व्‍यक्तिगत लाभ में और छात्रावास में रहने वाले का और जितने भी हैं उनको लाभ अच्‍छी तरह से मि&#