Spp/usc/3b/1310/28022006

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  5    बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का प्रथम दिवस   संख्‍या  1

 

 

मंगलवार,

28 फरवरी, 2006

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1316 बजे

विधान सभा भवन,जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

राष्‍ट्रीय गीत

 

वन्‍दे मातरम्वन्‍दे मातरम्

सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्

शस्‍य श्‍यामलाम् मातरम्वन्‍दे मातरम्

शुभ्र ज्‍योत्‍स्‍ना पुलकित या‍मिनी।

फुल्‍ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनी

सुहासिनी सुमधुर भाषिणी 

सुखदाम् वरदाम् मातरम्

वन्‍दे मातरम्वन्‍दे मातरम्

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ आर्डर। गवर्नर साहब की स्‍पीच के बाद माननीय सैक्रेटरी साहब ने आकर हाउस में यह अनाउंस किया कि सदन की कार्यवाही आधे घण्‍टे तक स्‍थगित की जाती है।

अनेक माननीय सदस्‍य: कहां हैं ?

डॉ.सी.पी.जोशी: आप मेरी पूरी बात सुन लें पहले। अध्‍यक्ष महोदय, सदन की जो गरिमा है, सदन की जो परम्‍परा है, सदन के जो नियम हैं, उन नियमों में केवल मात्र यह कहना ही काफी था कि गवर्नर साहब जा चुके हैं। आधे घण्‍टे की घोषणा करने का मतलब यह है कि जो स्‍पीकर के अधिकार हैं वह यहां स्‍पीकर ने अपने अधिकार डेलीगेट कर दिये हैं । मैं समझता हूं कि स्‍पीकर अपने अधिकार को डेलीगेट नहीं कर सकता । सदन की कार्यवाही कब प्रारम्‍भ होगी, कब खत्‍म होगी, या तो माननीय अध्‍यक्ष ही घोषणा कर सकते हैं और परम्‍परा यह है कि आपने इस बुलेटिन में लिख रखा है, इसमें है कि सदन कब शुरू होगा, मैं समझता हूं कि सैक्रेटरी साहब को इसके अलावा कहने की आवश्‍यकता नहीं थी । मैं नहीं जानता कि आपने इनको निर्देश दिये कि नहीं, पर इन परम्‍पराओं का निर्वहन होना चाहिये, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: इतना सफि‍शिएंट था कि राज्‍यपाल महोदय पधार चुके हैं। अब आगे जो बोला गया है वह एक एडिशनल होगा तो इसमें कोई (व्‍यवधान) एक मिनट सुन लें। आप पूरी बात तो सुनिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आप कौन हो ? यह सवाल किया है स्‍पीकर साहब से और आप कह रहे हो, हो गया।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: आप पूरी बात तो सुन लीजिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: सदन में यह गलत परम्‍पराएं मत डलने दो। आपको बैस्‍ट पार्लियामेन्‍टेरियन का खिताब दे दिया इसका मतलब आपको यह अधिकार नहीं मिल गया। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सही कहा है। श्रीमान सैक्रेटरी महोदय को केवल यह कहना था कि महामहिम राज्‍यपाल महोदय प्रस्‍थान कर गये हैं। यह सदन उसके आधे घण्‍टे बाद चलेगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। मैंने सुन ली आपकी बात।

 

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डा.एन.एस.गुर्जर: मेरी बात पूरी कर लेने दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने सुन ली। आसन व्‍यवस्‍था दे देगा। आपकी सुन ली बात।

डा.एन.एस.गुर्जर: मैं मेरी बात पूरी कर लूं एक मिनट में, आप इजाजत दें, मैं पूरी बात कर लूं

श्री अध्‍यक्ष: आप बेस्‍ट लेजिस्‍लेटर हैं, आप इस तरह जिद न करें।

डा.एन.एस.गुर्जर: नहीं, मैं यह कह रहा हूं कि ऐसा बोला नहीं है। वह जो बोला नहीं है वह कोट किया है।

एक माननीय सदस्‍य: वह आपने सुना नहीं होगा।

श्री अध्‍यक्ष: आसन सक्षम है जवाब देने में। आसन व्‍यवस्‍था देने में सक्षम है। कृपया स्‍थान ग्रहण करें। आसन सक्षम है व्‍यवस्‍था देने में, माननीय सदस्‍यगण।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला: अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, मुझे कुछ कहना है।

श्री अध्‍यक्ष: अब देखिये

डा.बुलाकीदास कल्‍ला: आपकी इजाजत हो तो कह दूं। मैं आपकी बात ही कह रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है। ...(व्‍यवधान)... अब आप कह दीजिए क्‍या कहना चाहते हैं।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला:अध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो एतराज उठाया वह तो सही है लेकिन मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहूंगा यह बात आपको चैम्‍बर में कहनी चाहिए, विधान सभा के सदस्‍यों के बारे में यहां मुद्दे नहीं उठाये जा सकते लेकिन जो उन्‍होंने पाइण्‍ट आउट किया है वह बिल्‍कुल सही है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा):अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप क्‍या कहना चाहते हैं ?

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, अपनी बात कहने का मेरा अधिकार है। सदन के अन्‍दर कोई भी घोषणा करने का काम विधानसभा के स्‍पीकार का है। मिलेगा, इसका मतलब, मिलने का मतलब हम यहां से जायेंगे। यह सूचना देने का अधिकार भी सैक्रेटरी को नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको शायद गलत फहमी हो गयी है। सूचना देने का अधिकार सचिव को है, स्‍थगित करने का नहीं है। स्‍थगित करने का बोले भी नहीं हैं.।..(व्‍यवधान)...

डा.सी.पी.जोशी: बोले हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनें तो सही।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): रिकार्ड तलब कर लिया जाए, बोले हैं।

डा.सी.पी.जोशी: आपने रिकार्ड को चैक नहीं किया। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बोले हैं ? मैं बताऊं न क्‍या बोले हैं।

डा.सी.पी.जोशी: आप रिकार्ड चैक करें, अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हमारे कान खराब थोड़े ही हो गये... (व्‍यवधान)...साफ सुना है कि सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है, यों बोले हैं यह।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, निर्णय देने से पहले आपको रिकार्ड चैक करना चाहिए। आप खुद ही गलत परम्‍परा डाल रहे हैं। आपने रिकार्ड चैक किया क्‍या, अध्‍यक्ष महोदय ?

एक माननीय सदस्‍य: रिकार्ड देख लें, रिकार्ड था ही नहीं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, आपने रिकार्ड चैक किया क्‍या ? ना आप हाउस में थे, ना रिकार्ड चैक किया।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह तय हुआ है...(व्‍यवधान)...यहां हाउस में आसन को धमका रहे हैं यह और फिर कहते हैं मुख्‍य सचेतक बोलते हैं। अब आप ही आसन को धमका रहे हैं तो बीच में बोलना पड़ता है फिर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: कौन धमका रहा है ? ऐसी भाषा क्‍यों बोलते हो आप ? आसन से निवेदन किया है कि आसन का जो अधिकार है उनका हनन नहीं होना चाहिए।

श्री महावीर प्रसाद जैन: अब कल आपने स्‍वीकार किया है...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद: केवल यह सूचना दे देते कि महामहिम राज्‍यपाल महोदया प्रस्‍थान कर गयी हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन: नहीं, कहा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: स्‍थगित करने का अधिकार केवल स्‍पीकर को है, यह दूसरे को नहीं है। आप लोग तो थे ही नहीं, आप लोग तो सो रहे थे। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण।...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: स्‍थगित नहीं बोला और यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है जिसके लिए हाउस का समय जाया किया जाए।

श्री टीकमचंद कान्‍ (सिवाना): सदन आधे घंटे बाद पुन: मिलेगा, यह बोला न कि स्‍थगित किया जाए।

श्री अशोक बैरवा 'खण्‍डार' (खंडार): मिलेगा भी नहीं बोला।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप क्‍यों खड़े हैं ? आप बीच में नहीं बोलिये

        माननीय सदस्‍यगण, सूचना देने का अधिकार सचिव का है और उन्‍होंने केवल सूचना दी कि आधे घंटे बाद मिलेंगे, उन्‍होंने स्‍थगित करने का नहीं कहा। जो शब्‍द उन्‍होंने कहे...

डा.सी.पी.जोशी: यह अधिकार भी इनको नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, यह अधिकार भी नहीं है। आप गलत परम्‍पराएं डाल रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय, यह अधिकार भी नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: सचिव को सूचना देने का अधिकार है।

डा.सी.पी.जोशी: यह अधिकार भी नहीं है, सचिव को यह अधिकार नहीं है गवर्नर की स्‍पीच के अन्‍दर। अध्‍यक्ष महोदय, गलत परम्‍परा डाल रहे हैं गवर्नर की स्‍पीच के अन्‍दर। गवर्नर की स्‍पीच के अन्‍दर गवर्नर जब अन्‍दर आते हैं तब गवर्नर का मार्शल कहता है कि 'माननीय सदस्‍य' और जब वो बाहर जाते हैं तब यहां आकर खाली सेक्रेटरी कहता है कि अवर्नर जा चुके हैं बाकी इसके अलावा कोई अधिकार नहीं है। आप गलत परम्‍परा डाल रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि आप सीनियर पार्लियामेंटेरियन हैं और आप नौ बार विधान सभा में रहे हैं, आपने इतने गवर्नर के भाषण सुने हैं, यह अधिकार सेक्रेटरी को नहीं है। आप व्‍यवस्‍था जो भी दें लेकिन कम से कम भगवान के लिए गलत परम्‍पराओं का निर्वहन नहीं करें।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। जो कुछ पूर्व सदन में और जो कुछ भी होता है और जो विधेयक पारित होते हैं उनकी सूचना भी यही देते हैं। सचिव ही देता है उनकी सूचना। सचिव को सूचना देने का अधिकार है।

डा.सी.पी.जोशी: गवर्नर का भाषण उससे गाइड नहीं होता। अध्‍यक्ष महोदय, गवर्नर के भाषण के बाद राष्‍ट्रगान होता है। अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह कहते हुए तकलीफ है, गवर्नर के भाषण के बाद हाउस असेम्‍बल होता है, राष्‍ट्रगान होता है। गवर्नर के भाषण के पहले राष्‍ट्रगान नहीं होता है। इसका मतलब यह है कि गवर्नर के भाषण की, कांस्‍टीट्यूशन में जो तरीका है, गवर्नर आकर हाउस को एड्रेस करेगा, एड्रेस करने का क्‍या तरीका है वह भी इसमें लिखा हुआ है, 'मेज पार्लियामेंट' में लिखा हुआ है, कश्‍यप की किताब में लिखा हुआ है कि गवर्नर के एड्रेस में क्‍या-क्‍या चीजें एड्रेस करनी है। इसलिए मेहरबानी कर के, अध्‍यक्ष महोदय, आप ऐसी परम्‍पराओं का यहां निर्वहन नहीं करें और मैं आपको फिर निवेदन करना चाहता हूं कि आप चैक कर लें, उन्‍होंने आकर कहा है कि गवर्नर साहब जा चुके हैं, हम आधे घंटे बाद मिलेंगे तो मिलेंगे कहने का अधिकार उनको नहीं है। हम यहां से उठ कर जाएं, यह काम करने का उनका अधिकार नहीं है। यह सूचना देने का अधिकार है कि गवर्नर साहब जा चुके हैं लेकिन आधे घंटे बाद हम मिलेंगे, इसका मतलब हम को डाइरेक्‍शन देने का अधिकार सेक्रेटरी को नहीं है। आप डाइरेक्‍शन दे सकते हैं, हम को बाहर निकाल सकते हैं लेकिन यह अधिकार उनको नहीं है।

 श्री अध्‍यक्ष: यह सदन कुछ परम्‍पराओं से चलता है और पिछली बार भी यही हुआ था कि आधे घंटे बाद मिलेंगे। यह इन्‍होंने पिछली बार भी सूचना दी थी।

डा.सी.पी.जोशी: पहली बार की गलती को रिपीट करेंगे, अध्‍यक्ष महोदय। अध्‍यक्ष महोदय, यह और गलत परम्‍परा है। यदि पिछली बार गलत हो गया और राइट टाइम पर पाइण्‍ट आउट किया है तो वह परम्‍परा उदाहरण नहीं हो सकती। जब हम पाइण्‍ट आउट करेंगे तब आपको ठीक करना पड़ेगा। परम्‍परा पिछली बार ऐसी हो गयी इसलिए गलती करते जायेंगे यह भी ठीक परम्‍परा नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: पिछली बार तो यही नहीं कहा था कि महामहिम राज्‍यपाल महोदया आ रही हैं। लोग इधर-उधर भाग रहे थे, आपने कहा सुना नहीं होगा।

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, परम्‍परा तो यह भी है कि राज्‍यपाल महोदय का जब अभिभाषण हो तो शोर-शराबा नहीं होना चाहिए, उस समय बीच में माननीय सदस्‍य बोल रहे थे तो नियमों के ज्ञाता तो कम से कम इस तरह का व्‍यवहार नहीं करें सदन में।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: चमचागीरी छोड़ दो।

श्री रामप्रताप का‍सनिया: मैं चमचागीरी करने का आदी नहीं हूं, मुझे कोई भय नहीं है, मेरा काम चमचागीरी नहीं करना है...(व्‍यवधान)... जनता ने जिताया है, इसलिए तो कह रहा हूं।

सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि

श्री अध्‍यक्ष: सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि।

        सचिव, विधान सभा राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण की प्रति सदन की मेज पर रखेंगे

        सचिव, विधान सभा गत सत्र में पारित उन विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखेंगे जिन पर राष्‍ट्रपति महोदय/राज्‍यपाल महोदय की अनुमति प्राप्‍त हो चुकी है।

राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण

सचिव (राजस्‍थान विधान सभा): महोदय, मैं राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण की प्रति सदन की मेज पर रखता हूं।

राष्‍ट्रपति महोदय द्वारा अनुमति प्राप्‍त विधेयक

        महोदय, मैं गत सत्र में पारित निम्‍नांकित विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखता हूं:- (अ) राष्‍ट्रपति महोदय द्वारा अनुमति प्राप्‍त विधेयक:-(1)    राजस्‍थान किराया नियंत्रण (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2005

राज्‍यपाल महोदय द्वारा अनुमति प्राप्‍त विधेयक

        (ब) राज्‍यपाल महोदय द्वारा अनुमति प्राप्‍त विधेयक:-(1) राजस्‍थान कृषि उपज मण्‍डी (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2005

   (2)  राजस्‍थान सिविल सेवा (सेवा मामलों के लिए अपील अधिकरण) (द्वितीय     संशोधन) विधेयक, 2005

   (3)  राजस्‍थान किराया नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2005

अध्‍यादेश

श्री अध्‍यक्ष: अध्‍यादेश। श्री घनश्‍याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री, अध्‍यादेश सदन की मेज पर रखेंगे

श्री घनश्‍याम ‍तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं 1. राजस्‍थान तकनीकी विश्‍वविद्यालय अध्‍यादेश, 2005 (वर्ष 2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-1) एवं2. राजस्‍थान संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय (नाम परिवर्तन) अध्‍यादेश, 2006 (वर्ष 2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-3) सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रताप सिंह सिंघवी, स्‍वायत्‍त शासन राज्‍य मंत्री अध्‍यादेश सदन की मेज पर रखेंगे

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (स्‍वायत्‍त शासन राज्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं 1.राजस्‍थान नगरपालिका (संशोधन) अध्‍यादेश, 2005 (वर्ष 2005 का अध्‍यादेश संख्‍या-3) एवं2. राजस्‍थान सम्‍पत्ति विरूपण निवारण अध्‍यादेश, 2006 (वर्ष 2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-2) सदन की मेज पर रखता हूं।

        अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रक्रिया के नियम 63(2) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान सम्‍पत्ति विरूपण निवारण अध्‍यादेश 2006 (2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-2) को जारी करने के कारणों का विवरण भी सदन की मेज पर रखता हूं।

सूचना

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मुझे सदन को सूचित करना है कि राजस्‍थान विधान सभा में इंडियन नेशनल कांग्रेस के विधायकों द्वारा सर्वसम्‍मति से मंडावा जिला झुन्‍झुनूं निर्वायन क्षेत्र से निर्वाचित श्री रामनारायणजी चौधरी को उक्‍त विधायक दल का नेता चुने जाने पर उन्‍हें प्रतिपक्ष दल के नेता के रूप में दिनांक 27 जनवरी, 2006 को मान्‍यता प्रदान कर दी गयी थी।

 

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   आसन की ओर से भी माननीय प्रतिपक्ष के नेता को बधाई। माननीय सदस्‍य गण..(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: इनकी नियुक्ति के बहुत दिन बाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको चार्ज दिया गया। बधाई है आपको।

श्री अध्‍यक्ष: इनकी नियुक्ति के फौरन ही बाद इनको चार्ज दे दिया गया था, 27 जनवरी को। आपको गलत फहमी हो रही है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: अध्‍यक्ष महोदय, एक बार आपकी घोषणा के बाद हमने तो तालियां बजाई हैं। वह शांत रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब थोड़ा गंभीर हो जाइये।

श्री हरिमोहन शर्मा: आपने तो सेज के मामले में मुख्‍य मंत्री के लिए भी तालियां बजाई हैं। आप तो तालियां बजाना जानते हो।

श्री अध्‍यक्ष: आज आपने तो खो दिया आसन का...(व्‍यवधान)

 

शोकाभिव्‍यक्ति

 

      माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर मैं गत दिनों दिवंगत हुए भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति श्री के.आर.नारायणन, श्री शरत चन्‍द्र सिन्‍हा, पूर्व मुख्‍यमंत्री, असम, श्री जॉन बास्‍को जसोकी, पूर्व मुख्‍यमंत्री, नागालैण्‍ड, श्री पी.एम.सईद, केन्‍द्रीय मंत्री, श्री मधु दण्‍डवते, पूर्व केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री एवं समाजवादी नेता, कुवैत के अमीर शेख जबेर अल अहमद अल जबेर अल सबाह तथा इस विधान सभा के पूर्व सदस्‍य श्री उदयराम धाकड़, श्री मोहनलाल छंगाणी, श्री दामोदरदास आचार्य, श्री रामलाल गुंजल और श्री मनोहर कोठारी तथा जम्‍मू कश्‍मीर में आए भूकम्‍प से मारे गये व्‍यक्तियों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं।

      पूर्व राष्‍ट्रपति श्री कोचेरिल रमण नारायणन का जन्‍म 27 अक्‍टूबर, 1920 को केरल के कोटटायम जिले के उजहवूर ग्राम में हुआ। आपने लंदन स्‍कूल आफ इकोनोमिक्‍स से बी.एस.सी.(इकोनोमिक्‍स) तथा ट्रावनकोर विश्‍वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्‍य में एम.ए. की उपाधि प्राप्‍त की।

      श्री नारायण आठवीं, नौवीं तथा दसवी लोक सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए। आठवीं लोक सभा के कार्यकाल में आप दिसम्‍बर,1984 से सितम्‍बर,1985 तक केन्‍द्र सरकार में योजना राज्‍य मंत्री ,सितम्‍बर, 1985 से अक्‍टूबर, 1986 तक विदेश राज्‍य मंत्री तथा अक्‍टूबर, 1986 से दिसम्‍बर, 1989 तक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री रहे। आप भारतीय विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के उपाध्‍यक्ष भी रहे। श्री नारायणन 21 अगस्‍त, 1992 को भारत के उप राष्‍ट्रपति निर्वाचित हुए तथा फिर आप राष्‍ट्रपति निर्वाचित होने तक इस पद पर आसीन रहे। इस दौरान आप राज्‍य सभा के पदेन सभापति भी रहे। श्री नारायणन 25 जुलाई,1997 से 25 जुलाई,2002 तक भारत के राष्‍ट्रपति पद पर आसीन रहे। राजस्‍थान विधान सभा के लिए यह गर्व की बात है कि इस नवीन भवन का लोकार्पण 6 नवम्‍बर,2001 को राष्‍ट्रपति श्री नारायणन के कर कमलों से सम्‍पन्‍न हुआ।

      बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री नारायणन ने वर्ष 1944-45 में दि हिन्‍दू तथा टाइम्‍स आफ इण्डिया समाचार पत्रों से अपने व्‍यावसायिक जीवन की शुरूआत की। आप 1949 में भारतीय विदेश सेवा में नियुक्‍त हुए तथा आपने रंगून,टोक्‍यो, लंदन, केनबरा तथा हनोई स्थित भारतीय दूतावासों में विभिन्‍न पदों पर कार्य किया। आप थाइलैण्‍ड, टर्की, चीन तथा संयुक्‍त राज्‍य अमरीका में भारतीय राजदूत रहे। श्री नारायणन 1976 में विदेश मंत्रालय के सचिव भी रहे। शिक्षाविद श्री नारायणन जनवरी, 1979 से अक्‍टूबर, 1980 तक दिल्‍ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के कुलपति रहे। आपने अनेक अन्‍तरराष्‍ट्रीय शिष्‍टमण्‍डलों में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया।

      दृढ़ और स्‍वतंत्र फैसलों के लिए चर्चित श्री नारायणन ने संविधान की सीमा में रहते हुए अनेक स्‍वस्‍थ परम्‍पराएं शुरू कीं। आपने राष्‍ट्रपति के पद पर रहते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय किए। अनेक संस्‍थाओं के संस्‍थापक तथा अध्‍यक्ष रहे श्री नारायणन विभिन्‍न प्रतिष्ठित पुरस्‍कारों के लिए बनाई गई ज्‍यूरी के अध्‍यक्ष भी रहे। विदेश नीति पर गहरी पकड़ रखने वाले श्री नारायणन की इंडिया एंड अमरीका एस्‍सेज इन अंडरस्‍टेण्डिंग, नान अलाइनमेंट इन कंटेम्‍परेरी इंटरनेशनल रिलेशन्‍स, इमेजेज एण्‍ड इनसाइट्स तथा नेहरू एण्‍ड हिज विजन पुस्‍तकें प्रकाशित हुईं। विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में आपके सामाजिक, राजनैतिक, अन्‍तरराष्‍ट्रीय तथा शैक्षिक विषयों पर अनेक आलेख भी प्रकाशित हुए। वर्ष 1998 में आपको प्रतिष्ठित वर्ल्‍ड स्‍टेद्समैन अवार्ड से सम्‍मानित किया गया। आपको विश्‍व भर के विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियां व सम्‍मान प्रदान किये गये। श्री नारायणन के निधन से देश को अपूरणीय क्षति हुई है।

      श्री के.आर.नारायणन का दिनांक 9 नवम्‍बर, 2005 को निधन हो गया।

      असम के पूर्व मुख्‍यमंत्री श्री शरत चन्‍द्र सिन्‍हा का जन्‍म दिनांक 1 जनवरी, 1914 को असम के अविभाजित गोलपाड़ा जिले के चापर ग्राम में हुआ। आपने कॉटन कालेज से बी.एस.सी. तथा बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय से विधि स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की।

      श्री सिन्‍हा असम विधान सभा के लिए वर्ष 1946,1962,1972,1978 तथा 1985 में पाँच बार विधायक निर्वाचित हुए। श्री सिन्‍हा को वर्ष 1972 में असम का अंतरिम मुख्‍य मंत्री बनाया गया तथा आम चुनावों के पश्‍चात भी आप इस पद पर बने रहे। आपने 30 नवम्‍बर, 1972 से 112 मार्च, 1978 तक राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के पद के दायित्‍वों का निर्वहन किया। इस अवधि में आपने पिछड़े वर्ग के लोगों के कल्‍याण हेतु कई योजनाएं लागू कीं। आपके शासन के दौरान असम की राजधानी शिलांग से गुवाहाटी बनाई गई।

      विधि स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त करने के पश्‍चात आपने कुछ समय वकालत की। आप धुबरी में अध्‍यापक और असम के कई जिलों के विद्यालयों में प्रधानाध्‍यापक रहे। श्री सिन्‍हा ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत वर्ष 1946 में की और कांग्रेस के महा सचिव, उपाध्‍यक्ष तथा अध्‍यक्ष आदि पदों पर रहे। अनुशासित एवं कुशल प्रशासक रहे श्री सिन्‍हा आजीवन समाज सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहे।

      श्री शरत चन्‍द्र सिन्‍हा का दिनांक 25 दिसम्‍बर, 2005 को निधन हो गया।

      नागालैण्‍ड के पूर्व मुख्‍यमंत्री श्री जॉन बास्‍को जसोकी का जन्‍म  1927 में हुआ। आपने सैंट एडमंड कॉलेज तथा एन्‍थोनी कॉलेज में अध्‍ययन कर बी.एससी. की उपाधि प्राप्‍त की।

      श्री जसोकी वर्ष 1964 में हुए प्रथम आम चुनावों में नागालैण्‍ड विधान सभा के लिए कोहिमा टाउन निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। आप वर्ष 1964 से 1969 तक राज्‍य सरकार में मंत्री रहे। दूसरी विधान सभा में आप पुन: इसी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए तथा शिक्षा एवं वन विभाग के मंत्री बनाये गये । वर्ष 1974 में तीसरी बार निर्वाचित होने पर आप विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता बनाये गये। तीसरी विधान सभा के कार्यकाल के दौरान 10 मार्च,1975 को आपको राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया। आप 22 मार्च,1975 तक इस पद पर आसीन रहे। दिनांक 5 जून, 1980 से 18 नवम्‍बर, 1982 तक आप दूसरी बार नागालैण्‍ड के मुख्‍यमंत्री पद पर आसीन रहे।

      श्री जसोकी ने वर्ष 1944 में कोहिमा युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में गाइड एवं स्‍काउट के रूप में अपनी सेवाएं दीं। आप वर्ष 1953 में नागा स्‍वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। आपने नागा पीपुल्‍स कन्‍वेशन की स्‍थापना की तथा इसके महासचिव भी रहे। आपने नागालैण्‍ड राज्‍य के गठन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री जसोकी के निधन से राज्‍य में एक समर्पित नेता, योग्‍य विधायक और अनुभवी प्रशासक की कमी हो गई है।

   श्री जॉन बास्‍को जसोकी का दिनांक 19 अक्‍टूबर, 2005 को निधन हो गया।

      केन्‍द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री पी.एम.सईद का जन्‍म लक्षद्वीप के अन्‍द्रोथ द्वीप में दिनांक 10 मई, 1941 को हुआ। आपने बी.कॉम तथा एलएल बी. की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

      श्री सईद को केन्‍द्र सरकार में दिनांक 22 मई, 2004 को ऊर्जा मंत्री बनाया गया। आप 10 अगस्‍त,2004 को दिल्‍ली से राज्‍य सभा के लिए सांसद निर्वाचित हुए। इससे पूर्व आप चौथी से तेरहवीं लोक सभा तक लगातार 10 बार लक्षद्वीप निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रहे। सदन के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों का दीर्घ अनुभव रखने वाले श्री सईद बारहवीं तथा तेरहवीं लोकसभा में उपाध्‍यक्ष के पद पर आसीन रहे। पूर्व लोक सभा अध्‍यक्ष श्री जी.एम.बालयोगी का असामयिक निधन होने पर आपने नये अध्‍यक्ष के निर्वाचन तक लोक सभा अध्‍यक्ष के दायित्‍वों का भी निर्वहन किया। आप 1991-92 तथा 1996-97 में लोक सभा की सभापति तालिका के सदस्‍य भी रहे। श्री सईद 1979-80 में केन्‍द्र सरकार में इस्‍पात, कोयला तथा खान मंत्रालय, वर्ष 1993-95 में गृह मंत्रालय तथा 1995-96 में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्‍य मंत्री रहे। अपने दीर्घ संसदीय कार्यकाल में आप अनेक संसदीय तथा परामर्शदात्री समितियों के सभापति और सदस्‍य रहे। अधिवक्‍ता, सामाजिक कार्यकर्ता व राजनेता रहे श्री सईद 1967 में चौथी लोक सभा में निर्वाचन के समय सदन में सबसे युवा सदस्‍य थे।

      लक्षद्वीप के विभिन्‍न सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक क्रियाकलापों से सम्‍बद्ध रहे श्री सईद अन्‍तरराज्‍यीय सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्‍न स्‍थानों में लक्षद्वीप महोत्‍सव का आयोजन कराने तथा लोक कलाओं को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे।

 

 

 

 

Vns/usc/3e/1340/28.2.2006

 

 

      आप वर्ष 1968-69 में केन्‍द्रीय हज समिति और 1970-71 में केन्‍द्रीय हज सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य भी रहे। आप अल्‍पसंख्‍यक तथा पिछड़े वर्ग के व्‍यक्तियों के उत्‍थान के‍लिये प्रयत्‍नशील रहे।     अनेक देशों की यात्रा करने वाले श्री सईद वर्ष 1969 तथा 1982 में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के चौबीसवें तथा छत्‍तीसवें सत्र में भारतीय शिष्‍टमंडल के सदस्‍य रहे। आपने अनेक अन्‍तरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया।   सौम्‍य एवं सरल व्‍यक्तित्‍व के धनी श्री सईद को आठ भाषाओं का ज्ञान था। आप संसदीय परम्‍पराओं को सूदृढ़ बनाने हेतु निरन्‍तर प्रयत्‍नशील रहे।     श्री पी.एम.सईद का दिनांक 18 दिसम्‍बर, 2005 को सियोल (दक्षिण कोरिया) में निधन हो गया।

      पूर्व केन्‍द्रीय तथा वित्‍त मंत्री तथा प्रख्‍यात समाजवादी नेता प्रोफेसर मधु दण्‍डवते का जन्‍म दिनांक 21 जनवरी, 1924 को महाराष्‍ट्र के अहमदनगर में हुआ। आपने महाराष्‍ट्र के रायल इंस्‍टीट्यूट आफ साइंस से विज्ञान में स्‍नातकोत्‍तर की उपाधि प्राप्‍त की।

      वयोवृद्ध समाजवादी नेता श्री दण्‍डवते पाँचवीं से नौवीं लोक सभा तक लगातार राजापुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। इससे पूर्व वर्ष 1970-71  में आप महाराष्‍ट्र विधान परिषद् के सदस्‍य रहे। आप संसद की कार्य मंत्रणा समिति तथा प्राक्‍कलन समिति के सदस्‍य रहे। श्री दण्‍डवते केन्‍द्र सरकार में मार्च, 1977 से जुलाई, 1979 तक रेल मंत्री तथा 5 दिसम्‍बर, 1989 से 20 नवम्‍बर, 1990 तक वित्‍त मंत्री रहे। आप योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष भी रहे।    श्री दण्‍डवते अनुभवी प्रशासक व ईमानदार छवि वाले समाजवादी नेता थे। आपने भारत छोड़ो आन्‍दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आपने वर्ष 1955 में गोआ में पुर्तगाली साम्राज्‍यवाद के विरूद्ध सत्‍याग्रह का नेतृत्‍व किया। श्री दण्‍डवते ने संयुक्‍त महाराष्‍ट्र आन्‍दोलन में भी भाग लिया। आपातकाल के दौरान आप नजरबन्‍द रहे। श्री दण्‍डवते अध्‍ययन पूर्ण होने के पश्‍चात् सिद्धार्थ कालेज, बम्‍बई में प्रोफेसर रहे। बाद में आप कालेज के वाइस प्रिंसीपल भी बनाये गये।

      गांधीवादी सिद्धान्‍तों के समर्थक श्री दण्‍डवते की थ्री डिकेड्स आफ इंडियन कम्‍यूनिज्‍म, मार्क्‍स एण्‍ड गांधी, गांधीजीस इम्‍पैक्‍ट आन सोशलिस्‍ट थिंकिंग, यूसुफ मेहरअली- ए क्‍वेस्‍ट फार न्‍यू होरीजन तथा जय प्रकाश नारायण- दी मैन एण्‍ड हिज आइडिया आदि अनेक पुस्‍तकें प्रकाशित हुईं

      प्रोफेसर मधु दण्‍डवते का दिनांक 12 नवम्‍बर, 2005 को निधन हो गया।

      कुवैत के अमीर शेख जबेर अल अहमद अल-जबेर अल-सबाह का जन्‍म 29 जून, 1926 को हुआ। आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अल-मुबारकिया विद्यालय में प्राप्‍त की।

      शेख अल-जबेर दिनांक 31 दिसम्‍बर, 1977 से 15 जनवरी, 2006 तक कुवैत के अमीर पद पर आसीन रहे। आपको वर्ष 1962 में कुवैत का प्रथम वित्‍त एवं आर्थिक मंत्री बनाया गया। वर्ष 1965 में आपको कुवैत का प्रधान मंत्री नियुक्‍त किया गया जिसे वर्ष 1966 में क्राउन प्रिंस के नाम से जाना गया। वर्ष 1991 में हुए खाड़ी युद्ध के पश्‍चात् आपने 1981 में भंग की गयी नेशनल असेम्‍बली को पुनर्स्‍थापित किया। कुवैत के विकास और समृद्धि में आपका महत्‍वपूर्ण योगदान रहा। आपने महिलाओं के उत्‍थान की दिशा में विशेष प्रयास करते हुए महिलाओं को वोट देने व चुनाव लड़ने का अधिकार देने सम्‍बन्‍धी कानून पारित करवाया

      शेख जबेर अल-अहमद अल-जबेर अल-सबाह का दिनांक 15 जनवरी, 2006 को निधन हो गया।

      पूर्व विधायक श्री उदयराम धाकड़ का जन्‍म वर्ष 1938 में चित्‍तौड़गढ़ जिले के उम्‍मेदपुरा ग्राम में हुआ।  आपने उम्‍मेदपुरा में ही स्‍वयंपाठी छात्र के रूप में शिक्षा प्राप्‍त की।   श्री धाकड़ सातवीं तथा आठवीं राजस्‍थान विधान सभा में बड़ी सादड़ी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्राक्‍कलन समिति, याचिका समिति तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, सामान्‍य प्रशासन, राजनैतिक, मंत्रिमंडल सचिवालय, गृह, उद्योग, राजकीय उपक्रम, आर्थिक एवं सांख्यिकी, आयोजना, भ्रष्‍टाचार निरोधक, स्‍टेट मोटर गैराज, भाषायी अल्‍पसंख्‍यक विभागों की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्‍य रहे।

      अपने सार्वजनिक जीवन में आप ग्राम पंचायत, खारदेवाला के सरपंच तथा पंचायत समिति के उप प्रधान रहे।     

      श्री उदयराम धाकड़ का दिनांक 27 नवम्‍बर, 2005 को निधन हो गया।

      पूर्व विधायक श्री मोहन लाल छंगाणी का जन्‍म 4 अप्रैल, 1926 को जोधपुर जिले के फलौदी कस्‍बे में हुआ। आपने बी.ए., एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

      श्री मोहन लाल छंगाणी पांचवीं तथा आठवीं राजस्‍थान विधान सभा में फलौदी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। आप पांचवीं विधान सभा में कांग्रेस तथा आठवीं विधान सभा में निर्दलीय विधायक रहे। आपने वर्ष 1973 से 1977 तक राजस्‍थान सरकार के मंत्री के रूप में आयुर्वेद, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य, यातायात, समाज कल्‍याण, कृषि, पशुपालन तथा शिक्षा सहित अनेक विभागों के दायित्‍वों का निर्वहन किया। आठवीं विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप विशेषाधिकार समिति तथा पुस्‍तकालय समिति के सभापति भी रहे।

   अध्‍ययन में विशेष रुचि रखने वाले श्री छंगाणी गरीबों के उत्‍थान के लिये सदैव प्रयत्‍नशील रहे।

     श्री मोहन लाल छंगाणी का दिनांक 10 नवम्‍बर, 2005 को निधन हो गया।

      पूर्व विधायक श्री दामोदर दास आचार्य का जन्‍म 9 अगस्‍त, 1923 को छत्‍तीसगढ़ के छुईकादान ग्राम में हुआ। आपने एस.डी.कालेज, कानपुर से एम.ए. (प्रीवियस) तथा एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

      श्री दामोदर दास आचार्य आठवीं राजस्‍थान विधान सभा में नागौर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस (आई) के विधायक निर्वाचित हुए। आप वर्ष 1986 से 1988 तक राजस्‍थान सरकार में निर्वाचन, खादी एवं ग्रामोद्योग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, देवस्‍थान और शिक्षा विभाग के राज्‍य मंत्री तथा वर्ष 1989 से 1990 तक शिक्षा, विधि एवं न्‍याय, संसदीय कार्य तथा वक्‍फ सहित अनेक विभागों के केबिनेट मंत्री रहे। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप विशेषाधिकार समिति के सदस्‍य भी रहे। पूर्व विधायक श्री रामलाल गुंजल का जन्‍म टोंक जिले के ग्राम लांक में हुआ। आपने मिडिल तक शिक्षा प्राप्‍त की।

      श्री गुंजल सातवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिये उनियारा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस(आई) के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप सरकारी आश्‍वासनों सम्‍बन्‍धी समिति तथा पंचायती राज एवं सामुदायिक विकास, भू-जल, अन्‍त्‍योदय, सैनिक कल्‍याण, राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम आदि विभागों की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्‍य रहे।

        श्री गुंजल वर्ष 1965 में ग्राम पंचायत, डोडवाड़ी के सरपंच, वर्ष 1970 में ग्राम सेवा सहकारी समिति, डोडवाड़ी के मंत्री तथा पंचायत समिति, टोंक की कृषि स्‍थायी समिति के अध्‍यक्ष रहे। आप कोआपरेटिव बैंक, टोंक के संचालक भी रहे। पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्‍थान के लिये प्रयत्‍नशील रहे श्री गुंजल ने अपने क्षेत्र में  अस्‍पृश्‍यता निवारण कार्यक्रम, हरिजनों को भूमि एवं आवासीय भूखण्‍ड आवंटन में उल्‍लेखनीय भूमिका निभाई। आपने बीस सूत्री कार्यक्रम के क्रियान्‍वयन में भी महत्‍वपूर्ण योगदान दिया।

    श्री रामलाल गुंजल का दिनांक 8 जनवरी, 2006 को निधन हो गया।

 

jyg/usc/28.02.2006/1350/3f

 

        पूर्व विधायक श्री मनोहर कोठारी का जन्‍म 6 अप्रैल, 1924 को राजसमंद ज़िले के नाथद्वारा कस्‍बे में हुआ। आपने एम.ए., एलएल.बी तथा साहित्‍य रत्‍न की उपाधि प्राप्‍त की।    श्री कोठारी दूसरी तथा पांचवीं राजस्‍थान विधान सभा में कांग्रेस के विधायक रहे। आपने दूसरी राजस्‍थान विधान सभा में कुम्‍भलगढ़ तथा पांचवीं विधान सभा में नाथद्वारा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप गृह समिति के सदस्‍य रहे। आप वर्ष 1959 में सभापति तालिका के सदस्‍य भी रहे।  आप वर्ष 1954 से 1957 तक नाथद्वारा नगरपालिका के सदस्‍य रहे। श्री कोठारी अपने सार्वजनिक जीवन में राजसमंद जिला कांग्रेस कमेटी के मंत्री, मेवाड़ विद्यार्थी संघ एवं राजस्‍थान विद्यार्थी कांग्रेस के अध्‍यक्ष, राजस्‍थान प्रदेश युवक कांग्रेस के संयोजक तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी कांग्रेस की कार्यसमिति के सदस्‍य रहे। आप साहित्‍य मण्‍डल, नाथद्वारा तथा राजस्‍थान प्रदेश अणुव्रत समिति के अध्‍यक्ष भी रहे। साहित्‍य सृजन में विशेष रुचि रखने वाले श्री कोठारी की 'शब्‍द वैध', 'व्‍योम स्‍पर्श' तथा 'श्री नाथद्वारा' कृतियां प्रकाशित हुई हैं। आपने गोस्‍वामी तुलसीदास नामक खण्‍ड-काव्‍य की रचना भी की।

       श्री मनोहर कोठारी का दिनांक 23 अक्‍टूबर, 2005 को निधन हो गया।

       उत्‍तरी भारत तथा पाकिस्‍तान में दिनांक 8 अक्‍टूबर, 2005 को रिक्‍टर स्‍केल पर 7.4 की तीव्रता से भूकम्‍प आया। इस प्राकृतिक आपदा में भारत का जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य सर्वाधिक प्रभावित हुआ। इस हृदय विदारक प्राकृतिक प्रकोप से जहां बहुत से व्‍यक्ति मारे गए वहीं बड़ी संख्‍या में लोग घायल हुए। भूकम्‍प के कारण मकानों को हुई गम्‍भीर क्षति से हजारों लोग बेघर हो गए। पाकिस्‍तान में भी इस भूकम्‍प से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।    मैं अपनी ओर से तथा इस सदन में सभी माननीय सदस्‍यों की ओर से भूकम्‍प में मारे गए व्‍यक्तियों की मृत्‍यु पर शोक प्रकट करते हुए पीडि़त परिवारों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करती हूं और जिन माननीय सदस्‍यों और केन्‍द्रीय सरकार के मंत्रियों का मैंने जिक्र किया उन दिवंगत व्‍यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। मैं ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत व्‍यक्तियों की आत्‍मा को शान्ति प्रदान करे तथा उनके शोक संतप्‍त परिजनों को उनका बिछोह सहन करने की शक्ति दे।

       माननीय सदस्‍यगण कृपया दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों की आत्‍मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करें।

                                                                                                                                                                                           (तदनन्‍तर सदन ने दो मिनट मौन खड़े होकर दिवंगत आत्‍माओं की शान्ति के लिए प्रार्थना की।)

 

श्री अध्‍यक्ष: शान्ति ! शान्ति !  शान्ति !

         सदन की बैठक बुधवार, दिनांक 01 मार्च, 2006 के प्रात: 11 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक बुधवार, 01 मार्च, 2006 के  11 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)